Prabhu Shree
0:19
यानी आप अपने मैं को जो देह मान रहे हो, जीव मान रहे हो
0:29
और जीव मान रहे हो।
0:35
बेसिक प्रॉब्लम यही है। और आपका मैं भगवान है।
0:44
उसको भगवान जान नहीं रहे हो। उसको जीव मान रहे हो।
1:07
मेन बेसिक प्रॉब्लम यही है। अपने मैं में भगवान का निश्चय जब तक नहीं
1:15
होगा। तब तक भटकते रहोगे। खुद को जीव मानकर, देह मानकर, स्त्री
1:23
पुरुष मानकर कुछ ना कुछ मानकर भटकते
1:32
रहोगे। जब तक अपने मैं को भगवान नहीं जानोगे।
1:53
और आपका मैं स्वयं नारायण है, शिव है, स्वयं परमात्मा
2:01
है। जिसको आप सहज में मैं कहते हो या मैं हूं कहते हो,
2:12
वह मैं ही भगवान है। बाकी सब आपकी कल्पना का भगवान है।
2:19
वह मैं ही अस्तित्व है।
2:30
बस में
2:57
तो मैं जब तक देह लगता हूं, मन लगता हूं,
3:00
जीव लगता हूं तो समझ जाना आप भटक रहे।
3:09
मैं जब नारायण लगने लगे, राम लगने लगे अस्तित्व लगने लगे
3:18
तब तब आप सही जगह आ गए
3:41
तो मैं के प्रति ब्रह्म का परमात्मा का विचार करना। उससे बेहतर है स्वयं में परमात्मा का भाव
3:51
करना और सब में परमात्मा का भाव करना। उससे भी
3:57
बेहतर है। स्वयं को परमात्मा जान लेना। एक बार जान लिए तो भाव करने की भी आवश्यकता
4:05
नहीं है। सत्य का परिचय तो अपने मैं को परमात्मा कैसे जानोगे?
4:16
सवाल तो यही है ना? अपने मैं में परमात्मा का निश्चय कैसे हो?
4:24
कैसे हो? बताओ भाई।
4:37
वो ठीक है आपकी तरफ से है ना वो वो सही है आपकी तरफ से हम एग्री हैं हम अब आपको किसी
4:45
को समझाना है किसी को लखाना है तो आप कैसे कहेंगे
4:54
बात तो वही है ना
5:02
तो अपने मैं को मैं को
5:12
कुछ भी ना मानना ही मैं को भगवान जानना है।
5:23
मैं को देह, मन, बुद्धि, जीव, इवन भगवान ये कुछ भी मत मानो।
5:31
अपने आप को कुछ मानो ही मत। यही अपने आप को भगवान जानना है।
5:48
मैं को कुछ भी ना मानना ही
5:55
मैं को भगवान जानना है।
6:04
तो कुछ नहीं मानेंगे तो भगवान जान लेंगे क्या? यह जीव बोलता है।
6:10
अरे कुछ मत मानो। देखो तो मैं को कुछ मानो ही मत।
6:23
कुछ भी मत मानो। ना देह, ना मन, ना बुद्धि, ना जीव।
6:29
इवन ना भगवान भगवान भी मत मानो मानना नहीं है
6:47
मैं को कुछ भी ना मानना ही
6:56
मैं को भगवान जानना है।
7:03
आपने पहले से ही खुद को जीव मान लिया। अब वहां से सोच रहे हो आप। यह जो मैं बता रहा
7:11
हूं वह भी जीव का चश्मा लगा के सोच रहे हो आप। मनुष्य का चश्मा लगा के सोच रहे हो आप।
7:22
मत मानो जीव मनुष्य खुद को।
7:27
मैं को कुछ मानो ही मत बस
7:37
ना सीमित ना असीम ना देह ना आत्मा
7:49
कुछ भी मत मानो
8:14
सारे मान्यताओं के चश्मे हटा दो।
8:42
तो मैं को कुछ भी ना मानना ही
8:49
मैं को भगवान जानना है।
9:33
अपने आप को आपने कुछ भी माना उसी क्षण आप माया में आ गए। मानना ही माया है।
9:43
मानना ही मन है और मानना ही माया है। अपने आप को आपने कुछ भी माना
9:50
उसी क्षण आप माया में आ गए। आप ही माया बन गए।
10:02
और मैं को आपने कुछ माना ही नहीं। कुछ भी नहीं माना।
10:08
कि मैं अपने आप को कुछ मानता ही नहीं।
10:16
तो अपने में आ गया ना भगवान में। मैं आत्मा भगवान में
10:32
मानना दूर हो जाना है। कुछ भी ना मानना अपने में आ जाना।
10:56
तो मैं को व्यक्तित्व मानते हो इसलिए अस्तित्व खोजते हो।
11:02
अब वह मान्यता रूपी व्यक्तित्व मान्यता रूपी अस्तित्व को खोज रहा है।
11:10
वह फॉल्स एक्सिस्टेंस है। मैं को जीव मानते हो
11:17
तो जीव परमात्मा को खोज रहा है। माना हुआ जीव का परमात्मा भी माना हुआ है। समझ रहे हो? कहां भटकते हो?
