Prabhu Shree
0:26
मैं किसी भी सवाल का जवाब तो नहीं।
0:34
मैं कोई जवाब नहीं हूं किसी सवाल का। किसी भी सवाल का
0:42
फिर भी आप पूछ सकते हो। क्या ध्यान सिर्फ मन की एकाग्रता ही है?
0:54
और अगर यह सिर्फ मन की एकाग्रता है तो ओशो का पूरा संदेश ध्यान करो ध्यान करो था।
1:01
आपकी भी जितनी बात सुनी आपकी अपनी जर्नी तो आप भी खूब ध्यान किए
1:07
तो अब आप उसको एनकरेज नहीं करते हो जनरली। मतलब कोई करे तो आप रोकेंगे भी नहीं पर एनकरेज नहीं करते।
1:16
तो क्या यह यह बात ठीक से समझनी पड़ती?
1:25
ओके। जैसे अभी सबका ध्यान प्रश्न में
1:34
और बाकी सब जगह से हट गया ध्यान। ठीक? तो थोड़ा पास आ जाओ यार।
1:45
अभी सबका ध्यान प्रश्न बाकी सब जगह से ध्यान
1:52
हट गया है। ठीक है? अब ब्रीथिंग पे ध्यान दो तो ब्रीथिंग पे रहेगा। थॉट्स पे दो तो
2:01
केवल थॉट्स पे रहेगा। बाकी सब जगह से हट जाएगा।
2:07
तो सब जगह आपका ध्यान रहे उसके लिए क्या करना है? कहीं ध्यान नहीं देना है क्या?
2:18
ना किसी का ध्यान करना है ना कहीं ध्यान देना है। बढ़िया से कॉफी बना के पीना है।
2:35
बस ठीक है। उस क्या बोले कौन क्या मेरे को उससे मतलब मैं अपना बताऊंगा है ना?
2:49
हम इन दर्दों से गुजर चुके हैं तो हम नहीं चाहते कि आप भी गुजरो।
3:02
अब कहीं ध्यान ना रहे आपका तो वह सहजा अवस्था है। सहज में आपका ध्यान
3:10
कहीं नहीं रहता और सब जगह रहता है। जब जिसकी जरूरत है वहां पर ध्यान थोड़ी
3:17
देर के लिए चला जाता है। सहज में कहीं पैर में हाथ में कुछ लग गया ध्यान चला जाएगा। इसको ठीक करो। फिर उधर थोड़ा
3:25
वो सहज में क्योंकि सहज में आप ध्यान में ही होते हो
3:37
और जब एकाग्र करते हो या ध्यान करते हो तो वो फॉल्स है वो केवल एंटरटेनमेंट है
3:47
कुछ अब वो चक्रास पे ध्यान करोगे
3:58
अभाव करोगे कुछ एनर्जी चढ़ रही है तो वह चढ़ने लगती है। कुछ नहीं है। बच्चों का खेल है। है ना? थर्ड आई में ध्यान दोगे तो
4:06
वहां पेन होने लगेगा। है ना? दर्द ही चाहिए तो मैं दबा देता हूं सीधा।
4:16
ये सब टाइम पास है। आत्मा स्वयं
4:25
मैं हूं। यह आपका लक्ष्य होना चाहिए। वहां चक्रास वगैरह भी साइलेंटली ओपन हो जाते हैं। ऐसे
4:35
विस्फोटक नहीं होते। सब अपने आप हो जाता है। लक्ष्य सही होना चाहिए आपका बस।
4:48
तो यह तो हुआ। किसी को कोई प्रश्न है क्या? मैंने पूछा। अब मैं पूछूंगा अपना
4:55
हले दिल बताओ। यह ज्यादा बेटर है ना?
5:01
हां। प्रश्नों की दुनिया थोड़ी विचित्र हां तो हॉल दिल।
5:13
अरे बताओ कोई तो।
5:22
बहुत अच्छे तो बहुत अच्छे
5:36
और एक और उसमें ड्रॉबैक है बहुत खतरनाक
5:42
कि आप बहुत ध्यान करोगे तभी आपको समझ में आएगा कि नहीं करना
5:49
यह फॉल्स है। जो समझना है अभी ही समझ लो।
5:59
किसी की भी आत्मा को ध्यान करना पसंद नहीं है।
6:05
सच्चाई है। किए हो ना? रातरात भर वाला
6:12
यह भी पागल हां सहज में एकांत में बैठ जाना साइलेंस
6:21
में बैठ जाना वो एक अलग चीज है। वो सुंदर है, प्यारा है। है ना?
