Prabhu Shree
0:19
भूमिका जी ओ भूमिका जी प्रणाम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम और बताओ क्या चल रहा है
0:28
नहीं मैं प्रभु कुछ खास
0:34
ऐसा कुछ है नहीं जो मैं ऐसे मतलब कुछ भी मैं ऐसे भिन्न नहीं है और और कुछ ऐसा चलता नहीं है सिर्फ जो भी चलता है
0:42
नहीं चलता है तो ये
0:49
कंटीन्यूस है कि बीचबीच में है कंटिन्यूस है प्रभु यस
0:57
सुंदर है बहुत सुंदर यस
1:05
याद नहीं करती तो भी रहता है ओ हो
1:11
इतना फॉर्म में चल रही है क्या बात डाउट आउट नहीं होता कुछ
1:21
मैं ही होती हूं प्रभु मन होता है तो डाउट कह देती हूं उसको
1:29
बहुत सही जा रहे हो। बहुत परफेक्ट है।
1:37
चलो इस बार गए हो वापस तो पिच लो नहीं हुई। ये अच्छा है। जी आपकी
1:45
नहीं तो कई बार क्या है शुरू में वापस जाते थे तो अप डाउन अप डाउन इस बार तो सेट था मामला।
1:57
निरंतर सत्संग का यह फल है। है ना?
2:03
बिल्कुल प्रभु। तो बेचो कपड़ेपड़े बेचो। ठीक है।
2:27
ठीक प्रभु प्रणाम प्रणाम जी प्रणाम
2:47
ऐसा अच्छा लगता है फॉर्म में चल मिल रही है। हालांकि मैं का फार्म कहीं जाता ही नहीं
2:57
है। अरे आप कहां चले गए थे? चाय बनाने गए थे क्या?
3:09
नहीं गए थे। नहीं नहीं आओ बैठो। चाय को छोड़ो। बहुत हो गया चाय चाय।
3:23
लिंक डाल दिया सबको। ओके।
3:35
हां जी।
4:05
क्या हंसा बहन ओ हंसा बहन हां प्रेम प्रणाम प्रभु जी
4:12
प्रेम प्रणाम धन्यवाद प्रभु जी आपको मिलते बहुत खुशी
4:24
अरे गरियाबंद से आए हैं ना तभी से इतना सुंदर जीवन हो गया इतना सुंदर सब सेवा काम
4:32
करते हैं और एकदम खुश में रहते हैं एकदम खुश में
4:40
पूरा परिवार है भरा भरा पूरा परिवार है लेकिन अभी एकदम निर्भर होके सब कार्य करते
4:46
हैं एकदम सब खुश है एकदम
4:59
प्रभु जी धन्यवाद कोटि कोटि प्रणाम प्रणाम
5:12
प्रभु जी वो माया वाला सत्संग है ना आपका है ना आपका कौन सा माया
5:19
जो अपना माया है ना जो राम राम राम ही राम है और
5:27
माया को साथ में रह के करना है मां को साथ में रह के सब कार्य करना है हम हम
5:34
तो इतना अच्छा है कि जब भी काम करते हैं तो मां भगी रहती है साथ में सीता मां
5:43
हम हम और पूरा एकदम राममय हो जाता है इतना अच्छा है वो सत्संग बार-बार सुन सुनते और एकदम
5:52
हां
6:05
बस सब भीगे हुए हो तो अच्छा लगता है ना डूबे से कुछ भीगे से
6:13
एकदम सहज और इतना सुंदर हो गया है एकदम मस्त एकदम प्रभु जी एकदम अभी खूब खूब आनंद से जीते हैं और खूब आनंद से सब सेवा करते
6:22
हैं खूब प्यार से एकदम जीना सीख गए अभी बराबर अच्छा
6:30
राम ही राम है राम को ध्याओ राम को भजो राम ही राम विद्यमान है बहुत सुंदर बहुत
6:38
सुंदर प्रभु जी
6:54
धन्यवाद कोटि-कोटि प्रणाम। अरे मलंग जी आप चले गए हो क्या यहां से?
