Prabhu Shree
0:21
जड़ चेतन जग जीव जत सकल राम में जान मान
0:28
नहीं जान जिसको भी आप जड़ समझते हो यह पत्थर है यह
0:40
शरीर है इसको शरीर नहीं राम
0:46
जो जीवंत है जो चेतन है उसको चेतन नहीं राम
0:53
जड़ चेतन जग यानी यह जगत यह दुनिया यह दुनिया नहीं
1:01
राम जीव जो खुद को जीव समझते वह जीव नहीं राम
1:09
बस कंप्लीट है जीव को राम कर दिए ना तो वैसे ही सब राम
1:18
हो जाता है। क्योंकि जीव की दृष्टि से ही यह जड़ है। यह चेतन है। यह जगत है। है ना?
1:29
सीधा जीव को ही एनकाउंटर कर दो। राम
1:38
सब पलटी खा जाता है। सब कुछ
1:57
तो आपका होना आपका स्व राम आप राम
2:06
और यह आपकी रामायण चल रही है। जिसके राम आप ही हो।
2:17
इसमें 10 इंद्रियां यह दशरथ है।
2:22
तीन नाड़ियां दशरथ की तीन पत्नियां।
2:42
तीन नाड़ियों में एक नाड़ी कैकई कुपित हो जाती है। किसके कहने पे? मंथरा के कहने
2:50
पर। मंथरा कौन है? मन।
3:00
मन के कहने पर कैकई कुपित हो जाती है एक नाड़ी
3:09
जिससे सीता राम को वनवास हो जाता
3:17
राम को वन में जाना पड़ता है जिससे सीता भी जाती हैं फिर लक्ष्मण भी जाते हैं। सीता यानी शांति,
3:27
भक्ति और माया। तीनों का रोल सीता जी का है। शांति,
3:35
भक्ति,
3:37
माया। वो कब माया होगी, कब भक्ति होगी? कब शांति होगी? वो रोल है पूरा।
3:58
लक्ष्मण कौन है?
4:00
जिनके मन का लक्ष्य केवल राम है। वही लक्ष्मण।
4:09
उनकी धर्मपत्नी खड़ी रहती है दरवाजे में और वह स्ट्रेट निकल जाते हैं
4:19
राम के साथ वन को सोचते नहीं 14 साल के लिए
4:26
निकल जाते उनके मन का लक्ष्य केवल राम है।
4:33
अब पत्नी के मन का लक्ष्य भी राम है। वह भी नहीं रोकती तब तो धर्मपत्नी
4:46
तो वनवास में 24 आवर लक्ष्मण सीताराम जी की सेवा करते
4:54
24 घंटे बस सेवा और उनकी रक्षा
5:04
जिनको किसी रक्षा की जरूरत नहीं है। उनकी रक्षा यह प्रेम है।
5:15
भरत कौन है?
5:18
भगवत रतः भरतः जो भगवान में रत है।
5:26
जो डूब गया है वही भरत है। जो भगवान में
5:36
रथ है राम ही भरत ही नहीं कुछ भेदा
5:44
राम और भरत में कोई भेद नहीं
5:51
कोई भेद है ही नहीं राम क्या है अखंड ज्ञान ज्ञान अखंड एक सीतावर
6:02
भरत क्या है प्रेम का प्रतीक आंसू है भरत
6:11
हृदय है भरत प्रेम रस है भरत
6:23
और राम है ज्ञान अब क्या बोल रहे हैं राम ही भरत ही नहीं कुछ भेदा
6:31
ज्ञान और प्रेम में कहीं कोई भेद नहीं है हम क्या करते हैं? ज्ञान मार्ग अलग, प्रेम
6:39
भक्ति मार्ग अलग। यह हमारा गलत सेंस है। भेद है ही नहीं।
6:50
एक साइड से देखोगे सिक्के का एक पहलू ज्ञान है तो दूसरा पहलू प्रेम है।
7:04
तो जो भगवान में रत है वही भरत जो रत हो गया वही हो गया
7:14
भगवत रतः भरतः और शत्रुघन
7:24
जिसकी चेतना सघन है जिसका कोई शत्रु नहीं है जिसकी चेतना क्या है? सघन है। संकुचित
7:33
नहीं है। केवल देह में नहीं है। जिसका राम अब सब जगह है।
7:39
है ना? केवल स्वयं में नहीं है। केवल भीतर ही नहीं है। सर्वत्र
7:49
भीतर बाहर सर्वत्र और वह भी सघनता से है। इतना सघन है कि अब उसके लिए कोई शत्रु ही
7:57
नहीं है।
8:07
जिसका कोई शत्रु नहीं रहा केवल वही और वही प्रेमी होता है। रियल
8:17
प्रेमी जिसके लिए कोई विपरीत नहीं है। आप कोई
8:25
शत्रु नहीं है। मृत्यु भी जिसके लिए शत्रु नहीं है राम है। दुख भी जिसके लिए विपरीत नहीं है जीवन
8:35
में। सब राम है।
8:42
तो जिसकी चेतना सघन है। वही शत्रु घन है।
8:50
और जिसका कोई शत्रु नहीं।
8:59
अब जनक कौन है?
9:03
राजा जनक विदेह राज
9:12
विदेह जो देह में नहीं जी रहा है। विदेह में जी
9:19
रहा है। अपनी आत्मा में जी रहा है। तो जो अपनी आत्मा में जीता है उसी को
9:27
शांति सीता मिलती है। उन्हीं की पुत्री सीता भूमिता
9:36
है ना उन्हीं को कौन मिली सीता माता
9:46
जो देह में नहीं जीता विदेह में स्वयं में मैं आत्मा भगवान में
9:58
अब उनको सीता मिली और सीता किन के गले में वरमाला डालती है?
10:08
ज्ञान के। सीता शांति है, भक्ति है। वो किनको वरमाला पहनाती है?
10:17
ज्ञान को, भक्ति को। ये ज्ञान को। वो स्वयं भक्ति है। है ना?
10:26
और वरमाला पहलाने की शर्त क्या है?
10:32
धनुष तोड़ना। शिव का धनुष जो तोड़ दे। है ना?
10:52
तो सब आए थक गए। रावण भी और सब धनुष तो कोई हिला भी नहीं पाया।
11:02
सबके लिए धनुष भार हो गया।
11:08
और राम जी के लिए कोमल फूल जैसा हो गया।
11:22
तो जो स्वयं में जी रहा है, निर्भार में जी रहा है,
11:29
देह भार है, देह का वजन है, वेट है। तो आपका होना क्या है? राम है, निर्भार
11:37
है। तो जो निर्भार में जीता है उसके लिए सब
11:44
निर्भार हो जाता है। सब का सब जीवन निर् हो जाता है। परिवार,
11:54
घर, गृहस्ती,
11:57
संसार सब फूल जैसा हल्का हो जाता है।
12:08
तो राम आए उनके लिए निर्भर हो गया। और वह तोड़ना नहीं भी चाहे और टूट गया।
12:22
इतना निर्भर हो गया। जैसे फूल कई बार ऐसे उठाओ और हम फूल तोड़ना नहीं चाहते। कई बार वो टूट जाता है। है ना?