6:29
लेकिन ऐसे एक टाइमिंग डाल के कि सुबह 6:00 बजे उठ के कैथोसिस करना है और योगा करना
6:38
है। योगा हेल्थ के लिए ठीक है। ध्यान के लिए ध्यान के लिए ध्यान करो ही मत बस।
6:47
ठीक है? ईमानदारी की बात। ऐसा करके भी कई लोग बोलते हैं चलो आंख बंद
6:54
करो। है ना? यह सब टाइम पास है
7:08
तो आंख ना मूंदो कान ना रूधो तनिक कष्ट नहीं धारो
7:14
साधु सहज समाधि भली कबीर साहब बोलते हैं ना
7:30
और थोड़ा सा क्या है? आपको ललचाया जाता है। लालच क्या है? हां। अनंत को देखो।
7:41
अस्तित्व में ध्यान रखो। अज्ञात में ध्यान दो। यह सब लालचे हैं।
7:48
फॉल्स है सब। टाइम पास कराया जाता है आपको। आप बेवकूफ
7:57
बनते हो और बनते रहोगे जब तक खुद की समझ डेवलप नहीं होती। है ना?
8:05
एक बात बताना यार। परमात्मा किसी का ध्यान करेगा क्या?
8:14
और अगर कर रहा है तो परमात्मा है ही नहीं। वो जी है। राइट?
8:23
बस यह फार्मूला हमेशा लगा देना। तो जब भी आप ध्यान कर रहे हो समझ जाना आप
8:31
जीव। परमात्मा किसी की याद करेगा।
8:42
खुद की भी करेगा। मैं हूं, मैं हूं बोलेगा। बोल रहा है यानी समझ जाना जीव है वह
8:51
लेवल बस परमात्मा का है। है कि नहीं?
8:56
तो परमात्मा जैसे है बस वैसे ही फॉलो कर लो। आपका होना भी परमात्मा है। तो वो मैच
9:05
हो जाता है। तो परमात्मा कैसे है? देखो अचिंत है।
9:14
बोलो है। अरे सब बोलो। अचिंत है। हां। जहां किसी भी तरह का चिंतन नहीं।
9:24
मैं परमात्मा हूं। यह चिंतन भी नहीं। बस
9:36
मैं हूं या मेरा होना मेरे को होने में रहना है। यह चिंतन भी नहीं। यह भी सब
9:44
चिंतन नहीं करना है। कि अपने होने में जीना है। स्वयं में जीना है। यह भी एक किस्म का वर्णन है।
9:52
अरे आप हो ही उसमें क्या जीना है। उसमें जीना वीना नहीं है। वह आप हो ही। है ना?
10:04
हां। उसको आप सेलिब्रेट कर सकते हो। उसमें प्रैक्टिस व्टिस नहीं करना है।
10:12
तो परमात्मा अचिंत है तो आप भी अचिंत हुए क्या?
10:18
बताओ अभी। हम सारी चिंता फिक्र छोड़ो।
10:25
ठीक अचिंत। किसी भी तरह का चिंतन नहीं
10:33
ना दुनिया का ना ध्यान का ना ज्ञान का ना भगवान का बस निश्चिंत
10:42
बेफिक्र
10:53
तो आपको कैसे खींचा जाता है? अरे तुमने यह पाप किया है। वह पुण्य किया है। ऐसे पकड़ के आपको खींचा
11:01
जाएगा और यह ध्यान करना पड़ेगा। इसके लिए यह तपस्या करनी पड़ेगी। यह पूजा करनी
11:07
पड़ेगी। आरती करनी पड़ेगी।
11:15
तो इन बहलावों में मत आना। है ना?
11:24
प्रेम से हो जाए पूजा। एक अलग बात वह एक अलग बात
11:33
तो बस अचिंत किसी भी तरह का चिंतन नहीं क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है
11:42
क्या होना चाहिए कोई चिंतन नहीं
11:52
पुराने गुरु क्या सोचेंगे यह चिंतन भी नहीं उनको बुरा लगेगा यह चिंतन में
12:09
तो वो एक भय है। है ना? फिर भय से आपको नीचे खींचा जाता है ना कि यार इसको बुरा
12:16
लग जाएगा। उसको बुरा लग ही जाए। आज तो बुरा लग ही जाए। लग ही जाए।
12:27
पानी देना है। बहुत अच्छे-अच्छे बनोगे ना तो कुछ नहीं होता। समझ रहे हो? थोड़ा विलन होना चाहिए
12:36
अंदर। क्या
12:48
ओ विलिन मुस्कुरा रहा है हमारा। तू पूरा विलन है। थोड़ा नहीं है। पूरा नहीं
12:56
चाहिए मेरे को भाई। हां।
13:07
तो ऐसे जैसे मुस्कुरा रहे हो। परमात्मा ऐसे मुस्कुराता है। बस वो मैच हो रहा है। अब देखो।
13:15
ट्रैक पे आ रहे हो। परमात्मा कोई मंत्र जपता है क्या?
