Prabhu Shree
0:17
हां तो क्या सुनना पसंद करोगे भाई?
0:23
मैं को मैं कौन हूं?
0:30
हां यह किसने कहा भाई?
0:33
प्रयम प्रणाम प्रभु सूरत से चंद्रिका जी। अरे ये मैंने कहा कि किसी और ने कहा कि
0:42
मैं कौन हूं? सिर्फ सिर्फ मैं सिर्फ मैं
0:57
प्रभु बहुत अच्छा लग रहा है आप वीडियो कॉल पे हो रहा है हमारा मीट और
1:06
जैसे एकदम ब्लास्ट ऐसे सेशन हो रहा है हम
1:14
और बहुत अच्छा लग रहा है तो जैसे करीब करीब ऐसा फील होता है
1:22
हम
1:33
और कोई एनीबडी इकट्ठा सब पूछ ही लो जो पूछना है या बताना है बता दो
1:44
प्रेम प्रणाम प्रभु श्री प्रेम प्रणाम बिस्किट बोल रही हूं
1:53
हां पता है हमको आपका नाम बस प्रणाम करने के लिए सॉरी
2:04
और क्या चल रहा है बहुत बढ़िया प्रभु श्री हम बस प्रणाम करने के लिए ऑन किया।
2:14
हां हां जी
2:31
हेलो प्रभु आज मैंने
2:44
हां आपकी आवाज अच्छा
2:51
आपकी आवाज कट रही है। अभी आ
3:10
हां जी अभी आ रही है। हां हां अब आ रही है। हां
3:17
तो वो मैंने बार-बार सुनती हूं। दिल्ली से ममता जी है उनके साथ का एक सेशन है और
3:25
अपने में मतलब विश्राम करें हम।
3:33
और जो शून्य मतलब शून्य जो शून्यता जो है वहां से अपने अपना ध्यान हटा के हम हम
3:41
वो हम अपने में विश्राम करने का और वो जैसे ही खाली मतलब करना कुछ नहीं है
3:50
अपने में विश्राम करो ऐसे ही आ जाता है तुरंत ही वो पूरे फिर पे
3:57
ओके और वो वो तुरंत अनुभव में आ जाता है और बस
4:04
वहां रहते हैं। तो हमेशा
4:13
इस बात का ख्याल रखो हम दो बातें हैं।
4:21
फर्स्ट हम मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
4:31
यस और सेकंड मैं के बिना भी कुछ भी नहीं।
4:38
यही मैं का परिचय है।
4:47
ये अल्टीमेट पॉइंट्स है। आज दिन के सत्संग में थे आप?
4:56
नहीं। ओके। नहीं हां इसी पे सत्संग चला था कि मैं से भिन्न
5:04
कुछ भी नहीं कुछ भी नहीं यस
5:13
वैसे छूटता कुछ भी कोई भी मीटिंग छूटती नहीं है लेकिन आज कंपलसरी जाना हुआ तो गया
5:22
कोई बात नहीं
5:38
और प्रभु आपकी तो सिर्फ आवाज ही सुनके बहुत कुछ होता है। और कुछ
5:45
ज्यादा करने की जरूरत भी नहीं रहती है। हम और वो आपका प्रेम है ना जिनको मेरे से प्रेम
5:54
है वो मेरे साथ हैं सुन नहीं भी रहे हैं या कुछ भी सुन रहे हैं वो डूब जाते हैं।
6:03
हां ये प्रेम की खासियत है।
6:12
और जिनको मेरे से प्रेम नहीं है, वह बस मेरे को समझते रहते हैं।
6:22
अपने कांसेप्ट क्लियर करते रहते हैं। तो वो भी ठीक है। देर अवेयर उनको भी प्रेम
6:29
हो ही जाता है। हो ही जाता है। पर प्रभु ये जो आपने अभी बोला ना कांसेप्ट
6:37
क्लियर करते रहते हैं। वो कभी भी क्लियर होते ही नहीं। ये भी एक हम
6:44
फैक्ट है। हम मेरा हां वही वो कभी भी क्लियर नहीं होते
6:53
हम कांसेप्ट का ही मतलब अनक्लियर है ना वो कहां से क्लियर होंगे
7:01
क्लियर होंगे
7:15
हां जी एनीबडी डी प्रेम प्रणाम प्रभु
7:23
प्रेम प्रणाम धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद
7:29
बस धन्यवाद ही है हम
7:35
बहुत मजा आ रहा है क्या खुल रहा है क्या हो रहा है कुछ पता नहीं चल रहा है लेकिन मजा आ रहा है
7:45
हां जी धन्यवाद
7:51
प्रणाम है सबको प्रणाम है
8:04
प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम
8:26
तो टू द पॉइंट चलते हैं। है ना?