12:36
और फिर भक्ति ने ज्ञान के गले में वरमाला डाल दी।
12:45
भक्ति को ज्ञान ही प्रिय है और ज्ञान को भक्ति ही प्रिय है।
12:58
तो ज्ञान मार्ग का अंतिम लक्ष्य भक्ति है। भक्ति मार्ग का अंतिम लक्ष्य ज्ञान है।
13:07
वो कोई अलग-अलग है ही नहीं। सीताराम को अलग कर रहे हो। यह मार्ग वह मार्ग
13:16
तो ज्ञानी जब तक प्रेम पूर्ण ना लगे समझ जाना अज्ञानी है।
13:23
है ना? जब तक उसकी आंखों से उसके होने से प्रेम ना झरे।
13:30
समझ जाना अज्ञान। और भक्ति में जब तक अवेयरनेस ना हो,
13:42
जागृति ना हो,
13:45
सजग ना हो जब तक भक्ति तब तक समझ जाना यह भक्त नहीं विभक्त ही
13:54
है। वह परफेक्ट कॉम्बी है भक्ति और ज्ञान का
14:02
मैं आत्मा भगवान। परफेक्ट कॉम्बी है।
14:09
सीता और राम दोनों एक साथ
14:15
अलग-अलग नहीं दोनों एक साथ।
14:23
सियाराम मैं सब जग जानी करहु प्रणाम जोर जुग पानी
14:33
ये सब सीताराम है बस सब का सब सीताराम
14:41
खाली राम नहीं खाली सीता नहीं है ना
14:48
इसलिए सियाराम में सब जग जानी
14:57
प्रेम भी और ज्ञान भी मैं भी और तू भी
15:10
अब वनवास हो गया विवाह के बाद
15:19
अब वन में जहांजहां राम के पैर पड़ रहे हैं।
15:25
सीता के पैर भी वहीं जस्ट वहीं जहां राम का पैर उसी के ऊपर
15:34
सीता का पैर और पीछे लक्ष्मण जीव
15:43
राम ब्रह्म सीता माया लक्ष्मण जीव
15:50
अब लक्ष्मण पीछे से देख रहा है तो उनको सीता माई दिखाई दे रही है। माया ही दिखाई दे रही है।
15:58
क्योंकि जहां राम के पैर वहीं सीता के पैर। अब राम दिख ही नहीं रहे हैं लक्ष्मण।
16:10
अब उनको ऋषि मिले रास्ते में। बोले तुम आगे से देखो। लक्ष्मण आगे से देखते हैं तो राम दिखते
16:19
हैं। सीता नहीं दिखती। ये क्या हो रहा है बोले?
16:28
तो आप भी जब माया को देखते हो तो राम नहीं दिखते। जब दुनिया में जीते हो, देह में जीते हो,
16:37
मन में जीते हो तो राम आपका विस्मृत हो जाता है, गायब हो जाता है। दिखता ही नहीं। और आप बोलते हो कहां चले गए राम?
16:47
यह क्या हो गया?
16:52
और जब राम को देखते हो, मैं में रहते हो तो सीता नहीं दिखती।
16:58
फिर दुनिया नहीं दिखती, देह नहीं दिखता।
17:07
तो मैं के देखने पर राम के देखने पर देह क्यों नहीं दिखता? दुनिया क्यों नहीं दिखती?
17:16
सीता क्यों नहीं दिखती?
17:20
क्योंकि मैं ही सीता हो गया।
17:26
राम ही सीता हो गए। तो अब राम दिखे कैसे?
17:34
आप क्या सोचते हो? कुछ गलत हो गया ना। राम ही सीता हो गए। राम ही एक से अनेक हो गए। देह हो गए, मन हो गए, बुद्धि हो गए,
17:47
दुनिया हो गए। राम ही हो गए। मैं ही यह सब कुछ हो गया।
17:57
और सहज में हुआ।
18:06
सहज में हुआ। कुछ करके नहीं हुआ। कोई बाउंड्री नहीं है।
18:16
मैं में राम में और सीता के बीच में कोई ऐसे जंप का कोई पॉइंट नहीं है।
18:23
ऐसे सहज में हो गया। यानी जो अनचेंजेबल मैं हूं वह सहज में
18:34
चेंजबल हो गया। अरे साधु साधु बोलते क्यों नहीं?
18:48
ऐसे बीच-बीच में साधु साधु बोला करो। क्या बोला करो?
18:54
साधु अनचेंजबल
19:04
यानी जो कभी चेंज हो ही नहीं सकता। हां जो कभी चेंज
19:13
हो ही नहीं सकता। वो चेंज हो गया। चेंजबल हो गया। एक से अनेक हो गया।
19:25
अद्वैत से द्वैत हो गया। अनेक हो गया।
19:32
और आनंद की बात सहज में हो गया।
19:40
कोई डिफिकल्टी है ही नहीं होने में। ऐसा हो गया।
19:48
राम को सीता होने में कोई डिफिकल्टी है ही नहीं। कहीं पर भी कोई बैरियर, डिफिकल्टी,
19:59
कठिनाई, तकलीफ है ही। दृष्टा को दृश्य होने में कोई तकलीफ।
20:10
अब देखने वाला ही दिख रहा है।
20:18
कौन दिख रहा है? देखने वाला देखने वाला ही देख रहा है।
20:29
दृष्टा स्वयं दृश्य हो जाता है। बगैर तकलीफ
20:48
तब यह सारा दृश्य जब रिवर्स आता है सीता फिर क्या होती है वो दौड़ के राम में समा
20:56
जाती है ऐसे आप आंख बंद करते हो राम
21:03
मैं में यह अनेक
21:09
एक में समा जाता है। सीताराम में समा जाती है।
21:17
अपने आप सहज में और सहज बोलने से भी अच्छा प्रेम में।
21:27
तो भगवान माया किस में बनते हैं?
21:32
प्रेम में। फिर नहीं बोले साधु
21:43
और माया भगवान कब बनती है बोलो प्रेम में
21:51
प्रेम में माया भगवान प्रेम में ही बनेगी तुम्हारे
21:58
हार्ड वे से नहीं बनेगी जोड़ जबरदस्ती करोगे मन ना रहे माया ना
22:06
रहे कामनाएं ना रहे दुनिया ना रहे कभी नहीं बनेगी रगड़ डालेगी तुमको
22:15
तुम फाइट कर रहे हो माया प्रेम में ही भगवान बनती है राम बनती
22:24
और वो सहज में बनी रही है तुम छेड़खानी मत करो
22:31
तो जो तुमको लगता लगता है कि मैं दुनिया में जाता हूं, ऑफिस में जाता हूं,
22:37
प्रपंच में जाता हूं तो मैं अपने आप से चत हो जाता हूं। है ना? अपने आप से गिर जाता हूं, विस्मृत
22:46
हो जाता हूं। ऐसा नहीं होता। आप सीता हो गए। आपका प्रेम है इस संसार से, इस प्रपंच से,
22:59
इस दुनिया से, इस प्रकृति से पुरुष प्रकृति हो गया।
23:09
पुरुष प्रकृति हो गया। प्रपंच
23:16
दिखाओ। वह दिखाओ। गिलास या कुछ सियाराम
23:25
मैं सब जग जानी ये जैसे तांबे की कटोरी
23:36
है ना तो कटोरी से तांबा निकाल देने पर
23:46
कटोरी से तांबा निकाल देने पर
23:53
भी अगर कटोरी बचती है तब तो कटोरी है। नहीं तो क्या है?
