0:19
हां बोलने से ज्यादा गुरु की प्रेजेंस ही इंपॉर्टेंट रहेगी ना।
0:25
क्योंकि उस प्रेजेंस से शब्द निकल रहे हैं
0:31
तो वह प्रेजेंस ज्यादा इंपॉर्टेंट है ना वो होना
0:41
जैसे अस्तित्व की ध्वनि है ओंकार उससे ज्यादा इंपॉर्टेंट अस्तित्व है
0:53
तो वो वो प्रेजेंस ही सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट होती है।
1:08
गुरु की प्रेजेंस परमात्मा की ही होती है। गुरु के पास अपना कुछ नहीं होता।
1:20
जैसे चंद्रमा के पास अपनी रोशनी नहीं होती। सूर्य की रोशनी
1:29
से ही तो चंद्रमा प्रकाशित होता है ना। तो परमात्मा की रोशनी से ही गुरु प्रकाशित
1:38
होता है। क्योंकि आप सीधा सूर्य की रोशनी को देख
1:45
नहीं सकते। सीधा ग्रहण नहीं कर सकते तो वह गुरु के माध्यम से चंद्रमा के माध्यम से
1:54
आप में उतरता है ताकि शांति से वह आपको ग्रहण हो ठंडक मिले एक सुंदरता एक राहत
2:03
मिले इसलिए गुरु का रोल है क्योंकि डायरेक्ट मीटिंग परमात्मा से आप
2:11
जल जाओगे इसलिए गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है।
2:20
इसीलिए मनाई जाती है। और गुरु के पास अपना कुछ प्रकाश नहीं
2:30
रहता। परमात्मा का ही प्रकाश है।
2:57
हां जी एनीबडी
3:24
वॉइस क्यों नहीं आ रही है किसी की?
3:47
आपका सानिध्य सर्वोपरि है। प्रभु श्री
3:54
आपका सानिध्य ही सर्वोपरि है। हां
4:02
यही महत्व है गुरु शिष्य परंपरा का कि शिष्य को वो सानिध्य मिले
4:11
जिससे वह तृप्त हो सके और आत्म साक्षात्कार कर सके।
4:22
सानिध्य का बहुत महत्व है। और सानिध्य टेंपरेरी नहीं होता
4:34
कि दो चार दिन आए गए चेक किए टाइम पास किए अध्यात्म अध्यात्म खेले और गए
4:44
उसको मैं टाइम पास बोलता हूं। उससे अच्छा जाके थिएटर में कोई मूवी देख लो। है ना?
4:52
सानिध्य का अर्थ है कि अब मैं तैयार हूं अपना पूरा जीवन देने को
5:02
अपना पूरा समय देने को ज्यादा से ज्यादा
5:08
अब प्रथम केवल मास्टर है मेरी लाइफ में सेकेंडरी सब है घर धन दौलत दुनिया वो सब
5:17
सेकेंडरी प्रथम प्रथम
5:26
तब वो जिसका भी ऐसा वॉइस आता है ना विराज तुरंत
5:33
उसको ड्रॉप करना और कभी मत जोड़ना क्योंकि ये अनअवेयर लोग हैं। इनको होश ही नहीं है। क्या बात कर रहे हैं? ये भी टाइम
5:41
पास करने आए हैं। है ना?
5:49
दिखावा करने क्यों आते हो यहां? ओ हल्ले में टाइम पास करने आ रहे हो क्या?
6:04
तब जाके वह सानिध्य का अधिकारी होता है। उससे पहले नहीं होता।
6:11
यह टाइम पास नहीं आए पैर पड़े दो चार फोटो खिंचाए चले गए हो गया ऐसा नहीं होता
6:18
बात जिंदगी की है समर्पण की है
6:33
दो चार पांच 10 दिन तो साज बिाने में लग जाता है
6:39
जो तार कसे जाते हैं ना वीणा के तार ना कम ना ज्यादा
6:48
उसी में दो चार दिन लग जाता है। तब जाके परमात्मा के संगीत को आप सुन सकते
6:56
हो। बहुत धैर्य का मामला है। पेशेंस,
7:03
प्रेम, समर्पण और सबसे खतरनाक बौद्धिक ज्ञान है। जब तक
7:12
उसको साइड नहीं करोगे आपके नसीब में केवल
7:18
एक कंफ्यूजन लिख दिया जाएगा। बहुत अलग मामला है यह। गुरु शिष्य एक बहुत
7:28
अलग मामला होता है। कोई शॉर्टकट नहीं है यहां।
7:39
ठीक है। जो भी बोध होता है वह ततक्षण होता है। वह बात भी सत्य है।
7:45
मैं हूं अभी के अभी हूं। ततक्षण हूं। बट फिर भी फिर भी कोई शॉर्टकट नहीं है।
7:58
चाय कॉफी थोड़ी ना है। 510 मिनट इंस्टेंट कॉफी जैसा।
8:11
जिसके पास गहरा पेशेंस होता है, बहुत धैर्य होता है, उसके लिए तक्षण है ये।
8:19
समझ रहे हो? जो अपनी पूरी जिंदगी दे देता है, बहुत धैर्य रखता है, मास्टर के साथ
8:26
जीता है, मरता है, उसके लिए उसी क्षण उपलब्ध हो जाता है।
8:36
बाकी सब किस्स कहानी है। एंटरटेनमेंट है और कुछ नहीं है। दो चार 10
8:46
दिन आए गए वो सब एंटरटेनमेंट। पानी
9:45
हां जी एनीबडी
10:51
प्रेम प्रणाम प्रभु
10:59
जो जो जो समझा
11:14
क्या नाम है आपका?