7:20
शाम को तो निकले क्या ये
7:35
चालू करो मलंग जी को यार कुछ बताओ तो प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
7:45
क्या पोजीशन है ऐसे जीरो हो गया
7:52
हम जीरो जीरो
8:17
तो मलंग और ये सब बात करते थे दिन भर और फिर एक आध कुछ सवाल या ऐसा कुछ आता था तो
8:24
पूछते थे मेरे से ये ऐसा कैसे ऐसा क्यों है ये है
8:33
ऐसा कुछ आया क्या सवाल वगैरह
8:56
चलो फ्लाइट के मजे लो आप
9:23
इसकी स्क्रीन की रोशनी थोड़ी कम हो जाएगी क्या लेपी हां ये ठीक है यार
9:33
उनको तो प्रॉपर आएगी ना सामने वालों को हां हां बस ठीक अरे वो चुबता है थोड़ा आइज
9:40
में ना तेज रोशनी नमस्कार गुरु जी
9:49
हां नमस्कारम मेरा नाम आशीष है
9:55
मैं कुरुक्षेत्र से हूं हां आशीष जी
10:03
मैंने एक आज आज प्रयोग किया मन को खोल कर उसने मैं
10:12
हूं का भाव किया मन को आगे रखकर मैं हूं का भाव किया मुझे
10:22
बहुत अच्छा दर्द लगा तो ऐसा लगा मैं बहुत सारा भार उतर गया
10:34
अच्छा
10:48
मैं हूं यानी वो परमात्मा है। आप जिसको मैं हूं कहते हो ना वो अस्तित्व है।
10:54
साक्षात ईश्वर है। जिसमें भी मैं हूं का भाव करोगे वो चीज हट जाएगी।
11:02
क्योंकि मैं ही है। परमात्मा ही है।
11:09
चाहे मन में करो, बॉडी में करो, दुनिया में करो। अच्छा गुरु जी इसमें मन को आंखें खुलना
11:18
पड़ेगा या वैसे ही मैं हूं का भाव कर के ही चल सकता है।
11:27
क्या करना पड़ेगा? बोल रहे हैं आप उनको खोलना। ना पड़ेगा खोलना जैसे वो
11:40
मन का मन को पहले तो हम वो ध्यान सक्रिय ध्यान
11:52
करते थे ना सक्रिय करना पड़ेगा या फिर वैसे ही काम चल जाएगा मन को
11:59
नहीं ये सब कुछ नहीं करना मन जब भी दिखे सीधा मैं हूं।
12:05
है ना? किसी को मैं हूं नहीं जमता है। मन जैसे ही दिखे सीधा राम कृष्ण शिव जिसको जो
12:14
पसंद है। अच्छा तो परमात्मा के आते ही वह पलटी हो जाता है।
12:22
अच्छा मन दिखे तो राम का भाव, शरीर दिखे तो राम का भाव, दुनिया दिखे तो राम का भाव।
12:31
सर्व भज सुनो आप सुना करो सर्व भाव भज
12:42
हम कौन से भावों को भजते रहते हैं दिन भर कि मैं बॉडी हूं मैं बॉडी हूं मैं स्त्री
12:47
हूं पुरुष हूं मेरा कोई नाम है फिर मैं मन हूं मैं बुद्धि हूं
12:56
हम इनहीं भावों को भसते रहते हैं तो भगवत भाव सर्व भाव भज
13:06
कपट तजी यानी राम का भाव जो भगवान का नाम आपको
13:13
प्रिय है उस नाम को ले आओ दुख ऋष जी सु
13:22
सुनो सुना करो एक बार पूछ लिए ना तो साइलेंट हो जाओ।
13:32