8:31
किसी का कोई सवाल हो तो पूछ लो भैया। फिर मैं आगे चलूं। प्रणाम प्रभु
8:40
प्रणाम। मैं
8:47
हेलो प्रभु हां बोलिए
8:56
मैं ये बोल रहा हूं कि जैसे मेरे को आज दोपहर में एक बात थोड़ी अजीब सी लगी लोगों ने पूछा तो मैं बोला मैं आपके सत्संग
9:03
सुनता हूं रोज मैंने बोला आज शाम को गुरु जी से पूछते हैं
9:11
लोग अपनी आत्मा निकलती कोई आदमी जैसे डेथ हो जाती है आत्मा निकलती है तो निकल के आत्मा
9:18
कहां जाती है या आत्मा भी होती है या सिर्फ स्वास रुकती है ऐसा क्या सिस्टम है
9:25
आत्मा पुनर्जन्म का सिस्टम है या लोगों का ऐसा भ्रम है या क्या है ओके ओके हम समझ गए हम जवाब देंगे आपकी
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बातों का भी और एनीबडी और किसी का कोई ख्यालात हॉले
9:45
दिल कोई सवाल
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नो सवाल
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तो आपको जैसे रात को गहरी नींद आती है ना तो गहरी नींद में आपकी पूरी दुनिया समाप्त
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हो जाती है। आपकी बॉडी, आपका माइंड, आपकी दुनिया कुछ भी नहीं रहता। वो भी एक छोटी मृत्यु है। है ना?
10:27
वह भी छोटी मृत्यु है। तो फिर सुबहेरे आप क्या करते हो?
10:36
जो काम आपको करने हैं आप वही करते हो ना। जो बचे हुए काम है, जो आपकी डिजायर है,
10:45
उसको फिर कंप्लीट करने आप मॉर्निंग में फिर निकल जाते हो। सेम मरने के बाद होता
10:52
है और कुछ भी नहीं होता। और मरने के बाद आत्मा निकलती है। वह कहना
10:59
गलत है। सूक्ष्म शरीर ही निकलता है। आत्मा ना कहीं आती ना जाती। आत्मा सो परमात्मा
11:08
है ना। उसको यह नहीं समझना कि आत्मा निकलती है। वह मिसगाइडेंस है।
11:18
आपका सूक्ष्म शरीर निकलता है। आपकी जो भी डिजायर रहती है फिर वह पूरा करने के लिए
11:23
नया जन्म ले लेता है। सिंपल है।
11:31
और बहुत ईजीली सब हो जाता है। बहुत ज्यादा पीड़ा है आपको मरते समय तो
11:39
प्रकृति आपको बेहोश कर देगी। आपको पीड़ा नहीं होगी मरते समय। आपका ईजीली जन्म भी हो जाएगा। जो भी आपकी डिजायर है वह
11:48
ऑटोमेटिक है। एकदम नेचुरल। यह तो जन्म मरण की बात हुई।
12:04
बट असली बात यह सब नहीं है।
12:11
असली बात है मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
12:20
पूरे संपूर्ण अध्यात्म का सार है।
12:30
यानी इस अस्तित्व को अलग मानना ही
12:39
अलग कर देना है।
12:47
अलग मानने से यह अस्तित्व अलग लगने लगता है
12:53
और अलग ना मानने से यह आपको एक लगने लगता है।
13:03
यह अस्तित्व आपसे अलग है ही नहीं। मैं से भिन्न कुछ भी
13:12
नहीं। परमात्मा भी आपसे अलग है ही नहीं।
13:21
तो अलग मानना ही अलग है और अलग ना मानना
13:28
एकाकार हो जाना है। तो अभी प्रैक्टिकली
13:36
परमात्मा को अस्तित्व को अपने से अलग मानो ही मत।
13:50
अलग मानो ही मत यह पूरा चराचर ये एग्जिस्टेंस
13:59
आपसे अलग है ही नहीं। जिसको आप बुद्धत्व कहते हो, कैवल्य कहते हो,
14:12
आत्मज्ञान कहते हो, वह भी आपसे अलग है ही नहीं।
14:21
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। कुछ भी नहीं।
14:32
बस अलग मत मानो। और देखो फिर
14:41
सारी बाउंड्रीज आपकी हट जाएगी। आप बाउंड्री लेस हो जाओगे। ततक्षण
14:52
ततक्षण बस अलग मत मानो।
15:04
आपने केवल एक ही भूल की है अस्तित्व को
15:13
अपने से अलग मानने की।
15:20
परमात्मा को अपने से अलग मानने की
15:29
परमात्मा से खुद को अलग मानते हो उसी समय आपको परमात्मा की तलाश शुरू हो
15:38
जाती है। तभी साधना करते हो, तभी ध्यान करते हो,
15:47
तभी समाधि लगाते हो। और जब परमात्मा आपसे अलग है ही नहीं तो किस चीज की साधना करोगे?
