0:00
ओम
0:21
हमारी एक मां थी राम कुवर मां वो इनलाइटेंड मास्टर थी। अब देह में नहीं है।
0:28
वो सीधा गाली से देती थी। हां मेरे को नहीं बनता। वैसे कभी कभारी देता
0:36
हूं मैं।
0:46
तो राम कुवर मां महर्षि मुक्त की डिसाइपल थी
0:51
और बोधवान थी वो शादीवादी नहीं की थी बहुत हंसती थी बचपन में चारचार पांचप दिन रात
1:01
हंसती रहती थी हां उसके घर वाले उसको पागल घोषित कर दिए थे
1:08
बचपन का बता रहा हूं और
1:15
फिर महर्षि मुक्त से जब मिली तब उनकी अच्छी एज हो गई थी और
1:22
वही बोले थे कि मेरी बात को वो केवल राम कुंवर ही समझ रहा है ऐसा बोले थे वो
1:30
समझ रही है नहीं बोले समझ रहा है बोले और और तुम लोग कोई नहीं समझ समझ रहे हो?
1:38
वहां बहुत भीड़ थी। 10,15,000 लोग थे।
1:46
तब लोग पहचाने और वो अनपढ़ थी। एकदम रामायण वगैरह पढ़ती थी
1:55
और राम नाम का जप करती थी। और उनके पास और कोई डिवाइस नहीं। वही बस
2:01
राम नाम लेते रहो। ऐसा बोलती थी। तो महर्षि मुक्त उसको बोले राम कुंवर
2:11
अब तुम इसका प्रचार करो है ना जो तुमने पाया है जाना है उसका
2:20
प्रचार करो तो हाथ जोड़ दी बोली ना बाबा मेरे से नहीं होने वाला
2:29
मेरे को इस झंझट में मत फसाओ तो वह कभी भी प्रचार प्रसार नहीं की
2:40
अब कुछ लोग जाते थे तो उनको वो राम नाम जपो रामायण पढ़ो
2:46
और शिव पुराण और थर्ड उनका था
2:53
वशिष्ठ रामायण तो वो जो वशिष्ठ रामायण बुक पढ़ती थी वो बुक मेरे पास है। मैं पढ़ता नहीं हूं उसको
3:01
वो बुक पड़ी हुई है मेरे पास। एकदम वो पूरे उसमें
3:10
फटने लग गई है वो बुक और बट रखा हूं मैं संभाल के
3:30
एक ही बार मिला था उनसे मैं तो खास मेरी बात नहीं हो पाई थी। मैं उस समय
3:39
नहीं पहचान पाया था। बहुत छोटा था मैं।
3:52
तो मना कर दी। मेरे को यह सब प्रपंच में नहीं फंसना है। प्रचार प्रसार गुरु बनना। ये खतरनाक है बोली
4:01
रियल में खतरनाक है। बुद्ध पुरुष भी मना कर देता है कि मेरे को ये गुरु गुरु का रोल नहीं निभाना है। सोचो
4:10
और यहां आम जनता में लोग कई लोग गुरु बनके भटक रहे हैं और लोगों को भटका रहे हैं। शर्म आनी चाहिए इनको।
4:19
बहुत गंदी चीज होती है।
4:48
मेरा भी ऐसा भाव नहीं था कि कभी बोलूंगा। मेरा बिल्कुल नहीं था कि मैं बोलूंगा और
5:00
एक अपने में मस्त एक एक अपनी खामोशी में मौन में
5:08
मैं बिता रहा था फिर
5:19
लेकिन अस्तित्व को बुलवाना होता है तो वो बुलवा देता है।
5:26
उसके पास अपनी टेक्निक होती है।
5:39
हां जी और कोई एनीबडी
6:02
राम किसी को गाली वाली सुननी है क्या मेरे मुंह से?
6:18
हां
6:29
सुनिए क्या है जी चलेगा गुरुदेव
6:51
ऐसे तेरे को तो ठोका ही करूंगा मैं।
6:59
विष्णु कहां गया तू?
7:11
हां जी विष्णु जी
7:25
जी गुरुदेव बताओ मस्त मस्त एकदम मस्त
7:57
ठीक है।
8:17
मैं मिला जब मां से मैं पहचान नहीं पाया उनको। बाद में मेरे को बहुत अकरा वो जल्दी चली गई। सो कहना चाहिए मैं लेट पहचान पाया। है ना?
8:31
तो जब मास्टर पास होता है ना तो आप पहचान नहीं पाते हो
8:40
और जब आपको पहचान होती है तब मास्टर देह में नहीं होता है
8:51
अजीब विडंबना है जिंदगी की
9:04
हां बहुत कम लोग होते हैं जो पहचान लेते हैं। रेयर होते हैं जो पहचान लेते हैं।
9:14
वो कृपा है।
9:24
हम अधिकतर जहां भीड़ है उसी को मास्टर समझ लेते हैं।
9:33
है ना? यहां ज्यादा भीड़ है यहां जहां भीड़ है समझ जाना वहां मास्टर होता ही नहीं।
9:40
एकदम अच्छे से याद कर लो इस बात को। मास्टर के पास भीड़ नहीं होती। लिमिटेड
9:50
होगी। होगी भी तो
10:02
लेकिन भीड़ का एक अट्रैक्शन होता है। लाखों लोग जब एक ही बात को बोलते हैं तो
10:08
वो सच लगती है। है ना? भले वो झूठ क्यों ना हो।
10:17
तो अजीबोगरीब पोजीशन रहती है। मुश्किल है
10:26
एट द मूवमेंट मास्टर को पहचान पाना उसके साथ जी पाना और मुश्किल है
10:37
और जीते जी उसके साथ मर पाना और ज्यादा मुश्किल है।
10:52
बट कोई कोई होते हैं जिनको प्रेम हो जाता है।
11:10
हां तो बताओ आप लोग कुछ कह नहीं रहे हो। सब खामोश हो।
11:16
ऐसे चुप मत बैठो यार।
11:32
ऑन करो ना विराज सब प्रणाम प्रणाम हां प्रणाम जी
11:40
प्रणाम आलोक बोल रहा हूं मैं हां आलोक जी जी
11:47
बोले कल कल जो सत्संग हुआ था तो ऐसे तो अभी कोई सवाल रह ही नहीं गए हैं। आपकी
11:56
इतनी कृपा है कि जो आत्मनिष्ठा है दिन ब दिन ब दिन मतलब ऐसी होती जा रही है कि
12:04
कहीं कोई बुद्धि से एक आध सवाल उठ भी जाए वो उसी समय खत्म भी हो जाता है। सारे सवालों के जवाब मिल जाते हैं और बुद्धि की
12:12
तरफ ध्यान देने की इच्छा भी नहीं होती। आजकल कि कोई सवाल उठता भी है तो ऐसा लगता है कि यह तो बुद्धि का है। इसको बाजू करो।
12:20
यह किसी काम का नहीं है। और जो आत्मनिष्ठा के बारे में जब जब आपसे जब जब वीडियो में सत्संग में सुनता हूं वो उतनी ही और
12:29
प्रगाढ़ होती जाती प्रगाढ़ होती जाती है। एक मन में हमेशा एक दुविधा पड़ी रहती थी कि कल जो आपका सत्संग हुआ था कि गुरु के
12:39
प्रति कभी थोड़ी सी कभी भी एक अश्रद्धा आई थी। कुछ हुआ था तो वो भी कहीं ना कहीं
12:47
किसी रीजन से थी कि आप अपने अंदर जाओ और अपने मैं में अपने आत्मा भगवान में जाकर
12:55
के प्रतिष्ठापित हो। गुरुदेव कल तो आपने वो भी एक जो बची कुची चीज थी वो भी निकाल
13:02
दी। आज अंदर एक ग्लानी पड़ी रहती थी कि पहले की
13:09
बात थी। अभी का तो कुछ रहा नहीं। पहले की बात थी कि मैंने ऐसा क्यों सोचा? मैंने गुरुदेव के प्रति मेरे मन में ऐसा क्यों
13:17
आया? जबकि मैं पांच छ महीने से सुन रहा हूं। ऐसा मेरे दिमाग में क्यों आया? वैसा मेरे दिमाग में क्यों आया? कल जब मैंने
13:24
सुना तो बहुत हल्का हो गया मैं। गिल्ट अंदर था।
13:31
वो बहुत सुंदर सत्संग था कल का। जी। बहुत अद्भुत था।
13:51
एक शंका ही तो दूर ले जाती है ना बहुत दूर कर देती है। एक डाउट,
14:01
एक संदेह,
14:06
एक छोटा सा संदेह उसका पावर कितना होता है?
14:12
आपको दूर फेंक देता है मास्टर से।
14:18
बहुत पावर होता है एक संदेह में।
14:30
हालांकि कल वह जड़ मूल से कट गई वो बात पूर्णतः
14:37
संदेह से ही संदेह को काट दिया गया कल अलौकिक सत्संग था कल का
14:51
अच्छा है सब चलता रहता जीवन है संदेह होगा ना क्यों नहीं होगा यार
15:17
श्रद्धा कभी भी थोपी नहीं जाती।
15:30
श्रद्धा आती है अपने से वो थोपी नहीं जाती।
15:38
जैसे संदेह अपने से आया ना ऐसे ही एक समय श्रद्धा आती है अपने से।
15:47
सब नेचुरल एक ट्यून है। एक उचित समय पर सब आ जाता है।
15:54
आप लगे रहो लगे रहो। परमात्मा भी आ जाता है। सब आ जाता है यार। बहुत आसान है जिंदगी।
16:03
बस आप लगे रहो।
16:23
हम्म कुछ बता नहीं रहे हो आप। अरे बोलो यार दो चार लाइन बता दो तो हम भी
16:30
कुछ हमारा तो खोपड़ी काम नहीं करता है। प्रेम प्रणाम प्रभु
16:40
प्रेम प्रणाम एक दो लाइन आ रही है अंदर से
16:49
हां अहंकार ना बाहर मरता है भीतर मरता है ना
16:56
ना समय में किसी समय में मरता है ना आसमान में मरता है ना धरती में मरता है वो सिर्फ मैं की गोद में मरता है
17:05
हां सत्य एक साथ
17:17
हेलो सही है सौरभ
17:32
एक मैं हूं ही मात्र अहंकार कार रहित है।
17:39
कई लोग जैसे मैं मैं हूं पर सत्संग कराता हूं तो उसको कई लोग अहंकार समझते हैं।
17:45
बल्कि बात जस्ट उल्टी है। एक मैं हूं ही मात्र
17:52
अहंकार से रहित है। बाकी सब जगह अहंकार है। सूक्ष्म अहंकार
18:00
है। वह सब अहंकार जिसको आप तू ही है तू ही है बोलते हो या वह सब सूक्ष्म अहंकार
18:12
हम बड़े आशिक हैं प्रेमी हैं भक्त हैं ये भी सब सूक्ष्म अहंकार
18:18
हां ज्ञानी हैं सब अहंकार एकमात्र मैं हूं ही अहंकार से रहित मतलब
18:27
क्या आप स्वयं अहंकार से रहित हो।
18:34
आप में अहंकार है ही नहीं। तीन काल में नहीं।
18:44
यस। बहुत नाजुक पॉइंट है ये।
18:58
क्योंकि अहंकार जिसको आप मैं कहते हो बॉडी माइंड को वह अहंकार है और जो प्यरेस्ट मैं हूं है जो
19:07
आप हो वो साक्षात परमेश्वर तो माया क्या सेम सेम में खेलती है
19:17
मैं हूं परमात्मा का जो क्षेत्र है तो माया भी मैं को लाकर खेलती है।
19:26
सेम एक ईगो बना देती है। मैं ज्ञान
19:36
जो आत्मा का ज्ञान है तो माया बुद्धि का ज्ञान ले आती है। माया बुद्धि के ज्ञान में खेलती है। इसलिए मैं हमेशा मना करता
19:43
हूं ज्यादा बुद्धि के ज्ञान में नहीं जीना।
19:53
अब आत्मा में प्रेम ही प्रेम है तो माया मोह से खेलती है। प्रेम की एक फोटो कॉपी है मोह
20:00
है ना ये चलता रहता है।
20:18
नेक्स्ट
20:31
और मैं हूं ही अहंकार रहित है।
20:38
आपके स्वयं में किसी भी तरह का अहंकार है ही नहीं। हो ही नहीं सकता।
20:50
खुद को देह मानोगे तभी अहंकार पैदा होगा। नहीं तो अहंकार आ ही नहीं सकता।
21:01
मैं हूं एकदम प्योर है। परमात्मा का क्षेत्र है।
21:08
वहां कुछ भी नहीं आ सकता। अहंकार की क्या बात है? कुछ आ ही नहीं सकता।
21:18
ओके सौरभ हां जी हां जी
21:26
प्रणाम जी प्रणाम मेरे प्यारे गुरु जी
21:38
प्रणाम जी कल मुझे एक बात याद ारी थी जो आपने कही थी
21:46
और मुझे बहुत बहुत सुंदर लगी थी कि जब कृष्ण आंखें खोलता है तो उसे राधा
21:55
ही राधा दिखती है हर जगह और जब आंखें बंद करता है तो राधा उसी में
22:02
समा जाती है उस दिन सत्संग भगवान और माया पे चल रहा था
22:10
तो आपने ये दो लाइनें कही थी और मतलब मतलब मेरे अंदर घर कर गई थी ये दोनों बातें
22:19
मुझे बहुत बहुत सुंदर लगा था जैसे आपने ये बोला था और बिल्कुल वैसा ही तो है
22:29
वैसा ही है वैसा ही है आज
22:48
मैं तो ना यार अपने बारे में बता ही नहीं पाता हूं। मालूम
22:58
इतनी सारी बातें हैं।
23:09
ऐसा लगता है कि अभी थोड़ा समय है।
23:16
थोड़ा-थोड़ा बता देता हूं। तो ठीक है धीरे-धीरे होलेहले
23:35
हर बार नए तरीके से निकलता है गुरुजी बहुत ही सुंदर लगता है हर बार जब भी आप बोलते
23:42
हो ना नए तरीके से यह लगता है नए वर्ड्स आप यूज करते हो मतलब
23:51
बहुत सुंदर
24:14
मेरे से कोई पूछता है कि आपको क्या हुआ था वो कोविड के समय
24:22
मतलब हुआ में इंटरेस्ट रहता है सबको क्या हुआ क्या घटा
24:34
यानी बड़ी विचित्र लगती है मेरे को यह बातें मालूम उसको क्या बताऊं ऐसा लगता है
24:45
मैं हूं मैं कुछ हो ही नहीं सकता वही तो मैं हूं कोई भी घटना
24:54
किसी भी तरह का होना उससे मैं हूं रहित रहता
25:01
मुक्त रहता है।
25:08
मैं हूं को कभी भी कुछ भी हुआ ही नहीं है। आपका मैं हूं बंधा ही नहीं है तो मुक्त क्या होगा?