है ना? यह कोई फोन कॉल नहीं चल रही है। आप पिकनिक नहीं चल रहा है। ये थोड़ा सुना करो
13:40
धैर्य से।
13:49
मन यानी सुखदख सब आ गया ना। मन के अंदर यह सब है। जब भी सुखदख का भाव आए, कोई भी भाव
13:57
आए, सीधा भगवान का भाव ले आओ। नारायण का भाव। तो भगवान के कई नाम है। उसमें राम है,
14:07
कृष्ण है, शिव है, राधा है,
14:13
मैं हूं। मैं हूं भी भगवान का ही नाम है। जो खुद को मैं हूं कहते हो ना वह भी परमात्मा है।
14:21
ज्ञानी मैं हूं कहता है। भक्त भगवान का कोई सुंदर नाम लाता है। एक ही बात है।
14:29
तो सर्वभाव भज यह बॉडी नहीं है। राम है। यह मन नहीं है।
14:36
राम है। यह दुनिया नहीं है। राम है। मैं कोई जीव नहीं हूं। मनुष्य नहीं हूं।
14:43
राम हूं। खुद के प्रति राम का भाव
14:56
और सर्व के प्रति भी राम का भाव। क्योंकि सब कुछ ऑलरेडी राम है।
15:08
आप गलत देख रहे हो। आप इसको बॉडी देख रहे हो। आप राम को मन देख रहे हो, राम को दुनिया
15:15
देख रहे हो। यहां सब कुछ भगवत स्वरूप है। कण-कण
15:25
और आप भी आप स्वयं राम हो। आप सहित सारा चराचर राम
15:35
है। इसको नहीं भूलना। तो सारे भावों में राम
15:47
आपको मैं हूं जमता है तो सारे भावों में मैं हूं एक ही बात जिसको जो प्यारा लगे
16:00
ठीक है कपट तजी कपट क्या है
16:07
सर्वभाव भज कपट तजी कपट एक ही है
16:14
कि भगवान अलग और मैं अलग यही कपट है।
16:21
अस्तित्व अलग और मैं अलग यही कपट है।
16:29
तो ये कपट हटाओ। परमात्मा आपसे भिन्न है ही नहीं।
16:38
हो ही नहीं सकता और भगवत भाव से जियो। आप बड़े शद्र भाव
16:45
में जीते हो। ये बॉडी है। ये माइंड है। अरे बॉडी माइंड नहीं है ये।
16:52
यह साक्षात नारायण है।
16:59
यह धरती आकाश नहीं है। यह नारायण है।
17:03
जलस नारायण थलस नारायणणा सर्वस्व नारायणा
17:12
हम कचरा भाव में जीते हैं।
17:20
हमेशा भगवत भाव में जियो कि आप सहित सारा चराचर नारायण शिव है।
17:29
आप सहित खुद को नहीं भूलना।
17:37
खुद के प्रति भी शिव का भाव। जीव का नहीं शिव का
17:45
और सर्व के प्रति भी शिव का भाव।
17:55
नाम लोगे ना तो पलटी हो जाता है मालूम नाम का पावर होता है
18:09
तो बस सर्व भाव भज कपट तजी ठीक
18:19
जी आज प्रणाम
18:28
प्रणाम गुरुदेव दीक्षा बोल रही हूं रमो से हां प्रणाम दीक्षा कैसे हो
18:37
मैं बिल्कुल ठीक हूं बहुत बहुत प्रणाम आपको अमित जी
18:45
आज और क्या चल रहा है?
18:51
बहुत सुंदर चल रहा है। अरे हमको सुन रहे हो कि नहीं सुन रहे हो?
18:58
जी आप रहते हो। नहीं सुन रहे हो? नहीं सुन रहे हो?
