Prabhu Shree
0:18
आपने सुबह कहा कि जो दिख रहा है वो भी नहीं उस बात हम
0:27
तो जिसको आप संसार समझ रही है वह भी मैं ही हूं।
0:34
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। उसको अलग मत करो अपने से संसार को। ना व्यक्त को ना
0:42
अव्यक्त को। अपने से अलग करो ही मत। जो भी दिख रहा है या नहीं दिख रहा है, हो
0:52
रहा है या नहीं हो रहा है, बस मैं ही हूं। जी।
1:09
संशय का नाम संसार किसका नाम संसार?
1:15
संशय का नाम संसार।
1:26
जी तो मैं हो मैं होता हूं तब संसार होता है
1:32
कि संसार होता है तब मैं होता हूं नहीं होता बस
1:41
तो संसार का आधार भी मैं हूं परमात्मा का आधार भी मैं हूं व्यक्त
1:49
अव्यक्त का आधार भी मैं हूं बस मैं हूं
1:59
तो मैं इसको थोड़ा और जल्दी मत करो आप मोनामा
2:05
अरे छोकरा कुछ बता रहा है सुन लो है ना
2:22
तो आउटर वर्ल्ड जो संसार कहते हो जिसको प्रपंच कहते हो वहां मैं बिखरा बिखरा सा
2:32
हूं चेंजबल हूं। है ना? क्योंकि बाहर की
2:39
दुनिया में सब चेंज हो रहा है। तो यह चेंजबल भी मैं ही हूं
2:48
और स्वयं में मैं आत्मा भगवान में अनचेंजेबल भी मैं ही हूं।
2:55
तो यह मेरा आनंद है अनचेंजबल और यह पूरा चेंजबल।
3:03
यह जो भी चेंज हो रहा है, दुनिया में कुछ भी सेटल रहता ही नहीं है। बिखर सा जाता है हमेशा
3:11
कुछ भी फिक्स होता ही नहीं है। वह भी मैं ही हूं।
3:18
तो इधर चेंजबल की तरह और इधर अनचेंजबल की तरह हूं तो मैं ही।
3:34
तो इधर चेंजबल का आनंद लेता हूं
3:39
और इधर अनचेंजबल का आनंद लेता हूं।
3:46
मुझे ही कोई संसार कहता है। कोई परमात्मा हूं मैं ही।
3:56
क्योंकि इस दुनिया से अपने को निकाल दो। इस प्रपंच से अपने को निकाल दो तो यह दुनिया बसती है क्या?
4:06
अरे ये है ही नहीं। मैं ही हूं। जी आज
4:20
तो इधर आउटर वर्ल्ड में मैं अनंत नाम रूपों में प्रस्फुटित होता रहता हूं।
4:28
नए-नए रूपों में आता रहता हूं। नए-नए शरीर, नए-नए शरीर, नए-नए वृक्ष, नए-नए सितारे
4:39
अनंत नाम रूपों में मैं प्रस्फुटित होता रहता हूं।
4:45
इस आउटर वर्ल्ड में। यह सारे नाम रूप मेरे ही हैं।
4:57
और स्वयं में मैं अनामी हूं। नाम रूप से परे मैं आत्मा भगवान हूं मैं ही। लेकिन
5:07
दूसरे की कोई सत्ता नहीं है। अदरनेस जैसी कोई वस्तु है ही नहीं।
5:18
इवन जिसको आप चिंता फिक्र कहते हो वह भी मैं ही हूं।
5:26
अरे मैं इतना आनंदित हूं कि मैं चिंता भी कर लेता हूं।
5:33
मैं इतना आनंदित हूं अपने ही आप में कि मैं चिंता भी कर लेता हूं। दुखी भी हो
5:42
लेता हूं। दुखी होना
5:48
भी मेरा आनंद है। संसारी होना भी मुझ परमात्मा का आनंद है।
6:01
यह सब कुछ आनंद है। यह शरीर, ये मन, यह दुनिया,
6:08
यह मेरा सेलिब्रेशन है। आनंद है।
6:23
यह संसार मेरी प्रसन्नता है।
6:31
यह कोई प्रॉब्लम नहीं है। यह प्रकृति,
6:38
यह दुनिया, यह मेरी प्रसन्नता है। मेरा ओवरफ्लो है। यह देह, यह मन,
6:53
मैं आत्मा भगवान का श्रृंगार है। यह देह
6:59
भगवान में श्रृंगार करते हैं ना। मैं आत्मा भगवान का श्रृंगार है। यह देह
7:08
यह मन। यह पूरी प्रकृति मेरा श्रृंगार है और मैं
7:19
इसमें रास रचा रहा हूं। अरे आनंद ही आनंद है
7:28
और दुखी होने का भी आनंद है।
7:35
बिखर जाने का भी आनंद है। क्योंकि बाहर की दुनिया में बिखराव होता
7:43
है। वह भी एक आनंद है।
8:04
तो ये दुनिया दुल्हन है। है ना? वो गाना था ना यह दुनिया एक दुल्हन
8:14
यह माथे की बिया यह दुल्हन है यार। यह श्रृंगार है मैं
8:21
आत्मा का। सुंदर ही सुंदर है सब कुछ।
8:32
दुनिया का मतलब क्या है मालूम?
8:40
अचाह यानी मैं आत्मा भगवान। चाह यानी दुनिया।
8:47
है ना? आपने कुछ भी चाहा वही आपकी दुनिया है।
8:56
ये जो दिख रहा है वो दुनिया नहीं है। आपने जो भी चाहा वो आपकी दुनिया है। ऐसा हो
9:03
वैसा हो वैसा हो जाए। और आपका होना आपका एकिस्टेंस परमात्मा है
9:13
अचार।
9:23
और ये पूरी दुनिया चाहतों से भरी हुई है।
9:31
अचाह के हाथ में चाहत और दोनों नाच रहे हैं। है ना?
9:41
ऐसे हैंड पकड़ के नाचते हैं ना?
9:45
आचार के हाथ में चाहत कितना कितनी सुंदर है यह चाहतें
9:55
यह चाहना ये आप लोगों को देखना भी एक चाह है सत्संग
10:01
करना भी एक चाह है मैं तो गाना गा रहा था आया तो मेरे दिल के
10:09
चैन आप लोग मेरे दिल का चैन हो।
10:16
मैं तो खूब चाहता हूं। मालूम मैं डरता नहीं चाहतों से।
10:23
बेतहाशा चाहता हूं।
10:30
चाह के ही मैंने ये पूरी प्रकृति बनाई। इतनी सुंदरता, इतने सितारे और मैं चाहता
10:40
ही रहता हूं। और अनंत सितारे और अनंत पृथ्वयां मैं कंटिन्यूस
10:48
चाहता ही रहता हूं क्योंकि मुझे पता है मैं अचा हूं
11:08
और चाहतों का पूरा ना होना होना
11:16
चाहतों का पूरा ना होना भी सुंदर होता है। आपकी हर चाहत
11:25
एक एग्जैक्ट टाइम पर पूरी होती है। और याद रखना हर व्यक्ति की हर चाहत
11:34
समय आते आते आते पूरी हो ही जाती है। इसलिए सोच समझ के चाहना
11:46
क्योंकि आत्मा कल्प वृक्ष है। वहां जो भी चाहोगे वह पूरा होता है। जिस चाह का ग्राफ
11:53
सबसे बड़ा है। जो सबसे ज्यादा आप चाहते हो वो जल्दी पूरा होता है।
12:04
चाहते पूरी होती है। फिर नई चाहते आ जाती है। यह पूरा लीला है।
12:11
यह भी सुंदर है। डिजायरलेसनेस
12:20
वो तो आपका स्वयं है। आपका होना है। आपको डिजायरलेस होना नहीं
12:28
है। आप डिजायरलेस ही हो। आपकी आत्मा, आपकी बीइंग डिजायरलेस है।
12:37
ऑलवेज और यह डिजायर्स की लीला है।
12:45
सुंदर है। सुंदरतम है।
13:08
तो सब चाहतों से सुंदर परमात्मा की चाह,
13:11
परमात्मा की चाहतों से सुंदर स्वयं को जानने की चाह, ऐसा हम सुने हैं ना?