16:05
सारी साधनाएं, सारे ध्यान अलग मान के हैं।
16:12
सारी प्रॉब्लम आपकी अलग मान के है। और यह
16:17
अस्तित्व आपसे अलग है ही नहीं।
16:24
प्रभु आपसे अलग है ही नहीं।
16:42
यह धरती, यह आकाश, यह अज्ञात, यह अस्तित्व, यह रहस्य,
16:50
यह मौन, यह शांति आपसे अलग है ही नहीं।
17:05
ना ज्ञान आपसे अलग है, ना प्रेम आपसे अलग है, ना भक्ति आपसे अलग है।
17:15
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
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तो बुद्धत्व को अपने से अलग मानते हो समाधि को अपने से अलग मानते हो
17:45
और फिर बुद्धत्व की तलाश शुरू कर देते हो अलग मान के
17:54
अलग मानना ही तलाश को पैदा कर देना है। जीव को पैदा कर देना है।
18:08
व्यक्तित्व को पैदा कर देना है। व्यक्तित्व के लिए अस्तित्व अलग है।
18:18
आपके स्व के लिए नहीं, आपके मैं के लिए नहीं।
18:28
और आप कोई व्यक्तित्व नहीं हो, कोई जीव नहीं हो। जीव के लिए परमात्मा अलग है।
18:35
आपके लिए नहीं। तो अभी
18:43
बस अलग मानना छोड़ दो। भगवान को, अस्तित्व को,
18:53
बुद्धत्व को अलग मानना छोड़ दो। चैप्टर यहीं क्लोज हो जाएगा।
19:06
आपने अलग मान के अपनी बॉडी को,
19:12
अपने व्यक्तित्व को, अपने जीव को पैदा कर लिया है
19:19
केवल अलग मान के और आपका फोकस क्या रहता है? एक टॉर्च होती
19:27
है ना बॉडी पे जो आपका फोकस है वो काहे का फोकस है?
19:35
टॉर्च की रोशनी पूरी बॉडी पर अपने व्यक्तित्व पर
19:42
अपने जीव पर अब बाकी जगह आपका फोकस है ही नहीं। बस आप
19:52
अपनी बॉडी को बचा रहे हो। सिक्योर कर रहे हो। सिक्योरिटी सिक्योरिटी सिक्योरिटी ठीक
19:59
है। इसका ध्यान रखो। वहां तक ठीक है। इसको स्वस्थ रखो। वहां तक ठीक है। बट इसी
20:07
में मत पड़े रह जाओ। यह नाव डूबेगी ही। मैक्सिमम 100 ईयर
20:29
तो आपका फोकस अस्तित्व पे होना चाहिए।
20:42
जो आपसे भिन्न नहीं तो फोकस चेंज करो
20:49
पूरे अस्तित्व पे यह अस्तित्व मेरे से अलग है ही नहीं।
20:57
है ही नहीं।
21:04
परमात्मा मेरे से अलग है ही नहीं।
21:12
अपने जो भी गुरु को आप पास्ट के भी ओशों को मानते हो, जय कृष्ण मूर्ति को मानते
21:20
हो, कबीर को मानते हो जो भी है बस वह भी मैं से अलग है ही नहीं।
21:28
मुझसे अलग है ही नहीं।
21:42
शिव प्रेमी हो, राम प्रेमी हो, राम, कृष्ण, शिव, दुर्गा,
21:49
मैं से भिन्न है ही नहीं। पूरा अस्तित्व मैश से भिन्न है ही नहीं।
21:58
अलग मानना बस छोड़ दो।
22:05
अलग मानना ही अलग कर देना है।
22:12
केवल अलग मानना ही अलग कर देना है। हालांकि फिर भी अलग नहीं होता
22:21
है। बट आपकी फीलिंग में अलग हो जाएगा। और अलग ना मानना
22:31
मत मानो अलग। परमात्मा आपसे अलग नहीं है। इससे बड़ा और क्या आनंद है यार?
