Prabhu Shree
0:03
[संगीत]
0:11
[संगीत]
0:18
प्रणाम प्रभु जी हां प्रणाम जी कैसे हो अच्छे हैं जी
0:47
मेरी छाया आ रही है क्या?
0:51
बता ऋषभ कुछ बता यार। मैं बोल ही नहीं पाता आपके साथ
1:02
मैं बोल ही नहीं पाता आपके सामने मोहन अपने आप आ जाता है
1:11
और अभी मैं थोड़ी देर बस दो पांच मिनट बाद मैं आपका सत्संग लगाने ही वाला था YouTube पे मम्मी और मैं वही थे अभी खाली थे तो
1:18
मैंने कहा चलो सत्संग लगा लेते हैं टीवी पे आपका एकदम इनवाइट आ गया लाइव
1:25
[हंसी]
1:29
बस सत्संग चलता रहे और क्या हां जी हां जी
1:53
हम हम
2:00
[हंसी]
2:05
ऋषभ तो कुछ नहीं बोलेगा। ऑन कर किसी और को।
2:14
गुरु जी प्रणाम प्रणाम जी गुरुदेव गाजियाबाद से वीरपाल सिंह बात कर
2:23
रहा हूं हां जी कैसे हैं गुरुदेव आपकी बहुत-बहुत
2:29
कृपा है शुक्रिया अदा है
2:39
और क्या चल रहा है स्वयं में कैसा लगता है?
2:43
बहुत अच्छा लगता है गुरु जी। आपने जो समझाया उस पर पूरा चल रहा हूं।
2:50
हम हम आपको मैं पत्र देकर के आया था। वही वीरपाल जी क्यों?
2:59
आपको गरियाबंद में 10 दिन के लिए आया था। फिर मैंने आपको एक पत्र लिखा था काफी लंबा चौड़ा।
3:09
मेरे को ख्याल नहीं आ रहा है पत्र का। मेरी मेमोरी बड़ी खराब है। जी चलो कोई नहीं जी हो जाता है।
3:18
जी जी हां पर आपका आशीर्वाद बहुत अच्छा फल रहा है मेरे ऊपर।
3:25
हम हम जी मैंने आपसे कहा हां जी। मैंने आपसे कहा था
3:33
कि आप मेरा एनकाउंटर कर दो। मन बुद्धि का
3:43
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
3:44
[खांसने की आवाज़] क्यों क्यों एनकाउंटर होना चाहते हो भाई गुरु जी मन बुद्धि
3:50
आज मैं सभी को कर देता हूं आज ठीक है जी
3:56
[हंसी]
4:03
कोई मेरे को ऐसा छेड़ेगा ना एनकाउंटर वाला कुछ तगड़ा सा तो करूंगा ना।
4:11
तगड़ा छेड़ता ही नहीं है मेरे को कोई। तू इधर आ यार सामने कामजीत जोत
4:20
बता आज मैं भी मूड में हूं। मूड में [हंसी]
4:26
नहीं परमात्मा नहीं। आज मैं मूड में हूं।
4:32
मैं नहीं जानता परमात्मा परमात्मा कौन है।
4:41
प्रेम प्रणाम गुरु जी प्रेम प्रणाम गुरु जी आपकी वीडियोस और पोस्ट देखते हैं
4:49
YouTube पे तो वो पहले की होती है 10-15 दिन पहले की लेकिन लग रहा है जैसे आज रिलेट करती है तो आप टाइम में आगे चल रहे
4:58
हैं हम पीछे चल रहे हैं
5:03
[हंसी]
5:04
आज थैंक यू।
5:16
ये परफेक्ट मेरा पैक है। यही पैक दिया करो।
5:23
प्रेम प्रणाम जी। हां जी प्रणाम।
5:29
बस दिल से एक बस आपका शुक्रिया अदा करना था। बहुत बहुत बहुत
5:36
थैंक यू। अब हर एक सेशन में इतना कुछ
5:43
और होता है जो बयान नहीं हो पाता है और हालांकि मैं बहुत समय से यह बात समझ आ रही
5:53
थी कि मन इतना ज्यादा चलता था तो माया बार-बार घेरे जा रही है। पर
6:00
आपने ऐसे कई बार बोला हुआ है पर कल ज्यादा इस पर जोर दिया नाम संकीर्तन प्रभु नाम
6:08
स्मरण पर तो कल उसी क्षण से आपने बोला जब
6:14
से ये शुरू है तो बहुत सुकून और बहुत ही अच्छा लग रहा है और मतलब यह तो एक छोटा सा
6:23
नमूना है पर आपकी हर बात हर चीज इतना कुछ इतना कुछ देकर जाती हो और आपका इतना प्यार
6:31
महसूस होता है हर बात में जिसके लिए शब्द नहीं है तो बहुत-बहुत कृपा है आपकी बहुत धन्यवाद
6:40
हां बहुत सुंदर है मस्त आनंद लेते रहो यह
6:46
सुंदर जीवन है सत्संग है आप हो हम हैं यह पूरा अस्तित्व है आनंद ही
6:55
आनंद है बस प्रेम प्रणाम गुरु जी
7:03
प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम गुरु जी
7:12
प्रेम प्रणाम आपके चरणों में नमस्कार गुरु जी
7:20
नमस्कारम जी कौन बोल रहे हैं आपका दास बोल रहा हूं गुरु जी। हां। क्या नाम है आपका?
7:33
मेरा नाम पलविंदर सिंह है। जी। हां जी। कहां से?
7:41
मैं गुरु जी इटली से बोल रहा हूं। इंडिया पंजाब से हूं। हां जी। हां जी।
7:50
और बताइए कैसा लगता है स्वयं में
7:58
अपने होने में स्वयं में
8:05
जब हल्कीहल्की सी झलक कोई मिलती है तो अच्छा लगता है लेकिन मन बीच में परेशान कर देता
8:14
है वह डलिटी कर देता है गुरु जी हम ओके
8:21
जब आपके दर्शन होते हैं, आपके सत्संग जब सुनते हैं तो अच्छा लगता है।
8:32
हम हम बड़ी मुश्किल से आपसे आज बात हुई। उस दिन जिस दिन आपने
8:41
ये गूगल का शुरू किया तो अंदर अंदर ही अंदर बड़ी प्रार्थना थी बड़ी देर से कि
8:48
यार कोई ऐसा प्लेटफार्म हो जहां से लाइव गुरु जी से बात की जाए तो दर्शन हो जाए तो वहीं पहुंच जाएंगे जहां गुरु जी बैठे हैं।
8:57
जो दूरी आपने मिटा दी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। हां जी। अब तो दर्शन होते रहेंगे तो वार्तालाप
9:06
चलती रहेगी। ये तो आपने बहुत बहुत कृपा की।
9:13
आपकी सभी जो नाल योगदान कर रहे हैं उनको भी मेरा
9:21
बहुत-बहुत धन्यवाद। विराज भाई, आशीष भाई जो मेहनत कर रहे हैं उनका बहुत-बहुत धन्यवाद। हम जैसे जो थोड़े दूरी से बैठे
9:29
हैं उनको आप लाइव दर्शन दे रहे हैं। इसका बारी इसका हम
9:37
शब्दों से बयान नहीं कर सकते। गुरु जी नहीं ये सब सौरभ जी विराज राहुल
9:47
जी जी सभी ने जो योगदान दिया है उन सभी का बहुत-ब धन्यवाद। यानी इन लोग का जो राम काज है ये अतुलनीय
9:57
है। हां जी जी
10:09
निरंतर सब लगे रहते हैं लोग। मेरा गुरुजी मैं पर
10:16
जब आप लेकर आते हैं तो मेरा मन बहुत डल्टी पैदा करता है। लेकिन जब मेरा तू पर ज्यादा
10:27
भारता है पड़ता है तो आप इसमें कुछ
10:36
हम हम उस दिन लास्ट टाइम मैंने आपका सत्संग जो
10:46
इंटरव्यू की थी कोई नेपाल से था कोई चैनल तो उस दिन आपका मैंने सत्संग सुना था तो
10:54
उस दिन न जाने कहां से आप पर बहुत प्रेम आ रहा था। जैसे कोई बड़ा भाई जैसे कोई सामने
11:01
बाप बैठा हो ऐसा आप पर प्रेम आ रहा था जिस दिन आप सत्संग कर रहे थे। ऐसा कभी नहीं हुआ मेरे साथ।
11:11
तो ये आपकी कृपा है गुरु जी। आप अह हमेशा ही
11:19
सहायक रहते हैं तो हम ही भाग-भाग जाते हैं लेकिन आप पकड़ पकड़ लाते हैं।
11:30
आप तो सीधा बता रहे हैं तुम ही परमात्मा हो। तुम ही परमात्मा हो। लेकिन हम जानबूझकर करनी कतराते हैं और निकल जाते हैं। नहीं
11:39
नहीं मैं नहीं परमात्मा हूं। पता है जब मैं यह समझूंगा मैं ही परमात्मा हूं खोजने वाला मैं ही तो मैं मर जाऊंगा। मैं अपनी
11:47
मौत नहीं करना चाहता।
11:51
[हंसी]
11:51
मैं खोजने में मजा लेना चाहता हूं ताकि मैं जीवित रहूं। ये हमारे मन का ये झलोखा है गुरु जी।
12:00
हां आनंद है। आनंद लीजिए। खोजने का भी है ना। और आपको तू में आनंद आता है तो उसको तू कह
12:10
के बात किया कीजिए। उससे तू तू ही है तू ही है। बस तेरे अलावा कोई नहीं है।
12:18
जिसमें आपको भाव आते हैं जिसमें आपको प्रेम आता है ना वैसे जिया कीजिए। है ना?
12:27
जी जी क्योंकि बात मैं या तू की नहीं है। बात परमात्मा की है।
12:36
जी गुरु जी ये और बात है कि मैं से ज्यादा इजी है
12:44
बट फिर भी जो आपको बेहतर लगता है वो बेहतर है
12:51
मैं उस दिन बहुत भाव आ रहे थे जिस दिन पहले दिन कॉल हुआ मैं आपसे कनेक्ट भी हुआ लेकिन उस दिन मैं काम कर रहा था तो बहुत
13:00
खुश था अंदर वो अंदर ही अंदर घुट गया पेट में वो सारा दिन बड़ी मुश्किल डिजाइस हुआ मेरे से। लेकिन अभी आप कार चला रहे हैं क्या?
13:12
मैं सर गुरु जी मैं अपने बच्चों को स्कूल से लेने आ रहा हूं। तो
13:19
नहीं तो जब आप पहुंच जाए घर या स्कूल जो भी है वहां से बात कीजिए। कार में ठीक नहीं है ये सब। है ना?
13:31
क्योंकि आप क्योंकि आप हो तो मैं फिर बोल नहीं पा रहा हूं। गहरा कुछ
13:37
कार में हो ना वो ठीक नहीं है ये सब। हां जी तो आप पहुंच जाओ फिर बात करेंगे। है ना?