24:03
तांबा ही तांबा है। प्रपंच से दुनियादारी से
24:12
अपने आप को निकाल देने पर अगर प्रपंच बचता है तब तो प्रपंच है। नहीं
24:22
तो मैं ही हूं। मैं ही मैं हूं।
24:33
तो जिसको आप प्रपंच कह रहे हो वह भी राम है या सीता बोल लो या राम बोल लो एक ही बात
24:41
है। तो अब इसको देखो
24:50
कटोरी को देखो इसके शेप को नाम रूप को
24:57
तो तांबा नहीं दिखेगा। तांबे को देखो
25:04
अच्छे से तांबा ही देखो बस तो कटोरी नहीं दिखेगी
25:10
तो दोनों एक साथ क्यों नहीं दिखते
25:17
एक ही समय में एक ही
25:23
एक ही है इसलिए दोनों एक साथ एक ही समय में नहीं दिखते
25:31
मैं और दुनिया दोनों एक साथ एक ही समय में क्यों नहीं दिखते?
25:38
क्योंकि दोनों एक ही हैं। कभी सीता राम हो जाते हैं, कभी राम सीता
25:48
हो। तो जहां पे माया है,
26:03
सीता है, वहीं पे राम है।
26:10
जहां पे शरीर है वहीं आत्मा है।
26:18
जहां पर दुनिया है वही परमात्मा है।
26:28
जहां पर मन है वहीं पर शांति है।
26:37
वहीं पे ठीक वहीं पे जहां पे तांबा है वहीं कटोरी है। जहां कटोरी है वहीं तांबा
26:45
है। ठीक वही
27:04
वहीं के तो मैं आत्मा भगवान मैं आत्मा राम वहीं के
27:14
वही हूं मैं आत्मा राम
27:21
वही वहीं के वही हूं। कहां हूं? वही के वही हूं।
27:37
तो जहां पर दृश्य है वहीं पर दृष्टा है।
27:44
जहांजहां दृश्य है वहां वहां दृष्टा भी है। याद रखना केवल यहां से नहीं है देखने वाला।
27:53
आप क्या सोचते हो? इधर यह विंडो है और इधर से कोई देखने वाला है
27:59
ना? फॉल्स केवल इधर से देखने वाला नहीं है। उधर से भी देखने वाला है।
28:06
देखने वाला एक है। दिखाई अलग-अलग दे रहा है। तो सबकी आंखों से देखो भला।
28:16
देखने वाला तो सबकी आंख से देख रहा है। आप अपनी पर्सनल आंख से क्यों देख रहे हो?
28:23
अपनी आंख से भी देखो और सबकी आंख से भी देखो।
28:30
तो जहांजहां दृश्य है वहां वहां दृष्टा है।
28:38
सबकी आंखों से जो देख रहा है।
28:44
सबकी आंखों से तो सबकी आंखों से देखने पर क्या दिखता है?
28:57
अरे देखने वाला ही दिखता है। देखो
29:06
सबकी शिव की राम की सर्वत्र की हर जीव की हर मनुष्य की सबकी आंखों से देखो। अभी क्या दिखता है?
29:21
क्या दिखता है?
29:24
देखने वाला ही दिखता है।
29:32
जो देखने वाले को कोई नहीं देख सकता वो दिखता है। बट पर्सनल आंखों से देखने पर नहीं
29:42
सबकी आंखों से देखने पर देखने वाला ही दिखता है। तो जहां जहां दृश्य है वहीं
29:51
वहीं दृष्टा है। यस
30:01
जहांजहां सीता वहीं वहीं राम जहांजहां राम वहीं वहीं सीता
30:16
तो आप क्या करते हो? गलती करते हो। जहां देह है वही आत्मा है। है ना?
30:25
जहां पे देह है वही आत्मा है। अरे जहां पे
30:32
आत्मा है वहां देह भी है। दूसरा पॉइंट को आप थोड़ा नेगेटिव लेते हो।
30:41
उसका भी सम्मान करो। अपनी देह का भी। जहां शांति है वहां मन भी है।
30:51
जहां निर्विचार है वहां विचार भी है। जहां निर्विचार राम वहां विचार सीता।
31:01
जहां भावातीत राम वहां भाव सीता।
31:09
आपको किसी भावों से मुक्त नहीं होना है।
31:15
किसी विचारों से मुक्त नहीं होना है। जब राम को सीता से मुक्त नहीं होना है तो तुमको क्यों होना है?
31:25
सारे विचार सीता है। आप दिन भर जीते हो। कोई भी विचार डिस्टर्ब करता है क्या बताओ?
31:37
कोई भी भाव क्योंकि राम को सीता से प्रेम है नहीं
31:44
निर्विचार को अपने हर विचार से प्रेम है। हर विचार से
31:53
भावातीत राम को हर भाव से प्रेम है।
32:02
अतिशय प्रेम है। इसलिए तो भाव में जी रहा है क्या?
32:07
कुछ गलत नहीं हो रहा है। इसलिए भाव में आप सहज जी रहे हो। हर भाव
32:14
में प्रेम है।
32:26
और आपको फिर वो भूत चढ़ा रहता है। एक भी विचार नहीं आना चाहिए।
32:34
एक भी भाव नहीं उठना चाहिए। अरे क्यों नहीं उठना चाहिए यार?
32:41
आपको हमेशा भावपूर्ण रहना है। याद रखना क्या पूर्ण?
32:47
भावपूर्ण। भावपूर्ण।
32:54
भावातीत हमेशा भावपूर्ण है।
33:04
भावातीत राम हमेशा भाव पूर्ण है।
33:14
भाव से रिक्त नहीं है। जो पुरुष है आत्मा वह हमेशा सृष्टि से
33:25
पूर्ण है।
33:37
तो यह रामायण अद्भुत है। आपके जीवन की रामायण सहज में चल रही है।
33:51
और यह सुंदरता यह अलौकिक सुंदरता
34:11
अब राम
34:18
स्वर्ण मृग के पीछे भागे
34:24
और शांति सीता का हरण हो गया।
34:35
जब भी स्वर्ण के पीछे भागोगे किसका हरण हो जाएगा?
