Prabhu Shree
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[संगीत]
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[संगीत]
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तो मेरी बातें अगर डायरेक्ट क्लिक नहीं होती या उसकी अनुभूति नहीं होती
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तो अनुराग सहित निरंतर
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भगवत स्मरण है ना उससे कल्याण हो जाता है
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और भगवान का स्मरण
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इवन किसी कल्याण के लिए भी नहीं भगवान को पाने के लिए भी नहीं
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नाम ही भगवान है। नाम आपने लिया बस वह आप भगवान देश में आ
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गए। हां
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नाम लिए और भगवान देश आ गया। यस।
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भगवान का जो भी नाम आपको प्रिय हो बट जैसे राम नाम प्रिय है तो आप सहित सारा
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चराचर राम है। कृष्ण प्रिय है। आप सहित सारा चराचर कृष्ण
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है। जो भी नाम आपको प्रिय हो आपको मैं हूं
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जमता है। मैं तो सर्वत्र मैं हूं। मैं हूं इस भाव में
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तो अनुराग सहित अखंड नाम स्मरण।
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खुद के प्रति जीव का भाव नहीं शिव का भाव। जगत के प्रति शिव का भाव।
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राम का भाव अपने आप
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सारा समाधान उतर जाएगा। ये नाम की शक्ति है।
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नाम लोगे श्रद्धा के साथ लो, बगैर श्रद्धा के साथ लो। वह अपना काम करता ही है।
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जैसे आग में हाथ डालोगे तो आग जलाएगी ही ना। हर वस्तु का अपना पावर होता है।
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विष पियोगे तो मरोगे। अमृत पियोगे तो अमर हो जाओगे। नाम लोगे तो ततक्षण भगवान देश में आ
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जाओगे। लेते समय ही आप आ जाते हो। आपको पता नहीं
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होता है। यह बहुत मार्मिक बात है। जैसे ही बोले राम
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आप राम देश में आ गए। अब जीव देश नहीं है।
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आप छोटा मोटा समझते हो नाम को। दुनिया भर का पढ़ लिए इधरउधर।
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तो अनुराग सहित निरंतर नाम स्मरण अखंड नाम स्मरण
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अनुराग यानी प्रेम सहित भाव सहित
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बस आनंद लो नाम लेने का हरे कृष्ण प्रिय है तो हरे कृष्ण कृष्ण जपा करो पूरा हरे
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कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे बट एक कोई भी
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नाम को धारण करो अपने जीवन में वो नाम नहीं है पागल भगवान है
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हल्के में नहीं लेना इसको आप सोचते हो राम का नाम है अरे वह नाम नहीं है वह भगवान है
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आपको अगर मेरी बात पर श्रद्धा नहीं है तब भी वह भगवान है।
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अपने डेली लाइफ में बस नाम
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से नाम ही जुड़ा होता है। भगवान जुड़ा होता है
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और भगवान का रूप नाम के आधीन है। यह याद रखना
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रूप के आीन नाम नहीं नाम के आीन रूप है। नाम लोगे तो उसका रूप भी प्रकट हो जाएगा।
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तब यह संसार नहीं लगेगा। यह भगवान का रूप लगेगा। यह पूरा अस्तित्व
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और आप भी और तब आपको भगवान की लीला
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प्रकट होगी। भगवान हर जगह कैसे लीला कर रहे हैं। आप में सब में
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और तब आप हमेशा भगवान के धाम में रहोगे। नाम रूप लीला धाम
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अब वह कैसे नाम लेना है उसमें दिमाग नहीं लड़ाना बस प्रेम से आनंद से सुमिरत होए
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आनंद हमारा हां
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मन ही मन ले उपांशु ले स्वास को देखते हुए
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ले अरे जैसे लेना है लो सब चलेगा
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वहां कोई ऐसा नियम कादा नहीं है। चिल्ला चिल्ला के लेना है। चिल्ला चिल्ला
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के लो। भगवान का नाम इंपॉर्टेंट है।
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मन में लेना है मन में लो।
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अनुराग सहित अखंड नाम स्मरण नाम सब सब चीजों के कर देगा। अंतःकरण
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शुद्ध कर देगा। नाम लोगे तो नाम तुरंत संत से मिला देता
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है। नाम का पावर होता है।
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नाम यानी भगवान और उससे यह उम्मीद मत रखना कि यह कर देगा,
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वह कर देगा। बट ऐसा होता है।
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बस नाम लेते रहो मस्त रहो नाचते रहो गाते रहो नाचने गाने वाले भगवान को बहुत पसंद
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है। हंसते रहो, रोते रहो। सीरियस नहीं होना। है ना?
