0:19
पैर रखो और मंजिल आ जाए। ऐसा क्या है?
0:26
हां, मैं तो है। वहां तो पैर रखना ही नहीं है। जहां जाना है वहीं बैठा हूं।
0:35
हम अनुभव ठीक है।
0:40
राम यस बहुत सुंदर
0:46
ये सही जगह से आया। बहुत बढ़िया।
1:00
अरे कुछ मत चाहो खत्म हो जाती है बात
1:08
कुछ चाहो ही मत
1:21
चाह ब्लॉक किए रहती है पर्दा सदा डाले रहती है। कुछ चाहो ही मत।
1:28
ना दुनिया ना भगवान ना मैं ना तू। हां कुछ चाहिए ही नहीं। बस
1:39
मन शांत हो जाए नहीं चाहिए। चलता रहे।
1:51
माया शांत हो जाए। नहीं चाहिए घेर लो माया देवी है ना
2:00
भगवान मिल जाए नहीं चाहिए अरे नहीं चाहिए
2:12
कुछ समझ में आ जाए अरे नहीं चाहिए कुछ अनुभव हो जाए
2:20
अनुभव का अनुभव हो जाए ना नहीं चाहिए
2:29
कुछ चाहिए ही नहीं सबको राम-राम कर दो टाटा बाय बाय हां
2:43
हम तो अब क्या अरे अब कुछ चाहिए नहीं तो अब क्या क्या हा
3:02
दुख आ रहा है नहीं चाहिए पड़े रहो दुख देवता
3:12
मत जाना चलेगा और आ जाओ चल चलेगा और बढ़ जाओ दुख चलेगा।
3:21
हां हमको चाहिए ही नहीं सुख। क्या करना है?
3:29
हमको भगवान नहीं चाहिए तो सुख का क्या करेंगे?
3:43
मृत्यु आया है। हम मर जाएंगे। कोई दिक्कत नहीं है। मर ही तो जाएंगे और क्या है? अरे मर ही तो जाएंगे और क्या है?
3:55
हां लेकिन चाहेंगे नहीं।
4:08
तो राजा का बेटा था उसको निकाल देता है। चल तू नालायक है। निकल जा।
4:14
वो 20 साल 15 20 साल तक फिर वह भिखारी की तरह जीता रहता है। है ना?
4:22
भूल ही जाता है वह राजा है। राजा का बेटा है।
4:29
फिर 15 20 साल बाद उसका मंत्री आता है। राजा मरने वाला रहता है। उसको भेज देता
4:36
है। ओ चलो तुमको बुलाया है। राजा साहब
4:43
वो भिखारी के रोल में रहता है पूरा। वो भूल ही जाता है मैं राजा का बेटा हूं।
4:49
तुरंत उसको याद आ जाता है। क्या फेंकता है कटोरा
4:56
सारथी रथ निकालो तो आपके पास काहे का कटोरा है चाहतों का
5:07
फेंको साले को हां कुछ नहीं चाहिए चाहिए ही नहीं
5:15
तुरंत फेंको इसको मत लगे ध्यान मत हो ज्ञान
5:22
क्या मत लगे ध्यान मत हो ज्ञान हमको कुछ मांगता ही नहीं
5:31
कुछ नहीं मांगता आने दो खांसी को
5:42
कोई अवस्था नहीं चाहिए ना विषय त्याग
5:48
ना तत्व दर्शनम ना सहज अवस्था क्यों चाहिए भैया चाहिए ही नहीं क्या
5:56
खेलेंगे क्या अवस्था अवस्था खेलेंगे क्या इतने बुरे दिन है हमारे
6:04
कुछ चाहिए ही नहीं यार
6:16
बिल्कुल भी नहीं चाहिए यस
6:27
जाह न चाहू कबू कुछु जो कभी कुछ चाहता ही नहीं बस
6:35
अरे कौन कभी कुछ नहीं चाहता जो असली भगवान है वो क्यों चाहेगा और आप
6:45
असली भगवान हो आप क्यों चाहोगे
6:52
जीव चाहता है भगवान नहीं चाहता रियल
7:00