34:43
शांति का। प्रमाण ले लो। सबसे ज्यादा रेट है गोल्ड
34:53
का और सबसे कम शांति है अभी धरती पे।
35:04
प्रमाण ले लो ना। सबसे ज्यादा अशांति है अभी धरती पे।
35:18
तो सीता का हरण
35:27
तो उससे पहले सुरपनखा आई। सुरपनखा ने क्या की?
35:32
गलत इच्छा की। गलत इच्छा का परिणाम
35:41
नाग का कटना। फिर सीता का हरण।
35:49
तो स्टोरी बढ़ती जाती है। फिर राम जी रोने लगते हैं। हां सीते
35:58
हां सीते सोचो भगवान मैं आत्मा भगवान किसके लिए रो रहे हैं?
36:10
बताओ माया के लिए दुनिया के लिए जिस दुनिया से तुम डरते हो कांपते हो, घबराते हो,
36:21
भगवान उसके लिए रोता है। भगवान अपनी प्रकृति के लिए रोता है।
36:31
और तुम मूर्ख, फल,
36:42
दुनिया नहीं चाहिए, प्रकृति नहीं चाहिए। जो भी दिख रहा है नहीं चाहिए। कौन सिखा दिया ऐसा?
36:54
ये आवाज नहीं चाहिए पंछियों की। ये हवा नहीं चाहिए। ये प्रकाश नहीं चाहिए।
37:03
ये सुंदरता नहीं चाहिए। क्या हो गया है?
37:09
राम को तो चाहिए। मैं को तो चाहिए। तभी तो मैं इनमें छा जाता है बार-बार।
37:21
मैं अनंत नाम रूपों में बार-बार प्रस्फुटित होता रहता है। बारंबार।
37:28
तभी राम रो रहा है। और यही देख के सती को संदेह हो गया
37:39
कि यह काहे के ब्रह्म। हे महादेव आप इनहीं का नाम जपते हो।
37:47
ये तो राजा के पुत्र हैं और पत्नी के वियोग में रो रहे हैं।
37:57
संसार के लिए जो दिख रहा है उसके लिए रो रहे हैं। आपका भी यही तो डाउट है।
38:15
और क्या डाउट है आपका?
38:22
यानी आपको क्या डाउट है? आपका मैं बार-बार इधर क्यों फिसल जाता है?
38:31
तब आप भी अपने मैं पे राम पे डाउट करते हैं। कैसा राम है यार ये?
38:37
पत्नी के वियोग में बार-बार रोने लगता है। बार-बार यह संसार हो जाता है।
38:44
बार-बार देह हो जाता है, मन हो जाता है। दुनिया हो जाता है।
38:51
प्रकृति हो जाता है। यही तो आपकी तकलीफ है।
38:58
सेम डाउट सती को हुआ जो आपको हुआ है।
39:10
है कि नहीं?
39:24
तो महादेव बोलते हैं भाई खतरनाक चीज हो गई है सती को। क्या हो गई है?
39:31
खतरनाक। खतरनाक चीज भगवान पे संदेह किस पे संदेह
39:38
भगवान पे संदेह अब तो भैया
39:44
है सोई जो राम रची राखा अब मेरे बस की बात नहीं है बोले महादेव
39:52
होई है सोई जो राम रच राख
39:59
को कर तर्क बढ़ावे शाखा अब तर्क वर्क क्या करना भैया
40:08
क्या समझना समझाना अब जो राम चाहते हैं वही होने वाला है
40:18
तो सती मानी नहीं महादेव के कहने पर भी महादेव मतलब गुरुओं के गुरु
40:27
उनसे बड़ा कोई गुरु नहीं है कोई सद्गुरु नहीं है, कोई गुरु नहीं है।
40:35
वह है महादेव। कृष्ण को त्रिलोकी का गुरु कहा गया है। और जो कुछ भी अस्तित्व में है नहीं है।
40:44
अनंत कोटि ब्रह्मांड, अनंत लोक सब कुछ सबका गुरु केवल शिव है। साक्षात शिव।
40:53
अब उसके बाद भी जो ना माने मानते हो उसकी बात?
41:03
हां। अरे मैं ही वो सद्गुरु है। मानते हो मैं
41:13
की बात? भटकते रहते हो इधर उधर। संदेह करते हो अपने ही मैं पे।
41:33
तो महादेव बोले भाई तोरे मन अति संदेहहु जाही परीक्षा लेहु
41:44
तो जाही परीक्षा लेहु अगर तेरे को संदेह है सती तो जा भैया तू परीक्षा ले ले
41:56
तो संदेह क्या करता है मालूम हमेशा परीक्षाएं लेते रहता है। संदेह क्या करता है?
42:07
परीक्षा लेते रहता है।
42:16
अब संदेह की जड़ क्या है?
42:26
राम का बहिर चरित्र ये दशरथ पुत्र हैं।
42:36
राम है रो रहे हैं। अब सती देख रही है बहिर चरित्र। सीता के पत्नी के वियोग में रो
42:44
रहे हैं। काहे के ब्रह्म? वह देख रही है बहिर चरित्र।
42:53
तो आपको भी संदेह कब होता है?
43:02
जब आप बहिर चरित्र देखते हो अपना ही
43:11
बोलो साधु साधु साधु साधु
43:20
आपको संदेह कब होता है जब आप अपना बह चरित्र देखते हो यह पाप ये पुण्य यह शरीर यह मन ये क्या हो रहा है
43:30
तभी आपको भी संदेह होता है। और बहिर चरित्र क्या है?
43:38
सीता है। राम को सीता से प्रेम है।
43:48
आपको भी अपने देह से, मन से, चराचर से प्रेम होना चाहिए।
43:56
और आपको क्या होता है संदेह संदेह
44:05
सन दे
44:15
इतना खूबसूरत इस पे संदेह ठीक है ना
44:22
देह मिटता है मन कहीं जाता है फिर वापस भी तो आ जाता है।
44:31
जो जहां जा रहा है उसको जाने दो ना। क्यों संदेह है आपको?
44:39
तो अब सती गई परीक्षा लेने। किसकी परीक्षा?