11:19
हां शीला जी सहज में हो रहा है। यह सुंदर है क्योंकि
11:27
सहज में ही होता है।
11:41
यह प्रयास से नहीं होता। सहज में ही होता है। निरंतर सत्संग से
11:47
सहज में परमात्मा का रस प्रकट हो जाता है।
11:55
निरंतर सत्संग आप कुछ दिन सुने जान गए हो गया। आई हैव
12:03
डन। आप चले गए नर्क में। आपको पता ही नहीं। कई लोग हैं ऐसे जान गए समझ गए। हो गया।
12:13
डन। नर्क की एंट्री उसकी खुल गई।
12:22
परमात्मा को डन कर लिया आपने। वाह
12:32
हो गए ज्ञानी।
12:43
और मेरे पास आकर तो ऐसा बहुत जल्दी हो जाता है।
13:04
मामला प्रेम का है, धैर्य का है।
13:15
जीने का है
13:24
और यह कोई सौदा नहीं है कि मेरे से आपको कुछ मिलेगा। कुछ भी नहीं मिलेगा। गारंटेड
13:32
कुछ भी नहीं मिलेगा। नहीं मैं कुछ दे रहा हूं।
13:45
ना ही कोई किसी को कुछ दे सकता है। यह तो मामला प्रेम का है।
14:02
प्रेम में कब मेरे भीतर की वस्तु आपके भीतर चली गई। कब आपके भीतर की वस्तु मेरे
14:10
पास आ गई यह मेरे को भी पता नहीं रहता। प्रेम में अपने आप ट्रांसफर हो जाती है
14:17
चीजें। इसलिए मास्टर को समझना शुरू में ठीक है।
14:24
बट जब तक उससे प्रेम नहीं हुआ है तब तक वो ट्रांसफर नहीं होने वाली।
14:32
कोई भी बात ट्रांसफर नहीं होने वाली। केवल आप बौद्धिक अपने आप को करेक्ट कर लोगे मैक्सिमम।
14:42
थैंक यू।
14:51
तो कल रात को हम बैठे थे कुछ ट्रांसफर हुआ आप दोनों के साथ। वो एक अलग ही था।
15:00
अब उसके रिकॉर्ड आप बगैर बताए किए बट ऐसा नहीं करना चाहिए। लेकिन अच्छा किए कर लिए तो
15:09
और बट वो रिकॉर्डिंग में समा ही नहीं सकती वो चीज
15:19
तो वो वो एकांत वो रिलेशन वो प्रेम और वो रात का मोमेंट और सहज में सब निकला और कई
15:28
चीजें ट्रांसफर हो गई। यह जादू है।
15:37
बल्कि कई लोग आप लोग और थे भी नहीं उस समय। मेरे को पता भी नहीं था मैं कोई सत्संग कराऊंगा।
15:45
अचानक से कुछ शुरू हो गया।
16:02
तो साथ होना पास होना उसी को उपासना कहते हैं।
16:10
मास्टर के पास होना उसका अलग ही रहस्य है। अलग
16:29
मैं तो बोलता हूं ना मेरे को जो सिर्फ जो मेरे को ये टेक्नोलॉजी में YouTube में ही
16:36
सुन रहे हैं वो सबसे बड़े कायर हैं। जिनकी फिजिकल स्थिति सही नहीं है उनको
16:46
छोड़ के। है ना?
16:51
वो सबसे बड़े कायर है।
17:04
हां मेरे पास आते हैं और फिर सुनते हैं टेक्नोलॉजी में वो एक अलग बात
17:11
आपको मेरे पास होना चाहिए। दुनिया जहान छोड़ के
17:19
आपको पता ही नहीं है। अभी आप किसको सुन रहे हो, क्या सुन रहे हो कुछ भी पता नहीं है।
17:28
ठीक है। अनुभव होते हैं। YouTube में भी सुन के वो सब ठीक है। सुंदर है।
17:35
बट पास होना बहुत अलग बात है। बहुत अलग बात है।
17:42
वह प्रेजेंस में होना अलग ही बात है।
18:04
जब मैं आपकी आंखों में झांकता हूं ततक्षण मैं आपके अचेतन को जला देता हूं।
18:12
मालूम बहुत सारी चीजें होती है उसमें। वो सब
18:20
अपने आप होता है।
18:41
तो कई लोग आंखें चुराते हैं। मैं किसी की आंख में झांकता हूं तो वहां से फिर वो बात नहीं बनती।
18:50
जो मेरे को अंदर प्रवेश करने देते हैं अपनी आंखों से
18:56
तुरंत मिटा देता हूं मैं उसको पूरा चेतन।
19:12
बहुत सारी चीजें हैं। अब वो पास रह के ही संभव है।
19:36
यह तो मजबूरी है। ये Google मीट तो मजबूरी है।
19:55
कुछ नहीं से यही सही।
20:13
हां जी प्रेम करना प्रभु से
20:25
हम अब आप मौन रहिए आप हर बार बोलती हैं। हां मौन रहिए। हर बार अपने को बोलना जरूरत
20:35
नहीं है। साइलेंस में मौन में
20:49
मैं बोल सकता हूं। जी बताइए। मैं दिल्ली से हूं और
20:57
और मैंने भी ओशो को 95 में ओशो से जुड़ा था और
21:05
लेकिन आपके जैसी शायद हम अभी जैसे मैं शाम के टाइम गुरुद्वारे जाता
21:14
हूं अपने घर के पास वहां मुझे ध्यान अच्छा लग जाता है तो वो जाता रहा हूं अच्छा है वो
21:21
हां अच्छा है सुंदर है हां
21:27
लेकिन वो जो मैं में ठहराव है वो आ नहीं पा रहा है। जैसे कई बार लगता है कि हो रहा
21:33
है वो लेकिन लगता है फिर दोबारा संसार में हम
21:41
तो वो मैं ठहराव अब आपके मैंने कुछ एक वीडियो सुने थे चार पांच छ वीडियो सुने हैं अभी पिछले कुछ दिनों में लेकिन वो जो
21:50
मैं ठहराव है ओशो की जगह में जैसे जाता हूं तो वहां ध्यान करता हूं तो वहां पर वो साक्षी भाव आ जाता है काफी अच्छा और वैसे
21:58
भी कई बार जैसे काम कर रहा हूं या कहीं जा रहा हूं अचानक ही ध्यान लग जाता है लेकिन उसको और ज्यादा
22:07
ज्यादा टाइम रहे उसके लिए क्या करूं वो मैं ठहरा
22:14
नहीं तो मेरे को सुन के आपको ठहराव नहीं आ रहा है तो मेरे को मत सुनो आप ओशो के पास
22:21
जाओ या उनके जो भी सेंटर्स हैं उनके पास जाओ अच्छा हां जहां आपको राहत मिल रही है गुरुद्वारे
22:30
में मिल रही है तो वहां जाओ। अच्छा मामला ये है ना कि आपको जहां सुकून मिले ठीक है।
22:38
आपको जहां साइलेंस मिले आपका जहां ध्यान लगे आपको वहां जाना है। ठीक है।
22:46
मेरे से नहीं बन पाया नहीं लग रहा है या जो भी है तो मेरे को छोड़ो ना। नहीं ऐसा नहीं है कि आपके साथ नहीं हो
22:54
रहा। मैं जो विचार सुन के मुझे जैसे रमेश पाल शेखर जी है रिजर्व दत्ता महाराज है उनको मैं
23:01
वीडियो सुन रहा था तो अच्छा लगता है आई एम नॉट अ डअर ये सारी बातें अच्छी लगती है। द
23:08
विल बी डन वो जैसे कहते हैं रमेश पालसेकर जी तो ये सारी बातें अच्छी लगती है लेकिन वो जो मैं डांस करता हूं ओशो की जगहों में