गॉड थोड़ी ना चाहेगा खुद को या किसी भी चीज को ऐसा हो जाए वैसा हो जाए यह समझ जाऊं अब यह
7:08
हो जाए वो हो जाए अरे बकवास
7:22
तो कुछ चाहिए ही नहीं
7:31
बादशाहों का बादशाह है कुछ चाहिए ही नहीं मालिकों का मालिक
7:39
परमात्माओं का परमात्मा अगर उसका फील फील लेना है ना? अरे फील यू
7:47
नो फील तो कुछ
7:54
चाहो ही मत। कुछ मत जाओ।
8:16
गुरु गुरु भी मत चाहो हां हो गया गुरु गुरु बहुत
8:24
बलिहारी गुरु अपनी गोविंद हो बताए क्या बलिहारी नहीं चाहिए यार गोविंद ही
8:32
नहीं चाहिए हां ना गुरु चाहिए ना गोविंद चाहिए क्या चाहिए
8:40
क्या मारूंगा नहीं तू फिर बिल्कुल नहीं चाहिए
8:46
खबरदार चाहिए ही नहीं
8:54
आजाद हो जाओ चाहिए कि दुनिया से उसका फील जैसा कोई फील नहीं है
9:02
सारे अनुभवों का बॉस है वह बस
9:12
जा ही न चाहू कब कुछ जो कभी कुछ चाहता ही नहीं
9:18
वही ईश्वरों का ईश्वर है राम है या वही गोविंद है जो बोल लो चलेगा वही मैं हूं
9:40
मुक्त हो जाऊं ये हो जाऊं नहीं होना है मुक्त जी नहीं होना है ना होना ही नहीं है क्या
9:49
करोगे
10:01
अरे कम से कम जिंदगी में प्रेम तो हो जाए। अरे मत हो प्रेम। मत ही हो प्रेम।
10:10
अरे कुछ जान समझ तो लूं यार। कम से कम आया हूं धरती में। अरे नहीं जानना ना बाबा।
10:19
जान लिए ना इतने साल समझ लिए ना? बहुत साल तो खराब कर डाले जान समझ के।
10:26
अरे बहुत ज्यादा ही समझदार हो गए हैं। अब ना कुछ जानना है ना कुछ समझना है ना
10:34
कुछ देखना है। ये दिख जाए वो दिख जाए। अरे कुछ नहीं देखना है भैया।
10:43
सांस भी नहीं लेना है साले को।
10:58
खुश चल रही है। ठीक है बट लेना नहीं है ना
11:15
हम फेंके नहीं कटोरा
11:21
पक्का हां फेंको साले सब कटोरा बाजी
11:48
हम ये ठीक है बहुत बढ़िया जाओ ही मत बस है ना
12:11
आनंद को भी नहीं चाहना, शांति को भी नहीं चाहना,
12:17
सत्य को भी नहीं चाहना। असत्य तो चाहिए ही नहीं।
12:28
इवन अगला पल आ जाए इसकी भी अब ख्वाहिश नहीं
12:35
है ना अगला पल आ जाए अब इसकी भी ख्वाहिश नहीं रही आज
12:45
कौन पलों का हिसाब रखता रहे है ना
13:19
तो कुछ भी ना चाहने से कुछ भी ना चाहने से
13:30
जो शांति मिलती वो लाखों प्रवचनों से नहीं मिलती।
13:43
कुछ भी ना जानने से कुछ भी ना समझने से
13:52
जो आनंद होता है उतना आनंद तो भगवान को भी नहीं मिलता।
14:02
तो बस फाइनल ऑफ दी फाइनल और फाइनल ना भी हो हमको चाहिए ही
14:10
नहीं। फिर फाइनल का क्यों लालच दूं भाई? है ना?
14:20
आ कुछ नहीं चाहिए बस ना धर्म ना अर्थ ना काम ना मोक्ष ना चाहूं
14:30
निर्वाण जन्मजनम रति राम पद भी नहीं चाहिए
14:38
चाहिए नहीं बाबा कुछ भी
14:46
और अंत में कुछ नहीं चाहिए यह भी नहीं बट अंत में है। है ना?