44:50
किसकी परीक्षा? राम की परीक्षा। जिस पर कभी किसी को डाउट नहीं हो सकता।
44:58
मैं आत्माराम उसकी परीक्षा
45:07
जिस पर डाउट किया ही नहीं जा सकता उसकी परीक्षा
45:16
बताओ। अब सती
45:25
परीक्षा लेने तो गई है लेकिन सीता का भेष धारण करके गई है।
45:35
डुप्लीकेट सीता ओरिजिनल नहीं।
45:42
अब सीता का भष धारण करके गई सती राम जी के पास।
45:49
अब राम तो अंतर्यामी है। और राम सीधा प्रणाम किया है।
46:01
माता अब राम को देखो कहां वृषकेतु कहां है शिव
46:08
जी ऐसा पूछ रहा है।
46:20
अब राम राम का प्यार शिव पे शिव का प्यार
46:26
राम पे है ना अरे जो मैं तू ना हो सके वो भी क्या मैं
46:34
है क्या जो मैं तू ना हो सके वो भी वो कचरा में है
46:45
साला जो मैं तू ना हो सके
46:55
तो शिव का प्रेम राम पे वो राम राम जपते रहते हैं। राम राम राम
47:05
और राम का प्रेम शिव पर है। वो रामेश्वरम बनाते हैं। शिवलिंग की स्थापना करते हैं।
47:14
बारंबार शिव जी को प्रणाम करते हैं। कोई भेद नहीं है। मैं और तू में भी कोई
47:22
भेद नहीं है। और भेद कर भेद केवल इसलिए किया गया है कि प्रेम हो सके।
47:32
भेद अज्ञानता के कारण नहीं किया गया है। प्रेम के लिए किया गया है यार।
47:40
घंटी दो चार बार बजा। हां हां
47:50
तो भेद मोहब्बत के लिए गुरु और शिष्य का भेद किसके लिए किया गया है
47:58
प्यार के लिए किया गया है कोई भेद के लिए नहीं किया गया
48:08
अब सीता ए सती सती समझ जाती है यह मेरे को पहचान का यह
48:16
अंतर्यामी है। यह भगवान है। मेरा भेद जान गए।
48:24
सकुचा जाती है। है ना?
48:30
अब सती जिधर देखती है उधर उसको राम दिखते हैं।
48:38
सर्वत्र राम दिखते हैं। ऐसे घूमती है राम। इधर घूमती राम उधर
48:45
घूमती राम वो प्रणाम कर लेती है।
48:57
जहां सती को डाउट था वह पूरा डाउट गिर जाता।
49:09
सब जगह उसको राम दिखने लगा।
49:18
तो आपका जो बहिर चरित्र है सीता
49:27
आपका मैं राम जब आपको अपने पूरे बहिर चरित्र में सीता
49:34
में राम दिखने लग जाए तभी आपका संदेह गिरेगा।
49:44
तो जो भी दिखे बस राम दिमाग लड़ाना ही मत
49:53
परीक्षा लेना ही मत आपका जो भी बहिर चरित्र है मन पाप पुण्य
50:01
सही गलत विचार भाव बस सब राम
50:07
सारे मनुष्य राम सारी प्रकृति राम
50:13
बस राम राम करते रहो प्रेम से भाव से
50:20
बहिर चरित्र में ही आपको डाउट होता है। बहिर चरित्र को ही राम कर दो।
50:31
देह को सीधा राम मन को सीधा राम।
50:38
जहां आपको गड़बड़ लगती है उसी को राम कर दो।
50:46
इसलिए सनातन ने पूरे चराचर की पूजा की। हर वृक्ष की पूजा की। हर पत्थर की पूजा की।
50:55
33 करोड़ देवी देवता। वायु भी देव, अग्नि भी देव, धरती मां भी देव।
51:02
क्यों पूजा की? सबको राम किया कि नहीं किया?
51:10
काम भी देव जिस काम से आप घबराते हो क्रोध के भी देवता है
51:19
तो सबको राम कर दो बस सनातन ने जो जाना है ना
51:28
बच्चे हैं ये लोग जो भी अभी तक हुए हैं ना बाद वाले बेबी हैं उसके एक अंश को बस जान पाए हैं। है ना?
51:41
ये बहुत विराट है। यह मैसेज बहुत विराट
51:49
कि सब राम है। सब का सब राम। तो अपने बहिर चरित्र को देह को ऐसे छुओ।
51:58
सब अपनी देह को राम बोलते हुए। राम एकदम आ
52:06
अपने मन को एकदम राम अपने विचारों को
52:17
भाव को अपने अहंकार रावण को राम
52:25
अपने मोह मोह को कुंभकरण है।
52:35
बस सबको राम ये सारा चराचर राम
52:54
तो कभी भी राम पे संदेह मत कर
53:02
नहीं तो संदेह की अग्नि में जैसे सती जली वैसे जलना पड़ा।
53:13
अब सती परीक्षा ले गई और महादेव पूछे तो बोली मैं परीक्षा नहीं ली हूं। झूठ
53:20
बोली। हां
53:31
तो महादेव तो अंतर्यामी है वो तो पहचान गए। फिर महादेव बोले भैया अब होई है सोई जो
53:41
राम रच राखा और अपने समाधि में चले गए
53:50
लागी समाधि अखंड अपारा अपने मैं में राम में डूब गए
53:56
हां और अपने समाधि में चले गए
54:03
वो डूब गए अब सती माता को भी अग्नि में जलना पड़ा।
54:13
महादेव मना भी किए कि जब बुलावा नहीं होता है तब भी नहीं
54:20
जाना चाहिए किसी के घर। चाहे आपके पिता का ही घर क्यों ना हो। है ना?
54:26
सती नहीं मानी फिर भी गई अपने पिता के घर और संदेह की अग्नि में
54:35
जलना पड़ा। फिर
54:43
उनके अगले जन्म में वो भवानी पार्वती बनी। उनका जन्म ही श्रद्धा के साथ हुआ।
54:53
भवानी शंकरो वंदे श्रद्धा विश्वास रूपण
54:59
भवानी यानी श्रद्धा शंकर यानी विश्वास।
55:12
तो इतने सत्संग के बाद आप में क्या जन्मती है मालूम? श्रद्धा भवानी
55:20
पार्वती। फिर पार्वती माता का विवाह होता है
55:32
शिव जी के साथ। फिर परीक्षा लेने वो आते हैं
55:40
नारद मुनि ऐ तू पागल है क्या?
55:49
तू जा नारायण के पास। उसके पास वैभव है,
55:53
संपत्ति है, सब कुछ है। त्रिलोकी के वो हैं। तो वो प्रणाम करती है नारद जी को। ना
56:03
मैं तो शिव की ही हूं। बस शिव शिव जपी थी।
56:09
नमः शिवाय नमः शिवाय नमः शिवाय। बस शिव के अलावा कुछ नहीं है। है ना?
56:21
और अिग रहती है अपनी श्रद्धा में तो हमेशा अपनी श्रद्धा में अिग रहना चाहे प्राण चले
56:28
जाए तो फिर शिव पार्वती का विवाह होता है
56:38
और हमारे महादेव भूत गणों की इस पूरी बारात ले जाते
56:49
मां पार्वती की जो मां रहती है वो देख के गिर जाती बेहोश हो जाती
57:00
तो हमारे भूतेश्वर भूतेश्वर यानी जो पंच महाभूत उनके ईश्वर
57:06
है और जो भूत प्रेतों के भी ईश्वर है वह कौन है भूतेश्वर
57:17
जिन्होंने भूतों का भी इंकार नहीं किया। भूत प्रेतों
57:23
से भी जिनका प्रेम है। आपको क्या डर रहता है? अरे मेरे अंदर भूत
57:29
मत घुस जाए। अरे इधर बहुत नेगेटिविटी है। इधर वो है। यह काला साया मत आ जाए। ऐसा होता है ना?