23:15
उसमें जो ध्यान लगता है ना उसका मुकाबला नहीं है जो डांस करने में मुझे होता है
23:22
हां तो आप वो सेलिब्रेशन को उस डांस को उसी में जाओ आप फिर ये सब छोड़ो
23:31
ठीक है भाई क्योंकि ये लगता है बड़ा सिर के लिए हैवी लगता है सारी बात हां हां
23:38
तो आप सेलिब्रेट करो डांस करो है ना जो आपको राहत दे रहा है उसी में आप जाओ ठीक है
23:46
फिर वो जगह कोई भी हो हां ओशो बेहतर है है ओशो के अलावा सिर्फ मुझे गुरुद्वारा में
23:54
मेरे घर के पास वाला सिर्फ गुरुद्वारे में मुझे ऐसा हां वो सुंदर है वो भी सुंदर है एक ही बात है
24:00
हां एक ही बात लगती है एक ही बात हम नाचो गाओ अपना ध्यान साक्षी जो भी आपको
24:09
अच्छा लगता है तो आप उसको कंप्लीट जियो उस चैप्टर को कंप्लीट जियो है ना
24:17
और एक मेरा अटकाव रहा है कई साल से कि जैसे एक जैसे ओशो ने मन में डाला है या मेरे खुद के जन्मों जन्मों का वो है कि
24:26
कोई स्पिरिचुअल लवर होती और ये ये बचपना सा क्यों नहीं जाता अब वैसे 90% चला गया
24:35
हम तो ये हां नहीं वो डिजायर है
24:45
उसके लिए पहले हम स्पिरिचुअल रहे हमारे भीतर प्रेम रहे वो पहले इंपॉर्टेंट है ना हम
24:52
कि हम प्रेम पूर्ण हो जाएं हम फिर क्या पता पूरा जगत ही आपको प्रेमपूर्ण लगे
24:59
हम पूरा जगत ही आपको स्पिरिचुअल लगे हम है ना हम
25:07
हमारा प्रेम पूर्ण होना ज्यादा जरूरी है। आध्यात्मिक होना ज्यादा जरूरी है। देन फिर
25:15
स्पिरिचुअल लवर यस।
25:24
सारे मास्टर्स अपने ढंग से बोलते हैं सारे के सारे सबकी अपनी एक अभिव्यक्ति होती है
25:32
और सब सुंदर है
25:40
और ध्यान इसीलिए ही नहीं लगता
25:45
किसी का ध्यान इसलिए ही नहीं लगता
25:51
क्योंकि मैं ही ध्यान हूं। आपका होना
25:58
जो आप स्वयं हो आपकी बीइंग वही तो ध्यान है। वह कोई साक्षी वाक्षी
26:05
नहीं है। अब आपका जो होना है वह कैसा लगता है?
26:19
आपके होने का एहसास वो जो कई बार अंदर ठहराव आता है, आनंद आता
26:30
है, ब्लिसफुल स्टेट आता है। अभी अभी अभी अभी तो
26:36
ठीक है। अभी इस समय सच बताऊं तो अंदर कुछ ना नहीं रहा है। नहीं लग रहा
26:45
ना आनंद है ना ना किसी तरह का कोई दुख है ना कुछ है बस एक नॉर्मल सिटी
26:54
हां तो कल आनंद आया था कल रात को सॉरी आपको बीच में होगा कल जब आपको सुन रहा था तो आनंद
27:01
आया हम
27:10
तो आप हो कि नहीं हो यह बताओ मेरे
27:17
है तो सही आप हो ना ठीक
27:28
प्रभु जी प्रणाम प्रणाम शेखर हां शेखर जी रुकिए थोड़ा सा अभी
27:37
अभी मैं नया
27:48
तो आप हो अपने होने के लिए कोई साधना करते हो क्या कि बगैर साधना के भी आप हो
27:58
लेकिन एक ये भाव है ना कि जैसे होशों को 21 साल की उम्र में आत्मज्ञान हुआ उनको पिछले जन्म दिखने लगे उनको पेड़ों में भी
28:06
जीवन दिखने लगा कुछ तो यार यार मैं ओशो की बात नहीं कर रहा हूं।
28:13
मैं आपकी बात कर रहा हूं। अभी ओशो को थोड़ा सा साइलेंट रखो ना। ठीक है। ठीक है।
28:19
मैं आपकी बात कर रहा हूं। आपकी आपका होना है कि नहीं है?
28:27
हां है होना। लेकिन उसमें ये है कि कभी क्रोध भी आ जाता है। कभी वासना भी आ जाती है। कभी
28:35
हां ठीक है। ठीक है। वो सब आ जाती है। बात नहीं कर रहा हूं मैं।
28:42
वह सब आ जाता है कि बात नहीं कर रहा हूं मैं। मैं यह पूछ रहा हूं कि आप हो कि नहीं हो?
28:53
है। हो ना?
28:57
ठीक है। अभी सब चीजें हटा दो। आप अपने होने में रहो। पुराना जो भी सीखे हो ओशो से या किसी से
29:05
भी सब हटाओ। रिलैक्स हो जाओ। आपका होना है। और
29:14
साधना करके है कि बगैर साधना के भी आप हो बगैर साधना के भी
29:21
यस अब अपने लिए कुछ सोचते हो क्या
29:31
कि बगैर सोचे भी आप हो बगैर सोचे भी अपने लिए कुछ समझते हो क्या कि बगैर समझे
29:39
भी आप हो बगैर समझे भी है यस
29:45
आप फ्यूचर में हो पास्ट में हो कि अभी हो अभी है बिल्कुल
29:52
आप अभी हो ठीक है तो बगैर किसी साधना के
30:01
बगैर सोचे समझे जो आप अभी के अभी हो बस
30:10
स्टॉप वही परमात्मा
30:21
वहां रुको सवाल नहीं उठाओ स्टॉप
30:28
बगैर जाने समझे बगैर किसी साधना के जो आप हो बस अभी के
30:37
अभी वही परम सत्य है।
30:43
असली परमात्मा है। अस्तित्व है।
30:51
आप ही आपका होना ही। उसमें सारे जो जिन मास्टरों की भी बात
31:01
आपने की सब इंक्लूड है। पूरा अस्तित्व इंक्लूड है उसमें।
31:08
सारे देवता, सारे गुरु, सारे मास्टर्स इंक्लूड हैं। जो आप हो बस बेशर्त
31:18
अकारण अपने
31:28
होने में स्वयं में
31:43
बगैर प्रयास के बगैर समझे भी जो आप हो
31:54
अरे वही परमात्मा है। वही एग्जैक्ट वही
32:02
हिस्सा कहानी तो अभी दो चार महीने हमको सुनो
32:12
तो हमारी बातें उतरने लगेंग ठीक है ठीक है और आपको ओशो भी क्लियर हो जाएंगे और आपका
32:22
ओशो जग जाएगा आपकी आत्मा जग जाएगी बस दो तीन महीने धैर्य से सुनो सुनना है और कुछ नहीं करना है
32:30
ठीक है ठीक ओके प्रणाम
32:40
कुछ तो टच हुआ होगा लेकिन आप हां लेकिन इसमें एक चीज पूछनी है ब्लिसफुल स्टेट आनी चाहिए
32:47
लेकिन लेकिन को बाद में देखेंगे कुछ टच हुआ कि नहीं हुआ टच हुआ है आपके जो वीडियो देखे हैं कुछ एक
32:55
उसमें भी कल नहीं हुआ नहीं हुआ अभी आप सुनो दो चार मिनट ठीक है किसी और को हो गया होगा। अपन उससे
33:03
मिलते हैं। अभी सुनो दो चार महीने। ठीक है। उसके बाद फिर सत्संग करेंगे अपन। ठीक?