15:06
कुछ ना चाहने का रस।
15:16
वो अल्टीमेट है। कुछ चाहिए ही नहीं यार।
15:34
चेतना एक्सपेंड हो जाए, कुंडलिनी जग जाए,
15:39
इनलाइटेंड हो जाऊं। ना बाबा कभी मत हो ऐसा
15:48
क्या कभी मत हो ऐसा तो चलो मेरे साथ बोलो तो जो बोलूं उसको
15:57
दोहराना मेरे को जिंदगी में मेरे को जिंदगी में कभी भी आनंद मत मिले
16:05
कभी भी आनंद मत मिले कभी भी मोक्ष मत मिले कभी भी मोक्ष मत मिले कभी भी भगवान मत मिले मिले
16:12
कभी भी भगवान मत मिले अरे कभी भी कुछ मत मिले कभी भी कुछ मत मिले बस खत्म बात
16:30
थकान दूर ही लगता है और संसार भी मत मिले भैया खाली भगवान ही
16:41
नहीं दुनियादारी भी इज्जत शहरत भी बदनामी चलेगीत
16:49
बोलो हां
16:55
नाम तो चाहिए ही नहीं
17:30
हम अब और क्या सोच रहे हो? कुछ बोलूंगा और कुछ समझ में आएगा। नहीं चाहिए बोलो। नहीं
17:37
चाहिए। जाओ अपने अपने कमरे में। नहीं चाहिए।
17:57
बस ऐसी बादशाहियत है ना हां क्या करना है यार
18:04
बादशाहियत भी हालांकि नहीं चाहिए बड़ा अपना मस्ती बस बेफिक्री मस्ती
18:13
जहन्नुम में जाए दोनों जहान है ना हमको क्या करना
18:21
कब तक साला ध्यान करते रहेंगे। इसका ध्यान, उसका ध्यान, फिर यह भगवान, वो
18:27
भगवान, फिर यह अनुभव, वो अनुभव। अरे पागल हो जाएंगे। इतने में तो हम हैं।
18:38
जैसे हैं वैसे ठीक हैं भैया हम। है ना?
18:42
आजाद एकदम आजादी से भी आजाद। हां। क्या बोलते हैं? ठीक ना?
18:54
हां। यस।
19:19
अब मेरे से भी आजाद रहना एकदम कोई गुरु कुछ नहीं है ना हो गया बहुत गुरु
19:31
गुरु वो भी बंधन बना दिए हो यार
19:43
एकदम फ्री टोटली फ्री यश
20:02
तो जिसको कुछ नहीं देखना कुछ नहीं जानना है। कुछ नहीं समझना है।
20:09
कुछ होना ही नहीं है। स्वयं में भी नहीं होना है। वाह वाह वाह
20:24
यस। केवल वही वही वही मुक्ति
20:31
से भी मुक्त है और वही मुक्त है जिसको ना कुछ देखना है ना कुछ जानना है ना
20:39
कुछ समझना है ना कुछ होना है स्वयं में भी नहीं होना है
20:45
केवल वही मुक्त है बस जिसको मुक्त भी नहीं होना है केवल वही
20:53
मुक्त है हां जी
21:03
जीवन मुक्त जीते जी मुक्त
21:19
अरे ये होके उसको देखता हूं वही होके उसको देखता हूं वो जान कब तक करते रहोगे यार यार दिमाग खराब है क्या?
21:31
जो देखता हूं वही होके देखता हूं। क्या क्या जो देखता हूं? क्या देखता हूं जो हैं?
21:42
फ्री रहो ना? कैसा लगता है? फ्री रहते हो तो हां। तो अच्छा लग रहा है ना?
21:48
और अच्छा ना भी लगे साले को। फ्री रहो। फ्री तो रहो।
22:20
ये बंधन वो बंधन तमाशाबाजी जिंदगी भर साला मृत्यु का भय
22:29
है ना मर जाओ साला अभी चलेगा मर ही जाएंगे ना यार मर ही तो जाएंगे और क्या है इतना क्यों है तो अब मचाना सब तो
22:39
मरते ही है अपन भी मर जाएंगे सब तो मरते ही है ना अपन भी मर जाएंगे
22:49
बढ़िया से और क्या है हां बम ही तो गिरेगा
23:03
नहीं आता अंदर से एकदम से ना नहीं
23:13
आजकल बम बम बहुत चल रहा है ना भाई ट्रेंडिंग है ठीक है भैया मर ही जाएंगे और क्या
23:23
लेकिन ऐसा ऐसा मरे खुरे टाइप का पहले से डरते डरते अरे दादा मर मत जाए मर मत अरे मर ही
23:31
जाएंगे साले को देखा जाएगा है ना और क्या है उसमें
23:40
और वैसे भी कौन सा आप सोचोगे और नहीं मरोगे बच जाओगे सोचोगे और नहीं मरोगे वैसे
23:47
भी तो मरोगे ही ना तो क्यों बेवजह का बचने की कोशिश है ना पूरी जिंदगी क्या है मालूम बचने की
23:56
कोशिश सिक्योरिटी बच जाऊं सेफ हो जाऊं
24:08
घंटा से
24:18
तमाशा बाजी
24:30
जितना ज्यादा सिक्योरिटी उतना ज्यादा तकलीफ। हां
24:37
जितना सिक्योरिटी उतना तकलीफ है भैया ऐसा मत हो जाए वैसा मत हो जाए अरे हो ही
24:45
जाए अब हो ही जाए ऐसा ही हो जाए अब देखेंगे साले को है ना हां कभी नहीं करना ऐसा मत हो जाए
24:55
वैसा वैसा ही हो जाए अब क्या बोलो वैसा ही हो जाए हां
25:08
नहीं मैं किसी को देख के बंद मत जाओ। अरे बंध ही जाऊं साले को।
25:15
क्या बंध ही जाऊं ना? क्या हो क्या जाएगा? किसी से बंध भी जाओगे तो
25:24
अभी तक इतनी बार बंधे हो। हो क्या गया? मर गए हो क्या?