13:18
इस पैटर्न से हम चले हैं। सुंदर है, यह भी सुंदर है।
13:41
तो चाचा को तो चाह प्रिय है। माया पति को तो माया प्रिय है।
13:50
जी हां।
14:04
तो माया को सुंदर जान। जब तक माया को सुंदर नहीं जानोगे,
14:11
अपनी दुनिया को सुंदर नहीं जानोगे, तब तक परेशान होते रहो।
14:16
अपने देह को, अपने मन को सुंदर जान। अपनी दुनिया को सुंदर जान। यह सब सुंदर
14:25
है। अद्भुत है, अलौकिक है।
14:42
नयनम मधुरम अधरम मधुरम।
14:48
आपके भी नयन मधुर हैं। आपका भी चरित्र मधुर है। यह राम चरित्र
14:56
है। कृष्ण चरित्र है। आपका एक एक विचार मधुर है। आपका एक एक भाव
15:03
मधुर है। चरितम मधुरम मधुराधिपते
15:12
आप ही मधुराधिपते हो। आपका होना ही कृष्ण है और आपका सब कुछ
15:19
मधुर है। आप आपकी आईज, आपका सुनना, आपका शरीर, आपका चरित्र, आपका चलना, फिरना,
15:30
देखना, बोलना सब मधुर है। और यह संसार और ज्यादा मधुर है।
15:39
मधुरम मधुरम अरे मधुरम मधुरम
15:47
सब कुछ राम है, कृष्ण है। इसको संसार माया मत बोलो। बस सीधा राम बोल दिया करो तो
15:55
पलटी खा जाएगा। पहले ही संसार बोलते हो ना तो कंफ्यूज हो
16:01
जाते हो। सीधा बोला करो राम। देह दिखे, मन दिखे, दुनिया दिखे, सीधा राम। सीधा कृष्ण।
16:14
और फिर सब कुछ मधुर है। अरे मधुर है यार।
16:23
अलौकिक सुंदर मधुर। आप
16:29
भोजन करते हो। कितना मधुर है यार वो। आप स्नान करते हो। आप खाते पीते हो, चलते
16:39
हो, जीते हो, स्वास लेते हो, देखते हो। आ क्या मधुरता है वो।
16:59
अद्भुत मधुरता है। सुंदरता ही सुंदरता है। पूरे जीवन
17:22
और आप मालूम है और और मधुरता बताऊं आप इस
17:30
दुनिया में उलझते हो यह भी एक मधुरता है।
17:38
समझ रहे हो? जैसे कृष्ण आए और छोटे-छोटे वह माखन खाना और वह में उलझने का आनंद
17:46
लिए। छोटी-छोटी चीजों में छोटी-छोटी वृत्तियों में सब वृत्तियों के साथ लीला किए।
17:54
आप भी वही कर रहे हो।
18:02
उलझना भी सुंदर है। उलझना भी राम है। याद रखना।
18:17
तो सब कुछ मधुर है और मधुर है और मधुर है।
18:29
मैं तो निहारते रहता हूं इस प्रकृति को,
18:33
चांद सितारों को, धरती को, मनुष्यों को। आ
18:39
इतना सुख मिलता है देखने मात्र से
18:45
ये सब मेरे दिल के चैन है।
18:55
आप लोग मेरे दिल के चैन हो।
19:09
ओ मेरे दिल के चैन
19:19
चैन आए मेरे दिल को दुआ कीजिए
19:29
यार चैन हो आप मेरे दिल के चैन हां मैं वैसी बातें नहीं करता कि मैं के
19:37
अतिरिक्त कुछ नहीं। मैं जी नहीं सकता आप लोग के बगैर। मैं बेतहाशा चाहता हूं।
19:48
मैं वो करेक्ट बातें नहीं करता। आत्मज्ञानी जैसी। सेट वेल सेट फोकस
19:56
कि मैं ही हूं। मेरे अलावा कुछ है ही नहीं। थर्ड क्लास बात है वह। फोर्थ क्लास
20:08
मैं तो बस यूं ही मिलता रहूंगा देखता रहूंगा दिखता रहूंगा
20:17
और ये बातें ये उलझना ये सुलझना ये संसार ये माया ये दुनिया
20:25
माय गॉड
20:34
मधुरम मधुरम मधुरम मधुरम अरे ये बकवास लगता है ये मैं हूं मैं हूं
20:43
क्या-क्या कौन सिखा दिया पता नहीं आप लोगों को
20:53
अरे वो मैं हूं तो मैं तो हूं ही ना उसको करोगे क्या उसको करोगे करोगे क्या? मेरे
20:59
को तो माखन चुराना है, चित्त चुराना है। है ना?
21:07
अरे कृष्ण को चोरों का सरदार कहा गया है। मालूम एक नाम है।
21:14
कृष्ण के नाम पढ़ोगे ना तो एक नाम आपको मिलेगा। उसमें क्या कहा गया है? चोरों का सरदार।
21:28
गोविंद जी है वह बताएंगे उनको बहुत सारे नाम पता है
21:37
मैं तो चोरी करने आया हूं आपके चित्त की क्योंकि मेरे पास चित्त है नहीं
21:44
तो मैं तो चित चोर हूं मन की चोरी करता हूं जो मेरे पास नहीं है वही तो मेरे को चाहिए ना यार
21:53
आपका आपका मन चाहिए, आपका चित्त चाहिए। अरे मेरे को चाहिए बता रहा हूं। मैं नहीं जानता।
22:02
चाहिए मींस चाहिए। मैं तो चाहता हूं।
22:14
यार ये मोहब्बत की घड़ी है। यह शाम।
22:30
ये अद्भुत सुंदरता दिव्यता आ
22:37
कौन इस संसार से मुक्त होना चाहता है यार कौन मूर्ख है
22:45
इस अलौकिक संसार से मुक्त होना चाहता है हम तो बार-बार यहां आना चाहते
22:52
बारंबार बारंबार बस यूं ही मिलते रहे
22:59
मुक्ति मुक्ति को साइट करके मोक्ष कैवल्य को हम तो ऐसे फेंक देते हैं साइट कर देते हैं।
23:08
बार-बार बारंबार यूं मिलन होता रहे।
23:14
हम निहारते रहे आप निहारते रहो। कुछ हम याद करें, कुछ आप याद करो।
23:26
और इस लीला में आपका थोड़ा सा थोड़ा सा उलझना बहुत जरूरी है।
23:38
इस दुनिया में इस संसार में तो वह भी परफेक्ट हो रहा है।
23:45
वरना आप तो आओगे ही नहीं। हमारे क्या बोलते हैं इसको? Google मीट में। एकदम से सुलझ गए। परमात्मा ही हो गए तो आओगे कैसे भैया?