57:42
और शिव का प्रेम भूतों के भी जो ईश्वर है समझो ना यार भूत
57:49
भी जिनको ईश्वर मानते हैं। अरे राक्षसों के गुरु कौन? शुक्राचार्य।
57:57
शुक्राचार्य किनको मानते हैं? महादेव को। और कौन बचा?
58:05
राक्षसों का जो गुरु है शुक्राचार्य
58:12
उनके भगवान शिव हैं। तो ये सारी स्टोरियां जो है वह अद्भुत है।
58:22
वो परफेक्ट मैसेज है। खाली स्टोरियां नहीं है। वह हां
58:29
विराट तल पर घटी है। सब घटनाएं हैं। यह स्टोरियों के अंश हैं जो सुनाए जा रहे
58:37
हैं। हमेशा इसलिए हर किसी का सम्मान करना। ऐसा अपना दिमाग मत लड़ा देना। वैज्ञानिक
58:46
मत बन जाना।
58:54
तो यहां इंसानों से भी प्रेम दुर्लभ है और वह भूत प्रेतों के भी प्रेम में है वो
59:03
है शिव। देवताओं के भी प्रेमी देवों के देव महादेव।
59:12
और भूतों के ईश्वर भूतेश्वर। यानी दोनों विपरीतताएं मिल गई। जहां
59:22
सारा नेगेटिव और सारा पॉजिटिव जहां मिलता है वही सहजा अवस्था है।
59:36
वही सहजा अवस्था है।
59:46
अब वह माता के साथ अपना भोग में डूबे हुए हैं शिव जी। है ना? वह महाभोग चल रहा है।
59:56
अब सारे देवताओं को संकट आ गया। अब वो निकल ही नहीं रहे हैं। शिव और भवानी है ना।
1:00:04
अब इंद्रविंद्र सब बाहर देवता लोग परेशान हो रहे हैं। हो रहे हैं। हो रहे हैं। अब वह निकल ही नहीं रहे हैं। इतना डूबे हुए
1:00:11
हैं। पुरुष प्रकृति में डूबा हुआ है। प्रकृति पुरुष में डूबी हुई है। और
1:00:17
देवताओं को अपनी पड़ी है।
1:00:26
है ना? छोटामोटा प्रॉब्लम जो भी है। अब यह जो डूबा हुआ है दृष्टा दृश्य में और दृश्य
1:00:34
दृष्टा में शिव भवानी में भवानी शिव में अब उनको डिस्टर्ब कर रहे हैं। है ना?
1:00:45
तो बहुत देर बाद भड़क गए देवता लोग इंद्रविंद्र सब श्राप
1:00:52
दे दिए शिव जी को शिव को श्राप
1:00:57
जाओ अब तुमको इसी चीज से पूजा जाएगा।
1:01:04
तो ये शिवलिंग उसी का प्रतीक है। लेकिन देखो
1:01:13
वो भी दिव्य हो गया। जो काम को भी दिव्य कर दे
1:01:21
वही शिव है। जो भोग को त्याग कर दे वही शिव है।
1:01:32
हर चीज को जो पवित्र करते जो अपवित्रतम है वह उसको पवित्र करते वही
1:01:41
शिव है। इसलिए शिवलिंग की जो पूजा की गई वो बहुत
1:01:52
पवित्र है। उससे पवित्र कुछ भी नहीं है क्योंकि जस्ट उसका विपरीत आ गया।
1:02:02
काम ही राम हो गया। तो यह सनातन के बहुत गहरे मैसेजेस हैं।
1:02:13
बहुत गहरे
1:02:30
तो शिव राम के प्रेम में है ना देखो यहां पे इधर दिखाओ कैमरा शिव
1:02:37
जी राम जी के प्रेम राम जी शिव जी के प्रेम
1:02:44
नंदी जी शिव जी के प्रेम उधर हनुमान जी इधर राम जी के प्रेम ये
1:02:53
पूरा प्रेम प्रेम ही प्रेम है यार। ये मंदिर थोड़ी ना है।
1:03:00
ये पूरा प्रेम है। शाश्वत प्रेम है।
1:03:07
अनंत प्रेम। जैसे प्रेम ही मूर्तियों के रूप में आ गया
1:03:15
है। और हम सब इनके प्रेम में हैं।
1:03:29
प्रेमालय हो गया। हिमालय प्रेमालय
1:03:50
तो इसलिए भगवान को भोग चढ़ाया जाता है। तुम्हारे लिए भोग क्षद्रता है। भगवान के
1:03:57
लिए भोग दिव्यता है। भोग चढ़ाते हैं कि नहीं भगवान को छप्पन
1:04:04
भोग और तमाम भोग भोग को भी जिसने दिव्य कर दिया
1:04:14
सब चढ़ाते हो ना भगवान पर भोग तो बहुत रहस्य है मालूम कोई भी चीज ऐसा
1:04:25
नहीं है कि गलत है रॉन्ग है आपकी दृष्ट दृष्टि रॉन्ग है। यहां सब राम है भाई।
1:04:34
सब कुछ राम है। कुछ भी ऐसा गलत जैसा कुछ नहीं।
1:04:49
जीवन में बहुत गलत होता है किसी के साथ। उसको गलत को गलत कहना भी राम है।
1:04:56
है ना? कोई गलत काम कर रहा है, कोई कुछ कर रहा है। उसको गलत कहना राम है। उसके विरुद्ध खड़े रहना वह भी राम है। वह
1:05:04
अंतर्यामी बताता है ना। हां। प्रत्यक्ष बताता है।
1:05:20
हां जी।
1:05:46
तो फिर स्टोरी आगे बढ़ती है। बाली का वध होता है।
1:05:55
बाली से जो भी लड़ता था तो वह उसकी आधी शक्ति उसमें आ जाती थी।
1:06:04
संसार से जो भी लड़ता है आधी शक्ति संसार को मिल जाती है। अब आप हारोगे।
1:06:14
इसलिए संसार से कभी मत लड़ना। संसार को राम कह देना। संसार को राम कह देते ही
1:06:23
बाली मर जाएगा। है ना?