25:28
कुछ नहीं होता यार यहां पर बंध जाओ मुक्त हो जाओ कुछ होता ही नहीं है इसलिए निश्चिंत रहो
25:36
ऐसा डरे डरे मत जियो बस
25:58
थोड़ा नाचवाच के अपने गमों को भुला लेते हो। है ना?
26:04
अरे रहने दो ना अपने गमों को। गमों के साथ नाचो साले को। क्या जाता है? गम ही तो है यार। और क्या है?
26:16
हर चीज से भय है।
26:32
चाहना मत बस जो होगा देखा जाए
27:00
भगवान ही माया बने हैं तो काहे का भय यार हैं?
27:06
जिंदगी खराब कर डाले। और कोई थोड़ी ना बना है यार।
27:16
हां। सांप है रस्सी को समझ के डर रहे हो। अरे
27:24
वो भगवान ही भगवान है। ऐसा भाव रखो। और अभी तो खैर ये भी नहीं। भगवान भगवान तो नहीं चलेगा अभी। है ना? कुछ चाहिए ही वही
27:34
ठीक है। अभी हां जी।
27:41
है कोई नहीं है।
28:01
हम हम
28:35
नहीं नहीं पानी नहीं और कफ आएगा।
28:44
तो जो कभी कुछ चाहता ही नहीं जो कभी कुछ
28:53
चाहता ही नहीं बस
29:00
बस वही केवल वही जीवन मुक्त है। जीते जी मुक्त
29:09
है। बाकी सब बंधे हुए हैं। सब के सब बंधे हुए हैं। सारे देवी देवता मनुष्य
29:18
ये ज्ञानी ये भक्त सब बंधन में जी रहे हैं। मुक्ति भी एक बंधन है। है ना?
29:27
यह सब बंधन में जीता है जो मुक्ति भी नहीं चाहता ना दुनिया चाहता
29:34
है ना परमात्मा चाहता है किसी से डरता ही नहीं किसी लोक में जाने से डरता नहीं नर्क जाने
29:42
से डरता नहीं नर्क उसका गार्डन होता है क्या होता है घूमने जाता है गार्डन जाते हो ना जैसे आप
29:55
क्यों डरना यार नर्क ही तो है यार। क्या है उसमें क्या है?
