Prabhu Shree
0:01
प्रणाम जी साक्षी बोल रही हूं भगवन आजमगढ़ से मैं
0:08
आपको छ महीने से सुन रही हूं और भगवान सुनने के बाद जीवन में इतना परिवर्तन
0:16
एक अलग सुकून और अपने होने का ऐसा हर पल
0:26
हो और बहुत परिवर्तन अपने जीवन में मतलब जो पहले जीती थी अब के जीने में हर चीज करती हूं।
0:35
उसमें अपने होने का और अपने ऊपर अपने आप को और हल्का पारती हूं। जैसे कि एक हवा की
0:44
तरह बहाव की तरह बह रही हूं। आनंद महसूस हो रहा है भगवन मैं। मैं आपके
0:54
पास आना चाहती हूं। अच्छा
1:00
मैं अभी मतलब एक गांव में रहती हूं में थोड़ा सा एक छोटा बच्चा है उसकी वजह
1:07
से लेकिन फिर भी भगवान मैं दर्शन करना चाहती हूं मैं आ सकूं और मेरा जीवन में बहुत
1:16
परिवर्तन इतना आनंद इतना अहो हर एक चीज के प्रति मतलब आसमान को देखना
1:25
धर् हर चीज इसके लिए धन्यवाद कि जीवन ऐसे चुटकी में बदल गया एक नई हो गई
1:36
बहुत-बहुत धन्यवाद परमात्मा बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु इतना अद्भुत जीवन देने के
1:42
लिए परिवर्तन करने के लिए भगवन बस आपसे जुड़ी रहूं और इस जीवन को और आनंद से जियो
1:52
अच्छा नहीं बहुत सुंदर है यह अहो भाव।
2:00
जिसके जीवन में अहो है उसको कभी भी परमात्मा छोड़ेगा नहीं। हमेशा मेरी इस बात
2:08
को याद रखना। हमेशा होभाव में जीना
2:15
मेरे प्रति का सवाल नहीं है। अस्तित्व के प्रति स्वयं के प्रति
2:23
प्रकृति के प्रति बस एक अहो हमेशा अपने जीवन में अहोभाव रखना है ना
2:32
उससे निरंतर कल्याण होता रहता है। बहुत अच्छा है।
2:40
पहले मैं सोचती थी कि भगवान का धन्यवाद मतलब ये ऊपर से करती थी सुनती थी और करती थी। आज की अवस्था और स्थिति ऐसी है कि ना
2:50
सोचना है ना करना है वो ऑटोमेटिक बहा जा रहा है। वो चल ही रहा है। वो सोच नहीं है।
2:57
वो एक जीवन हो गया है प्रभु। हां।
3:05
सत्य है। बहुत सुंदर अनुभव है यह।
3:14
जो भी पेशेंस से सुनेगा ना मेरे को उसके जीवन में सब अपने आप आ जाएगा। थोड़ा
3:21
पेशेंस से सुनो। सुनना बस तो है।
3:30
आ ही जाता है बाकी सब।
3:41
प्रणाम है आपको आपका दर्शन आती हूं दर्शन
3:53
हां आइए मोस्ट वेलकम है आप आ सकते हैं यहां आज
4:05
यार चाय तो पिला दो सौरभ जी कैसा कर रहे हो यार बगैर चाय के हम कैसे
4:12
जिएंगे हम
4:35
यस
4:53
हम हम हेलो आज
5:20
हम जी बताइए हेलो हेलो हां बताइए आपकी वॉइस आ रही है?
5:30
नमस्ते प्रभु जी नमस्कारम मैं रश्मि बोल रही थी नोएडा से
5:39
रश्मि जी आपका चेहरा नहीं दिख रहा है प्रभु जी वो मैं कोशिश कर रही हूं पर मेरे को कैमरा ऑन हो नहीं पा रहा है पता नहीं
5:48
पता नहीं ओके ओके बताइए तो हम आपको सुन रहे हैं लगातार मनु काफी
5:57
आपके प्रति कुछ होता है कि हम आपको सुनते जाए सुनते जाए ऐसा फील आता है तो कभी-कभी
6:04
मन में वो समर्पण भाव का विचार वो आता है तो समझ नहीं आता कि
6:11
समर्पण हम किस प्रकार कर सकते हैं तो आप कृपया हमें प्लीज गाइड कर सकते हैं थोड़ा
6:19
नहीं नहीं समर्पण करना नहीं है जी वो
6:27
वो नेचुरल सुनते सुनते सुनते आप उस जगह आ जाते हैं जब आप समर्पित हो जाते हैं।
6:36
उसको करना नहीं है। उसको समय देना है। वो अपने टाइम पर आएगा। हम
6:42
बहुत धन्य भागी होते हैं जिनको समर्पण आ जाता है। जिनके जीवन में
6:51
अर्जुन को भी 18 अध्याय लग गए। समर्पित होने के लिए जी
6:59
तो वहां जल्दबाजी मत करो। आ जाए तो अच्छी बात ना आए तो कोई बात नहीं। उसको आने दो। है ना?
7:10
जी जब सच आंखों के सामने दिखेगा, परमात्मा
7:16
आंखों के सामने प्रकट रहेगा। आपके होने में भी तो अपने आप वह पल आ जाता
7:25
है समर्पण का। तब आपका जीव भाव और देह मन सब समर्पित हो जाते हैं। है ना?
7:36
जी हां रश्मि जी। इसमें जल्दबाजी नहीं करना। जी
7:43
अच्छे से अच्छे से गुरु को परख लेना। वैसे एग्री नहीं हो जाना। किसी से भी मेरे
7:51
से भी नहीं। पर हमको तो परखना नहीं आता है प्रभु जी आपको मतलब हम कैसे परख सकते हैं हमें तो
7:59
वो क्षमता नहीं है परखने का फिर भी अंतर्यामी बताता है ना गाइड करता
8:07
है अंतर्यामी जी जी प्रभु जी गुरु बहुत सोच समझ के ही बनाना चाहिए
8:16
जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए बहुत खतरनाक चीज है क्योंकि
8:22
गुरु अगर रॉन्ग मिल गया या थोड़ा भी कम रेंज वाला मिल गया
8:31
आपकी जिंदगी अलग ट्रैक में चली जाएगी तो
8:40
थोड़ा धैर्य रखो है ना जी जी हां जी धन्यवाद प्रभु जी धन्यवाद प्रभु जी
8:49
हां मैं सबको कहना चाहूंगा कि जल्दबाजी नहीं करना है ना मेरे प्रति भी
8:56
जल्दबाजी नहीं करना थोड़ा मेरे को चेक तो कर लो मेरा थोड़ा मेरी परीक्षा वगैरह तो ले लो एकदम से
9:05
एकदम से मेरे से एग्री मत हो जाओ पर वो कनेक्शन तो आप अपने आप हो रहा है तो कोई चेक करने का तो बात ही नहीं अंदर अंदर
9:14
के जो है वो हमें बता रहा है कि मतलब वो हमारी जर्नी में आपको ले आए तो फिर हम
9:21
क्या कर सकते हैं? आप ही है फिर हमारे लिए हां अंतर्यामी बता रहा है तो वो कभी गलत
9:28
नहीं बताता है ना हां जी हां अभी बह चलो ओके
9:36
और देर अवेर समर्पण हो जाएगा है ना जी जी हां जी
9:44
थैंक यू प्रभु जी प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
9:56
हम
10:07
प्रेम प्रणाम गुरु जी प्रेम प्रणाम सच में आप
10:16