11:34
एक तो अपने आप को आपने जीव माना। अब वह माना हुआ जीव माने हुए परमात्मा को खोज
11:42
रहा है। अब आप बहुत दूर निकल गए
11:50
और आपको लगता है आप सही जा रहे हो। भटक रहे हो आप। परमात्मा के नाम से भी भटक
11:59
रहे हो। माया में ही वह खोज तलाश सब चल रहा है।
12:23
तो मैं को कुछ भी मत मानो। बस
12:31
बस मैं हूं। क्यों मानना खुद को?
12:58
तो भैया ना चाहते हुए भी तो हम खुद को कुछ मान लेते हैं।
13:04
आपका यह सवाल आएगा। यह जीव का सवाल है। मैं का नहीं है।
13:16
आपको नहीं मानना है तो आप नहीं मानते हो। वहां कोई बड़ी बात नहीं है। नहीं मानना आपके लिए।
13:24
हां। तो अपने आप को कुछ भी मत मानो बस।
13:35
ना व्यक्तित्व ना जीव ना देह।
13:42
और मानोगे नहीं तो तलाश ही खत्म हो जाएगी।
14:24
तो अपने आप को कुछ भी ना मानना। ना अपने आप को भगवान जान लेना है।
14:34
बस
14:44
मैं आत्मा भगवान
15:35
अब और एक स्टेप ऊपर चलो।
16:00
जहां मैं को भगवान जानना भी एक खता है। क्या है?
16:07
खता है। यानी मैं को भगवान जानना
16:14
यानी आपने मैं पर कहीं ना कहीं शक किया बारीक सा
16:22
माइनर स्वयं पे संदेह
16:34
नहीं स जाएगा
16:59
स्वयं को भगवान भगवान क्या जानना है वह तो है ही ना हां
17:06
मैं तो हूं ही ना।
17:32
भगवान से आप पूछो कौन
17:39
नौक किए कौन वो भी तो यही बोलेगा ना मैं हूं
17:46
वो थोड़ी ना ये कहेंगे कहेंगे कि मैं भगवान हूं। वो क्या कहेंगे?
17:53
अरे मैं हूं। बस वो मैं हूं। आप भी तो मैं हूं ही कह रहे हो।
18:36
तो मैं ही भगवान है। जब तो मैं की मर्जी से सब चल रहा है क्या?
18:58
मैं को भगवान जान लेने पर यह प्रश्न उठता ही नहीं
19:06
क्योंकि मैं की मर्जी से ही सब कुछ चल रहा है।
19:13
यह जीव के प्रश्न है सारे
19:24
और अंततः मैं को अपने आप को भगवान जानने की जरूरत नहीं है।
19:34
वह आप हो और मैं अपने आप को कुछ भी मान लूं तब भी
19:40
मेरा भगवान देश से पतन नहीं हो जाता।
19:47
यह मैं की सामर्थ्य है। अपने आप को कुछ भी मान लेने पर मैं कुछ और
19:55
नहीं हो जाता।
20:06
मान लेने पर भी शुरू में ठीक है मानो मत बट अब
20:15
मान लेने पर भी अरे भाई
20:26
इसको डंडा मान लेने पर लकड़ी का डंडा हो जाता है।
20:32
तब भी यह लकड़ी रहता है ना बस वैसे ही है। मैं को देह जीव मन कुछ भी
20:40
मान लो मैं मैं ही रहेगा। भगवान ही रहेगा। वो बनता बिगड़ता नहीं है।
20:48
मान लेने से जो बिगड़ जाए वह भगवान नहीं। अब क्या?