30:26
तो चाहूंगा मैं तुझे साझ सवेरे मत करते रहना हैं हां
30:34
नहीं चाहूंगा तुझे मैं सांझ सवेरे यस ये फॉर्म में आ गया अमिताज
30:46
सब दर्द है मालूम ये चाहना वहां ना अननेसेसरी के दर्द है जिंदगी जिंदगी के
30:54
जिंदगी भर भिखारी पना दुनिया मिल जाए इज्जत मिल जाए शोहरत मिल जाए लोगों की नजर
31:01
में अच्छा हो जाऊं अपनी फैमिली को खुश कर दूं आज तक साला कोई अपनी फैमिली खुश कर पाया
31:10
बताओ ईमानदारी से तुम खुद ही खुश नहीं हो फैमिली कैसे खुश करो
31:21
पहले खुद खुद तो हो जाओ भैया। पूरी जिंदगी जाती है फैमिली को खुश करने
31:30
में। और वो दुखी आत्मा पूरी फैमिली को खुश करने
31:36
में लगी रहती है। तो दुख इन दुख इज इक्वल टू अनंत दुख।
31:51
और फिर आप स्टेटस में क्या डालते हो मालूम हैप्पी फैमिली
31:58
साला दिखावा करते हो हैं
32:05
दिखावा करते हो पाखंड ये पाखंड हैप्पी
32:12
फैमिली ऐ करके
32:33
जब तक चाहोगे दुखी जिओगे दुखी मरोगे अगला जन्म भी दुखी फिर उसका अगला जन्म भी दुखी
32:40
और अनंत दुख चाह ही दुख है भैया हां
32:47
बच नहीं सकते आप। चाहे कुछ भी चाहो, चाहे दुनिया चाहो, चाहे भगवान चाहो, चाहे स्वयं
32:56
को चाहो, स्वयं को जान लूं, स्वयं को पाल लूं। ये सब दुख है। और आप जिंदगी भर अपने दुखों को मल्टीप्लाई
33:03
कर रहे हो। चाहे अध्यात्म में आके, चाहे संसार में जाके।
33:10
कंटिन्यू चाह रहे हो ना? यह जान लो। अरे आज गुरुदेव ने वो बताया वो जान लूं आज वो हो जाए आज वो हो जाए अरे आप चाहत बढ़ा रहे
33:19
हो अपनी मरोगे हां कभी नहीं फंसना चाहता हूं मैं
33:28
नहीं चाहिए यार हां दुख आ जाए तो सुख भी नहीं चाहिए सेकंड थिंग वो भी है ना मन
33:38
चंचल है शांत हो जाए नहीं चाहिए
33:46
कुछ चाहिए ही नहीं। बहुत हो गया तमाशा।
34:05
क्या विष्णु जमता कि नहीं?
34:08
जमता ना। कैसे नहीं जमेगा ये?
34:18
जिंदगी भर ना ऐसे मल्टीप्लाई करता है आदमी अपने दुखों को खुद ही चाह के चाह के बीज
34:26
हर जगह फेंकता रहेगा चाह का बीज अब ये हो जाए अभी वो हो जाए ऐसा हो जाए वो समझ जाऊं
34:33
वो जान लूं वो भी चाह ऐसा हो जाए वैसा हो जाए अरे मैं अपने में
34:40
आ जाऊं ये भी चाह चाहेगा तो अपने से निकलेगा ना रे पागल तू
34:46
आएगा कैसे अपने में
34:55
लेकिन उल्टा कैसे जी रहा है वो अपने में आ जाओ इसकी चाहो उल्टा हो रहा है
35:02
वहां चाह के कारण चाहेगा तो निकलेगा अपने में कैसे आएगा
35:22
फिर आत्मज्ञानी हो जाऊं। ज्ञान हो जाए से ज्यादा आपको क्या रहता है मालूम? दूसरे मेरे को समझे मैं कि मेरे को
35:31
ज्ञान हो गया है। जिंदगी भर आप यही प्रूफ करते रहते हो। दूसरों की नजर में लगे कि मैं कुछ जानता
35:39
हूं। और मरो साले
35:47
आत्मज्ञानी ऐसा होता है वैसा होता है। आप अपनी ओर ही इशारा कर रहे हो।
36:01
सब मूर्खता है ये।
36:20
तो कुछ नहीं चाहोगे तो कल्याण हो जाएगा, आनंद आ जाएगा, शांति आ
36:27
जाएगी। इस चक्कर में मत रहना। कुछ नहीं चाहोगे तो कुछ नहीं होगा।
36:33
चलेगा हमको लेकिन हम चाहेंगे नहीं है ना नहीं तो वहां पर भी फिर एक लालच
36:42
कुछ नहीं हम इसलिए चाह रहे हैं कि हमको नहीं ही चाहिए इस पॉइंट को याद रखना
36:52
कुछ नहीं हम इसलिए नहीं चाह रहे हैं कि कुछ ना चाहने से फिर परम शांति परम मुक्ति आ जाएगी फिर मरोगे साला
37:03
कुछ नहीं चाहिए। हम इसलिए ऐसा कर रहे हैं कि हमको सच में कुछ नहीं चाहिए। मिल जाए
37:10
तो भी नहीं चाहिए। मुक्ति आ जाए, शांति आ जाए, आनंद आ जाए तो
37:16
भी नहीं चाहिए। भगा देंगे हम। गेट आउट।
37:22
हां। नथी कहां है? न्थी वाले इधर बैठे हैं।
37:29
नको वाले इधर हैं। चाहिए ही नहीं। हां बिल्कुल नहीं। कभी नहीं।
37:39
और आज ही नहीं कभी नहीं चाहना है यार।
37:45
कभी चाहना ही नहीं है। बस मत मिले शांति। बेचैनी में जी लेंगे। हमारा क्या जाता है?