22:49
आपकी सारी चिंता ही समाप्त हो गई। अस्तित्व आपसे अलग है ही नहीं।
23:08
और है ही नहीं है ही नहीं
23:35
अलग मान के जी के आपने देख लिया इतने साल उसका परिणाम
23:47
व्यक्तित्व की आहें क्या
23:53
व्यक्तित्व की आहें जीव की आह है। उसका कंफ्यूजन, उसका ट्रबल, उसकी प्रॉब्लम,
24:01
उसकी साधना, उसका ध्यान और परिणाम केवल दुख।
24:11
पहले सांसारिक दुख था, अब आध्यात्मिक दुख है।
24:18
अब अलग मानो ही मत। परमात्मा आपसे अलग है ही नहीं।
24:26
वह किसी से अलग होता ही नहीं।
24:35
यह अस्तित्व राम कृष्ण शिव सारे बुद्ध पुरुष
24:47
आपसे अलग है ही नहीं। बुद्धत्व आपसे अलग है ही नहीं।
25:07
तो बुद्धत्व कोई घटना नहीं है जो आपको घटेगी
25:15
है ना वह आपका स्वभाव है।
25:31
तो परमात्मा वो ऐसा नहीं है कि आपको मिलेगा। वह आपका
25:40
स्वभाव है। आपसे अलग है ही नहीं।
25:58
कॉमन सेंस मेरे को बताना मैं आपको दो चॉइस देता हूं।
26:05
है ना? चॉइस लेसनेस में बाद में जाएंगे। मैं आपको पहले चॉइस देता हूं। दो कि यह आकाश इतना विराट
26:17
अब आपको दो ढंग बता रहा हूं जीने के कि यह आकाश आपसे अलग है
26:25
और दूसरा ढंग यह आकाश आपसे अलग है ही नहीं
26:32
तो आप क्या चूज़ करोगे यह बताओ
26:39
सेकंड यह आकाश अलग है ही नहीं
26:46
सेम यह परमात्मा मुझसे अलग है ही नहीं। अस्तित्व मुझसे अलग
26:53
राम कृष्ण शिव प्रेमी हूं तो वो मुझसे अलग है ही नहीं। बस
27:01
इसमें जीना शुरू कर दो क्योंकि यही सत्य है।
27:06
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। कुछ
27:14
भी नहीं।
27:24
तो जो अपनी मानसिक बाउंड्री बनाए हुए हो ना आप एक मानसिक आपकी बाउंड्री होती है।
27:32
वो तोड़ो। है ना? बाउंड्रीलेस यह अस्तित्व
27:41
आपसे अलग ही नहीं है। यह अनंत आपसे अलग ही नहीं है। यह अज्ञात अव्यक्त आपसे अलग है
27:50
ही नहीं। कैवल्य परमात्मा, बुद्धत्व, मोक्ष
27:59
आपसे अलग है ही नहीं यार।
28:06
और यह सहज में है बता रहा हूं।
28:17
केवल अलग मानने से आपकी फीलिंग खराब हो जाती है। आपको अलग लगने लगता है। केवल
28:24
इतनी सी गलती की है आपने कि अलग मान लिया है।
28:35
तो अलग ना मानना प्रभु को अपने से अलग ना मानना
28:50
अनंत शांति है। अनंत आनंद है।
28:56
अस्तित्व को अपने से अलग ना मानना।
29:17
अनंत का भाव नहीं करना है आपको कि मैं अनंत हूं। मैं अनंत हूं। अनंत आपसे अलग कहां है?
30:07
आनंद मुझसे भिन्न नहीं मुझसे अलग नहीं
30:17
परमात्मा मुझसे अलग नहीं अस्तित्व मुझसे अलग नहीं
30:34
रामा कृष्णा शिवा मुझसे अलग नहीं
30:41
सत्य परम सत्य मुझसे अलग नहीं जिंदगी भर
30:49
हम यह सत्य है यह असत्य है यह सत्य है यह असत्य है
30:56
परम सत्य केवल मैं हूं। जो डिसाइड कर रहा है यह सत्य है और यह
31:06
असत्य है वही परम सत्य होगा ना
31:12
और वो मैं ही हूं। सत्य मुझसे भिन्न नहीं।
31:36
तो आपकी जो धारणाएं हैं, मान्यताएं हैं कि जन्मों के बाद कोई बुद्धत्व की घटना घटेगी,
31:45
कोई कैवल्य घटेगा, कोई निर्वाणा घटेगा, अरे भैया किसको घटेगा?
31:55
किसको घटेगा?
31:58
बताओ। आपको घटेगा ना?
32:05
मैं को घटेगा ना? अच्छा परमात्मा मिलेगा हजारों जन्म के बाद। किसको मिलेगा?
32:14
मैं को मिलेगा। आपको मिलेगा। तो इंपॉर्टेंट कौन हुआ?
32:24
अरे जिसको मिलेगा या जिसको घटेगा वह पात्र उतना बड़ा है ना
32:32
जिसमें वह घटना समा जाएगी जिसमें परमात्मा का मिलना समा जाएगा वो पात्र आप ही हो
32:42
मैं को ही घटेगा ना मैं को ही मिलेगा ना अब मैं के पात्र में इतनी कैपेसिटी है कि
32:52
परमात्मा भी उसी को मिलेगा। मैं को बुद्धत्व भी निर्वाणा भी मैं को ही घटेगा।
32:59
आपको ही घटेगा। तो आप तो परमात्मा से भी परे हो गए जिसमें परमात्मा भी समा रहा है। घटनाएं भी समा
33:08
रही हैं। यह हुई यह हुआ पहला चैप्टर। दूसरा चैप्टर
33:15
यह है कि आपके स्व में मैं में यह घटा
33:20
घुटाया है। मिला मुलाया है। उससे अलग है ही नहीं तो घटेगा कैसे?
33:35
अब यू टर्न हुआ। है ना?
33:40
आपसे अलग है ही नहीं तो घटेगा कैसे?
33:49
बुद्धत्व परमात्मा आपसे अलग है ही नहीं।
33:57
तो घटेगा कैसे? मिलेगा कैसे?