परमात्मा बनाने वाले फैक्ट्री के मालिक हैं प्रभु हम कुछ समय से आपको सुन रहे हैं और सुनते
10:23
सुनते ऐसा लग रहा है कि सच में मैं ही हूं।
10:28
इतना अद्भुत लग रहा है कि जैसे क्या बताएं अब बहुत भाव उठता है आपके लिए कि ऐसी समझ
10:38
समझ दिए हैं आप प्रभु कि सुनते सुनते मात्र
10:46
अच्छा सच में शुरू से लेकर के लास्ट तक जो इस प्रवचन को सुनेगा वो गहरे में डूब
10:53
जाएगा कब बात प्रवेश कर जा रही है ये अद्भुत हो रहा है।
11:01
आज यह भी सत्य है कि
11:08
कोई भी मेरे सत्संग को निष्पक्ष होकर भी सुने और
11:14
उसको यह प्रकट लास्ट तक धैर्यपूर्ण सुने तो यह प्रकट हो जाएगा। उसका होना जो
11:20
परमात्मा है अस्तित्व है वह निश्चित प्रकट हो जाएगा।
11:27
हो ही जाएगा। 100% हो ही जा रहा है। हो ही जा रहा है। यस
11:36
बट धैर्य पूर्ण थोड़ा अंतिम तक सुनो। कुछ महीने सुनो
11:42
तो वो प्रकट हो जाएगा। अच्छा एक अनुभव और होता है कि एक प्रवचन
11:50
को भी अगर दिन भर सुन रहे हैं और उसी को जी रहे हैं तो बड़ा अद्भुत होता है। कई ठो सूंघते जा रहे हैं तो थोड़ा सा उसमें
11:58
गोलमाल हो रहा है। लेकिन एक को सुनते चले जाइए आप और उसी को दिन भर अगर सूंघ करके
12:04
जी रहे हैं तो वाह क्या बात है। हां तो वो बेस्ट है।
12:14
वो बेस्ट है। एक को पूर्णतः जियो जो भी एक आपको प्रिय लगता है ना उसको अपना पूरा
12:21
जीवन बना लो। हर एक प्रवचन सत्संग कंप्लीट है।
12:28
वह आपको कंप्लीट कर ही देगा। कोई रोक ही नहीं सकता। कोई रोक ही नहीं सकता। और जो
12:35
भी सुनेगा इसको दिलगी से उसको मैं हूं का बोध हो जाएगा।
12:43
यस। तो आपका नाम क्या है? मुरली मनोहर। मनोहर लोग कहते हैं हमको।
12:52
आज मनोहर जी जी और हमको आपके पास आना है जून में आएंगे
12:59
प्रभु आज मोस्ट वेलकम हैस
13:07
और हमारे कुछ लोग भी हैं जो हम लोग मिलकर के ऐसे बातचीत करते हैं तो सबको आपके लिए
13:14
ही आपका लिंक भी देते हैं और ऐसे लोग सुनते भी रहते हैं और आप ही की चर्चा
13:20
चर्चा आप ही का सब कुछ होते रहता है और एक लोग गए भी थे आपके यहां एक मां गई थी उनको
13:30
हम ही दिए मतलब कि लिंक दिए थे और बातचीत हुई थी वैशाली मां मेरठ की है वो गई थी आपके पास
13:39
हम तो तो सबको मेरा प्रेम प्रणाम कहिएगा है ना
13:48
अरे रे भग प्रणाम प्रणाम
14:11
देखो क्या असर है। सुन कोई ईमानदारी से सुन रहा है और उसको प्रकट ना हो यह संभव
14:19
ही नहीं है यार असंभव
14:26
और बस सुनना है
14:35
तो अच्छा लगा मनोहर जी से बात करके ऐसे दीवाने चाहिए सुन सुनने वाले ऑनेस्टी
14:44
से सुनने वाले
14:58
तो सुनते सुनते आपको राइट लिसनिंग आ जाएगी और
15:07
शुरू में लगेगा कि कोई टेक्नोलॉजी जी से बोल रहा है। बाद में
15:14
आपको लगेगा कि यह तो मेरा अंतर्यामी ही बोल रहा है।
15:22
यानी यहां से बोलने वाला उधर सुनने वाला हो जाता है।
15:30
तो जब मैं आपके भीतर से सुनने लगता हूं
15:36
तो मैं मैं हो जाता हूं। और मैं अपने आप को करेक्ट कर ही लूंगा।
15:45
कोई मैटर ही नहीं है।
15:58
हां जी। प्रेम प्रणाम प्रभु जी।
16:04
प्रेम प्रणाम। हेलो प्रभु जी आज बहुत अंदर से दिल उदास हो रहा है।
16:13
हां आपके पास आने का था 11 तारीख को निकलने का था यहां जयपुर से बट पॉसिबल हो पाया और
16:21
पहले भी दो-तीन बार ऐसे प्रोग्राम बनाए आने का बट नहीं हो पाया तो बहुत दिल में उदासी सी आ जाती है। आपसे मिलने की बहुत
16:30
प्यास है। नहीं उदास मत हो फिर कभी बना लेना
16:36
प्रोग्राम बन जाएगा कोई बड़ी बात नहीं है उदास क्या होना है ना
16:47
निश्चिंत रहो कैसे मन में आता है आपने तो पिछली बार जब बात करी थी तो हमको साहस ही दिया था बट
16:56
ऐसे लगता है कि क्या हम कायर है जो हम नहीं बात में आ पा रहे हैं आपके शरण नहीं
17:04
मैं मैं छेड़ता हूं थोड़ा सा कि तुम सब कायर
17:10
हो मेरे को टेक्नोलॉजी में ही सुन रहे हो मैं छेड़ता रहता हूं बीच-बीच में ताकि तुम
17:18
हटो अपनी जगह से हटो जहां जम के बैठ गए हो ना उसी को तुम दुनिया समझ रहे हो और वही
17:27
सच समझ रहे हो ताकि आप वहां से थोड़ा हटो है ना
17:36
प्रभु जी आप देखो कायर कोई नहीं है। असल में ना प्रेम ही नहीं हुआ है ना प्रेम
17:46
होता है ना आदमी को बोलना पड़ता ही नहीं है। वो मेरे पास ही होता है।
17:54
बात प्रेम की है और जैसे ही प्रेम हो गया ना मेरे से
18:00
तो यह सब बोलने की जरूरत ही नहीं पड़ती। फिर आप वहां हो तब भी मेरे पास हो
18:10
और यहां हो तब भी मेरे पास हो। सर प्रभु जी साकार प्रभु के दर्शन की मन
18:17
में जास होती है हां बना लो प्रोग्राम बन जाएगा
18:26
निश्चिंत रहो उदास नहीं होना ठीक है आज ऐसे ही दिल में हो रही थी उदासी तभी
18:33
मैंने कहा आपसे बात करूं बहुत टाइम से बात करना चाह रही थी आपसे डायरेक्ट और एक आपकी वो बात मुझे बहुत अच्छी लगी जो आपने बताया
18:42
कि गुरु नानक देव गुरु जी ने उनके सर पे फूल रख दिया मतलब दूध के ऊपर फूल रख दिया तिनका रख दिया जो आपने बात बताई
18:51
मुझे सपने में भी बहुत टच करी उस दिन जिस दिन मैंने सुना था तीन दिन पहले जी आज
19:01
बस अपना ख्याल रखें स्वयं में निष्ठा रखें है ना
19:08
आज और श्रद्धा रखें स्वयं पे कि सब मंगल ही होगा, कल्याण ही होगा
19:16
और एक अहो भाव में जियो इस जीवन को क्योंकि सब सुंदर ही है। प्रभु ही है। है ना?