37:56
तकलीफ में जी लेंगे, दुख में जी लेंगे,
38:00
शान से जिएंगे साला। लेकिन ये भिखारी पना नहीं चलेगा।
38:07
बहुत सहेली है अब। क्या
38:40
और
39:00
जीवन भर चिंता चिंता घर गृहस्ती की चिंता फिर भगवान की चिंता
39:11
खुद को जानो उसकी चिंता चिंता नहीं करनी है। इसकी चिंता
39:23
चिता में आदमी जीता रहता है जिंदगी भर
39:39
तो कोई चिंता करो ही मत। चिंता नहीं करनी है इसकी भी चिंता
39:50
नहीं और फिर भी जीवन में चिंता रहे तो चिंताएं
39:57
चली जाए उसकी भी डिजायर नहीं है ना बस
40:07
चिंता से डरेंगे क्या है है
40:42
हमेशा एक चीज याद रखना जैसे अनुभूति की अनुभूति है जो भी है जो आपका है वह आपका है ही उसको आपसे कोई नहीं
40:51
छीन सकता और जो आपका नहीं है वह आपका है ही नहीं
40:58
है ना तो क्या दिमाग लड़ाना मैं हूं को कोई छीन सकता है क्या?
41:10
सहज में जो अनुभव का अनुभव हो रहा है या जो भी कलवल सीखे वो तो है ही ना उसको कोई छीन सकता है क्या? याद करो नहीं करो कुछ
41:19
भी करो भूल जाओ वो तो रहेगा ही जो आपका नहीं है वह आपका नहीं है
41:28
इसलिए निश्चिंत रहो बेफिक्र बेखौफ
41:39
बेखौफ ही बेफिक्र हो पाता है। याद रखना क्या
41:46
निर्भय ही बेखौफ ही बेफिक्र हो पाता है। नहीं तो नहीं हो सकते आप बेफिक्र। वो
41:54
टेंपरेरी बेफिक्र की बात नहीं करता मैं। है ना?
42:00
कि वो जोसो सन्यासी बेफिक्री वाला नाचते हैं ना बेवकूफ समझते हैं पब्लिक को
42:09
वो टेंपरेरी वाली बात नहीं कर रहा मैं बेखौफ ही बेफिक्र होता है
42:18
ऐसे ही नहीं है बेफिक्री और बेखौफ निर्भयता
42:26
बड़ी कीमती चीज है वह अचा से ही आती है। चाह से नहीं आती।
42:42
निर्भयता के लिए सेंस चाहिए। भगवान ही माया बने हैं ना। तो क्यों डरू
42:50
मैं इस माया से, मृत्यु से, दुख से। क्यों डरू साला? जब भगवान ही मृत्यु बने हैं। दुख बने हैं।
42:58
चिंताएं बने तो मैं क्यों चाहूं कि यह चिंताएं ना हो, मृत्यु ना हो, दुख ना हो।
43:08
भगवान ही माया बने ना तो काहे का डर? किस चीज का डर?
43:16
और हम तो बोलेंगे भगवान ना भी बने हो माया तो भी काहे का डर? किस चीज को डरू मैं?
43:24
हो गया डर डर के बहुत जी लिए। नर्क ही जाएंगे ना चलेगा
43:31
खुशी-खुशी जाएंगे।
43:42
नर्क को भी आजाद कर देंगे साला। बस निर्भयता से आती है बेफिक्री।
43:52
तो निर्भयता से बेफिक्री। बेफिक्री से मस्ती असली मस्ती टेंपरेरी नहीं भैया है
44:00
ना क्या राहुल हां
44:14
पिच लो हो जाती है डाउन हो जाए डाउन यार क्या मजे से डाउन होएंगे साला देखा जाएगा डाउन ही तो हो रहा है और क्या हो रहा है?
44:26
है ना?
44:28
मजे से डाउन होना है। अब बार-बार पिच ऊपर करो नीचे हो जाता है। ऊपर
44:36
करो नीचे।
44:47
साला जो चेतना ऐसे अप डाउन होती है ना वो चाहिए ही नहीं। है ना?