34:09
तो जो घटने की बीमारी है या मिलने की बीमारी है वो जीव की है ना परमात्मा मिलने
34:17
की बीमारी और कुछ घट जाए वो जीव की व्यक्तित्व की
34:25
बीमारी है वो तुम बीमारी को ना इतनी बड़ी चीज समझ रहे हो अपनी जिंदगी बना लिए हो
34:33
जैसे धन धन दौलत का टारगेट होता है। संसार में कुछ अचीवमेंट करना है उसका टारगेट होता है। तो आपने इसको भी अचीवमेंट बना
34:42
लिया। यह बीमारी है। अचीवमेंट नहीं है।
34:53
तो परमात्मा मैं से आपके स्वयं से अलग है ही नहीं। तो घटेगा क्या?
35:01
मिलेगा क्या? अस्तित्व,
35:10
बुद्धत्व जो भी बोलते हो ना सब ले लो। आपसे अलग है ही नहीं।
35:16
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। कोई भी नहीं।
35:27
तो अलग मानना ही एक खता है।
35:32
आपने एक ही खता की है। आपने अलग माना है। बस
35:41
अलग है नहीं। अलग माना है। अलग है नहीं।
35:49
पानी दो। अब अलग मानने के कारण आप सोच रहे हो
35:57
क्या-क्या हो गया। आप में जीव भाव कहां से आया? अलग मानने के कारण आया। फिर उस जीव को तरह-तरह की ध्यान, साधनाएं,
36:08
जप तप, यह वो पता नहीं क्या-क्या। फिर उसके प्रश्न, उत्तर, समस्याएं, उसकी
36:18
बाउंड्री तो क्या हम इतनी सी गलती भी अपनी नहीं सुधार सकते क्या?
36:34
बस आपको अलग नहीं मानना है।
36:41
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। कोई भी नहीं।
36:49
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। और दोनों चॉइसेस में
36:59
भी तो आप यही चूज़ करोगे ना अगर इतनी सी भी बुद्धि है तो
37:05
कि परमात्मा मुझसे भिन्न नहीं है।
37:24
हम तो ऐसा लगता है क्या मेरे से भिन्न नहीं बताओ
37:31
अरे बताओ आप लोग लगता है कि केवल दिमाग में सोच रहे हो
37:50
म्यूट है क्या सब बोल सकते हैं हां तो बोलो भाई लगता है
37:57
नहीं लगता है लगता है गुड
38:05
क्योंकि ऐसा है यह बहुत वॉइस आ रही है।
38:23
क्योंकि ऐसा है यह अलग है ही नहीं। आपसे यह अस्तित्व
38:31
यह प्रभु जो भी बोलते हो ना आपसे अलग है ही नहीं।
38:38
जिसको आप प्रेम भक्ति कहते हो, ज्ञान कहते हो
38:46
बिल्कुल भी अलग नहीं है आपसे। रत्त भर अलग नहीं
38:56
आप में और परमात्मा में जो भेद डाला गया है श्याम दाम दंड भेद
39:04
सबसे खतरनाक चीज होती है भेद मालूम
39:12
शाम यानी आपको बातों से समझाया जाता है दाम आपको लालच दी जाती है
39:20
दंड आपको डराया जाता है और तब भी बात नहीं बनती ना
39:30
तो आपके अंदर भेद डाल दिया जाता है
39:39
और इतनी खतरनाक जगह भेद डाला गया है सीधा परमात्मा में और आप में अस्तित्व में
39:48
और आप में सीधा भेद।
39:58
अब आप कुछ कर ही नहीं सकते और जो करोगे वो गलत जाएगा।
40:11
अब छोटा सा जीव क्या ही कर डालेगा। उसकी छोटी सी बुद्धि,
40:17
छोटी समझ एक व्यक्तित्व क्या कर डालेगा?
40:26
वननेस का ध्यान करेगा ज्यादा से ज्यादा। होना जाना कुछ नहीं है।
40:35
तो यह जो खतरनाक भेद डाला गया है
40:42
वो बहुत डेंजरस है। बहुत ज्यादा डेंजरस।
41:02
तुरंत इस भेद को समाप्त करो अभी के अभी
41:10
कि परमात्मा मेरे से अलग है ही नहीं हो ही नहीं सकता मेरे से अलग मेरे से अलग
41:19
ईश्वर हो कैसे सकता है कोई और चीज मेरे से भले अलग हो भी
41:30
बट ईश्वर मेरे से अलग हो कैसे सकता है वह तो खंडित हो जाएगा।
41:37
ईश्वर तो अखंड होता है।
41:47
अलग मानना बस छोड़ दो और मस्त हो जाओ।
41:54
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
42:14
सारी समस्याओं की जड़ बता रहा हूं मैं। आप अलग माने
42:24
और आपकी प्रॉब्लम्स शुरू
42:34
परमात्मा को आप अलग माने अब परमात्मा कभी नहीं मिलेगा।
43:05
तो अलग मानना ही अलग है। अलग ना मानना ही एक है। एकाकार है। परमात्मा से अस्तित्व
43:13
से तो बस अलग मत मानो अब
43:23
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
43:30
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
43:41
अब सेकंड सूत्रा मैं के बिना भी कुछ भी नहीं।
43:52
फर्स्ट मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। सेकंड
44:00
मैं के बिना भी कुछ भी नहीं।
44:07
अरे आपके बगैर यह दुनिया आपकी हो सकती है क्या?
44:12
आपका गुरु हो सकता है। आपका भगवान हो सकता है। आपका अस्तित्व हो सकता है।
44:19
आपके बिना या आपका शरीर, यह मन या कुछ भी हो सकता है क्या?
44:28
अरे मैं के बिना भी कुछ भी नहीं।
45:14
अब बोलोगे हम नहीं रहते तब भी यह दुनिया तो चलती रहती है। आप खुद को शरीर समझ के बोल रहे हो
45:22
कि हम नहीं रहते बॉडी नहीं रहती तब भी तो यह दुनिया चलती रहती है तो तब भी
45:31
यह दुनिया चलती रहती है यह भी आप हो तभी तो बोल पा रहे हो तब भी आप हो तभी तो कह पा रहे हो कि तब भी
45:41
दुनिया चलती रहती है
45:47
मैं के बिना भी कुछ भी नहीं।
46:30
हां जी ओके इनफ फॉर टुडे
46:38
हम ऑन करो सबको
46:59
है कोई कि नहीं है थैंक यू थैंक यू
47:07
थैंक हम
47:25
हम हम
47:35
अलग मत मानो यार। सर हम ऐसे ही नहीं बता रहे हैं। जिस समय ये पॉइंट रेस होगा ना
47:51
बस आपने एक ही खता की है अलग मानने की। बस एक ही खता
47:58
अपने से अलग मत मानो। यह पूरा ब्रह्मांड तुम्हारा है।
48:05
पूरा का पूरा और मैं इस पूरे ब्रह्मांड से कम तुमको कुछ
48:15
देना नहीं चाहता। और देना भी क्या वह तुम्हारा है ही।
48:32
बस अलग मानने की खता छोड़ दो। ये पूरा चराचर तुम्हारा है। तुमसे अलग है
48:41
ही नहीं। ये सब तुम्हारी आत्मा है।
48:51
तुम हो।
49:11
तो हमेशा याद रखना मैं के बिना भी कुछ हो ही नहीं सकता।
49:18
सामने परमात्मा आ जाए, सामने अस्तित्व आ जाए,
49:24
उसको कंफर्म कौन करता है कि यह परमात्मा है, यह अस्तित्व है।
49:31
मैं ही करता हूं ना। तो मैं के बिना ये सब हो सकते हैं क्या?
49:40
हो ही नहीं सकते। मैं के बिना अनंत हो सकता है, सीमित हो
49:46
सकता है। जीव परमात्मा कुछ भी नहीं हो सकता।
50:12
तो मैं से भिन्न भी कुछ भी नहीं। मैं के बिना भी कुछ भी नहीं। यानी मैं के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं।
50:34
बस मैं ही मैं हूं और कुछ नहीं है कहीं पर भी। हां
50:43
तो आकाश का अनुभव आप आकाश होकर करते हो। अस्तित्व का अस्तित्व होकर करते हो।
50:51
यह पहला चैप्टर है। आकाश का अनुभव आप मैं होकर ही करते हो।
51:01
अस्तित्व का, दुनिया का, धरती का अनुभव आप मैं होकर ही करते हो। क्योंकि मैं के
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अतिरिक्त कोई दूसरी सत्ता है ही नहीं। शरीर का अनुभव, शरीर होके, मन का अनुभव,
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मन होके। यह स्टार्टिंग का चैप्टर है। शरीर, मन, बुद्धि यह सर्व का अनुभव आप मैं
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होकर ही करते हो। सर्व होकर नहीं करते। क्योंकि मैं के अतिरिक्त किसी और की सत्ता
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है ही नहीं।
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क्योंकि मैं के बिना भी कुछ भी नहीं।
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मैं के अलावा भी कुछ भी
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तो आप अपनी सृष्टि अपनी दुनिया कैसे बनाते? हो मालूम मैं से अलग माने तब आप ब्रह्मा जी बन गए।
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अब आपने अपनी दुनिया बना दी। परमात्मा को मैं से अलग
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मान के अब उस दुनिया का आप पालन करते हो।
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उसी को सच मान के जीते हो। अब विष्णु जी आ गए पालनकर्ता
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लास्ट में शिव आ जाते हैं संहार कर देते अपनी ही मान्यताओं का अलग मानने का संहार
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कर देते तब आप फिर स्वयं में आ जाते हो
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तो आपको जो भी डाउट आ रहा है या वह फीलिंग अगर नहीं आ रही है तो आप अभी भी
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अलग मान रहे हो इसलिए नहीं आ रही है। मैं चैलेंज करता हूं।
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अलग मत मानो वो फील आ जाएगा आपको। वर्ड्स में मैं फीलिंग बोल रहा हूं। इशारे समझ
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जाओ। अलग मानो ही मत। कैसे फील नहीं आएगा यार?
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हम
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हम
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मेरे को भी अपने से अलग मत मानो। नहीं तो मेरी बात पल्ले नहीं पड़ेगी।
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हां। मैं आपसे अलग हूं ही नहीं। मैं आपका
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अंतर्यामी बोल रहा हूं।
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दिख बहार रहा हूं। बोल अंतर्यामी रहा हूं।
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तो अभी जहां पे भी आप बैठे हो चारों साइड के आकाश को देखो
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और कहो कि यह मुझसे अलग नहीं है।
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प्रैक्टिकल यह मुझसे अलग नहीं है। धरती मुझसे अलग
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नहीं है। सितारे यह रात मुझसे अलग नहीं है। ऐसा कहो अपने सेंस में
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यह रात, यह सितारे मुझसे अलग नहीं है।
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यह चांद, यह सूर्य, यह सुबह मुझसे अलग नहीं है।
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यह चारों साइड एक लाइफ है। महा जीवन है। यह महा जीवन सर्वत्र फैला हुआ महा जीवन
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मुझसे अलग नहीं है।
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अनंत अज्ञात है, अननोन है, अननोएबल है। वह मुझसे अलग नहीं है।
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अस्तित्व में सेंस ले जाओ। या अस्तित्व मुझसे अलग नहीं है।
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परमात्मा मुझसे अलग नहीं है।
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बस तुरंत क्लियर हो जाता है क्योंकि रियल में आपसे अलग नहीं है।
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इसमें कोई प्रैक्टिस की बात भी नहीं है। बस वह सेंस गया। आपने अलग का भाव हटाया
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अलग है ही नहीं। अरे अलग है ही नहीं।
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हां जी।
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तुरंत वह फीलिंग आ जाएगी। तुरंत आ जाएगी।
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हम बताओ विशाल जी जमता कि नहीं जमता एकदम जमता प्रभु भगवान एकदम
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बहुत बढ़िया एकदम एकदम सब कुछ और वहीं से बात हो रही आपको भी कि वहीं से बात निकल
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रही है कि ठीक हम
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तो तुरंत तुरंत वाली है
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क्योंकि ये नेचुरल है। हम अननेचुरल जीते हैं। ये नेचुरल है। आपसे अलग कुछ है ही नहीं।
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ऐसा ही है सदा से आप कोई बाउंड्री ही नहीं है आपकी
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बाउंड्री लेस भी आपकी बाउंड्री नहीं है इतने बियों्ड हो आप
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ऐसा आपको लगता है कि आप बुद्धि से ऐसे समझ के बोल रहे हैं
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नहीं अभी जैसे ही बोला तुरंत हां जैसे ही अभी आपने बोला कि तुरंत ये है तो बुद्धि
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से ना होके अभी तो जो बात हो रही है कि इस मोमेंट में
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इस मोमेंट में तो डेफिनेटली वही से वही फीलिंग है फीलिंग बोलने के लिए बट
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हम बाद में कभी बुद्धि से हो जाता है बट अभी ओके
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इस मोमेंट में तो हां
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तो व्यापकता का ध्यान मत करो। व्यापकता को अपने से अलग मानो ही मत। क्या?
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व्यापकता का ध्यान मत करो। अनंतता का ध्यान मत करो। अनंतता को अपने से अलग मानो
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ही मत यार। और डांस करो।
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हां अलग मारो हिम्मत। ओ भाव करते रहते हो। मैं अनंत हूं। अनंत हूं। अनंत भाव करने से क्या होगा?
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अलग मत मानो और आप अनंत हो। आपसे अलग है ही नहीं। अनंतता
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विराटता यह आपका विराट रूप है मालूम
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अलग मत मानो और अपना विराट रूप देखो मूवीज में देखे हो ना कृष्ण का विराट रूप
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उनके कई सिर हैं वो भी लिमिटेड है ये अपना विराट रूप देखो देखो ना इसमें
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कृष्ण राम सब कुछ समाए हुए हैं। हर मास्टर समाया हुआ है।
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बस अलग मत मानो और आपका विराट रूप देखो। अरे पागल हो जाओगे।
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हां। जिसको आप अस्तित्व समझते हो ना वह आपका
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विराट रूप है आप ही का प्रत्यक्ष
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अखंड विराट बस अलग नहीं मानना है। खत्म बात
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मेरे को पहले कोई बता देता ना बचपन में ही कि ये आकाश तेरे से अलग नहीं है। अगर वह झूठ भी बोलता तो मैं उसकी बात मान लेता।
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क्योंकि ऐसा जीने में ही आनंद है। हालांकि यह सच है। है ना?