20:57
अब शुरू में हटाया गया सारी मान्यताओं को
21:06
बट अब उसकी भी जरूरत नहीं है। अपने आप को मैं कुछ भी मान लूं और मेरा
21:17
पतन हो जाए वहां से तो फिर मैं मैं नहीं मैं भगवान नहीं।
21:35
तो मैं अपने आप को कुछ मानू या ना मानू यह मेरी मौज है।
21:48
लीला करना होता है तो मान लेता हूं। नहीं करना होता है तो कुछ नहीं मानता हूं।
22:03
और मुझे अपने आप को भगवान जानना नहीं है।
22:17
मुझे अपने आप में संदेह है ही नहीं। स्वयं पर कैसा संदेह?
22:37
तो अपने आप को भगवान जान लेने पर मैं कुछ बढ़ नहीं जाता हूं
22:45
और मानने पर कुछ घट नहीं जाता हूं।
23:02
जानने और मानने से मैं लीला करता रहता हूं।
23:19
और मुझे यह किसी को समझाना नहीं है। किसी स्मिता जी को, किसी सौरभ जी को मुझे
23:29
यह समझाना नहीं है।
23:43
और जिसे समझाना है वह पहले से समझता है। वो मैं ही हूं जो उधर से सुन रहा हूं।
23:54
उसको समझाना नहीं है।
24:15
तो लोग हंसी मजाक करते हैं। अरे मैं ही भगवान हूं रे ऐसा करके।
24:21
उनको पता नहीं है कि वही भगवान है।
25:05
यही आत्मनिष्ठा है स्वयं में कि आपका मैं ही भगवान है।
25:16
उससे कम ना कभी सोचना ना जानना ना समझना।
25:23
आपका स्वयं ही नारायण है। नारायणी है।
25:29
स्वयंभू है।
25:38
यह चालू करो।
25:53
आपका स्वयं इट मींस आप
26:07
अरे आप ही भगवान हो तो फिर क्या खोजोगे? क्या समझोगे? क्या जानोगे?
26:14
क्या देखोगे और कौन सी साधना करोगे?
26:22
जब आप ही भगवान हो पर ब्रह्म हो
26:30
तो कुछ नहीं करोगे आप।
26:37
और कर रहे हो तब तक समझ जाना जीव हो। हां
26:45
आत्मनस्टिक कुछ करता ही नहीं। वो अपने प्रति भगवान का भाव भी नहीं करता।
26:55
विचार भी नहीं करता कि मैं परमात्मा हूं। अहम हरी अहम हरी नहीं करता। वो
27:04
जान लिया ना अब करना वरना सब गया।
28:05
एक बात बताना भगवान को कौन जान सकता है?