25:20
आप सोचते क्या हो? आपका मैं हूं बंध गया। अब सत्संग सुनेंगे और फिर कभी मुक्त होगा ना।
25:30
आपका मैं हूं कभी बंधा ही नहीं है। आपके मैं हूं में अज्ञान है ही नहीं।
25:37
उसको जानना भी नहीं है। इसलिए
25:47
आपका मैं हूं। ऐसा अंधकार में नहीं चले गया है कि सत्संग करोगे और फिर प्रकाश में आएगा। वह स्वयं प्रकाश है।
26:01
मेरे को संध्या इतना विचित्र लगता है कि यार हम गलत जगह से क्यों शुरू करते हैं जिंदगी को?
26:10
मतलब आप पहले ही क्यों डिसाइड कर लिए कि मैं अंधकार में हूं। आप प्रकाश में भी तो हो सकते हो ना।
26:20
आप पहले ही क्यों डिसाइड कर लिए कि मैं जीव हूं। आप परमात्मा भी तो हो सकते हो।
26:27
आप पहले ही डिसाइड कर लिए कि आप व्यक्तित्व हो। अरे क्या पता आप अस्तित्व हो।
26:35
हमारी शुरुआत ही गलत होती है। और क्या पता आप वही परमात्मा हो, वही
26:46
अस्तित्व हो जिसको आप खोज रहे हो। ऐसा भी तो हो सकता है ना। ऐसा ही है।
26:53
मैं सच बताऊं? सच बताऊं ऐसा ही है। ऐसा ही है। हां
27:02
कुछ खोजने की जरूरत ही नहीं है। इसकी तलाश ही जुदाई है।
27:12
ऐसा भी तो हो सकता है कि आपका खोजना ही एकमात्र भ्रम हो। आपकी साधना ही एकमात्र भ्रम हो।
27:21
और ऐसा ही है। आप स्वयं सत्य हो, स्वयं साध्य हो। किसकी साधना करोगे?
27:31
किसको ध्यागे?
27:33
किसका ध्यान करोगे यार? इसलिए तो किसी का ध्यान नहीं लगता।
27:45
क्यों लगेगा ध्यान यार?
27:49
क्योंकि आप जिसका भी ध्यान करोगे वह आपसे क्षद्र है। परमात्मा जिसका भी ध्यान करेगा
27:55
वह उससे क्षद्र ही होगा ना। सीधी बात है।
28:02
इसलिए किसी का ध्यान नहीं लगता। तो आप पहले ही क्यों सरेंडर हो जाते हो कि
28:13
यार मैं कोई प्राणी हूं, जीव हूं। मैं कोई देह हूं।
28:22
आप अस्तित्व भी हो सकते हो, परमात्मा भी हो सकते हो। एटलीस्ट इक्वल तो रखो चीजों को 50-50
28:31
पहले ही आपने स्वीकार कर लिया। मेरे में सब गड़बड़ है। ऐसा है, वैसा है। अरे कुछ गड़बड़ नहीं है यार।
28:46
अरे बोलते हो नहीं गुरुदेव मन में तो विकार उठते हैं। यह उठता है वह उठता है। अरे मन में उठता है ना आप में थोड़ी ना
28:53
उठता है। मैं आपकी बात कर रहा हूं।
29:07
आप सदा से निर्विकार हो। निरंजन हो। परम शुद्ध हो।
29:18
और निर्दोष हो मालूम मतलब
29:32
मेरे पास केस आए मैं अगर जज हूं और जीव आया है।
29:40
मैं क्या कहूंगा? अरे पहली ही लाइन में मेरे को किसी विटनेस की जरूरत नहीं है।
29:47
तू निर्दोष है यार। वही मैं आप लोग को कह रहा हूं। तुम सब
29:57
निर्दोष हो।
30:20
कोई भी दोष तुमको छू ही नहीं सकता। किसी भी किस्म का दोष छू ही नहीं सकता।
30:30
असंभव। ऐसा नहीं है कि दोष आ गया फिर दोष
30:40
निकालोगे फिर उसके लिए यह कर्म करोगे वो करोगे ऐसा है ही नहीं
31:09
तो अग्नि में किसी का हाथ जल जाता है तो आप अग्नि को दोष देते हो क्या?
31:15
जल में कोई डूब के मर जाता है तो आप जल को दोष देते हो?
31:21
किसी की प्राण वायु उम्र से पहले ही चली जाती है तो क्या वायु देव को दोष देते हो?
31:30
जब इन पांचों तत्वों में ही दोष नहीं है तो इन पांचों तत्वों को जो जानने वाला है
31:38
उसमें कैसे दोष आ जाएगा असंभव
31:57
ठीक है दोस्त तुम्हारे हमारे मन में उठे,
32:00
मान्यताओं के कारण उठे, खुद को देह मानने के कारण उठे। बट वह दोष तुम्हारे नहीं है। अब तुम में
32:09
नहीं है। तुम निर्दोष हो।
32:16
परम निर्दोषता तुम्हारा स्वभाव है।
32:33
और यार तुम क्या किए हो यार तुम गलती ही तो किए हो ना और क्या किए हो बताओ
32:44
गलतियां ही किए हो ना ठीक है अवेयर रहना फिर से मत करना
32:55
अब जिंदगी में पास्ट में तुमने गलतियां ही तो की है ना यार
33:04
और क्या किया है छोटी-छोटी गलतियां उसके लिए इतना रोना
33:11
गाना और उन गलतियों का दुख भी भोगा
33:19
गलतियां फ्री में नहीं की है आपने उसका दुख भी भोगा
33:29
जब भी कोई गलती करते हो ना उसी समय वैसे दुख आ जाते हैं आपके जीवन में। उसी समय उसके दुख को आप भोग लेते हो। वो सब कट
33:38
चुका है। ऐसा नहीं कि उसके लिए फिर सही करोगे, फिर वो करोगे, फिर वो करोगे। यह ट्रैप है।
33:50
गलतियां ही तो किए हो यार। और क्या किए हो?
33:55
इतना खुद को क्यों उल्टा सीधा समझते हो?
34:21
गलतियों के अनुभव की नाव में ही तो आप सत्य तक पहुंचते हो ना।
34:56
हमेशा याद रखो कि तुम परम निर्दोष हो। इसी क्षण
35:04
परम निर्दोषता तुम्हारा स्वभाव है। तुम हो
35:13
यार। पवित्रता तुम हो। पवित्र को भी पवित्र करने वाले तुम हो।
36:08
वो कभी हवन किए हो ना तो अपवित्र पवित्र वा सर्व गतोवा
36:16
स्मरे पुंडरी काक्षम है ना ठीक है शरीर में छिड़कते हो जल सुंदर है
36:25
बट वह आपकी आत्मा के लिए नहीं है आपके लिए नहीं है वो
36:30
आप तो खुद पुंड्रीिका हो नारायण हो
36:39
नारायण को कोई पवित्र कर सकता है क्या
37:07
और निर्दोष जो है उसको मैं
37:16
क्या कहूं निर्दोष ही कहूंगा ना
37:26
कि सजा दे दूं तुमने यह गलत किया अब यह साधना करो यह ध्यान करो वो करो वो करो
37:35
तब यह कटेगा आपको दोषी ठहराना परमात्मा को दोषी ठहराना
37:45
करना है।
37:55
ये जुर्म मेरे से नहीं होगा भैया।
38:28
कई लोग आते हैं मेरे पास। मेरी तो कोई संभावना ही नहीं थी। मेरे को तो कोई चांस ही नहीं था। अब सत्संग में इतना अच्छा लग
38:37
रहा है। इतना अच्छा हो रहा है। क्या बात कर रहे हो यार? आप संभावनाओं की बात कर रहे हो।
38:47
परमात्मा संभावनाओं की बात कर रहा है। सब ट्रैप है और कुछ नहीं है। आपको इतना
38:56
अंदर भर दिया गया ना। आपके अंदर पोइजन डाल दिया गया है कि आप
39:04
नरकी हो, कीड़े मकोड़े हो, पापी हो, ऐसा हो, वैसा हो।
39:14
बहुत जतन नहीं करोगे तो कुछ नहीं होगा।
39:25
साम दाम दंड भेद
39:51
तो श्याम अधिकतर गुरु क्या करते हैं उसको सुनो। श्याम यानी
40:00
अपनी बातों से अपनी बातों से आपको भटकाना
40:12
दम यानी लालच
40:18
मोक्ष का लालच कैवल्य का लालच इनलाइटनमेंट
40:26
फिर आनंद फिर कुंडलिनी उससे नहीं भटकते आप तो लालच दी जाती है
40:33
आपको अब आप लालच से भी नहीं माने
40:40
नहीं फंसे लालच में भी नहीं चाहिए यार ये सब
40:47
तो फिर दंड कि अब तुम सड़ोगे नर्क में
40:57
तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता। कोई नहीं बचा सकता तुमको।
41:03
डराए जाओगे। कई ढंग से आपको डराया जाएगा।
41:11
कि ऐसा नहीं करोगे तो ऐसा हो जाएगा। ऐसा नहीं करोगे तो ऐसा हो जाएगा। आप उसमें भी नहीं हटे।
41:20
जो होता है हो जाए। तब गुरु क्या लाता है मालूम
41:29
भेद सबसे खतरनाक हथियार
41:37
क्या भेद राजनीति वाले भी यही करते हैं और अधिकतर गुरु भी यही करते हैं। वो गुरु
41:45
कहलाने योग्य नहीं। मतलब भेद परमात्मा और आप में भेद पैदा कर
41:53
देते हैं यार। अब आप कुछ कर ही नहीं सकते मालूम। आपको
42:01
झुकना ही पड़ेगा उस गुरु के सामने। और इससे बड़ा पाप इस धरती में नहीं है। जो
42:11
परमात्मा और आप में भेद पैदा करता है। अस्तित्व और आप में भेद पैदा करता है।
42:27
और हमारा कॉमन सेंस काम करना बंद कर देता है भेद में। पूरी धरती का यही हाल है ना।
42:42
परमात्मा आपसे अलग हो कैसे सकता है? वो तो खंडित हो जाएगा। अखंड आपसे अलग हो कैसे सकता है?
42:54
अब भेद पैदा करा दिए। अब उसको पाने की विधि बताओ। उसको जानने के कई ज्ञान छेपो।
43:04
फिर कई घटनाएं घटेंग। फिर वो आप भेद आ गया ना। अब लालच वालच सब आ जाएगी।
43:11
भेद आया तो सब चीज आ जाएगी। भय भी आ जाएगा, लालच भी आ जाएगी और गुरु की बात
43:18
में तो आप आ ही गए। ये बहुत खतरनाक चीज है।
43:29
हमेशा याद रखो परमात्मा और आप में कोई भेद है ही नहीं। हो सकता नहीं।
43:38
सोच में भी भेद नहीं है। इस अस्तित्व और आप में
43:45
तुम में और पूरे ब्रह्मांड में परमात्मा में भेद है ही नहीं यार
43:55
है ही नहीं बिल्कुल नहीं है
44:03
बिल्कुल अभेद दर्शन है यह
44:23
इस सत्य को स्वीकार करो और अभी स्वीकार करो।
44:35
इसको समझना नहीं है। इसमें कुछ दिमाग नहीं लड़ाना है। ऐसा है। ऐसा ही है।
44:46
जो कण-कण में है वह आप में भी है और सब में भी है। वो परम सत्ता वो परमात्मा
44:56
आपसे भिन्न नहीं है। वह आप ही हो।
45:15
तत्व मसी श्वेत केतु वो तू ही है श्वेत केतु
45:25
वो अनंत परमात्मा ईश्वरों का ईश्वर तू ही है तू तू
45:33
बाकी किसी और की बात नहीं कर रहा हूं।
46:04
और परमात्मा तुम्हारा होना
46:15
तुम खुद बुद्ध उसको केवल
46:25
प्रणाम किया जा सकता है। उसको कोई साधना ध्यान ज्ञान कुछ नहीं
46:34
बताया जा सकता। वह जुर्म है।
46:53
तो अपनी शुरुआत यहां से करना। यही आपका सत्य है आपको।
47:04
आप शुरुआत ही ऐसी बकवास करते हो। मैं बॉडी हूं, मैं जीव हूं। स्त्री पुरुष हूं।
47:12
शुरुआत ही गलत करते हो।
47:41
एक मिनट ब्रेक लेते हैं। है ना?