33:10
ठीक है। हां। ओशो अगर जो है ना जय कृष्ण मूर्ति ओशो या
33:20
जो भी यह मेरा ओल्ड वर्जन है। मैं लेटेस्ट वर्जन हूं यार। आप लोग कहां जा रहे हो?
33:27
हां।
33:42
हां जी प्रभु जी शेखर बोल रहे जी
33:53
हां शेखर जी आपका चेहरा नहीं दिख रहा है नहीं जी प्रणाम
34:00
हां शिखर प्रणाम जी प्रभु जी मैंने कल ही सुना है आपका बहुत अच्छा अंदर से टच हुआ है मेरे और मैं
34:08
थोड़ा सा ये देना चाहता हूं कि खुद मैं हरी हूं तो मैं खुद की पूजा कैसे कर सकता हूं या उसका नाम कैसे जप कर सकता हूं थोड़ा सा
34:18
ये कंफ्यूजन है बस अपनी खुद की पूजा नहीं अगर आपका
34:25
आप अगर आपने यह बोध कर लिया कि मैं स्वयं
34:30
हरि हूं तो यह सवाल ही नहीं उठेगा
34:37
कि मैं पूजा कैसे करूं या कर सकता हूं या कर भी लूं या नाम का जैसे जाप करते हैं नाम ही नाम
34:46
भी धना जपना है वो भी या नाम का जाप हां अगर आपको बोध है कि आपका होना ही हरि
34:55
है नारायण है तो सारे चैप्टर ही क्लोज हो जाते हैं। सारे चैप्टर
35:03
यह सारे के सारे क्लोज हो जाते। आपको बोध नहीं है करके ही तो आप यह नाम
35:12
जपते हो या साधना करते हो या ध्यान इसलिए तो किए जाते हैं ना ये सब।
35:20
कहते हां
35:30
यह शुरू में यह सब कहा जाता है ना कि खुद से प्रेम करो, खुद में ध्यान दो, स्वयं
35:36
में जाओ, स्वयं में ठहरो। क्योंकि आप कहीं और ठहरे हुए हो। आप विषय वासना में ठहरे
35:44
हुए हो। बाहरी दुनिया में। उससे बेहतर है कि स्वयं में ठहरो। स्वयं में जाओ।
35:52
ठीक है। और इससे भी बेहतर है स्वयं का बोध हो जाना कि आप ही हरी हो।
36:00
लेकिन बोध हो जाना आप दिमागी ढंग से कैलकुलेट करके सेट कर लिए।
36:08
लेकिन बोध नहीं है। बोध हो जाना स्वयं में हरि का बहुत अलग
36:15
बात है कि आपका स्वयं ही नारायण है। यह बहुत अलग
36:23
बात है। और इसको दिमागी रूप से समझ लेना वो तो बहुत छोटी सी बात है। वो तो एआई भी समझ
36:32
जाएगा। वो स्टार्टिंग है वो तो स्टार्टिंग है हां असली चीज उसका बोध है उसका परिचय है
36:40
स्वयं का और बोध होते ही सारे संसार गिर जाते
36:48
कल आपका सुन रहा था तो मैं एक शरीर में पूरा कंपन हुआ मेरे पूरे शरीर में ना एक वाइब्रेशन बड़ी हुई
36:56
वो टच किया है मेरे को वाइब्रेशन किया हां ये सब ठीक है शुरुआत में तो निरंतर
37:04
अभी सुनिए तो आपको बोध होने लगेगा
37:11
यह बातें उतनी बड़ी नहीं है जितनी बताई गई
37:17
ये सब सहज में बोध हो जाता है। बस आप सुनो जी थोड़ा निरंतर सुनो जी
37:25
क्योंकि मैं जो डायरेक्ट टचिंग दे रहा हूं वो बहुत इजीली आपको ग्रहण हो जाएगा
37:35
और आपको वो स्वाद आने लगेगा एक्सपीरियंस होने लगेगा जी ओके जी
37:43
आज हम
38:00
हम हम
38:14
हरी हूं का बहुत मतलब समझ रहे हो।
38:24
बुद्धि से समझ लेना अलग चीज है। उसको प्रत्यक्ष हो जाना बहुत अलग चीज है।
38:33
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। वह बहुत अलग चीज है।
38:41
बट होता है। सहज में हो जाता है।
38:53
तो सब आप
39:02
अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए
39:09
18 20 साल 15 साल पढ़ते हो कम से कम उस विद्या को पढ़ पढ़ते हो जिससे आपका पेट
39:17
भरता है और आपको एक घर मिल जाता है।
39:24
उस विद्या के लिए 15 20 साल कम से कम देते हो
39:32
और ब्रह्म विद्या के लिए आत्म बोध के लिए
39:49
Google मीट शर्म आनी चाहिए आप लोग
39:58
आते भी हो तो 5 दिन 10 दिन
40:06
510 दिन में वैसी चीजें मिलती हैं जो 510 दिन के लायक होती है।
40:26
बहुत फर्क पड़ जाता है। बहुत फर्क पड़ता है। अब अपनी आप मुसीबतें सुनाओगे। मेरे घर में
40:35
यह है वह है। यह सब आपके नाटक हैं। है ना?
40:46
और हमेशा मरते समय आपको अफसोस होता है कि यार यह जन्म भी खराब कर दिया।
40:57
तो हरि का बोध ऐसे सस्ती छाप बात नहीं है। ऑनलाइन मिल
41:03
जाए आपको। बुद्धि से समझ लो। करेक्ट कर लो। बात करने में एक्सपर्ट हो जाओ और मिल जाए ना।
41:22
पूरा जीवन जब तक नहीं दोगे ना यहां दाल नहीं गलती।
41:30
एटलीस्ट आपके जीवन में प्राथमिक केवल परमात्मा होना चाहिए।
41:36
सत्य होना चाहिए, स्वयं होना चाहिए। जब तक प्रथम सत्य नहीं है,
41:48
प्रथम आपकी लाइफ की कोई और चीज है, कुछ और पाना है। तब तक आप भूल जाओ।
41:56
आप बस खुद को एक धोखा दे रहे हो। आप एक टैग चिपका रहे हो अपने में आध्यात्मिक होने का।
42:06
कि हां हम भी ठीक हैं। अच्छे लोग हैं। आध्यात्मिक हैं। थोड़ा रिसर्च भी कर रहे हैं।
42:13
हम ओसो पढ़े हैं। हम महाराज को पढ़े हैं। हम इनको पढ़े हैं। हम उनको पढ़े हैं। ये सब टैग है। हम इतने साल से पढ़ रहे हैं।
42:21
हम ओशो के साथ रहे हैं। उस जय कृष्ण मूर्ति ने हमको यह दे दिया। ओशो ने घड़ी दे दी। उसने बस आप केवल ना
42:31
केवल खुद को धोखा दे रहे हो। केवल धोखा
42:40
पढ़े हो अच्छा किए हो। यह नहीं बोल रहा हूं कि गलत किए हो। लेकिन आप कहां हो? अभी
42:52
आपका बोध कहां है?