24:01
हम खुद चाहते हैं कि थोड़ा सा लिटिल बिट आप उलझे रहो।
24:08
है ना? यह मैं की मर्जी है। ठीक है।
24:16
तो प्रणाम है माते। तू बढ़िया बोलता है ना छोकरा
24:33
प्रणाम जी
24:43
प्रणाम जी हम हम
24:59
प्रभु अरे प्रणाम गोविंद जी हो कैसे यार हो कैसे
25:09
मस्ती में हूं प्रभु चोर नायक की नगरी में ही हूं चोर नायक
25:18
चोर नायकम नमामि चोर नायकम
25:25
यस और बताइए
25:32
बस प्रभु एकदम आनंद में हूं एकदम रस पूर्ण हूं हर जगह रस ही रस है
25:48
हमको तो ना बट आप लोग इतने दूरदूर और दूरदूर दूरदूर अच्छे नहीं लगते यार
25:55
बहुत दूर हो ऐसा लगता है मुझे भी बहुत दूरदूर लग रहा है बस एक दो
26:05
ये दूरी अब बस आ ही जाओ आप सब देख लेंगे जिसको आना है आ जाओ मोस्ट वेलकम है
26:12
देख लेंगे मैं तो आ ही रहा हूं प्रभु बस। हां नो लिमिट। कोई एक जून की लिमिट नहीं
26:20
है। अब आ जाओ यार। हम मर जाएंगे नहीं तो आप लोगों के बगैर हां जिसको आना है मोस्ट वेलकम है। सब देख
26:28
लेंगे अपन। कामकाज यहां जो भी चल रहा है
26:42
प्रभु आपका वीडियो नहीं दिख रहा है हम आपका फोटो वीडियो नहीं दिख रहा
26:51
हम सबको नहीं दिख रहा है कि इनको नहीं दिख रहा मुझे जो और है बताओ
27:01
बीचबीच में दिख रहा है प्रभु बीचबीच में दिख रहा है फिर गायब हो जाते हो
27:07
अरे हमको नहीं पता भाई ये विराज देखता है ये सब काम देखो भैया
27:14
प्रणाम प्रभु श्री पूरा दिख रहा है वीडियो दिख रहा है दिख रहा है दिख रहा है पूरा दिख रहा है प्रभु श्री दिख रहा है ओके ओके दिख रहा है दिख रहा है
27:23
देखने वाला ही दिख रहा प्रभु हरि को भी चोर ही बोलते हैं। हरि
27:33
नाम भी चोर ही है। हां हर लेता है ना? हां।
27:42
हरण कर लेता है। सब हर लेता है। तो ये सब सुंदर नाम है भगवान के।
27:52
मैं के प्रभु आज आपने बताया कि जो ग्राफ सबसे
28:04
ऊंचा होगा वही आपका जल्दी पकड़ा जाएगा। हम
28:10
तो प्रभु यह आत्मा भगवान का ग्राफ ही सबसे ऊंचा है। हां तो वही सबसे पहले कंप्लीट होगा। है ना?
28:20
जी प्रभु यही होना चाहिए। हां निश्चित होगा वह है ही बस उसको सुनते
28:29
सुनते उसका बोध हो जाता है। जी प्रभु बस आप छोड़िएगा नहीं प्रभु आप छोड़िएगा नहीं
28:37
अरे मैं किसी को नहीं छोड़ने वाला आप लोग मेरे को छोड़ दोगे तो भी नहीं छोडूंगा
28:44
मैं किसी को नहीं छोड़ता जी प्रभु जी मुझे पूरी दुनिया अरे मुझे पूरी दुनिया
28:52
भूल के बैठी है तब भी मैं किसी को नहीं छोड़ता जी प्रभु आत्मा भगवान किसी को नहीं छोड़ते
29:00
नहीं छोड़ता साहब जी ये तो सत्य है प्रभु ये सत्य है
29:12
हम ही भूल जाते हैं प्रभु हम भूल जाते हैं अरे आप बेतहाशा भूलो मेरे को निश्चिंत हो
29:22
भूलो मेरे को मैं नहीं भूलूंगा निश्चिंत रहना शुक्रिया प्रभु
29:33
मैं इतना चाहता हूं ना आप सोच भी नहीं सकते।
29:39
सोच ही नहीं सकते आप। जब अचाह चाहता है ना सुनो
29:48
जब अचाह में आत्मा अचाह चाहता है ना तो उसकी चाहत की कोई लिमिट नहीं होती।
29:57
आपको पता ही नहीं है मेरी चाहत के बारे में। इसको खोल के बताइए प्रभु अचार अचार की
30:06
लिमिट नहीं होती इसको खोल के बताइए प्रभु
30:12
अरे कुछ चीजों को भैया कुछ चीजों को रहस्य
30:18
ही रहने दो है ना रहस्य आप ही खोलोगे
30:27
बस निश्चिंत रहो हां
30:49
मैं हमेशा शरीर भी धारण करता रहूंगा। तुम मुझे निराकार में अस्तित्व में नहीं देख पाते
30:58
ना करके मैं हमेशा शरीर धारण करता हूं। हमेशा करता रहूंगा।
31:05
नहीं पहचान पाओगे तो मैं पहचान भी करा दूंगा। मैं मिलता रहूंगा यार। आप निश्चिंत रहो।
31:13
जी प्रभु जन्मजनम रति राम पद जन्मजनम मिलता रहूंगा। कोई दिक्कत ही नहीं है मेरे लिए। कोई
31:21
बाउंड्री नहीं है। आपको पता ही नहीं है कि कितने जन्मों से
31:32
आप लोग मेरे से मिल रहे हो। उन चीजों को राज ही रहने दो। बस
31:42
यह पल बहुत है। प्रेम के लिए, आनंद के लिए बहुत ज्यादा है।
31:53
ओके प्रेम प्रणाम अब नए लोगों को चालू करो
32:00
इनको हटाओ अब सबका यार मेरे को चेहरा देखना होता है तू मेरा
32:10
ही चेहरा दिखा रहा है
32:24
हां ये हुई ना बात।
32:32
हम यहां दीदार करने आए हैं। यह वीडियो
32:41
कॉल जो है उसका पूरा आनंद लेना। हां
32:50
और बताइए आप लोग
33:15
तो बस हमेशा मेरे से जुड़े रहो बस जुड़े रहो बस और कुछ नहीं
33:25
यह सब छोड़ दो यह आत्मज्ञान यह बुद्धत्व
33:32
और यह मोक्ष मोक्ष यह तो हमारे यहां डस्टबिन में पड़ा रहता है। हां
33:40
ये सब का बात ही मत किया करो। बस हमारे साथ रहा करो।
33:50
हमारे साथ हां जी
34:19
और कुछ अपने लफ्जों से कह भी दिया करो। ऐसे खामोश ना रहा करो।
34:26
मौन और समाधि का समय नहीं है। ये
34:37
समय गीतों का है।
34:57
प्रणाम प्रभु प्रणाम कौन बोल रहे हो ओम
35:05
जी प्रभु यस ओम बताइए बस प्रभु बहुत बहुत कृपा है आपकी
35:13
हम जिंदगी बिल्कुल ऐसे ऐसा लग रहा है कि मतलब उड़ रहा हूं फुल घर
35:20
पे आने के बाद सब सेटल हो गया बस
35:27
प्रभु आपका प्रेम भी बहुत मिला इस बार जब मैं आया तो मतलब
35:33
आपके होने से भी और आपको मैं देखता था कि आप सत्संग भी भी बहुत पीक पे जाते थे और
35:42
आप पूजा भी करते थे। आप हवन भी करते थे दो-द घंटे और आपका रस भी वैसे ही हवन में
35:48
भी बना रहता था। पूजा में भी बना रहता था। तो वो मैं मतलब अनबिलीवेबल ऐसा कुछ मैं
35:58
सोचा कभी समझा नहीं ऐसा भी कुछ देखने को ऐसा भी है प्रभु
36:07
आज मैं केवल भगवान ही थोड़ी ना हूं। मैं भक्त भी हूं।
36:16
मैं पुजारी भी बन जाता हूं यार। मेरा आनंद है। मेरा प्रेम है। यानी राम से, कृष्ण
36:22
से, शिव से, दुर्गा से मेरा ना मैं नहीं बता सकता। कितना अतिशय प्रेम है।
36:33
ठीक है। वो मैं से भिन्न नहीं है। वो एक अलग वर्ल्ड है आत्मज्ञान का। बट
36:39
मैं इसका भी आनंद लेता हूं। भक्त बनके है ना रस लेता हूं। मेरे को बहुत आनंद आता है। एक दिया जलाने में, हवन करने में,
36:51
पूजा पाठ में मेरे को विधि विधि का पता नहीं होता। बट भाव से, प्रेम से बड़ा रस
36:58
आता है मेरे को। यह मेरा पूरा परिवार है। ऐसा लगता है और
37:05
मैं बहुत बहुत प्यार है मेरे को इन सब से। जी
37:13
कोई कारण नहीं है। ऐसा वैसा ओ आत्मज्ञानी होके भी पूजा करते हो। कई लोग इस टाइप की बातें करते हैं। हां मैं करता हूं। भाड़
37:22
में जाए आत्मज्ञान यार। मेरा आनंद है, तुमको क्या करना है?
37:35
ऐसा आत्मज्ञान मेरे को चाहिए ही नहीं। जो झुक ना सके
37:41
है ना जो पूजा तक ना कर सके। जीवन में कुछ तो करोगे क्या? तो पूजा गीत, प्रार्थनाएं, हवन,
37:51
सेलिब्रेशन यह होना ही चाहिए। बिल्कुल प्रभु बिल्कुल यह आनंद है।
38:01
ओके जी प्रभु आपको देख के तो प्रभु मेरा भी रस काफी उसमें आ गया है। मैं मेरे घर पे भी
38:08
नवरात्रि को होता था हवन पूजा लेकिन मेरा उस पर ध्यान नहीं था। मैं सोचता था ऐसे ही होता है। मैं देखा आप आप इतना भाव से करते
38:18
हो। मेरे को सौभाग्य भी दिया बगल में बैठने का तो मेरा भी इतना रस बोला क्रिया
38:25
में इतना रस है बाप रे। करने में ही आनंद है। इसका फल बहुत रस है। आप कीर्तन करोगे, आप हवन
38:32
करोगे। बहुत रसपूर्ण है सब। जी। लोग क्या करते हैं मालूम? घटिया वाहियात
38:39
थर्ड क्लास चीजें करते हैं। डायनेमिक करते हैं लोग। कुंडलिनी करते हैं। ऐसे ऐसे ऐसे
38:46
ऐसे बीमारी है ये सब। उससे अनंत गुना सुंदर है। आप दिए जलाओ,
38:55
दीप जलाओ। आप कीर्तन करो आप नाचो है ना आप
39:01
गीत गाओ प्रभु के लिए आप हवन करो रोज दिए जलाओ
39:09
वो आपको रेचन करना है पता नहीं क्या रेचन करना है समझ ही नहीं आता आपके भीतर परमात्मा भरा हुआ है साला उसका
39:17
क्या रेचन करोगे कचरा वचरा नहीं भरा है आपके भीतर जी
39:23
परमात्मा ही परमात्मा भरा हुआ है और जो जलने का है वह सब जल जाता है। भाव
39:32
से बोल दो ना परमात्मा को यार ये मेरे को प्रॉब्लम है। ऐसा है वैसा है। आपके अचेतन में जो भी कचरा है एक सेकंड में जल जाता
39:40
है। वो चीख रहे हो डायनेमिक कर रहे हो। पता नहीं क्या-क्या। फिर यह क्रिया वो क्रिया
39:49
हठ योग वो योग ये सब बीमारी है। सिकनेस बोलते हैं क्या? मेंटल सिकनेस
39:57
हां तो मस्त रहो यार। ओके
40:10
प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम प्रभु आप ना
40:19
दर्शना जी बोल रही है यस मेरे को याद है भाई मेरी
40:27
आज्ञा है प्रभु यस यस बताइए प्रभु आप ना हमारे लगते जिगर हो आप कहते
40:36
हो ना लगते जिगर जिगर यस मैं हूं
40:44
तो वो कहते हैं ना सॉन्ग है जिसमें मैम मेरा तुझसे है पहने का नाता कोई यूं ही
40:51
नहीं दिल लुभाता कोई जाने तू क्या जाने ना तो लगता है प्रभु
40:59
ऐसे के आपसे हमारा मतलब पता नहीं कई जन्मों का या नाता है कोई
41:09
हां ऐसे कोई आके ऐसे अपना टाइम स्पेंड करे किसी के साथ ऐसे वो फुल
41:17
फोकस से सुने मतलब मुख्तसर सी बात ये है कि हमें मोहब्बत है अपने मुर्शिद से बस
41:25
आज आज यही तो सुंदरता है, आनंद है। है ना?
41:38
हम यहां कोई किसी को मुक्त कराने थोड़ी ना आए हैं कि आत्मज्ञान बांट दें और यह कर
41:46
दें वो कर दें। वह तो हम बताएं ना हमारे यहां डस्टबीन में पड़ा रहता है।
41:52
हम तो केवल प्रेम के लिए आए हैं। बस और ये निरंतर प्रेम बहता रहे। यह आनंद ये
42:01
रस यह रस ही रस जो बह रहा है अभी बस बहता रहे। और करना क्या है मुक्ति का यह जान गए
42:10
वह जान गए करोगे क्या जान गए तो सी थोड़ी ना उग जाएंगे आप लोग
42:17
ये रस बहता रहे बस ये अद्भुत अलौकिक रस
42:34
और अब तो यह वीडियो कॉल्स में तो और आनंद आ रहा है।
42:41
ऐसे ही प्रभु हम कभी मतलब फुर्सत में आपको बताएंगे हम कैसे जुड़े आपसे
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अभी जैसे कई लोग वेट कर रहे होंगे आपसे बात करने के लिए तो कभी आपके पास टाइम हो
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ना तो आपको बताएंगे कि हम कैसे जुड़े यहां पे और वो थोड़ी सी 510 मिनट की स्टोरी है।
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वो टाइम निकालिएगा हमारे लिए भी। हां बिल्कुल बिल्कुल आप बताओ।
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बिल्कुल बताओ प्रभु जैसे मैं पहले भी सत्संग सुनती थी
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यहां पे पाकिस्तान में। इंडिया से लखनऊ में एक लिंक आती थी हमारे पास तो लाइव
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होता था सत्संग यहां पे मतलब ऑडियो आती थी। हम जब बिफोर मैरिज तो मैं सुनती थी ये उसके
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बाद जैसे मैरिज के बाद तो मुझे अलाउ नहीं था यहां पे फिजिकली जाना और सत्संग अटेंड
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करना तो काफी टाइम से मैंने सत्संग अटेंड नहीं किया तो ये वही सत्संग का ब्रह्म
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तत्व का जो आप बताते थे सेम वही था मतलब वहां पे नीलू भगवान गीता भगवान ऐसे करके
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गुरु के नेम थे वो कराते थे। हम हम वो मतलब जो सत्संग कराते थे वो मतलब
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व्यवहारिक लेवल पर भी था कि आपका व्यवहार भी स्ट्रांग रहे और ये जो एवरीथिंग इज गॉड
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और एवरीवेयर इज गॉड ये चीज भी उन्होंने हमें बताई। तो एक बुद्धि से समझ आ जाता था
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कि हां ये चीज ठीक है। लेकिन फिर अचानक जो है हमारे घर में किसी की डेथ हो गई।
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तो मेरे को ऐसे मृत्यु से भय हो गया कि जो कोई बंदा हमारे साथ इतने साल तक रहा और
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अचानक उसका कोई नामोनिशान नहीं है तो मेरे को ऐसे डर बैठ गया अंदर के फिर वो
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गया कहां ऐसे लाइक अ डर बैठ गया तो फिर मैं ऐसे वीडियो सर्च करती थी कि
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मेरे को कहीं ऐसे YouTube पे वीडियो मिल जाए कि मेरे को उसमें पता चल चल जाए कि मरने के बाद लोग जाते कहां है। ऐसे करके
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सर्च करती थी। हम तो अचानक से जैसे मैं वीडियो सर्च कर रही
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थी। फिर आपका ऐसे वीडियो आया जिसमें 8 वो मुझे आज तक याद है। तकरीबन डेढ़ साल से मैं आपको सुन रही हूं।
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तो उसमें था कि जीव कभी परमात्मा नहीं होता। परमात्मा ही परमात्मा होता है।
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यस तो श वीडियोस थी वो आपकी और वो ऐसे प्रभु जैसे दिल में ऐसे तीर की तरह जैसे हो जाता
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है ना उतर गई वो चीज हम हम तो वहां पे भी यही बताते थे कि वहां से जो
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मेरा बेसिक बना वहां से कि मैं ही परमात्मा हूं। पर मेरे को पता नहीं था कि मेरे अंदर जो परमात्मा है वो किस रूप में
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है या मैं उसको क्या बोलूं जैसे आप मैं हूं का बताते हो ना कि मैं हूं आपका जो है वो परमात्मा है इस तरीके से
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हम तो जैसे फिर आपको मैं सुनती गई सुनती गई मतलब जैसे एक प्रेम होता गया आपकी वीडियोस
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से और ऐसे खींचती गई अपने आप मैंने कोई प्रयास नहीं किया ऑटोमेटिक आपकी वो चीज मुझे खींचती गई अपने और वहां से वो कट ऑफ
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होता गया कि मेरा मुझे फिर जैसे कि 8 साल के बाद मेरे को परमिशन मिली सत्संग जाने की फिर मैं गई
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कंटिन्यू किया फिर जैसे आपकी वीडियो सुनी फिर मेरे से वो छूटता गया जैसे मेरे को आपका मिलता था ना फिर मैं बोलती थी यार ये
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लास्ट लेवल है एक मिनट प्रभु
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तो मेरे को लगा कि ये मतलब लास्ट है। इसके बाद मुझे पता था कि ये सत्संग और भी साधना
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वाले ये वो पर मेरा दिल एग्री नहीं करता था किसी को मैं सुनू इस चीज को कि साधना
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का सत्संग या जहां पर कथा होती है तो
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तो प्रभु तो ऐसे वो चीज वहां से कट ऑफ होती गई होती
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नहीं सुंदर है अद्भुत है और जिसको जिसकी तलाश होती है वह वहां तक पहुंच ही जाता है
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वह कंप्रोमाइज नहीं करता है ना यह बहुत सुंदर है अद्भुत है
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तो प्रभु ऐसे हां बोलिए आपसे जुड़ने के बाद प्रभु तो सही है ना
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प्रभु थोड़ा डिस्टरबेंस आप बताएं आप हां बोलिए बोलिए
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एक्चुअली डोंट ओपन द डोर हां थोड़ी देर के लिए म्यूट हो जाओ फिर आ जाना ओके
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आज सब सुंदर है। अद्भुत है। बिल्कुल है ना?
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आपकी तलाश मैं हूं और मेरी तलाश आप हो। मेरी भी तलाश हो आप।
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हां। मैंने तलाशा है आपको। मैंने भी पुकारा है।
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आपके भीतर से मैं अंतर्यामी हूं।
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यूं ही यह सब कुछ संभव नहीं है।
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और आपसे ज्यादा वेट हमने किया है आप लोगों का। याद रखना। आपका वेट तो
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मैक्सिमम इस जन्म का ही है।
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हां जी यस एनीबडी प्रणाम करो भाई
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प्रणाम प्रणाम जी
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हां बोलिए कैसे हैं अंकवर भाई?
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मैं बहुत आनंद में हूं और और बहुत आनंद में हूं।
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आप बताइए क्या नाम है आपका?
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या यस सिया जी कैसे हो मस्त
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गुरु मुझे तो आप जादू के जैसे ही लगते हो हां मैं जादू हां
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देखो सबको मैंने मोहित करके रखा है सब मोहित है अभी मेरे से हां सच में
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एक आध दो छूटे होंगे बाकी तो सब मोहित है छूटे नहीं होंगे
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पॉसिबल ही नहीं है। ये पूरा विश्व मेरे सुनो सिया ये पूरा
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विश्व मेरे सम्मोहन में रहता है। ये पूरा विश्व मेरे से सम्मोहित रहता है। हमेशा
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हां पूरा विश्व बहुत लकी है।
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गुरुवर पता है सत्संग स्टार्ट होता है पहले वाली म्यूजिक जो है ना वो चालू होती है फिर तो मतलब ऐसा लगता है सब कुछ चले
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गया और आप बहुत शुद्ध हो हृदय से
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और जो भी हृदय से शुद्ध होता है ना
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कि उसका आत्म कल्याण निश्चित होता है। क्या कैसे कब उसकी कोई लिमिट नहीं है बट
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होता जरूर। इसलिए हमेशा हृदय से साफ रहना, पवित्र
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रहना छल कपट में नहीं जीना। एकदम फ्रेश भोले भाले
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साफ सुथरे जैसे हैं। है अज्ञानी है। हैं बस उसमें दिखावा नहीं करना कि मैं जानता हूं ज्ञानी हूं। ये भक्त हूं। है ना?
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अज्ञानी है ना यार। अपन क्या है? ये ईमानदारी होनी चाहिए।
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एक भोलापन, एक साफ सुथरापन कि मैं नहीं जानती तो नहीं जानती।
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आप सब जानते हैं गुरुवर। गुरुवर मैं सच में इतना नहीं जानती। जानती
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तो बस ऐसे ही ईमानदार रहना। है ना?
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फ्रेश रहना एकदम साफ सुथरे। और यह दैहिक जीवन बड़ा छोटा सा है। यह 80
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100 साल मैक्सिमम बहुत छोटा सा है।
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जीते जी अपना आत्म कल्याण कर लो और निरंतर सत्संग से निश्चित आत्म कल्याण हो जाता
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है। गवर हमारी उम्र भी आप ले लीजिए।
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उम्रों का मैं क्या करूंगा? मुझे तो प्रेम चाहिए होता है।
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मैं तो प्रेम का भूखा हूं। प्रेम का दानी और प्रेम का भूखा हूं मैं।
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और मेरे को कुछ नहीं आता।
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हां जी थैंक यू अपना ख्याल रखें और मस्त रहें ठीक है सिया जी
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प्रणाम करो प्रणाम भगवान
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हां प्रणाम जी भगवान बस मुझे आपसे थोड़ा सा शेयर करना था
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अपना एक्सपेरियो कि मेरी एक बार लास्ट में मतलब एक दो दो तीन महीने पहले बात हुई थी तो मुझे मतलब कुछ समझ में नहीं आया
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नाम तो बताओ माय डियर आपका नाम क्या दिनेश क्या लिखा है हां जी हां जी हां जी हां जी दिनेश हां जी
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हां दिनेश जी जी तो मेरी आपसे बात हुई थी तीन चार महीने पहले आई थिंक शायद तो आपने बोला कि अभी
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थोड़ा और सुनो थोड़ा और सुनो और थोड़ा डीप सुनो तो मैंने सुना तो धीरे-धीरे मुझे मतलब चीजें अंदर अंदर गई थोड़ा बहुत चीजें
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तो और सर मैं पहले थोड़ा बहुत सुनो सुनो दिनेश जी दिनेश
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अभी थोड़ा और सुनो आप ठीक है क्योंकि थोड़ी चीजें ही अंदर गई है
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ना इसलिए अभी थोड़ा और सुनो सब चला जाएगा धैर्य रखना जल्दबाजी नहीं करना।
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मामला बहुत धैर्य का है। ठीक है। जी भगवान तब समाधान हो जाएगा और होगा ही याद रखना
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मेरा वचन। धन्यवाद। ओके प्रणाम। प्रणाम
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प्रणामम अरे यार पानी वानी पिलाते रहे करो।
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम प्रगना जी कैसे हैं आप?
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बस बहुत बढ़िया और खाली आजकल यार सुनो तो अरे सुनो तो यार आजकल आप
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स्मार्ट होते जा रहे हो बहुत थैंक यू
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थैंक यू जब यहां मेरे पास अभी आए थे कितने डल थे अब कितने सुंदर हो मुस्कुरा रहे हो आनंद
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में हो जी बहुत आनंद में हूं। बहुत और अब सब जगह पर राम ही दिख रहा है। राम ही है तो बहुत
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निश्चिंता है। आज बहुत सुंदर
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और मेन तो यही बात बोलनी थी कि आप बोल रहे हो मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं। तो अब
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कोई चारा नहीं मतलब कोई ये नहीं है कि कैसे बताएं कि हम आपसे कितना प्यार करते
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हैं। हम आपको कोई शब्द नहीं मिल रहे पर
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अपने एक एक जो कुछ भी अपने हिस्से में है ना वो सबसे पूरी तरह आपको प्यार करते हैं। और आगे जाकर बताऊं तो और सही मायने में
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बताऊं ना तो मेरे मन में हमेशा बचपन से मैं कृष्ण भक्त रही हूं। तो मुझे जो भी
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मैं हमेशा ऐसे आंखें बंद करके कई बार मेरे लल्ला को बहुत प्यार करती हूं। यहां तक कि
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मैं उसको दूध भी पिलाती हूं। इतना मेरा प्यार वो प्रार्थना में होता है।
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तो अभी ये कितना सही है पता नहीं। पर मैं आपको मां की तरह प्यार करती हूं। मेरे लल्ले हो, लल्ला हो, छोटा सा नन्हा सा
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नटखट लल्ला उससे मैं कितना प्यार करती हूं। मैं आपको बता नहीं पाती हूं। इतना प्यार मैं आपको करती हूं। आप ही मेरे
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लल्ला हो। आप ही मेरे कृष्ण कन्हैया हो। आप ही मेरे लड्डू गोपाल हो। मैं इतना
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प्यार करती हूं आपसे। इतना प्यार करती हूं।
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प्रणाम है माते। बहुत बहुत प्रणाम। बहुत प्रणाम।
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हम प्रणाम प्रभु
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प्रणाम यस किशन बोल रहा हूं मैं गुजरात में
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क्या नाम किशन लाल हां किशन जी
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बस प्रणाम करने के लिए हम
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प्रणाम है बहुत सारा प्यार है आज
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धन्यवाद धन्यवाद
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प्रेम प्रणाम हम प्रेम प्रणाम चेतन जी कैसे हो?
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बहुत बढ़िया भगवान कृपा है आपकी हम अभी मैं लेन सिक्स वाले पार्क में बैठा
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हूं जहां पे सत्संग हुआ करते थे हमारे कुछ हुए थे हमारे हम
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बहुत अच्छी हवा चल रही है आनंद ले रहा हूं बहुत सुंदर है
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और आप एक दिव्य आत्मा हो हमेशा आत्म नष्टिक रहो
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और बहुत सुंदर है सब कुछ जो भी हो रहा है
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आपके जीवन में अद्भुत है और सुंदर ठीक है चेतन यस भगवान
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यस आज थैंक यू सो मच प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
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हरि ओम स्वामी जी हरि ओम
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मैं सोनिया बात कर रही हूं। यस सोनिया जी
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मैं आपका सुन रही हूं बहुत टाइम से। मुझे प्रश्न कुछ आते हैं पूछने के लिए
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लेकिन जब आप सामने आते हैं तो सब खत्म हो जाते हैं प्रश्न। और यह भी लगता है कि आप पूछेंगे कुछ क्या
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सुना तो मुझे कुछ याद ही नहीं है कि मैंने क्या सुना। पर जब सुनती हूं तो ऐसे लगता
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है कि सब अपना सोनिया जी आपको ख्याल नहीं रहता। आपने
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क्या सुना हमको ख्याल नहीं रहता। हमने क्या बताया और पता नहीं यह सब क्या चल रहा है। हमको
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पता ही नहीं है। हमको कुछ ख्याल ही नहीं रहता हमने क्या-क्या बता दिया है
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और यह धारा बहती ही जा रही है। बहती ही जा रही है।
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हां यह है कि बहुत रस और आनंद है। हां जी आप कुछ कह रही थी। मैंने आपको रोक
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दिया। यस। बस स्वामी जी बस इतना महसूस होने लग गया
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है कि हर तरफ हरी ही हरी है। हर चीज में हरी है। मतलब पहले मुझे यह आभास नहीं होता
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था। लेकिन अब जैसे एकांत में बैठूं तो दरवाजे, खिड़कियां, पेड़, हवा तो ऐसे लगता
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है कि सब में वही तो चेतन सत्ता है जो मेरे अंदर है। मतलब इतना इतना आभास अब
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अनुभव में मतलब अनुभव भी नहीं मैं कहूंगी। मैं मतलब बता नहीं पा रही शब्दों में आपको
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पर मुझे डर भी लग रहा है आपको बताने में कि कहीं मैं कुछ गलत ना बोल जाऊ। हां अरे
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सब चलेगा तो ये हरि हरि हरि व्यापक सर्वत्र समाना
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प्रेम ते प्रगट होई मैं जाना हरि सर्वत्र समान रूप से व्याप्त है आप
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में सब में पूरे चराचर में प्रेम ते प्रगट होई मैं जाना
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बस प्रेम से प्रकट होते हैं और किसी से प्रकट नहीं होते।
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इस बात को हमेशा याद रखना। जी स्वामी जी
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प्रेम ते प्रकट होई मैं जाना। ओके सोनिया जी।
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जी स्वामी जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका सुनके मतलब मैं अपने आप ही वहां पहुंचती जा रही हूं।
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जहां जहां आप ले जहां आप ले जाना चाहते हैं अपने आप ही मैं पहुंचती जा रही हूं। वहां पे मुझे कुछ प्रयास की जरूरत नहीं
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है। हां बहुत सुंदर है। अद्भुत है। है ना?