28:12
बताओ भगवान ही जान सकता है। कोई भी जान लेगा।
28:22
तो आप जब किसी अदर भगवान को भी जानोगे तो आप भगवान हो तभी तो जानोगे
28:33
या खुद को भगवान जानोगे। आप भगवान हो तभी तो जानोगे। जो भगवान को जान जाए वह तो आप
28:40
पहले से भगवान है। भगवान को कोई भी जान लेगा क्या? मन,
28:52
बुद्धि या कोई भी जिसकी कैपेसिटी है
29:00
भगवान को जानने की वही भगवान को जान सकता है ना।
29:10
तो आप भगवान को नहीं जानता हूं। यह जान के
29:17
कहते हो नहीं जानता हूं। कि नहीं जान के कहते हो नहीं जानता हूं।
29:27
भगवान को जान के ही आप कह सकते हो कि मैं भगवान को नहीं जानता।
29:38
बताओ। हां।
29:50
यानी आपको भगवान का परिचय है। तभी कहते हो यह भगवान नहीं है। वो भगवान नहीं है। वो भगवान नहीं है। वो भगवान नहीं है। वो
29:58
भगवान नहीं है। तभी तो कह पाओगे ना। नहीं यार यह भगवान
30:05
नहीं यह दुनिया है। यह भगवान नहीं यह बॉडी है। यह भगवान नहीं है। यह माइंड है।
30:14
यानी आप भगवान को जान के तो बोल रहे हो कि यह भगवान नहीं है।
30:25
मैं भगवान को नहीं जानता।
30:32
यह भी आप जान के कह रहे हो मैं भगवान को
30:41
नहीं जानता तो ये पार्ट को अलग करो मैं भगवान को एक पार्ट कर दो नहीं जानता को दूसरा पार्ट
30:50
करो अब आप क्या कहते हो मैं भगवान को तुरंत
30:59
आपने भगवान का अनुभव किया। आपकी बुद्धि ने बोला नहीं जानता हूं।
31:06
मन ने कहा नहीं जानता हूं। सेकंड लाइन जो है
31:16
शुरू में आपने क्या कहा? मैं भगवान को आपने तुरंत अनुभव कर लिया ना भगवान का।
31:24
अब जानना नहीं जानना तो एक अदर मैटर है।
31:34
अब आप बोलते हो अस्तित्व में आप अस्तित्व में समा गए पहले ही बाद में
31:43
बोलते हो समाना है। अस्तित्व में का पार्ट अलग करो। अस्तित्व
31:50
में समाना है। यह पार्ट अलग करो। जैसे ही आप बोले अस्तित्व में
32:00
समा गए आप उसी समय अब समाना है आपका जीव बोल रहा है बचने के लिए
32:08
मन बुद्धि बोल रहा है आपको सबका परिचय है भगवान अस्तित्व सब इवन
32:18
अनुभव है परिचय भी नहीं अनुभव है
32:26
मुझे अस्तित्व का अनुभव नहीं है। यह वही कह सकता है जिसे अस्तित्व का अनुभव हो।
32:37
मुझे अस्तित्व का यह आपने तुरंत अनुभव कर लिया। अब सेकंड
32:44
आपकी बुद्धि बोल रही है। अनुभव नहीं है।
33:00
मुझे परमात्मा का अब आप आ गए परमात्मा में इसी समय अब
33:08
खोपड़ी लगा है अनुभव नहीं है
33:18
तो किस चीज किसका अनुभव नहीं है मेरे को बताओ ना
33:51
हां जी बताओ
34:09
आप बोलते हो मेरे को जिंदगी में इस अनुभव से गुजरना है उससे गुजरना है उससे अरे सब
34:15
अनुभव है आपको कई जन्म में ये कर चुके हो तो आपका मन बुद्धि खेल रहा है
34:24
अनुभव से गुजरेंगे तो जागेंगे ये सब नाटक है आपका।
35:35
आज एक मित्र इंटरव्यू ले रहे थे तो वह
35:41
गौतम बुद्धा को यह अनुभव हुआ और ओशो को यह अनुभव हुआ। ऐसा उनका चल रहा
35:49
था। बुद्धत्व का अनुभव हुआ। तो भैया
35:57
आपको यह अनुभव हो गया कि इनको यह अनुभव हुआ है।
36:04
हां। तो आपको कैसे हो गया भैया यह अनुभव कि इनको बुद्धत्व का अनुभव हुआ है। यानी
36:13
उनके बुद्धत्व का अनुभव आपको है तो आप कम बड़े बुद्ध हो।
36:22
बताओ
36:33
बहुत गहरे में आपको परमात्मा, बुद्धत्व, अस्तित्व सब का
36:39
अनुभव है ही।
36:51
तो हम बुद्धत्व का अनुभव नहीं कराते। भैया। आपको बुद्धत्व का अनुभव है ही। इसका अनुभव
37:00
कराते हैं। आप भगवत स्वरूप हो ही इसका अनुभव कराते।
37:10
हम भगवान नहीं दिलाते।
37:20
आपके अंदर एक चीज डाल दी गई है बेरहमी से कि आपको
37:27
इनका अनुभव नहीं है। आपको इनका पता नहीं है। आप नहीं जानते हो।
37:38
जैसे आप बोलो ना इसको यार। यह लकड़ी को मैं नहीं जानता। बोलो।
37:46
बोलो ना सब अब बताओ
37:54
जान के ही बोले ना बस ऐसा ही है परमात्मा को मैं नहीं जानता बुद्धत्व को मैं नहीं
38:03
जानता सब जान के बोल रहे हो आप
38:13
इतना सरल बता रहा हूं।
38:49
तो मैं जानता ही हूं। बस इसी को नहीं जानता था कि मैं
38:55
जानता ही हूं। मैं जानता ही हूं। अब इसको भी जानता ही
39:02
हूं। इतनी सी बात है।
39:11
बाकी जो भी जिंदगी में करते हो योगा ये वो वो सब फिजिकल हेल्थ, मेंटल हेल्थ तक के
39:18
लिए ठीक है। यह स्ट्रेट है। आत्मा यानी आत्मा
39:39
अब आप ये आकाश को मैं नहीं जानता। बोलो भला जानते हो ना?