19:26
ठीक है। प्रणाम प्रणाम प्रणाम। प्रेम प्रणाम। अब पानी देना तो
19:37
यस प्रणाम गुरु जी। प्रणाम गुरु हां प्रणाम
19:46
हां मेरा नाम प्रियांंशु हैशु है और मैं उस बंगाल से हूं और आज हमारी आज न्यू ईयर है इसलिए गुरु जी आपको आप बंगाली न्यू ईयर
19:55
के शुभकामना देने आया था सुबह नव वर्ष कहते हैं बंगाली पे मतलब हैप्पी न्यू ईयर वही बस बोलना था आपको
20:02
आपका बधाई आपको भी हो और आपका चेहरा नहीं दिख रहा है गुरु जी आपसे बहुत बार टेलीग्राम पे भी
20:10
बात हुआ है। दो-तीन महीने से भी बात करता आता हूं मैं आपके साथ। नहीं आपका फेस नहीं दिख रहा है।
20:18
गुरुजी मैंने कैमरा बंद करके रखा है। ओके ठीक है।
20:26
हां गुरुजी। बस आपसे बात करता हूं। अच्छा लगता है। एक बड़े भैया जैसा लगते हो आप। बहुत ज्यादा
20:33
बॉन्ड हो गया है आपके। एक साल से आपका वीडियो देखता आता हूं मैं। बहुत अच्छा लगता है। ओसो जी का भी देखता था। आपका भी देखता हूं। कुछ अलग लगता ही नहीं है आप
20:41
लोगों में। हां, अलग है भी नहीं। हां। और आपकी बातें सुनके ऐसा लगता है कि
20:49
मेरे अंदर से कोई कुछ बोर है। मतलब कुछ अलग है ही नहीं। एकदम सब कनेक्टेड लगता है।
20:56
हां जी। सही लग रहा है आपको। है ना? अपना ख्याल रखें। हां जी। हां जी।
21:05
अपने पे निष्ठा रखें। है ना? प्रणाम है आपको। जी हां जी धन्यवाद गुरु जी
21:12
धन्यवाद हां जी
21:31
हम हम हम हम हम
21:52
मलंग जी कुछ कहना चाह रहे हैं तो आप कह सकते हैं यहां पर भी जो आप बैठे हो आप कह
22:01
सकते हो या पूछना है पूछ सकते हो।
22:34
यस एनीबडी कोई है
22:42
प्रणाम प्रभु जी प्रणाम जी प्रणाम कैसे हैं प्रभु जी
22:52
हम आनंद में हैं आप बताइए आप कैसे हो बस हम भी आनंद में हो ही रहे हैं प्रभु जी
22:59
धीरे-धीरे करके मतलब ऐसा बोल सकते हैं कि डेली बॉस पे मतलब प्रोग्रेस ही हो रही है
23:06
हां हां हां जी क्या नाम है आपका? पंकज पंकज
23:13
पंकज जी यस हमेशा ख्याल रखें कि आनंद आपका स्वभाव है।
23:24
है ना आप हो यही आनंद है।
23:30
और जो आनंद मिलता है और चला जाता है वो विषयंद है। है ना?
23:38
जी किसी भी चीज से जो आनंद मिलता है साधना से, ध्यान से, विषय भोगों से,
23:48
समाधि से और वह आनंद चला जाता है। यानी वह विषयनंद है।
23:59
वह असली आनंद नहीं है। आत्मा का आनंद नहीं है। नित्यानंद नहीं है।
24:08
ठीक है। ठीक है प्रभु जी। ठीक है प्रभु। धन्यवाद। और आनंद असली जो है
24:17
आप हो वही आनंद है। और एक बात मैं करेक्ट कर दूं।
24:39
सच्चाइयां बहुत गहरी और खतरनाक होती हैं। बट सच तो सच है। है ना?
24:52
सत्संग से भी जो आनंद मिलता है और चला जाता है। अगर वह आनंद चले गया
25:00
तो समझ जाना वह भी विषयनंद है। नित्यानंद नहीं है। सत्संग का लक्ष्य
25:09
नित्यानंद है। अगर एक्चुअल स्वयं में आपको निष्ठा हुई तो
25:19
स्वयं नित्य है और स्वयं ही आनंद है। है ना?
25:28
ठीक है पंकज जी ठीक है प्रभु जी प्रणाम प्रभु जी प्रणाम प्रणाम जी
25:39
तो अभी आनंद आ रहा होगा सत्संग में या जब भी सुनते हो फिर अगर वह चले जा रहा है तो
25:46
वह भी विषयनंद है। हां लेकिन सत्संग का टारगेट नित्यानंद है।
25:55
आपकी बींग है ना?
26:04
मैं आपको डिपेंड नहीं बनाना चाहता किसी पे भी। सत्संग पे भी नहीं बनाना चाहता।
26:11
बट फिर भी सत्संग मत छोड़ देना। जल्दबाजी मत करना। क्योंकि यह बात भी सत्संग से ही पता चली
26:19
ना कि सत्संग भी विषयनंद है।
26:26
लेकिन अगर रियल में मेरे को सुन रहे हो तो नित्यानंद में आ जाओगे। मेरा सत्संग
26:33
नित्यानंद का ही है स्वयं का। ठीक है।
26:42
कठोर सत्य थोड़े से
26:52
प्रभु प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
26:58
सीमा बात कर रही हूं पुणे से हां सीमा जी कैसे हो
27:05
बस बढ़िया प्रभु मस्त मजे में आनंद में है हम
27:12
अहो अहो व्यक्त करना था। करियाब से आए हुए। हालांकि 15 20 दिन ही हुए हैं। शरीर
27:21
से तो हम इधर है बट मन से आपके ही पास है। अभी भी आपने इतना प्रेम, इतना प्यार, इतना प्यार
27:31
दिया है ना कि हम संभल नहीं पा रहे उस प्रेम को। और हमारी हालत भी ऐसी है कि हम
27:39
तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे हैं। बहुत मस्ती बहुत आनंद में है। गरियाबंद
27:47
में आने जब आई थी तब आपने बोला था आपकी जो भी पीड़ा है जो भी है आप मुझे बोल दीजिएगा। तो अगर आपको याद होगा तो मैंने
27:56
आपसे बात की थी। हम याद वहां से वहां से आने के बाद मैं इतनी
28:04
निश्चिंत इतनी बेपरवाह हो गई हो गई हूं कि मुझे कहीं कोई दुनिया कहीं संसार दिखाई नहीं दे रहा
28:13
बहुत आनंद में हूं बहुत आनंद में हूं प्रभु और आपकी एक सत्संग की लाइन भी हमेशा
28:19
याद आती है मुझे वो हो के बेपरवाह या परवाह करना जुर्म है तो जब भी परवाह मन
28:26
में आती है तो ऐसा लगता मैं जुर्म कर रही हूं। अहो ही अहो है प्रभु अहो ही अहो आपका
28:36
कोटि-कोटि धन्यवाद। कोटि-कोटि प्रणाम आपको प्रणाम सीमा जी
28:45
बस अहो भाव में जियो है और
28:57
बात समस्याओं की नहीं होती। बात सत्य की होती है।
29:07
समस्याओं में उतना दम होता ही नहीं है।
29:20
और सही जा रहे हो आप बहुत सुंदर
29:32
मेरे को पता नहीं यार कुछ आता ही नहीं है। आपने बोला प्रेम मिला बहुत ये वो मेरे को
29:40
बस प्रेम ही आता है और कुछ आता ही नहीं है। मैं तो जी भर के कोई भी आता है उसको प्रेम
29:49
करता हूं और उसका परमात्मा खुद ब खुद प्रकट हो जाता है।
29:56
उसको भी एहसास होने लगता है।
30:04
और मेरे को कुछ आता ही नहीं है।
30:13
और यह ज्ञान-यान तो आप लोगों से जुड़े रहने के लिए है ताकि थोड़ा जुड़ा रहूं। और क्या?
30:21
थोड़ी बातें चलती रहे।
30:40
ज्ञान और वैराग्य भागवत शुरू होती है ना तो ज्ञान और वैराग्य बूढ़े हो जाते हैं। है ना?