50:46
अच्छा
51:09
हां जी है कोई है कोई 11 हारा
51:18
प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
51:26
अभी डाउट तो कोई नहीं है प्रभु जी कष्ट भी कम हो गए। आपकी बातें थोड़ी समझ
51:35
लेकिन तो आया होगा कोई। बस आप
51:42
इस लेकिन को सुनो सुनो लेकिन को मत लाना। क्योंकि हर बार ये कमबख्त लेकिन ऐसे आ
51:51
जाता है। भूत प्रेत पिशाच जैसे प्रकट होते हैं ना। लेकिन मेरे को तो ये है वो है वो
51:59
अरे कुछ नहीं है आप नारायणी हो और नारायणी ही हो ठीक है सॉरी आप कुछ बोल रहे थे मैं
52:08
रोक दिया कुछ नहीं प्रभु जी बस बढ़िया है सर आज
52:29
मतलब हम क्या करते हैं? खुद के लिए लेकिन लाते हैं। प्रणाम गुरुदेव।
52:36
हां प्रणाम जी। कैसे हैं? आप कुशल मंगल है ना गुरुदेव।
52:46
हां हम तो कुशल मंगल है भाई। आप बताइए। ध्यान दीजिए।
52:58
मैं अभी एक हफ्ता से आपका ये प्रवचन सुन रहा हूं। हां अभी तीन महीने सुनिए आप उसके बाद आइए।
53:07
यहां जो भी आएगा बात करने कम से कम तीन महीने सुनेगा। उसके बाद ही
53:16
बगैर तीन महीने सुने मेरे से इधर ऑनलाइन टॉक नहीं करना। कम से कम तीन महीने सुनो
53:40
हम हम तो गुरुदेव ये तो बढ़िया लग रहा है वो वो
53:52
तो अच्छा लग रहा है। ऐसा हो रहा है वैसा होता है। पर फिर पर पर आ जाता है अपने अंदर। पर यहां पे कैसा करें? पर वहां पे
54:00
कैसा करें? अब गई भैंस पानी में। ये पर शायद और लेकिन है ना?
54:13
यह ऐसे बीच में आ जाते हैं।
54:20
लेकिन अभी तो ऐसा लग रहा है लेकिन यह हो रहा है जिंदगी में वो हो गया। ये सब आ
54:27
जाता है अचानक से। तो ये पर लेकिन और शायद आते कहां से हैं भैया?
54:40
जीव देश से आते हैं। बताओ सौरभ जी कहां से आते हैं?
54:47
हां मन से आते हैं। जीव देश से आते हैं। नहीं ये आते ही क्यों हैं?
54:58
कहीं ऐसा तो नहीं है कि आप ही इनको लाते हो। कहीं ऐसा तो नहीं है कि आप अपने जीव में
55:08
ही जीना चाहते हो। यार जीव भी ठीक हूं मैं। परमात्मा होना
55:15
अभी मेरे लिए ठीक नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं है।
55:26
ऐसा ही है। तुम्हारे बगैर चाहे ये आ ही नहीं सकते।
55:35
क्या लेकिन और क्या पर और क्या था थर्ड शायद
55:45
तुम तुम्हारे बगैर चाहिए आ ही नहीं सकते।
55:52
तुम ही लाते हो इनको पकड़ पकड़ के ताकि तुम्हारा ना वो बाउंड्री वाली लाइफ वो
55:59
छोटी सी लाइफ बढ़िया सही ढंग से चलती रहे। है ना?
56:06
हां। सब और थोड़ा-थोड़ा सत्संग भी सुनते रहो। थोड़ा थोड़ा ये जिंदगी भी चलती रहे है
56:12
ना ये तुम ही लाते हो पकड़ पकड़ के लेकिन गुरुदेव
56:18
और ये हो गया वो हो गया
56:26
तुमको अपनी विराटता में जीना ही नहीं है। तुमको अपने स्वयं परमात्मा में जीना ही
56:35
नहीं है। धोखेबाज हो तुम। हां। कौन रोक सकता है तुमको? किस में? किसकी
56:44
सामर्थ है? मन की सामर्थ है जो तुमको रोक सके।
56:51
तुमको प्रिय है ये डाउट्स, ये संदेह ये लेकिन है ना? ये ये तुम्हारे ना पुराने यार हैं।
57:01
पुराने
57:18
पुराना याराना है। हां
57:30
नहीं गुरुदेव आजकल तो ऐसा लगता है वैसा होता है। आप ही कृपा करो। ये सब पुराना
57:37
याराना है आप। अरे परमात्मा को किसी की सामर्थ्य है। कोई
57:45
बांधे सोच भी नहीं सकता कोई बांधने की। आप खुद परमात्मा हो और आप खुद चाह रहे हो
57:54
कि मैं जीव की एक्टिंग में ही रहूं। है ना? नौटंकी कर रहे हो तुम।
58:03
तुमसे बड़ा एक्टर साला दुनिया में नहीं है। सुपरस्टार हो तुम।
58:13
इसलिए तो तुमको जैसे संध्या को लगता ही नहीं कि वो संध्या के अलावा कुछ और है। विराज को लगता ही नहीं वो विराज के अलावा
58:21
कुछ और है। ज्योत को तो लगता ही नहीं ज्योत के अलावा कुछ और है।
58:27
इतनी खतरनाक एक्टिंग।
58:38
व्हाट अ परफॉर्मेंस मान गए
58:46
नौटंकी कर रहे हो तुम है ना ध्यान ध्यान
58:53
है ना साधना हा इतने साल ना साधूंगा मैं
59:04
क्या नाटक करते हो यार।
59:15
इतने साल राम का नाम लूंगा मैं। राम राम राम राम। अरे तू स्वयं राम है मेरे भाई और
59:22
सब कुछ राम है।
59:31
क्या नाटक करते हो यार। बगैर गुरु कृपा के कुछ नहीं होता। आखिरी में आपका आखिरी नाटक क्या है मालूम?
59:44
बगैर गुरु कृपा के कुछ नहीं होता। अब इस बात को आपने फिक्स कर लिया तो कुछ
59:52
होगा ही नहीं।
1:00:09
तो साफ-साफ बात यही है कि तुम प्रत्यक्ष परमात्मा हो। साक्षात
1:00:17
परमेश्वर तुम ही हो। इसी क्षण
1:00:26
वो होना होना नहीं है।
1:00:44
राम तुम ही हो, शिव तुम ही हो, कृष्ण तुम ही हो, राधा तुम ही हो,
1:00:51
अस्तित्व तुम ही हो। परमात्मा तुम ही हो। जीसस तुम ही हो। जो भी
1:01:03
जो भी आपका फेवरेट है ना वो तुम ही हो।
1:01:14
इसलिए वह फेवरेट है आपका। फेवरेट भगवान
1:01:20
या जो भी आपका फेवरेट एनलाइटनमेंट फेवरेट है तो वह भी तुम ही हो
1:01:58
तो जैसा मैं हूं मैं ऐसा नहीं।
1:02:09
अब मैं ऐसा हूं में क्या आता है? मैं बॉडी हूं। मैं माइंड हूं। मैं दोषवान हूं।
1:02:17
मैं प्रपंची हूं। मैं कामी हूं। लोभी हूं। साक्षी हूं। दृष्टा हूं। आकार हूं।
1:02:24
निराकार हूं। यह आता है ऐसा में। मैं ऐसा नहीं।
1:02:31
खुद को आपने कुछ भी कहा तो वो किस में आता है? ऐसा में।
1:02:38
ठीक। स्वयं जो अव्यक्त है परमात्माओं का परमात्मा है उसको आपने कुछ भी कहा
1:02:49
कि मैं ऐसा हूं ततक्षण
1:02:57
परमात्म देश से आपका पतन हो जाएगा। पतन होता नहीं है। फीलिंग पतन
1:03:04
वाली आ जाती है। जीव की फीलिंग में आप आ जाते हो।
1:03:12
और मैं अरे मैं ऐसा नहीं
1:03:22
सारा ऐसा कट गया। और मैं में किसी भी किस्म का ऐसा है ही
1:03:29
नहीं। कि मैं देह मन बुद्धि हूं। मैं आकार निक निराकार हूं। मैं ज्ञानी भक्त हूं। मैं
1:03:37
शून्य हूं। पूर्ण हूं। यह सब ऐसा है। खुद को आपने कुछ भी कहा तो वह हो गया ऐसा।
1:03:46
और मैं अरे मैं बोलो।
1:03:53
ऐसा नहीं खत्म।
1:04:04
कि लेकिन परवर खुद को ऐसा मानने पर ही आते हैं। है ना?
1:04:12
खुद को ऐसा मानने पर ही आते हैं।
1:04:18
मैं इंसान हूं, जीव हूं, यह हूं, वह हूं। तभी यह लेकिन किंतु परंतु सब आएगा।
1:04:28
और मैं ऐसा नहीं
1:04:35
यानी मैं देश में ऐसा का प्रवेश ही नहीं है।
1:04:44
यानी मैं ऐसा हूं ही नहीं।
1:04:54
जैसा मैं हूं। अरे जैसा मैं हूं।
1:05:14
बस
1:05:26
मैं ऐसा हूं। यह केवल आपकी मान्यता है।
1:05:33
मैं जैसा हूं। यह मान्यता रहित है। जैसा मैं हूं।
1:05:44
यह परमात्मा का क्षेत्र है। जैसा मैं हूं।
1:05:59
और मैं कभी भी ऐसा होता ही नहीं।
1:06:15
मैं मैं ही होता है बस।
1:06:31
हां जी कोई है?
1:06:36
चेंज करो यार ये लोग मौन वाले हैं। एकदम समाधि वाले
1:06:43
सबको चेंज करो।
1:06:57
हम हम हम
1:07:10
तो मैं ऐसा नहीं नहीं
1:07:17
जैसा मैं हूं वैसा हूं जो हूं सो हूं
1:07:37
प्रणाम गुरु जी प्रणाम जी
1:07:44
कुछ बोलने बोल लें गुरु जी गुरु जी हां बताइए अभी जो आप बात कह रहे हैं उसे तो ऐसा ही
1:07:53
लगता है कि मैं को मैं ही रहने दें और उसको कुछ भी नाम ना दें हम
1:08:03
तो यही सही है जी हां वो गाना था ना प्यार को प्यार ही रहने दो
1:08:11
कोई नाम ना दो जी जी बस ऐसा ही मामला है कुछ हम
1:08:19
मैं को मैं ही रहने दो कोई नाम ना दो
1:08:31
और मैं को आप जो भी नाम दोगे ना तो मैं निर्लेप है। उसमें चढ़ता नहीं है। जैसे
1:08:38
मैं को आपने बॉडी बोला, माइंड बोला। स्त्री पुरुष बोला कितने नाम दिए आपने मैं
1:08:45
को फिर आत्मा परमात्मा भी एक नाम ही है। है ना जीव नाम दिया खुद को एक मनुष्य नाम
1:08:52
दिया इतने नाम देते हुए भी आपका मैं निर्लेप है। उस पर कोई भी लेप चढ़ता ही
1:09:00
नहीं है। हम पापी पुण्यत्मा आकार निराकार ज्ञानी भक्त
1:09:08
क्या क्या नाम नहीं दिए हो मैं को फिर भी मैं निर्लेप ही हूं
1:09:16
कोई लेप चढ़ता ही नहीं मुझ पे मैं पे
1:09:31
नाम दे दूं तब नहीं चढ़ता नहीं दो तब तो है ही नहीं।
1:09:59
बस प्रभु जी और ज्यादा क्या कहें अभी तो इतना ही समझ में जो भी आया है बस
1:10:08
हम धन्यवाद आपका बहुत-बहुत
1:10:15
आप गलत टाइम पे दो-दो बार खांस हंस रहे हो थोड़ा उधर चले जाया करो ना हां
1:10:29
ओके ठीक है प्रणाम प्रणाम प्रभु जी और अभी बात आपके लिए केवल समझने की है अभी
1:10:36
आपको टेस्ट नहीं आया है मैं है ना रस नहीं आया है जी निरंतर सत्संग सुनेंग आप तब उसमें रस आ
1:10:44
जाएगा जो परमात्मा का रस हम वो निरंतर सत्संग से ही आता है और सत्संग
1:10:53
केवल मैं का होना चाहिए तो ही आता है। जी प्रभु जी ठीक है जी प्रभु जी
1:11:01
धन्यवाद प्रभु जी प्रभु जी हां जी
1:11:23
ये सेंटर को हटाओ। ये सब बगैर चेहरे वालों को तो लाना ही नहीं इधर। है ना? थोड़ा वॉच करो।
1:11:33
यह सेंटर में कोई है सब मिला के ऐसा है क्या?