39:49
अब आप कहां फंसते हो? मैं बताऊं कैसे फंसते हो? अब रहस्य को मैं नहीं जानता।
39:56
इसमें फंसते हो आप। इस रहस्य को मैं इसको भी आप जान रहे हो ना कि यह रहस्य है।
40:11
यह रहस्य के रूप में है। यह जान रहे हो ना? मन बुद्धि आपकी आखिरी में लगा रही है कि नहीं जान रहा है।
40:29
परमात्मा को नहीं जानता आत्मा को नहीं जानता। अरे जान के ही कह सकते हो नहीं जानता। वरना कैसे कहोगे?
40:56
हां जी
41:11
आपके सामने तो हो जाता है घर जाते हैं तो बिगड़ जाता है। तो घर जाते हैं क्या बिगड़ जाता है?
41:21
घर जाते हो तो क्या बिगड़ जाता है?
41:26
जो बिगड़ जाता है उसका अनुभव है ना। जो आप बोलते हो घर जाते हैं तो वह बिगड़
41:36
जाता है। तो वह तो वहां है ही ना भैया जिसको कह रहे हो आप बिगड़ जाता है।
41:44
आपको रोना गाना रहता है करके सब बोलते रहते हो
41:51
ऐसे कैसे बिगड़ जाएगा
42:05
जो बिगड़ता ही नहीं वही आपका स्वरूप है ना बनता
42:13
ना बिगड़ता ना मेरे सत्संग से वह बन गया है ना दुनिया से वह बिगड़ जाएगा
42:21
वही आपका स्वरूप है। वो साधना के अनुभव बनते बिगड़ते हैं भैया। है ना?
42:37
नहीं जानने को भी जो जानता है।
42:43
नहीं जानने को भी जो जानता है वह क्या नहीं जानता है?
42:52
बताओ। अरे सुनते हो तो नाचते क्यों नहीं हो?
43:03
नहीं जानने को भी जो जानता है वो क्या नहीं जानता है।
43:18
कुछ भी अनुभव नहीं हो रहा है जिसको इसका भी अनुभव है।
43:26
कुछ भी अनुभव नहीं हो रहा है जिसको इसका भी अनुभव है। उसको क्या अनुभव नहीं है?
43:38
किसका अनुभव नहीं है?
43:49
जाओ भैया अपने अपने घर। ठीक है। मतलब समझ रहे हो?