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मेरे को कोई ऐसा बताने वाला नहीं मिला कि अस्तित्व तेरे से अलग ही नहीं है। अमित
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यह परमात्मा तेरे से अलग ही नहीं है। यह आत्मज्ञान, आत्म बोध, बुद्धत्व,
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कैवल्य, निर्वाणा तेरे से अलग हो ही नहीं सकते। अमित
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ऐसा कोई बताया ही नहीं यार।
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यह अलग है ही नहीं। है ही नहीं।
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तो बाद में आप बोले ना कि बाद में ऐसा नहीं लगता बुद्धि आ जाती है।
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अभी लग रहा है। है ना? बाद में आप क्या गलती करते हो
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मालूम? सत्संग के बाद में आप तुरंत अलग मान लेते हो।
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आप अलग मत मानो। कभी भी आपको माया नहीं घेरेगी।
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माया तभी घेरती है जब आप इस अस्तित्व को अपने से अलग मानते हो। परमात्मा को अपने
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से अलग मानते हो। मैं वह फार्मूला बता रहा हूं जिससे कभी भी
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आपको माया नहीं घेरेगी। समझ रहे हो? माया मतलब
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कभी भी छुएगी तक नहीं। घेरेगी ही नहीं।
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ऑफिस जाते हो, घर में रहते हो, कोई भी काम करते हो उसको अलग क्यों मानते हो अपने से?
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अलग मानते हो तभी वह प्रॉब्लम देता है। आपकी डेली लाइफ के कर्माज या जो भी है।
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और इतना जो आपको मेरे को समझाना पड़ रहा है
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आप अलग मानते हो करके समझाना पड़ रहा है। अलग ना मानो समझाने की जरूरत ही नहीं है।
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तुरंत वो टेस्ट है। बस अलग मत मानो।
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समझ रहे हो? अस्तित्व को जब अपने से अलग नहीं मानोगे ना तो उसका पावर और आपका पावर
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एक है। फिर परमात्मा को जब अलग नहीं मानोगे ना तो परमात्मा की सारी शक्तियां आपकी हैं
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और आपकी परमात्मा की है। यह एकदम स्वाभाविक है।
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शक्ति की लालच नहीं दे रहा हूं मैं। बट ये ऐसा सत्य है।
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शक्तियां देखे हो ना शिव की नारायण की। अलग मत मानो।
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फिर इनकी शक्तियां आपकी शक्तियां हैं। अब मजाक में नहीं लेना। यह आत्मनिष्ठा के
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सूत्र हैं। सब संभव रहता है यहां पे।
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जीव को यह बातें बड़ी हैवी लगती हैं। मैं के लिए यह सहज है।
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पानी दो।
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हम थोड़े-थोड़े पावर के लिए थोड़े-थोड़े उसके लिए पूरी जिंदगी खराब कर लेते।
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और पूरे अस्तित्व का पावर तुम्हारा है।
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सहज में तुम्हारा है। बस तुम अलग मत मानो और देखो जी के।
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यह पूरी प्रकृति ये सारे देवता सारे पावर्स
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बस अलग मत मानो और देखो
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आप पगलाते रहते हो ना बुद्धा को यह हुआ,
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महावीरा को यह हुआ। ओशो को यह हुआ। उनको अलग मत मानो।
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उनको क्या हुआ वह आप में समाहित हो जाएगा। तुरंत आपको बोध हो जाएगा।
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और बहुत इजी चीजें हैं। इनको हैवी नहीं लेना।
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यह बहुत सहज है। सिंपल है।
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ओम
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हां जी
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तो बस बस ध्यान रखो अस्तित्व में अस्तित्व आपसे भिन्न नहीं है।
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अनंत में ध्यान अनंत आपसे भिन्न नहीं है।
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जहां भी ध्यान जा रहा है वह भी आपसे भिन्न नहीं है। जहां भी ध्यान नहीं जा रहा है वह भी आपसे
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भिन्न नहीं है। मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
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ओके प्रेम प्रणाम अब वाणी को विश्राम दें
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अगर आप लोग की परमिशन हो तो वाणी को विश्राम
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दें प्रेम प्रणाम स्वामी
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प्रेम प्रणाम लेकिन इस पॉइंट को नहीं भूलना हां इसमें जियो
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ओके
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हां इन द सेंस सुनो सुनो इसमें आपको जीना
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है। प्रेम प्रणाम करके फिर अलग का भाव मत कर लेना।
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हां इसमें जियो कि यार जो भी सेंस आए, ख्याल आए, परमात्मा का,
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किसी का भी मेरे से अलग है ही नहीं। बस अनंत का ख्याल आया, व्यापकता का है। मेरे
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से अलग है ही नहीं।
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ओके।
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
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कोटि कोटि प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
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ठीक अब वाणी को विश्राम देते हैं मस्त रहो बस ठीक है