13:47
हां जी जी गुरु जी बाद में मुझे कनेक्ट कर सकते हैं विराज भैया हां ऐड रहेंगे ना आप बिल्कुल हां जी
13:56
जी जी मैं आप बच्चों को लेकर मैं फ्री होकर मैं आपसे बात करता हूं हां हां बिल्कुल बिल्कुल यस
14:04
बहुत-बहुत धन्यवाद मेरे को भैया कार में मत सुना करो ये सब
14:15
ठीक नहीं मैं दो-तीन बार मना भी किया हूं।
14:28
क्या सुनना चाहोगे यार कामजीत कुछ बता ही नहीं रहा है तो जोत
14:37
हम यस बोलो बेधड़क बोलो यार
14:47
प्रभु जैसे मैं सत्संग सुनते वक्त में हम
15:03
तो मैं अगर कंटिन्यू रस है अपने होने का रस है ना तो फिर यह बदलता क्यों लगता है
15:11
हां हां क्योंकि बदलाहट भी मैं हूं
15:22
माया भी मैं हूं और बदलाहट भी मैं हूं।
15:40
जिंदगी की सच्चाइयां ना बहुत गहरे होती है। उसको स्वीकार कर पाना भी बड़ा
15:50
मुश्किल सा है। अरे जब बदलाहट भी मैं हूं और स्थिरता भी मैं हूं तो मैं क्या नहीं हूं?
16:05
जब माया भी मैं ही हूं और भगवान भी मैं ही हूं तो मैं क्या नहीं हूं?
16:12
अरे काम वासना भी मैं हूं और ब्रह्मचर्य भी मैं हूं तो मैं क्या नहीं हूं?
16:20
खाली मैं आत्मा भगवान थोड़ी ना मैं कामदेव भी हूं। मैं क्रोध का देवता रुद्र भी हूं
16:28
और शांति का देवता नारायण भी हूं। विष्णु भी हूं और माया भी हूं। अरे मैं क्या नहीं हूं?
16:40
बदलाहट भी स्थिरता भी।
16:51
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
16:51
समझ भी और नासमझी भी स्वीकार भी और इंकार भी
17:00
सब कुछ मैं ही हूं।
17:15
33 करोड़ देवी देवताय ये वायु देव ये अग्नि देव
17:26
ये सब देव है मालूम और वो मैं ही हूं।
17:37
हां इन सब से परे भी मैं हूं बट यह सब भी मैं ही हूं।
17:47
तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] कोई भी चीज एक साथ हो सकती है क्या?
17:52
मैं हो सकता हूं। देह सहित देह से रहित
18:00
मैं जीव और परमात्मा दोनों एक साथ हूं।
18:06
काम वासना और ब्रह्मचर्य दोनों एक साथ हूं। इसी पल में
18:14
प्रकृति भी और पुरुष भी
18:21
शांति भी और मन भी मैं ही हूं। चंचल मन हूं मैं
18:28
और स्थिर शांति भी हूं।
18:40
अनंत भटकाव हूं मैं माया हूं मैं
18:47
और मंजिल पर भी हूं। दोनों एक साथ हूं।
18:57
इनकंप्लीट और कंप्लीट खाली और भरा हुआ दोनों एक साथ।
19:09
मैं क्या नहीं?
19:50
तो आप किस से मुक्त होना चाहोगे।
20:06
मैं बहुत खतरनाक हूं यार। तुम लोग मेरे को क्या-क्या समझ के बैठे हो। गुरु गुरु पता
20:12
नहीं क्या-क्या। तमाशा यह सब मेरे को लगता ही नहीं मैं गुरु हूं या ऐसा
20:22
कुछ
21:01
तो संसार माया मन से अलग नहीं है।
21:11
हां।
21:27
तो अब किससे मुक्त होगे बताओ?
21:31
हम
21:55
ठीक है। क्रोध करते हो तो उससे पीड़ा होती है। काम में उतरते हो तो उससे
22:01
भी एक पीड़ा होती है। वो पीड़ा भी मैं हूं।
22:18
करुणा में जीते हो तो अनंत आनंद होता है। वह आनंद भी मैं हूं। प्रेम में जीते हो तो एक सुकून होता है।
22:28
वह भी मैं हूं। क्या दिक्कत क्या है पीड़ा से?
22:47
तो मैं सच्चिदानंद हूं और असत चित यानी मन
22:55
और दुख भी मैं हूं।
23:02
असतित दुख भी मैं हूं। अब
23:12
विकल्प है भले नहीं है असत्य की सत्ता नहीं होती अस्तित्वहीन होता है वो भी मैं हूं ना
23:20
वो अस्तित्वहीन भी मैं ही हूं अब क्या
23:31
ये दुनिया हूं मैं ये संसार यह मन यह माया
23:40
और मैं परमात्मा दोनों एक साथ
23:47
राधा कृष्ण एक साथ सीताराम एक साथ माया मायापति एक साथ हूं मैं
24:06
तो जब जीवन में भगवान होते हैं, मैं आत्मा में आप होते हो तो माया नहीं होती। जब माया होती है
24:15
तब मैं आत्मा भगवान का पता नहीं चलता। दोनों एक साथ कभी नहीं होते।
24:23
क्योंकि दोनों एक ही हैं। और मैं तो दोनों एक साथ भी हूं।
24:31
होते हैं नहीं होते हैं का मामला ही नहीं है।
24:47
तो शरीर और आत्मा एक साथ हूं मैं। आत्मा में अमरता की तरह शरीर में नश्वर की
24:57
तरह 100 साल का शारीरिक जीवन
25:11
अनंत काल से कम नहीं होता। एक पल भी शाश्वत से कम नहीं होता।
25:22
मैं मैं की नजर में आपकी दृष्टि में 100 साल कम है और अमृत
25:32
अमरता हमेशा है ना हमारी दृष्टि में
25:38
कम ज्यादा वाला रूल ही नहीं है इसलिए तो अजन्मा ने जन्म लिया
25:46
है
26:04
हम तो मैं तो खुद किसी चीज से मुक्त नहीं हूं
26:14
मालूम। आप लोग गुरु समझते हो मेरे को। मैं किसी चीज से मुक्त होना भी नहीं
26:21
चाहता। जब जिसका उपयोग है मैं उसका सदुपयोग करता हूं। काम, क्रोध, लोभ, मोह,
26:28
ईर्ष्या सबका। दया, प्रेम, क्षमा, सत्य सबका।
26:34
मैं किसी से भी मुक्त नहीं हूं भैया। पहले से बता देता हूं। ना मुक्त होना चाहता
26:42
हूं। अगर आप मेरे को दिस काइंड ऑफ गुरु समझ रहे हो, है ना? तो
26:51
मैं वैसा नहीं हूं। आप गलतफहमी में हो।
26:58
और ना मैं मुक्त होना चाहता हूं। किसी भी चीज से मैं अपने अस्तित्व की किसी भी चीज
27:05
से मुक्त नहीं होना चाहता। मैं रास रचाना चाहता हूं पूरे चराचर में।
27:17
देवताओं के साथ भी और भूतों के साथ भी भूतेश्वर हूं मैं। शिव हूं मैं।
27:29
भूतों के लिए भी तो कोई परमात्मा होना चाहिए ना।
27:37
[हंसी]
27:38
प्रेतों के लिए, पिशाचों के लिए, देवताओं के लिए,
27:43
देवों का देव महादेव। मुझे इस अस्तित्व की किसी भी चीज से
27:54
एतराज है ही नहीं क्योंकि वह मैं ही हूं। अनंत नाम रूपों में
28:01
अनंत अच्छे और बुरे में ठीक है। बुरे का परिणाम बुरा होता है। अच्छे का अच्छा होता है। वहां तक भी मैं
28:10
ही हूं। हर परिणाम मैं हूं।
28:21
तो गलतफहमी में नहीं रहना भैया।
28:27
ना हम किसी चीज से मुक्ति बताएंगे आपको। ठीक है। मुक्ति भी मैं हूं।
28:37
बट इन सब से मैं मुक्त होना ही नहीं चाहता। किसी से भी नहीं। देह से भी नहीं। जब तक
28:45
है सुंदर है। मन से भी नहीं।
28:54
हर वस्तु मेरे लिए सुंदर है। उसका उपयोग है। उसकी दिव्यता है। उसका सम्मान है। है ना?
29:05
भय का भी, निर्भयता का भी, जीव का भी, परमात्मा का भी,
29:22
अरे मृग तृष्णा का जल भी मैं ही हूं यार। जिसको आप मिथ्या समझते हो ना, वह भी मैं
29:30
ही हूं। मेरे को तकलीफ ही नहीं है मिथ्या होने में क्योंकि मैं सच भी हूं
29:42
और ऐसे सच का मैं क्या करूंगा जो मिथ्या को स्वीकार ना कर सके जो मिथ्या को गले से ना लगा सके वो दो
29:51
कौड़ी का सच है
30:02
नित्य अनित्य सत्य असत्य पता नहीं मैं क्या-क्या हूं यार मेरे को भी नहीं पता है [हंसी]
30:19
तो चाय है क्या पिलाओ
30:26
थोड़ा थोड़ा पानी दो।
30:39
[गहरी सांस लेने की आवाज़]
31:07
थैंक यू
31:18
मृत्यु और जीवन और यह सब जो डलिटी बोलते हो ना यह द्वैत अद्वैत सब
31:28
द्वैत भी मुझे प्रिय है। इसलिए तो हर कोई द्वैत में है।
31:34
[हंसी]
31:37
हां। हर किसी को द्वैत प्रिय है। इसलिए द्वैत में है। कोई जानबूझ के द्वैत में नहीं है।
31:46
अद्वैत भी प्रिय है। उसका होना अद्वैत है।
31:57
चाय ही चाय थोड़ी ना पीते रहोगे जिंदगी में कॉफी भी पियोगे वो द्वैत हो गया क्या मजे हैं वो जिंदगी
32:06
के द्वैत के मैं और तू के वो भाई साहब बोल रहे थे ना हमको तू ही तू जमता है अरे बहुत सही होता है
32:13
[हंसी]
32:22
मतलब बाउंड्रीज मत खींचो अपनी लाइफ के लिए, अपनी जिंदगी के लिए। भरपूर जियो यार।
32:29
कंप्लीट हो तुम।
33:02
मैं तो मुर्दे को भी नहीं छोड़ता भाई। बाकी की क्या बात करूं मैं?
33:13
जो मुर्दा होता है ना डेड बॉडी मैं उसको भी नहीं छोड़ता वह भी मैं हूं।
33:27
फिर वह जो राख उड़ती है लास्ट में वह भी फिर एक नया बच्चा जन्म लेता है वह भी
33:41
भटकते हो पहुंचते हो भ्रमित होते हो सब कुछ मैं हूं सारे भ्रम
33:49
सारी मंजिल सारी भटकन अरे मैं हूं यार और क्या है यहां
33:57
और क्या है मैं तो बोला ही हूं पहले अभी मेरे साथ
34:06
तैयार रहना भटकने को खाली पहुंचाता नहीं रहूंगा मैं
34:13
[हंसी]
34:14
ज्यादा पहुंच जाओगे मैं आत्मा भगवान करोगे तो भटकाऊंगा
34:20
ज्यादा भटकोगे तो फिर पहुंचाऊंगा आज मैं ही हूं। मैं के अतिरिक्त कुछ नहीं
34:27
है। मैं आ गया तो मैं तुरंत भटकाऊंगा। क्योंकि जब तक आप नहीं जानोगे कि भटकना भी
34:34
मेरे से भिन्न नहीं है। मेरी ही लीला है, मेरा ही खेल है।
34:41
तब तक आप पूर्ण नहीं हो सकते ना। जब तक नहीं जानोगे कि माया भी मैं ही हूं।
34:47
माया भी भगवान है। मैं यानी आत्मा भगवान। हां
35:08
तो यह सुनकर आप लोग को भय हो रहा होगा। भय भी मैं ही हूं।
35:15
घबराहट हो रही होगी। अरे ऐसे में यह हो जाएगा वो हो जाएगा। अरे वो भी मैं ही हूं। क्या हो जाएगा मैं के अतिरिक्त साला हो
35:25
क्या जाएगा।
35:30
[हंसी]
35:39
इसका अर्थ यह नहीं कि आप कोई भी कुकर्म करो, कुछ भी करो उसके परिणाम के लिए भी तैयार रहना। वह भी मैं ही हूं।
35:47
मैं एग्री रहना। इसमें साला कुछ भी किसी का मर्डर कर दोगे तो फिर फांसी के लिए भी तैयार रहना।
35:55
गलत नहीं समझना मेरे को। हां।
36:04
हालांकि वह फांसी का फंदा भी मैं ही हूं। अरे कोई आत्महत्या भी करता है ना वह भी
36:12
मैं हूं मालूम। ठीक है। उसके बाद वह प्रेत बन जाता है। कुछ भी बन जाता है। वह भी मैं साला है कौन?