43:59
कुछ भी अनुभव नहीं हो रहा है। आप कहते हो ना कभी-कभी आपको उसका भी अनुभव है
44:07
कि कुछ भी अनुभव नहीं हो रहा है उसका भी जिसको अनुभव है। उसको किसका अनुभव नहीं
44:17
है। कुछ भी ना जानने को भी जो जानता है वो
44:28
क्या नहीं जानता है वो शख्सियत हो आप सहज
44:54
अरे लापता का भी जिसको पता है उसको क्या पता नहीं है।
45:01
पता का तो पता है ही आपको। ठीक। लापता का भी जिसको पता है
45:11
उसको क्या पता नहीं होगा यार आप पहले से ही बोल देते हो मेरे को कुछ पता नहीं है
45:20
कुछ पता नहीं है का भी पता है जिसको उसको क्या पता नहीं
45:31
जैसे ही मैंने लापता बोला लापता इतना विराट है विराट से भी विराट
45:37
है ना लापता मींस जैसे यह पूरी गैलेक्सी है ऐसी खरबों गैलेक्सियां है
45:47
और उसका भी मल्टीप्लाई कर दो उससे भी विराट लापता है
45:55
लापता बोलते ही आपने आपको लापता का पता चल गया तो आपको क्या पता नहीं है यार
46:05
तो जिंदगी में कभी ज्ञान की भीख मत मांगना और प्रेम की भीख मत मांगना। आप स्वयं ज्ञान स्वरूप हो, स्वयं प्रेम
46:14
स्वरूप हो। स्वयं बुद्ध पुरुष हो। इन चीजों की भीख मत मांगना। स्वयं बोध हो
46:22
आप। स्वयं प्रेम हो।
46:52
यह बोधवान है। यह अबोधवान है। का भी जिसको बोध है,
46:58
वह तो बोधवान ही हो सकता है ना। जिसको अबोध का भी बोध है, बोध का भी बोध है,
47:07
वह कौन हो सकता है?
47:10
बोधवान ही हो सकता है ना।
47:24
और मैं कोई कॉन्फिडेंस नहीं दिला रहा हूं। ऐसा है। मैं भी क्या करूं? ऐसा है
47:41
हां जी अच्छा हो गया आ गए आप लोग ये निकल गया
47:48
हां पता नहीं कब क्या कैसा निकल जाए
48:46
तो आप यह कह सकते हो मेरी पेन खो गई, मेरी कार खो गई,
48:54
मेरी दुनिया खो गई। मैं खो गया कैसे कहोगे यार
49:03
ज्ञान खो गया कैसे कहोगे ज्ञान खो गया इसका भी ज्ञान है
49:13
कैसे कह सकते हो
49:23
तो आप लैंग्वेज में यूज करते हो भले डेली लाइफ में यार मैं उलझ गया हूं इस बात पर इस चीज पर इस जो भी समस्या आपको कभी आई हो
49:32
तो आप यह बोलते हो ना मैं मैं उलझ गया हूं यार इसमें लेकिन एक बात बताओ आपके मैं को कोई भी
49:41
उलझा सकता है क्या आज तक कोई उलझा पाया वही तो आप हो जो कभी
49:49
उलझ ही नहीं सकता एक दुनिया क्या ऐसे करोड़ों दुनिया आ जाए तो उलझ नहीं सकता
50:02
और जो उलझा है वह आप नहीं हो याद रखना
50:08
वो आप नहीं हो वो आपका माना हुआ जीव है और कुछ नहीं
50:38
तो मैं भगवान को नहीं जानता यार।
50:47
मैं भगवान को नहीं जानता
51:00
खेल ही उल्टा हो गया ना
51:12
भगवान बोलते ही आपने उसको जान लिया बाद में आपने नहीं जानता जो लगाया मन
51:19
बुद्धि के चक्कर में जीव के चक्कर में भगवान बोलते ही आपने जान
51:27
लिया मैं भगवान को बोले खत्म बात
51:35
जानता नहीं जानता तो बाद की बात है
51:43
भूलते ही जान गए आप
52:05
ये आप नौटंकी कर रहे हो मालूम प्रभु श्री मेरे को वो वो वाला अनुभव नहीं
52:14
हो रहा है वो वाला ऐसा बोलते हैं कई लोग मेरे तो कौन सा वाला भाई वह वननेस वाला
52:23
अब वननेस का अनुभव करके ही तो कोई बोलेगा ना कि अनुभव नहीं हो रहा है। उसको पता है ना वननेस का तभी तो बोल रहा
52:32
है कि नहीं पता है। वो वहां जाता ही नहीं है।
52:42
हर किसी को वन्यास का अनुभव है। फालतू की बात है यह कि नहीं है
52:50
क्योंकि जिसको वननेस का अनुभव नहीं है उसको अलग होने का अनुभव होगा कैसे
52:57
एक ही तो अलग हुआ है ना जिसको एक का अनुभव है उसी को तो अलग का
53:05
अनुभव होगा ना भाई सारे अनुभव हैं आपको आपको रोना धोना है
53:14
आपको अभी 10 गुरु चाहिए, 10 20 जन्म चाहिए। बहुत रोओगे, चीखोगे, चिल्लाओगे तब
53:21
एग्री होगे। रोगा के ऐसा आपने अपने माइंड में एक जगह
53:29
फिक्स करके रखा है। करके यह आपका टाइम पीरियड चलता जा रहा है।
53:38
लेकिन मैं उखाड़ के फेंक दूंगा। बता रहा हूं। यहां तो सुनो ही मत मेरे को दूर हो जाओ
53:46
लेते रहो जन्म मनम मैं कोई जगह खाली नहीं छोडूंगा सब उखाड़
53:52
के फेंक दूंगा
54:48
वो मित्र मेरे से पूछ रहा था इनलाइटनमेंट के बाद क्या होता है?