44:53
स्तर बढ़ गया चेतना का फिर डाउन हो गया फिर अरे जहन्नुम में जाओ यार तुम तमाशा बाजी
45:02
क्यों
45:18
गुरुदेव मेरे में माया छा गई है मन एकदम हावी हो गया है। अरे हो ही जाए अब
45:28
हो ही जाए साला देखा जाएगा। छा ही जाओ माया और मन दो चार माया और ले आओ
45:36
हजार दो हजार मन और ले आओ छा जाओ अंदर और घुस जाओ अंदर साला देखा जाएगा। देखते हैं
45:44
क्या होता है। छा तो वैसे ही रही है और घुसा दो अंदर
45:54
देखा जाएगा। क्यों? हां।
46:05
गुरुदेव आज अच्छा नहीं लग रहा है।
46:16
अब साला हम गुरु बनके फंस गए। अब हम हो गए डस्टबीन।
46:25
तुमको जब भी वोमिटिंग करनी है तो मिलते हैं हम। है ना?
46:33
आज अच्छा नहीं लग रहा है। आज ये हो गया। आज काम आ गया। आज क्रोध आ गया। आज
46:47
नहीं आप तो गुरुदेव अग्नि हो। आपको तो कुछ नहीं होगा। सब सब जल जाता है।
46:55
ठीक है भैया।
47:07
हम तुम्हारे ये सब चीज से थोड़ी ना डरते हैं। आ जाओ बोलते हैं। सब लाओ बोलते हैं।
47:14
तुम्हारा सबका इंकार नहीं करता मैं। हां। तुम अपना इंकार करते हो। तुम सबका मैं
47:21
इंकार नहीं करता। चढ़ाओ बोलता हूं। ये मेरा भोग है।
47:33
तो अपने में भी यानी ऐसा भोग चढ़ाया करो आ जाओ माया बोलना हजार दो हजार माया एक साथ
47:40
आ जाओ क्या ही हो जाएगा यार बताओ ना इतने बार माया छाई आपको रीमा जी छाई ना
47:48
रीना जी छाई ना इतने बार हो क्या गया बताओ
47:56
तो काहे को तुम बेवजह का चीं करते हो इतने बार मन आपको परेशान किया कुछ किया
48:04
पता नहीं क्या-क्या किया कुछ कर पाया क्या तो करने दो ना यार जो होता है होने दो ना
48:14
अपना क्या जाता है
48:34
मस्त रहो, नाचते गाते रहो, हंसते रहो। है ना? मुस्कुराते रहो।
48:46
करना क्या है? दिखावा नहीं करना। दुख है दुखी भी हो जाना। चलेगा।
48:53
दुख में दुखी ही होना चाहिए। उसमें कोई बुरी बात थोड़ी ना है। है ना? रो देना
49:00
दुखी हो जाना। और दूसरों की नजर में नहीं मैं तो ज्ञानी हूं। दुखी नहीं होता। दूसरों की नजर से मत जीना। वो फॉल्स है
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एकदम। वो खुद को धोखा देना एकदम से। ठीक है ना? अपन अज्ञानी है। क्या बुरा है?
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अज्ञानी तो है यार। उसमें क्या है? क्या बुरा है उसमें?
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खुशी से हैं अज्ञानी अपन कोई दिक्कत नहीं हमको
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जिंदगी भर मेरे को ना कोई प्रॉब्लम ना हो जाए। प्रॉब्लम ना हो जाए।
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जिंदगी भर बस एक ही चीज मेरे को ना ऐसा करूं तो यह मत हो जाए। वैसा करूं वो मत हो
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जाए ना प्रॉब्लम यार हो ही जाए प्रॉब्लम
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तो ठीक है भैया इनफ फॉर फॉर एवर
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जाना नहीं बस ना चाहू कब कुछ
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अब जो कभी कुछ चाहता ही नहीं मैं कभी कुछ चाहता ही नहीं
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आपके मैंने कभी कुछ चाहा ही नहीं है मालूम
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इसलिए मैं आपका आज तक परेशान हुआ ही नहीं और जो परेशान परेशान खेलता है ना वह आपका
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जीव भाव है। जिसने चाहा है।
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आपने एक्चुअल जो आप हो मैं उसने कभी कुछ चाहा ही नहीं।
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ओम
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और फिर कुछ समझमझ तो नहीं रहा पक्का ईमानदारी से
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ओम
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हमेशा मृत्यु को अपने बगल में बैठाया करो ऐसे जिस समय तेरे को आना है तू आ ही जा अभी
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आजा एकदम दूसरे बाजू में दुखों को इधर मृत्यु को इधर
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दुखों को जाओ हिम्मत छोड़ के बोलना पकड़ लेना दोनों
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को जिंदगी भर ये लोग डराए हैं ना
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इनहीं को पकड़ लो देखा जाएगा
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बहुत अच्छी चीज होती है मृत्यु मालूम लो हां हम पहले से डिसाइड कर लेते हैं बुरी
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चीज है। बहुत बढ़िया है वो। एक बार में डिलीट मारती है वो क्या?