30:51
तो जब वो भक्ति की गोद में सोते हैं तो पुनः जवान हो जाते हैं।
31:02
तो ज्ञान और वैराग्य बगैर प्रेम के वह फिर
31:09
बूढ़े हैं। मरुस्थल जैसा कुछ है। बस चीजें करेक्ट है,
31:19
कैलकुलेटिंग है। सब ठीक है। बट लाइक ए मरुस्थल
31:31
तो बगैर भक्ति के रस के
31:37
ज्ञान में भी पूर्णता नहीं होती।
31:48
तो आपके होने में ज्ञान भी है, प्रेम भी है, परमात्मा भी है, तब आप कंप्लीट हो।
31:56
खाली प्रेम ही प्रेम नहीं है। ज्ञान भी है। खाली ज्ञान ही ज्ञान नहीं है। प्रेम भी है।
32:08
तो इन सब का एक परफेक्ट कॉम्बी हो आप। ज्ञान का, प्रेम का, शांति का, आनंद का,
32:18
परमात्मा का। एक परफेक्ट कॉम भी हो आप
32:24
और बहुत खुशी की बात यह है कि आप सहज में हो।
32:31
ऐसा है ही। यह अकाट्य सत्य है।
32:39
इसके अलावा आप कुछ और हो ही नहीं सकते।
32:47
हो ही नहीं सकते।
32:56
तो जो तुम हो ना बस वही
33:05
वही परफेक्ट कॉम्बी है अस्तित्व का प्रभु का सत्य का प्रेम का रस का
33:17
परफेक्ट कॉम्बि भी नेचुरल
33:25
बस जो तुम हो तुम हो ना
33:33
तुम अरे तुम
33:41
बस वही बस वही
34:08
आज यस कोई एनीबडी
34:19
थैंक यू। क्या चाय पिलाया?
34:31
आई ला हम
35:01
प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
35:12
प्रभु जी उस दिन बात हुई थी आपसे तो उस दिन गाड़ी चला रहा था तो हम
35:20
क्या नाम है आपका पलविंदर जी पलविंदर सिंह पलविंदर हां जी हां जी
35:30
हां पलविंदर जी कैसे हो क्या चल रहा है स्वयं में बहुत ही
35:41
अभी मैं आपका का सत्संग सुन रहा सुन रहा था तो अचानक
35:51
हृदय में एक वो
35:58
अच्छा लग रहा था प्रभु जी जैसे कोई कनेक्शन
36:04
कोई जब आपने कहा तुमसे बात कर रहा हूं तो
36:12
अच्छा लग रहा था गुरु जी मैं तो
36:27
आप यकीन मानोगे कि मेरी सारी देशना जी
36:35
कुछ और है ही नहीं। मैं बस आपको ही बता रहा हूं और कुछ नहीं बता रहा हूं।
36:46
और कुछ नहीं बता रहा हूं। बस
36:52
मैं आपको ही बता रहा हूं। उसी को कोई परमात्मा कहता है। कोई
36:59
अस्तित्व, कोई राम, कोई कृष्ण, कोई गुरु नानक,
37:05
कोई सत्य, कोई ज्ञान, कोई भक्ति।
37:11
बट मैं तुमको ही बता रहा हूं।
37:17
बस जो तुम हो। बस तुम
37:29
वहां कोई दुनिया है ही नहीं।
37:34
ना कोई बॉडी है ना माइंड है बस तुम हो।
37:41
जिसको आप कहते हो मैं हूं। मैं और कुछ बता ही नहीं रहा हूं। मेरे लिए
37:51
सबसे आसान है यह सत्संग कराना। कोई कहीं पे भी उलसता है। मेरे को यह प्रॉब्लम है, वो है, ऐसा है,
38:04
वैसा है। मैं तुरंत उसको उसी में ले आता हूं।
38:12
कितना इजी है क्योंकि आप ही हो और कुछ नहीं है।
38:22
और मैं और एक हकीकत बताऊं तो और कुछ
38:30
कभी भी हुआ ही नहीं है।
38:39
आपके अतिरिक्त और कुछ कभी भी हुआ ही नहीं।
38:48
इसलिए निश्चिंत रहो। एकदम निश्चिंत
39:00
बेफिक्र निश्चिंत मतलब आप ऐसे करोड़ों जन्म ले लो,
39:10
देवता बन जाओ, पशु पक्षी बन जाओ, मनुष्य बन जाओ,
39:16
कुछ भी बन जाओ। आप आप ही रहोगे।
39:23
उसको बदला जा ही नहीं सकता।
39:35
बस जो तुम हो बस जो तुम हो
39:46
वही यस
39:56
ठीक है रखें आत्मनस्थिक रहें प्रेम प्रणाम
40:29
हम हम आप लोग कैसे खामोश हो गए हो यार कुछ बताते
40:39
क्यों नहीं हम्म हम
41:00
मतलब बहुत आश्चर्य की बात है कि मैं तुमको ही बता रहा हूं बस आ
41:08
और मैं जिंदगी भर बता सकता हूं। मेरे को दिक्कत ही नहीं है।
41:17
इतना सरल है, सहज है,
41:22
आनंद है। और आपकी ख्वाहिशें क्या रहती है मालूम कि आप कुछ और बताओ। कोई अदर परमात्मा,
41:32
कोई अदर इनलाइटनमेंट,
41:34
कोई अदर कुछ मैजिकल कुछ अलग सा कुछ एक्साइटेड
41:43
ना मेरे को इंटरेस्ट ही नहीं है बाकी चीजों
41:50
क्योंकि बाकी सब फॉल्स है मेरा इंटरेस्ट तुम में है तुम्हारे होने
41:58
में जो मेरा ही होना है और बाकी सब
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कहने योग्य भी नहीं है।
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हां लेकिन आप आप लोगों को कुछ और सुनना
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रहता है। यह आपकी मन की ख्वाहिशें रहती हैं।
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है ना? वह सब एक भ्रम है। अलर्ट। आई अलर्ट
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तुम्हारे अतिरिक्त सब कुछ केवल एकमात्र भ्रम है
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और भ्रम है और भ्रम यानी भीष्म
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भ्रम को वरदान मिला हुआ है।
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अमरता का भ्रम तभी जाएगा
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जब स्वयं में निष्ठा होगी कि यार सच में मेरे अलावा है क्या?
43:35
है क्या यार कौन सा कहीं भगवान दिख रहा है क्या कोई अस्तित्व
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कोई मैजिक कोई जादू टोने
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कोई शरीर मन कुछ है क्या तो सच में मैं ही तो हूं
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और है क्या तो ऐसे सुनते सुनते सुनते आपको निष्ठा हो
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जाती है स्वयं में क्योंकि बाकी चीजें निष्ठा के योग्य है ही नहीं
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आज तो कुछ सुनाओ यार अपनी सुनाओ हम तो आप ही
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की सुना रहे हैं जरा मुरमुरे दो यार प्रेम प्रणाम प्रभु जी
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प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
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एक बात इतनी शेयर करनी थी कि आपके कर्मा का एक वीडियो था जिसमें यह बात बहुत अच्छे
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से खुल के आई कि कोई भी काम अगर आप सोचते नहीं हो तो वो नारायण देश से ही होता है।
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मतलब जब हम उसमें अपने आप को डालते हैं या कुछ विचार डालते हैं तभी वो कुछ अलग बन जाता है। बाकी वो नारायण देश से ही होता
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है। तो ये बात इतनी मतलब छू गई ना क्योंकि मेरा पहले से ऐसा
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है कि मैं एक समय पे एक ही काम कर सकती हूं। पता नहीं ऐसा अभी सब लोग हंसते हैं मेरे पर मेरे से हो ही नहीं पाता है। मैं
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एक करती हूं तो वही और फिर तब मैं उसमें इतनी घुस जाती हूं कि मुझे फिर यह अपनी बातें ना मैं हूं वह भी याद नहीं आता है।
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तो मुझे बुरा लगता था कि यार मैं तो यह हर बार भूल रही हूं। तो सब भूल रही हूं। पर जब आपने यह बात बोली तो शायद ऐसा कुछ
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कनेक्शन हुआ कि भूलने का सवाल ही नहीं है। वो तो मैं ही कर रहा है। तो मुझे याद क्यों करना है मैं को? क्योंकि वो मैं ही
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कर रहा है। मैं प्रज्ञा तो कर ही नहीं सकती वो काम। वह परमात्मा ही कर रहा है तो
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मुझे अलग से उसे याद करने की जरूरत नहीं है। और यदि मैं अगर पूरी तरह अपना अपने आप
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को पूरी तरह उस काम में जुटा के कर रही हूं तो कोई दिक्कत का सवाल नहीं है। तो ये
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मुझे एक ऐसा समझ में आया। क्या सही है यह?