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अपना ख्याल रखें। जी आनंद में रहें। प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
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हमारे शैलेश जी आखिर आ ही गए हां आखिर आ रही
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प्रणाम प्रभु जी प्रणाम प्रणाम प्रभु जी आवाज आ रही है अरे आवाज नहीं आ रही है प्यार आ रहा है
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अरे प्रभु जी आपने शुरुआत एक गीत गाने से शुरुआत की तो मेरे अंदर भी फूट गया एक गीत
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मैं तेरे प्यार प्यार में पागल ऐसे घूमता हूं पता नहीं कैसे घूमता हूं
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लेकिन घूमता रहता हूं
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राणा प्रभु जी क्या बोले
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बस प्रेम ही प्रेम है भगवन है ना
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सही है प्रभु सही है और कुछ नहीं
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हां जी कोटि कोटि कोटि वंदन प्रणाम कोटि
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प्रेम प्रणाम
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हम हम हम
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प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम प्रणाम
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प्रणाम आज
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बस मजामा चल रहा है बहुत सुंदर है ना बहुत मजा में बहुत मजा में
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आज आज
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हम प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
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भगवान हम सोचते थे के डिस्टर्ब था हेलो
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कभी-कभी भगवान आप आप एक बार एक बात पूछते हैं ना कि ऐसा सोचो जो कभी नहीं सोच सकते
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तो हम हमेशा सोचते थे भगवान बोलते क्यों नहीं है हमने कहीं देखा नहीं भगवान को बोलते
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और अभी तो अभी वो सपना पूरा हो गया है इतना सुनते हैं आपसे इतना सुनते हैं इतना
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इतना मजा लेते हैं। मगर एक और है इच्छा कि आप अंदर से भी सुनाई दे हमारे भीतर से।
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ओके पूरी हो जाएगी बहुत जल्द ये इच्छा भी निश्चिंत रहें। भगवान थैंक यू। अभी इतना अच्छा वक्त आया
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है। बट चेहरा मैं नहीं देख पा रहा हूं। सॉरी मुझे बहुत शर्म है इसीलिए मैं वीडियो
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नहीं ऑन करती। उसमें क्या शर्माना है? हां गुरु गुरुजी इतना अच्छा वक्त आया है। अगर
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जब मैं जुड़ जाती हूं इस जस्ट इस कॉल में ही इवन टेलीग्राम में इतना आनंद आता है।
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अरे आज तो मैं स्टार्टिंग में ही जुड़ गई। कभी-कभी लास्ट में जुड़ती हूं। कभी-कभी होता ही नहीं है। आज आपने बुलाया जैसे
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लगता है। इतना जस्ट थैंक यू भगवान। थैंक यू। कोटि-कोटि धन्यवाद।
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प्रणामम प्रभु प्रेम प्रणाम। ऐसे दिखा करो। प्रेम प्रणाम।
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प्रभु बस हर जगह आप ही दिखाई देते हो। हर जगह मैं हूं ना भाई तो दिखाई तो दूंगा
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ही। अच्छा बस मतलब मैं अपने गुरु को ही देखती हूं कि मेरे गुरु जी कहां है? ऐसा ढूंढ रही थी।
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मेरे सत्संग हो रहा है कहीं सबके गुरु बैठे हैं।
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बस प्रभु आप बनाए रखना। प्रेम प्रणाम
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प्रेम प्रणाम। प्रणाम प्रणाम
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हां प्रणाम जी आलोक बोल रहा हूं बोले यस आलोक जी
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प्रेम की ही बात चल रही थी तो एक पुराने समय में मेरे पुराने गुरु हुआ करते थे तो
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उस समय में ये वाला बहुत निकलता था लाइंस कि
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ये मोहब्बत की बातें हैं ओदो बंदगी अपने बस की नहीं है यहां दम दम पे होते हैं
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सौदे आशिकी अपने बस की नहीं है और प्रेम वालों ने कब किससे पूछा किसको पूजू बता
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मेरे ओधवो तो मैं इतना ड्राई हुआ करता था गुरुदेव आपके
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पास आने से पहले और अभी तो पल पल में आपका चेहरा देखता हूं तो मेरे को रोना आ जाता है। आपकी याद आ
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जाती है तो अंदर से मेरे को रोना आ जाता है और सो ही जाता हूं। बस हो ही जाता हूं।
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मैं जब आया था तो आपसे एक बार सवाल पूछा था कि गुरुदेव जब आप बताते हैं कि सब जगह राम देखो तो राम से तो टेली होता है लेकिन
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मैं से टेली करने जाऊं तो मैं से टेली करना मुश्किल होता है। अब गुरुदेव आपने वो
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भी मुश्किल दूर कर दी। अब तो मतलब राम से तो प्यार है और मैं से
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भी इतना प्यार हो गया है कि राम और मैं ऐसा अलग-अलग कहीं नहीं है
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कहीं है ही नहीं वो राम और मैं तो मतलब अभी
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ऐसा ऐसा लगता था अरे मैं क्या सोचता था अरे मैं राम को अलग मानना था। अरे ये तो
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जादू जादू जादू कर दिया आपने मतलब
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बोलने लायक कुछ नहीं बचा। बस वो वही हम सुनते हैं जब आश्रम में आते हैं सुनते हैं तो एक ही गाना दिमाग में चलता रहता है कि
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प्रेम के रंग में ऐसी डूबी बन गया एक ही रूप। श्याम की माला जपते जपते गुरुदेव की
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माला जपते जपते आप ही हुई मैं शाम आज
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प्रणाम आपकी कृपा है बहुत मजा है गुरुदेव बस आप ही आप छाए हुए हो और यही बने रहेगा अब
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बने ही रहेगा बस धन्यवाद
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प्रणाम म प्रणामम प्रेम प्रणाम प्रभु
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हम प्रेम प्रणाम संजय दिल्ली से यस संजय जी आई लव यू
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लव यू सो मच बहुत सारा प्यार
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बहुत सारा प्रेम प्रेम प्रेम और प्रेम यस आपको बस सुनने का ही दिल करता है कुछ
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बोलने का दिल नहीं करता ओके
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आज प्रणाम प्रणाम
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हम अब पुराना हटाओ नए लोगों को डालो यार हमको अपनी सूरत तो दिखा दो
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प्रणाम प्रणाम प्रणाम जी
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प्रणाम प्रभु प्रणाम
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हम भी आपसे बहुत प्रेम करते हैं प्रभु जी
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शुक्रिया कृपा आज
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प्रणाम है
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हम हम
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ओके
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तो ये सारे प्यारे पल यह मोमेंट्स ऐसा लगता है कि
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यह कभी खत्म हो ही ना
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और उम्र यूं ही गुजर जाए बस और रखा क्या है यहां?
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यस एनीबडी
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प्रणाम प्रभु प्रणाम जी
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लव यू प्रभु जय श्री कृष्णा प्रभु थैंक यू प्रभु जय श्री कृष्णा
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थैंक यू प्रभु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु जो जो क्वेश्चंस के आंसर सोचो प्रभु
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आपकी वीडियो मिलती है साथ में आंसर्स मिल जाते हैं। थैंक यू प्रभु। बहुत-बहुत कृपा
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आपकी। लव यू प्रभु। जय श्री कृष्णा प्रभु। लव यू। लव यू। थैंक यू। सॉरी फॉर ऑल
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मिस्टेक्स प्रभु। लव यू। जय श्री कृष्णा।
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बहुत सारा प्रेम। जय श्री कृष्णा। श्री कृष्णा। प्रणाम।
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थैंक यू
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प्रणाम मैं लास्ट दिसंबर में सेलवा से आया था
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आपसे मिला था जी
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वो दरिया पर जाना है लेकिन लेफ्ट साइड से इसी वजह से नहीं आ सकता
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हम उसी सिलवासा किया हर रोज सुनता हूं। ध्यान
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करता हूं। प्रणाम
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आपको यहां आने का आवश्यकता नहीं है। गरिया बनो। आपको बैठे बिठाए सब वहीं घट जाएगा। जो जिसको भी घटना कहो जो भी बोलो। ठीक है?
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निश्चिंत रहो। बस निरंतर सत्संग सुनते रहो।
1:17:10
सब संभव हो जाएगा। आज प्रेम प्रणाम
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हम और आप सबको आना है मेरे पास। वहीं नहीं बैठे रहना है। हां।
1:17:40
इतनी दूरियां अच्छी बात नहीं है भाई। है ना?
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प्रेम प्रणाम प्रभु श्री प्रेम प्रणाम
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प्रभु श्री मैं काफी देर से कोशिश कर रही थी आपसे बात करने की मैंने पर मेरी हिम्मत नहीं हो पा रही थी मैं
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बार-बार हाथ वहां तक ले जाती थी और पीछे हटा लेती थी बिकॉज़ मैंने दो बार आपसे पहले बात की है बट ऐसे कभी कैमरा में फेस टू
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फेस बात नहीं की है प्रभु श्री मेरे पास कुछ नहीं है प्रभु श्री पूछने के लिए और सिर्फ और सिर्फ कोई क्वेश्चन नहीं
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है मेरे पास कुछ नहीं है बट मेरे पास असीम अहो है प्रभु श्री मैं कैसे आपका धन्यवाद
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करूं मैं नहीं बता सकती प्रभु श्री एक एक शब्द आपका मेरी आत्मा में अमृत के
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समान जाता है प्रभु श्री मुझे नहीं पता कि मैं कैसे आपका थैंक यू कर पाऊंगी प्रभु
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श्री थैंक यू थैंक यू सो मच प्रभु श्री बहुत थैंक यू हां आपका नाम क्या है?