36:24
यानी डार्क से डार्क से डार्क चीज में भी जब अपने आप को आप देख लेते हो ना
36:31
तो प्रकाशित हो जाते हो आप। कंप्लीट हो जाते हो।
37:00
यह खतरनाक ज्ञान है। बट इसको सुन के आप कुछ भी करोगे तो उसके
37:07
परिणाम के लिए भी तैयार रहना। उसको भी कहना मैं हूं
37:13
क्योंकि इस दुनिया का कानून तो काम करेगा ना
37:23
लेकिन हूं तो मैं ही साला जो भी हो नियम कायदा कानून क्या करोगे गोली से तो मार दोगे क्या और
37:31
क्या करूं बहुत खतरनाक हूं। मत सुनो मेरे को बंद कर
37:43
ये सब हैं।
38:07
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
38:17
इतने अनंत जन्म हजारों जन्म जो आप भटके
38:25
वो आप ही हो ना यार वो भटकन भी अपनी मर्जी से भटके खुद को ही देह मान के
38:33
जीव मान के भटके तो क्या भटके आप पहले भी कभी नहीं भटके थे
38:41
ना आज भटके हो और पहले भी आप कभी नहीं पहुंचे थे ना आज पहुंचे हो
38:47
[हंसी]
38:50
सब तमाशा है क्या है सब तमाशा है मेरे भाई
38:59
[हंसी]
39:38
[गहरी सांस लेने की आवाज़]
39:46
जैसे आपको गर्व होता है ना मैं आत्मा भगवान कहने में मैं देह हूं कहने में मेरे को गर्व होता
39:55
है। मेरे में मन है मेरे अंदर यह कहने में
40:04
गर्व होता है। मेरे को कोई शर्म नहीं आती ऐसा कहने में है तो है उसमें क्या है?
40:15
मेरे से अलग है क्या वो?
40:33
जैसे आप बोलते हो ना मैं ब्रह्मचारी हूं। यह बोलने में आपको बड़ा ईगो सेटिस्फेक्शन। मैं कामदेव हूं। बोलने में भी मेरे को ईगो
40:41
सेटिस्फेक्शन होता है। मैं रूद्र हूं। क्रोध का देवता भी
40:47
हां शांति का देव भी मैं ही हूं। खा जाओगे तुम साला मेरा प्रकृति को
40:59
क्यों एक अंश को काटना है जिंदगी के तुम उसको सुंदर नहीं बना सकते अपने क्रोध को
41:06
काम को वो तुम्हारी गलती है ना हर चीज को सुंदर बनाया जा सकता है
41:16
और तुमने तो अपनी आत्मा को ही कुरूप कर लिया हम तो यहां देह को भी सुंदर बना रहे हैं।
41:29
ये सब मेरा आनंद है। मेरी लीला है। मेरा रस है। अंतत मैं ही हूं।
41:37
ज्ञान भी और अज्ञान भी। सर्व असर्व
41:44
मैं हूं। शूद्र विराट मैं ही हूं सीमित असीम
41:52
तू मैं यह वह शून्य भी पूर्ण भी केवल मैं हूं
42:02
हर आकार मैं हूं क्योंकि निराकार भी मैं हूं।
42:12
हर गुरु मैं हूं और हर शिष्य मैं हूं।
42:40
तो जब मैं रात को कोई सपना देखता हूं और सपने के अंदर भी कोई सपना सपना देखता हूं और उसके अंदर भी कोई सपना देखता हूं। वह
42:48
भी मैं हूं। भले वह स्वप्न एक घड़ी का क्यों ना हूं तो
42:58
मैं ही
43:08
जब जागरण मैं हूं तो स्वप्न भी मैं हूं ना और सुशुप्त भी मैं ही हूं।
43:18
मेरे को ऐतराज ही नहीं है। ऐतराज
43:25
ही नहीं है।
44:02
पवित्र अपवित्र दोनों मैं हूं। कीचड़ और कमल दोनों में
44:35
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं मींस कुछ भी नहीं।
44:41
अलग होना भी मैं से भिन्न नहीं है। जो मैं सबको अलग-अलग फील करता हूं वह भी
44:50
मुझसे भिन्न नहीं है। बाकी की तो बात ही क्या करूं मैं?
44:58
वह भी मुझसे भिन्न नहीं। तो गुरु समझे क्या?
45:13
मैं तो दुनिया हूं, माया हूं, मन हूं और आत्मा भी
45:22
परमात्मा भी सब कुछ और कुछ नहीं। दोनों एक साथ अभी के
45:29
अभी
46:00
आज बहुत सारे हार्ट वार्ट आ रहे हैं। इसमें क्या बात है?
46:04
[हंसी]
46:10
जम रही लगता है क्या मेरी बात इनको? डरवर नहीं लगता क्या मेरे से?
46:18
पागल हो।
46:34
अभ्यास
47:09
तो ये मेरी अपनी बात थी जो भी मैंने कही ये मेरे साइड से भैया है ना आप अब नहीं
47:17
जानो
47:28
आपको भी हकीकत बताऊं मैं। आपको भी यह सारी चीजें अपने से भिन्न नहीं
47:36
लगती हैं। इसलिए आप इन सब चीजों को अपनाते हो सहज में।
47:43
ऐसा थोड़ी ना है कि उसको एक करना है आपको सबको कि मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। अरे आपसे भिन्न है ही नहीं। कुछ भी
47:53
आपको भी ऐसा ही लगता है।
48:14
तो इन सब में विजय धर्म की होती है। ठीक है?
48:23
लास्ट याद रखना मेरी बात। और यह जब भी डालेगा पूरा सुनने को बोलना।
48:33
आधा खतरनाक है। तो अंत में विजय किसकी होती है? धर्म की। मैं की तो अंत में यह सब किस में समा जाते हैं?
48:44
मैं मैं ये सारे देवता सारे दानव मैं तू यह वह अच्छा बुरा ये जो कुछ भी है नहीं है सब
48:54
सब मैं आत्मा भगवान में इवन माया भी मन भी सब मैं में समा जाते हैं क्योंकि मैं ही
49:03
हूं ना और कहां समाएंगे मेरी ही लीला है यह दो द्वंद
49:12
ठीक है यह देखो यह द्वंद अब इन
49:20
इनमें शत्रुता हो गई तो युद्ध हो रहा है। है ना? युद्ध की एक सीमा है। फिर इनमें
49:30
प्रेम हो जाता है तो प्रेम हो जाते हैं। नाटक तो है और क्या है?
49:42
एक ही शरीर के दो हाथ है ना। एक ही मनुष्यता के दो मनुष्य लड़ते हैं ना या 10
49:49
मनुष्य लड़ते हैं ना और प्रेम भी करते हैं ना तो क्या फर्क है?
50:03
हां अंतत यह रिलैक्स हो जाता है। यह दोनों एक में समा जाते हैं। स्वयं
50:09
मैं आत्मा भगवान। अब ठीक लगा होगा आप लोगों को।
50:20
मेरे को तो उसमें भी ठीक लगता है
50:24
[हंसी]
50:27
क्योंकि जो भलीभांति अपने को जानता है अद्वैत को द्वैत से घबराता थोड़ी ना है हो
50:33
जाए द्वैत साला देखा जाएगा
50:43
द्वैत ही तो है और क्या है संसार ही तो है।
50:53
अरे लक्ष्मी भी मैं नारायण भी मैं दिक्कत क्या है?
50:58
ऐश्वर्य भी मैं और नारायण भी मैं। दिक्कत क्या है?
51:08
हमने पूजा की लक्ष्मी की, नारायण की, रुद्र की, शिव की,
51:14
हर देव की। सरतो भद्र मंडल देवी देवताभ नमः बोलते हैं
51:23
ना तो क्यों करते हो किसी देव से नफरत फिर यह पूरा अस्तित्व देवों से भरा हुआ है और इन
51:31
सब देवों की आत्मा आप हो देवों के देव महादेव आप हो तो क्या दिक्कत क्या है
51:41
हर चीज की एक सुंदरता है उपयोगिता है महत्व है
51:51
सुंदरतम है।
52:11
तो आत्मा दिख नहीं सकती। करके देह बन जाती है। देह बनकर दिखती है।
52:23
आत्मा ही तो देख रहे हो आप देह बोलते हो इसको।
52:32
दृष्टा दिख नहीं सकता। इसलिए तो दृश्य बन जाता है। दृष्टा ही देख रहे हो आप। और क्या देख रहे हो?
52:46
परमात्मा का अनुभव परमात्मा को नहीं हो सकता करके वह संसार बनता है ताकि परमात्मा
52:53
का अनुभव हो सके। वह सुंदर है। हर चीज इतनी परफेक्ट, एक्यूरेट, सुंदर,
53:05
अद्भुत, अलौकिक, रहस्यपूर्ण और मैं हूं जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। एक-एक विचार जो जिस पल जहां जैसे आपको आ रहा है,
53:17
वह एक्यूरेट है तभी आ रहा है। इसलिए तो वह हटाने से भी नहीं हटता कई
53:24
बार। क्योंकि आना है उसको। फिर कई विचारों में से कोई विचार आपके
53:31
शब्द बन जाते हैं। वह एक्यूरेट है। अच्छे शब्दों का परिणाम अच्छा। बुरे
53:40
शब्दों का परिणाम बुरा वो भी एक्यूरेट। चॉइस इज योर्स।
53:54
माया का परिणाम अनंत भटकाव मैं आत्मा भगवान का परिणाम अनंत शांति
54:03
सुंदर है ना
54:17
जहां जाना है वहीं बैठा हूं सुंदर है। जहां भटकना है वहीं भटक रहा हूं। सुंदर है ना?