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अरे यार देखो रात को चैन से सोते हो। दिन भर का डिलीट होता है। कितना अच्छा लगता है। पूरी जिंदगी का डिलीट हो जाएगा। कितना
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मजा आएगा। हैं? मस्त एकदम बेहतरीन चीज है मृत्यु
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कल को मरते हैं आज ही मरेंगे साले क्या दिक्कत अभी
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क्या है थोड़ा ब्लड ब्लड बाहर निकल जाता है खत्म ब्लड भी थक गया बेचारा अंदर घूमता ही घूमता
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वो भी बेचारा परेशान हो गया है।
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तो जीने के लिए मरो या मरने के लिए जियो। है ना?
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मरने के लिए लोग बस जीते रहते हैं। सिक्योरिटी सेफ्टी फिर आध्यात्मिक सिक्योरिटी है गुरु कौन है?
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आध्यात्मिक सिक्योरिटी मास्टर क्या बोलो मास्टर मैं मास्टर
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कचरा स्पिरिचुअल सिक्योरिटी
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तो असुरक्षा का स्वीकार है ना
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एकदम असुरक्षा को स्वीकार कर किसी भी पल कुछ भी हो सकता है।
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कुछ भी हो सकता है। हमको मंजूरी है। जो होता है वही मंजूर है। क्या
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जो होता है वही मंजूर है। हम इंकार करेंगे ही नहीं।
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कुछ भी हो जाए अच्छा बुरा यह वो वही मंजूर है
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इंकार करना ही नहीं
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अच्छा मतलब सब स्वीकार है। है ना?
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हर एक विचार स्वीकार है। हर एक दुख हर एक सुख जीवन मृत्यु
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संसार भी परमात्मा भी जो जिस पल जो भी हो रहा है सब स्वीकार।
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नहीं भी हो रहा है तो भी स्वीकार।
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और आप ही बताओ ना जो अशांति को स्वीकार नहीं कर पाया वो कैसे शांत हो पाएगा?
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जो अपनी ही अशांति को स्वीकार नहीं कर पाया वो कैसे शांत हो पाएगा?
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और जो मृत्यु से डर रहा है वह कैसे जी पाएगा वो जी ही नहीं सकता ना उसकी जिंदगी में
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मतलब वो बाहर नहीं होगी मतलब कहीं ना कहीं वो डरा डरा ही जिएगा
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जो बर्बाद होने से डर रहा है वो कैसे आबाद हो सकता है?
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हां। जो बिखर जाने से डरता है वो कैसे स्ट्रांग हो सकता है?
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कभी बिखर जाने से मत डरो। आप अपने अनुभवों को भी संभाल के रखते हो। बिखेर दो ना इन हवाओं में।
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उसको भी संभाल। अरे ये अच्छा अनुभव आ गया। अब इसको ऐसे दबोच के रखते हो। गला घोट
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देते उसका। अरे आएगा साला आना होगा तो बिखेर दो एकदम से
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फकीरी एकदम से बेफिक्री।
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हां जी।
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तो देखो भैया
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मैंने इस पल के पहले आज के पहले चलो उत्तर ले लेते हैं। जो भी बोला था वह सारा असर
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झूठ है। फॉल्स है, रॉन्ग है
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और रॉन्ग है। ठीक है? जो हम अभी बता रहे हैं वही एकमात्र
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सत्य है। ठीक है।
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सबको प्रेम प्रणाम।
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एक बार में पूरा चेतन खाली हो जाता है। इसको जिसने सही से सुना ना
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पूरा डीप क्लीनिंग एक बार में जल जाता है। ऐसा पावर होता है सत्संग का। वैसे क्या
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डायनेमिक करते रहोगे क्या जिंदगी भर? उससे कुछ नहीं होता। ये एक बार में साफ
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खत्म। अपरम मुक्तता बस जीवन मुक्तता
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अखंड। मुक्ति से भी मुक्त।
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बंधन से भय नहीं और मुक्ति से भी मुक्त।
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तो सेलिब्रेशन तो बनता है। यस।
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सबको प्रेम प्रणाम।