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मेरा नाम गुरजीत है। प्रभु श्री गुरुप्रीत नहीं गुरजीत
1:19:17
नहीं बहुत सुंदर है। मैं ओके ओके
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बहुत सुंदर आनंद में रहें। आत्मनस्टिक रहे और जो मैं
1:19:34
बोल रहा हूं वही आप सुन रही हैं। यह बहुत आनंद की बात है। हां जी
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थैंक यू। जो बोल रहा हूं आप वही सुन रही है तभी इतना हो
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थैंक यू प्रभु श्री आज प्रणाम है जी
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प्रणाम प्रभु श्री प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
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तो अब वाणी को विश्राम दें अगर आप लोगों की आज्ञा हो तो
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और नहीं है तो हम रुक जाएंगे नो रुक जाइए प्रभु
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यस रुक जाइए नो ओके जी
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ऐसा बोला करो ना तो हम रुक जाएंगे। हमको कौन सा अभी काम है?
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प्रणाम इस पर एक बोलना चाहती हूं कि हम सबको जब
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तक आपकी आंख हम बूंद बूंद जल आ जाए तब तक आप
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जब तक एक बार फिर से कहिए आप जब तक आपकी आंच में बूंद बूंद हम जल ना
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जाए जब तक आपकी धुन में हम मर ना जाए हम जी ना जाए तब तक आप यहां
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रहेंगे ओके
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ठीक है मिटा ही देते हैं
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तो कितना आनंद है मिट जाने में
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खो जाने में
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किसी के भी प्यार में खो जाने में कितना आनंद है। क्योंकि हर कोई परमात्मा है।
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तो ज्ञानी हो जाना चाहता है और प्रेमी खो जाना चाहता है।
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ज्ञानी को होने में बहुत समय लगता है। अपने होने
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में स्थिर होने के लिए बहुत समय लगता है।
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और प्रेमी एक क्षण में खो जाता है। मिट जाता है।
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वह सोचता ही नहीं है। छलांग लगा लेता है।
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तो कितना आनंद है खो जाने में। मिट जाने में।
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कितना आनंद है।
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यस एनीबडी है क्या कोई
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हम हां जनक जी उनकी आवाज ही नहीं आ रही है।
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प्रणाम प्रभु प्रणाम जनक जी
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सब ठीक हो
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पर वो एक बात बता रही थी वो हसा
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मान्यता के ऊपर बोल रहे थे ना परसों की बात है हम
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तो मान्यता का दायरा
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मान्यता का दायरा आगे क्या बोल रहे हैं आप कहां तक है जी हां कैरे
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जहां तक मैं हूं वहां तक मान्यता
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मैं हूं इट मींस मैं मायापति जहांजहां मैं हूं वहांवहां मान्यता है
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वहीं वहीं माया है। जहां मायापति है, वहीं-वहीं माया भी।
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तो, मैं अनलिमिटेड हूं तो मेरी माया भी अनलिमिटेड है। कोई दायरा नहीं है उसका।
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क्योंकि मैं ही माया बनता हूं। मैं ही माया बनता हूं। कोई दूसरा माया
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नहीं बनता। भगवान मैं आत्मा भगवान ही माया बनते हैं।
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इसलिए निश्चिंत रहो। जिसको आप माया समझ रहे हो वो भगवान ही है।
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मैं ही हूं। ठीक है।
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ठीक है। प्रभु ठीक है। बहुत हां जरा।
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प्रणाम प्रणाम प्रणाम
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम जी मैं प्रशांत बात कर रहा हूं महाराष्ट्र
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से हां प्रशांत जी आपके साथ गुजरे हुए चार दिन बहुत अद्भुत
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रहे और अच्छा मतलब क्या बताएं वो इतना
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अद्भुत समय था और ऐसी यादें थी और आपका संग आपका माहौल आपका दर्शन
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आपका यज्ञ आपके साथ यज्ञ करने का वो सब मतलब
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चीजें इतनी आपकी आरती आपका होना और आपकी वो बातें मतलब वो
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बहुत धन्यवाद सब हावभाव है कि अगर मैं वो चार दिन मिस हो जाता तो ऐसा लगता कि यार
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लाइफ में कुछ मिस हो जाता मेरा और ऐसा नहीं हुआ और जो आखरी सत्संग था मेरी
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ट्रेन 10:55 की थी और वो ट्रेन हो गई 5 बजे थी और मैंने वो सत्संग सुना जो सुबह
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का 25 तारीख का सत्संग था सब अद्भुत था इतना
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शब्दों में कुछ था ही नहीं बताने और ट्रेन ने भी लेट किया और उसने भी दिया
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ऐसा लगा कि ये सत्संग अगर नहीं सुनता तो कुछ और बहुत मिस हो जाता ऐसा लगा और एक
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घंटा एक घंटा आपके साथ बिताने का और जब वो जा रहा था तो बाद में ऐसा बता दिया कि जोत
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जी ने अरे रुको प्रभु जी जाएंगे ही पीछे और आएंगे ही अभी घर तो निकलने
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तो मैं रहा देखा बाहर भी देखा प्रभु जी आएंगे और मेरी गाड़ी गरियाबंद तक ऑटो जाने
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तक तो मैं इतना लगा रहा था कि कब गाड़ी आएगी और कब मुझे
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वो साष्टांग दंडवत भले बीच रास्ते में करने को मिले और तो वो कब मिलेगा समय वो
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मैं गाड़ी उतरते तक मेरा वो नजर नहीं हो रहा था बार-बार पीछे देखना होगा
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ये प्रेम है आपका है ना जब आया तो आप बैठे थे डेस्क पर बैठे थे और
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बोले कि जाओ आरती करो पर आरती के लिए मन ही नहीं हो रहा था जा के पहले यार दर्शन नहीं है यार सत्संग नहीं है और आरती कहां
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करूं और क्या करूं? मुझे लगा पहले आपके प्रेम में हो सुनो तो सुनो सुनो सुनो है ना
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यह प्रेम है आपका है ना भाव है
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सबका बहुत धन्यवाद है उस समय उस दिन मैं फिर से जीना चाहूंगा और मुझे तो ऐसा लगता
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है कि वहां ही शिफ्ट हो जाऊं पर जो भी है चीजें जो भी बैक में तो उसकी वजह से नहीं तो मैं ऐसा कि पूरा लाइफ भी उधर सेटिंग हो
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जाऊं ऐसा है वो एक अद्भुत ऐसा अगर माहौल मिल रहा है और उसको छोड़ के इतना मिस करूं ये मुझे तो नहीं होता पर अभी वैसी
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पॉसिबिलिटी नहीं है तो चुप बैठा हूं वरना ऐसा है कि सब इधर का बैकअप एंड कर दूं और
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उधर ही आ जाऊं ठीक है। जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेना है। है ना?
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और मेरे प्रेम को या आपके प्रेम को यह दूरियां रोक सकती नहीं है। इसलिए निश्चिंत रहो।
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ठीक है। प्रणाम जी।
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तो हमेशा याद रखना कि बहता हुआ निरंतर बहता हुआ प्रेम ही परमात्मा है।
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बस हमेशा अपने प्रेम को बहने देना। आपका प्रेम बहता रहे।
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कहीं रुके मत बहता ही रहे।
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अनंत तक
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निरंतर बहता हुआ प्रेम ही परमात्मा है। प्रभु है। परमात्मा को आपके ज्ञान से कोई मतलब नहीं
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है। आप क्या जानते हो? क्या समझते हो उसको कोई मतलब नहीं है उससे।
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परमात्मा केवल प्रेम का भूखा होता है। हम भी प्रेम के भूखे हैं। परमात्मा भी
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प्रेम का भूखा है और उसको कुछ नहीं चाहिए। और
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और आप भी प्रेम के भूखे हो।
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सभी को प्रेम प्रणाम।