54:26
अब ज्यादा हो रहा है।
54:31
[हंसी]
54:35
और सुनो सत्संग मेरा। [हंसी]
54:49
हर चीज सुंदर है, अलौकिक है। यह महा जीवन है।
54:55
कंप्लीट जीवन अद्भुत जिसमें मृत्यु भी है। इस जीवन का इस महावन का एक हिस्सा अद्भुत
55:05
है यार। मैं अपनी मर्जी से भटक रहा हूं। अपनी
55:14
मर्जी से ही पहुंचूंगा। घंटा कोई गुरु मेरे को नहीं पहुंचा सकता। सबको ये पता है।
55:28
हकीकत है।
55:32
[हंसी]
55:38
ठीक है।
55:53
चलो भूल जाओ भैया ऐसा। [हंसी]
55:59
नींद उड़ जाएगी नहीं तो
56:02
[हंसी]
56:11
मतलब मैं क्या बता रहा हूं तुम यानी तुमको कुछ चेंज करना ही नहीं है अपनी लाइफ में ना भीतर ना बाहर ना कुछ
56:21
सबको प्रणाम कर लो सब एक्यूरेट है सब राम है
56:28
खत्म खत्म है बात राम का भाव नहीं बोल रहे हो नहीं आ रहा तो
56:35
भी वह राम है या जो भी है वो एक्यूरेट है दुनिया भी बोल रहे हो ना इसको तो भी
56:42
एक्यूरेट है यार सही तो
56:51
दुनिया ही तो बोल रहे हो यार क्या है साला मेरे को दिखाओ इसको तुम डंडा ही तो बोल रहे हो क्या गुनाह कर रहे हो मेरे भाई?
57:03
ठीक है ना? डंडा है देखा जाएगा। दुनिया ही तो बोल रहा है और क्या है? शरीर ही तो बोल रहे हो और क्या है?
57:15
मजा है। ठीक है। बढ़िया है।
57:34
बड़ा 30 मार खान हो गए इसको लकड़ी जान गए तो हैं
57:42
ये सब कुछ को मैं जान गए तो क्या 30 मारखान हो गए जो आप वो हो ही ना और जो बन गए वो भी सुंदर है ना इसमें क्या क्या हवा
57:51
क्या मचा दिए हो आत्मज्ञान आत्मज्ञान साला तमाशा सा बना दियो बुद्धत्व बुद्ध
58:21
बाकी शक्लें गायब हो गई। गायब वालों को हटा दो। [हंसी]
58:35
अरे बेशर्मी बोध का फल
59:02
हम एक बात बताना मेरे को कामदेव किसी गुरु के
59:11
पास जाएगा वो बोलेगा मेरे को मैं आत्मा भगवान या
59:20
परमात्मा को में पहुंचना है या एनलाइटन होना है या जो भी होना है अल्टीमेट को
59:28
पाना है तो यानी उसके लिए कोई उपाय ही नहीं है ऐसा हो सकता है क्या परमात्मा क्या उसको छोड़
59:37
देगा क्या तो जो काम काम चिल्लाते हैं अपन
59:50
इतना हाय तो अब हम मचा दिए हैं उसको इतना बुरा एक नेगेटिव सेंस डाल दिए हैं वो सेंस
59:57
गलत है अब महालक्ष्मी कहीं जाएगी किसी गुरु के पास या नारायण के पास ही वह तो
1:00:04
मुक्ति नहीं हो सकती। यहां तो लक्ष्मी में सब पागल है धन में। तो इसका क्या उपाय है?
1:00:19
बोलो। आपका सेंस ही गलत है।
1:00:35
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
1:00:41
अब यह देह बनी है पांच तत्वों से पांच तत्वों के भी अलग-अलग देव हैं। अग्नि देव,
1:00:51
वायु देव ये सारे देव तो यानी यह देवों को भगवान मिल ही नहीं सकता।
1:01:02
आप बोलते हो ना शरीर तल की बात कर रहा हूं मैं आज आत्मा की बात नहीं कर रहा हूं
1:01:12
शरीर तल इस शरीर को क्या परमात्मा नहीं मिल सकता बताओ समझ जाओ ये डेड बॉडी है डेड बॉडी को
1:01:22
परमात्मा नहीं मिल सकता तो वह परमात्मा तो अधूरा हो गया
1:01:31
इसमें चेतन को निकाल दो इस शरीर में से
1:01:40
मैं हूं को निकाल दो उसके बाद ये डेड बॉडी हो गई
1:01:46
इसको नहीं मिलेगा या नहीं परमात्मा खंडित हो जाएगा ना अगर एक मुर्दे
1:01:52
को छोड़ दिया तो अब इसी पांच तत्व के व्यापक है पांच तत्व
1:02:00
तो हम कितना गलत सीखे हुए हैं। हर चीज के प्रति नफरत यह नहीं होना चाहिए।
1:02:08
वो नहीं होना चाहिए। अरे होना चाहिए तभी हुआ है ना भाई।
1:02:17
अब मेरे को बोलते हैं वह कभी वापस ना आए। ऐसा मुक्ति बताओ।
1:02:23
रखो यार लेता हूं। क्या कभी वापस ना आए ऐसी मुक्ति
1:02:34
बताओ कि वापस आना ही ना हो वो भी कोई मुक्ति
1:02:41
हुई जिससे आप वापस ही नहीं आ सकते एक जगह फिक्स हो जाओगे एफडी हो जाएगी आपकी
1:02:50
मुक्ति वो है जब आप मुक्त भी रह सको अनंत काल तक और जब चाह चाहो जिस शरीर में जिस
1:02:56
नाम रूप में आना चाहो आ सको उसी को मुक्ति कहेंगे ना और उसी रूप में आप आए हो
1:03:04
आप मुक्त ही आए हो आप क्या सोच रहे हो आप बंद कोई बांध दिया
1:03:11
बंधे हुए आए हो नहीं आप मुक्त ही आए हो
1:03:18
बंधन बंधन खेल रहे हो ये एक अलग चीज है कि कोई गुरु मिलेगा फिर यह होगा वो वो होगा।
1:03:25
यह आपका खेल है। लीला है।
1:03:36
अब कामदेव आ जाए मेरे पास या किसी गुरु के पास तो उसको मैं मना कर दूं। भाई तेरी मुक्ति तो हो ही नहीं सकती। तेरे को भगवान
1:03:44
मिल ही नहीं सकता। और तेरे कारण कई लोग को और नहीं मिल रहा है। ऐसा बोलूंगा क्या मैं उसको?
1:03:55
ये अजीबो गरीब बातें हैं यार।
1:04:19
जिससे पूरी प्रकृति बनी है। बताओ
1:04:26
अब इसको भी हटाओ। मृत्यु का देवता यमराज आ जाए किसी गुरु के पास।
1:04:34
मेरे पास उसको क्या बोलूंगा मैं क्या मुंह दिखाऊंगा उसको मैं
1:04:40
तेरा कुछ हो ही नहीं सकता बोलूंगा तो हर मनुष्य की जो बेसिक प्रॉब्लम है काम
1:04:48
क्रोध और मृत्यु यही है ना
1:04:55
और मैं जो देख रहा हूं जहां से मेरे लिए यह भी नारायण स्वरूप है अंतत मैं ही हूं
1:05:06
और यह सब सुंदर है। जिंदगी का एक बहुत बड़ा हिस्सा है।
1:05:16
और आप इनको नफरत की दृष्टि से देखते हो करके देख भी नहीं पाते। जैसे कोई नया आदमी आपके घर में मिलने आया
1:05:26
है और कोई आपको उसके बारे में भड़का दे। यह बहुत बेकार है, वाहियात है, गलत है। तो
1:05:33
आप उसको उसी नजर से देखते हो। राइट? इसी नजर से आपने अपने काम को देखा है।
1:05:42
आपने क्रोध को देखा है। मृत्यु को देखा है। दुखों को देखा है।
1:05:50
वो भी नारायण है। जो भी आपके भीतर उठ रहा है ना वो नारायण है।
1:05:58
भीतर नारायण है ना सुने हो ना तो नारायण से नारायण ही उठेगा ना। वो लीला कर रहा है ना?
1:06:06
ठीक है। भीतर से शांति भी उठ रही है। प्रेम भी उठ रहा है। करुणा, दया, क्षमा वह भी नारायण है।
1:06:14
हर चीज नारायण ही उठ रही है यार। तुम साला पगला रहे हो।
1:06:21
इससे मुक्त, उससे मुक्त, मुक्त होना ही होता तो तुम लीला करना देह में थोड़ी ना आते।
1:06:32
तुम लीला करने आए हो देह में। मुक्ति के लिए नहीं आया हूं।
1:06:42
ये तुम्हारा लीला का शरीर है। हां।
1:06:49
कोई मुक्ति के लिए नहीं आया हूं।
1:07:02
ठीक है। मुक्ति तुम्हारा स्वभाव है और तुम सदा से मुक्त हो। वह तो तुम हो ही। तभी तो लीला करने आए हो।
1:07:27
इसलिए सब सुंदर है, अद्भुत है। है ना?
1:07:30
अपना नजरिया बदलो। पहले से गलत धारणाएं मत बैठाओ।
1:07:41
कोई भी मेहमान तुम्हारे घर में आया है, वह नारायण ही आया। तुम्हारे भीतर से नारायण ही उठा है।
1:07:49
उसको गलत दृष्टि से मत देखो। इसलिए वह पलटी नहीं खाता है। हां
1:08:09
हां अंत में विजय धर्म की होती है। सत्य की होती है,
1:08:16
शांति की होती है, प्रेम की होती है,
1:08:19
क्षमा की होती है, दया की होती है। यह बात भी सत्य है। तो यह जो आप लीला कर रहे हो इसमें अंत में
1:08:27
विजय इनहीं की होगी।
1:08:39
यानी इस पूरे खेल का निर्णय तय है कि यह जीतेगा।
1:08:48
लेकिन यह खेल है।
1:09:12
तो सोचो तो आप नहीं सोचे जो मैं आपको बोला ना आपने गहराई से नहीं सोचा कामदेव को मैं कौन सा ध्यान कराऊंगा बताओ?
1:09:23
वह तो उसका होना ही कामदेव है। तुम में तो काम वासना हट भी जाती है ना
1:09:30
दिन भर में। थोड़ी देर को ही रहती है। उससे तो वह हट ही नहीं सकती। उसको मैं कौन सा ध्यान कराऊंगा बताओ?
1:09:44
या क्रोध के देवता है उनको कौन सा ध्यान कराएंगे हम?
1:09:55
यह पांचों तत्वों को क्या ध्यान कराऊंगा?