54:53
अरे वो बोला कुछ होता ही नहीं है यार। लोगों को क्या लगता है बम फटते हैं ये
55:02
होता है वो होता है। अरे कुछ होता ही नहीं है फिर।
55:18
तो यह सब अपनेप ढंग से सब चलता रहता है
55:28
और ये वादवाद इनलाइटनमेंट के बाद ये सब
55:33
किस्से कहानी है ना असली वस्तु आप हो
55:40
उसमें सब ऑलरेडी रेडी है। है ना? किसी भी चीज की वहां ऐड करने की किसी इनलाइटनमेंट ऐड करने की, अस्तित्व ऐड करने की,
55:50
परमात्मा ऐड करने की जरूरत है ही नहीं। वह शख्सियत आप हो
55:57
सहज में और आप वही रहोगे।
56:04
चाहे करोड़ों संसारों में चले जाओ, चाहे करोड़ों जन्म ले लो, आप वही रहोगे। इसमें
56:11
मैं कुछ नहीं कर सकता। सो सॉरी।
56:21
हां जी। तो पानी वानी तो पिलाओ यार।
56:46
हम हम हम
56:58
तो मैं तुम्हारी उम्मीद नहीं हूं। मैं तुम्हारा मैं हूं। क्या
57:05
मैं तुम्हारा मैं हूं। मैं कोई उम्मीद नहीं हूं कि यह कर दूंगा, वह कर दूंगा। वो
57:11
बच्चों के खेल हैं सब।
57:34
तो मेरे को लास्ट ईयर हमारे मित्र बोले थे यू आर माय लास्ट होप
57:45
क्या नाम है उनका दिल्ली से आते हैं योगेश जी तो मैं कोई होप नहीं हूं मैं
57:52
तुम्हारी आत्मा हूं
58:15
हम हम
58:28
और बाकी के लिए मैं माया हूं। क्या
58:34
माया हूं मैं। मत सोचना कि माया कोई और है। मैं ही माया हूं।
58:43
जो सत्य का संग नहीं करता उसके लिए मैं भयंकर माया हूं। वो बच नहीं सकता।
58:50
वो रगड़ा जाएगा। ऐसा मैं नहीं चाहता। ऐसा वो खुद चाहता है।
59:04
सत्संग से चोरी करते हैं लोग। यानी सत्संग से बचते हैं। शर्म आनी चाहिए। डूब के मर जाना चाहिए।
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कई लोग मैं देखता हूं इतने खोपड़ी वाले हैं।
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हम हम
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हम हम
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आज तो जल्दी काम हो गया।
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आराम तो इनफ फॉर टुडे
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कि फॉर एवर कि नहीं
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आप लोग बताओ आप लोग को पल्ले पड़ रहा है सब क्लियर एकदम बहुत बढ़िया
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बताओ भाई अंकल आपसे पूछ रहे हैं हम आपसे
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ओके ओके मैं एकदम क्लियर हूं ना तो मुझे अपने आप
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को बताने में कोई दिक्कत है ही नहीं।
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सत्संग की इतनी महिमा है ना
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हम हम
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तो ठीक है ब्रेक लेते हैं। ओके सभी को प्रेम प्रणाम।