43:09
जब तक आपका होना परमात्मा का होना एक्चुअल में ना लगे
43:17
तब तक आप केवल भटक रहे हो चाहे धर्म के नाम पर भट भटक रहे हो या
43:26
दुनिया के नाम पर भटक रहे हो? भटक तो रहे हो।
43:34
जब तक आपको ना लगे कि मैं ही अस्तित्व हूं।
43:41
मैं ही एग्जिस्टेंस हूं। तब तक समझ जाना कि आप भटक रहे हो।
44:03
बस जहां भीड़ जाती है वहां चले जाते हो। आपको लगता है सत्य वहीं है
44:10
और कुछ नहीं। हमेशा अवेयर रहो। जहां भीड़ है वहां सत्य
44:18
होता ही नहीं।
44:29
हर स्थान का सम्मान करो बट जान लो वहां सत्य नहीं होता।
45:03
हां जी एनीबडी है कोई लेवन हारा
45:10
थोड़ी डांट पीट कुटाई तो हो गई ठीक है अब कोई है लेवन हारा
45:33
प्रेम बना प्रभु जी अरे बड़ा
45:40
अच्छा मैं भी यही कहना चाहता हूं कि मैं भी मैं भी ये नहीं चाहता किशोर जैसे कोई
45:47
घड़ी लेके खुश हो जाए सौरभ जी बोल रहे हैं
45:58
हां जी हां हां बताइए
46:19
अरे ओशो ने घड़ी दे दी या जो है वह अच्छी बात है या जो भी है तो लोग वही वही किस्से कहानी सुनाते रहते हैं हम ओशो के साथ थे
46:28
वो ऐसा किए वो ऐसा किए अरे तुम्हारा भूत कहां है अच्छा कि ओशो के साथ रहे
46:35
हां जी मैडम वो बाद में वो बाद में पछतावा हो जाता है तो वो मैं नहीं चाहता कि बाद में ऐसा कोई पछतावा हो
46:43
अमित इतने साल से ओशो को सुन रहे हैं। हम इतने साल से जय कृष्ण मूर्ति को पढ़ रहे हैं। हम रमना के आश्रम में इतने साल रहे
46:51
हैं। ये आपका वो हो गया है। टैग हो गया है लोगों का कि अब ऐसे चिपका के घूमते हैं कि हम पुराने प्लेयर हैं।
47:00
यहां नया पुराने का मतलब ही नहीं है। इन जगह गए हो। अच्छा किए हो। मैं नहीं बोलता कि गलत किए हो। है ना?
47:11
बट खाली यह टैग लगाने से कुछ नहीं होने वाला है। हां
47:18
कम से कम सही जगह किए। ये बहुत अच्छा किए। गए सही जगह।
47:39
जब तक स्वयं अस्तित्व लगने ना लग जाए
47:46
तब तक आप केवल भटक रहे हो। ओशो के नाम पर, रमना के नाम पर,
47:58
कृष्णमूर्ति के नाम पर, महाराज का क्या नाम था? निस्गदत्त महाराज के नाम पे, कबीर
48:05
के नाम पे, रामकृष्ण के नाम पर केवल आप भटक रहे हो।
48:12
नाम टैग लगा लिए हो कि चलो हमारे अभी कोई अचीवमेंट
48:24
आपको प्रत्यक्ष लगना चाहिए कि आपका होना ही अस्तित्व है।
48:31
एग्जिस्टेंस है। और जब तक वो नहीं लग रहा है तो आप भ्रम
48:39
में हो, धोखे में हो, आप केवल एक स्पिरिचुअल एंटरटेनमेंट कर रहे हो। जैसे
48:46
शुरू में संसारी एंटरटेनमेंट करते थे। अब स्पिरिचुअल एंटरटेनमेंट कर रहे हो।
48:56
मैं इतने में राजी नहीं हूं आपसे कि मैं भी झुनझुना पकड़ा दूं आपको। दो चार
49:04
ध्यान साधना बता दूं। लगे रहो कभी कुछ हो जाएगा।
49:14
मैं अभी वाला हूं। बट अभी किसी को चाहिए नहीं
49:23
कि चाहिए चाहिए हां
49:32
सब बोलेंगे तब तो मैं बताऊंगा ना कुछ ऐसा थोड़ी ना एक ही बोलेगा प्रभु चाहिए चाहिए
49:41
चाहिए चाहिए मैं अभी प्रकट कर दूंगा। मैं मजाक नहीं
49:51
करता हूं। टिके रहो मेरे साथ लाइन पे। और जोड़ो कुछ लोगों को सबकी आवाज सुनना मेरे को।
49:58
मजाक मांगने की तरफ मांगो। हां। चाहिए हमें चाहिए। अब भी चाहिए।
50:10
सबको जोड़ो। नए लोगों को जोड़ो। इनको हटाओ अब
50:20
मैं ऑनलाइन दे दूंगा मूड में चाहिए प्रभु चाहिए
50:32
चाहिए प्रभु के अभी अभी के अभी अभी के अभी
50:54
अभी के अभी अभी के अभी
51:01
अभी अभी अभी अभी अभी अभी
51:09
अभी के अभी कृपा रहने जैसे प्रभु बोलते हैं अभी के अभी
51:21
अभी के अभी तो
51:39
बारिश अभी से
51:47
अभी के अभी अभी के अभी चाहिए अभी चाहिए
51:57
प्रेम की बारी आने दो अभी चाहिए
52:05
अभी चाहिए सबको
52:14
चाहिए
52:26
अभी चाहिए अभी चाहिए अभी चाहिए
52:34
चाहिए मतलब चाहिए अभी चाहिए
53:03
अभी
53:23
कर दो बारिश कर
53:31
सब रहो लाइन पे
53:51
तो अभी अभी अभी है कि अभी मैं हूं
54:07
अभी अभी है कि अभी मैं हूं। अरे मैं हूं।
54:39
तो व्यक्त समझते हो व्यक्त का अर्थ है जिसको बयां किया जा सके
54:50
जिसको बताया जा सके उसको क्या कहते हैं व्यक्त जो प्रगट है वो व्यक्त
55:01
व्यक्त को क्या कहते हैं? जो प्रकट है वह व्यक्त है। ठीक।
55:15
अब व्यक्त है कि अव्यक्त व्यक्त है
55:25
यह जो प्रगट है यह जो व्यक्त है ये जो भी आप जान रहे हो समझ रहे हो देख रहे हो यह
55:34
क्या है व्यक्त है है ना
55:41
तो यह व्यक्त है कि अव्यक्त व्यक्त है?