19:13
नहीं है वो एक सत्संग आपके पास बैठना ऐसा लगता है जैसे वो चल ही रहा है
19:22
हम कभी भी सत्संग से दूर नहीं जाना लाइफ में
19:29
है ना निरंतर एक दिन में एक या दो सत्संग चलता रहे चलता रहे भले समझ आए ना आए
19:38
कुछ मिले ना मिले लाइफ की एक रूटीन होनी चाहिए उसमें प्रथम
19:45
सत्संग होना चाहिए और मेरा ही सत्संग होना चाहिए किसी और का नहीं ठीक है
19:54
जी जी सीधी साफ बात
20:05
सत्संग से इतना कल्याण होता है आप सोच ही नहीं सकते।
20:13
आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते। उससे आप पूरे कनेक्ट रहते हो पूरे
20:21
एकिस्टेंस से और उस हाई एनर्जी से तो अपने आप आपकी लाइफ में एक रिदमम होता है, प्रेम होता है, सत्य होता है,
20:34
परमात्मा होता है।
20:44
तो हमेशा सत्संग और दिन भर मैं का संग मैं ही सत्य है। आपका स्वयं ही शिव है।
20:54
सत्य है। उसी का संग करते रहो। अपने होने के एहसास में निरंतर
21:05
बस अपने होने का एहसास है और एहसास है
21:23
और जैसे ही अपने होने के एहसास में गए सब अपने आप शांत हो जाता है।
21:35
आपकी दुनिया गायब आपके मन बुद्धि सब गायब।
21:47
बस अपने होने का एहसास
22:31
तो यह साधन का फल नहीं परमात्मा सत्संग का फल है। साधन से नहीं
22:38
मिलता। जब जीवन में निरंतर सत्संग होता है
22:47
तो सहज में ही प्रकट हो जाता है।
22:55
आपकी 10 दुनिया एक साइड उसको एक साइड रखो जो भी लाइफ में है। सत्संग प्रायोरिटी
23:03
और प्रथम है ना जी
23:09
ये ये आपकी जिम्मेदारी ये सब बहुत बड़ी बात
23:20
बहुत-बहुत प्रणाम है गुरुदेव बहुत प्रणाम हां प्रणाम तो है दीक्षा लेकिन
23:30
ये गलती नहीं करना भैया है ना
23:36
बाकी सब सुंदर है क्या आप ही की वजह से सुंदर है इतना
23:44
सब बाकी आप में बहुत संभावना है आपका हृदय
23:55
शुद्ध है बहुत संभावना है बस एक निरंतर सत्संग
24:05
तो खिलावट आ जाएगी परमात्मा की। अब दीक्षा बनके जी ली ना बहुत हो गया ना उसकी लाइफ सब देख डाल ली। अब परमात्मा
24:14
होके जीना है तेरे को। है ना? नारायणी होके हो गया ये दीक्षा का रोल। बहुत
24:22
ठीक है। जी जी। उससे कम जीना नहीं है। है ना? सही
24:29
उससे कम नहीं पीना यस तो आत्मनस्टिक रखो अपना ख्याल रखो आनंद
24:38
में रहो ठीक है श्री गुरुदेव प्रणाम प्रणाम
24:47
गुरुदेव प्रणाम प्रणाम प्रणाम मैं बोल रहा हूं गुरुदेव पालते
24:58
हम आपका फेस नहीं आ रहा है। कौन बोल रहे हैं?
25:06
प्रणाम गुरुदेव। प्रणाम गुरुदेव प्रणाम जी। हां मैं नेपाल से बोल रहा हूं। पोखरा से
25:14
जी आपका YouTube में हर वीडियो देख रहा हूं।
25:20
देख रहा हूं। हां हम हम उसी के वजह से आज आपसे मुलाकात होना भाई
25:36
कब से सुन रहे हैं अभी अभी ज्यादा दिन तो नहीं हुआ है गुरुदेव
25:45
दिन हो गया होगा शायद ओके
25:52
