0:20
तो अपना होना उसका एहसास हो रहा है कि नहीं हो रहा है
0:29
कि मैं हूं। उसका एहसास हो रहा है कि नहीं? पता चल रहा है ना मैं हूं।
0:38
हां बस वहीं ठहरना है। जो मैं हूं अपने होने का एहसास
0:49
बस वहीं स्टॉप। यह परमात्मा का क्षेत्र है।
0:58
वहां कोई प्रश्न नहीं, कोई सोच समझ नहीं।
1:04
कुछ समझना नहीं है। वहां बस विश्राम है।
1:14
स्वयं में विश्राम। अपने होने का एहसास,
1:30
अपने होने का अनुभव, अपने होने का ज्ञान,
1:43
बाकी किसी और का ज्ञान संसार का ज्ञान है। दुनियादारी का ज्ञान है।
1:52
अपने होने का ज्ञान परमात्मा का ज्ञान है।
2:00
अपने होने का एहसास परमात्मा का एहसास
2:24
तो बस अपने होने का अनुभव अपने होने का एहसास
2:36
वह कैसा लगता है देखो गौर से। वो शांत है, मौन है,
2:50
निर्मल है, पवित्रतम है,
3:21
बस अपने आप में फुल रेस्ट
3:29
विश्राम
3:49
स्वयं ही अस्तित्व है। परमात्मा है।
4:01
जस्ट यू आर
4:21
बस मैं हूं।
4:40
स्वयं का बोध ही बुद्धत्व है।
4:46
अन्य का बोध संसार है।
5:09
बस स्वयं का एहसास बोध ज्ञान यह सब एक ही बातें हैं।
5:42
तृप्ति ही तृप्ति है खुद में।
5:54
शांति शांति
6:37
तो मैं हूं यही ध्यान है। समाधि है।
6:43
इसको लगाना नहीं है इस ध्यान को। आपका होना ही ध्यान है, समाधि है और
6:53
बुद्धत्व है।
7:09
बिल्कुल निर्मल निरंजन
7:28
बस आप हो
7:41
स्वयं का एहसास
8:44
स्वयं ही शाश्वत है। अनंत है।
8:57
ज्ञान है, प्रेम है, भक्ति है, सब स्वयं है।
9:48
ओम
10:14
स्वदेश देश
11:07
बस स्वयं का एहसास
11:25
ओके कम बैक स्लोली स्लोली
11:38
आपका स्वयं आपसे जुदा कभी है ही नहीं। वह आप ही हो।
11:46
वही सद्गुरु है, वही परमात्मा है, वही अस्तित्व है।
11:53
इसके अतिरिक्त सब कुछ एक सपना है और एक धोखा है।
12:09
बस स्वयं के एहसास में जियो। सब प्रत्यक्ष हो जाएगा।
12:21
ओके। कैसा लगा स्वयं में?
12:35
वहां सब है।
12:42
आपकी आवाज नहीं आ रही है।
12:50
बहुत या मन शांत हुआ अच्छा लगा लेकिन ये
12:56
जब प्रेजेंट मोमेंट आपको सोचते सुनते मेरी एप्लीकेशन तो चल ही रही थी कि मैं ये पूछ
13:03
लो ये पूछ लो मेरा नंबर आ गया शायद फिर नंबर आया ये पूछ लो वो ऐसा चल रहा था
13:12
नहीं कोई बात नहीं वो पूछ लूं ये पूछ लूं उससे बेहतर है उस एहसास में रहो उस
13:22
साइलेंस में तो साइलेंस हर प्रश्न का उत्तर है। है ना? वो पुरानी
13:32
धारणाओं के कारण आपको लग रहा है यह पूछ लूं वो पूछ लूं। पुरानी मान्यताएं हैं। जो भी आप पास्ट में सीखे हैं। है ना? बट
13:42
लक्ष्य केवल मैं आत्मा भगवान स्वयं आपका स्वयं
13:48
वही ओशो है वही सद्गुरु है वही सब कुछ है ना जो भी आपके गुरु हैं परमात्मा है ना वो
13:57
आपसे भिन्न नहीं है तो उसमें आप जिओगे अपने साइलेंस में
14:04
अपने होने में तो सब समाधान हो जाएगा तृप्त हो जाओगे हो गए एकदम
14:13
ओके हां जी
14:27
हां बताइए आप
14:44
एक मिनट आप रुकिए एक मिनट आप रुकिए हां बताइए आप ऐसे बता दो हां गुरुदेव
14:53
जैसे अभी रिसेंटली मैंने जैसे कहा ना मेरी आदत के मुताबिक तो अभी रिसेंटली पिछले दो चार
15:02
दिनों से जैन दर्शन पर एक्सप्लोर कर रहा था हम और उसमें आया कि भाई यह भरत क्षेत्र में तो कोई अरिहंत होने का या सिद्धशिला पे
15:11
जाने का स्कोप नहीं है। यहां से महाविदेश क्षेत्र में जाना है और सीमंदर स्वामी फिर बोले जाएंगे ऐसा वैसा तो ये आपकी बात सही
15:19
है। भटकना हो जाता है। ये कन्विक्शन होने के बाद भी जब चीजों को सेटाइट करने जाते हैं ना तो लगता है कि एम
15:26
आई रियली डूइंग और नॉट इट। दैट वास द रीज़न टू आस्क द क्वेश्चन। नहीं यह सब भ्रम है, मान्यताएं हैं,
15:34
धारणाएं हैं। है ना?
15:38
परमात्मा कभी भी भविष्य में नहीं होता। होता है तो अभी होता है। और यही होता है। है ना?
15:49
वह होगा तो वह होगा, वह होगा तो वह होगा। यह केवल धारणाएं हैं।
15:55
और कुछ भी नहीं है। सत्य नहीं है। और सबसे
16:03
मेन बात यह है कि परमात्मा कोई और होता ही नहीं है कि कोई आपको ले जाएगा।
16:09
वह आपका होना ही है। आप स्वयं हो। वहां कोई ले जाने वाला कोई नहीं है। है ना?
16:22
आपकी उपस्थिति ही परमात्मा की उपस्थिति है और सुनते सुनते इस पर निष्ठा आ जाती है।
16:31
हां क्योंकि आप हो बाकी सब भ्रम जाल है वो
16:38
केवल भ्रम है और कुछ नहीं है। नहीं ऐसा प्रश्न क्यों होता है कि कई
16:46
महापुरुष जैसे श्रीमद् राज चंद्र है या दादा भगवान है वह सब भी इसकी बात करते हैं कुकुंद स्वामी का वह जो समयसार तो ये सब
16:53
ग्रंथों में गहराई तो लगती है बात वही निकल के आती है जो आप से सुनने को मिलता है इसीलिए फिर होता है कि भाई जब वो लोग मान
17:00
रहे हैं तो बात में कुछ तथ्य होना चाहिए हम हम नहीं पास्ट के संतों से मेरे को टेली मत
17:09
करो अच्छा सबका सम्मान रखो हो बट पास्ट में जो भी
17:16
संत हुए हैं उससे मेरे को टेली मत करो। मैं अभी लाइव हूं और मैं जो बता रहा हूं
17:23
वो स्ट्रेट है, तुरंत है और ततक्षण है।
17:35
मैं हमेशा लाइव होता हूं। अभी होता हूं।
17:46
किसने क्या कहा, किसने क्या कहा? वो मैं क्या बताऊं? मैं अपनी बात बता रहा हूं।
17:53
हां। बहुत सारे
18:02
प्रमाण पक्ष और विपक्ष में दिए जा सकते हैं। लेकिन प्रमाणों का क्या करोगे? वाह। मैं
18:11
स्वयं तो स्वतः प्रमाणित हूं ना। अब एक बात बताओ परमात्मा या सद्गुरु या कोई भी किसको मिलेगा?
18:24
किसको मिलेगा? आप ही को तो मिलेगा ना? तो इंपॉर्टेंट कौन हुआ? आपकी परमात्मा है। आप
18:32
ही हुए ना 10,000 साल बाद भी मिलेगा या कुछ करके भी मिलेगा तो किसको मिलेगा?
18:41
तो इंपॉर्टेंट आप हुए ना तो जो परमात्मा को रिसीव कर लेगा वो असली परमात्मा है ना?
18:52
जो परमात्मा को जिसने रिसीव कर लिया तो वो तो आप ही हो।
19:05
जो भी घटना घटेगी भाई तुम्ही को तो घटेगी ना। जो बुद्धत्व की घटना को रिसीव कर ले रहा
19:14
है या कैवल्य की घटना को रिसीव कर ले रहा है या जो भी बोल लो उसको
19:20
निर्वाण बोल लो ये सब शब्द है जो सबको रिसीव कर ले रहा है वो इंपॉर्टेंट है ना
19:28
और जो इन सबको रिसीव कर ले रहा है वो सुप्रीम हुआ ना और वो तो भैया आप ही हो
19:40
असली कैवल्य, असली निर्वाणा, असली परमात्मा, असली सत्य तो आप ही हो बस।
19:53
क्योंकि जो होना है आप ही को होगा। जो भी घटना है,
20:02
समाधि लगनी है, आप ही को लगेगी। भगवान मिलना है, आप ही को मिलेगा। तो
20:09
आप इंपॉर्टेंट हो ना। कितनी सिंपल बात है। कोई बताता ही नहीं है।
20:22
कितना सहज सिंपल है।
20:32
हम कोई मित्र कुछ कह रहे थे।
20:40
अरे अपनी कद्र करो। हां। बस आपने अपनी कदर नहीं की है। पुराने
20:49
संतों की की है। भगवानों की की है। अच्छी बात है करना चाहिए। बट अपनी भी कदर करो।
20:55
क्या पता वो परमात्मा तुम ही हो। तो 10,000 साल बाद या 10 करोड़ जन्म के
21:05
बाद आप यही पाओगे। कि वह परमात्मा वो अस्तित्व केवल तुम ही हो। केवल तुम ही
21:16
यस।
21:25
हां जी। कोई कुछ कह रहे हैं बताइए।
21:41
जी
21:53
से ज्यादा
22:02
और एक मिनट एक मिनट आप कार चला रहे हैं क्या?
22:12
हां ठीक है ठीक है हां बताइए
22:26
तो उसके ऊपर किया वो भी पॉइंट
22:35
आपको
22:47
लेकिन मुझे धीरेधी
22:56
करना पड़ेगा तो स्टार्ट
23:03
को ले रहा हूं ना अचानक होते
23:12
और एक जैसे
23:19
हम हुआ
23:31
और एक मिनट वजह से हो रहा है और
23:45
होगा
23:57
तो एक बात की मतलब मैं अब नहीं कर पा रहा बहुत
24:08
प्रयास लेकिन वो प्रयास होती है
24:19
अनुभव नहीं ओके ओके ओके रुको आपका नाम क्या है?
24:30
हां हां प्रतीक जी तो
24:39
ये प्रयास का फल नहीं है। प्रसाद है ये। है ना?
24:47
तो हम सोचते हैं प्रयास से होगा। यह प्रसाद है जैसा आपको अपनी यंग एज में हुआ
24:55
वो प्रसाद उतरा था। है ना? अब उस प्रसाद को आपने प्रयास बना के खराब किया।
25:05
हां। तो यह प्रसाद है। जैसे ना जैसे मॉर्निंग
25:11
में एक फूल खिलता है। ऐसे सहज में वह अपने आप खिलता है। वह ऐसे प्रैक्टिस नहीं करता
25:19
खिलने की। है ना? सूर्य अपने आप प्रकट होता है सहज
25:26
में, मॉर्निंग में। सितारे अपने आप आते हैं रात्रि में या
25:32
वहीं होते हैं जो भी बोल लो। यह सब सहज में है। यह प्रयास रहित है।
25:39
आपको जीवन मिला एक सरप्राइज जीवन का।
25:46
यह सब प्रयास रहित है। तो जो प्रयास रहित है उसको हम प्रयास से
25:53
पाना चाहते हैं। इसलिए वह छिटक छिटक जाता है।
26:07
प्रसाद एक अलग दुनिया है। है ना? प्रयास एक अलग दुनिया है।
26:14
अब आप अपनी लाइफ में देखोगे ना तो हर चीज एक प्रसाद है। आप देख पा रहे हो, सुन पा
26:20
रहे हो, समझ पा रहे हो, जीवन यह सब एक प्रसाद है ना। आप में बोध है, होश है,
26:31
कसा स्नेहस है। यह सब प्रसाद है।
26:37
यह किसी प्रयास से आपको नहीं मिला है।
26:44
मतलब इन चमड़ी से देख पाना। यह चमड़ी है ना और क्या है? आंख। इससे आप देख पा रहे
26:52
हो। यह कोई प्रयास से नहीं देख रहे हो आप। यह प्रसाद है।
27:03
इस जीवंतता का अनुभव कर रहे हो भीतर बाहर। यह सब प्रसाद है।
27:14
तो परमात्मा के मंदिर में प्रसाद सबको मिलता है। इसलिए निश्चिंत रहना चाहिए।
27:31
और प्रसाद उसी को मिलता है जो प्रसाद की तरह ग्रहण करता है। जो जोड़ जबरदस्ती नहीं
27:37
करता परमात्मा से। हम सब जबरदस्ती करते हैं अपने विचारों से कि विचार रुक जाए,
27:43
भाव रुक जाए। मेरा शरीर मुक्त हो जाए अभी। यह जबरदस्ती है।
27:53
ना जबरदस्ती कहीं पर भी काम नहीं आएगी।
28:00
अटैक नहीं कर सकते आप। आप खाली रहो। अपनी धारणाओं से,
28:09
अपनी मान्यताओं से एकदम रिक्त रहो। खाली रहो। और परमात्मा का प्रसाद अभी उतर
28:17
जाएगा। आप बस खाली रहो एकदम पुरानी धारणाएं हटा
28:25
दो पुरानी मान्यताएं हटा दो जो भी पढ़े लिखे हो जला दो उसको तुरंत जला देना
28:32
लेट नहीं करना क्योंकि हम छोटी-छोटी चीजों का त्याग कर
28:39
देते हैं। लेकिन अपनी मान्यताओं का धारणाओं का त्याग कभी नहीं करते।
28:46
उसका त्याग असली है। और बड़ा घर गृहस्ती छोड़ के घूमते रहते
28:52
हैं जंगल तो ये सब का त्याग कर दो एकदम रिक्त हो
29:03
जाओ खाली फ्री एकदम
29:09
तुरंत उतरता है वो प्रसाद की तरह उतर जाता है और उतरना बोलना
29:17
भी एक गलत वर्ड है। वह आपके होने में उसका बोध होने लगता है।
29:26
तुरंत उसका बोध होने लगेगा। वो आप धारणाओं के कारण ना आप उसको ढक दियो
29:34
मान्यताओं के कारण।
29:47
है
30:11
2%
30:40
यह सब धारणाएं हैं और कुछ भी नहीं है। शांति धारणा नहीं है। है ना? वो तो आपके
30:47
होने का एहसास है। साइलेंस अभी बता रहा हूं ना मैं अभी की बात कर रहा
30:55
हूं कि अभी सारी धारणाएं हटाओ। अपने पास्ट को भी हटा दो। जो अनुभव हुआ उसको भी हटा
31:02
दो। अनुभव जिसने किया उसमें आ जाओ।
31:09
अनुभव करता जिसने शांति का अनुभव किया। अच्छे अनुभव किए जीवन में बुरे अनुभव किए।
31:19
अनुभव करने वाला। सामने परमात्मा भी आ जाए तो उसका भी अनुभव
31:28
करने वाला कोई होगा ना। तभी तो आप कहोगे ना यह परमात्मा है
31:36
या यह मोक्ष है यह या कैवल्य है उसका भी तो आप अनुभव करोगे ना या जो भी एक्सट्रीम है
31:45
तो अनुभव करने वाला उसमें अभी आ जाओ
31:53
अनुभव करने वाला कौन है अरे कौन है
31:59
अरे मैं हूं तो
32:05
जो सबका अनुभव कर लेता है सर्व का
32:13
दुनिया का परमात्मा का शांति का प्रेम का आनंद का
32:20
जो सबका अनुभव कर लेता है अनुभव करता
32:29
तो अनुभव्ता में आ जाओ। अब वो अनुभवर्ता कौन है?
32:42
मैं हूं। तो मैं
32:56
में कैसा लगता है?
33:08
बस बस वहां समाधान है। वहां कोई सवाल खड़े नहीं करना।
33:15
वहां साइलेंस हो जाओ। वह समाधान है, समाधि है।
33:24
और वह आप स्वयं हो। वहां सहज समाधि लगी ही हुई है।
33:33
लागी समाधि अखंड अपारा। तो बात करने से देखने से वह समाधि टूटती
33:42
नहीं है। सदा स्थिर है आपका होना
33:54
सदा शांत निरंतर शांत
34:11
समाधान ही समाधान
34:23
अब देखो आप समाधान का शांति का सबका अनुभव कर रहे हो।
34:31
तृप्ति का लेकिन इन सब का भी जो अनुभव करने वाला है
34:40
मैं स्वयं वह इंपॉर्टेंट है
34:47
और वह आप पहले से हो
34:58
वो आप पहले से हो
35:07
सदा से तो अपनी महत्ता को पहचानो।
35:19
इवन अनुभवों के पीछे भी मत भागो। यू आर द सेंटर ना।
35:28
सारे अनुभवों का स्रोत तो आप ही हो। कोई भी अनुभव है या होता है या होगा उसका
35:38
सेंटर तो आप हो ना। चाहे वह परमात्मा का अनुभव हो, बुद्धत्व
35:46
का हो, मोक्ष का हो या अनुभव के परे का अनुभव हो
35:54
या अनुभव करता का अनुभव हो,
36:08
उसका केंद्र तो आप भी हो मैं हूं।
36:41
अरे वहां सवाल आएगा ही नहीं। वहां तृप्त हो जाओ बस।
36:48
अपने आप में संतुष्ट हो जाओ। हां। वहां तो ब्रेन ही आउट हो जाता है ना।
36:57
मन बुद्धि गायब हो जाते हैं। मन बुद्धि नहीं है तो सवाल कहां से उठेगा?
37:10
बस अपने आप में तृप्त मस्त।
37:27
क्या बोल रहे हो?
37:33
वो आप आ सकते हैं यहां यहां के कांटेक्ट नंबर हैं उनसे आप संपर्क करें। यहां
37:42
सत्संग निरंतर चलता रहता है। 1 जून से स्टार्ट हो जाएगा। नॉन स्टॉप।
37:49
जिसको जब आना है आ सकता है। है ना?
38:01
आज प्रणाम जी हां जी प्रणाम
38:11
बस अपने आप पर निष्ठा रखो सारे अनुभव आप ही को तो होते हैं
38:21
तो आप इंपॉर्टेंट हो ना सारी घटनाएं आप ही को घटती है
38:32
तो घटनाओं के पीछे मत भागो। अनुभवों के पीछे मत भागो।
38:39
जो भी होगा में आप ही को होगा ना तो यह हो जाए वो हो जाए के चक्कर में
38:45
क्यों पड़ते हो? आप इंपॉर्टेंट हो ना। मतलब नहीं समझे आप।
38:52
यानी मैं क्या बता रहा हूं जो भी होगा चलो होगा के सेंस से भी लो
39:00
वो आपकी ओर खींचा चला आएगा आप ही को होगा ना
39:06
जो भी घटेगा आप ही को घटेगा ना तो आप इंपॉर्टेंट हो ना क्यों घटनाओं के
39:13
पीछे जाते हो अनुभवों के पीछे जाते हो हां परमात्मा भी मिलेगा तो आप ही को मिलेगा
39:22
या अस्तित्व भी मिलेगा तो आप ही को मिलेगा
39:30
तो आप इंपॉर्टेंट हो ना
39:38
तो अपने में रहो इनको खुद से आने दो आप इनके पीछे बेवजह घूमते रहते हो
39:48
अपने में रहो तो सब कुछ आप में समाहित हो जाता है।
40:08
अपने से निकल के ही पूछोगे जो पूछोगे वापस दे दो माइक।
40:22
हां असल में आप तृप्त होना ही नहीं चाहते। मैं
40:34
सेंटर बता दिया। वहां अभी तृप्त हो जाओ ना। क्या करना है? प्रश्न उत्तर प्रश्न उत्तर खुजली है केवल बौद्धिक।
40:43
उत्तर से फिर 100 प्रश्न आ जाते हैं। फिर 100 उत्तर फिर 100 प्रश्न है ना
40:52
अपने को प्रश्न उत्तरों में जाना है या समाधान में जाना है समाधान में और समाधान
41:00
तो मैं स्वयं हूं। कितना सरल है।
41:10
कितना सहज सरल है।
42:00
प्रेम प्रणाम गुरु जी प्रेम प्रणाम गुरु जी एक शंका है मन में
42:09
हम मान लेते हैं कि हम मैं हूं बाकी सब भ्रम है और
42:18
लेकिन बाहर की जो एक्टिविटीज होती है हमको वो प्रभावित करती रहती हैं। जैसे सरकार कोई भी कानून बना दिया। अभी जो किसान है
42:26
वो भी सड़कों पे हैं। मुझे भी गेहूं डाल के आने थे मंडी में। कल भी चक्का जाम था। तो
42:35
कर्म ना करना भी तो एक डिसीजन ही है। कर्म है और खुद में सेटिस्फाई रहना कि नहीं
42:44
बाकी सब भ्रम है तो क्या भ्रम है और क्या रियलिटी ये कैसे पता चले?
42:55
नहीं जो भी आपका कर्म क्षेत्र है उसमें जो भी आपका रोल है वो आप अदा करो ना
43:04
उससे आत्मा का कोई मतलब ही नहीं है ना मैं कोई गलत कार्य करने को नहीं बोल रहा
43:12
हूं आपको है ना जो भी आप कर्म कर रहे हो वो नीति पूर्वक
43:19
धर्म पूर्वक करो कर्म और व्यवहार कभी भी
43:27
बाधा नहीं बनते। इस चीज को हमेशा आप याद रखो।
43:33
जो भी आपके कर्म है उसको नीति पूर्वक धर्म पूर्वक करो। वो कभी भी बाधा नहीं बनते।
43:45
बन ही नहीं सकते। और बाहर की लाइफ में आपको लगेगा कभी सही
43:52
हो रहा है, कभी गलत हो रहा है, कभी यह ठीक नहीं हो रहा है, कभी वह ठीक नहीं हो रहा है। यह संसार का नेचर है।
44:02
संसार का मतलब ही है कि यहां कभी भी सब चीजें ठीक नहीं रहेंगी।
44:10
हमेशा कुछ गड़बड़ रहेगा। क्योंकि यहां कुछ गड़बड़ को मिलाया गया है।
44:17
ताकि आपको बीच-बीच में गड़बड़ लगती रहे। तभी तो अपने भीतर जाओगे।
44:25
प्रभु को तलाशोगे। बाहर सब ओके हो जाएगा तो कैसे तलाशोगे?
44:33
है ना? तो संसार का नेचर है। यहां सब गड़बड़ रहेगी ही रहेगी।
44:41
सब अभी यह ठीक हो जाएगा। जो भी आप बोल रहे हो तो फिर दूसरी गड़बड़ शुरू हो जाएगी। कभी घर की, कभी दुनिया की, कभी शरीर में
44:48
ही प्रॉब्लम हो जाएगी। कुछ ना कुछ चलता ही रहेगा। इसी का नाम संसार है।
44:57
और जहां कभी भी गड़बड़ होती ही नहीं, उसी का नाम मैं आत्मा भगवान है।
45:05
और वही आप हो इसलिए मस्त रहो। ठीक है।
45:13
ठीक है गुरु जी। गुरुदेव प्रणाम
45:20
हां प्रणाम जी प्रणाम भाई आलोक बोल रहा हूं हां जी क्या हाल है
45:27
एकदम मस्त गुरु जी अरे मस्त रहा करो यार जी जी आपसे शेयर करना था कुछ
45:35
हां बताइए अभी 28 मार्च को जब मैं वापस आया सत्संग प्रोग्राम से
45:43
हम जी तो उसके बाद में भी कुछ छोटे छोटे छोटे-छोटे प्रश्न जो है दिमाग में उठा
45:50
करते थे। अभी पिछले 15 दिनों से गुरुदेव कुछ भी प्रश्न नहीं बचे।
45:59
हम सारे प्रश्न डिसोल्व हो गए और जिसको आप हमेशा बोलते हैं मैं जीना।
46:07
अब बस वही चल रहा है। 24 घंटे बढ़िया है। मस्त है। एकदम
46:14
कोई प्रश्न नहीं है गुरुदेव। आता भी नहीं आता है तो खुद ही मर जाता है। मन
46:22
मन बुद्धि का कोई अस्तित्व लगता भी है और नहीं भी लगता होगा। हम
46:31
और बहुत अच्छा गुरुदेव 24 मिनट का एक वीडियो सत्संग है जिसमें जब मैं भी था उस समय पहले वाले
46:39
प्रोग्राम में जब मैं आया था तो एक 24 मिनट का वीडियो सत्संग है जिसमें वो बाहर लाउडस्कर की आवाज चल रही थी वहां से आपने
46:48
चालू किया कि जिसको शांति नहीं मिलती उसको शांति की कीमत होती है और उसमें गुरुदेव उसमें आपके दो सेंटेंस है वो दिमाग में
46:57
ऐसे घुस घुस गए हैं कि बस उसी में जी रहा हूं। आप बोलते हैं कि अरे ये धरती आकाश ये
47:04
रूम की मौजूदगी नहीं है। ये मेरी मौजूदगी है। आप गलत देख रहे हो।
47:11
ये मेरी मौजूदगी है। और फिर आखरी में प्रेम प्रणाम बोलते हैं आप और उसके बाद में फिर से वाक्य दोहराते हैं कि ये किसी
47:19
की मौजूदगी नहीं है। ये मेरी मौजूदगी है। बस गुरुदेव वही चीज 24 घंटे दिन रात
47:30
हम चल रही है और वही चल रही है। कुछ नहीं होता। ये तो वो सत्य है ना अभी
47:38
आप देखो कौन मौजूद है मैं ही तो मौजूद हूं यार ये शरीर मन थोड़ी ना मौजूद है ये धरती
47:45
आकाश थोड़ी ना मौजूद है मैं ही मौजूद हूं बस
47:52
और सदा से मैं ही मौजूद हूं
48:08
बहुत बढ़िया। बहुत अच्छी स्थिति है। है ना? अब स्थिति बोलना भी ठीक नहीं है। ये तो मैं ही हूं। है ना?
48:20
बहुत बढ़िया। आपका नाम भूल जाता हूं मैं। क्या है?
48:24
आलोक। आलोक हम आलोक। आलोक गुरु जी। आरव आलोक आलोक
48:33
आलोक जी यस क्या स्पीकर इसका बड़ा विचित्र है वॉइस
48:40
मेरे को प्रॉपर नहीं आती ओके आलोक जी
48:47
बस आपका आशीर्वाद बना रहे कुछ नहीं चाहिए बाकी कुछ भी नहीं चाहिए आपको
48:54
कोई उत्तर नहीं चाहिए कोई प्रश्न नहीं है कुछ नहीं है बस आपको देखता रहता हूं। मजा आता रहता है। सुनता रहता हूं। बस
49:03
बस कुछ नहीं। धन्यवाद। बहुत सुंदर। बहुत-बहुत प्रणाम। गुड।
49:11
प्रणाम जी
49:39
तो मेरे को एक मित्र बोले कि बुद्धा फिर एक नए ढंग से आएंगे तब बुद्धत्व होगा
49:49
लोगों को उसके पहले नहीं होगा। एक पूरा पैटर्न बताया उन्होंने
49:57
कि इस इस काल में ऐसे ऐसे इतने वर्ष बाद
50:03
फिर आप जैसे बताएं कि जैनिज्म में ये तीर्थंकर ऐसे होंगे। फिर वो आके वो
50:10
करेंगे तभी हो सकेगा। वो कहीं ले जाएंगे नहीं तो नहीं होगा। है ना?
50:22
तो आपको नहीं लगता ये बुद्धा ने नहीं कहा है
50:30
या महावीरा ने नहीं कहा है
50:38
ये ऐड है। ऐड है ना ये सब ऐड है।
50:57
जो परमात्मा या जो भी कैवल्य है निर्वाणा है इतना सता
51:06
के मिलता हो तो मेरे को तो वो चाहिए ही नहीं तुम रखो अपना तुम्हारे पास
51:15
परमात्मा टॉर्चर करेगा क्या आपको वो तो दयालु है, कृपालु है,
51:22
अस्तित्व प्रेम पूर्ण है आपके प्रति। वो आपको ऐसा टॉर्चर करेगा इतने जन्मों का और
51:28
ढाई हजार साल बाद तक टॉर्चर करता रहेगा। ये सब भ्रम है और कुछ नहीं।
51:37
टोटली भ्रम तो ये धारणाएं
51:49
हटानी ये भ्रम कभी अपने पे मत लादना।
51:55
आपके लिए सबसे बड़ा घातक है।
52:02
इससे इनसे बेहतर तो कबीर साहब बोलते हैं
52:11
कि खोजी होए तो तुरंत मिल पल भर की तलाश
52:18
में
52:34
पल भर भी बहुत बड़ा समय आखिर है तो समय
52:57
अरे मैं हूं इसको खोजना क्या है? जानना क्या है? समझना क्या है?
53:06
मैं हूं ना प्रत्यक्ष। इसमें होना भी क्या है?
53:13
मैं मौजूद हूं ना अभी और कौन मौजूद है?
53:18
देखो अभी आपकी बॉडी मौजूद है क्या? मन मौजूद है क्या?
53:24
मैं मौजूद हूं। अरे धरती आकाश भी मौजूद नहीं है। मैं मौजूद हूं।
53:32
केवल मैं इसमें कौन सा समय लगना है?
53:45
समय का क्षेत्र माया का है। भगवान का नहीं है। है ना? मैं में समय लगता ही नहीं है।
53:53
प्रत्यक्ष हूं मैं बस। एकदम प्रत्यक्ष।
54:31
हां जी हां क्या हाल है मलंग जी
54:39
इतना दूर क्यों बैठे हो यार पास आओ प्रणाम
55:09
और हम इतने स्टूपिड हैं, नॉनसेंस है, मूर्ख है, मूढ़ है,
55:20
घोर अज्ञानी है,
55:24
अल्प बुद्धि है, खल है।
55:32
सब समझ ही लेना कि हम
55:40
अपने स्वयं को मैं को जो देह मन नहीं है
55:48
उसको छोटा कर देते हैं और बुद्धत्व को बड़ा कर देते हैं
55:56
और वह बुद्धत्व वो मिलेगा आप ही को मैं को
56:05
अपने मैं को छोटा कर देते हैं परमात्मा को बड़ा कर देते हैं किसी घटना को बड़ा कर देते हैं और वो घटना घटेगी आप ही को
56:18
तो जो बुद्धत्व जो कैवल्य निर्वाण या परमात्मा आपको घटेगा
56:26
जिसको तो आपको रिसीव होगा। वो पात्र बड़ा है ना
56:33
वो पात्र बड़ा है तभी तो उनमें यह सब रिसीव होगा। वो पात्र आप ही हो।
56:43
अब यह पहली बात यहां हर कोई फंसता है। मैं जड़ ही काट दे रहा हूं।
56:53
दूसरी बात यह सब उस पात्र में पहले से समाए हुए हैं। मैं में
57:03
ये बुद्धत्व ये परमात्मा ये अस्तित्व ये जो कुछ भी सुने हो आज तक
57:10
सारे संत सारे परमात्मा यह मैं इस पात्र में ऑलरेडी समाए हुए हैं। यह कोई घटना
57:18
नहीं है जो आकर घटेगी। मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। अब मैं से
57:28
भिन्न कुछ भी नहीं तो सब समाया ही हुआ है मैं में। ना परमात्मा भिन्न है, ना अस्तित्व, ना
57:35
कैवल्य, ना मोक्ष, ना महावीर भिन्न है, ना बुद्ध।
57:41
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। ना कोई बुद्धत्व, ना कोई शांति, ना कोई
57:48
आनंद। मैं से भिन्न कुछ भी नहीं
57:56
कुछ भी नहीं चैप्टर क्लोज
58:05
भिन्न मानते हो तो तलाश जारी हो जाएगी। भुगतो सड़ो मरो।
58:13
उसके जिम्मेदार आप खुद हो। अस्तित्व को अपने से अलग मान रहे हो तभी
58:21
तो अस्तित्व खोज रहे हो। अलग मानो ही मत।
58:29
परमात्मा को अलग मान के ही तो उसकी याद करते हो या उसको खोजते हो।
58:37
अलग मानो ही मत ना यार। और अलग है ही नहीं। मैं के पात्र में यह सब इंक्लूड है।
58:50
सब का सब जो भी आप एक्सट्रीम चाहते हो वो भी
59:10
तो परमात्मा को अपने से अलग ना मानने पर
59:18
बुद्धत्व को अपने से अलग ना मानने पर
59:26
केवली पद या जो भी पद है उसको अपने से अलग ना मानने पर
59:36
भी क्या अलग लगता है?
59:49
परमात्मा को अलग मानने पर ही परमात्मा अलग लगता है।
59:59
याद रखना मेरी बात को।
1:00:06
अलग मानना ही अलग कर देना है।
1:00:13
फिर भी हालांकि अलग नहीं होता लेकिन अलग ना मानने पर इस अस्तित्व को
1:00:22
परमात्मा को अलग ना मानने पर खुद से अलग ना मानने पर क्या अलग लगता है?
1:00:35
नहीं लगता है क्योंकि अलग है ही नहीं।
1:00:55
तो अलग बस मत मानो अलग लगना खत्म हो जाएगा बंद हो जाएगा खोज समाप्त हो जाएगी
1:01:05
अस्तित्व को अलग मानना बस बंद कर दो उसी उसी समय पूर्णाहुति
1:01:13
संपूर्ण उसी क्षण हो जाओगे आप
1:01:24
और किसी को भी अपने से अलग मत मानो। जो भी आपके पुराने भी संत हैं, मास्टर्स
1:01:32
हैं, अवतार हैं, मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
1:01:42
राम कृष्ण शिव अभी तो हम बुद्ध महावीर और राम कृष्ण इनकी बात करते हैं ना अरे राम
1:01:50
कृष्ण शिव भी आपसे अलग नहीं दुर्गा भी आपसे अलग नहीं
1:02:03
इनको भी अलग मत मानो क्या यह अलग लगते हैं क्या
1:02:09
यह सब आपकी आत्मा है। अलग मानना ही
1:02:19
जिस क्षण आपने अलग माना उसी क्षण आपने अपने खाते में करोड़ों जन्म लिख दिए।
1:02:28
खत्म बात उसी क्षण फिर आप भूल जाओ।
1:02:37
और करोड़ों जन्म बाद भी इसी पॉइंट में आओगे कि मैं से भिन्न कुछ भी नहीं
1:02:47
कोई भी नहीं तो क्यों इतना टाइम वेस्ट करते हो अभी आ जाओ
1:02:56
अलग बस मत मानो और अलग है ही नहीं
1:03:06
अलग है ही नहीं।
1:03:19
यह धरती, यह आकाश, यह चराचर, यह अज्ञात, यह अव्यक्त,
1:03:27
यह परमात्मा, यह अस्तित्व मैं से मुझसे अलग है ही नहीं।
1:03:39
हो सकता ही नहीं। यहां बीच में ऐसे कोई बाउंड्री है ही नहीं
1:03:47
कहीं पर केवल मानी हुई बाउंड्रीज है।
1:03:55
यह अपार अस्तित्व मैं ही हूं। मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
1:04:15
तो अलग मानने पर ही यह सब अलग लगेंगे। अलग नहीं मानोगे तो अलग लगेंगे ही नहीं
1:04:22
यार। प्रैक्टिकल जी के देख लो। यह आपको एक पावर दिया गया है। आपकी
1:04:32
स्वतंत्रता आपको दी गई है कि तू अगर अलग मान के भी जीना चाहता है तो जी ले।
1:04:40
एक जीव रूप में भी जीना चाहता है तो जी ले।
1:04:46
यह फ्रीडम है। और तू अस्तित्व होकर जीना चाहता है तो अलग
1:04:55
मत मान और वह जी ले। तो तू अलग मत मान और जी ले
1:05:02
अभी के अभी
1:05:27
यह है सॉलिड रिदमम है ना बस इसी में जियो अभी सब
1:05:35
उसको चाय बोल के आओ तो आप जो हमारे है ना शेफ
1:05:45
आधा कप शक्कर कम हां
1:05:59
अलग नहीं मानो बात खत्म है आप आए ये बात सुने खत्म हो गई ना बात यार ऐसे होती है
1:06:07
जिंदगी ये होता है प्रसाद ये होता है प्रसाद आप तो रैंडम आए यहां आप
1:06:14
ऐसा सत्संग के लिए भी नहीं आए थे। ऐसे ही रायपुर आ गए तो आ गए। आए थे भरोसा नहीं था कि मिलेगा वो
1:06:22
ये प्रसाद फिर भी मिला ना इसको बोलते हैं प्रसाद।
1:06:30
तो कोई आरती करता है, पूजा हवन करता है उसको लास्ट में मिलता है। कोई लास्ट में आ जाता है उसको भी मिल जाता है।
1:06:43
कोई प्लान नहीं रहता किसी का चलते फिरते आ गया ले प्रसाद है तू भी रख
1:06:49
तो यह प्रसाद होता है हां तो टू द पॉइंट
1:06:57
अरे प्रसाद भी आपसे अलग नहीं है जब परमात्मा भी आपसे अलग नहीं है तो प्रसाद आपसे क्यों अलग हो
1:07:06
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। अरे पूरा मामला क्या है?
1:07:15
जब अलग मानने से ही अलग लगता है। अलग ना मानने से अलग लगता ही नहीं है।
1:07:25
ये तो मास्टर की है ना। अब इस आकाश को अलग क्यों मानते हो अपने
1:07:31
से? इस धरती को इस अस्तित्व को।
1:07:38
मत मानो ततक्षण आपका विराट स्वरूप प्रकट हो जाएगा।
1:07:47
ततक्षण प्रकट हो जाएगा इन द सेंस वो है ही प्रकट। अलग मानने के कारण आपका विराट स्वरूप
1:07:58
यह केवल बॉडी दिख रहा है। अलग मत मानो। यह सब कुछ आपका विराट स्वरूप
1:08:05
है। सब कुछ जब आप लोग गीता में कृष्ण का वह वीडियो
1:08:13
देखे विराट स्वरूप अरे यह आपका विराट स्वरूप है इसको कब देखोगे
1:08:29
अब कितना इजी है।
1:08:39
यह पूरा अस्तित्व आपका विराट स्वरूप पूरा
1:08:46
और प्रत्यक्ष देख लो अलग बस मत मानो
1:08:56
तुरंत एहसास हो जाएगा।
1:09:05
तो खोजी हो तो तुरंत मिल पल भर की तलाश में अब तो तलाश भी नहीं किया अपन
1:09:14
मैं तो प्रकट ही हूं हां
1:09:34
हम अब बताओ अब किसी के अंदर कोई प्रश्न या कोई ख्याल
1:09:45
आ रहा है तो वह अलग मान के ही आ रहा है
1:09:55
और अलग मानो ही मत कुछ भी किसी को भी पूरे अस्तित्व को भी
1:10:03
मामला खत्म अब इसके लिए क्या साधना करोगे पागल हो
1:10:10
क्या साधना करोगे
1:10:19
यह आत्मवान का सत्संग है भाई यह किसी आचार्य का सत्संग नहीं है
1:10:27
आचार्य श्रेणी नहीं है। यह आचार्य श्रेणी यानी वह ध्यान साधना है।
1:10:41
यह अवधूत श्रेणी है।
1:10:53
हां। एकदम तक्षण है।
1:11:06
हां देखो अलग मत मानो और आपकी बाउंड्री कहां है ये बताओ मेरे को। कहां है आपकी बाउंड्री?
1:11:24
अरे अलग मानना ही आपकी बाउंड्री है।
1:11:36
अलग ना मानना बाउंड्री लेस हो गए। अनंत भी अब बच्चा है आपके सामने।
1:11:43
अज्ञात भी अव्यक्त भी अस्तित्व भी क्योंकि आपसे अलग है ही नहीं
1:11:51
ना। अब कितना प्रत्यक्ष है देखो
1:11:58
वो विराट विराट करते रहते तो सहज में आप विराट हो। हम
1:12:10
अब ये दिमागी तो है नहीं। लग रहा है कि नहीं लग रहा? कितना प्रत्यक्ष है
1:12:18
दिमागी तो आप पहले जी रहे थे खुद को पैक करके केवल बॉडी में जीव में
1:12:30
ये तो यार खाते पीते बात क्लियर हो जाती है हां इसके लिए आप लोग साधना करते हो
1:12:42
हम
1:12:54
टाइम पास है ये सब साधनाएं क्या है टाइम पास
1:13:05
सारी साधनाएं किस लिए
1:13:13
परमात्मा को पाने के लिए तो आप परमात्मा को अलग मान के ही तो साधना कर रहे हो।
1:13:24
नाम स्मरण करते हो परमात्मा को खुद को खुद से अलग मान के करते हो ना
1:13:31
कि परमात्मा आपसे अलग है तभी तो उसका नाम लोगे
1:13:38
और अलग है ही नहीं तो यार सोचो
1:13:54
और अलग है ही नहीं। याद रखना अलग है ही नहीं।
1:14:02
अलग केवल आपकी मान्यता है। रियल में अलग है ही नहीं।
1:14:18
हां जी है कोई 11 आ रहा
1:14:39
चेंज करो यार इन लोग को ये लोग समाधि लगा लेते हैं।
1:15:35
मतलब हम क्या किए ये जिंदगी भर मालूम दिखाओ डंडा दो
1:15:45
डंडे से लकड़ी को अलग करने का प्रयास किए
1:15:52
जिंदगी भर यही प्रयास किए अपने आप को अस्तित्व से अलग करने का
1:16:00
प्रयास मैं अलग वो अलग फिर ध्यान फिर साधना फिर ये फिर वो फिर यह ज्ञान सीखो वो ज्ञान सीखो अरे ज्ञान तुमसे अलग कहां है?
1:16:13
तुम्हारा होना ही तो ज्ञान है इसलिए हर चीज को जानते हो सहज में। फिर प्रेम मार्ग भक्ति मार्ग अरे प्रेम
1:16:21
तुमसे अलग कहां है? तुम स्वयं प्रेम हो। इसलिए तो तुमसे इतना प्रेम उमड़ता है। आता
1:16:28
है सबके लिए। हम केवल हर चीज को अलग कर दिए। अलग यानी
1:16:36
सबसे खतरनाक किया गया है आपके साथ शाम दाम दंड भेद
1:16:43
सबसे खतरनाक चीज होती है फोर्थ द भेद परमात्मा और आपके भी बीच भेद पैदा कर दिया
1:16:52
गया अब आप कुछ कर ही नहीं सकते आप अपंग हो गए
1:17:00
अस्तित्व और आपके प्रति ही भेद पैदा कर दिया गया
1:17:13
और अब क्या कहा गया अब तुम अस्तित्व को प्रेम करो
1:17:28
अब अस्तित्व को खोजो अस्तित्व को जानो परमात्मा को जानो मिलेगा जन्मों के बाद
1:17:36
कितना खतरनाक हुआ है आपके साथ। आपको पता है
1:17:43
इतना भयंकर भेद।
1:18:16
और कई जन्म के बाद या करोड़ों जन्म के बाद भी आपको केवल यही पता चलता है कि परमात्मा
1:18:23
आपसे अलग ही ही नहीं था। कैवल्य आपसे अलग ही नहीं था।
1:18:37
जो भी बोल लो नारायण बोल लो, शिव बोल लो वो आपसे अलग ही नहीं था।
1:18:59
हम
1:19:08
प्रेम प्रणाम प्रभु जी हां प्रेम प्रणाम
1:19:20
जी हमें इतना दिन से आपसे बात करने के लिए ललाई थी। हां जी।
1:19:28
एक बार आपसे बात हुआ था मेरा बहुत दिन पौने घंटा बात किए थे एक ही बार।
1:19:36
हां जी। हां। तो अभी जिस पॉइंट को हम बता रहे हैं जी।
1:19:43
अभी जिस पॉइंट को हम बता रहे हैं उसमें डूबो आप।
1:20:27
फिर आपको साक्षी का ध्यान कराया जाता है विटनेस दृष्टा कि मैं यह भी मैं नहीं हूं। यह भी मैं
1:20:35
नहीं हूं। यह भी मैं नहीं हूं। अरे यह भी तू नहीं है तू बोल क्यों रहा है? यह भी तू नहीं है।
1:20:44
तेरा बोलना ही बता रहा है कि ये सब कुछ तू है। हां, यह और बात कि इन सबसे परे भी तू है।
1:20:56
यह भी मैं नहीं हूं। यह भी मैं नहीं हूं। यह भी मैं नहीं हूं।
1:21:10
स्टॉप करो। अभी आप शांत रहो।
1:21:16
अभी हम जो बता रहे हैं उसको ग्रहण करो।
1:21:24
तो पूरी कहानी होती है अलग मान के।
1:21:30
पूरी कहानी शुरू हो जाती है अंतहीन कहानी केवल इतनी सी बात से
1:21:40
आपने अलग मान लिया जो अलग था नहीं उसी को अलग
1:21:49
मान लिया और अब उसका भयंकर परिणाम है ये
1:21:58
यह ध्यान, यह साधनाएं, यह जप तप, यह पीड़ाएं, यह तड़पना और यह बेचैन होना
1:22:13
और अंतहीन फाइट है यह। अब आप फाइट ही तो करोगे ना अस्तित्व से जब अलग मान लिए तो अब प्रेम कैसे करोगे?
1:22:22
प्रेम तो केवल शब्द हो गया ना?
1:22:26
इतना अलग मान लिए तो अब फाइट ही तो कर रहे हो आप। फिर अपनी बॉडी को सिक्योर कर रहे हो।
1:22:34
सुरक्षा सुरक्षा खेल रहे हो। फाइनेंशियल सिक्योरिटी ये सिक्योरिटी वो सिक्योरिटी ये क्या है?
1:22:48
ठीक है। यह सब करो शारीरिक तल पर वहां तक ठीक है। लेकिन पहला प्रथम प्रथम अपना बोध
1:22:58
है ना आत्म बोध कि मैं से भिन्न कुछ है ही नहीं।
1:23:07
अब आत्मा और परमात्मा को भी लोग अलग कर डाले। यह हालत है।
1:23:16
इनमें भी कई शास्त्र बना डाले। आत्मा में यह होता है। परमात्मा में यह यह होता है। उसमें यह होता है। उसमें यह होता है। अब
1:23:25
गई भैंस पानी में।
1:23:35
फिर गुरु को आप अलग कर डाले। संत अलग, सद्गुरु अलग, गुरु अलग। है ना?
1:23:48
अब जो गुरु आपसे अलग है, वह आपको क्या दे पाएगा यार?
1:23:56
वो तो अपना गुरु बनकर बैठा रहेगा। तुम सेवा करते रहो उसकी। है ना?
1:24:03
पैर दबाते रहो और खिलाते पिलाते रहो। वह तुमको उसी से बनाए रखेगा।
1:24:13
सब धोखाधड़ी है। गुरु कैसे आपसे अलग हो जाएगा?
1:24:26
इसलिए गुरु को बहुत फ्रेंडली होना चाहिए। है ना? मित्रवत होना चाहिए। आपके जैसा
1:24:33
होना चाहिए। सिंपल आपके जैसा उठे बैठे खाए पिए रहे मस्त एकदम से तामझाम नहीं होना चाहिए।
1:24:42
वो बड़ा तामझाम वाली ड्रेस पहन के आएगा थोड़ा शर्ट करेगा ऊपर कुछ पहना रहेगा
1:24:50
ये क्या है ऐसा थोड़ी ना होता है गुरु यार ये तो उसने दरार पैदा कर दी आप में और खुद
1:24:58
में है ना क्योंकि शिष्य तो बाहरी चीजें ही पहले
1:25:07
देखता है ना उसी से आकर्षित होता है। उसको क्या मालूम कि असली चीज क्या है?
1:25:23
मैं जैसे मेरे गुरु ओशो रहे वो प्रथम गुरु वही रहे। तो मैं देखता था यार ये मैं तो
1:25:31
ये हो ही नहीं सकता कभी। वो इतने तामझाम में रहते थे।
1:25:38
उनके अपने कारण थे तामझाम में रहने के कि यह फिर तामझाम पर र्स रy में आना और
1:25:47
फिर वॉचेस इतनी महंगी फिर वो पहनते थे ड्रेस अप उनका
1:25:54
और फिर उनका बोलना भी एकदम सेटल जैसे कोई एक्यूरेट एआई बोल रहा है एकदम
1:26:03
ऐसे हाथ और वह सब तो मैं बचपन में सोचता था यार यह तो असंभव
1:26:12
है। अपने बस की बात नहीं है।
1:26:19
ऐसा मेरे को एक सेंस आता था। यार नहीं है यार पॉसिबल ही नहीं है।
1:26:30
तो गुरु को साधारण होना चाहिए। प्यासा होना चाहिए। एकदम मस्त फकीर साधारण
1:26:38
सिंपल आपके जैसा आपके साथ उठे बैठे बैठे मस्त
1:26:51
आपको भी पता ना चले ये गुरु है
1:26:57
तब वो आपकी हेल्प कर सकता है।
1:27:07
यह मैं गुरु के साइड से बोल रहा हूं। आपके साइड से गुरु के प्रति नारायण दृष्टि
1:27:14
होनी चाहिए। वह भी एक सत्य है। तब वह मैचिंग होती है और वह बात चली जाती है।
1:27:23
एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन पैदा होता है।
1:27:33
तो इतनी दूरियां पैदा कर दी गई परमात्मा और आप में गुरु और आप में
1:27:39
फिर एक और संत की कैटेगरी डाल दी संत और आप में
1:27:45
ऐसे कैटेगरी पर कैटेगरी फिर एक और तुरिया बना दिए फिर तुरियातीत बना दिए फिर
1:27:53
उसके आगे बना दिए ताकि तुम उलझे रहो तुम बेवकूफ बने रहो हो
1:28:01
लेकिन कब तक कब तक चलेगा ये सब
1:28:08
कब तक आपको धोखा दिया जाए क्या आपको लगता है मैं 100 200 साधनाएं
1:28:15
नहीं बता सकता यहां करोड़ों की भीड़ आ जाएगी बता रहा हूं मैं यह सब करवाऊंगा तो
1:28:24
लेकिन धोखा है वो आपके साथ सरासर सर धोखा मैं साधना नहीं मैं सत्य बताऊंगा।
1:28:33
हां याद रखना और सत्य यही है कि परमात्मा आपसे अलग है ही नहीं।
1:28:41
यह पूरा एग्जिस्टेंस आपसे रत्ती भर अलग नहीं। कोई भी गुरु आज तक पहले का या अभी जो भी
1:28:50
है वह आपसे अलग है ही नहीं।
1:29:00
राम कृष्ण शिव जो भी सुने हो ना आपसे अलग कुछ भी नहीं है।
1:29:15
तो बस अलग मत मानो क्योंकि अलग मानना ही अलग है
1:29:22
और अलग ना मानना एक हो जाना है। एककार हो जाना है।
1:29:36
बस इतनी सी बात है। अलग ना मानना इस अस्तित्व से एकाकार हो जाना। तो कुछ भी अपने से अलग मत मानो। यह आकाश,
1:29:45
यह धरती, यह दुनिया, यह परमात्मा, यह अस्तित्व, यह सद्गुरु,
1:29:51
यह संत अपने से मैं से अलग कुछ है ही नहीं। मैं से भिन्न कुछ है ही नहीं।
1:30:00
और मस्त रहो यार। एकदम मस्त। बेफिक्र।
1:30:09
जब अस्तित्व आपसे अलग है ही नहीं तो क्या पाना है? किस चीज की चिंता?
1:30:15
अस्तित्व आपका शरीर की भी टेक केयर कर लेगा और आपकी आत्मा तो अस्तित्व है ही।
1:30:25
अच्छा परमात्मा प्रभु आपसे अलग नहीं है तो अब और क्या सोच रहे हो? नाचते क्यों नहीं हो? ये क्या शक्ल दिखा रहे हो मेरे को?
1:30:37
हां अभी भी अलग मान रहे हो क्या?
1:30:53
अरे यह अकेला सत्संग पूरा पृथ्वी को बदल सकता है। हां इसमें वो
1:31:02
क्षमता है। तुमको सुनना बस है। इवन करना भी कुछ नहीं।
1:31:09
चैप्टर क्लोज अज्ञानता का अंत।
1:31:22
मेरा मुरमुरे दो यार है वही तो
1:32:06
यही आत्मनिष्ठा है कि मैं से भिन्न कुछ भी नहीं
1:32:16
और कुछ भी नहीं। आ पूरा चराचर मैं हूं। यह धरती आकाश मैं हूं। परमात्मा मैं हूं।
1:32:25
बुद्धत्व मैं हूं। कैवल्य मैं हूं।
1:32:33
राम कृष्ण शिव मैं हूं और इन सबको मिला दो। सब मिला के भी मैं हूं।
1:32:42
और इनसे भी परे हूं मैं। यह तो मैं हूं ही और इनसे भी परे मैं हूं क्योंकि परे भी
1:32:50
मैं हूं। क्योंकि परे भी मुझसे भिन्न नहीं।
1:33:08
अब बहुत आनंद की यह बात है कि ऐसा सहज में है।
1:33:20
ऐसा एकदम सहज में प्रत्यक्ष।
1:33:28
इसमें कुछ करना वरना नहीं है।
1:33:44
अरे मेरे को ऐसा कोई बताने वाला नहीं था। तुम लोग को मैं बताने वाला डायरेक्ट कॉन्फिडेंस दिला रहा हूं।
1:33:54
मेरे को तो कोई ऐसे बता देता ना एक बार अपनी आत्मा से एक बार में मेरी बात खत्म
1:34:01
हो जाती।
1:34:42
अब यहां मैं मौजूद मौजूद हूं। कई ओसो वाले आते हैं। ओसो को सुनते। अरे अब मैं मौजूद हूं। क्या ओसो को सुन रहे हो यार तुम? जय
1:34:50
कृष्ण मूर्ति पढ़ रहे हो। रमना पढ़ रहे हो। रामकृष्ण पढ़ रहे हो। वो मेरा पास्ट है सब।
1:34:59
मैं मौजूद हूं और तुम लोग सुन क्या रहे हो?
1:35:05
स्ट्रेट हूं मैं। बुद्ध महावीर ये वो। अरे मैं अभी हूं।
1:35:14
मौजूद तुम हो कहां?
1:35:30
पुराना सुने समझे वो सब बढ़िया है। बहुत अच्छा किए। सबका सम्मान भी रखो। लेकिन अभी मैं मौजूद
1:35:40
हूं। तो बस आपका धर्म है मेरे से जुड़े रहना सत्संग में।
1:35:50
बाकी सब हटाओ।
1:36:10
देखो ना कितना प्रत्यक्ष हो गया है। कितना यार
1:36:18
और लोग बोलते हैं हमको व्यापकता का अनुभव नहीं होता। अरे अलग मानेगा तो अनुभव कैसे होगा? व्यापकता का
1:36:25
अपने से अलग मान ही मत इस व्यापकता को। कैसे अनुभव नहीं होगा?
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अपने से अलग मान ही मत इस अस्तित्व को। कैसे अनुभव नहीं होगा?
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एकदम क्लियर है। हम भाव करते हैं मैं व्यापक हूं, अनंत
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हूं, व्यापक हूं। वह भाव एक अलग चीज है। यह सत्य और गहरे होता है। यह स्ट्रेट है ना? अलग मानो ही मत।
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प्रत्यक्ष है।
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एक बार बात क्लियर हो गई तो परमानेंट।
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तब आपको धोखा नहीं दिया जा सकता।
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ये लीजिए भाई
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यस
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तो ठीक है सभी को प्रेम प्रणाम