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तो जैसे सुपूत कुत हो जाता है ना माता कभी कुमाता
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नहीं होती है ना
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ऐसी नाम है आप यानी बुरे भाव से भी बोलोगे ना अरे राम राम यार
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ये आया क्यों यहां पे ऐसा बोलते हैं ना अपन उसका भी प्रभाव होता है अच्छा
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क्योंकि भगवान का नाम है एक नाम को अपनी जिंदगी में धारण करो।
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नाम की दीक्षा विक्षा कुछ लेने की जरूरत नहीं। नाम खुद भगवान है। खुद गुरु है। परबह्म है।
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बस प्रेम से धारण कर लो। वो खुद गाइड कर देता है शब्द। हां।
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और उसका निरंतर जप करते रहो। मन ही मन करो, वाणी से करो जैसा आपको भाव।
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आप क्या करते हो मालूम है?
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अब खुद के प्रति भी तो आप खुद को एक नाम देते हो। शरीर जीव
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गलत सुना हुआ है आपने। अब खुद में अपन अपना नाम चेंज कर रहे हैं।
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शरीर को क्या बोल रहे हैं? राम। जीव को क्या बोल रहे हैं? राम।
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इस जगत को क्या बोल रहे हैं? राम। अब आप राइट लिसनिंग आ रही है।
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सब में राम की भावना और राम राम। बस
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तो जुबान पर राम कानों में राम नाम जा रहा है। सारे भावों में राम जा रहा है।
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सब राम ही राम हो जाता है ना यार। क्योंकि है ही
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और वैसे भी निरंतर आप कुछ ना कुछ जप करते ही रहते हो। दुनिया का जप करते हो या मैं बॉडी हूं। बॉडी हूं का जप करते हो। स्त्री
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हूं, पुरुष हूं, अच्छा हूं, बुरा हूं। यह भी तो जप ही कर रहे हो। सुना सुनाया बस निरंतर दोहरा रहे हो। मैं सही हूं, गलत हूं। मैंने पाप कर्म किए,
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पुण्य किए तो सही जप करो ना यार। सीधा भगवान का ही जप करो ना।
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इतना आसान है।
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दसों दिशाओं में मंगल होता है। मंगल दस भाव कुभाव किसी भी ढंग से भगवान का नाम लो
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उसका असर होता ही है। श्रद्धा से लो तो और उत्तम प्रेम से लो तो
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और उत्तम बट लो
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नाम भगवान को धारण करो अपने जीवन में।
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मन में राम का नाम अरे अब मन को मन मत बोलो मन को ही राम बोल दो
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स्वासों में राम का नाम अरे स्वास क्यों बोलते हो इसको इसको सीधा राम बोलो ना
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प्राण क्यों बोलना वाणी से राम अरे वाणी भी राम
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और नाम भी राम
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अब राम और राम दो राम के बीच में एक गैप है। वह भी राम।
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बस अखंड अनुराग सहित अखंड नाम स्मरण
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यह आपका सब काम कर देगा। धैर्य रखना
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और कुछ काम कर दे इस भाव से नहीं जपना।
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नाम ही भगवान है और उसका आनंद लो जपने का।
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बस राम राम राम अब इसको भीतर मत बोलो आंख बंद करते हो आप
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तुरंत बोलते हो भीतर तुरंत बोलो राम आंख खोले बाहर मत बोलो राम
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पूरा पलटी कर दो बस
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तो नाम ही भगवान है। भगवान ही नाम है।
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जैसे आप बोलते हो मैं तो मैं शब्द से मैं अलग थोड़ी ना है।
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शब्द और उसका अर्थ एक ही में है ना। ऐसे राम बोले तो राम अलग नहीं है। अब राम
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नाम से हां
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बाकी साधनाएं ये वो बचकानी है। आप यह देखते हो, वह देखते हो, वो क्रिया योग वो
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करते हो। हेल्थ के लिए सब कर लो। साधना भी करनी है तो स्टैंडर्ड होना चाहिए कोई
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है ना स्टैंडर्ड में हरि ध्यान है भगवान का नाम है यह हायर स्टैंडर्ड है
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इसका इंपैक्ट बहुत फास्ट होता है
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ओके सभी को प्रेम प्रणाम
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राम राम
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याद रखना भगवान का नाम लेते रहोगे तो माया कभी नहीं घेरेगी क्योंकि नाम ही भगवान है और भगवान तो आ ही
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गया तो माया अब कहां घेरेगी ये रहस्य
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और आप माया का नाम लेते हो शरीर क्या है माया है मन क्या है माया दिन भर यही नाम लेते रहते हो दुनिया दुनिया शरीर मन अब
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दिन भर मन मन कर रहे हो शरीर कर रहे हो विचार कर रहे हो आप माया का ही तो जप कर
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रहे हो ठीक है
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ओके भगवान का नाम लो नाम ही भगवान है माया कभी नहीं घिरेगी
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ओके प्रेम प्रणाम