1:09:57
इसी से तो सब ये नश्वर चीजें बन रही है। ये शरीर उसी से बना है।
1:10:10
तो कामदेव को मैं बोलूंगा ना तू जो भी है तू उसको स्वीकार कर ले ना।
1:10:17
क्रोध के देव को भी वही बोलूंगा ना कि भाई तू जो भी है तू अपने आप को स्वीकार कर ले।
1:10:24
वही मैं आप लोग से कह रहा हूं। ये सारे देव हैं आप में। सबको स्वीकार कर
1:10:31
लो। यह सारे देवताओं को स्वीकार करते ही
1:10:42
स्वीकार करते ही यह सारे देव महादेव हो जाते हैं। मैं हो जाते हैं।
1:10:50
देवों के देव महादेव इनकार से नहीं होते। स्वीकार से होते हैं
1:11:01
तो महादेव सबको स्वीकार करते हैं ना दानव भी कोई आता है तथास्तु देव भी कोई आता है तथास्तु
1:11:11
सब से बरोबर व्यवहार करते हैं तभी वह महादेव है ना तो तुमको भी वैसे ही
1:11:20
करना है ना पक्षपात नहीं करना है
1:11:30
तो जैसे इन सारे देवों को पॉजिटिव नेगेटिव सबको आप ऐसे स्वीकार कर लेते हो तो ये सब मैं हो जाते हैं स्वयंभू हो जाते हैं
1:11:39
शिव हो जाते हैं।
1:11:50
देख ना शिव में रुद्र भी हैं और वह प्रेम भी कैसा करते हैं।
1:11:59
सदी की लाश को ले घूम रहे हैं हजारों साल। ऐसा होता है प्रेम।
1:12:07
डेड बॉडी को भी ले इतना प्रेम।
1:12:16
तो समग्र स्वीकार। समग्र स्वीकार मतलब समग्र।
1:12:24
इनकार का भी स्वीकार है वहां तो कि तू भी आजा भाई
1:12:31
[हंसी]
1:12:36
बंधन का भी संसार का भी मन का भी माया का भी
1:12:42
सबका सम्मान है स्वीकार है किसी भी चीज को जब तक आप गले से नहीं
1:12:50
लगाओगे उसको जान नहीं ऐसे दिमाग से समझ लूं जान लूं यह बच जाऊं
1:12:58
त्याग कर दूं भोग लूं त्याग कर दूं भोग दूं ना स्वीकार करते ही गले से लगाते ही आप उसको
1:13:07
जान लेते हो कि वह आप ही हो और कोई दूसरी वस्तु है ही नहीं फिर आप खेलते हो या नहीं खेलते हो इन
1:13:16
चीजों से हर अपनी हर वृत्ति को जो भी उठती है ना
1:13:24
उसको गले से लगाओ। तब आप जान जाओगे कि वह वृत्ति वृत्ति नहीं है। आप ही हो। मन को गले से लगाओ तो आप जान जाओगे वो मन नहीं
1:13:33
है। आप ही हो। माया को लगाओ। तो जान जाओगे माया नहीं है। मैं ही हूं। मायापति
1:13:40
आप पहले से गलत नजरिया रॉन्ग देख रहे हो तो कैसे बनेगा यार?
1:14:28
परमात्मा को हर चीज परमात्मा दिखती है।
1:14:34
ऐसे देहवादी को हर चीज देह दिखती है। मनवादी को हर चीज मन जैसा दिखता है। यह
1:14:40
सही यह गलत, सही, गलत। परमात्मा के लिए हर चीज परमात्मा है। हर देव परमात्मा है। हर चीज की रिस्पेक्ट
1:14:50
है। किसी का इंकार है ही नहीं। मृत्यु तक का नहीं है। परम स्वीकार,
1:15:02
मन का, मृत्यु का, माया का, जीवन का
1:15:22
नाम रूप का भी नाम रूप ही माया है ना ये बॉडी का एक नाम है और इसका एक रूप है।
1:15:29
इसका भी सम्मान और स्वीकार। इसीलिए तो आपके जैसी कोई दूसरी बॉडी है क्या?
1:15:40
तुम्हारे जैसा कोई भी दूसरा किसी भी ब्रह्मांड में या इस ब्रह्मांड में है क्या?
1:15:47
तुम जैसा सोचते हो वैसे कोई सोच सकता है क्या? बड़े से बड़ा साइंटिस्ट हो वो भी नहीं सोच सकता।
1:15:54
अब वो जो सोच सकता है वो तुम नहीं सोच सकते। सब की यूनिकनेस क्यों है? इतनी क्यों है?
1:16:03
तुम्हारा मन यूनिक है। तुम्हारी बुद्धि यूनिक है। तुम्हारी बॉडी यूनिक है। क्यों है?
1:16:11
यह तुमको प्रिय है। यह यूनिकनेस।
1:16:22
सुंदर है यह अद्भुत है।
1:16:30
हर व्यक्तित्व में पूरा अस्तित्व है।
1:16:38
अब व्यक्तित्व को मिटाना मिटाना नहीं है। हर शरीर में पूरा ब्रह्मांड है।
1:17:13
तो संपूर्ण समग्र स्वीकार बस
1:17:20
कंप्लीटनेस पूर्णता
1:17:30
असली पूर्णता क्या होती है जो शून्य को भी स्वीकार कर ले अपने खालीपन को भी जो
1:17:36
स्वीकार कर ले वही पूर्ण होता है
1:17:52
तुमको खालीपन सालता है ना तुम उसको प्रेम से देखते ही नहीं हो उसको स्वीकार ही नहीं
1:17:57
करते हो अपने खालीपन को अपनी शून्यता को हमेशा अवॉइड करते हो फिर भी वह बेचारा
1:18:05
बार-बार आता
1:18:18
तुम अपने संसार को स्वीकार नहीं करते हो। इसलिए वो बार-बार आता है। तुम्हारे मन तुम
1:18:26
अपनी माया को मन को स्वीकार नहीं करते हो। इसलिए बार-बार आता है। हजार रास्तों से आता है। उसको गले से लगाना ही पड़ेगा।
1:18:36
तब तुम जान पाओगे कि वह तुम ही हो।
1:19:37
हम्म हम हम सो इनफ फॉर फॉर एवर
1:19:51
तो ये सुन के तुम्हारा सब तहसनहस हो गया होगा ये भी तुम ही हो याद रखना
1:19:57
ये बिखर जाना मैं फिर समेट दूंगा वो भी तुम ही हो
1:20:04
हां यार अद्भुत है बिखरना भी अद्भुत होता है उल जाना भी अद्भुत होता है।
1:20:12
हां सुलझा हुआ ही तो उलझता है। उलझा हुआ
1:20:22
सुलझता है। ये लीला है। आनंद है।
1:20:31
सुलझा हुआ भगवान ही तो माया बनता है। उलझता है। उलझी हुई माया ही सुलझती है। भगवान बनती है।
1:20:40
कितना जबरदस्त है यह सब।
1:20:55
अब सब चीज ओके है तो मैं कृपा क्या करूं?
1:21:01
सब बोलते हो आप लोग कृपा कर दो। कृपा कर दो। सब चीज इतनी सुंदर है, अद्भुत है।
1:21:08
अंतत आप ही हो। अब मैं कृपा क्या करूं यार?
1:21:26
ये इतने सारे देव मैंने माने। यही तो मेरी कृपा है।
1:21:33
यह इतने रंग, रूप, रौनक, अनेक और एक भी। यही तो मेरी कृपा है।
1:21:43
ये पूरा अस्तित्व ये सारे पांचों तत्व यही तो मेरी कृपा है।
1:21:51
यह संवाद ये सत्संग
1:22:41
तो जैसे स्त्री पुरुष में प्यार होता है ना और ऐसे ही है।
1:22:50
मायापति को अपनी माया से प्यार है। वो खुद ही मानता है अपने को कुछ और माया
1:22:59
के प्रेम में खो जाता है। शरीर हो जाता है, दुनिया हो जाता है, मन
1:23:07
हो जाता है, माया हो जाता है। मैं मायापति को अपनी माया से बहुत प्रेम
1:23:14
है। इसलिए तुम यह दुनिया हो जाते हो बार-बार जो बार-बार पूछते हो ना मेरे से सत्संग
1:23:21
सुनते हैं ठीक होता है। फिर यह दुनिया क्यों आ जाती है? अरे मेरे भाई तू खुद
1:23:30
प्रेमी है इस दुनिया का इसलिए दुनिया हो जाती है। मायापति माया का प्रेमी है ना। कोई बुरा
1:23:38
थोड़ी ना है। कितना ही कर लो वो दुनिया आएगी ही क्योंकि
1:23:49
तुम जानते ही नहीं कि तुम किसके प्रेम में हो। स्त्री पुरुष में तो कम से कम जानते हो तुम। [हंसी]
1:24:06
तो मायापति जब पूर्ण माया हो जाता है तो फिर मायापति हो जाता है।
1:24:17
हां आप पूर्ण माया हो जाते हो। फिर आप में प्यास जगती है। तभी रिवर्स गियर लगता है
1:24:24
ना।
1:24:35
क्योंकि माया और भगवान अलग है ही नहीं।
1:24:45
संसार परमात्मा अलग है ही नहीं। मतलब जिसमें तुम फंस जाते हो वह तुम ही
1:24:54
हो। और जिससे तुम निकल जाते हो वह भी तुम ही हो।
1:25:03
और जहां तुम पहुंच जाते हो वह भी तुम ही हो।
1:25:20
तो जिसमें तुम फंस जाते हो माया में वह भी तुम ही हो तो अब फंसना बुरा है क्या?
1:25:34
इस बोध के बाद फंसना बुरा है क्या?
1:25:40
और ये बोध के बाद भी नहीं है। तुमको पता ही है कि तुम ही हो। यह सुन लिए यानी पता है।
1:25:49
[हंसी]
1:25:51
ये सुन लिए यानी पता है ना?
1:25:56
नहीं तो टिक ही नहीं सकते यहां तक आप।
1:26:13
तो लकड़ी का डंडा बनना सुंदर है मेरे भाई।
1:26:19
बंधन नहीं है। मैं आत्मा भगवान का शरीर बनना मन बनना
1:26:26
सुंदर है। बंधन नहीं है। परमात्मा का प्रकृति बनना सुंदर है। बंधन
1:26:35
नहीं है। और सब कुछ सुंदर है।
1:27:20
यह अभेद दर्शन है। बता रहा हूं। अभेद दर्शन हां अब किस चीज का भेद करोगे?
1:27:32
एकदम अभेद है। जिस अभेद में भेद भी समाया हुआ है।
1:27:42
जिस अभेद में भेद का भय नहीं है, वही अभेद है।
1:28:35
तो अनेक होना एक की अज्ञानता नहीं है।
1:28:40
आनंद है क्या था वह सूत्र वेद का पहले एको
1:28:47
हम बहुस्याम यानी मैं एक से अनेक हो जाऊं
1:28:54
तो एक होना वो अज्ञानता में नहीं हुआ एक से अनेक आनंद में हुआ है
1:29:03
आप भी एक से अनेक आनंद में हुए हो
1:29:10
कोई अज्ञानता में नहीं हुआ है।
1:30:04
तो सबको मैं जान सबको राम जान अरे तू जो जानेगा वह भगवान ही तो जानेगा
1:30:11
जानवान क्या और क्या जानेगा मैं ही तो जानेगा
1:30:23
और तू कुछ और जान ही नहीं सकता।
1:31:06
तो लाखों लोग मेला देखने आए हैं और सब मेला देख रहे हैं
1:31:15
अब उनमें हर किसी से पूछो तो हर कोई क्या बोलेगा
1:31:22
मेला देखने आए अब हर किसी को निकाल दो तो मेला कहां है?
1:31:36
तो देखने वाले में मेला है ना तो यह दुनिया देखने वाले में है ना
1:31:45
देखने वाला परमात्मा जानने वाला परमात्मा
1:31:54
परमात्मा में ये दुनिया है ना इसलिए सुंदर है सब
1:32:03
क्योंकि क्योंकि मैं ही हूं बस।
1:32:22
तो ज्यादा समझने का कुछ नहीं है। सब ऑलरेडी सुंदर है। मस्त रहो। ठीक है?