1:11:41
वननेस है क्या यह?
1:12:02
हां जी कोई है और
1:12:25
यानी ये परमात्मा की लीला है कि खुद को जीव मान के खुद ही पे कह रहा है। लेकिन
1:12:33
किंतु परंतु अभी तो ऐसा लग रहा है। अभी तो वैसा लग रहा है।
1:12:41
ये परमात्मा लीला कर रहा है। यानी आप लीला कर रहे हो। है ना?
1:12:58
अभी आपको जीव वाली लीला में बड़ा आनंद आ रहा है। करो बढ़िया मजे से करो कोई दिक्कत
1:13:04
नहीं। लीला ही है। कोई दिक्कत नहीं है।
1:13:23
प्रणाम सभी बोलो हां प्रणाम जी
1:13:31
बताइए मेरे पास तो बहुत बड़ा लेकिन है
1:13:38
हां बड़ा वाला लेकिन बताओ ना यार एकदम फरमा
1:13:46
कैसे आज परमात्मा देश में आ जाते हैं। ऐसा लगता है
1:13:54
कि बस क्या चाहिए?
1:14:01
फिर ऐसा ऐसा बुरी तरह जीव देश में आ जाते हैं तो ऐसा लगता है कि ये था वो सही था। सही होता
1:14:11
है। पता होता है। सही था। फिर फिर वो टक्कर
1:14:18
हम हम ऐसा आपसे भी होता सुना है शायद भी मास्टर
1:14:26
मेरे जो गुरु जी है वो भी बताते हैं कि निष्ठा होगी जीने से निष्ठा होगी
1:14:33
जिओगे तो निष्ठा होगी तो हो जाएगा पर
1:14:40
आपको सुनते हैं तो हमेशा हमेशा ऐसा होता है कि निष्ठा होने है तो एक ही बार में हो
1:14:47
जाएगी। ऐसे जीने जीने से क्या निष्ठा है वो भी हो सकती है हम
1:14:55
ये और कल भी आपने बताया था कैवल्य ये सब जैन का टारगेट होता है कैवल्य टारगेट होता
1:15:02
है जैन का बचपन से यही टारगेट होता है तो आपको कल आपने बताया तो पहली बार रियल
1:15:11
लाइफ सुना है ग्रंथों में भी बहुत बार सुना है कि यह भ्रमणा है
1:15:18
यह मेरा स्वप्न है कि जो मैं कैवल्य की प्राप्ति करती हूं वो प्राप्ति नहीं है। वो है ही वो अभी है पर वो कभी समझ में
1:15:27
नहीं आया था। कल जब आपने बताया तो हुआ कि हां सही में वो अभी है
1:15:35
उसको पाना नहीं है। वो अभी है पर ऐसा कहीं अंदर बोध हुआ। ऐसा
1:15:45
जो आपको है ना वो नहीं है वो पता चलता है कि जो आपके पास बोध है ना वो वाला बोध नहीं है कि जो
1:15:53
ले ही ले कुछ भी हो जाए हिले नर्शी जी सुनो सुनो
1:16:01
अ आप
1:16:08
कह रहे हो जो आपको है वह वाला मेरे को नहीं है।
1:16:17
तो जो आपको है उसका पता आपको कैसे है?
1:16:26
जरूर वो बात आप में है। तभी तो आप वो कह रही है ना कि जो आपको है। अब यही रुकना।
1:16:36
आपने कहा जो आपको है। यही रुकना।
1:16:42
यानी इसका पता तो आपको भी है। तभी तो आपने कहा ना जो आपको है।
1:16:52
फिर आपकी मन बुद्धि ने कहा वो मेरे को नहीं है।
1:16:59
बट जो आपको है बस स्टॉप।
1:17:08
वो तो आपको भी है। फंस जाते हो ना मेरे चक्कर में?
1:17:24
सही फंसाते हो। अरे हर कोई बोधवान है।
1:17:34
अरे मेरे को बोध नहीं है। यह भी तो बोध ही बता रहा है ना कि मेरे को बोध
1:17:42
नहीं है। आपके मन बुद्धि लास्ट में ना खेल देते हैं कि मेरे को नहीं है।
1:17:50
फिर आप क्या कहोगे? फिर भी मेरे को नहीं है।
1:17:59
अरे फिर भी मेरे को इतना आपने समझाया
1:18:04
बताया लिखाया फिर भी मेरे को वो नहीं है
1:18:12
तो फिर भी आपको क्या नहीं है यह बता दो मेरे को
1:18:20
फिर भी आपको क्या नहीं है
1:18:27
वह है तभी तो आप बोल रहे हो ना कि फिर भी वह मेरे को नहीं है।
1:18:33
सबको है वो सबका स्वभाव है। खाली मेरी कोई पर्सनल प्रॉपर्टी थोड़ी ना
1:18:41
है। वो सबका स्वभाव है।
1:18:49
और साधन जन्य नहीं है।
1:19:00
हम बोलते हैं हमको मेरे को आत्मज्ञान नहीं हुआ है। क्या नहीं हुआ है भैया?
1:19:12
अरे क्या नहीं हुआ है?
1:19:14
तो आत्मज्ञान को ही तो आप बोल रहे हो नहीं हुआ है।
1:19:21
आत्मज्ञान को जान के ही आत्मज्ञान का ज्ञान है आपको।
1:19:28
तभी तो कहोगे ना कि मेरे को आत्मज्ञान नहीं है। आपके मन बुद्धि लगा रहे हैं। आप
1:19:35
नहीं लगा रहे हो। और स्टार्ट किससे होती है? मेरे को आत्मज्ञान।
1:19:43
स्टॉप है नहीं तो साइड फेंको
1:19:49
मैं को आत्म ज्ञान मुझे आत्मज्ञान
1:19:57
स्टॉप है ना यार
1:20:08
किसको नहीं है कौन नहीं है आत्मज्ञानी
1:20:30
निरंतर सत्संग आत्मवान का संग
1:20:37
अरे कैसे क्लियर नहीं होगा यार राक्षस लोग भी आकर मेरे से सत्संग करें तो
1:20:46
उनको भी क्लियर करा दूंगा मैं। आप लोग तो मनुष्य योनि में है।
1:20:52
कैसे नहीं होगा? आपका स्वभाव है। क्योंकि जो है उसको हटाया जा ही नहीं सकता
1:21:02
ना। और उसको लाना नहीं है कि कभी घटेगा कभी
1:21:12
होगा। वह ट्रैप है। मन को आपने समय दे दिया कि इतने समय में होगा तो मन आपकी लगा
1:21:19
देगा वाट। मन को कभी भी जिंदगी में समय मत देना कि
1:21:28
इतने जन्म में होगा, इतने दिन में होगा या कभी किसी की कृपा होगी तब तब होगा। मन को
1:21:35
आपने फ्यूचर में दिया जगह मन आपको कई जन्म में ले जाएगा फिर क्योंकि फिर फ्यूचर में
1:21:44
फिर फ्यूचर में ले जाएगा और यही आप कई जन्मों से कर रहे हो कि अगले
1:21:50
जन्म में आप ही खुद भटकना चाह रहे हो असल में
1:22:00
तो मन को समय मत दो मन मन मर जाएगा।
1:22:10
मन को पास्ट का समय भी मत देना कि पास्ट में किसी को ऐसे हुआ था। उसको
1:22:17
वैसे हुआ था। मेरे पास्ट में यह था, वह था। अरे पास्ट मर चुका है। उसी को कहते हैं पास्ट।
1:22:24
भूतकाल का मतलब क्या होता है? जो मिट चुका है।
1:22:33
तो जो मिट चुका है उसकी लाश ढोते रहते हो आप। यह पाप किए, यह पुण्य किए। फिर पाप के
1:22:41
चक्कर में कई पुण्य करने हैं। कई साधनाएं करनी है। आप खुद ही ढो रहे हो अपने भूतकाल को।
1:22:51
क्योंकि आप फंसना चाहते हो। इसलिए अपने भूत को ढूंढ रहे हो। इतने पाप
1:22:59
कई जन्मों में किए। आप काटेंगे, यह साधना करेंगे, वह करेंगे। मन को समय दो ही मत।
1:23:07
भूत मर चुका है, भूतकाल मिट चुका है। वह है ही नहीं कहीं। आप ढो रहे हो तब है नहीं तो नहीं है।
1:23:16
फेंको उसको और मन को भविष्य का समय भी मत दो।
1:23:23
तब होगा, कभी होगा, कृपा होगी तो होगा। फेंको उसको समय दो ही मत। मन मन मर जाएगा
1:23:34
और समय अतीत आप अभी के अभी हो
1:23:41
इसी मोमेंट में हियर एंड नाउ
1:23:51
सच में मैं सच में मैं हां सच में तुम
1:23:58
तुम ही एक्चुअल परमात्मा हो। एक्चुअल एक्सिस्टेंस हो। तुम ही कैवल्य हो, निर्वाणा हो,
1:24:08
मोक्षा हो।
1:24:22
इस पे संदेह मत करना। बाकी सब पे संदेह करना। झूठ है। अपनी बॉडी पे संदेह करना,
1:24:28
मन पे करना। ये जो बाहर की दुनिया दिख रही है मिटने वाली इस पे करना। अपने पे संदेह नहीं करना।
1:24:37
अपने अस्तित्व पे कभी भी संदेह मत करना।
1:24:51
बस अपने मन को समय मत देना। उसी में खेलता है वह
1:25:01
बात खत्म है। मुंह मीठा करो। भोग लगाओ परमात्मा को। अपने को कभी भोग
1:25:10
लगाए ही नहीं हो। असली परमात्मा तुम हो। जिंदा जीवंत
1:25:19
परम चैतन्य उसको भोग ही नहीं लगाते।
1:25:41
तो जितने सम्मान से आप अपने गुरु के पास जाते हो, अपने बाहर के परमात्मा के पास जाते हो, मूर्तियों के पास जाते हो, उतने
1:25:50
ही सम्मान से अपने पास जाओ तो भला
1:25:57
कि मैं ही परम परमेश्वर हूं, परमात्मा हूं। गुरुओं का गुरु हूं।
1:26:05
उतने ही सम्मान से अपने पास जाओ ना एक बार तो जाओ
1:26:12
वो तुरंत ओपन है फिर
1:26:29
उतनी रिस्पेक्ट उतने प्रेम से उतनी अपनी श्रद्धा से बस
1:26:36
अपने पास जाओ। बात अभी खत्म हो जाएगी।
1:26:51
समय मत देना। सबके अंदर साधनाएं भरी गई है। और साधना आदमी कब करता है? जब उसको
1:26:59
समय दिया जाता है। मन को समय दिए वह साधना करवाएगा, ध्यान करवाएगा
1:27:07
और उसके साक्षी आप खुद ही हो। क्या होता है?
1:27:14
फिर नई साधना फिर नया ध्यान।
1:27:22
आपको साधना की नहीं निष्ठा की जरूरत है।
1:27:30
और निष्ठा क्यों नहीं आती है मालूम दर्शी जी निष्ठा
1:27:37
क्यों नहीं आती है मालूम क्योंकि आप सही जगह जीते ही नहीं हो
1:27:44
निष्ठा केवल आत्मा में ही आ सकती है और कहीं नहीं आ सकती
1:27:55
मैं आत्मा भगवान पे
1:28:02
और अच्छा है बाकी जगह निष्ठा नहीं आती। आपके ध्यान में कभी नहीं आएगी। साधना में
1:28:09
नहीं आएगी। कितना ही जप करो नहीं आएगी। बुरा नहीं है। मतलब आप संसारी विषयों में
1:28:16
हो तो यह सब करो चलेगा। लेकिन जब आत्मवान कोई मिल गया है तो यह सब भी फेंको।
1:28:25
डायरेक्ट मैं का सत्संग और डायरेक्ट चैप्टर क्लोज
1:28:35
क्योंकि मैं डायरेक्ट हूं ना यार
1:28:43
मैं आत्मा भगवान भगवान भी अगर कोई साधना करे
1:28:50
कोई ज्ञान व्यान सीखे कोई ध्यान सीखे कोई क्रिया सीखे
1:28:58
तो काहे का परमात्मा ये सब जीव सीखता है परमात्मा नहीं सीखता
1:29:06
आपका स्वयं को जरूरत ही नहीं है इन चीजों की
1:29:16
तो बस उसको समय मत देना मन अपने मन से कामकाज लो जिंदगी में जो
1:29:25
व्यवहार करते हो बस वो नौकर चाकर है उससे ज्यादा उसको फोकस
1:29:32
नहीं करना और मन को कोई जितना वितना नहीं है। वह
1:29:45
ऑलरेडी आपका नौकर है। ऑलरेडी आप उसके मालिक हो।
1:29:58
तो बस उतने ही सम्मान से अपने पास जाओ कि हां यार यह भी तो हो सकता है ना कि मैं ही
1:30:08
परमात्मा निकली तो
1:30:19
और आप ही निकलोगे आप ही हो निकलोगे क्या
1:30:26
निकलोगे बोला तो मन फिर आ जाएगा ना खेलने में
1:30:31
अभी अभी से पहले हो आप ऐसा है
1:30:50
तो अब अब आप परमात्मा के साइड से सोच रहे हो और जी रहे हो। इससे पहले जीव के साइड से सोचते थे, जीते थे। अब साइड आपकी चेंज
1:30:58
हो रही है। और परमात्मा के साइड से जीना, सोचना,
1:31:04
चलना, फिरना अपने आप वो मैच हो जाता है। और जीव में कभी मैच होगा ही नहीं।
1:31:14
क्योंकि परमात्मा होके ही आप परमात्मा से मिल सकते हो।
1:31:19
जीव होकर परमात्मा से नहीं मिल सकते तो परमात्मा के साइड से उसी एंगल से जीना
1:31:28
शुरू करो वैसे ही सोचना क्योंकि आप वही हो तो मैच हो जाता है
1:31:36
समानसमान से मिलता है जीव के एंगल वाली वाली सारी चीजों को काट
1:31:45
दो किंतु परंतु लेकिन लेकिन ध्यान साधना ये वो
1:31:54
और परमात्मा का जो एंगल है जो मैं हूं बस
1:32:30
मतलब आप सोचते हो आप पहचान लिए जैसे यह बोले कि आपको जो हुआ है। अच्छा आप पहचान
1:32:37
लेते हो गौतम बुद्धा को जो हुआ है। महावीरा को जो हुआ है।
1:32:44
कबीर को जो हुआ है। तो ये ये आपने कैसे पहचान लिया भैया जो
1:32:51
उनको हुआ है। जरूर आप जानते हो ना उसको
1:32:58
जो उनको हुआ है। जरूर वो आप में भी है तभी तो पहचान पा रहे हो।
1:33:11
तो उन्होंने भी यही जाना था जो मैं अभी आप जान रहे हो।
1:33:45
अगर मेरी इन बातों को परमात्मा ही सुन रहा हो तो तब क्या करोगे?
1:33:56
और परमात्मा ही सुन रहा है मेरी इन बातों को। कोई दर्शी, कोई बॉडी, कोई स्त्री नहीं
1:34:03
सुन रही है। कोई मनुष्य, कोई जीव नहीं सुन रहा है।
1:34:09
परमात्मा ही सुन रहा है मेरी इन बातों को।
1:34:21
यह परमात्मा से परमात्मा का संवाद है। परमात्मा और जीव का संवाद नहीं है। अब
1:34:30
परमात्मा और परमात्मा का संवाद है।
1:34:49
तो जैसे इधर से परमात्मा बोल रहा है और उधर से सुन रहा है।
1:34:55
उधर से भी परमात्मा ही बोलेगा और इधर सुनेगा।
1:35:03
शरीर थोड़ी ना बोलता है यार। डेड बॉडी बोलती है क्या?
1:35:10
सुनती है क्या? देखती है क्या? परमात्मा ही आपकी आंखों से देख रहा है,
1:35:17
सुन रहा है।
1:35:30
देखने वाला परमात्मा ही है भैया।
1:35:59
बस हम कहां भ्रमित हैं कि तू अंतर्यामी सबका स्वामी को मैं कर दो बस
1:36:07
मैं अंतर्यामी सबका स्वामी तू को मैं करना है वो को मैं करना है बस
1:36:16
आपका मैं ही अंतर्यामी है परमात्मा
1:36:23
और पूरे चराचर का स्वामी है
1:36:35
तुम हो एक अगोच चर मैं हूं एक अगोचर
1:36:41
सबका प्राण पति तुम पूर्ण परमात्मा
1:36:50
अरे मैं पूर्ण परमात्मा
1:37:03
पारबह्म परमेश्वर आपका मैं ही पारबह्म परमेश्वर है यार
1:37:12
तू में वह छिप गया है वह ट्रैप है तू शुरू में अच्छा लगता है थोड़ा रस आनंद
1:37:20
आ जाएगा हल्काफुल्का लेकिन वो ट्रैप है असली रस मैं में ही आएगा परमात्मा का
1:37:31
बताया था ना भेद बहुत खतरनाक भेद किया गया है आप में और परमात्मा
1:37:39
आपकी रीड की हड्डी को ही तोड़ दिया गया है।
1:37:52
तो बस अपनी लैंग्वेज भी चेंज कर दोगे तो बात खत्म हो जाएगी। पानी
1:38:09
आप जिंदगी भर चेक करते रहते हो यह बुद्ध पुरुष है वो है
1:38:15
वो नहीं है वो है वो नहीं है यह इनलाइटेंड है यह नहीं कभी अपने को देखे हो क्या पता
1:38:22
आप ही इनलाइटेंड हो आप ही वह बुद्ध पुरुष हो
1:38:34
खुद को कभी हमने देखा ही नहीं और ढूंढते रह गए जहां में
1:38:49
और आप ही वो बुद्ध पुरुष हो
1:38:58
आप ही थैंक्स एग्जैक्ट आप ही जिसको आप कहते हो ना मैं वही इनलाइटेंड
1:39:06
है। वही मोक्ष है, कैवल्या है, निर्वाणा है,
1:39:14
नाम है यह सब एक ही मैं के वही परमात्मा है, अस्तित्व है।
1:39:23
वही मतलब आप मैं
1:40:03
हां जी
1:40:24
पहले पूरा पूरा दुनिया शान मारे
1:40:32
अपने को देखे ही नहीं क्या पता वो इनलाइट मास्टर मैं ही हूं।
1:40:50
और आपका मैं ही मास्टर है। याद रखना रियल मास्टर
1:40:56
एक्चुअल मास्टर एक्चुअल गॉड एक्चुअल एकिस्टेंस।
1:41:02
यह जो सोचते हो ना यह आपकी यह कल्पना का एक्सिस्टेंस है जो आंखों से थोड़ा सा दिखता है। कुछ सितारे दिखते हैं। एक्चुअल
1:41:11
एग्जिस्टेंस आप हो। यह तो क्षद्र है उसके सामने।
1:42:10
तो यस टाइम यस
1:42:29
तो वो जो पंछी का बच्चा होता है ना अंडे में जो पेड़ पर है
1:42:38
अब वह अंडा तोड़ना है और उसको उड़ना है तो शुरू में डर लगता है। है ना?
1:42:49
तो ये जीव का जो अंडा टूट रहा है ना उसमें आपको डर लगता है।
1:42:55
अरे तोड़ो और मारो जंप। वो आप हो ही।
1:43:01
उड़ जाओ एकदम स्वतंत्र।
1:43:10
पंछी को उड़ना आता ही है। आपको परमात्मा होना आता ही है क्योंकि आप
1:43:19
वही तो हो। यह आपको सीखना नहीं है। मेरे से भी नहीं
1:43:28
सीखना है। इवन परमात्मा होना आपको आता ही है। वह आपका स्वभाव है।
1:43:36
इवन होना भी नहीं है। आप हो ही
1:43:48
कुछ नहीं है यार। परमात्मा की तरह जीना शुरू कर दो। वो मैच खा जाता है। बस जीव की
1:43:55
तरह जिओगे कभी मैच नहीं खाएगा। करोड़ों जन्मों में नहीं खाएगा। बस अभी के अभी परमात्मा की तरह जीना शुरू
1:44:03
कर दो। वह तुरंत मैच खा जाता है। समान समान से मिल जाता है।
1:44:14
आगे आप स्वतंत्र हो। परमात्मा की यह स्वतंत्रता है कि वह जीव
1:44:22
होके भी, शूद्र होकर भी जी सकता है। यह
1:44:29
आपकी अज्ञानता नहीं है। हम क्या सोचते हैं?
1:44:34
कि हम कहीं फंस गए, कोई अज्ञानी हो गए हैं। कुछ गड़बड़ हो गई हमारे साथ। ऐसा
1:44:39
नहीं हुआ है भैया। यह आपकी स्वतंत्रता है कि क्षद्र से क्षद्र से क्षद्र से भी
1:44:48
क्षद्र हो सकते हो और विराट से भी विराट हो सकते हो।
1:44:55
किसी और ने बांधा ही नहीं है। खुद की मौज से यह सब लीला कर रहे हो आप।
1:45:10
तो लीला जब पीड़ादाई हो जाती है तब फिर आप अपने स्वरूप में परमात्मा में आ जाते हो।
1:45:31
अब लेकिन ना लेकिन किंतु परंतु ऑलमोस्ट खत्म हो गया है सबका
1:45:38
थोड़ामोड़ा ही बचा होगा लगता है बचा है क्या किसी का
1:45:47
पर लेकिन शायद अब ऑलमोस्ट खत्म है ना ये देखो देखो सत्संग की कितनी महिमा
1:45:55
है। दो चार घंटे और बोल दूंगा ना तो आप लोग ही
1:46:02
मेरे को बताने लग जाओगे। अरे मैं हूं हां सही बता रहा हूं मैं।
1:46:10
ये पावर होता है सत्संग का। वो उधर से बोलना शुरू कर देता है। होता है ऐसे
1:46:17
यानी सत्संग की अनंत महिमा है। आत्मवान का सत्संग मिल गया ना यानी मत
1:46:26
सोचो आचार्य श्रेणी साधना बताएगी। आत्मवान
1:46:38
साधना नहीं बताएगा। आत्मवान आत्मा ही बताएगा।
1:46:46
साधना नहीं बताएगा। बहुत मजबूरी में एक हरी ध्यान निकाला हूं मैं।
1:46:56
उसमें भी जीव भाव नहीं घेरेगा। लास्ट में मैं आ जाओगे आप।
1:47:13
तो आत्मवान साधना बताएगा नहीं और आत्मवान साधना सुनेगा नहीं
1:47:24
आत्मवान आत्मा बताएगा आत्मवान आत्मा सुनेगा तब गाड़ी मैच हो जाती है
1:47:43
आत्मा को आत्मा होके ही सुनोगे ना तब तो सुन पाओगे ना साधक होकर थोड़ी ना सुन पाओगे
1:47:51
वो तो बाधक है वहां साधक बाधक है वहां हां
1:48:03
बताओ आप कौन सा किंतु परंतु है हम भी सुने है कोई
1:48:18
जो भी शुरू से सुन रहा है उसको छुएगा नहीं किंतु परंतु कोई डाउट
1:48:28
और फिर भी अगर छू रहा है तो थोड़ा और बोल बोल देता हूं मैं। अरे मलंग कहां चले गया भैया?
1:48:41
बाजू में है क्या?
1:48:47
अरे आ जाओ खांस लेना भैया। इधर है इधर। सुन रहे हो ना? हां सुनना
1:48:57
जरूरी है भैया।
1:49:17
हम हम
1:49:29
जिन जिन नजरों ने मुझे पहचान लिया है
1:49:35
उन नजरों में वो है तभी पहचान लिया है
1:49:42
जिन नजरों ने गौतम बुद्धा को क्या हुआ महावीरा को क्या
1:49:49
हुआ पहचान लिया है उन नजरों में वह है
1:49:55
तभी पहचान लिया है जो नजरें परमात्मा को पहचानती हैं, वह
1:50:02
परमात्मा से कम नहीं होती। आप बोलते हो ना अभी मुझे परमात्मा नहीं
1:50:12
मिला। परमात्मा से मिलके ही कहते हो परमात्मा नहीं मिला।
1:50:19
वरना कह ही नहीं सकते। यानी आपको परमात्मा का पता है तभी कह रहे
1:50:28
हो ना परमात्मा नहीं मिला आपकी मन बुद्धि कह रही है
1:50:36
आपको परमात्मा का पता है तभी आप कह सकते हो कि परमात्मा
1:50:45
नहीं मिला। परमात्मा का अनुभव करके ही कहते हो
1:50:54
परमात्मा फिर मन बुद्धि आपकी आ जाती है। नहीं मिला
1:51:11
हम हम
1:51:29
ठीक है। अब इन सबको चेंज करो। नया-नया परमात्मा को दिखाओ।
1:51:43
हम हम हम हम हम
1:51:51
अरे क्या शैलेश जी हो कैसे यार प्रणाम प्रभु जी प्रणाम प्रणाम
1:52:00
अरे प्रणाम भगवान आप थोड़ा मंजूरी दो तो थोड़ा बोल दूं
1:52:06
अरे बिल्कुल मंजूरी है वो परसों मैंने एक सत्संग सुना था सिनेमा
1:52:13
के आगे का पीछे का और बालकनी में हम बालकनी में बैठ के विसल बजा रहे हैं अभी
1:52:22
और हां के ना के बीच में डांस कर रहे हैं बहुत सुंदर
1:52:31
प्रणाम प्रभु जी प्रणाम कोटि कोटि वंदन कोटि कोटि दंडवत प्रणाम प्रणाम प्रणाम जी
1:52:40
तो वो बालकनी वाला क्या नाम से डाला है यार
1:52:48
क्या नाम है मेरे को बताना तो उसको है ना उसको सबको सुनना चाहिए हां बालकनी वाला भी बहुत अच्छा है मैंने
1:52:56
ये धरती के ऊपर सत्संग जो डाल दिया ये मेरा धरती के अंदर पूरा का पूरा सत्संग
1:53:03
नाम याद नहीं है लेकिन वो दोनों बेस्ट है दोनों बेस्ट है ओके
1:53:11
जो धरती वाला तो जो है ना वो तो बात जाने दो बात जाने दो
1:53:17
पहले मैंने वो सिनेमा वाला सीखा था सुना था तो मैंने बोला कि बालकनी के ऊपर बैठ के अभी विसल ही बजाएंगे हम और बाद में दूसरा
1:53:27
के नाक के बीच में बालकनी भी है वो बालकनी वाले का मेरे को लिंक शेयर करना मैं सबको शेयर कर दूंगा है ना
1:53:36
अभी अभी कर देता हूं दो मिनट के अंदर हां जी हां जी हां और ये जो आपने बोला ना धरती के अंदर
1:53:43
ये बहुत बहुत लव यू
1:53:53
बिग हगी बाजू में हो तो वो रिएक्शन आ जाएगा
1:54:02
लेकिन करना नहीं है। डरता हूं डरता हूं। इसको कंट्रोल रखना है भैया। है ना?
1:54:13
अरे प्रणाम प्रभु प्रणाम जी प्रणाम
1:54:21
और अभी वाले के बारे में तो आप बताए नहीं हम क्या क्या बोल गए अभी
1:54:26
अभी वाले में जो लास्ट में बताया
1:54:32
वो है और ना के बाद बात जो हो रही थी ना वो बहुत
1:54:41
क्या बोलू मैं क्या बोलू प्रभु जी क्या
1:54:58
प्रभु जी कोटि और कुछ नहीं प्रणाम है प्रेम प्रणाम
1:55:07
बस
1:55:27
ठीक है ये पुराना इधर वाला हटाओ ये सब जनक जी को भी हटाओ
1:55:40
न्यू फसेस
1:56:01
हम हम हम हम हम
1:56:19
अरे कहां हो सब यार?
1:56:33
अब यह वाला सुने वह वाला सुने आपका वह अच्छा था यह सब फेंको अब परमात्मा की आवाज
1:56:40
आनी चाहिए मेरे को उधर से सामने से
1:56:47
अब वहां से भी परमात्मा ही तो बोलेगा ना
1:56:57
उससे कम वाली वॉइस नहीं सुननी है मेरे को।
1:57:32
मतलब वही पुराने पुराने को सब कुछ तू चालू कर देता है।
1:57:41
क्या पता कोई नया सुन रहा हो उसको स्ट्राइक हो गया हो यार।
1:57:49
हम
1:58:01
हम हम
1:58:31
मैं आता हूं वहां चालू कर फिर उसको।
1:58:44
मेरा चेहरा दिख रहा है क्या? देखो उधर राइट करो।
1:58:54
नीचे कौन-कौन है? देखूं तो खाली सुनते हैं क्या ऐसे?
1:59:00
सुनना या ना वही हो जाना है। इधर ले आ इसको।
1:59:13
इसको लाओ आगे।
1:59:24
आ हा हा खत्म ही कर देते हैं मॉप आज।
1:59:35
हां ये परफेक्ट है यार। बहुत शानदार यस हम
1:59:43
तो उसको रोशनी को इधर लाओ आगे सौरभ जी आप इधर आ जाओ इधर नहीं बैठना कोई
1:59:54
सामने ये चालू राइट ना
2:00:07
इधर चालू करो
2:00:17
हम
2:00:40
हा बताओ क्या पोजीशन है क्या है सब बात करो
2:00:47
मेरे से ऐसे ही सुन रहे हो कि रियल में सुन रहे हो
2:00:53
हां सौरभ को हटाओ उनसे बात हो
2:01:02
नहीं दे
2:01:15
हां जी कौन सी है मेरी ये कैसे सुबह का था
2:01:32
इनको भी हटाओ। बात हो गई रश्मि जी को
2:01:44
बताओ आप लोग क्या पोजीशन है? ऐसे चुप मत बैठो।
2:01:53
प्रेम प्रणाम गुरु जी। प्रेम प्रणाम। हां जी।
2:02:00
जब आप सारा बोल रहे थे ना तो इधर से ये बैठा ही बोल रहा था मैं हूं। मैं ही हूं।
2:02:11
मैं ही हूं। एंड जब पहले भी आपने जब से शुरू किया है तब से वैसे भी
2:02:20
देखने वाले में सुन रही थी कि जो देखने वाला है वही दिख रहा है। उसको सुनते सुनुनते ही मैं वॉक कर रही थी
2:02:28
तो सारा प्रकट ऐसे लग ही नहीं रहा था कि कोई शरीर चल रहा है। बस उसी मैं में ही
2:02:37
मैं ही चल रही है। मैं में मैं ही चल रहा है। बस ऐसा वो हो रहा था सारा और बहुत आनंद आनंद बना
2:02:45
था और बस ये आपका मैं हूं तो पहली वीडियो में ही क्लियर हो गया था महाराज की कृपा से बस
2:02:54
मैं हूं बस अब इसको बस जैसे आप बोलते हो निष्ठा रखनी है बस उस निष्ठा में आपका आशीर्वाद चाहिए
2:03:02
अब आप स्टॉप हो जाओ ठीक जा रहे हो बट अभी आप सुने ही नहीं मेरे को अभी जो मैंने
2:03:07
बताया ना आपकी आवाज परमात्मा की हो जाती
2:03:17
प्रेम प्रणाम प्रभु श्री
2:03:24
आपके चरणों में कोटि कोटि वंदन प्रभु हां आपका फेस नहीं दिख रहा
2:03:36
प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रभु जी हां जी आपके चरणों में कोटि-कोटि वंदन प्रभु
2:03:45
आपकी सत्संग कृपा से मैं आज जो आनंद में हूं सहज शांति में मस्त हूं तृप्त हूं
2:03:53
प्रभु आपसे मेरा प्यारा प्यारा बहुत प्यारा आलिंगन प्रभु जी आप हमारे जीवन में
2:04:01
सत्संग ना देते तो हम कहां भटक रहे होते पता नहीं आपकी कृपा से भटकना खत्म हुआ
2:04:09
प्रभु यानी सारी साधनाएं खत्म हो गई। मेरे प्यारे प्रभु
2:04:17
बस मैं केवल मैं मैं से मैं मिल गया। गुरुदेव आपकी सत्संग कृपा से कितनी तृप्ति
2:04:24
कितनी सहजता कितनी सरलता कितना आनंद क्या
2:04:30
बताऊं प्रभु बस अहो अहो भाव अहो भाव आपके चरणों में प्यारा प्यारा प्रणाम प्रभु जी
2:04:38
प्रणाम प्रणाम बहुत सुंदर
2:04:50
प्रणाम गुरुवर आपके चरणों में कोटि कोटि कोटि कोटि वंदन है। हम्म।
2:04:58
हां जी। ऐसा लगता है जैसे कि बोल इन सब जो जितने भी यहां पे प्रेजेंट है मेरे को ऐसा
2:05:06
लगता है कि शब्द इनकी बॉडीज है और शब्द मेरे ही रूपी है। मुझे ऐसा फील होता है कि
2:05:12
मैं ही बोल रही हूं इन सब में से। मुझे ऐसा ही लगता है और मेरे को इन सब में अपना होना ही लगता
2:05:22
है कि ये जो मैं बोलना चाहती हूं मेरी जगह पे यही बोल रहे हैं और मेरे शब्द खत्म हो गए हैं।
2:05:30
ओके ठीक है ये भी थैंक यू थैंक यू सो मच अपना प्यार देने के
2:05:38
लिए अपना सब कुछ देने के लिए थैंक यू थैंक यू आज प्रणाम
2:05:52
प्रणाम प्रणाम
2:06:00
मैं राम करण प्रसाद बोल रहा हूं भगवान हां जी रामकरण जी कैसे हो
2:06:09
भगवान आपकी कृपा है अब तो ऐसे ही लगता है अभी से पहले मैं नहीं हूं तो
2:06:17
यस बहुत आनंद है भगवान बहुत आनंद है हां
2:06:26
कोई डाउट वोट नहीं होता अब नहीं प्रभु अब नहीं
2:06:35
अब तो उसी में थोड़ा इधरउधर जब कभी होता है तो बहुत मतलब तकलीफ होने लगती है कि वो
2:06:44
लगता है कि मैं वही हूं लेकिन अपने आनंद में सेंटर में रहना का आनंद बिल्कुल 24 घंटा उसी में अब तो पड़े रहने का दिल करता
2:06:54
है तो उसी में पड़े रहते लगता है अभी से अभी हूं और पास्ट भी अब ध्यान नहीं आता फ्यूचर में कुछ होना नहीं
2:07:02
कुछ बनना नहीं बाकी मैं कुछ जानता नहीं प्रभु इसलिए जानने का शौक भी नहीं रहा
2:07:09
ठीक है ये भी है ना यस अभी सबके जवाब ठीकठाक आ रहे हैं। बट
2:07:20
मेरे को जो सुनना है वो अभी तक वॉइस आई नहीं है।
2:07:28
ओके और ऑन करो सब बताओ थोड़ा थोड़ा कोई तो होगा ही
2:07:37
प्रेम प्रणाम सब प्रेम प्रणाम क्या बोल रहे हो?
2:07:46
मैं आपको हूं हम और ऐसा मुझे एक गहरा मौन
2:07:57
लगता है बस गहरा मौन जिसमें ना एक सवाल भी उठाना भारी लगता है
2:08:04
और बहुत ही आनंद से वो शांति रहती है।
2:08:13
बहुत ही सहज में है और हम बस और बस सवाल नहीं है मेरा कोई भी बस
2:08:20
अपनी कृपा इतनी बनाए रखिएगा कि मैं हमेशा आपके सानिध्य में आपके चरणों में रहूं और
2:08:27
जब तक यह स्वास है
2:08:36
मैं निरंतर सत्संग करती रहूं। बहुत-बहुत धन्यवाद।
2:08:46
नहीं बहुत सुंदर है। मौन जब आनंद के साथ है तो वो परमात्मा का क्षेत्र है। मौन जब
2:08:54
तक केवल मौन है। तो वो जीव का मौन है। और मौन जब आनंद के साथ है तो वह परमात्मा का
2:09:03
क्षेत्र आ गया। बहुत सुंदर मौन में रस और आनंद होना चाहिए।
2:09:12
बहुत बढ़िया।
2:09:24
प्रेम प्रणाम प्रभु। प्रेम प्रणाम जी। कुछ समय पहले जब मैंने आपसे बात किया तो
2:09:32
मैंने बताया कि मुझ में श्रद्धा और निष्ठा की कमी है और आपने बताया आश्वासन दिया कि ये अवश्य आ जाएगा और मैं बहुत ही धैर्य से
2:09:42
कह सकता हूं कि मुझ में निष्ठा की कमी नहीं है। अभी श्रद्धा बहुत है। डिस्ट्रक्शन पूरी तरह चले गए। सब समझ आ
2:09:49
रही है और मैं सिर्फ आठ घंटे जो सोता हूं उसके अलावा बाकी सब टाइम आपको सुन रहा
2:09:56
हूं। बहुत खुशी हो रही है और कुछ सुनने का मन नहीं कर रहा और किसी को सुनने का मन नहीं कर रहा है
2:10:04
और जो आज आपने एक बात बताया कि मैं हूं अहंकार रहित स्थिति है।
2:10:11
तो इसमें मेरा दो थॉट आए थे उसी समय कि एक मैं हूं एक बहुत ही सुप्रीम स्टेट है
2:10:18
जिससे वो किसी के सामने झुकता नहीं ना किसी मतलब ना अपनी जगह से हटता है।
2:10:26
निरंकार होते हुए यह कैसे होता है? यह मैं आपसे सुनना चाहता था।
2:10:32
नहीं नहीं आप समझे ही नहीं। किसी के सामने झुकने का सवाल तब होगा जब
2:10:40
मैं के अतिरिक्त कुछ और होगा। जब मैं के अतिरिक्त
2:10:46
कोई और है ही नहीं। अदरनेस दूसरा कोई है ही नहीं। तो किसके सामने आप झुको?
2:10:57
रुको तो तो किसके सामने झुकोगे आप
2:11:02
और किसके सामने नहीं झुकोगे आप यह भी है। वहां ऐसा नहीं है कि झुक ही नहीं सकता
2:11:10
आदमी। वो प्रेमपूर्ण हो जाता है। कीड़े मकोड़ों की भी वो पूजा कर सकता है और झुक सकता है। वहां
2:11:18
है ना? मनुष्य और देवताओं की तो मैं बात ही नहीं कर रहा हूं। वह कीड़े मकोड़े की भी पूजा कर सकता है।
2:11:26
इतना प्रेमपूर्ण होता है। वहां दूसरा है ही नहीं तो किसी के सामने भी नहीं झुकता है। ऐसा भी होता है। वहां
2:11:34
कोई फिक्स डिपॉजिट जैसा कुछ नहीं है कि झुकेगा ही नहीं या झुकेगा ही ऐसा कुछ नहीं है। वहां
2:11:42
सिर्फ मैं हूं क्योंकि मेरी आजादी है। मेरी मौज है।
2:11:49
ओके। तो अभी आप सुनो थोड़ा तो और क्लिटी आएगी। किसका आज प्रेम
2:11:56
प्रणाम श्रीनिवास जी प्रेम प्रणाम गुरु जी
2:12:06
हां किशोर जी प्रेम प्रणाम बस आप मैं ही बोल रहा हूं तो मैं क्या बताऊं
2:12:16
ओके जी मैं ही बोल रहा हूं तो मैं क्या बताऊं ओके
2:12:24
बस सुनने में ही मजा आता है क्योंकि
2:12:36
बस आज आनंद लीजिए
2:12:51
आज है कोई और प्रेम प्रणाम प्रभु जी सुरेश सुरेश जी प्रेम प्रणाम कैसे
2:12:57
प्रणाम बस बहुत अच्छे
2:13:05
आपकी वॉइस नहीं आ रही है सुरेश जी हां प्रेम प्रणाम
2:13:15
हां प्रेम प्रणाम जी मैं कह रहा था सारे परमात्मा ही परमात्मा को सुन रहे हैं बस यहां
2:13:23
आज आप में वह सुगंध है वह उतर चुकी है वह बात
2:13:30
है ना वो एक्चुअल है
2:13:38
और आपको रात को स्वप्नपना आते हैं क्या?
2:13:45
नहीं आते हम ओके बहुत सुंदर
2:13:58
और अपने अतिरिक्त कुछ और है ऐसा कुछ लगता है बस मैं ही मैं हूं
2:14:05
और तो कुछ है ही नहीं हम हम अब सारे संशय गिर गए हैं पहले बहुत संशय
2:14:14
हम अब सारे संशय गिर गए हैं। आज
2:14:24
नहीं बहुत सुंदर है। अपना ख्याल रखें। आत्मनस्टिक रहें है ना?
2:14:31
प्रणाम सुरेश प्रणाम प्रणाम।
2:14:52
यस प्रेम प्रणाम प्रभु जी
2:14:59
प्रणाम अरुणा जी प्रभु जी आपने जो मैं की उस प्रभु की इतनी
2:15:07
विशालता और उसी विशालता में हमें लाकर खड़ा कर दिया है कि है ही वो है ही वो पर एक बात
2:15:15
पूछना चाहती थी प्रभु जी जब मैं शांत होती हूं तो एक आवाज अंदर से चलती रहती चलती
2:15:22
रहती है मैं उसके बारे में जानना चाहती थी प्रभु जी हम काहे की आवाज
2:15:31
वो जैसे कोई जो टिडडी वैसे नहीं होते इंसेक्ट्स होते हैं कोई मैं सोचती हूं शायद दरवाजे के पीछे से आवाज आ रही है
2:15:40
कहीं से लेकिन जब मैं देखती हूं तो वो मेरे अंदर से दिमाग के ना लेफ्ट साइड से ऐसे आवाज चलती है। ध्यान मत दो आवाज ही तो
2:15:49
है और ठीक तो है क्यों ध्यान देते हो इन चीजों में है ना ठीक है गुरुदेव नहीं वो कई बार वो चलती
2:15:56
रहती है चलती रहती है ठीक है चलने दो हां ठीक है
2:16:03
ध्यान मत दो है ना चले तो ठीक ना चले तो ठीक ठीक है
2:16:13
प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
2:16:29
हां थोड़ा थोड़ा जल्दी जल्दी बताओ तो मैं सबकी थोड़ी सुन लूं तो मेरे को भी आईडिया हो ना कि आप लोग सुन रहे हो कि बस
2:16:38
बुद्धि से सुन रहे हो। थोड़ा जल्दी बोलो। जी प्रभु आज ऐसा था कि जैसे दो महीने का
2:16:47
बच्चा होता है ना बहुत भूखा भी है और उसको दूध पिलाने वाली मां दोनों अनुभव एक साथ
2:16:54
स्व को ही हो रहे थे मतलब कोई दूसरा था ही नहीं मतलब बच्चा अलग नहीं था मैं अलग नहीं थी दोनों मैं ही था और वो जो आनंद था वो
2:17:04
जो नशा था वो बहुत ही मतलब उसमें लगा कि वाकई मेरा होना जो मैं है कहीं पे हां ही
2:17:13
है। है सदा है। ओके। मतलब तो ठीक है। वो हमेशा ही है। मतलब उसमें कोई कमी नहीं
2:17:21
है। बस सब कुछ है। हम्म हम ओके ठीक है। प्रेम
2:17:30
प्रेम प्रणाम। प्रेम प्रणाम प्रभु जी।
2:17:38
प्रेम प्रणाम। बोल रही हूं और
2:17:45
मुझे बस इतना सा कहना था कि जो परमात्मा का अनुभव अपने अंदर जब अगर हम किसी को
2:17:53
बताते हैं ना तो एकदम कोई विश्वास नहीं करता है कि भगवान अपने अंदर है लेकिन हम जान चुके स्टॉप बंद करो स्टॉप
2:18:03
अब रुको आप किसी को बताना क्या है किसी को बताना क्यों है
2:18:11
और परमात्मा का अनुभव अनुभव नहीं होता। आप ही परमात्मा हो। इसलिए किसी को परमात्मा का अनुभव नहीं होता क्योंकि वह खुद
2:18:18
परमात्मा है।
2:18:29
ओके एनीबडी किसी को बताते तो यकीन नहीं होता। यह क्या है यार? किसी को बता बताना क्यों है आपको?
2:18:45
ठीक है आगे आगे जल्दी यस मीरा मौन नहीं रहना है रमेश जी
2:18:53
प्रभु प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम
2:18:59
अभी सत्संग ही जीवन लगता है प्रभु जीवन ही प्रभु
2:19:06
क्योंकि सत्य का संग सत्संग का पावर होता है ना सत्य का संग
2:19:15
यानी मैं का संग यानी आपका संग आपका सत्संग मैं का आपका बीच में भेद
2:19:26
काट देता है प्रभु यहां वहां सब कट हो जाते हैं प्रभु केवल सत्संग बजता
2:19:35
है सत्संग यानी मैं बजता है आप सब बजता है प्रभु
2:19:43
बहुत सुंदर प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम
2:19:58
हम हां राजू जी
2:20:09
आपकी आवाज हम
2:20:20
हम नहीं आ रही है
2:20:30
प्रभु जी प्रणाम अभी आवाज आई हां राजू जी आ रही है जी प्रभु बोलने की इच्छा नहीं होती है
2:20:38
केवल सुन पा रहा हूं ओके ठीक है जी
2:20:46
ओके जी
2:20:58
प्रणाम गुरुदेव प्रणाम हेमंत जी
2:21:06
बस प्रणाम ही कहना था गुरुदेव और बहुत बहुत प्यार करते हैं आपसे बहुत प्यार
2:21:14
करते हैं और आप के चरणों में कोटि कोटि वंदन लाइट ऑन करना प्रणाम
2:21:28
प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम अहो भाव आपसे बात करने का मन था कोई सवाल
2:21:38
नहीं है हम हम आप कैसे हैं प्रभु?
2:21:46
बस आनंद है विनय जी तो प्रेम प्रणाम है।
2:21:53
दो महीने जो आपका सत्संग चला उसको काफी सुन लिया 70%
2:22:00
बहुत ही आनंद आता है। जब आप शेष नारायण में ले जाते हैं तो अनुभूति एकदम अलग होती
2:22:07
है। जब निर्विचार का विचार है, अनुभूति कहीं और चली जाती है। जब आप स्टॉप बोलते
2:22:14
हो तो कहीं और ही पहुंच जाते हैं। तो जो टचिंग है वो यहां से भी आ रही है। और
2:22:23
बहुत मन करता है पहुंचने का आपके पास फिर से तो जल्द आऊंगा। कोशिश करूंगा जुलाई में पक्का। आपकी कृपा रही तो पहुंचूंगा फिर
2:22:32
से। भाव प्रभु हां जी प्रेम प्रणाम
2:22:41
प्रेम प्रणाम तो
2:22:49
एक नियम हर कोई पहले याद रख लो। यह सुनने के बाद भी अगर किसी का कुछ छूट
2:22:58
गया, कुछ मिस हो गया या कुछ क्लिक नहीं हुआ।
2:23:06
अगर वह अहो भाव में रहता है, वह अहो भाव में आ जाता है कि जितना भी क्लिक हुआ,
2:23:14
जितना भी अनुभव हुआ, अरे वो बहुत है। इस जन्म के लिए बहुत है।
2:23:22
तो वो अगर 10% में भी है तो उसको 100 कर दिया जाएगा।
2:23:28
यह मैं का नियम है। इस नियम को फॉलो किया करो। हमेशा अहो भाव में जिया करो। जो अहो भाव में जी रहा है,
2:23:45
परमात्मा उसको छोड़ ही नहीं सकता। मैं चैलेंज करता हूं।
2:23:52
परमात्मा को जानने पाने का वर्ड्स मैं बोल रहा हूं। जानना पाना परमात्मा को जानने और
2:23:59
पाने का सबसे सुगम तरीका है अहोभाव। जीवन में जो कुछ भी है अहो, अध्यात्म में
2:24:08
जो कुछ भी है अहो। सत्संग में जो भी मिला अहो तो वो फुलफिल हो जाओगे।
2:24:18
और 99% में हो और शिकायत कर रहे हो कि यह बच गया वह हो गया तो फिर
2:24:25
1% में ले आया जाएगा। तुरंत डाउन शिकायत में डाउन हो जाता है। अहो में
2:24:35
कंप्लीट हो जाता है। तो हमेशा अहोभाव में जियो
2:24:44
जो भी अनुभव होते हैं जो भी शांति मिलती है वह बहुत है ना यार
2:24:52
बहुत है उसका धन्यवाद उसका अहो अस्तित्व के प्रति
2:25:04
होना ही चाहिए और थोड़े-थोड़े में रोओगे गाओगे तो और
2:25:13
डाउन कर दिए जाओगे ये नियम अस्तित्व
2:25:26
ओके
2:25:56
प्रणाम अमित जी हां प्रणाम जी
2:26:03
जी जितना मैं समझ पाई हूं मैं को वो ये है कि मैं हूं तो मेरी सारी मर्जी है जीव हूं
2:26:12
हूं या परमात्मा, प्रेम हो या ज्ञान, गुरु हो या शिष्य और शायद यह सब एक साथ भी।
2:26:22
हम आपका फेस नहीं दिख रहा है। सॉरी फेस नहीं दिखा सकती अभी।
2:26:29
ओके। तो इसको अभी आप केवल समझे हो। ये आपका
2:26:39
होना नहीं चाहिए। केवल बुद्धि से क्लियर कर लिए हो। मेरे को सुन सुन के कि प्रत्यक्ष होना बहुत अलग होता है। है ना?
2:26:49
और समझना अलग होता है। ठीक है। हां जी। ठीक है।
2:27:11
प
2:27:22
अरे रीना जी बहुत दिन बाद दिख रहे हो आप हो कहां भाई
2:27:31
गुरुदेव प्रणाम प्रणाम प्रणाम जी बहुत बहुत मस्त हूं गुरुदेव।
2:27:39
अच्छा सत्संग सुना आपने हां गुरुदेव
2:27:48
अच्छा बहुत सुंदर मस्त रहो आनंद में रहो है ना अच्छा
2:27:56
बहुत धन्यवाद प्रणाम जी
2:28:35
अब विश्राम दिया जाए वाणी को।
2:29:01
प्रणाम प्रभु जी प्रणाम
2:29:07
जी बस की सत्संग सुन रहे हैं या दरियाबंद में आए थे आपके पास पांच पांच दिन लग
2:29:16
और भी संगत सुन रहे हैं खड़े रहना तक
2:29:28
बहुत अच्छा है।
2:29:40
एक रमेश जी की वॉइस थोड़ी वहां से थी। बाकी जो मैं सुनना चाह रहा हूं अभी तक वो वॉइस तो आई नहीं है मेरे पास। स्थिति सबकी
2:29:50
अच्छी है। सब सुंदर है। यहां तक
2:29:56
बट वो अल्टीमेट वॉइस अभी सुनाई नहीं दी है।
2:30:04
प्रेम प्रणाम हम कौन बोल रहे हैं?
2:30:12
हां मैं नागपुर से रमा बहन रमनीता कर रही थी। आई थी मैं गरियाब हां रमनीता जी
2:30:20
आपने एक बात बोली ना कि मैं अंतर्यामी मैं सबका स्वामी एकदम सही चोट है। एकदम सही
2:30:27
बात लग रही है। पूरी एकदम सही है वो। जी कैकई ना आरतियों ने इतने शब्द हल्के दे
2:30:34
दिए मैं मूर्ख खलकामी इतना डिफरेंट पैदा कर दिया भेद की बात ला दी है कि अपने आप को वैसे दीनहीन मान के ही उसकी आरती और
2:30:42
पूजा चलती रहती है पूरी समय जिंदगी भर ये मैं तो कभी ये वाली आरती गाती ही नहीं हूं नीचे नीचे जहां पर अपने को रोला दिया
2:30:49
ना वो रोक ही देते हैं हमसे तो शब्द ही नहीं निकलते हैं वो क्यों हम ऐसे हम खुद ब्रह्म परमात्मा होने के बावजूद क्यों
2:30:57
दीनही मलिन माने अपने आप को उससे से ही तो ज्यादा पतन होता है फिर अपना हम मैंने एक बार एक गुजराती लाइन सुनी थी कि
2:31:06
भा जीव जीव क्या है भान भुलेला परमात्मा गुजराती में है लाइन भान भला हुआ परमात्मा
2:31:13
ही है वो जीव बना हुआ है ये आपसे और सुनने में मिलता है मुझे बहुत अच्छा लगता है सुनते रहना आपको
2:31:22
ओके प्रणाम जी प्रणाम जी
2:31:29
प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम आज मैंने मेरे को जो भी सुनना था मैंने
2:31:38
मेरे को सुन ही लिया और मुझे यह बोलना है कि आज तो जो सत्संग हुआ
2:31:46
उसके लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं है और आपने आज जो बोले ना कि लास्ट जंप लगा दो
2:31:54
वही आज तो हो गया प्रभु जी और बहुत-बहुत थैंक यू क्योंकि आपको आप अंतर्यामी आप सब
2:32:02
जानते हो और मैं जो बोलना चाहती हूं वो भी आप समझते ही हो। मुझे कुछ ज्यादा नहीं बोलना है। बट आई जस्ट वांट टू से थैंक यू
2:32:09
थैंक यू थैंक यू थैंक यू थैंक यू सो मच क्योंकि आज के सत्संग में जो निकला है ना वो पूरा मुझे वो दाढ़ना बहुत बार आपसे
2:32:18
दाढ़ना सीखी मैं पर सीखना क्या वो मेरा स्वभाव है वो आज मुझे पता चला और पता चला
2:32:26
नहीं मैं ऐसा भी नहीं बोल सकती हूं क्या बोलना है वो भी नहीं आता है मुझे पर आप समझते हो प्रभु और
2:32:33
आपकी कृपा अपरंपार है और और वो भी मेरी ही कृपा मेरे ऊपर है। बहुत कुछ
2:32:42
प्रभु इतना अच्छा आज जो सत्संग किया मेरे बोलना ही नहीं आता है। पर आप समझते हो मैं क्या बोलना चाहती हूं। और ये सत्संग सभी
2:32:49
को मैं तो बताना अभी भी कोई नहीं है पर मैं बताना चाहती हूं कि ये सुनना स्टॉप मत करना। मेरे से भी माया एक बार खेली कि आप
2:32:57
जाने जानते हैं प्रभु और वो मुझे ही अंदर से आवाज आई कि नहीं और आज जो हुआ ना वो
2:33:05
मैं नहीं बता सकती पर अब लास्ट जंप लग गया और आपका तहे दिल से शुक्रिया
2:33:14
थैंक यू थैंक यू आप बस इस तरह से ही आते रहना और सबको सबको सबको वो उड़ाते रहना
2:33:22
उड़ा देना सबको अच्छा प्रणाम सर
2:33:29
प्रणाम बहुत दिन बाद शिल्पा जी आज अच्छे से सुनी
2:33:38
है। बहुत सुंदर
2:33:49
यस एनीबडी प्रभु जी
2:33:57
हां प्रणाम आपने पूछा ना
2:34:05
करके हम क्या
2:34:15
हां बताइए आवाज आ रही है
2:34:26
हां हां बताइए। हां आप अभी पूछ रहे थे ना किसी और से कि कोई स्वप्न वगैरह आया पड़ा
2:34:33
आपको आया हुआ होगा क्या करके मुझे एक स्वप्न आया था उसे बहुत दिन हो गए मैंने
2:34:41
कभी इस बारे में बात नहीं की लेकिन आज मुझे याद आ गया वो हम
2:34:47
वो एक स्वप्न आया था जिसमें आप आए थे तब मैं ज्यादा नहीं सुनती थी थोड़ा-थोड़ा ही
2:34:54
सुन रही थी उसको हो गया अभी मेरे ख्याल से अभी नहीं तो वो सब सुनिए आप स्वप्न ही है वो
2:35:02
और कुछ नहीं है। उसमें ज्यादा इंटरेस्ट मत लो। वो कोई अच्छी चीज नहीं है। चाहे वो मेरा स्वप्न
2:35:10
हो चाहे भगवान का स्वप्न हो। स्वप्न स्वप्न ही होता है। ठीक है। हां। ठीक है। ओके। प्रेम प्रणाम।
2:35:18
अभी सुनिए आप। प्रेम प्रणाम।
2:35:29
प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम लव यू
2:35:36
और बस आपको ही सुनना सुनना सुनना ही अच्छा लगता है और कुछ भी नहीं
2:35:43
ओके फिर कब मिलेंगे अभी
2:35:58
ओके प्रणाम आप
2:36:07
मैं जो पॉइंट बताया उस पे बात करूं। कब मिलेंगे क्या मिलेंगे वो बकवास नहीं है ना
2:36:15
नहीं क्लियर हुआ तो अलग बात है आज क्या सुनते हो यार
2:36:24
प्रणाम भैया जी प्रणाम
2:36:30
भैया जी मेरा एक्सपीरियंस ये रहा कि जैसे आप सत्संग सुनाते हो तो मतलब एकदम से ऐसा
2:36:39
क्लिक हुआ है काफी टाइम पहले कि स्टॉप करो श्वेता जी
2:36:47
कुछ हो रहा है ना ना ना ना अभी सुने ही नहीं आप लोग बेहोशी में हो सब सुने ही नहीं मेरे को ये
2:36:55
आवाज ही नहीं रहती एक टाइम ये हुआ क्लिक हुआ ये हुआ मैं अभी जो सुनाया वहां परमात्मा की वॉइस आने लगती है
2:37:05
क्या सुनते हो यार मेरे को लगता है फालतू आता हूं मैं इसमें Google क्या मीठा चाहिए। हां
2:37:14
कुछ लोग सुने हैं जरूर बट बहुत लोग मिस कर गए।
2:37:23
एंटरटेनमेंट कर रहे हो आध्यात्मिक। चालू करो दो चार और देखें।
2:37:35
कहां ध्यान रहता है लोग। क्या सुनते हैं समझ ही नहीं आता।
2:37:46
ये तो पूरा कंप्लीट सत्संग है आज का संपूर्ण
2:37:54
सब उतर जाता है इसमें
2:38:08
शिल्पा शिल्पा जी को फिर भी आज अच्छा क्लिक हुआ।
2:38:20
सुरेश जी रमेश जी उन्होंने सुना जो मैंने कहा
2:38:27
और कोई है सब चुप बैठ जाते हो एकदम से खामोशी में।
2:38:38
सादर प्रेम प्रणाम प्रभु श्री जी प्रेम प्रणाम
2:38:47
प्रभु श्री जी मेरी आवाज आ रही है ना
2:38:54
आवाज आ रही है आपको फेस नहीं दिख रहा है मुझे ऑन नहीं करना आ रहा है भगवान
2:39:02
ओके कोई बात नहीं प्रभु श्री जी मुझे ना ये पूछना है जैसे
2:39:09
मुझे कुछ पूछना है प्रभु श्री जी अंदर ना एक मौन लगातार बना हुआ है और घर में हमारे इस वक्त बहुत ही विकट स्थिति है मेरे
2:39:18
हस्बैंड जिनको डॉक्टर ने जवाब ही दे दिया है कि शायद वो एकद दिन से ज्यादा नहीं जी पाएंगे तो भी भगवान मतलब मन में ना वो
2:39:26
चुप्पी जा ही नहीं रही मैं उनके पास जाती हूं उनको देखती हूं आंसू आते हैं तो मुझे यूं लग रहा होता है कि हां आंसू आ रहे हैं
2:39:33
लेकिन अंदर का वो ना चुपो वो चुप बना ही रहता है और यूं आता है मन में कि ये थोड़ी ना जा रहे हैं शरीर जा रहा है इससे क्या
2:39:41
होता है मतलब मैं जैसे एक वाइफ को करना चाहिए वो कर ही नहीं पा रही हूं
2:39:48
नहीं रॉन्ग है ये गीतू जी सुनिए मेरे को ये रॉन्ग है
2:39:55
जितना हो सके उनको प्रेम से अलविदा दो उनकी केयरिंग करो भाव से रो के
2:40:03
है ना यहां यहां पे ठीक है वो मौन तो मौन रहेगा ही बट अपना आपको भावपूर्ण होना
2:40:13
चाहिए। एक सुंदर प्रेम भरा अलविदा उनको दीजिए।
2:40:20
वहां अपना ज्ञान मत लाओ कि शरीर तो जाता ही है। ठीक है जाता ही है बट
2:40:27
अभी तो है ना भले एक दिन के लिए हैं दो दिन के लिए हैं। उनकी केयरिंग कीजिए बहुत प्रेम से उनके
2:40:37
साथ रहिए। मेरा सत्संग भी मत सुनो। टाइम वेस्ट हो रहा है। अभी उनके करीब रहो और खूब प्यार दो उनको। ठीक है?
2:40:48
एक प्रेम से अलविदा दो भाव से ठीक है ना सिंपल रहना है हमको
2:41:00
परमात्मा कभी डेड नहीं होता है ना परमात्मा कभी पत्थर नहीं हो जाता कि
2:41:07
रो ना सके हृदय विहीन हो जाए नो ठीक है सब पता है कोई आता जाता नहीं आत्मा
2:41:16
मरती नहीं वो वहां तक ठीक है लेकिन फिर भी हमको प्रेम पूर्ण होना चाहिए है ना
2:41:27
ठीक है इतने सालों का साथ
2:41:35
पूरा पूरी जिंदगी निकल जाती है और हम उसको प्रेम से विदा भी ना दे पाए अपने कचरा ज्ञान के चक्कर में
2:41:44
तो हम अज्ञानी है बहुत प्रेम से अलविदा देना चाहिए। कोई भी
2:41:52
जाए। हां जी।
2:42:20
गोविंद जी आप कैसे खामोश हो प्रभु प्रभु
2:42:29
आज मैं बोल रहा हूं बोल रहा हूं हम
2:42:36
यह सत्य है सर्वस्व की आत्मा की
2:43:09
ओके सुंदर है
2:43:22
तो ये जो मैं बोल रहा है
2:43:33
तो यह अब अप डाउन तो नहीं होगा। कभी हुआ ही नहीं।
2:43:52
ठीक है।
2:44:10
ठीक सुंदर प्रेम प्रणाम प्रभु श्री प्रेम प्रणाम
2:44:18
अहो भाव देना चाहती हूं आज का जो मेरा टेक अवे है कि हर समय अहो
2:44:26
भाव में रहें हर पल नया प्राप्त हो रहा है और जो प्राप्त है वही पर्याप्त है।
2:44:34
पर्याप्त है। ठीक है। ओके।
2:44:45
इस अहो में एक लास्ट में एक डाला गड़बड़ कर दिया। बाकी सुंदर है
2:44:54
जो प्राप्त है वही पर्याप्त है। यह बुद्धि का जो डायलॉग आया ना वो अहोभाव के फील को
2:45:01
खराब किया। बाकी ठीक है अच्छा है कम से कम अहो भाव
2:45:08
यस एनीबडी प्रभु जी प्रणाम प्रभु जी
2:45:16
प्रणाम जी मेरा नाम प्रत्युषा है और मैं यूएस आप सुन रही हूं और
2:45:26
एक महीने से ही सुन रही हूं और बहुत अच्छा लग रहा है आपको सुनना है बस
2:45:33
पहना है हम कभी लगता है लाइक एक
2:45:41
समुद्र में फ्लोट कर हम एक समुद्र में मैं तैर रही हूं फ्लोट कर रही हूं
2:45:49
हम हम नहीं बहुत सुंदर है अच्छा है ना
2:46:01
अच्छा प्रणाम जी
2:46:14
चलो ठीक है अब वाणी को विश्राम देते हैं प्रभु जी प्रेम प्रणाम सभी
2:46:21
प्रेम प्रणाम सुनीता जी ओम नमो भगवते वासुदेवाय हर बार मैं प्रणाम
2:46:29
करती हूं पर आज मैं मुझे ऐसा बोध हो गया कि मेरा मुझको प्यार भरा प्रणाम।
2:46:38
ऐसा आज भाव हुआ स्वयं मैं अव्यक्त हूं इसकी आज अनुभूति आ गई। प्रभु
2:46:46
प्यार प्रणाम प्रणाम जी प्रेम प्रणाम भगवान कुछ कह सकती हूं?
2:46:57
हां प्रणाम जी जी आपने इतना प्यारा सत्संग किया बहुत सुंदर अच्छा लगा मैं सबसे ज्यादा मुझे
2:47:06
अच्छा लगा आप हमसे इतना प्रेम करते हैं हमें देखने के लिए आप खुद नीचे बैठ गए तो
2:47:12
वो देख के बहुत मैं भाव विभोर हो गई मैं एक्सप्रेस नहीं कर पा रही थी मुझे ज्यादा
2:47:19
बोलने आता नहीं एक्सप्रेस नहीं कर पाती हूं बट आज मैं रोक नहीं पाई आपका इतना प्रेम देख के मैं
2:47:28
आपको केवल सर्जना चाहती हूं। प्रभु हमेशा आशीर्वाद बनाए रखिए और जितनी कृपा करते
2:47:34
हैं हमेशा करिए प्रभु प्रणाम बहुत-बहुत
2:47:41
धन्य हूं मैं प्रभु आपका सानिध्य मिला जब से मैं बता नहीं सकती मेरा जीवन जो आपने
2:47:49
बदल दिया प्रभु मैं बहुत कृतार्थ हूं
2:47:56
बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु आपको। मैं कर नहीं पाती हूं आपको। थैंक यू सही से बट
2:48:03
मेरा आप स्वीकार कर लीजिए प्रभु। प्रेम प्रणाम।
2:48:22
ओके।
2:48:38
हम क्या टाइम हो गया भैया देखो तो हम
2:48:46
तो चलो भाई अब वाणी को विश्राम देते हैं सभी को प्रेम प्रणाम