1:06:28
पलटी हो जाता है संसार। अब बाली राम की गोद में है।
1:06:35
और बाली कह रहे हैं जन्मजनम मुनि जतन करा।
1:06:41
अंत राम कब आवत नाही
1:06:48
कि जन्मजन्म मुनि लोग जतन करते हैं, साधना करते हैं, तपस्या करते हैं और आखरी तक राम
1:06:55
नहीं आता। मेरे मेरे अंत में राम आ गया।
1:07:05
जन्म जन्म मुनि जतन कराई अंत राम कबु आवत नाही
1:07:16
मेरे अंत में राम आ गया और तृप्त होकर मर जाता है बाली
1:07:22
राम कहते कहते मर जाता है
1:08:16
फिर हनुमान जी लंका जाते हैं। हनुमान जी खुद को भूल जा रहते हैं।
1:08:25
तो जामवंत याद कराते हैं। पवन तनय बल पवन समाना
1:08:33
हनुमान कौन जो मान अपमान से परे है वो हनुमान है
1:08:40
मान से भी अपमान से भी और राम काज करबे को जो राम काज ही करते
1:08:49
रहते बस उनको और कुछ करना ही नहीं जिसका हर कर्म राम है
1:09:00
जिसका हर कर्म राम वही हनुमान है
1:09:07
एक सुगंध है हर कर्म में राम की तो उनको याद कराते हैं जामवंत वो
1:09:15
पर्वताकार हो जाते हैं उनको याद आ जाती है अपनी अरे मैं हनुमान हूं करके अरे रावण
1:09:23
वाव क्या मैं उसको अभी मार के ले आता हूं बोले
1:09:33
तो जामवंत बोलते हैं अरे रुको भाई रुको तुमको जितना कहा गया है तुमको उतना ही
1:09:42
करना है अंगूठी लो और ले जा के सीता माता को दो क्योंकि
1:09:48
वाल्मीकि ने रामायण पहले ही लिख दी तुम्हारा जो रोल है तुमको तुमको उतना ही
1:09:56
करना है। उससे ना कम ना ज्यादा।
1:10:05
है ना? ठीक है भाई।
1:10:12
तो भाई आप लोग का भी जो रोल है उससे ना कम ना ज्यादा।
1:10:19
ठीक है। तो वह जाते हैं फिर
1:10:32
सुरसा एक अहिन के माता पहले राक्षसी मिलती है सुरसा वो देवी होती
1:10:40
हैं। है ना देवताओं की गुरु माता होती है वो और
1:10:46
सुरसा नाम से वह राक्षसी बनकर ऐसे आई रहती है और हनुमान जी पहचान जाते हैं।
1:10:54
तो पहले आता है सतोगुण सुरसा एक अहिन के माता
1:11:00
तो वो सुंदरकांड अभी किए ना आप लोग हवन उसमें ये सब आता है
1:11:08
उसको फिर हनुमान जी प्रणाम करते हैं। जहां पे भी कुछ भी दिव्य दिखे कोई भी गुरु
1:11:17
दिखे जीवन में कोई भी देवता दिखे भगवत मूर्ति दिखे भगवत शास्त्र दिखे वेद दिखे
1:11:25
पुराण दिखे किसी भी धर्म का कोई भी शास्त्र दिखे बस प्रणाम कर लेना
1:11:33
है ना वहां दिमाग मत लड़ाना किसी का कोई भी गुरु हो तुमको प्रणाम करना
1:11:42
है अपना ही गुरु होता है क्या यार पर्सनल होता है क्या साला गुरु भी
1:11:49
हैं गुरु में भी साला मेरा और तेरा डाल दिए हो गुरु को तो खराब मत करो
1:11:59
गुरु एक सत्ता है ना हर जगह प्रणाम दिमाग
1:12:07
मत लड़ा जहां पे भी सतोगुण दिखे उसको प्रणाम मंदिर मंदिर दिखे, मस्जिद दिखे,
1:12:14
गुरुद्वारा दिखे, कुछ भी दिखे बस प्रणाम। है ना?
1:12:22
सब जगह प्रणाम। चर्च हो या कुछ भी हो आपका धर्म है प्रणाम करना।
1:12:30
ठीक। अच्छा। तो हनुमान जी
1:12:39
जो सुरसा थी प्रणाम की है। अब
1:12:44
सुरसा जस जस सुरसा बदन बढ़ावा तो हनुमान जी दुगने हो जाते थे सुरसा छ
1:12:54
योजन तो हनुमान जी 12 योजन सुरसा 12 योजन तो हनुमान जी 24 योजन ऐसे
1:13:02
बड़े होते जाते थे बड़े बड़े-बड़े ऐसे 64 योजन ऐसे और सुरसा को वो बोले मैं तेरे
1:13:10
मुंह में जाऊंगा पहले ही बोल दिए बोल दिए तो करना पड़ेगा। जब सुरसा बहुत बड़ी हो गई 64 योजन या जो
1:13:19
भी है तो हनुमान जी एकदम छोटू हो गए और उनके मुंह में जाके वापस आ गए
1:13:32
प्रणाम किए है ना तो जब भी ऐसे
1:13:40
कभी भगवत मूर्ति देखते हो मंदिर जाते हो ना तो वहां ज्ञानी ज्ञानी मत बनना। हनुमान जी जैसा कोई ज्ञानी है?
1:13:50
ज्ञान गुण सागर वो कैसे छोटे हो गए?
1:13:57
कैसे प्रणाम किए छोटे होके?
1:14:03
वो वहां थोड़ी ना बोले मैं ही हूं। ऐसे भिन्न कुछ भी नहीं है। क्या पैर पढ़ना? क्या प्रणाम करना?
1:14:14
प्रणाम किए। तो, जब भी ऐसे दिव्य दिखे, मंदिर, कुछ भी,
1:14:20
गुरु बस प्रणाम करना है। छोटे हो जाना बस वहां एकदम लघु।
1:14:27
एकदम छोटे। यह नियम है, कायदा है।
1:14:39
कोई भी शास्त्र दिखे, वेद दिखे, गीता,
1:14:42
रामायण गुरु वाणी जो भी हमेशा प्रणाम बस दिमाग
1:14:50
नहीं लड़ाना छोटे हो जाना बस ठीक तब वो अहिन के माता अपना रूप प्रकट करती
1:14:59
है और उनको जाने देती है हनुमान जी को
1:15:05
तो यह सतोगुण फिर दूसरी राक्षसी मिलती है वह है तमोगुण
1:15:13
तो वह क्या करती कि जो भी छाया बनती थी समुद्र के नीचे छाया से उसको खींच के खा
1:15:20
जाती थी है ना तो जीवन में जब भी तमोगुण दिखे उसको
1:15:27
तुरंत मार देना निपटा देना वहां वेट नहीं करना
1:15:37
वहां वेट नहीं करना हनुमान जी तुरंत निपटा दिए उसको तमोगुण क्या होता है? हमेशा आपको खींचता
1:15:46
है, डाउन करता है। तुम काहे के राम? तुम तो साला यह पाप किए हो, वो किए हो, तुम
1:15:54
मूर्ख हो, पापी हो, निचड़ हो। कीड़े मकोड़े हो। इस टाइप का कोई बोले ना उससे एकदम दूर हो जाना। क्या हो जाना?