1:32:29
[हंसी]
1:32:30
मच मच मत करो। फिर वो साला एक को अनेक समझ रहे हो। अनेक
1:32:37
को एक ये वो माया भगवान ये वो अरे सब मस्त है यार सुंदर है। मजे में रहो। ठीक है।
1:32:44
खुश रहा करो।
1:32:47
[नाक से की जाने वाली आवाज़][हंसी]
1:33:18
अब मेरे पास कोई आया बोले गुरुदेव मेरा मन मेरे को परेशान कर रहा है।
1:33:27
अब उसी ने खुद को मन माना। तो परेशान मन कर कैसे सकता है?
1:33:34
परेशान होना उसकी लीला है ना। मतलब मेरे पास लकड़ी आई और मेरे को बोले डंडा मेरे
1:33:40
को परेशान कर रहा है। वैसे ही तो आप बोलते हो मन मेरे को परेशान कर रहा है। और क्या है?
1:33:51
अपने आप को ही मन मान रहे हो। लकड़ी को ही डंडा मान रहे हो ना?
1:33:58
अपने आप को ही दुनिया मान रहे हो और बोलते हो दुनिया मेरे को परेशान कर रही है। अब मेरे मैं उसको क्या बताऊं बताओ।
1:34:09
अपने आप को ही जीव माने फिर देह माने फिर स्त्री पुरुष माने फिर काम वासना भी अपने आप को ही माने हो आप।
1:34:18
जीव माने तो कुछ इच्छाएं पूरी नहीं हो रही है तो उसमें क्रोध हो जाता है। यह सब अपनी ही तो लीला है ना।
1:34:29
तो सब तो आप अपने आप को मान रहे हो तो क्या गलत कर रहे हो?
1:34:42
सबको सब पता है मालूम। यह अपनी ही लीला है। हां। और क्या?
1:35:15
तो आपको हमेशा एक चीज लगती है मालूम समथिंग मिसिंग कुछ मिस है कुछ मिस हो रहा है कुछ चूक रहे हैं। अरे जो मिस हो रहा है
1:35:25
वह भी तो मैं ही हूं। समथिंग मिसिंग भी तो मैं ही हूं।
1:35:39
वो समथिंग मिसिंग आपने शुरू में डाला ताकि यह लीला का पूरा महाराज का एक चक्र
1:35:47
पूरा हो सके। आखरी तक समथिंग मिसिंग लगे
1:35:54
वह भी तो मैं ही हूं। रिक्तता भी तो मैं ही हूं।
1:36:03
शून्यता भी तो मैं ही हूं। इसलिए तो कई लोग शून्य से पहुंच गए। गौतम बुद्ध वाले शून्य से पहुंच
1:36:11
गए। वेदांत वाले पूर्ण से पहुंच गए क्योंकि सब मैं ही हूं। कोई पत्ता गिरने से पहुंच जाता है क्योंकि
1:36:18
वह भी मैं ही हूं। कोई पंछियों को देख रहे हैं, उड़ रहे हैं,
1:36:22
पहुंच जाता है। क्यों पहुंच जाता है? अरे मैं ही हूं। उसको बोध हो जाता है।
1:36:30
हर जगह मैं ही हूं, सब कुछ मैं ही हूं। करके आप कहीं से भी पहुंच जाते हो। जिसको सो कॉल्ड पहुंचना कहते हो।
1:36:42
सो कॉल्ड ठीक है ना वर्ड? हां। सो कॉल्ड
1:36:46
[हंसी]
1:36:59
अरे साला ये पत्ता वत्ता क्या होता है?
1:37:13
ज्यादा हो जाएगा। [हंसी]
1:37:17
ये ऑनलाइन खतरनाक चीज है यार। इसमें ज्यादा बोलते नहीं बनता। बहुत हो गया आज वैसे ही। इतने लोग हैं चेक कर दो।
1:37:30
माया वाले में ज्यादा रहते हैं लोग। ज्यादा पसंद है इन लोग को माया।
1:37:42
मैं हूं वाले में बोर हो जाते हैं भगवान वाले
1:37:46
[हंसी]
1:37:55
तो मैं आत्मा भगवान को मुझे मैं को अपनी माया कितनी प्रिय है देखो
1:38:05
कितनी प्रिय मतलब समझ रहे हो कि सच्चिदानंद दुख हो जाता है। इतनी प्रिय है।
1:38:15
मतलब शाश्वत अनंत मरने वाला शरीर हो जाता है। इतना प्रेम है।
1:38:27
अजन्मा जन्म ले लेता है। इतना प्रेम है शरीर से अजन्मा को। सोचो अपनी माया से
1:38:34
मायापति को कितना प्रेम है। शांति मन हो जाती है।
1:38:44
चंचलता विचार निर्विचार विचार हो जाता है।
1:38:52
भावातीत भाव हो जाता है। अनंत भाव कितना सुंदर है यार। सब कुछ यार कितना
1:39:02
अलौकिक है और आप यह सब सहज में हो रहे हो। कोई प्रयास थोड़ी ना कर रहे हो।
1:39:20
इस मोहब्बत का किसी को पता ही नहीं होता है। समझ रहे हो?
1:39:28
अब [नाक से की जाने वाली आवाज़] राधा कृष्ण तक आपको पता है वह सुंदर है। मायापति की माया से मोहब्बत पता है किसी को?
1:39:40
अरे मोक्ष बंधन हो जाता है जहां वो होती है मोहब्बत।
1:39:51
परमात्मा संसार हो जाता है जहां और पता ही नहीं चलता फिर अपना असली मोहब्बत तो तभी है ना जब आपको अपना पता ना
1:40:00
चले
1:40:13
और सेम विपरीत भी है। फिर माया आप माया हो गए। भगवान ही माया बने। अब माया फिर से
1:40:22
भगवान में आ जाती है। लौट जाती है। माया की मोहब्बत फिर भगवान से
1:40:28
मायापति से। फिर रिवर्स गियर।
1:40:43
तो यह सब आनंद है, रस है।
1:41:05
तो जब मैं देह को देखता हूं तो मैं नहीं दिखता। जब मैं को देखता हूं तो देह नहीं दिखता। दोनों एक ही समय में क्यों नहीं दिखते?
1:41:19
क्योंकि यह दोनों दो है ही नहीं।
1:41:25
देह और आत्मा दो है ही नहीं। जब मैं संसार को देखता हूं तो मैं नहीं
1:41:33
दिखता। जब मैं मैं को देखता हूं तो संसार नहीं दिखता। दोनों एक ही समय में क्यों नहीं दिखते?
1:41:44
क्योंकि यह दोनों दो हैं ही नहीं। एक ही है। मैं ही हूं।
1:41:58
लेकिन यह जो मैं आपको संसार के कोनेकोने तक ले गया। उसके डीप तक, दुख के कोने तक,
1:42:05
नर्क के कोने तक। वहां आपने अपनी पहचान की तो यह पहचान कभी नहीं जाएगी।
1:42:14
जा तेरे को माया कभी नहीं व्यापेगी। क्योंकि अब
1:42:22
आपने जान लिया ना कि मैं ही माया बना हूं। मेरा ही आनंद है।
1:42:48
तो जब मैं मैं को देखता हूं तो यह आकाश नहीं दिखता।
1:42:54
जब आकाश को देखता हूं तो मैं नहीं दिखता। अब मैं ही आकाश बन गया तो अब मैं दिखूं कैसे?
1:43:06
मैं ही आकाश हो गया ना। जैसे ही आप आकाश को देखे आप आकाश हो गए। अब मैं दिखूं कैसे?
1:43:17
जैसे ही आप दुनिया को देखे दुनिया हो गए। अस्तित्व को देखे अस्तित्व हो गए।
1:43:23
आप बेवकूफ नंबर वन हो। अस्तित्व होना है। अस्तित्व अरे मूर्ख है क्या? जैसे ही तूने
1:43:31
अस्तित्व का एहसास किया, बोला या देखा इस अस्तित्व को उसी क्षण तू अस्तित्व हो गया।
1:43:38
पागल उस समय तू व्यक्तित्व नहीं रहा।
1:44:15
आप ब्रह्मांड कहते बाद में हो पहले जाते हो तब कहते हो ब्रह्मांड।
1:44:22
फिर बाद में मन बुद्धि बोलता है मैं ब्रह्मांड कैसे बनूं?
1:44:30
[हंसी]
1:44:43
किसी को यह चीज पता ही नहीं है कि ब्रह्मांड हुए बिना आप ब्रह्मांड इसको कह ही नहीं सकते।
1:44:52
वही होकर बाद में बोलते हो इसका नाम ब्रह्मांड है।
1:45:00
तो जब मैं अपने आप को देखता हूं तो ब्रह्मांड नहीं दिखता। अब ब्रह्मांड को देखता हूं तो मैं नहीं
1:45:10
दिखता। अब मैं ही ब्रह्मांड हो गया तो अब मैं दिखूं कैसे?
1:45:16
मैं ही हो गया ना ब्रह्मांड। मैं ऐसे मैं ही माया हो गया। मैं ही मन हो गया तो क्या गलत हो गया यार। मैं ही शरीर
1:45:25
हो गया। फिर मैं ही यह देव हो गया, वह देव हो गया। पूरी लीला
1:45:32
मैं ही हुआ इसलिए निश्चिंत रहो ना। चिंता फिकर भी मैं ही हुआ हूं। संशय भी मैं ही हुआ हूं यार। क्या संशय गिराते हो तुम?
1:45:46
और श्रद्धा भी मैं ही हूं।
1:46:21
हम्म मेरा मेरा सिर काट रहा है। उसको ठीक करो कैमरे को। तुम्हारा ध्यान मेरे में है। हां। [हंसी]
1:46:42
अरे मैं पहले ही गर्मी हो जाता हूं तब गर्मी का अनुभव होता है और तब ठंडी का अनुभव होता है। जब पहले ही मैं ठंडी हो
1:46:49
जाता हूं।
1:47:06
तो जब मैं स्वयं में रहता हूं तो सर्व का अनुभव नहीं होता।
1:47:12
है ना? और जब स्व सर्व में होता हूं तो स्वयं का अनुभव नहीं होता।
1:47:19
क्योंकि मैं ही सर्व हो गया ना। अब मुझे स्वयं का अनुभव क्यों हो? होना ही नहीं
1:47:26
चाहिए। वह सही हो रहा है। आप सोचते हो गलत हो रहा है।
1:47:33
अब आप ही सर्व हो गए तो अच्छा है ना। स्वयं का अनुभव नहीं हो रहा है।
1:47:43
कोई और थोड़ी ना सर्व हुआ है। भूत प्रेत आकर थोड़ी ना सर्व हो गया है।
1:47:56
तो जब मैं अपने में रहता हूं तो सर्व का अनुभव नहीं होता।
1:48:04
जब मैं अपने में आ जाता हूं फिर सर्व का अनुभव होना बंद हो जाता है ना। रिवर्स आ गए आप।
1:48:13
और जब मैं सर्व में रहता हूं तो अपना अनुभव नहीं होता क्योंकि मैं ही सर्व हो गया ना मैं ही ततक्षण समय से पहले सब कुछ
1:48:22
हो जाता हूं सर्व हो जाता हूं तो मैं फंस थोड़ी ना गया सर्व हो के
1:48:30
बेवकूफ मैं ही सर्व हो गया
1:48:40
और फिर रिवर्स मैं ही मैं हो जाता हूं। तो ये तो आनंद है, लीला है, रस है।
1:48:54
मैं माया बन के, मन बन के, शरीर बनके,
1:48:57
प्रकृति बन के फंस थोड़ी ना गया। फंसावट कब होती है?