55:54
अरे भाई जब आप पैदा नहीं हुए थे तब क्या था?
56:03
अव्यक्त ही था। मर जाओगे उसके बाद क्या होगा?
56:10
अव्यक्त जी रहे हो पैदा होने के पहले और मरने के
56:16
बाद के बीच में क्या है जो अभी जी रहा
56:23
इस जीवन का बैकग्राउंड भी तो अव्यक्त है।
56:33
यह व्यक्त थोड़ी ना है। यह भी अव्यक्त है।
56:45
आप क्या जान पाते हो मेरे को बताओ
56:52
आप आज तक किसी भी मनुष्य को जान पाए क्या अपने पति को पत्नी को अपने प्रेमी को अपने
57:01
प्रेमिका को अपने बच्चे को अपने माता-पिता को अपने मित्र को या किसी को
57:10
आप आज तक किसी भी मनुष्य को जान पाए क्या बताओ
57:17
ईमानदारी से सिर हिला के बताओ यार नहीं जान पाए है ना
57:28
तो जब आप किसी मनुष्य को भी नहीं जान पाए मनुष्य अव्यक्त है ना
57:37
तभी तो नहीं जान पाए। तो आप परमात्मा को कैसे जान सकते हो?
57:49
जब एक मनुष्य को आप नहीं जान पाए। एक कंकड़ को आप नहीं जान सकते। साइंटिस्ट थक
57:57
गए। टुकड़े करते गए, करते गए। एक कंकड़ को भी कोई नहीं जान पाया। कोई
58:06
नहीं जान पाया तो आप परमात्मा को कैसे जान सकते हो?
58:20
तो यह मनुष्य क्या है?
58:24
अव्यक्त है। यह काम चलाओ लैंग्वेज आपने दे दी है जीने
58:34
के लिए कि इसको मनुष्य कहते हैं। इसको पेड़ कहते हैं। इसको दीवाल कहते हैं। इसको आकाश,
58:43
इसको धरती कहते हैं। यह केवल एक काम चलाऊ लैंग्वेज है।
58:53
आप कुछ जानते ही नहीं हो। क्या जानते हो? जन्म के पहले का क्या जानते हो आप?
59:02
मरने का बाद का जानते हो?
59:05
तो बीच में जो यह जानना जानना खेल रहे हो इसमें भी आप कुछ नहीं जानते हो
59:15
कि जानते हो नहीं जानते
59:22
क्यों नहीं जानते हो मालूम क्योंकि सब कुछ अव्यक्त है।
59:37
सब कुछ अव्यक्त है।
59:44
अव्यक्त का अर्थ व्यक्त का अर्थ जिसको बयां किया जा सके जो
59:51
प्रकट है उसको क्या बोलते हैं? व्यक्त अव्यक्त का अर्थ जिसको बताया ही ना जा सके कि यह क्या है? वह क्या है? यह क्या है?
1:00:02
मैं क्या हूं? कौन हूं? जिसको बताया ही ना जा सके।
1:00:08
वो क्या है? अव्यक्त। जिसको व्यक्त किया ही ना जा सके।
1:00:17
आप मौन भी नहीं कह सकते। वो भी बता देना है। मौन भी व्यक्त है। तो भैया मामला क्या है?
1:00:29
सब कुछ अव्यक्त है।
1:00:37
सब कुछ अव्यक्त है।
1:00:46
आपका होना, सबका होना या यह टेंपरेरी जो नाम दिए हो
1:00:52
यह सब कुछ अव्यक्त है। इस व्यक्त की आत्मा व्यक्त नहीं है।
1:01:02
अव्यक्त है। अव्यक्त ही व्यक्त है।
1:01:10
व्यक्त नहीं है। अव्यक्त ही व्यक्त है। अव्यक्त ही जन्मा
1:01:20
है जिसको आप शरीर कह रहे हो और ये जन्मा हुआ शरीर फिर कहां चले जाएगा?
1:01:28
अव्यक्त में। और जब तक यह शरीर है तब भी यह अव्यक्त ही है।
1:01:39
यह मन, यह बुद्धि यह सब अव्यक्त है।
1:01:51
तो सब तो अव्यक्त है यार। अब क्या जानोगे आप?
1:01:59
इसलिए तो आज तक कोई भी अपने आप को नहीं जान पाया क्योंकि वह अव्यक्त है। आत्मा
1:02:06
अव्यक्त है। ना कभी कोई जान पाएगा।
1:02:16
क्योंकि अव्यक्त ही अव्यक्त है।
1:02:22
अव्यक्त को जानने चलो तो और गहरा अव्यक्त प्रकट हो जाता है।
1:02:29
और गहन अव्यक्त
1:02:43
तो अव्यक्त के बोध में व्यक्त का अभाव है।
1:02:53
अभाव इट मींस नहीं है। अव्यक्त के बोध में
1:03:03
व्यक्त का अभाव है।
1:03:16
वो उनको बंद करो। वो इधर उधर सिर हिला रहे हैं।
1:03:26
सिंसियर लोग चाहिए। तो अव्यक्त के बोध में
1:03:35
व्यक्त का अभाव है
1:03:43
तो अव्यक्त के बोध में रहो। अभी वैसे भी आप कुछ जानते ही नहीं। कुछ पता ही नहीं है।
1:03:51
अव्यक्त ही अव्यक्त है। और अव्यक्त ही अव्यक्त है।
1:04:06
अव्यक्त देश है यह पूरा
1:04:21
अव्यक्त के बोध में अव्यक्त के बोध में
1:04:31
व्यक्त का अभाव है।
1:04:40
तो मृत्यु किसकी होती है? व्यक्त की कि अव्यक्त की?