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हम हम क्योंकि उस समय मुझे कुछ भी याद नहीं आता है। मुझे मैं जो करती हूं मैं उसी में
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रहती हूं। फिर उसके वो होने के बाद अरे मुझे वह भी करना था। अरे वह भी करना था। ऐसा होता है। पर जब करती हूं तब उसी में
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रहती हूं। तो यह कुछ गलत है क्या समझ नहीं पा रही हूं।
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नहीं नहीं गलत नहीं है बट ऐसा संशय ऐसा डाउट नहीं आना चाहिए। है ना? असल में
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असल में स्वयं जो है ना सहज है और
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यह कर्ता कर्म और क्रिया का स्वयं में हमेशा अभाव रहता है।
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यस है ना यस यस सारे चराचर के सारे कर्म हर मनुष्य के हर
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जीव के नारायण देश स्वयं देश से ही होते रहते हैं।
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इस पर जिसकी निष्ठा है वही नारायण है।
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है ना? वही एक्चुअल मैं है जिसकी मैं बात कर रहा हूं। है ना
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और ये क्या है यार
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खलनायक हूं मैं हां सही तो है स्पिरिचुअल डॉन
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तो सब नारायण देश से ही चल रहा है। है ना?
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और चल रहा है। बोलना भी उचित नहीं है। मतलब मैं ही हूं ना फिर क्या चल रहा है?
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क्या नहीं चल रहा है? कुछ मायने ही नहीं रखता। है ना?
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी। प्रेम प्रणाम।
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मैं अरुणा बोल रही हूं जालंधर से। बहुत हां अरुणा
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बहुत तड़प थी प्रभु जी आपसे रूबरू होने की। आपका वचन हम मैं दो साल से सुन रही
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हूं। इतनी इतना अच्छा लगता है कि आपने हमें प्रभु से मिलने की तमन्ना थी। आपने प्रभु
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को मिली मिलाई चीज के दर्शन करा दिए हैं कि हर जगह वही है। गुरु जी मैं बहुत-बहुत
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शुक्राना करती हूं। आपके रहा ही नहीं जाता आपकी वो सुने बगैर कुछ भी दिन रात रात तो सारी इसी में बीच में नींद आ जाए तो आ
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जाए। मगर प्रभु जी मैं इसी में रहूं अपने आत्मनिष्ठ में पूरी तरह से आ जाऊं। यह
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आशीर्वाद से दे दीजिए। ऐसा ही होगा। है ना? निश्चिंत रहना।
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जी। अच्छा। और हमें कैसे रहना चाहिए ये थोड़ा सा बता दीजिए मेरे लिए।
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हमें बनना नहीं चाहिए। जैसे हैं। वैसे ही रहना चाहिए। है ना?
50:01
ठीक है। हमको कुछ बनना नहीं है। शरीर, मन, गुरु,
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परमात्मा, आत्मा ना बस जैसा मैं हूं
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वैसा ही रहना है बस। बस ऐसा ही बनूं। ऐसे ही
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अच्छा और वैसे ही हो आप गुरु जी मैं आपकी शरण में हूं। बस शरण में
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ही रखना। यानी यानी अरुणा जी इसको सुनो थोड़ा सा कि
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जो आप कहते हो ना कि मैं हूं जी तो जो मैं हूं है
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मैं हूं में कुछ भी चेंज करने की आवश्यकता ही नहीं है
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कि उसमें कुछ इनबिल्ड करें कोई परमात्मा कोई ध्यान ध्यान कोई ज्ञान कोई बुद्ध तो
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नो उसमें कुछ करना ही नहीं है। यही तो मैं हूं।
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उसमें ऑलरेडी पूरा चराचर समाया हुआ है। वही आप हो।
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तो जिसके लिए कुछ करना ही ना पड़े वही मैं
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सोचना तक ना पड़े। बिल्कुल जिसमें होना भी नहीं है
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जो मैं सहज में हूं बस
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वो ऑलरेडी कंप्लीट है सदा से अनबीटेबल
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लेकिन मैं के अतिरिक्त आपने कुछ कुछ भी और चाहा
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तो उसी क्षण मैं माया बन जाता हूं। उसी क्षण मैं ही बनता हूं माया।
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फिर मैं माया हूं। फिर पता नहीं
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कब क्या कैसे मिलना हो। है ना? इसलिए बनो मत। मैं के अतिरिक्त कुछ
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चाहो मत। ठीक है ठीक है। ठीक है प्रभु जी।
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प्रणाम अरुणा जी। अपना ख्याल रखें। आत्मनस्टिक रहें। ठीक है।
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ठीक है जी। यही आशीर्वाद चाहिए। होना ही है। ऐसा है ही निश्चिंत रह।
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आज
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अरुण जी दिख रहे हो कुछ बता नहीं रहे हो यार ऐसा कैसे चलेगा
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हां जी कोई है?
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प्रेम प्रणाम प्रभु प्रभु आप बार-बार मत आओ स्टॉप
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नो रोज जाते हो आप उनको हटाओ हम इतनी मोहब्बत ठीक नहीं है
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यस और कोई
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
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कैसे हो आप हम आनंद में हैं
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हम आए थे आपके सत्संग में सिलवासा के दिसंबर में। हां जी।
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और रोज सुनते हैं आपका सत्संग। हां आपका क्या नाम है?
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अनीता हां अनीता जी तो सुनते तो हो मेरे को तो
55:20
खुद मैं स्वयं में अपने होने के एहसास में आपको कैसा लगता है?
55:27
अच्छा लगता है। प्रभु हां तो जहां अच्छा लगता है, जहां आनंद आता है,
55:37
जहां शांति आती है, वही मार्ग है बस या वही मंजिल है बोल लो। जी।
55:45
हां। तो जीवन में आनंद है या स्वयं में आनंद है,
55:55
साइलेंस है तो बस वही जीना है। ठीक है। जी
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यस धन्यवाद प्रभु। कृपा बनाए रखिए।
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हां जी। तो जब भी साइलेंस आए लाइफ में आनंद आए
56:21
यानी आप सही ट्रैक पर हो जब आपकी लाइफ में क्वेश्चन आंसर दुविधा
56:28
बेचैनी या कंफ्यूजन ऐसा कुछ बढ़ रहा है तो समझ
56:35
जाना आप गलत ट्रैक में जा रहे हो। यह मीटर है। इससे खुद को बार-बार चेक करते
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रहना चाहिए कि आपके जीवन में साइलेंस बढ़ रहा है, रस बढ़ रहा है। है ना?
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तो सही जा रहे हो। ओके।
57:20
तो वाणी को विश्राम दें। अगर आप लोगों की अनुमति हो
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आपके मौन को अनुमति समझा जाएगा। नहीं
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क्या सुरेंद्र जी कैसे हो?
57:58
एक मौन सहमति होती है ना तो आपके मौन को सहमति समझा जाएगा
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आवाज नहीं आ रही है आपकी सुरेंद्र जी प्रेम प्रणाम प्रणाम
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प्रेम प्रणाम सुरेंद्र जी कैसे हो मजे में मजे में आता कैसे आज और मां कैसी है?
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उनका म्यूट हो गया लग रहा है। ओके।
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मतलब आप समझ रहे हो कि ना शब्द जिसको कहते हो ना आप लोग मौन मौन ठीक
58:54
है मौन सुंदर होता है बट शब्द भी ब्रह्म होता है चेतन होता है याद
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रखना इसलिए किसी को बुरा बोलो तो वह हर्ट होता है किसी को अच्छा बोलो तो प्रसन्न होता
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है। क्यों होता है? क्योंकि शब्द भी चेतन है, परमात्मा है, ब्रह्म है।
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तो शब्दों का उपयोग बहुत ही सोच समझ के करना चाहिए। सेकंड
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थिंग इसलिए मैं बार-बार बोलता हूं कि टॉक करो मेरे से। आप कनेक्ट रहो मेरे साथ।
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हां जी
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प्रेम प्रणाम प्रभु प्रभु प्रेम प्रणाम
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प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम आज प्रेम प्रणाम प्रभु
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प्रेम प्रणाम प्रभु हां आपकी आवाज
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प्रभु मैंने कई साल पहले एक अच्छी बात पढ़ा जो इंग्लिश में इंग्लिश में जो वचन है वह
1:01:01
थे कि आई सेपरेटेड मायसेल्फ फ्रॉम मायसेल्फ सो दैट आई मे लव मायसेल्फ।
1:01:11
हम हमने अंग्रेजी में एक अच्छी बात पढ़ी थी कई बार कई साल पहले
1:01:18
कि आई सेपरेटेड मायसेल्फ फ्रॉम मायसेल्फ। सो दैट आई मे लव मायसेल्फ।
1:01:26
मैंने अपने आप को अपने से अलग किया ताकि मैं अपने से प्यार करूं।
1:01:34
हम या यह सही है?
1:01:46
अपने से अलग किया ताकि अपने से प्यार कर सकूं। है ना? वहां पे देखो
1:01:56
जो मैं कहता हूं ना उसको थोड़ा डीप समझो। है ना? कि मैं से
1:02:04
भिन्न कुछ भी नहीं है। तो
1:02:11
मैं से भिन्न भिन्न भी नहीं है। जब मैं से
1:02:19
भिन्न अलग भी नहीं है। अलग भी मुझसे अलग नहीं है।
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जिसको हम अलग कहते हैं, भिन्न कहते हैं,
1:02:33
वह अलग भी मुझसे अलग नहीं है, तो क्या मुझसे अलग है?
1:02:43
बताओ। अब अलग करके प्रेम करता हूं या एक करके
1:02:51
ज्ञान में आ जाता हूं। ये ये एक अलग चैप्टर है। है ना?
1:02:56
कि प्रेम के लिए मैं कुछ दो जैसा हो जाता हूं। कुछ एक जैसा हो जाता हूं। ज्ञान के
1:03:03
लिए वननेस हो जाता हूं। संसार के लिए मैं ही द्वैत हो जाता हूं।
1:03:11
है ना? बट आनंद यह है कि मैं ही हो जाता हूं।
1:03:20
अलग हो या एक हो या द्वैत हो अद्वैत हो द्वैताद्वैत हो
1:03:26
मैं ही हो जाता हूं तो
1:03:37
संसार होना ज्ञान होना प्रेम होना मेरा आनंद है। एक से अनेक हो जाना,
1:03:51
फिर एक हो जाना, यह सब मेरा आनंद है।
1:03:58
यह सब मेरी लीला है, रस है। और अंततः मैं ही हूं।
1:04:08
अंततः मैं ही हूं।
1:04:20
प्रेम ज्ञान सत्य परमात्मा कुछ भी मुझसे भिन्न नहीं
1:04:30
भिन्न भी जब मुझसे भिन्न नहीं जब अलग भी जो अलग का हम अनुभव करते हैं ना
1:04:38
जीवन में वो अलग भी मुझसे अलग जब नहीं है तो क्या अलग है मुझसे
1:04:51
अलग भी मुझसे अलग नहीं
1:05:00
तो क्या अलग है मुझसे मैं से
1:05:07
इसलिए मैं से भिन्न कुछ भी नहीं
1:05:16
तो सहज में मैं इन सब का आनंद लेता रहता हूं
1:05:23
और वहां अलग एक द्वैत अद्वैत शून्य पूर्ण
1:05:33
यह सब जो भी है यह सब मेरे आनंद के लिए है।
1:05:42
और मेरे से ही हैं। मैं इनसे नहीं हूं। है ना?
1:05:49
इन सब की आत्मा मैं ही हूं।
1:06:13
तो कोई कारण नहीं है। यह सब आनंद है। प्रेम हो जाना, ज्ञान हो जाना। इवन संसार
1:06:21
हो जाना भी मेरा आनंद है।
1:06:42
असली वस्तु आप हो उस पर निष्ठा होनी चाहिए आपको।
1:06:51
स्वयं पर निष्ठा।
1:07:07
और हमेशा एक बात और ख्याल रखें कि ज्ञान और प्रेम
1:07:15
आपके लिए स्वाभाविक है। उसके लिए आपको कुछ करना नहीं है।
1:07:26
स्वाभाविक
1:07:43
ओके प्रणाम
1:07:51
हम हमारा
1:08:15
हां जी
1:08:38
हम
1:08:51
तो यह सब स्वयं पर निष्ठा है ना तो यह सब अपने आप रहते हैं। आपसे प्रेम बहता ही
1:09:00
रहेगा नेचुरली। आपका होना ज्ञान स्वरूप रहेगा। नेचुरली।
1:09:11
इसमें कुछ करने जैसा कुछ नहीं है।
1:09:19
एकदम नेचुरल है।
1:09:41
तो ठीक है। अब वाणी को विश्राम देते हैं। सभी को प्रेम प्रणाम।
1:09:49
आत्म नष्टिक रहे। इस बात को जो मैं बार-बार कहता हूं
1:09:59
उसको थोड़ा सीरियस लो।
1:10:04
जब तक खुद पर निष्ठा नहीं होगी, आप केवल भटकते रहोगे।
1:10:16
अंतहीन भटकाव है बाकी सब कुछ
1:10:27
जब तक खुद पर श्रद्धा नहीं है कि असली सत्य परम सत्य मैं हूं।
1:10:38
तब तक आप कोई और सत्य खोजते रहोगे। अनदर ट्रुथ
1:10:48
जब तक श्रद्धा नहीं है कि मैं अंतर्यामी ही असली गुरु हूं।
1:10:58
रियल मास्टर मैं हूं। आई एम
1:11:07
तब तक गुरुओं का चक्कर भी लगा रहेगा।
1:11:21
जब तक यह श्रद्धा नहीं है कि स्वयं ही प्रभु है, परमात्मा है।
1:11:31
तब तक चक्कर लगा रहे। इसलिए खुद पर निष्ठा
1:11:38
कि सत्य प्रेम गुरु परमात्मा केवल मैं हूं। केवल मैं और मैं हूं।
1:11:49
मैं ही तो हूं।
1:12:03
तो एकमात्र मैं की शरणा सर्व धर्मण परितज
1:12:12
एकमात्र मैं की शरणा मैं पर श्रद्धा मैं पर निष्ठा
1:12:27
और मैं सच बताऊं बहुत गहरा सच है कि
1:12:37
आप खुद पर निष्ठा नहीं कर पाओगे ना
1:12:44
तो कहीं नहीं कर पाओगे। वह एक झूठ होगा, एक फरेब होगा।
1:12:56
आप खुद पे ही निष्ठा नहीं कर पाए ना तो आप नहीं कर पाओगे कहीं पे भी। सच बता रहा हूं
1:13:04
मैं। हो ही नहीं सकती निष्ठा।
1:13:11
निष्ठा केवल खुद पर ही हो सकती है क्योंकि आपका खुद ही परमात्मा है। आपका स्वयं ही
1:13:20
नारायण है। असली गुरु है। असली सत्य है।
1:13:30
बाकी सब केवल एक हसीन
1:13:38
धोखा। याद रखना
1:13:45
बाकी सब एक हसीन धोखा है।
1:13:52
हसीन है करके खाते रहते हो।
1:14:01
पानी तो पिलाओ यार।
1:14:14
तो खुद पे नहीं कर पाए तो किसी पे नहीं कर पाओ।
1:14:35
तो असली गुरु से मिलना है तो अपने से मिल। असली परमात्मा से मिलना है तो अपने से
1:14:44
मिल। असली सत्य केवल तू है।
1:14:51
असली प्रेम तू है।
1:14:57
असली ज्ञान तू है।
1:15:06
तू ही
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तो यही मैं बताना चाह रहा हूं। हर बार मैं यही बताता हूं।
1:15:53
बस यही सुन लेना जो मैं बता रहा हूं। बस वही सुन लेना।
1:16:12
बहुत धोखा खाओगे। नहीं तो धोखे पे धोखा है।
1:16:22
हसीन धोखे हैं यहां।
1:16:37
तो कोई है लेवन हारा अपने आप को ही तो ले लो
1:16:47
और तो मैं कुछ दे ही नहीं रहा हूं।
1:16:57
अपने आप को स्वीकार कर लो।
1:17:06
अपने सुख दुख जीवन, मृत्यु बाद में स्वीकार करते रहना।
1:17:16
पहले अपने आप को स्वीकार करो कि तुम ही परबह्म नारायण हो।
1:17:25
उससे कम तुम हो कैसे सकते हो यार? मेरी आंखें जो देख रही है ना उससे कम तुम हो कैसे सकते हो?
1:17:39
उससे कम कुछ हुआ ही नहीं है। सारे चराचर
1:17:53
कब तक अपना इंकार करोगे?
1:18:07
अपना इंकार ही तो यह संसार है। यह माया है।
1:18:17
और खुद का स्वीकार ही नारायण है। परमात्मा है।
1:18:50
बस इससे ज्यादा मेरे को कुछ पता नहीं है। है ना?
1:19:08
हम हम
1:19:27
प्रणाम गुरुवर प्रणाम गुरुवर मैं सिया कैसी है तो आप कैसे हैं?
1:19:40
हां प्रिया जी एक बात बोलो हां जी
1:19:47
आपके लिए चाय बना चाय बना हां बना दो ओके
1:19:56
आप आ जाएंगे फिर तो सिया जी मैंने जो अभी बताया वो आपने
1:20:04
सुना वो पॉइंट
1:20:11
जहां कोई सिया नहीं है। आपका होना है बस
1:20:18
टू द पॉइंट जस्ट यू आर
1:20:29
अपने होने की खुशबू। सुनो सुनो
1:20:37
अभी सुनो अपने होने की खुशबू
1:20:52
उसमें आपको जीना है। ओके।
1:20:59
ठीक है। बाकी चीजें अभी साइड करो। बाद में चाय पिला देना। ओके।
1:21:09
टू द पॉइंट। पॉइंट से नहीं हटना है। हमेशा
1:21:15
जैसे अर्जुन बोलता था ना कि मेरे को बस उसकी आंख ही दिखाई दे रही है।
1:21:32
मछली की आंख ही दिखाई दे रही। और कुछ
1:21:40
देखना ही नहीं है। मैं का अनुष्ठान चलता रहे।
1:21:48
एक दीवानगी कि जो भी दिख रहा है मैं ही हूं। जो सुनाई दे रहा है मैं हूं।
1:21:59
जो जान रहा हूं समझ रहा हूं मैं हूं। निरंतर यह अनुष्ठान
1:22:09
आत्मा का अनुष्ठान है। ये निरंतर चलने दो।
1:22:18
तर-बतर हो जाओगे। मालूम यह अनुष्ठान कोई करता ही नहीं है।
1:22:24
बस मैं ही हूं का भाव यह सत्य
1:22:31
यह अनुष्ठान चलता रहे।
1:22:39
ओके प्रणाम।
1:22:52
मतलब एक टकटकी लग जाती है ना यार जैसे
1:22:59
वो चकोर होता है वो एक टकटकी लगी रहती है बस
1:23:12
ऐसी दीवानगी चाहिए है
1:23:32
तो जब आपको मैं के अतिरिक्त कुछ और सुनना पसंद नहीं आएगा इवन परमात्मा भी नहीं
1:23:40
लास्ट में परमात्मा भी नहीं मैं के अतिरिक्त कुछ देखना अच्छा नहीं लगेगा।
1:23:48
मैं के अतिरिक्त कुछ जानना समझना अच्छा नहीं लगेगा। वही वह घड़ी है
1:23:56
आत्मनिष्ठा की। और मैं के अतिरिक्त स्वयं के अतिरिक्त
1:24:05
कहीं पर भी और इंटरेस्ट है
1:24:12
तो वह एक हसीन धोखा है।
1:24:19
हसीन है और धोखा भी है।
1:24:36
तो एक्चुअल जो आपका मैं है उससे भिन्न कुछ भी नहीं है। उसमें आपको जीना है निरंतर
1:24:44
बहुत शिद्दत से प्रेम से बहुत श्रद्धा से कि यार मैं ही हूं बस
1:24:52
पूरे चराचर में और कुछ कोई दूसरा अनदर कुछ कहीं है ही नहीं।
1:25:03
तब यह जो मैं सत्संग करा रहा हूं निरंतर
1:25:12
तब सार है ना कि आप रिसीव कर रहे हो उसको ग्रहण कर रहे हो। है ना?
1:25:22
ठीक है।
1:25:37
और मेरे को कोई नहीं रोक सकता। बता रहा हूं। कोई नहीं रोक सकता।
1:25:44
ना आपका मन, ना आपकी बुद्धि, ना आपकी दुनिया। मैं सीधा अंदर प्रवेश कर जाता हूं।
1:25:56
डायरेक्ट किसी की सामर्थ्य नहीं है कि मेरे को रोक सके।
1:26:06
इवन आपकी धारणाएं, आपकी मान्यताएं भी कट जाएंगी। अगर है तो मेरे रास्ते में नहीं आ
1:26:14
सकती।
1:26:26
तो बस मेरे साथ रहो और जो मैं बता रहा हूं स्वयं
1:26:34
बस उसी का अनुष्ठान अखंड अनुष्ठान चलता रहे बस
1:26:50
ओके सिया जी प्रणाम प्रणाम गुरु सर
1:26:58
प्रणाम जी
1:27:15
हम हम हम
1:27:32
यस कोई है
1:27:40
प्रणाम गुरुदेव प्रणाम उपेंद्र जी कैसे हो
1:27:50
मैं अच्छा हूं बस सुनते रहने का मन करता
1:27:56
बहुत आनंद आता है आनंद हो
1:28:06
मैं आपका जब भी आपसे मुलाकात हुई है एक दो साल हो
1:28:14
गए लगभग है ना और मैं आपका जो भोलापन है ना मेरे को बहुत
1:28:23
भाता है। बहुत अच्छा लगता है।
1:28:31
बहुत कम लोग हैं अभी धरती में जिसने अपने भोलेपन को बचा के रखा है।
1:28:40
बहुत ही कम है। आपका करुणा और प्रेम भी है।
1:28:50
हां जी। तो बड़ा अच्छा लगता है। जब भी आपसे मिलता
1:28:56
हूं आनंद आता है।
1:29:06
हम तो आनंद में डूब जाते हैं। आपको बस अब बेसब्री से इंतजार है तो आएंगे।
1:29:17
और सीमा जी कैसी हैं? है अभी पास में। जी जी
1:29:23
आप कैसे बच रहे हो मेरे से? हां। प्रेम प्रणाम भगवान
1:29:33
प्रेम प्रणाम जी रहे हैं
1:29:38
इतनी मस्ती चल रही है पूछिए मत बस हालत खराब
1:29:55
भर ही निरंतर होए ना पूरे पूरे यस यस यस
1:30:04
एक साइड से निरंतर भरता ही रहता है ये रस ये आनंद प्रेम
1:30:11
और एक साइड से पूरा होता ही नहीं है। पूरा होता है। जी बिल्कुल सत्य
1:30:18
यानी एक एक भरा हुआ खालीपन वाह
1:30:31
हां जी हां जी बस
1:30:46
प्रणाम
1:31:04
हम हम
1:31:32
भाई आप लोगों का ये बड़ा अच्छा पोश्चर है ऐसे वाला ये जो देख रहे हो
1:31:39
ये क्या है? हां निकलो समाधि से
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दर्शना जी आज कैसे खामोश हो आप
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प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम
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वो आप कहते हैं ना कि जो बात कर लेते हैं वो दोबारा ना आए तो वजह
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ओके ओके हां बात बात तो करनी है बहुत ऐसे वो कहना होता है आपको लेकिन आपकी आज्ञा का भी तो पालन
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करना होता है ना अच्छा बट वो बात आपके लिए नहीं है | हम तो
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भेदभाव करते हैं हां
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अगर आपकी आज्ञा हो तो कुछ कहूं हां बताइए
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प्रभु हमारे लिए ना आपके चांद जैसे हो जैसे
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का चांद नजर आता है ना लोग कैसे छत पे जाते हैं भाग भाग के उसको देखने के लिए हम हम
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और ऐसे जब चांद को देखते हैं तो एक मतलब बाहर सी आ जाती है लोगों के चेहरे पे
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हम तो जैसे आपका है ना धुप में
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तो मतलब पहला तो ये होता है कि हार्ट बीट मतलब 200 की स्पीड पकड़ लेती है
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हम ऐसे ही ना दर्शना जी रुको आप स्टॉप हो जाओ अभी
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थोड़ा देर के लिए इधर उधर जा रही है बात टू द पॉइंट
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मैं के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं मैं का अनुष्ठान
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अपने आप का अनुष्ठान सर्वत्र जो दिखे मैं हूं
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जो है नहीं है मैं हूं
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जो भी हो रहा है अरे मैं ही हूं।
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ये चांद सितारे ये सुंदरता ये सब कुछ बस मैं ही हूं।
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मैं का अनुष्ठान मस्ट है। ठीक है? आप इस पॉइंट को जियो अच्छे से।
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ठीक है दर्शना जी प्रणाम
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हम हमने वो दीवानगी चाहिए
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कि ट्रैक वहां से हटे ही ना है ना एक पागलपन एक दीवानगी
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क्योंकि मैं के अतिरिक्त कुछ और कहीं पे भी आपका इंटरेस्ट है। यानी आपने अपने
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अतिरिक्त किसी और की सत्ता को कबूल कर लिया। अब आप फसोगे।
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चाहे वह कुछ भी हो, कोई भी हो। अपने अतिरिक्त किसी और की सत्ता का
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स्वीकार ही मत करो। इसलिए बस मैं ही हूं। अखंड अनंत
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इवन अनंत भी नहीं है। मैं हूं। अखंड भी नहीं है मैं हूं।
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ऐसा होना चाहिए सत्संग। टू द पॉइंट पीक पीक पीक
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और अंत में पीक भी नहीं है। मैं ही हूं। यस
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नो लो रेंज में जाना ही नहीं है। हां वो हम ऐसे दिखते हैं। हम अच्छे हैं। वह चांद
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है सब लो रेंज है।
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मैं दिखता हूं और मैं ही देखता हूं। बस
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मैं कोई आपसे अलग हूं ही नहीं ना।
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यस है कोई मैं वाला है कोई?