1:49:07
जब आपको यह ज्ञान नहीं होता कि मैं बना हूं यह सब
1:49:14
कुछ और आ गया कोई किसी और ने अटैक कर दिया तब फसावट रहेगी
1:49:21
जब मैं ही बना हूं यह सब तब तो यह आनंद है ना
1:49:30
तब तो दुख भी आनंद है ना
1:49:44
तो ऑफिस में जाते हैं तो हमारा ना अंदर का सुख चैन चला जाता है। अरे तू ऑफिस बन गया
1:49:52
पगले। तू ऑफिस बन गया। तेरे को पता ही नहीं है।
1:49:59
तू ऑफिस में गया थोड़ी ना। तू ऑफिस बन गया। जैसे तू देह बन जाता है, मन बन जाता है,
1:50:08
वैसे दुनिया बन जाता है, ऑफिस बन जाता है,
1:50:11
तू ही बनता है। फिर तू ही ऑफिस का कर्म बन जाता है।
1:50:24
तो जब मैं अपने में रहता हूं तो यह ऑफिस का पता नहीं चलता।
1:50:33
और जब मैं ऑफिस में रहता हूं तो अपना पता नहीं चलता। क्यों नहीं चलता? क्योंकि मैं ही ऑफिस हो गया। अब
1:50:43
तो पता ना चलना ही अच्छा है ना। वो गलत थोड़ी ना हो रहा। ऑलरेडी सही हो रहा है वो।
1:50:54
मैं ही सर्व हो गया ना। तो एक का एक ही अनेक हुआ ना
1:51:12
तो इस चीज को ख्याल रखो जो आप हो उसकी क्वालिटी है उसकी क्षमता है एक होने की
1:51:20
शून्य होने की दो होने की अद्वैत होने की अनेक होने की और यह सब आप सर्कल में ऐसे
1:51:28
आनंद के लिए सब बनते रहते हो। कभी प्रेम बनना रहता है तो अद्वैत हो जाते हो या दो हो जाते हो। ज्ञान बनना होता है तो एक हो
1:51:37
जाते हो। कभी ज्ञान ज्ञान खेलते हो कभी प्रेम प्रेम खेलते हो।
1:51:44
दुनिया दुनिया खेलते हो। मतलब जब आप कंफ्यूजन हो जाते हो
1:51:52
तो वह भी एक सुंदर खेल है ना कि यार अब मैं कंफ्यूज हो गया। मैं उलझ
1:52:00
गया। मैं भटक गया। भटक गया। कोई गुरु मिले।
1:52:09
ये सब जादू है। सुंदर है।
1:53:02
इतना सिंपल है कि देखो जैसे सारे दृश्यों को देखो। जब आप दृश्य को देखते हो तो
1:53:09
देखने वाले का पता नहीं चलता। ठीक है? अब देखने वाले में आओ तुरंत।
1:53:17
जानने वाले में देखने वाले में। अब दृश्य का पता नहीं चल रहा है।
1:53:26
अब फिर दृश्य में जाओ। अब देखने वाला ही दृश्य हो गया। तो देखने वाले का पता नहीं चलना चाहिए।
1:53:35
वही सही है। समझ रहे हो? हम इसको गलत समझते हैं।
1:53:42
अब देखने वाला ही ये सारे दृश्य हो गया। इवन ए बॉडी माइंड और ये सारे दृश्य।
1:53:51
तो सही तो हुआ ना। गलत कहां हुआ?
1:54:07
दृश्य फिर इधर वापस अपने में आ जाता है। वो भी सही हुआ।
1:54:13
कितना इजी है। यानी गलत कुछ हो ही नहीं रहा है।
1:54:21
हर चीज एक रिदमम से, परफेक्शन से, सुंदरता से, एक रहस्यपूर्ण ढंग से चल रही है।
1:55:33
तो याद रखना अव्यक्त ही व्यक्त हुआ है। इसलिए व्यक्त भी
1:55:40
अव्यक्त है। लकड़ी ही डंडा हुई है इसलिए डंडिया डंडा भी लकड़ी है।
1:55:50
अव्यक्त ही व्यक्त हुआ है। व्यक्त नहीं हुआ है।
1:55:57
परमात्मा ही माया हुई है। इसलिए माया भी परमात्मा है।
1:56:09
मैं आत्मा भगवान ही माया हुए हैं। इसलिए माया भी भगवान है
1:56:22
और सब कुछ भगवान है।
1:56:38
हर विचार, हर भाव, हर स्थिति, हर परिस्थिति सब कुछ मैं आत्मा भगवान है। भगवान ही
1:56:46
भगवान है। इसलिए सब कुछ इतना सुंदर है। अद्भुत
1:56:56
अलौकिक है।
1:58:13
तो सब कुछ राम ही है तो आप बिल्कुल निश्चिंत हो जाते हो।
1:58:19
आत्म नष्टिक के लिए सब राम हो जाता है।
1:58:25
हर चीज हर स्थिति परिस्थिति भीतर बाहर ये वो सब
1:58:32
मन भी माया भी मैं भी सब राम
1:58:53
व्यवहार जगत में क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए अंतर्यामी बता देता है व्यवहार में व्यवहार जैसे जीते रहो बस
1:59:03
सिंपल
2:00:11
मेरे को तो सब इतना अच्छा लगता है। इतना सुंदर लगता है।
2:00:24
मेरे को टकटकी लगानी थोड़ी ना पड़ती है। जिधर नजर पड़ती है वही दिखता है।
2:01:19
तो माया माया पति के बिना नहीं हो सकती। माया मैं के बिना
2:01:26
नहीं हो सकती। इसलिए मैं ही माया का भगवान है। है ना?
2:01:35
मैं आत्मा भगवान तो जो जिसके बिना ना हो सके वही उसका
2:01:44
अस्तित्व होता है। वही उसकी आत्मा होती है। वही उसका भगवान होता है। वही उसका परमात्मा होता है। वही उसका सब कुछ होता
2:01:53
है। तो मैं के बिना ये कोई भी दुनिया माया कुछ भी हो सकती है क्या? तो मैं ही सबका सब
2:02:01
कुछ हूं ना। इसलिए आनंद है रस है
2:02:15
तो मैं ही सबका सब कुछ हूं। मैं जो भी बन जाता हूं
2:02:21
जैसे मैं दुनिया बन जाता हूं। उसमें यह नियम है कि मैं अपने आप को भूल जाऊं।
2:02:33
क्योंकि मैं ही दुनिया हो गया ना। जैसे कृष्ण राधा हो जाते हैं।
2:02:44
फिर राधा पूर्णतः कृष्ण हो जाती है। बस वैसे ही है ना।
2:02:52
मैं ही प्रकृति हो जाता हूं। फिर प्रक प्रकृति ही मैं हो जाता हूं।
2:02:59
तो यह सहज प्रेम चल रहा है ना। यह प्रेम सहज है करके पता नहीं चलता।
2:03:07
हां करने वाला प्रेम ही जानते हो ना आप। सहज
2:03:13
प्रेम का आपको पता ही नहीं चलता।
2:03:49
तो बस जिसको आपने दुनिया शब्द दिया है माया मन दुनिया प्रपंच उसके शब्द बदल दो
2:03:59
बस राम कर दो शरीर मन बुद्धि दुनिया माया बस इनके शब्द
2:04:08
बदल दो तो आप शब्दों के कारण बस उलझे हो और कुछ
2:04:14
नहीं है
2:04:19
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
2:04:21
मेरे को तो ये शब्द भी प्रिय है भाई मैं अपनी बताऊं तो मेरे को बड़ा अच्छा लगता है यह शरीर मन माया बहुत प्रिय लगता है यह
2:04:30
मेरे को तो हां क्यों बदलूं ऐसा लगता है
2:04:50
हम तो क्या समझे भैया हम क्या समझे?
2:04:58
कुछ नहीं समझे ना?
2:05:00
ठीक है फिर।
2:05:03
[हंसी]
2:05:20
अरे मेरे भाई जो राजा होता है ना राजा
2:05:29
जो पूरे धरती का सम्राट है उसका सबसे बड़ा आनंद क्या है मालूम
2:05:38
जब वह चोरी करने जाता है समझ रहे हो?
2:05:50
जब नारायण माखन चुराने जाते हैं कृष्ण बनके वो उनका
2:05:56
आनंद है। वो चोरी थोड़ी ना है। सम्राटों का सम्राट जब किसी के घर में
2:06:04
चोरी करने जाता है। वो उसका महानंद होता है। आह! चोरी बोलता है आ
2:06:14
तो जब अजर अमर आत्मा शरीर धारण करती तो उसका आनंद है
2:06:30
जब शांति अनंत शांति आत्मा यानी क्या है जब अनंत शांति बेचैन होती है तो वह उसका
2:06:40
आनंद है। जब परमानंद दुखी होता है तो वह उसका
2:06:50
आनंद है। क्योंकि तुम परमानंद के अलावा कुछ हो ही नहीं ना।
2:06:59
इसलिए तुमने दुखों की लीला रची है। ये आनंद है तुम्हारा।
2:07:07
जैसे राजा चोरी करने जा रहा है।
2:07:16
यानी जैसे आकाश एक छोटे से बॉक्स में कैद होता है। मटके
2:07:24
में या बॉक्स में वह उसका आनंद है। उसका बंधन नहीं है।
2:07:30
तो अनंत परमात्मा जब एक शरीर में कैद होता है तो उसका आनंद है
2:07:38
बंधन अस्तित्व जब व्यक्तित्व होता है यह आनंद है अस्तित्व का
2:07:48
[खांसने की आवाज़]
2:07:50
आप सोचते हो व्यक्तित्व हुए यानी हम बंध गए गलत समझ
2:08:03
अस्तित्व तू व्यक्तित्व बन गया। वाह वाह वाह वाह
2:08:11
[हंसी]
2:08:13
ये आनंद है ना यार।
2:08:42
परमात्मा जीव बन गया।
2:08:49
यह सबसे बड़ा आनंद है परमात्मा का जीव बनना। तभी बनता है। कोई एक्सीडेंटल आप जीव
2:08:58
नहीं बने हो।
2:09:44
[हंसी]
2:10:02
[हंसी]
2:10:07
[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
2:10:18
जी इसमें कर्ता कर्म क्रिया है ही नहीं। कर्ता अकर्ता तक नहीं है। वो कर्मों का
2:10:27
भोग भोग रहा है। वाह ये पाप कर्म ये पुण्य कर्म। वाह।
2:10:36
वाह वाह वाह। है कि नहीं?
2:11:07
ये सब आनंद है यार। यह सब आनंद के लिए आप आए हो यहां। कोई बंधे बंधे हो। ऐसा कुछ नहीं है। कचरा समझ है वो। है ना?