1:04:46
व्यक्त की शरीर व्यक्त है। मन बुद्धि व्यक्त है। यह जो भी दिख रहा है यह सब व्यक्त है। इसकी मृत्यु होती है।
1:04:55
अव्यक्त की मृत्यु नहीं होती।
1:05:03
तो आपको कहां रहना है? अव्यक्त में। ओके।
1:05:11
तो अव्यक्त की टचिंग करो। अव्यक्त का बोध।
1:05:21
अव्यक्त के बोध में
1:05:29
व्यक्त का अभाव है।
1:05:41
हम आंख बंद करो सभी।
1:05:48
अव्यक्त ही अव्यक्त है। अब कुछ पता ही नहीं चल रहा है।
1:06:09
अव्यक्त ही अव्यक्त
1:06:15
कोई और छोर नहीं है।
1:06:34
अव्यक्त ही अव्यक्त
1:06:43
जो भी जानते हो समझते हो कचरा है वो व्यक्त है फेंको वो सब उसमें नहीं रहना है
1:06:50
आपको अपनी सारी धारणाएं अपनी सारी मान्यताएं
1:06:56
आपका पास्ट आपके पास्ट के गुरु यह सब व्यक्त है इसको हटाओ
1:07:03
अव्यक्त देश में आ जाओ
1:07:25
अव्यक्त के बोध में व्यक्त का अभाव है।
1:07:48
और अव्यक्त ही अव्यक्त है।
1:07:59
अव्यक्त ही अव्यक्त है। कोई और छोर नहीं है।
1:08:23
लापता ही लापता
1:08:32
अव्यक्त ही अव्यक्त
1:09:17
अब धीरे से आंखें खोल लो।
1:09:26
अब जो दिख रहा है बाहर यह भी अव्यक्त है।
1:09:43
अव्यक्त ही अव्यक्त है।
1:09:50
व्यक्त अव्यक्त का कण मात्र है। ये इतने सारे ब्रह्मांड
1:09:59
फिर अनंत गैलेक्सियां जिसको आप व्यक्त समझते हो ना वो अव्यक्त
1:10:08
का कण मात्र है।
1:10:17
जैसे ब्लैक बोर्ड पे एक बिंदु बना दिया किसी मास्टर ने और सब बच्चों से पूछा क्या दिख रहा है? तो
1:10:25
सब ने कहा बिंदु एक बच्चा खड़ा होकर बोला मेरे को ब्लैक बोर्ड दिख रहा है।
1:10:38
मुझे अव्यक्त दिख रहा है। अव्यक्त विराट है। वास्ट
1:10:47
विराट का भी स्वामी
1:11:16
अव्यक्त ही अव्यक्त
1:11:27
अखंड अव्यक्त अपार अव्यक्त
1:11:58
कोई और छोर नहीं है।
1:12:16
अव्यक्त के बोध में
1:12:21
व्यक्त का अभाव हो चुका है।
1:12:36
व्यक्त कहीं है ही नहीं। अव्यक्त ही अव्यक्त है।
1:12:53
पूरी दुनिया, शरीर, मन, बुद्धि सब गायब।
1:12:58
मन बुद्धि व्यक्त में जिंदा रहते हैं।
1:13:05
अव्यक्त में मन बुद्धि गायब हो जाते हैं। तुरंत ध्यान लग जाता है। आंख खुली हो या
1:13:13
बंद हो तुरंत ध्यान लग जाता है। हम व्यक्त का ध्यान करते हैं। पूरी दुनिया व्यक्त का ध्यान करती है। इसलिए ध्यान
1:13:21
नहीं लगता। अव्यक्त का ध्यान करो और अभी ध्यान लग जाएगा।
1:13:34
अव्यक्त में गायब है मन बुद्धि शरीर दुनिया सब गायब।
1:13:42
सब का सब गायब।
1:14:09
अव्यक्त के बोध में व्यक्त का अभाव हो चुका है।
1:14:34
अब अव्यक्त देश के वासी हो आप
1:14:45
अखंड अनंत अव्यक्त अपार
1:14:53
कोई और छोर ही नहीं है।
1:15:17
तो शरीर के जन्म के पहले अव्यक्त मृत्यु के बाद अव्यक्त
1:15:26
जीवन भर जो भी है सब अव्यक्त ओके
1:15:36
ऐसे ही पृथ्वी के जन्म के पहले पृथ्वी भी अव्यक्त थी।
1:15:43
पृथ्वी के मिटने के बाद पृथ्वी भी अव्यक्त है। और बीच में अभी जिसको पृथ्वी कह रहे हो यह
1:15:50
भी अव्यक्त है। यह ब्रह्मांड
1:15:58
कहां से आया? अव्यक्त से आया। अव्यक्त ही है और अव्यक्त में समा जाएगा।
1:16:08
यह अनंत ब्रह्मांड, अनंत गैलेक्सियां सब अव्यक्त से आई और अव्यक्त ही है और
1:16:18
अव्यक्त में समा जाएंगी।
1:16:30
अव्यक्त ही अव्यक्त है।
1:16:40
अव्यक्त के बोध में व्यक्त का अभाव हो चुका है। अब बात ही खत्म हो गई।
1:16:49
व्यक्त का तो नामोनिशान नहीं है। तो क्या अभाव हो चुका है? बोलोगे।
1:16:56
अव्यक्त के बोध में अव्यक्त का ही बोध है।
1:17:05
अव्यक्त के बोध में अव्यक्त का ही बोध है।
1:17:19
और गहन अव्यक्त और गहन अव्यक्त
1:17:28
सारे देवी देवता ब्रह्मा विष्णु महेश सब अव्यक्त से आते हैं।
1:17:36
अव्यक्त में ही जीते हैं और अव्यक्त में समा जाते हैं।
1:17:44
यह 33 करोड़ देवी देवता अव्यक्त से ही आते हैं। अव्यक्त में ही जीते हैं और अव्यक्त में
1:17:52
ही समा जाते हैं। सारे अवतार, सारे देवता ये सब भी क्या है?
1:18:02
अव्यक्त हैं। अव्यक्त ही अव्यक्त।
1:18:30
लापता ही लापता तो अव्यक्त में कुछ हो रहा है क्या?
1:18:48
व्यक्त में कुछ हो रहा है कहते हो ना अव्यक्त में कुछ हो रहा है क्या
1:18:58
कुछ हो ही नहीं रहा है इसलिए तू मुस्कुराया कर
1:19:08
तू मुस्कुराया कर यहां कुछ हो ही नहीं रहा है अव्यक्त में
1:19:17
हो ही नहीं रहा है कुछ भी अव्यक्त ही अव्यक्त है। होगा क्या?