हां सुनिए अभी उसको निरंतर सुनेंगे ना जी तो मैं जो कहना चाह रहा हूं वो ग्रहण होगा
26:01
आपकी आत्मा में वो ग्रहण होने लगेगा सौरभ जी बना दो तो चाहे
26:08
और अभी सुनो थोड़ा निरंतर जी गुरुदेव
26:17
क्योंकि बहुत आनंद मिलता है मेरे सुनकर बहुत आनंद मिलता है आप जितने आनंद में है
26:25
बहुत आनंद मिलता है मेरे को शुरू से नहीं अंत तक पूरा देखता हूं वीडियो
26:33
आज निरंतर अभी सुनिए है ना जी जी
26:48
पानी देना प्रणाम प्रभु श्री
26:54
प्रणाम जी मैं बोलूं ना आप लोग ना आपने मुझे मोहन हां जी बोलिए ना बोलिए बोलिए
27:04
आज बोलू ना मैं इतने दिन मैंने मोहन ही धारण कर लिया है
27:11
गुरुदेव और मुझे लगा कि आज जो मेरी बात हो ना तो मैं कर लूं तो
27:19
आपने मुझे मोहन रहने का कहा था तो मैं मौन में मौन में ऐसे तो मैं सो रही थी तो ऐसा लगा मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैं मैं
27:28
प्रेम प्रणाम प्रभु से प्रेम प्रणाम प्रभु से ऐसे बोल रही थी ऐसे बोल रही थी तो ऐसा लगा कि प्रेम प्रणाम बोलते बोलते ये
27:38
अस्तित्व में कोई प्रेम प्रणाम का कोई इतना बड़ा जैसे राम राम बोलते हैं ना भगवान का नाम कहते थे ना तो ऐसे प्रेम
27:47
प्रणाम का अर्थ समझो कि जो उसने कहा वो मुझे नहीं मालूम और प्रेम प्रणाम का मतलब ही इतना है कि जैसे राम राम बोलते हैं ना
27:56
ऐसे प्रेम प्रणाम बोलेंगे नहीं तो भी सब अह सब सबका कल्याण हो जाएगा ऐसा मुझे आवाज
28:04
आया वो क्या तो मुझे लगा कि आज तो मैं बोल ही डालूं तो मेरा मौन रहने का जो आदेश था
28:13
वो मैं पालूंगी नहीं मौन रहना है अभी आपको कंटिन्यू कंटिन्यू रखते हां
28:21
हां अभी दो-तीन महीने मौन रहेंगे आप सही सही बात है दो तीन महीने बाद ही बात
28:28
करूंगी आपसे और सत्संग सुन दो से तीन महीने मौन को ही प्रेम प्रणाम कहेंगे आप
28:37
हां ठीक है अच्छा बाकी बहुत सुंदर है ठीक
28:48
प्रेम प्रणाम
28:58
भोली भाली है एकदम भाव में बहती रहती है मस्त
29:05
हां जी प्रणाम प्रभु श्री राम प्रणाम जी
29:17
आज का वीडियो सुना प्रभु श्री आपका हम आज जो डाला है बस अभी तीन जन्म मैक्सिमम
29:26
तीन जन्म वाला और अभी तो ढाई और अभी तो अभी अभी आपके पास पहुंच गए तो
29:35
अभी का अभी बहुत मतलब बहुत आनंद आया
29:41
चूम गया चूम गए ऐसा बहुत आनंद आया ये सुन के
29:50
बस शब्द नहीं है प्रभु श्री धन्यवाद के सिवा कुछ नहीं है अच्छा
29:56
धन्यवाद धन्य तो जो मैं हूं है ना जो आपकी बीइंग है
30:05
उसका जन्म मरण नहीं होता भैया ना ढाई जन्म ना तीन जन्म ना कोई जन्म
30:13
वह सदैव मुक्त है। सदैव अमर है। वह इन द सेंस आप
30:21
यस आपका स्वयं आप खुद
30:27
अजर हो अमर हो अविनाशी हो। उसका कोई जन्म मनम होता ही नहीं।
30:35
कोई दो-तीन जन्म ये जन्म वो जन्म कुछ होता ही नहीं। ठीक है?
30:41
यस प्रभु। धन्यवाद। हां जी। बहुत धन्यवाद।
31:04
इवन के बाद भी उसका जन्म नहीं होता।
31:12
जैसे आप जन्म लिए ना मतलब आपने वस्त्र पहना और कुछ थोड़ी ना
31:22
अभी भी आप अजन्मा ही हो राइट नाउ
31:30
अभी के अभी भी आप अजन्मा ही हो
31:38
आपका होना आपका एक्चुअल स्वयं जो बॉडी माइंड नहीं है
31:46
जिसको आप सहज में मैं हूं कहते हो
31:54
वो अजन्मा है अस्तित्व है मतलब आप समझ रहे हो जो सिंपली आप कहते हो
32:02
मैं हूं किसी के पूछने पर नॉक किया कौन हो अरे मैं हूं
32:11
आपने नक किया कहीं सामने से आवाज आई कौन हो आप कहते हो मैं हूं
32:20
वो सिंपल मैं हूं अस्तित्व कहता है
32:26
परमात्मा कहता है वो आपकी बॉडी बॉडी नहीं कहती आपकी
32:35
आइडेंटिटी नहीं कहती आइडेंट डेंटिटी तो तब बनती है जब खुद को आप कहते हो कि मैं बॉडी हूं।
32:45
मैं हूं में कोई आइडेंटिटी नहीं है। कोई व्यक्तित्व नहीं है। वह मैं हूं
32:53
अस्तित्व ही कहता है। आपको लगता है व्यक्तित्व कह रहा है ना।
33:02
जब भी आप मैं कहते हो वह अस्तित्व ही कहता है। अब मैं देह हूं। देह का भाव आया तो
33:12
अस्तित्व ही देह बन जाता है। मैं संसारी हूं तो अस्तित्व ही संसारी बन
33:22
जाता है। लेकिन पहला शब्द मैं
33:29
वो अस्तित्व ही बोलता है। परमात्मा ही कहता है मैं और स्टॉप।
33:38
अब उसको कुछ बोलो मत। बॉडी यह वह आकार निराकार जड़ चेतन
33:49
कुछ उसको नाम मत दो। तो मैं
33:59
यानी वह अस्तित्व कहता है। अब अपने मैं के प्रति सजग रहो और मेरे से टॉक करो।
34:08
तो अस्तित्व आपसे भी बोलने लग जाएगा क्योंकि बोलता ही है।
34:16
जब भी मैं कहूं तो सेंस रखना कि वह अस्तित्व की वाणी है
34:22
प्रभु की।
34:31
एक बार में सब चेंज हो जाए। हम अब जो भी मेरे से सत्संग कर रहा है,
34:42
कुछ पूछ रहा है तो मैं के प्रति सजग कि वह अस्तित्व है। आपका जो स्वयं है, मैं है
34:51
वो एग्जिस्टेंस है। और वह मैं ही अब बात करेगा।
35:00
अब करो तो बात सब करो। अब मौन ऑन में मत जाओ।
35:07
हां डूब जाते हो ध्यान समाधि में
35:16
यानी अवेयर मैं
35:23
मैं बोलते ही सब कंप्लीट है वहां
35:35
तो दिन भर आप कहते हो मेरे को यह हो गया। मैं वहां गया तो वह हो गया। मैं यहां आया
35:42
तो वह हो गया। अरे आपके मैं को कुछ नहीं हुआ भैया।
35:52
आज मेरी फीलिंग अच्छी नहीं है। आज मेरी फीलिंग बहुत अच्छी है।
35:59
ये जो चेंज हो रहा है वो आप नहीं हो। आपका जो मैं जो स्टार्ट में कहते हो वह तो
36:07
अनचेंजबल है क्योंकि वो परमात्मा है। जब भी आप मैं
36:19
कहते हो ना वो परमात्मा है।
36:25
परमात्मा कह रहा है मैं। फिर बॉडी हूं। ऐसा जो बोलता है वह मन
36:34
बुद्धि आ गई कि मैं कोई व्यक्तित्व हूं।
36:42
मेरा यह नाम है। अब मन बुद्धि आ गई। लेकिन पहला शब्द वो परमात्मा का ही है। जो
36:50
कहता है मैं
37:16
आपका मैं थोड़ी ना बदल रहा है। जैसे आप बोलते हो मैं पैदा हो गया। मैं बच्चा हूं। अब मैं यंग हो गया। मैं अब बूढ़ा हूं।
37:26
यह सरफेस चेंज हो रहा है ना मैं कहां चेंज हुआ?