2:11:20
सब सुंदर है। अद्भुत है। एकदम से
2:11:26
[गहरी सांस लेने की आवाज़]
2:11:46
और राजा का बड़ा आनंद माता हूं। जब सम्राटों का सम्राट भीख मांगने निकलता है।
2:11:57
गजब का आनंद है उसका। जब परमात्मा जीव बनता है ना वह गजब का
2:12:07
आनंद है। पागलों तुम यूं ही जीव नहीं बने हो।
2:12:14
यह आनंद है।
2:12:22
[हंसी]
2:12:35
[हंसी]
2:13:10
ये सब लीला है, महारास है, रस ही रस है। बस
2:13:18
प्रेम ही प्रेम
2:13:30
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
2:13:36
यार कुछ नई शक्ल दिखाओ। ये लोग बोर कर रहे हैं अब मेरे को। सबको हटाओ तो।
2:14:00
जय सच्चिदानंद भगवान भगवान जब दुखी होता है तो पता नहीं क्या
2:14:10
क्या होता है यार
2:14:14
[हंसी]
2:14:20
[हंसी]
2:14:32
[हंसी]
2:14:42
और है क्या चाय बनानी पड़ेगी क्या हां तो इसको फेंको और
2:14:50
दो पानी दो तो मेरे को
2:15:10
जब तुम बोलते हो ना मेरे को कि मैं दुखी हो गया मतलब मैं यानी भगवान आत्मा भगवान तुम मेरे को इतना आनंद आता है [हंसी]
2:15:24
मैं मैं भगवान मैं आत्मा भगवान दुखी हो गया। वाह वाह वाह वाह
2:15:33
सच्चिदानंद ब्रह्म दुखी हो गया यार पार्टी कर दूं ऐसा लगता है।
2:15:40
[हंसी]
2:15:58
थैंक यू।
2:16:13
यार ये तो छोटा-छोटा दिखा रहा है। थोड़ा बड़ा-बड़ा दिखा। मेरे को दृश्य बहुत प्रिय है। बता रहा
2:16:21
हूं। हां। ऐसे थोड़ा और बड़ा कर दे। दो चार लोग को हटा दे।
2:16:32
पुराने पापियों को हटा दे। ये ठीक है।
2:16:42
अरे दृश्य दृष्टा की मोहब्बत होती है यार। है ना?
2:16:50
बंधन नहीं होता। दुनिया परमात्मा की मोहब्बत है। शरीर
2:16:57
आत्मा की मोहब्बत है। मन शांति की मोहब्बत है।
2:17:04
मोहब्बत ही मोहब्बत है यारों।
2:17:12
बंधन मुक्ति की मोहब्बत है।
2:17:19
दोनों ऐसे हाथ में हाथ डाले नाच रहे हैं।
2:18:32
तो आप लीला कर रहे हो और लीला में यह पता नहीं रहता कि यह लीला
2:18:40
इसलिए आपको अभी तक पता नहीं था कि आप लीला कर रहे हो।
2:18:47
यह लीला का नियम है कि आपको पता ना चले कि यह लीला है
2:18:53
और अब आपको पता चल रहा है
2:19:00
तो लीला लीला धर्म में समाती जाएगी। है ना?
2:19:08
हां मतलब आप लोग बोलते हो ना इनलाइटनमेंट आत्मज्ञान अरे उसका पता चलना ही पूरी लीला
2:19:15
लीलाधर में वापस होती जाएगी समाती जाएगी हां
2:19:23
असली लीला का मतलब है कि आपको पता ही ना चले कि आप लीला कर रहे हो तब तो लीला हुई ना पता चल गया तो मजा कहां
2:19:32
रहा
2:19:47
तो लीला करते हुए जीव बने रहना ज्यादा उचित है कि लीला कंप्लीट हो जाए लीलाधर हो
2:19:56
जाओ ज्यादा उचित है लीला चलती है ना? हां। इसलिए तो चल रही है
2:20:07
ना।
2:20:09
[हंसी]
2:20:23
तो सत्संग से आप निश्चिंत हो जाते हो। लीला में फिर जो भी हो आप निश्चिंत हो जाते हो।
2:20:52
और हर चीज का रोटेशन होता है। है ना? एक रोटेशन चलता रहता है। बस बहुत संदेह में जिओगे ना तो रोटेशन आ जाएगा। अचानक
2:21:01
श्रद्धा आ जाएगी आपके जीवन में। ऐसा रोटेशन है पूरा। श्रद्धा बहुत जो संदेह आ
2:21:08
जाएगा। पूरी लीला है ये।
2:21:14
दिन और रात रात और दिन
2:23:00
जैसे मूवी देखते हो ना तो तीन घंटे के लिए आप वो सब हो जाते हो
2:23:09
ना वो को एक्टर, एक्ट्रेस, विलेन। इसलिए आपको भाव आते हैं तभी तो आते हैं। कोई हंसता है, कोई रोता है, किसी को कई चीजें
2:23:18
क्लिक होती है। पर्दा तो खाली है।
2:23:24
प्रोजेक्टर से रोशनी आती है। है ना? बस यह आंख के पीछे से प्रोजेक्टर चल रहा है। यह
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दुनिया की मूवी चल रही है। मजे ले रहे हो आप।
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यहां पर भी विलेन है, हीरो हैं, सब हैं। पूरी रामायण चल रही है।
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[हंसी]
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तो यह आपका आनंद है। जैसे मूवी देखने जाते हो वो आपका आनंद होता है ना तो यह 100 साल
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की आप मूवी देख रहे हो। पागलों और कुछ नहीं कर रहे हो। यह आपका आनंद है।
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देह के प्रोजेक्टर से देख रहे हो। फसवस नहीं गए हो कहीं मूवी देखने आए हो
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बढ़िया पृथ्वी लोक में हां इतनी सी बात है
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अब वो मूवी में वो डॉक्टर बन गए हमारे मलंग जी देखो हम गुरु बन गए
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साला क्या चल चल रहा है इस मूवी में।
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[हंसी]
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[हंसी]
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वो क्या है भाई अनंत आत्मा में ये 100 साल तीन घंटे से भी कम की मूवी है ये 100 साल
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होता कितना है मैक्सिमम बढ़िया छोटी सी मूवी देख रहे हो आप मजे लो यार
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बढ़िया-बढ़ रोल मिले हुए हैं मजे लेते रहो
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उसमें काहे सीरियस होना है
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[नाक से की जाने वाली आवाज़]
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बट याद रखना देखने वाला ही मूवी है।
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पर्दा भी कोरा है वो नहीं देखने वाला ही मूवी होता है।
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देखने वाला नहीं है तो मूवी नहीं है। देखने वाला नहीं है तो दुनिया नहीं है।
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देखने वाला ही दुनिया है यारों। इसलिए मजे करो। सेलिब्रेट करो।
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[नाक से की जाने वाली आवाज़]
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[हंसी]
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तो भैया इस दुनिया में जिसको पता चल जाता है कि मैं तो मूवी देख रहा हूं
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वो इनलाइटेंड हो जाता है
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[हंसी]
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उसी को हम क्या बोलते हैं? इसको घटना घट गई। यह इनलाइटेंड हो गया। अरे क्या इनलाइटेंड
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हो गया? पता चल गया मूवी देख रहा है। और क्या है?
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हां।
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[नाक से की जाने वाली आवाज़]
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मजे से देख रहा है मूवी।
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और मूवी देखने वाला ही मूवी है। देखने वाला ही दिख रहा है ना? ये बॉडी, माइंड और
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ये चारों ओर देखने वाला ही दिख रहा है। गजब है एकदम।
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तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] देखने वाला ही दिख रहा है तो क्या गलत दिख रहा है
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जो तो तुम बोलते हो ये गलत ये सही ऐसा वैसा अरे भाई जब देखने वाला ही दिख रहा है
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तो क्या गलत दिख रहा है सब कुछ सुंदर है। सब कुछ देखने वाला है।
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सब कुछ परमात्मा है।
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अद्भुत अब आप बोलते हो इसके प्रति सजग रहना है।
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उसके प्रति सजग अरे तू अपने ही प्रति सजग हो रहा है। बेवकूफ किसी और के प्रति थोड़ी ना सजग हो रहा है।
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शरीर के प्रति सजग होना है। मन के प्रति अरे वह तू ही है। अपने प्रति क्या सजग होगा?
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तो सब कुछ प्रेमपूर्ण ढंग से बहुत सुंदर है।
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और सबका सम्मान अपना ही सम्मान है। परमात्मा का सम्मान है। है ना?
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तो अब देखो शुरू से जो सत्संग शुरू हुआ आपको मैं हर वो चीज दिखाया
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कई चीजें अभी नहीं है। है ना? लेकिन आप हर जगह झांक के आए
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अच्छा बुरा सही गलत देवता दानव सब कुछ में आप झांके ना
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हर जगह ऐसे झांक के देखे वहां आपको एंट्री क्यों मिली हर जगह में
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क्योंकि वो आप ही हो तो सबका परिचय हो जाना अपना अपना ही परिचय
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है। सर्वत्र का परिचय
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स्वयं का ही परिचय है। मैं के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं। कहीं पर भी
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तो जैसे मूवी में कई बार अच्छी चीजें आती है, कई बार बुरी चीजें आती है, कई बार एक्शन आता है, कई बार
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प्रेम आता है। ऐसा ही तो है ना आपकी लाइफ में।
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तो जो देखने वाला है वो ये पूरे रोल अदा कर रहा है। मजे ले रहा है वो। हां।
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आप बोलते हो जिंदगी में यह नहीं होना चाहिए, वह नहीं होना चाहिए। यह भी उस मूवी का हिस्सा है
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कि आपको इस समय यह ख्याल आया कि आपको इस समय यह नहीं होना चाहिए और इस समय यह होना चाहिए।
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यह भी इस मूवी का हिस्सा है।
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इसलिए बहुत सुंदर
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तो देखने वाला ही मूवी है। खिलाड़ी ही खेल है। लीलाधर ही लीला है।
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भगवान ही माया है।
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बोलने वाला ही सुनने वाला है।
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तो ठीक है प्रेम प्रणाम सभी को प्रेम प्रणाम
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जाने का दिल ही नहीं करता यार। हैं?
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हमको हटा दिया क्या?
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हम दिख तो नहीं रहा हूं मैं।
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दिखना को मांगता मैं हां ये हुई ना बात।
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तो कल मेरे को संध्या से मेरी बात हुई कल और संध्या क्या बोलती है मेरे को?
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हां मेरे को अच्छे से पता है कि मैं से भिन्न कुछ भी नहीं है। है ना?
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यार मेरा सिर कट रहा है यार राहुल तू ध्यान नहीं देता। हां ऐसा
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हां तो संध्या मेरे को बोलती है कि मेरे को मैं से भिन्न कुछ लगता ही नहीं है।
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फिर भी मैं आपको आपसे अपने से भिन्न मानती हूं ताकि आपके चरणों में पड़ी रहूं।
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ये तो हनुमान जी हो गई पूरी। यह रियल यह यह उस लीला के रहस्य को समझने
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लग गई और जीने लग गई है ना
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कि द्वैत से अद्वैत और अद्वैत के बाद एक लवेबल द्वैत
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द्वैताद्वैत बोल लो वर्ड्स हैं सारे तो एक बहुत खुशी हुई मेरे को इसकी बात सुन
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के कल
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अब तो अलग होना भी आनंद देने लग गया है।
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अब तो अलग होना भी आनंदाई हो गया।
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और एक की तो पूछो ही मत।
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[हंसी]
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तो अब सारे दायरे खत्म। बाउंड्रीज सारी टूट गई। है ना? अब उड़ान है एकदम
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मुक्त उड़ान
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एक बेफिक्री एक मस्ती
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ओके अब स्टॉप करो ठीक सबको प्रेम प्रणाम।