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हां जी। अरे मैं तो प्रेम को भी डुबो देता हूं अपने में यार। बाकी चीजों की बात क्या
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करना? मैं में ज्ञान प्रेम डूब जाते हैं। प्रेम भी समा जाता है।
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भक्ति भी समा जाती है। भक्ति भगवान के लिए है ना। मैं आत्मा
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भगवान के लिए तो भक्ति भी मैं में समा जाती है।
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प्रेम तो सत्य से ही करोगे ना। परमात्मा से ही करोगे ना। मैं से ही तो प्रेम भी मैं में समा जाता है।
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और ज्ञान तो मैं का ही होना चाहिए। इसलिए ज्ञान भी मैं समा जाता है।
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इसलिए मैं का ही अनुष्ठान निरंतर अखंड प्रेम का भी नहीं ज्ञान का भी नहीं
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स्ट्रेट नो कॉम्प्रोमाइज
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यस
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मेरे को बस लगता है कि मैं अपना काम वर्ड्स में बोल रहा हूं।
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अपना राम काज बोल लो। मेरे को बस एक ही चीज लगती रहती है हमेशा
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कि मैं अपना काम बहुत अच्छे से करूं। बेस्ट
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बेस्ट ऑफ द बेस्ट करूं। बस एक मेरा भाव रहता है कि 1 इंच भी मैं चूकने ना दूं अपनी तरफ से
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एटलीस्ट बाकी आप स्वतंत्र हो आपको जैसे जीना जहां जीना
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वो आपकी तरफ से है बट मेरे को हमेशा यह लगता है कि यार
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मैं अपना सब कुछ दे डालूं और बहुत सॉलिड काम करूं
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रति भर फिर भी कमी ना हो जाए मेरी तरफ से
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क्योंकि महत्व और किसी चीज का है ही नहीं।
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क्योंकि इतने सारे मास्टर्स आए धरती पे उन्होंने भी अपना सब कुछ दिया है ना
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तो जब मास्टर देखता है डिसाइपल में अपने ही आप में बोल लो अब शब्दों में नहीं
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फंसना कि मास्टर जब देखता है डिसाइपल में जब सत्य के फ्लावर्स उसमें खिलते हैं रस
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परमात्मा उसमें प्रकट होते जब मास्टर देखता है ना आ
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तो मत पूछो उस मोमेंट का
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कि जब आपको किसी भी तरह का कोई संशय नहीं रह जाता एक रत्ती भर भी डाउट नहीं रह जाता अपने
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में अपने में जब आपको निष्ठा हो जाती है मेरे को तो आज भी है आप में भी है
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बट आपको जब अपने में पूर्ण निष्ठा हो जाती है ना वो मूवमेंट के लिए इतनी इतनी मेहनत
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है इतना यह रामकाज है इसमें कई बार अगर आप स्लिप होते हो, छिटक
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जाते हो और कई चीजें होती हैं इस बीच और फिर आपको होल्ड करके रखना।
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यह बहुत बहुत डेलिकेट है यह मामला। बहुत डेलिकेट है।
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कई प्रलोभन है। इस दुनिया में है ना? कई ट्रैप्स हैं।
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बट यार बताऊं ना हो जाता है। मेरी तो निष्ठा है आप पे। बहुत निष्ठा है।
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मैं यकीनन देख सकता हूं आप में वह।
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और बहुत भरोसा है मेरे को आप पे।
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हम हम हम
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हम हम
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तो शिवाजी आज खामोश कैसे हैं? हां ऐसा कैसे चलेगा?
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हम आपकी आवाज नहीं आ रही है।
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शिवाजी
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम कैसे हो शिवा जी
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बहुत अच्छे आपके आशीर्वाद बहुत बढ़िया है आनंद है हां जी
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हां जी और आपके क्या हाल है कुछ भी नहीं हां जी
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उनसे पूछ रहा हूं मैं उनका नाम नहीं पता है इंदिरा इंदिरा जी यस
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प्रणाम इंदिरा जी कैसे हो? बस बढ़िया गुरुजी फर्स्ट क्लास
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आनंद दे एंजॉयंग सो मच गुरु जी आनंद में ही सब पूरे
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पूरा फ्लोटिंग में है हम लोग बहुत सुंदर आ हा
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निरंतर सत्संग में सुनते रहते हैं कोई भी सत्संग छूटा नहीं सब देखा है
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बहुत सुंदर ये येट
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देखने के लिए बहुत बहुत मन में था गुरु जी आपको मिलना मिलना तो अभी ये देख के बहुत
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बहुत अच्छा लग रहा है थैंक यू ये ये ओपोरर्चुनिटी लोगों को देने के लिए
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जी
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बस आत्मनस्तिक रहें है ना खुद पे निष्ठा
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बहुत श्रद्धा रखना खुद पे बहुत हम
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कोई भी सवाल वगैरह कुछ भी नहीं बस मैं मैं हूं मेरा मेरा सेवा कुछ भी नहीं है। वही वही
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हाल है। बहुत बढ़िया। हां जो चार में बैठा हूं वो भी मैं है। सब मैं
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है वही आनंद में हम लोग जी रहे हैं। बस ऑफिस जा रहा हूं वही आनंदमय मैं परिक्रमा कर रहा हूं। मैं मेरे में जी रहा हूं। उसके अलावा कुछ मालूम नहीं। कुछ तो चल रहा
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है बस। बहुत सुंदर
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बहुत ही सुंदर
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प्रणाम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रभु प्रणाम प्रेम प्रणाम
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हम तो अब वाणी को विश्राम देते हैं। सभी को
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प्रेम प्रणाम है मेरा। है ना?
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प्रेम प्रणाम बस अपने पे
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अटूट श्रद्धा रखना अटूट श्रद्धा
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ओके प्रणाम