13:31
नहीं जपता ना। और जप रहा है तो जीव है। परमात्मा
13:39
नहीं। तो कोई भी मंत्र आपको नहीं जपना है। यह भी एक मंत्र है
13:47
और यही सही मंत्र है।
14:05
तो ऐसे नारायण ऐसे लेटे रहते हैं। ऐसे पोज़ में देखे होंगे पोज़ वो आइज क्लोज
14:14
है शेष नाग पे और लक्ष्मी जी पैर दाब रही हैं
14:23
और उधर से देवता आते हैं सारे
14:30
चीखते हुए बचा लो प्रभु बचा लो उनको प्रॉब्लम होती
14:39
है तभी भी आते हैं और याद रखना देवताओं को भी प्रॉब्लम होती
14:46
है। त्राहिमाम प्रभु त्राहिमाम ऐसा करके वो
14:54
आते हैं। लेकिन वो वो पॉइंट वो खासियत देखना नारायण की। ठीक है? प्रॉब्लम आ गई
15:02
कुछ भी हो गया। लेकिन वो बहुत ही आहिस्तेआहिस्तेआहिस्ते
15:10
अपनी आईज खोलते हैं। जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। जैसे कुछ
15:18
हुआ बस प्रॉब्लम 90% तो वहीं खत्म हो जाती है।
15:28
वैसे आंख खोलने पे तो कभी भी कोई समस्या आ जाए
15:36
तो एकदम रिलैक्स धीरे से आंख खोलना और आंख खुली है तो धीरे से बंद कर लेना
15:52
तो अपने आप सॉल्व हो जाएगा वो। ठीक है? नहीं मेरे अंदर काम आ गया, क्रोध आ गया,
16:01
मोह अरे रिलैक्स क्या रिलैक्स
16:08
है ना देखेंगे ना काम ही तो है क्रोध ही तो है और क्या है
16:15
क्या ये हव्वा है क्या काम क्रोध काम क्रोध मार डालेंगे आपको ये
16:22
लोग इतना हवा नहीं बनाना किसी चीज का काम ही तो है बेचारा और क्या है?
16:29
तो वो निश्चिंतता वो आइस का खुलना वो साइन है कि आप नारायण देश में हो जीव
16:39
देश में नहीं हो। वो तेजी से आंख खोल दिए और क्या हो गया?
16:54
क्या हो गया? ऐसा किए तो आप समस्या बढ़ा रहे हो। है ना? कुछ भी उठा आपके अंदर या बाहर कुछ
17:04
भी हुआ। आप रिएक्ट किए तुरंत आप उसको बढ़ा रहे हो।
17:12
अब आपकी एनर्जी भी उसमें जा रही है।
17:22
तो इस अन हो रहे तमाशे को देखकर मुस्कुराया कर। कौन सा तमाशा है?
17:31
अन हो रहा तमाशा चल रहा है। और कुछ ना कोई जीव है ना कोई भगवान है जो है सो है।
17:41
यह सब अन हो रहा तमाशा है। बात तो तभी है ना कि जब आप भगवान से भी ज्यादा निश्चिंत
17:50
हो। भगवान भी आपसे जेलस हो जाए। कि क्या बना दिया मैं?
18:06
क्योंकि भगवान भगवान भी जीव करता है। अरे सागर सागर नदी करती है ना नदी को
18:14
मिलना है सागर में बहुत कठिनाइयां है रास्ते में पर्वत हैं और जो भी है
18:21
तो सागर सागर नदी करती है सागर नहीं करता तो एकदम निश्चिंत भूल जाओ भगवान भगवान भी
18:31
सब निश्चिंत रहो ना अभी शुरुआत हम किए भगवान की मर्यादा
18:39
ज्यादा रखी उससे अपने को टैली किया। ठीक है? अब नहीं करना है टेली। ठीक?
18:52
क्योंकि यह सब अन हो रहा समासा है।
19:13
तो बस कुछ हो ही नहीं रहा है। तू मुस्कुराया कर।
19:19
सच में कुछ नहीं हो रहा है। कहीं कुछ हो ही नहीं रहा है। तू
19:28
मुस्कुराया कर बस।
19:46
एक परम निश्चिंतता
19:56
एक बेफिक्री
20:21
और ये सब आपके होने में नेचुरल है। क्या है?
20:28
नेचुरल है। इसको लाना नहीं है। यह नेचुरल है ही। आपका होना ही तो
20:37
निश्चिंत है। आपका होना ही तो बेफिक्री है।
20:44
आपका होना ही तो प्रेम है। वहां प्रेम खोजते हो।
20:53
तुम हो यही तो प्रेम है यार।
21:15
तुम हो यही तो ध्यान है।
21:29
तो जैसे देख रहे हो अभी आप आपको पता नहीं आप देख रहे हो लेकिन देख रहे हो ना
21:37
क्योंकि सहज में देख रहे हो सुन भी रहे हो समझ भी रहे हो बोल रहा हूं
21:46
तो वहां वहां ध्यान जा रहा है बैठे भी हो ठीक ठीक है? लेकिन ये सब सहज में है करके
21:56
पता नहीं चल रहा है। लेकिन ये सब है ना देखना सुनना।
22:05
अच्छा ऐसे ही सहज में आप जानते भी हो।
22:12
किसी भी चीज को आपको जानना है तो उसके लिए साधना करते हो क्या?
22:18
मन को जानना, देह को जानना, दुनिया को जानना सहज में जानते हो ना
22:26
कि उसके लिए कोई साधना करके जानते हो। अब सहज में
22:35
निरंतर जानते रहते हो ना बगैर प्रयास के।
22:41
कि कभी-कभी जानते हो, कभी नहीं जानते हो। इवन नहीं जानते उसको भी जानते हो।
22:49
कोई चीज आपको समझ नहीं आ रही है वह भी तो आप जान रहे हो ना। तो निरंतर जानना क्या है?
23:00
यही तो अखंड ज्ञान है। तो कौन ज्ञानी नहीं है? बताओ मेरे को।
23:11
आपने पहले ही मान लिया कि आप अज्ञानी हो। वो आपकी अज्ञानता है। आप खुद ज्ञान स्वरूप हो।
23:20
इवन मैं अज्ञानी हूं इसका भी ज्ञान है आपको। तो ज्ञान तो है।
23:28
निरंतर जानना पना सहज है कि नहीं? और हर किसी को है कि
23:35
नहीं? तो हर कोई आत्मज्ञानी है ना यार?
23:42
और हर कोई आत्मज्ञानी सहज में है करके पता नहीं चल रहा है।
23:50
जैसे हर कोई देख रहा है सहज में पता नहीं चल रहा है। ऐसी हर कोई आत्मज्ञानी सहज में
23:56
है करके पता नहीं चल रहा है।
24:03
क्योंकि ज्ञान ही ज्ञान है नेचुरल। सेम ऐसे ही प्रेम ही प्रेम है। आपका होना ही प्रेम है।
24:12
सहज में उठता है ना प्रेम और सहज में वह बहना चाहता है और बहता रहता है।
24:26
तो अभी एक सेकंड अभी 1520 मिनट पहले
24:37
ना आपका ध्यान देखने में था ना सुनने में ना समझने में ना ये ज्ञान में लेकिन ये सब
24:46
था ना कहीं चले तो नहीं गया था तो इनकी चिंता क्यों करना है
24:55
क्यों करना है अब आपका होना
25:04
वह भी सहज में है ना जब उस पर ध्यान नहीं देते हो आधे घंटे पहले ध्यान नहीं दे रहे
25:11
थे तब भी था तो जो है ही है
25:18
उसकी चिंता क्यों करना है और पूरी दुनिया किसकी चिंता कर रही है
25:26
जो ऑलरेडी है और चिंता का कारण
25:33
नहीं है समझ के कर रही है। नहीं
25:40
है समझ के कर रही है। मैं अंधा हूं। मैं अंधा हूं समझ के देख रही है वो।
25:50
पहले उसने मान लिया मैं अंधा हूं। मेरे को नहीं दिखता। मेरे को नहीं दिखता।
25:56
अरे तू देख देख ही तो रहा है पागल। है ना? अब मैं अज्ञानी हूं, अज्ञानी हूं।
26:04
अब आत्मज्ञान चाहिए, बुद्धत्व चाहिए। पहले ही आपने सरेंडर कर दिया कि मैं
26:11
अज्ञानी हूं, अबुद्ध हूं। क्या पता भैया आप पहले से बुद्ध हुए हो तो?
26:18
कौन जानता है?
26:21
बताओ। पहले ही आपने सरेंडर कर दिया।
26:29
कि पहले से ही आपने एक साइन मार दिया कि मैं जीव हूं। अब भगवान को खोजना है।
26:43
कभी भी गलत पेपर पर साइन नहीं करना।
26:51
और यह सब आप सहज में हो। यह होना नहीं है। यह आप हो ही
27:03
इसका क्या प्रमाण बताओ? आप परमात्मा हो ही इसका क्या प्रमाण है? सहज में आप परमात्मा हो। कोई बताएगा जल्दी से?
27:19
हां, यह भी ठीक है। बट यह थोड़ा टेक्निकल आंसर हुआ। सहज में बताओ मेरे को।
27:31
अरे भाई जैसे आप कहीं से जा रहे हो मैं आपको बोलूं ए जीव कहां जा रहा है ए स्त्री
27:40
कहां जा रही है तो आपको बुरा लगेगा ना क्यों लगेगा
27:48
क्योंकि आप जीव और स्त्री हो ही नहीं और मैं बोलूं देवी आप कहां जा रही
27:55
देखो कैसे खिल गए तो वो मैच किया ना एकदम मैच किया यानी सहज
28:04
में आप देवी हो परमात्मा आपको बोलूं मैं ए जीव ए पुरुष कहां जा रहा है
28:13
बहुत हर्ट हो जाएगा हे प्राणी हे प्राणी कौन सा ध्यान कर रहा है?
28:28
और मैं बोलूं प्रभु आप कहां जा रहे हैं? ओ दिल बागबाग हो जाता है। क्यों होता है?
28:36
क्योंकि आप प्रभु ही हो। सहज में वो मैच हो जाता है।
28:44
तो जब ध्यान बहुत करते हो ना तो जीव ही ध्यान करता है। साधना ध्यान जीव ही करता है। वहां आपने पहले ही डिसाइड कर लिया मैं
28:54
जीव हूं। अब डिसाइड तो उसकी पेनाल्टी भुगो। गलत साइन तो झेलो।
29:03
झेल ही रहे हो कई जन्म से।
29:33
और अंततः मैं बताऊं आप लोगों को अपने दिल दिल की बात मेरा होले दिल
29:50
आप लोगों को यह तक बताने की जरूरत नहीं है। सब आप अंदर ही अंदर अपने ना जानते ही
29:58
हो। आप ज्ञान स्वरूप हो कैसे नहीं जानोगे?
30:07
जानते हो तभी तो यस निकलता है। है ना?
30:19
तो कुछ भी जानना समझना नहीं है। निश्चिंत बस
30:29
निश्चिंतता से भी निश्चिंत
30:38
क्योंकि आप एक गलती करते हो आप सब सुनो अब आप निश्चिंतता को लक्ष्य बना दिए।
30:48
हां यार अब यह सही बोल रहे हैं। अब निश्चिंत होना है। निश्चिंत होना है।
30:54
गई भैंस पानी में अब
31:03
जैसे मैं आपको बोलूं आपको स्त्री होना है। हम
31:11
तो आप बोलोगे क्या बात कर रहे हो? वो तो मैं हूं ही। बस वैसी बात है।
31:18
उसको कोई अचीवमेंट नहीं है कि निश्चिंतता का आप अचीवमेंट करो।
31:26
आपको पुरुष होना है वाली बात। वो है ही।
31:34
वह आपका स्वभाव है। जैसे अग्नि में ताप, आकाश में शून्यता,
31:49
जीव में दुख,
31:52
परमात्मा में आनंद, ऐसे ही आपके होने में निश्चिंतता है। है ना?
32:02
उसको लक्ष्य नहीं बनाना फिर गड़बड़ हो जाए।
32:19
फिर आप एक और गलती करते हो। नहीं यार, कुछ तो मैं चूक रहा हूं यार।
32:30
ऐसा आपके अंदर कहीं ना कहीं चलता रहता है। कुछ तो अभी भी मिसिंग है यार। ऐसा कुछ
32:37
चलता है आपके अंदर। आपकी नजर वो मिसिंग में ना ऐसे घड़ी रहती
32:43
है। वो चोंच मिसिंग मिसिंग समथिंग मिसिंग।
32:52
हां। ये आखिरी गड़बड़ है। इसके बाद कोई गड़बड़ है ही नहीं।
33:06
अरे मेरे में कोई कमी है। मेरे में कुछ मिसिंग है। ऐसा फिर भी आप कोई आपको कुछ भी
33:12
बता दे ना आप फिर भी वही सोचते हो। ये जीव भाव बहुत तगड़े से घेरा हुआ है। आपको
33:24
इसको कैसे खत्म किया जाए? बताएगा कोई
33:32
संतों की संगत तो ठीक है। मेरे में कोई कमी है।
33:42
मेरे में कोई कमी है। यह कमी कह रही है।
33:49
यह कमी कह रही है। कि मैं कह रहा हूं। नहीं।
33:59
मैं कैसे कहूंगा कि मेरे में कोई कमी है?
34:09
कमी ही कह रही है कि मेरे में कोई जीव ही कहेगा यह बात को। मैं क्यों कहूंगा भाई?
34:19
तो कमी का अनुभव कमी करेगी कि मैं करूंगा?
34:31
अनुभव करने वाला मैं हूं। पूर्ण ही कमी का अनुभव कर रहा है।
34:40
पूर्ण ही करेगा। जो मैं है आपका अनुभव वाले देश में।
34:48
अनुभव करने वाला केवल स्वयं होता है। आपका मैं तो अब मैं कमी का अनुभव क्यों कर रहा हूं?
34:59
बताओ। कमी का अनुभव करने वाला तो कोई कमी नहीं है ना। तभी तो करेगा।
35:07
जैसे अशांति का अनुभव अशांति नहीं करेगी। शांति ही करती है। है ना?
35:18
अब यह जो आप लोग बोलते हो जीव जीव भाव इसका अनुभव कौन करता है? परमात्मा में
35:27
कमी का अनुभव पूर्णता करती है। ठीक है? अब फिर भी कमी का अनुभव क्यों हो
35:38
रहा है? बताओ। मेरे में कोई कमी है। यह कहां से आ गया?
35:50
वे फिर भी ठीक आंसर है। बताओ और कंपैरिजन तो नहीं और
35:59
अज्ञानता फिर भी ठीक आंसर है। सही है।
36:05
अब एक चीज देखो। वो सही आंसर है। तुरंत पॉइंट में जाना। जाना मतलब आप वहीं
36:14
हो। मैं हूं। मैं हूं में कोई कमी है क्या? खत्म बात।
36:23
कमी तो है ही नहीं। कमी भी मानी हुई है। मेरे में कोई कमी है। ये भी आपने मान लिया
36:33
है उआउ ऊआ करने के लिए। रोनेज के लिए है ना?
36:43
मेरे में कोई कमी है। यह भी एक मान्यता है। क्योंकि मैं हूं।
36:51
इसमें किसी को भी कमी लग रही है क्या? लग ही नहीं सकती।
36:57
केवल यह मान्यता है।
37:05
तो अब ऐसे टिक टिक मत खोजते रहना अपने अंदर। कुछ कमी है क्या? कुछ बचा है क्या? कुछ होगा क्या?
37:14
है ना? यह यह एक प्रॉब्लम है। बीमारी है।
37:20
हर जीव की बीमारी आखिरी वाली बीमारी।
37:45
मजे लो ना यार ये भी अन हो रहा तमाशा है। परमात्मा और
37:56
जीव भी अन हो रहा तमाशा है। तू मुस्कुराया कर
38:03
यह भी अनहोरा तमाशा
38:25
हां समझ जाओ वैसा ही है।
38:43
तो बहुत ज्यादा चीजों को क्लियर करना भी
38:53
अनक्लियर कर देना है। ए जीव भगवान ही अनहोरा तमाशा यह है ना
39:03
बहुत ज्यादा क्लियर करना भी गड़बड़ है इसलिए मस्त रहो यार
39:40
बस जीवन को प्रेम से जी लो और कुछ नहीं है। ठीक है?
39:47
बहुत प्रेम से साइलेंटली बहुत प्रेम से
39:56
जो आप हो वो तो सब आप हो ही उसको कोई बदल ही नहीं सकता। भगवान भी आ जाए तो नहीं बदल सकता।
40:04
उसकी तो चिंता करना ही मत।
40:23
तो मान हूं एक प्रेम कर नाता। बस एक ही नाता मैं मानता हूं।
40:31
प्रेम का नाता। प्रेम से जीते रहो।
40:40
आत्मा परमात्मा सब आपके इर्दगिर्द घूमते रहे अपने आप
40:46
है ना उनको भी प्रेम चाहिए क्योंकि प्रेम परमात्मा को भी चाहिए होता है याद
40:54
रखना
41:05
वह भी भूखा है प्रेम का
41:30
उदास तो नहीं हो गए कि मेरा बुद्धत्व अब नहीं होगा।
42:05
याद रखना ये सब तेरे खिलौने हैं। क्या ये सब तेरे खिलौने हैं। ये बुद्धत्व ये
42:14
जीव ये जो भी है सुने हो अभी तक
42:27
तूने अपने ही खेल के लिए बनाया है
42:49
तो मैं हूं। अब ये सब कचरा तो हटा दो। यह तो जल गया।
42:56
है ना? अब टू द पॉइंट मैं हूं।
43:08
मैं एंटर करो मैं
43:36
के गर्भ में। स्वयं के गर्भ में
43:55
मैं
44:37
यहां पे कोई भी आपकी दुनिया जीव भगवान कुछ भी है क्या
44:48
बताओ
45:01
फिर से मैं उसके गर्भ में मैं
45:17
अपने होने के एहसास में
45:45
कुछ भी है क्या हम
45:53
थोड़ा सा बारीक पॉइंट है जो मैं बताना चाह रहा हूं। डूबना उस पॉइंट
46:01
मैं अपने ही आप में एंटर करूं।
46:26
कोई भी जीव भगवान दुनिया मन कुछ है
46:35
कंफर्म सबको हम
46:44
कंफर्म है इधर श्योर
46:49
कुछ नहीं है। अब फिर से सेकंड पॉइंट मैं
46:57
जाओ फिर से अपने ही आप में
47:13
अपने होने के एहसास में
47:29
मन जीव भगवान दुनिया
47:35
कभी भी हो सकती है क्या
47:43
हो ही नहीं सकती श्योर यस
47:52
इट मींस यह आपके खिलौने हैं।
47:59
खेलने के लिए बस आप में तो यह कभी भी हो ही नहीं सकता।
48:07
डैम श्योर यस यस बधाई हो।
48:14
मुबारका हमेशा कॉन्फिडेंट रहना। आप में यह कभी भी
48:24
हो ही नहीं सकता। ना हुआ था ना हो सकता।
48:35
बस आप अपने खेलने के लिए लीला के लिए राम लीला के लिए यह सब आयोजन जुटा लेते हैं। है ना?
48:47
तो इस खेल में कभी सीरियस मत होना क्योंकि यह आपका ही रचा हुआ है
48:59
क्योंकि बहुत जब सीरियस हो जाओगे तो उस सीरियसनेस से फिर एक प्रश्न उठेगा
49:08
फिर हम जैसे को आना पड़ेगा।
49:22
तो ये कॉन्फिडेंस ये क्लियरिटी मस्ट कि मैं में
49:30
फिर से फिर से मैं में इंटर
49:39
मैं स्वयं
49:58
हर कोई जाओ डूबो मैं
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नेचुरल साइलेंस है। सुकून है।
50:46
एंटर
50:55
आपका होना कैसा लग रहा है अब आनंददाई है
51:13
और सहज है।
51:23
प्रेमपूर्ण है।
51:32
जहां से सबके लिए प्रेम निकलता है।
51:41
आपके मैं से होने से ही तो सबके लिए प्रेम निकलता है।
51:52
तो वह कितना प्रेमपूर्ण होगा?
52:04
तो मैं में
52:16
प्रेम भी स्वाभाविक है। शांति भी
52:26
आनंद भी सुकून भी
52:47
निश्चिंतता भी नेचुरल है।
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तो जो आपको चाहिए वह आपके पास ही है।
53:06
आप में ही है।
53:16
और मैं में क्या नहीं है? इससे पहले देखें। जीव दुनिया मन
53:25
वह नहीं जो नहीं है वो नेचुरल नहीं है जो है वो
53:32
नेचुरल है खत्म ना बात यार
53:49
तो अब मैं किसका त्याग करूं और किसका ग्रहण करूं
53:59
जो नहीं है वो नेचुरल नहीं है जो है आपके एहसास में
54:06
वो शांति वो सुकून वो नेचुरल है
54:18
वो खामोशी
54:33
वो संतुष्टि
54:50
आपके होने के एहसास में
54:59
वो खुमारी
55:18
सहज में
55:38
एनी डाउट?
55:48
तो आपके मैं में तीन काल में
55:55
देह, मन और संसार है ही नहीं। ना पास्ट में, ना वर्तमान में, ना फ्यूचर
56:03
में, ना होगा। आपके मैं में फिर से एंटर करो।
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मैं मैं
56:34
संसार मन बुद्धि देह
56:40
तीन काल में है ही नहीं। है क्या?
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मैं में खोजो तो मिल रही है क्या कुछ भी चीज ऐसी
57:02
ना है ना होगी।
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तो मैं में यह कभी भी हुआ ही नहीं।
58:03
मैं में
58:12
तीन काल में हुआ ही नहीं
58:23
हो सकता नहीं ना कभी होगा
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कितनी साफसाफ बात है।
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मुझ में कभी भी यह सब हुआ ही नहीं। हो सकता नहीं।
59:21
हो पाएगा नहीं। मुझ में यह हो कैसे सकता है?
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अरे हो कैसे सकता है?
59:45
ये देह, ये जीव, ये संसार हो कैसे सकता है?
59:58
मुझ में तो बस मैं ही हूं।
1:00:24
मेरे अलावा कुछ और हो कैसे सकता है?
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हम तो कम बैक
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तो अब अब क्या आपको कॉन्फिडेंस है?
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श्योरिटी यस कि ये कभी भी आपको हो नहीं पाएगा। ना हुआ था।
1:01:13
श्योर श्योर तो बस ये आपके खेल खिलौने थे और कुछ नहीं। है ना?
1:01:23
आपको रोने की इच्छा हुई और आपने ये खिलौने इज कर लिए।
1:01:29
उआ करने के लिए क्योंकि आप स्वतंत्र हो रोने के लिए भी
1:01:40
स्वतंत्र हो बंधने के लिए भी स्वतंत्र
1:01:53
तो तू अभी हो जा सुखी। अरे तू दुखी कब था?
1:01:59
हां तू दुखी कब था यह बता दे मेरे को तू बेचैन
1:02:05
कब था तू अशांत कब था तू अज्ञानी कब था
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अरे कब था तू कभी था ही नहीं पगला
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ये तू कभी था ही नहीं तू हो कैसे सकता है ये सब ये तेरे टेस्ट का नहीं है
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ये सब तेरे टेस्ट का नहीं है
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तू सदा से सच्चिदानंद ही है बस सदा निश्चिंत सदा बेखौफ
1:02:54
सदा मस्त परमात्मा का भी परमात्मा
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अस्तित्व का भी अस्तित्व तू सहज में है।
1:03:14
और यह मैं तुझे बता नहीं रहा हूं। यह मैं तेरे अंदर से कह रहा हूं।
1:03:23
यह मैं तुझे बता नहीं रहा हूं। यह तेरे अंदर से मैं
1:03:31
कह रहा हूं। तुझे ही कह रहा हूं।
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ओके। इनफ फॉर फॉर एवर।
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ये जीव आ गया। मारो इसको। ए आ गया जीव
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हां कहां से खोज लिया अपना जीव भाव देखो
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अति विचित्र रघुपति की माया तो जिसको जिस चीज में कॉन्फिड िडेंस है।
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किसी को जीव में है तो उसको जीव मुबारक। किसी को परमात्मा में उसको परमात्मा
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मुबारक। ठीक है? उसके जिम्मेदार आप ही हो। ठीक है? तो भाई देखो यार नियम तो एक ही
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बोलता है। जीव भी नाच सकता है और परमात्मा भी।
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तो अब सेलिब्रेट करो बस। ओके। यस। स्टार्ट। इतनी सी हंसी
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नहीं नहीं वह चला रहा है गाने तो हम जो बोलेंगे वही चलेंगे
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तो सेलिब्रेशन मस्ट है जिसको जिस चीज पे भी कॉन्फिडेंस है
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वो पिच को बहुत लो कर दिया आखिरी में बोल के। लेकिन जिसको कॉन्फिडेंस है उसकी पिच कभी लो होगी ही नहीं।
1:05:46
अरे मैं मैं हूं। हां।
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चाहे कुछ हो जाए। कुछ हो ही नहीं सकता। हो ही नहीं सकता। राइट?
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यह हुई ना बात। यह आत्मा की वॉइस है।