1:16:06
कोसों दूर। दूर नहीं ओसो दूर हां
1:16:14
क्योंकि वो आपके राम को ढक रहा है और आपके जो बहिर चरित्र में जो रॉन्ग रॉन्ग है उसको दिखा रहा है
1:16:22
और अंतत लास्ट में आपके बहिर चरित्र को भी राम करना है लास्ट में है ना तो उनसे दूर
1:16:29
हो जाना भैया तो हनुमान जी क्या किया तुरंत निपटा दिए उसको तुरंत मारे आगे फिर लंका नी
1:16:40
रुको रुको फिर लंकनी वो है रजोगुण
1:16:48
सतोगुण पहले तमोगुण फिर रजोगुण ये जो धन पद प्रतिष्ठा ये क्या है
1:16:57
रजोगुण एक मुष्टि का मारे
1:17:08
तो उससे रक्त बहने लग गया लंकनी से बहुत तीन पांच कर रही थी वो
1:17:17
तो रक्त निकला और वह विरक्त हो गई तो रजोगुण से हमेशा विरक्ति
1:17:25
अपने अंदर हमेशा विरक्ति रखना वैराग्य रखना बाहर आपके पास जो भी धन है अच्छी बात है
1:17:33
वह सहयोगी होगा लेकिन अंदर वैराग्य हमेशा
1:17:39
इस चीज को याद रखना तो
1:17:45
सतोगुण का हमेशा सम्मान तमोगुण को तुरंत निपटाओ दूर हो जाओ या
1:17:55
निपटा दो रजोगुण से हमेशा भीतर से वैराग्य
1:18:02
ठीक है इसके बाद तीनों गुणों के पार हनुमान जी को
1:18:10
मिलती है भक्ति सीता गुणातीत सीता
1:18:19
भक्ति सीता जो अशोक वृक्ष के नीचे है जहां शोक होता
1:18:29
ही नहीं बैठी रहती है भक्ति कहां बैठती है? जहां शोक
1:18:36
होता ही। प्रभु मुद्रिका क्या है?
1:18:48
मेल मुख माही जल धि लांग गए अचरज नाही
1:18:59
तो ऐसे समुद्र लांग के वो मुद्रिका माता को देते हैं वो माता भी थोड़ा नाराज होने
1:19:07
की एक्टिंग करती है। राम भूल गए क्या मेरे को?
1:19:18
यानी दृश्य कह रहा है दृष्टा भूल गया है क्या मेरे को तो हनुमान जी उनको ढाडस बंधाते हैं नहीं
1:19:28
माता वो तो आपके प्रेम में है सदा आपको याद करते हैं। दृष्टा हमेशा
1:19:36
दृश्य को याद करता है। उसी में जीता है। अत वो शांत हो जाती है। वह मुद्रिका दे देते हैं। है ना?
1:19:50
और फिर और रावण पकड़ लेते हैं हनुमान जी को।
1:19:58
हे वानर तुम हमारे लंका में ये क्यों मारपीट कर रहे हो?
1:20:08
मारा ऐसा कोई दोहा है रामायण का है ना
1:20:20
कि भाई अपनी रक्षा करने का अधिकार धर्म है अपने देह की रक्षा करने का अधिकार भी धर्म
1:20:29
है और मैं वानर हूं। मेरे को फल फूल पसंद है भाई। मैं खा रहा था और तुम्हारे ये सब आ
1:20:37
गए। मारपीट तो तय है।
1:20:48
मेरे को भूख लगी। मैं खा रहा था।
1:20:55
तो फिर वह सब स्टोरी आगे बढ़ती है। हनुमान जी समझाते हैं। अरे जुगनू
1:21:06
तेरे में प्रकाश भी जुगनू जैसा है। और तू सूर्य से लड़ने चला है। राम जी से
1:21:16
होश में आजा। समझ जा वो रावण अपने ताव में
1:21:27
तो वो लगा दो पूछ में आग वो पूरा लंका जला डाले
1:21:35
आ गए वापस है ना तो ऐसे स्टोरी बन बढ़ती जाती है और
1:21:43
फिर वो लंका के लिए रास्ता बनाया जाता है। समुद्र में राम हर पत्थर में राम लिख लिख
1:21:52
के हर पत्थर तैरने लगते हैं। जहां राम बोल दोगे ना वह हल्का हो जाएगा।
1:21:59
निर्गा तैरने लगेगा। हां, उसका उसका महत्व है। ऐसा ही नहीं है। वो
1:22:08
बड़े से बड़े जीवन का आपका पत्थर हल्का हो जाएगा। बस उसको राम बोल दो।
1:22:16
फिर गए और वहां सबको मार दिए। जो भी रावण के पुत्र भाई सब
1:22:23
है ना स्टोरी आगे बढ़ती जाती है। सबको मिटा देते हैं और
1:22:30
सब मरते समय राम बोलते हुए मर जाते हैं।
1:22:40
तो आपको भी अपना अहंकार, मोह ये सब रावण की फैमिली है ना। इनको मारना है तो इनको राम राम राम बोलते जाओ। क्रोध है, काम है,
1:22:52
मत्सर है, लोभ है। यह सब रावण फैमिली वाले हैं। तो इनको सबको राम राम राम बाण से
1:23:02
मारते जाओ। है ना?
1:23:06
सबको राम राम राम सब मरते जाते हैं।
1:23:14
सब राम होते जाते हैं। और फिर
1:23:26
राम जी विजय होते हैं और उद्घोष होने लगता है। जय श्री राम। जय
1:23:34
श्री राम। पूरी वानर सेना जय श्री राम।
1:23:41
सब पुलकित हो जाते हैं। तो यह शरीर
1:23:50
दशरथ है। 10 इंद्रियां दशरथ
1:23:58
और तीन नाड़ियां दशरथ की तीन पत्नियां हैं। है ना?
1:24:09
और इसमें जो स्वास चल रही है 24 घंटे वो
1:24:16
लक्ष्मण है 24 घंटे जो राम की सेवा करते हैं
1:24:24
और पेट बली विश्वामित्र विश्व का जो मित्र है
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वो कौन है विश्वामित्र पेट में जो भी डालो चलो ना खाना वो एनर्जी
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पूरे बॉडी को देता है ना वो विश्वामित्र है
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और हृदय ही हनुमान है हृदय ही
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और हृदय की धड़कन जो धड़कती है और बंद होती है
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धड़कती है और वही भरत है जो राम से मिल मिलता है फिर बिछड़ता है
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मिलता है फिर बिछड़ता है
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और ये रोम रोम ये वानर सेना है
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और यह अयोध्या है शरीर शरीर क्या है अयोध्या
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और सारा दृश्य क्या है? सीता है और देखने वाला जानने वाला राम
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और ऐसा जो जानता है वही गुरु वशिष्ठ है। राम जी के गुरु हैं।
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और यह रामायण निरंतर चल रही कंटिन्यू।
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जहां सब कुछ सीताराम है।
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तो रामायण का हर पात्र राम है। आपके जीवन का हर पात्र भी
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राम और आपका होना भी राम तो आपका पूरा जीवन राम में होना चाहिए
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ठीक है सबको राम सिया बल रामचंद्र की
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जय पवनसत हनुमान की जय
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हर हर महादेव
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प्रेम प्रणाम