1:19:25
होता व्यक्त में है।
1:19:49
अव्यक्त के बोध में
1:19:54
अव्यक्त का ही बोध है। कुछ हो ही नहीं रहा है।
1:20:04
अव्यक्त ही अव्यक्त है। अव्यक्त ही अव्यक्त है।
1:20:31
सारा चराचर गायब है। मन बुद्धि गायब है। मन बुद्धि अव्यक्त को छूते ही गायब हो
1:20:40
जाती है। भस्म हो जाती है। यह दुनिया अव्यक्त को छूते ही भस्म हो
1:20:49
जाती है। यह तुम्हारा पास्ट,
1:20:55
तुम्हारा वर्तमान जो कुछ भी है अव्यक्त को छूते ही भस्म हो जाता है।
1:21:04
अव्यक्त ही हो जाता है क्योंकि यह सब अव्यक्त ही है।
1:21:14
यह मन नहीं है, शरीर नहीं है, अव्यक्त है। इसलिए अव्यक्त हो जाता है। यह दुनिया नहीं है। यह अव्यक्त है।
1:21:22
अनिर्वचनीय है। इसलिए अव्यक्त हो जाता है।
1:21:34
तो अव्यक्त के बोध में अव्यक्त का ही बोध है।
1:21:57
अब अब अब अव्यक्त अव्यक्त है
1:22:08
कि मैं अव्यक्त हूं।
1:22:16
अव्यक्त अव्यक्त है कि मैं अव्यक्त हूं।
1:22:27
बताओ मैं अव्यक्त हूं।
1:22:37
मैं के बोध में अव्यक्त का अभाव है।
1:22:53
स्वयं के बोध में अव्यक्त का अभाव है।
1:23:07
व्यक्त की आत्मा अव्यक्त अव्यक्त की आत्मा मैं
1:23:15
बस मैं हूं।
1:23:26
व्यक्त अव्यक्त में कण मात्र है।
1:23:32
अव्यक्त मैं में कण मात्र है
1:23:44
तो कुछ हो रहा है वह व्यक्त है कुछ हो ही नहीं रहा है वह अव्यक्त है
1:23:54
और कुछ हो ही नहीं रहा है भी हो ही नहीं रहा है। यह मैं हूं।
1:24:10
अरे कुछ हो ही नहीं रहा है। भी हो ही नहीं रहा है।
1:24:16
यह मैं देश है। आत्म देश है।
1:24:26
लापता का भी जहां लापता हो गया। पता लापता हुआ
1:24:34
वह व्यक्त लापता भी अब लापता हो गया।
1:24:48
व्यक्त खो गया अव्यक्त में खोना भी जहां खो गया।
1:24:57
मिटना भी जहां मिट गया। वह सहज में मैं हूं।
1:25:12
अब मैं हूं को आप बॉडी समझते थे। बॉडी तो व्यक्त में ही मिट गई।
1:25:18
मैं हूं को आप मन, बुद्धि, अहंकार समझते थे। वह तो व्यक्त में ही मिट गया। व्यक्त से जैसे ही
1:25:27
अव्यक्त में आए। असली मैं हूं जो मैं हूं
1:25:33
उसमें अव्यक्त भी मिट जाता है। शरीर क्या चीज है? शरीर की क्या औकात?
1:25:42
अव्यक्त को मैं एक शिप में पी लेता हूं।
1:25:51
तो मैं के बोध में अव्यक्त का अभाव है।
1:26:02
मैं के बोध में स्वयं के बोध में अव्यक्त का
1:26:08
अभाव है। बस मैं हूं। क्या व्यक्त और क्या व्यक्त
1:26:22
और समय वमय अभी व अभी तो व्यक्त तक है जिससे भी आपका परिचय है वह व्यक्त देश है
1:26:31
जिसको आप समय कहते हो अभी चाहिए कह रहे थे वह क्या है व्यक्त देश
1:26:41
व्यक्त की आत्मा अव्यक्त और अव्यक्त की आत्मा मैं स्वयं
1:26:52
तो अव्यक्त ही अव्यक्त है कि मैं ही मैं हूं।
1:27:00
अरे मैं ही मैं हूं। अब मैं के बोध में मैं का ही बोध है।
1:27:08
अव्यक्त का नहीं। अब अव्यक्त का अभाव नहीं है। जो चीज है ही नहीं उसका अभाव भी क्या करना?
1:27:18
तो मैं के बोध में मैं का ही बोध है।
1:27:28
अरे मैं के बोध में मैं का ही बोध है। मैं ही मैं
1:27:39
मैं ही मैं देश में
1:27:47
स्वदेश में कोई और देश है ही नहीं ना व्यक्त का ना
1:27:55
अव्यक्त का और आनंद की बात यही है
1:28:06
कि यह सहज में है। इसके लिए कुछ करना नहीं है। इसके लिए
1:28:14
व्यक्त में जाओ, फिर अव्यक्त में जाओ, फिर अपने में आओ। ऐसा नहीं है।
1:28:21
मैं तो सहज में हूं। प्रत्यक्ष
1:28:49
तो आकार वालों को व्यक्त परमात्मा चाहिए। निराकार वालों को अव्यक्त परमात्मा चाहिए।
1:28:59
और वह दोनों परमात्मा नहीं है। परमात्मा सिर्फ मैं आपका स्वयं
1:29:07
सर्व आधार ना दृश्य ना अदृश्य ना ज्ञात ना अज्ञात बस
1:29:16
मैं
1:29:32
तो मैं के बोध में और किसी का बोध होता ही नहीं।
1:29:41
यही आत्म बोध है। अपना आप है बस।
1:29:50
कोई और छोर नहीं अव्यक्त भी जिसकी सीमा नहीं
1:29:56
व्यक्त बाउंड्री अव्यक्त बाउंड्री लेस बाउंड्री लेस भी जिसकी सीमा नहीं
1:30:04
वो मैं सहज में हूं
1:30:20
हां जी
1:31:13
हां जी
1:31:40
तो मैं क्या पहले नहीं था?
1:31:45
यह सब सुनने के पहले नहीं था। यह व्यक्त अव्यक्त करने के पहले नहीं था।
1:31:53
मैं ही तो था। और कौन था?
1:32:07
तो आकाश तक व्यक्त है।
1:32:13
और आकाश अव्यक्त का कण मात्र है और अव्यक्त मैं का कण मात्र है और अंततः
1:32:22
है ही नहीं अव्यक्त मैं देश में
1:32:31
जो भी आप जान गए कल्पना कर लिए देख लिए या समझ लिए वहां तक व्यक्त है
1:32:38
हां
1:32:48
जिसका अनुभव नहीं होता समझ के परे है वह अव्यक्त है
1:32:58
और अव्यक्त भी जहां समाहित हो जाता है
1:33:07
मुझ में हां
1:33:17
बस मैं मैं आत्मा भगवान
1:33:24
या बस मैं
1:33:56
मैं और स्टॉप है वहां बस और तो कुछ है ही नहीं।
1:34:06
अपना आप स्वयंभू
1:34:50
गायब भी यहां गायब हो जाता है। अव्यक्त गायब है ना?
1:34:57
गायब भी यहां गायब हो जाता है। आत्मदेश
1:35:07
मिटना भी मिट जाता है। कुछ नहीं है भी कुछ नहीं है। हो जाता है।
1:35:15
समाप्त भी समाप्त हो जाता है। समाप्त भी समाप्त हो जाता है।
1:35:26
बस अपना आप रहता है। मैं हूं।
1:35:55
हां जी
1:36:09
कहां है भैया ये दुनिया दिख रही क्या किसी को?
1:36:17
दुनिया जिसमें मिट गई अव्यक्त में वही गायब है।
1:37:04
गहन अव्यक्त है और फिर मैं में वह गहनता भी मिट जाती है। एक जगह ऐसी है
1:37:12
जहां गहराई भी मिट जाती है। ऊंचाई भी मिट जाती है। वो मैं हूं।
1:37:21
ऐसे ही थोड़ी ना है आत्म बोध।
1:37:32
गायब भी जहां गायब हो जाए।
1:38:35
ओके सभी को प्रेम प्रणाम
1:38:49
अपने आत्म स्वरूप को प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम