Prabhu Shree
0:22
जड़ चेतन जग जीव जत सकल राम मैं जान
0:30
देखो देह का भाव ही देह है। मन का भाव ही मन है।
0:39
जीव का भाव ही जीव है। और कोई जीव नहीं है। जीव का भाव ही
0:47
जीव है। आपने जो भाव किया है वही जीव है।
0:52
ठीक। यह दुनिया यह जगत का भाव ही जगत है।
0:59
आपने जो भाव किया यह जगत है वही जगत है।
1:06
ओके तो इसमें राम का भाव करो।
1:15
राम का भाव ही राम है। तो जो खुद को जीव मानते हो, जीव का भाव
1:24
किए हो आज तक उसमें राम का भाव करो।
1:33
राम आपका होना राम है जीव नहीं है।
1:42
राम यानी परमात्मा जो सब में रमा हुआ है। दशरथ पुत्र राम नहीं
1:52
जो सब में रमा हुआ है।
2:03
जो दशरथ पुत्र राम में भी रमा हुआ है। वो आप में भी रमा हुआ है।
2:18
तो खुद में राम का भाव जीव का भाव हटाओ। राम का भाव रखो।
2:58
देह का भाव हटाओ। राम का भाव रखो।
3:10
मन का भाव हटाओ। राम का भाव रखो। हृदय नहीं है। राम है।
3:21
मन नहीं है। राम है।
3:39
भाव रखना है। उस भाव में होना है।
3:53
यह दुनिया नहीं है, जगत नहीं है। राम है। राम का भाव
4:06
मैं तू यह वह सब राम
4:28
जो भी समझ रहे हो नहीं समझ रहे हो राम सब में राम का भाव डाल दो
4:36
सब राम ही है
4:47
आपका होना राम सबका का होना राम
5:04
बस राम
5:30
जो भी अनुभव हो रहा है वो विराम सर्व भाव भज
6:39
देह का भाव हटाओ राम का भाव
6:48
जड़ यह पत्थर है यह जड़ है भाव हटाओ राम चेतन राम
6:58
जीव राम जगत राम
7:05
सब नारायण है सब राम है इस भाव से जियो इसको साधना मत बनाओ
7:14
यह भाव है। प्रेम साधना नहीं होती।
7:34
भाव में होना है आपको। राम के भाव में शुरू में करो। ठीक है।
7:44
करने से बेहतर होना है।
7:58
परशुराम
8:12
आपने इतना स्ट्रांग कर लिया है जीव का भाव कि अपने प्रति
8:17
राम का नारायण का भाव ही नहीं आता आपको।
8:43
और वो केवल मान्यता है।
9:14
तो राम का भाव ही राम है। जीव का भाव ही जीव है।
9:22
कौन से भाव से आप जीते हो वो आपके ऊपर है।
9:30
जिस भाव से जिओगे चेतना वैसी हो जाएगी।
9:36
क्योंकि चेतना न्यूट्रल होती है। क्षद्रता के भाव से जीते हो तो क्षद्र हो जाती है।
9:45
विराट के भाव से जीते हो तो विराट हो जाती है।
9:53
जीव के भाव से जीव राम के भाव से राम।
10:16
तो भैया राम का भाव मस्ट है
10:36
खुद के प्रति सबसे पहले जीव का नहीं राम का भाव
10:42
कि मैं जीव नहीं मैं राम हूं और मैं हूं
10:50
बस डूबो मत ध्यान में आंखें खोलो सब
11:19
तो आप बस गलत भावों से जिए हो। देह का भाव, मन का भाव। बस उसी में राम का भाव
11:27
डाल दो। जब भी मन दिखे राम, देह दिखे राम।
11:34
कुछ छोटा-मोटा जीव का भाव आए, राम। दुनिया दिखे राम।
11:43
सबसे सिंपल। राम रंग में रंग दो बस।
12:07
तो राम राम करने से क्या राम हो जाएगा?
12:10
हां। अरे जीव करने से जब जीव हो गया जो जीव है ही नहीं।
12:19
देह देह करने से देह हो गया। तो राम कैसे नहीं होगा जो है ही
12:34
दिखाओ डंडा डंडा करने से डंडा हो गया
12:41
तो लकड़ी लकड़ी करने से लकड़ी कैसे नहीं होगा पलटना है आपको बस
12:49
बस राम जो नाम आपको परमात्मा का प्रिय है। शिव प्रिय शिव कृष्ण प्रिय कृष्ण राधा
12:58
प्रिय राधा परमात्मा का एक नाम मैं भी है। मैं हूं
13:07
मैं ही हूं। मैं ही हूं। वो प्रिय है वो चलेगा। लेकिन पलटी करना है। है ना?
13:18
और बहुत इजी भाव से पलटी हो जाता है।
13:25
भाव आत्मा के करीब होते हैं। एकदम बहुत इजी पलटी हो जाता है।
13:41
तो बस राम राम करते रहो यार। और कुछ जरूरत ही नहीं करने की। हां
13:52
आप क्या करते हो तुरंत यह बॉडी है अरे बॉडी नहीं है राम है
13:58
ये मन है विचार है ना विचार नहीं मन नहीं राम
14:09
तुरंत आप ये बोलते हो ये दुनिया है कहां है दुनिया भाई पकड़ के लाओ तो
14:18
इसको राम भाव जैसा करोगे
14:24
बस वैसी हो जाओगी जाकी रही भावना जैसी
14:31
प्रभु मूरत देखी तिन तैसी देह का भाव किए हो तो प्रभु देह हो जाता है।
14:40
मन के भाव में मन दुनिया के भाव में दुनिया। सीधा प्रभु का ही भाव कर दो ना
14:53
अब प्रभु की मूरत नहीं प्रभु को ही देखना है बस राम
15:02
सबसे सिंपल बता रहा हूं सबसे सिंपल बच्चा भी कर ले
15:10
शुरू में करना है जैसे ना वह आबिदा बोलती है ना गाने में
15:21
दीवाना बन जाने से भी दीवाना होना अच्छा है होना
15:28
शुरू में करते हो भाव तो अपने आप होने लगता है वो है ना
15:35
अपने आप आता है ना भाव या राम का भाव है परमात्मा का भाव है खुद के प्रति बहुत आनंद आता
15:43
सबके प्रति राम का भाव भगवत भाव फिर वह होने की कैटेगरी में आ जाता है।
15:53
शुरू में करो अपने आप हो जाता है।
16:02
बस राम
16:13
सर्व आत्मा राम ये इनको आप मनुष्य बोलते हो इतने सारे लोग
16:20
बैठे अरे राम कोई मनुष्य मनुष्य नहीं बैठा है
16:27
आप पहले ही गलत भाव रखते हो
16:49
तुम्हारा होना राम है। सबका होना राम है। राम के अतिरिक्त कुछ नहीं है।
17:11
बस राम का भाव ही राम है।
17:18
जो भी आवाजें आ रही है राम जो भी दिखाई दे रहा है राम।
17:26
जो भी जान रहे हो समझ रहे हो राम
17:34
जो भी अपने लिए बेकार बेकार सोच रहे हो राम
17:42
बस पलटी कर दो ना यार
17:56
शांति मिल रही है, आनंद मिल रहा है। राम अशांति है जीवन में उसको भी चेंजवेंज मत
18:03
करो। उसको भी राम बोल दो। मन चंचल है राम।
18:10
शांत है राम। चेंज नहीं करना। वह वैसा ही राम है। वह
18:18
अपने आप होता है। फिर पलटी अपने आप हो जाता है। आप बोलोगे चंचल मन को पहले चेंज करें ना।
18:26
सीधा उसी को राम मन का स्वभाव है। चंचलता। वानर का स्वभाव क्या है? चंचलता। ठीक है।
18:35
वह अपने में सुंदर है। राम। आत्मा का क्या स्वभाव है? शांति।
18:42
आनंद उसको भी राम। है ना?
18:51
और मन मन बोलने से पहले ही राम बोल दो तो और अच्छा है। है ना? ऐसे ही लगा कुछ मन जैसा कुछ आ रहा
19:00
है। अरे राम अरे कुछ बॉडी जैसा फील अरे नहीं वह फील
19:07
नहीं राम। सीधा तुरंत वाला काम है।
19:37
जो भी ज्यादा दिमाग दिमाग लड़ा रहे हो अभी अपना पुराना ज्ञान सीधा उसको बोलो राम
19:45
ये खोपड़ी कोई काम का नहीं है। पलटी करो राम है ना।
19:53
अरे नहीं ऐसा वो वैसा अरे नहीं राम
20:00
कुछ भी सोचोचो मत। अरे दीवाना चाहिए यार।
20:10
है ना? खोपड़ी वाला थोड़ी ना चाहिए। खोपड़ी वालों के लिए नहीं है। यह
20:18
खोपड़ी ज्यादा से ज्यादा क्या कर लोगे? 10 खोपड़ी कर लोगे, रावण हो जाओगे।
20:29
एक राम का हृदय बहुत सोता है। है ना? यह 1010 खोपड़ी का क्या करोगे?
20:50
तो जैसे राम के भाव से जीते हो ना तो अंतर्यामी राम देखता रहता है। हां यार ये मेरे लिए जी रहा है। तो वह भी प्रकट होता
21:00
है हर साइड से। इधर से आप कर रहे हो उधर से वह होता है और दोनों का मैचिंग हो जाता
21:06
है। एक ही है दोनों। आप जीते हो मैं बॉडी हूं बॉडी हूं तो राम
21:16
बॉडी जैसा लगने लगता है और फिर आपको वही फील आएगा बॉडी वाला यार
21:22
ये सब हाथ पैर वाला फील है ना
21:30
तो क्या फील आपको पसंद है उसमें जियो ना यार
21:38
बॉडी घड़ी में भी उसको भी राम। अब आप मन के फील में जीते हो। ये अच्छा ये
21:49
बुरा वो सही वो गलत। अरे कचरा जिंदगी है।
21:56
सीधा राम पलटी करो।
22:10
सर्वत्र राम का भाव बस सारे भावों का अभाव और राम का
22:19
भाव और सारे भावों में बस राम को मिला दो ना वो अभाव हो जाएगा अपने आप हो जाता है
22:29
राम के आते ही सबका सब का समर्पण हो जाता है।
22:36
अयोध्या में राम ऐसे बैठते हैं ना तो सारे जो भी है सारे वानर भरत लक्ष्मण
22:46
जो भी वहां है सब ऐसे झुक जाते हैं। सबका समर्पण हो जाता है। तो आप कब बैठोगे?
22:59
अपने अपनी अयोध्या में अयोध्या क्या है? जहां
23:07
युद्ध नहीं है ना आत्म देश है अयोध्या
23:14
अपने ही आप में बैठो ना राम बस गलत चेयर पर बैठे हो ना
23:24
बस भाव है वह गलत चेयर सही भाव ले आओ
23:41
तो राम का भाव ही राम है। देह का भाव ही देह
24:13
और आप क्या भयभीत रहते हो मैं कैसे परमात्मा मैं कैसे नारायण
24:21
अरे मैं कैसे परमात्मा नहीं यह बताओ ना मेरे को
24:29
जब सब कुछ परमात्मा है तो मैं बस को छोड़ देगा। वह अखंड है ना तो आपको छोड़ देगा क्या?
24:54
तो बस उसी भाव से जियो। है ना?
24:58
तो देखो यहां पलटी हो जा रहा है आसानी से। डंडे को लकड़ी बोलते ही आपको कंफर्म है। यहां उतनी आसानी से क्यों नहीं हो रहा है?
25:13
श्रद्धा की कमी,
25:16
निष्ठा की। आपको कचरा में ही जीना है। आपका इंटरेस्ट
25:25
ही कचरा है तो कौन क्या कर सकता है?
25:35
आपका इंटरेस्ट भगवान नहीं है। नास्तिक हो गए हो, कठोर हो गए हो।
25:54
सीधी सी बात है आपको देह का भाव दिया जा रहा है। आप इसमें जीना पसंद करेंगे अपने
26:02
प्रति कि मैं देह हूं कि अपने प्रति आप मैं राम हूं। इसमें जीना
26:10
पसंद करोगे। बताओ कोई देह वाला है क्या?
26:17
हां तो उसमें जियो ना बाबा क्यों मचमच करते हो
26:24
मैं राम हूं मैं जीव नहीं हूं मैं
26:31
जीव कि राम राम पसंद करोगे ना अब बताओ ये दुनिया है यह भाव अच्छा लगता
26:40
है कि ये दुनिया है दुनिया साला वाहियात नाम ये राम है, नारायण है,
26:52
प्रभु है, अस्तित्व है। ये अच्छा लगता है। बताओ क्या अच्छा लगता है? तो बस वैसे जियो
26:59
ना यार। कितना सिंपल है।
27:19
चॉइस अच्छी रखो भाई। हां भाव अच्छा रखो।
27:27
देखो गौतम बुद्ध बोले थे आप जैसा विचार करते हैं वैसा ही आप हो जाते हैं। अभी आप
27:37
जो हैं तो जो पहले आपने विचार किया था तो अभी आप वैसे हो। ठीक है?
27:48
जामति ता गति। वेद क्या कहता है? जामती ता गति।
27:56
उससे भी गहरा सूत्र है। यह विचार क्या चीज है? भाव। भाव में बहुत फास्ट हो जाता है। विचार में
28:04
बहुत समय लगता है। जैसा आप भाव करते हो वैसा हो जाता।
28:12
भाव और गहरे हो ना विचार से। तो प्रभु का भाव रखो ना अपने प्रति सबके प्रति। राम
28:20
राम राम बहुत मनाना पड़ता है यार आपको।
28:32
मानते हो नखरे बहुत हैं।
28:42
अब मैं जैन मास्टर तो हूं नहीं। डंडावंडा मार दूं फेंक के। वो क्या करते थे? ऐसे डंडा फेंक के मार
28:49
देते थे। किसी को बोध हो जाता था। खिड़की फेंक देते थे उठा के
28:55
हार्डवेयर ठीक नहीं है। अब मजबूर नहीं करना मेरे को।
29:10
तो बस यार एकदम एकदम सिंपल है। बता रहा हूं। धर्म से सरल
29:16
कुछ नहीं होता। बस राम का भाव। जो नाम आपको प्रिय है एक चुन लो है ना
29:24
उसमें दिमाग विमाग मत लड़ाओ बस उस भाव से जियो राम का भाव चुने ना तो शिव दिखे तो राम
29:34
राधा दिखे तो राम कृष्ण दिखे तो राम वहां फिर कॉम्प्लेक्स मत होना है ना मन खेलता
29:43
है मन ही दिखे सीधा उसी को राम बोल देना ना
29:52
शिव चुने तो जो दिखे शिव मैं चुने तो मैं से भिन्न कुछ भी नहीं मैं ही हूं मैं ही हूं मेरे अलावा कोई नहीं
30:01
जो भी आपको प्रिय है ना ज्यादा ज्ञानी कैटेगरी के हो तो बस मैं ही
30:09
हूं मैं ही हूं शरीर दिखे तो मैं मन दिखे तो मैं जगत दिखे तो मैं
30:17
प्रेम वाले हो हृदय वाले हो तो राम राम फिर मैं को मैं मत बोलो उसको भी राम तू को
30:26
तू नहीं राम राम राम
30:44
तो नजर राम पे होती है तो राम जगता अब आपकी नजर धीरे धीरे धीरे राम में पड़
30:53
रही है। भाव से नजर से
30:59
तो वो सब जगह से ऐसे राम भय प्रकट कृपाला दीन दयाला
31:08
वो प्रकट होने लगता है।
31:18
और प्रेम से साधना से नहीं प्रेम से।
32:04
तो यह पूरा भवसागर है भैया। है ना? भावों का सागर है। दुनिया भर के
32:13
भाव हैं आपके अंदर। तो जो लंका गए राम जी
32:23
सागर पार करते करते कैसे किए? हर पत्थर में क्या लिखा था?
32:30
तो देह भाव का पत्थर उठाओ राम। मन भाव का पत्थर राम। उतरने लगता है।
32:40
हल्का हो जाता है। बस चुपचाप उस भाव से जियो ना।
32:53
अब आपका क्या रहता है? नहीं। पहले कंफर्म हो जाए फिर जिएंगे।
33:01
पहले थोड़ा सा क्लियर कर लेते हैं। समझ लेते हैं। फिर
33:08
जी तुम फिर समझदार हो दीवाने नहीं हो
33:19
अरे समझ गए जान गए है ना उसके बाद क्या मतलब है उस चीज का
33:27
हां मतलब तो आपको क्या रहता है ना थोड़ा भी
33:37
रिस्क लेना ना पड़े है ना और परमात्मा क्या देखता है आपकी दीवानगी
33:47
देखता है हां यार ये अंधाधुंध भरोसा कर रहा है मेरे पे वो देखता है वो
33:55
यह ज्यादा मेरे को चेक कर रहा है वह नहीं देखता उसको पसंद नहीं है ज्यादा कंफर्मेशन
34:05
ज्यादा ही बस कंफर्म करेगा और फिर जंप मारेगा।
34:14
उसको कंफर्म होता ही नहीं है। सही बताऊं तो
34:25
आपकी तरफ से वह रिस्क, वह दीवानगी दिखनी चाहिए। अंतर्यामी
34:35
अरे राम हो ना हो हमको यह जीने में मजा आता है बस है ना वो दीवानगी वो पागलपन
34:50
तो बंदगी तो अपनी फितरत है परमात्मा हो या ना हो
34:57
वह चाहिए यह सुने हो ना शेर
35:15
तो परमात्मा है नहीं है यह भाव भी आ रहा है तो इस भाव को भी राम
35:21
समझ रहे हो ऐसे पागलपन से पलटी करो
35:30
अरे यह सही है, गलत है। अरे राम है। सही गलत कुछ नहीं। मन में कोई भी विकार उठ रहा
35:37
है। सीधा वहीं पर उसको राम बोलो। क्रोध आ रहा है। काम आ रहा है। तुरंत राम।
35:46
अरे वो कैसे पलटी होता देखो। कोई विकार छू नहीं पाएगा। बता रहा हूं। बस
35:55
वह भाव रखो राम। जेलसी आ रही है, जो भी आ रहा है, द्वेष आ
36:02
रहा है, राग आ रहा है, राम पवित्र हो जाता है। मालूम शरीर तक पवित्र
36:11
हो जाता है। उसको राम बोलोगे ना एकदम पवित्र लगेगा। शरीर ऐसे लगेगा कि साला यही आत्मा है।
36:20
इतना पवित्र लगता है। हां। मन आपको लगेगा कि यही यही राम है, यही
36:28
आत्मा है। इतना पवित्र हो जाता है। जो मन अभी आपको बड़ा डिफिकल्ट सा उलझाउलझा
36:38
लगता है ना वो ऐसा सुलझा हुआ शांत और पवित्र लगेगा ना। बोलोगे आ
36:50
बस राम भाव। यह पत्थर वत्थर दिखना बंद हो जाता है। बता
37:00
रहा हूं। इसको जड़ समझते हो ना आप? डेड ना एहसास होने लगते हैं। पत्थरों का एहसास
37:07
होने लगता है। बस राम
37:14
जड़ राम चेतन राम जीव राम जगत
37:21
मैं राम तू राम यह राम वह राम
37:29
जो भी दिख रहा है राम जो सुनाई दे रहा है राम
37:35
जो भी जान रहे हो समझ रहे हो राम बस
37:43
भाव राम का और सब राम ही है पहले से
37:49
बस आपने जो गलत भाव रखे हैं अपने प्रति जगत के प्रति वह चेंज हो
38:06
ओम
38:26
तो जामती ताकति तो भाव तो कितना फास्ट होगा सोचो जब विचार
38:34
में यह पावर होता है तो भाव का पावर क्या होगा जैसा भाव करते हो सब वैसे ही हो जाता है
38:42
बहुत जल्दी होता है भाव बहुत फास्ट
39:00
और भाव बस से भगवान भाव के बस में होता है भगवान
39:10
भाव ले जियो यार है ना प्रेम ले भाव
39:21
जिंदगी भर समझते ही मत रहो। है ना?
39:29
कि जब समझ जाएंगे कभी तब डूबेंगे।
39:40
समझे ना समझे डूब जाते हैं। समझे
39:47
ना समझे डूब जाते
40:03
यार अपने प्रेमीप्रेमिका के साथ कभी बैठे होगे तो उसको आप ऐसा बोलते हो क्या यार तेरे को
40:11
पहले पूरा समझ लेता हूं जान लेता हूं।
40:18
फिर अपन गले से लगाएंगे। भगा देगी।
40:35
तू थोड़ा ना यहां गलत है। यहां सही है। ज्यादा अगर तुम किए भगा देगी।
40:46
प्रेमी मिलता है। वह देखता है सीधा गले से मिलता है। ये
40:52
जहन्नुम में जाए जानना समझना सही गलत और सीधा डूब जाता है। सोचता भी नहीं है।
41:01
इतना सीधा डूब जाता है। बस वैसे सिंपल
41:07
अस्तित्व के प्रति भी बस ऐसे ही भगवत भाव।
41:13
राम बोलो डूब जाओ खत्म
41:43
अब थोड़ा समझना और सोचना थोड़ा कम तो हो गया है। बचा है थोड़ा सा बचा है। मेरे को
41:49
ग्राफ दिखता है ना सबका हल्का-हल्का बचा है अभी भी।
41:56
ठीक है देखते हैं क्या होता है। उसको भी राम ही बोलो। है ना?
42:05
अरे मट्ठर हो गए हो पूरा।
42:26
अभी क्या बचा है मालूम आपको? जंप तो करना है लेकिन पीछे रस्सी बांध के करना है।
42:54
ये कितना सेफ खेलोगे यार। हैं? कितनी सेफ्टी चाहिए और आपको?
43:12
एक बात बताओ थोड़ा सेंस भी होना चाहिए। बुद्धि भी है चलो उपयोग कर रहे हो तो सही
43:19
उपयोग करो ना। देह भाव से जिओगे तो मरोगे कि राम भाव से जिओगे तो मरोगे।
43:27
देह भाव से जिओगे तो मृत्यु तय है। कोई कैसे मर सकता है?
43:39
है कि नहीं?
43:43
अब जीव भाव से जिओगे तो घुटन में जिओगे ना जैसे हाथी की आत्मा को साला चींटी के शरीर में डाल
43:52
दें। है ना?
43:59
घुटन है ना छोटा सा एरिया में जीना बस मैं जीव हूं पापी पुण्य आत्मा हूं ऐसा हूं वैसा
44:09
हूं मतलब बदबू मारता है
44:17
अब राम भाव से मैं सर्वत्र हूं राम हूं राम ही राम राम ही राम
44:25
मैं अनंत राम हूं अरे पवित्रता ही पवित्रता
44:32
मंगल ही मंगल मंगल भवन अमंगल हारी
44:54
तो मेरे साथ क्या दिक्कत होता था मालूम मेरे को ओसो से भयंकर प्रेम अतिशय प्रेम
45:03
और राम का मूर्ति देखता था या रामायण वगैरह पढ़ता था मैं बचपन में वो भी उससे
45:10
भी बहुत प्रेम ठीक अब इधर ओसो तो ओसो है
45:19
अब गुरु बोल रहा है यानी आप काट ही नहीं सकते वो कई बार कुछ भी बोल देते थे
45:31
तो इधर मेरा भाव मरता था और मेरे लिए प्रथम ओसोई ही थे भाई बचपन से
45:41
लेकिन इधर राम से भी प्रेम रामायण से भी प्रेम होने लगा अब वो बोल दिए तुलसीदास कवि है
45:49
ऋषि नहीं है हद है यार
46:02
पढ़ते ही हो तो वाल्मीकि रामायण पढ़ो। ऐसा बोले हैं एक जगह बोले हैं वो
46:10
तो ठीक है भैया। वाल्मीकि रामायण भी पढ़ा मैं थोड़ा ही पढ़ पाया। ज्यादा मेरे को आनंद
46:17
नहीं आया उसमें। महर्षि मुक्त है लाइफ
46:26
तो रामायण महेश से महेश्वर बनाती है ऐसा बोल दिए वो तब मेरे को राहत मिला
46:40
तो उस चीज को देखो आप भाव कैसे काम करते हैं गुरु बोल दिया तो वो भाव हट गया फिर
46:48
एक और गुरु गुरु आया लाइफ में बोले तो भाव एकदम से आ गया उस चीज को देखो आप
46:55
तो एक भाव मेरे को ब्लॉक किया है ना महर्षि मुख तो बाद में आए मेरी लाइफ में
47:04
बहुत बाद में आए उनकी किताब भी मिल गई थी बट मैं बहुत बाद में पढ़ना शुरू किया
47:10
तो वो भाव ऐसे चेंज हुआ राम का भाव
47:21
तो फिर मैं तो दिमागी नहीं लड़ाता था। कोई कैसा भी हो सीधा राम तुलसी भी राम
47:29
वाल्मीकि भी राम। ओसो भी राम सब राम।
47:38
वो जीने में मजा आने लग गया। है ना? यह सही वो गलत। नहीं यार यह भी राम
47:45
वह भी राम। ज्यादा करेक्शन करना ना वही गड़बड़ है।
47:53
यह सुधार लो वो ठीक कर लो। अरे क्या ठीक कर लो यार सब बिखर जाता है यार।
48:00
दैहिक जिंदगी है कितना? कितना क्या सेट करोगे आप? है ना?
48:11
बस सेटिंग करनी है आपको। तो यंगस्टर लोग क्या बोलते हैं? अरे मेरी
48:20
सेटिंग हो गई। सेटिंग
48:31
ये कितना बेकार बात है। प्रेम को आप क्या बोल रहे हो यार?
48:37
मेरी सेटिंग हो गई। सेटिंग
48:50
हां सीधा बोल देते हैं भाई इधर ना देखियो ऐसा
49:06
तो फिर दूसरे लड़के क्या बोलते हैं फिर मालूम अरे जिसको तो 100 200 देख नहीं रहे हैं, ताड़ नहीं रहे हैं।
49:16
उसमें क्या दम है? उसको क्या सेट किए हो तुम?
49:26
चलो बहिरंगी मत हो। इसको भी राम। ठीक है। तुरंत बहिरंगी होते हो यार। थोड़ा सा बात।
49:35
सब में राम का भाव। यानी दुख आए तो राम, मृत्यु आए तो राम,
49:51
सुख आए तो राम, जीवन है तो ये राम। भाव से जीवन अरे तारतार हो जाओगे। हां।
50:01
क्या रस होता है लाइफ का, अमृत का। अरे तुरंत पान करोगे उसका। हां।
50:10
जानत हो तुरंत प्रभावा इसका प्रभाव तुरंत आने लगता है। तुरंत भाव से बहुत फास्ट आता
50:18
है। याद रखना
50:27
मन में कोई द्वंद है। बस राम सारे द्वंद राम से ही कटते हैं।
50:35
नहीं तो नहीं कटते।
50:44
द्वंद नहीं है, समाधान है तो वो भी राम।
51:12
तो देखो जो भी दुख उठता है वो राम से ही उठता है इसलिए चला भी जाता है ना
51:21
और जिस समय वह दुख है आपको दुख उस समय भी वह राम है
51:28
चेतना में कुछ भी नहीं टिकता है जैसे आकाश में ऐसे छोड़ दो इसको तो यह गिर जाएगा ना
51:37
है ना तो चेतना राम है जो उसमें कुछ भी नहीं टिकेगा हमेशा याद रखना
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कुछ नहीं टिकेगा दुख है सुख है पाप पुण्य कुछ भी है सब ऐसे गिर जाता है
51:57
वहां ज्यादा देर रहता ही नहीं
52:15
तो सब ग्राम बाण चलाओ सब पलटी हो जाता है।
52:35
और आपकी आंखों से राम ही तो देख रहा है। परमात्मा ही तो झांक रहा है आपकी आंख से।
52:45
आपको लगता है कि आंखें देख रही हैं। मुर्दा देखता है क्या?
52:53
राम ही देख रहा है। राम ही सुन रहा है। इवन समझ भी बुद्धि नहीं रही है। राम ही
53:02
समझ रहा है। राम ही है।
53:33
सब में रमा हुआ है बस आप में भी सब में भी
53:58
मैं का ही दूसरा नाम राम है। है ना?
54:03
मैं आत्मा भगवान का ही दूसरा नाम
54:18
तो शरीर में से मैं को निकाल दो। शरीर बचता है क्या?
54:27
सारे दृश्य में से दृष्टा को मैं को निकाल दो। दृश्य बचता है क्या?
54:36
सब में मैं रमा हुआ हूं। शरीर में हर दृश्य में मैं रमा हुआ हूं। बस वही राम है
54:43
ना राम ही इधर रमा हुआ है। शरीर में सब जगह रमा हुआ है।
55:00
तो मैं को ही आप कुछ माने हो। शरीर माने हो, मन माने हो, दुनिया माने हो।
55:08
मान्यता ही माया है। है ना? राम को ही आप कुछ माने हो।
55:17
तो जो भी राम को माने हो शरीर, मन, दुनिया उस मान्यता को
55:25
अब राम कहते जाओ ना क्योंकि वह राम ही है। माया को भगवान कहते जाओ।
55:34
माया से फाइट नहीं करना। बचना है मत बोलना।
55:40
माया को बिल्कुल राम जान
55:46
पलटी करते जाओ और भाव से बहुत फास्ट है।
56:00
खाओ तो राम। देखो तो राम अन्नम ब्रह्म बोलते हैं ना हम
56:07
क्यों बोले भाई अन्न को ब्रह्म क्यों सनातन ने वृक्षों की भी पूजा की
56:15
पत्थरों की की सब राम है ना यार वो भाव है प्रेम है
56:31
और आप भी आप सहित सारा चराचर राम अपने को मत छोड़
56:38
देना वो मिस्टेक हो जाएगी नहीं तो आप सहित
57:06
यार कॉमन सेंस से जिया करो। किसी एक मनुष्य के प्रेम में आप पड़ते हो जो आपके प्रेमी प्रेमिका है।
57:14
जब उसको आप भाव से देखते हो, प्रेम से देखते हो, वह आपको भाव से प्रेम से देखता है
57:23
तो कितना आनंद आ जाता है लाइफ में। तो पूरे अस्तित्व के प्रति भाव रखो ना।
57:32
प्रेम से देखो निहारो राम का भाव रखो
57:43
उधर से भी वो भी देखता है। हां
57:49
प्रथम प्रपोज तो आप ही को करना पड़ेगा। हां नियम है यह।
58:03
पहल आपको करनी पड़ेगी।
58:18
एक शख्स के साथ प्रेम में जीने में इतना आनंद आता है। तो पूरे अस्तित्व के प्रेम
58:25
में कैसा आनंद होगा सोचो। यार अब तो बस सब सब नारायण है।
58:35
इसी प्रेम में जीना है।
58:54
सहन नहीं कर पाओगे। मालूम अस्तित्व का प्रेम दहिक और मनुष्य वाला प्रेम तो छिछला रहता
59:04
है थोड़ा देर का बस
59:13
यानी सोचो करोड़ों प्रेमिकाएं आपको प्रेम कर रही है वह भी कम है
59:22
ऐसा प्रेम है अस्तित्व बस पूरे एक्सिस्टेंस के साथ में प्रेम में
59:30
जियो। उसको यह मत सोचो कि अस्तित्व कोई डेड चीज है। कोई
59:38
यह भगवान है। है ना?
59:44
यह पूरा हृदय है। अस्तित्व हृदय है। जो आप अपने हृदय में महसूस करते हो ना।
59:53
पूरा अस्तित्व हृदय है। एकदम बहुत नाजुक मामला है।
1:00:09
बस प्रेम से जी लो। कुछ समझना ये वो के चक्कर में मत रहो। शांति से, प्रेम से,
1:00:22
भगवत भाव से जीना शुरू कर दो।
1:00:42
तो इफेक्ट पहले पैदा करो। कॉज एंड इफेक्ट बोलते हैं ना आपको पहले कारण चाहिए। नहीं नहीं नहीं
1:00:51
इफेक्ट पहले
1:01:00
तो एक जगह बोले थे मित्र मत खोजो आनंदित रहने लग जाओ तुम्हारे मित्र बन जाएंगे।
1:01:08
ऐसा बोले हैं भगवान कहीं पर भगवान श्री
1:01:14
तो बस इफेक्ट पहले पैदा कर दो कि मैं स्वयं परमात्मा हूं। सब कुछ
1:01:24
परमात्मा ये इफेक्ट पैदा कर दो। बाकी प्रेम, रस, भक्ति, ज्ञान वो सब अपने
1:01:33
आप आ जाएंगे। अपने आप है वह सब फल है वह। अपने आप आ जाता है इस वृक्ष।
1:01:58
जो लक्ष्य है उसको पहले पैदा कर दो इफेक्ट
1:02:04
वो कारण जो ऊपर ऊपर के कारण है वो अपने आप आ जाते हैं। आप क्या सोचते हो? भक्ति
1:02:12
मार्ग से जाएं। ज्ञान मार्ग से, प्रेम मार्ग से, योग मार्ग ना। यह फैक्ट्री पैदा कर दो सीधा। नारायण को
1:02:20
ही ले आओ सब जगह। अरे यह तो सब अपने आप दौड़ के आते हैं।
1:02:46
क्योंकि राम का भाव ही राम है और जीव का भाव ही जीव
1:03:00
बस राम का भाव से नारायण के भाव से कि नारायण
1:03:07
नारायण नारायण
1:03:15
कि मैं नर नहीं नारायण हूं। जलस नारायण थलस नारायण सर्वस्व
1:03:24
नारायणा भीतर बहिष् नारायणा
1:03:29
वो भाव वो इंपॉर्टेंट है तो महर्षि मुक्त पहले सत्संग कराते थे ना
1:03:37
तो नारायण उपनिषद पढ़ते थे उसमें पूरा है भीतर बाहर सब नारायण है
1:03:47
रुद्र नारायण है ब्रह्मा नारायण है सब नारायण है जीव नारायण है ऐसा पढ़ते थे वो
1:03:55
फिर सत्संग शुरू करते हमेशा अब मेरे को तो पढ़ने आता नहीं संस्कृत
1:04:03
वरना मैं भी पढ़ता उससे क्या भाव बैठ जाता है आपका
1:04:13
इफेक्ट आपने पैदा कर दिया नारायण का है ना तो अब सब अपने आप अच्छा होता है।
1:04:36
क्या बोला हूं मैं?
1:04:43
हां वो उनकी संस्कृत अच्छी है। वो पढ़े थे। यस याद है मेरे को
1:04:54
तो वो भाव पहले पैदा कर दो है ना आप पहले क्या पैदा करते हो अरे मैं
1:05:01
जीव हूं अरे मरे आप पहले क्या भाव पैदा करो मैं नारायण हूं
1:05:10
राम भाव ही पहले इफेक्ट को पहले पैदा कर दो थोड़े स्मार्ट बनो। है ना? क्या स्मार्ट?
1:05:23
हां। बेवकूफों का काम नहीं है। यहां
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क्योंकि मूर्खता परमात्मा को पसंद नहीं है। दीवाने पसंद है। मूर्खता पसंद नहीं
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है। वो ज्ञानवान है ना उसको मूर्खता कैसे मैच करोगे उसमें?
1:06:01
थोड़ा इंटेलिजेंस चाहिए ना तो मैच आएगा ना।
1:06:07
और दीवानगी चाहिए तो प्रेम का मैच आएगा।
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तो भगवत भाव है ना
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मतलब क्या भाव से जिए लोग देखो जलस से नारायण अब नारायण के भाव से जल पीना
1:06:38
कितना आनंददाई है सोचो वाटर पी रहे हैं। वाटर
1:06:46
वैसे ही वाहियात कर दिया। मिनरल वाटर
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अब थलस से नारायणणा अब भाई धरती मां है ना यार
1:07:04
अब उसको और गहरा कर दिए नारायण जगदंबा तो कितना प्यार आता है। धरती में चलोगे ही
1:07:13
तो साला सुकून मिलता है। है ना? वो धरती
1:07:18
बोल के एकदम से फीका फीका लगता है।
1:07:24
जीने में ही आनंद आ जाता है। इसमें
1:07:43
आकाश देखते हो तो इसको नारायण स्वयं को देखते हो ना कभी भी स्वयं को याद
1:07:54
रखना शूद्र के भाव से नहीं देखना जीव के भाव से नहीं देखना ये छोटामोटा कुछ
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है या मैं कोई प्राणी हूं नहीं एकदम तुम जैसे ही खुद को देखो नारायण नारायण
1:08:10
अरे बोलो नारायण खुद के प्रति नर का भाव नहीं
1:08:19
नारायण बस नारायण नारायण ऐसे खुद के प्रति देखतेदेखते करोगे ना अरे मिनटों में काम
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होता है हां एकदम
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बस नारायण सबके प्रति भी नारायण
1:08:43
कुछ अच्छा हो रहा है बुरा हो रहा है नारायण हां उसका रिएक्शन दो व्यवहार में है ना वह
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भीतर भाव रखो नारायण गलत को गलत बोलो सही को सही बोलो व्यवहार में यह गलत है यह सही
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है लेकिन भीतर भाव तो वह थे ना हमारे नारद मुनि तो वह भिड़ा
1:09:09
देते थे एक दूसरे को और फिर चुपचाप नारायण नारायण बोलते निकल लेते थे
1:09:17
कि यार ये भी नारायण है आग लगा देते थे वो कहीं भी जाके
1:09:27
तुम यहां क्या कर रहे हो वहां तो ऐसा कर रहे हैं है ना राक्षस लोग वैसा कर कर रहे हैं।
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देवताओं को अलग मिर्ची लगा देते थे। फिर नारायण नारायण बोल के
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खिसक लिए। मतलब वो है कि आखरी में वो भूलते नहीं थे
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कि यह भी नारायण है। अरे मेरे जिंदगी में मेरे को ये रोल मिला है। वो करता हूं मैं
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आग लगाने का। लेकिन यह भी नारायण है। है ना?
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आप साधना करते उसमें आनंद आता है कि इस भाव में आनंद आता है। इतना आनंद है इसमें।
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इसमें रस ही रस पैदा हो जाता है।
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सबको लपेट के इसमें डाल दो नारायण के भाव। आपका पास्ट जैसे पास्ट को देखो अपना 50
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साल, 100 साल, 20 साल सीधा नारायण। राम
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है ना उसको अब अपना पास्ट मत बोलो
1:11:11
हां नारायण देखो कैसे पलटा जैसे ही आप अपना पास्ट बोले फिर मेरे को
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ये किए लोग वो हुआ ऐसा हुआ मेरा पाप मेरे पुण्य अरे गड़बड़ कर दिया है ना जैसे ही
1:11:29
पास्ट का भाव आया सेंस आया अरे राम नारायण नारायण ऐसे महकने लगेगा फिर
1:11:40
एक बार में सारे पाप पुण्य कट जाते हैं एक बार में इसमें
1:11:46
समझ रहे हो आप क्या सोचते हो इतने पापों को कैसे काटेंगे
1:11:52
अब गड़बड़ हो गया साहब पास्ट में नजर गई भाग गया सीधा राम
1:12:06
भविष्य राम वर्तमान राम
1:12:27
तो नजर बदली नजारे बदल है ना
1:12:57
और कंफ्यूज मत करना खुद यह गुरु ने वह बोला वो गुरु ने अरे नारायण उसने जो बोला
1:13:05
नारायण वह भी नारायण यह भी नारायण ऐसे मेल्ट कर दो ना सब
1:13:25
द्वैत नारायण अद्वैत नारायण
1:13:37
नारायण नारायण
1:14:11
शाकारकारम शांति के आकार वाले हैं। नारायण का आकार क्या है?
1:14:21
शांति का आकार देखो कैसा विराट है।
1:14:35
आपका होना है।
1:15:25
ओके प्रेम प्रणाम
1:16:37
भगवान के पास ना भाव ले जाया जाता है।
1:16:44
बस भाव और प्रेम
1:17:02
और भगवान के पास भगवान का ही भाव ले जाया करो। है ना?
1:17:11
आपका स्वयं ही वह भगवान है। उसके पास भगवान का ही भाव नारायण
1:17:21
आ ना बस
1:17:38
ओके प्रेम प्रणाम
1:17:51
तो नाउ यू सेलिब्रेट