37:37
इतनी सी बात है। मैं शादीशुदा हूं। मैं कुंवारा हूं। अरे
37:47
मैं थोड़ी ना चेंज हुआ।
37:58
फिर मैं धानी हूं। मैं ज्ञानी हूं। मैं भक्त हूं। अरे मैं एज इट इज है। ना आप कोई
38:05
ध्यानी हो, ना ज्ञानी हो, ना कोई भक्त हो।
38:12
तो स्टार्ट का वर्ड मैं बस।
38:25
पूरा अस्तित्व है जो कह रहा है मैं
38:36
हम तो बताओ तो कुछ
38:46
मैं के प्रति सजग रहो कि मैं अस्तित्व बोल रहा अब कुछ भी बताओ आपको वो फील आ जाएगा।
38:55
बोलो कुछ भी
39:05
हम आप लोग बोलो एकदम सही।
39:17
हां। यस यस
39:28
कितना सरल है यार। हां
39:39
हम अपने प्रति अवेयर नहीं है। मैं के प्रति ना करके
39:46
स्लिप हो जाते हैं कि बॉडी माइंड फिर यह फिर वो फिर थॉट्स
40:11
तो कुछ भी हो जाए मैं को कोई डुबो ही नहीं सकता। याद रखना
40:20
आप बूढ़े हो जाओ, वो हो जाओ, मर जाओ, पैदा हो जाओ। मैं आपका एज इट इज ही रहता है।
40:28
तभी तो आप हर बार अपने बचपने में भी मैं कहते हो। यंगनेस में भी मैं कहते हो।
40:35
बुढ़ापे में भी मैं कहते हो। शादी कर लो, नहीं करो मैं ही कहते हो।
40:44
और ऊपर जो आप लगाते हो ना कि मैं मैरिड हूं, मैं अनमैरिड हूं, मैं यंग हूं, मैं
40:50
एजेड हूं। यह जो ऊपर जो लगाते हो लेप आवरण
40:58
वह लगाने के बाद भी मैं का कुछ बाल बाका नहीं हो जाता।
41:06
हो सकता ही नहीं। वही तो मैं हूं।
41:30
जिसका कोई भी कुछ भी बिगाड़ ही नहीं सकता। कोई
41:37
ना कोई मन ना कोई माया ना कोई दुनिया वही तो मैं हूं।
42:10
हां जी कैसे खामोश हो यार कुछ बताओ
42:18
अब तो हमारी चाय भी आ गई प्रभु बट बट फर्स्ट वर्ड के प्रति अवेयर
42:29
और वहीं से शुरू करना है हां जी
42:36
अभी मैं का पूरा एहसास है और एक खोज जो खत्म हुई
42:45
है उसका एक कुछ है जो लग रहा है कि इस खोज के बिना अब क्या
42:54
क्योंकि मेरे को लगता है ये मैं मैं कुछ खोज रही थी पूरी जिंदगी और अब वो खोज नहीं
43:00
तो फिर अब क्या तो मैं जरा एक बड़ी लॉस्ट हो गई हूं
43:07
हां जी तो लग रहा है जैसे एक कुछ पर्दा उतरा है
43:15
अंदर से ऐसे मैं देख सकती हूं और
43:21
उस कुछ कमा कुछ है ही नहीं और इसकी
43:31
इसकी तलाश ही जुदाई है।
43:38
इसकी तलाश ही जुदाई है। इसको खोजना ही खो देना है।
43:51
हां आप कुछ और कह रहे थे। ऐसा लगता है आप मैं आपको जब भी सुनती हूं
44:01
मुझे कई बार ऐसा लगता है कि कुछ प्रोटेक्ट करना चाहता है अंदर कुछ बचाना चाहता है तो
44:08
एक तरफ से मेरे को नजर भी आता है कि वो एक जैसे
44:14
कुछ बचा रहा है अंदर मेरे को मेरे को मेरे को ही बचा रहा है हम
44:21
और और एक तरफ यह है कि मैं नहीं बचना चाहती। ये भी है। हम
44:29
तो ये ये सब नजर आता है। ये चीजें हैं अंदर। ये भी पता है कि जो देख रहा है वो भी ये देख रहा है अंदर।
44:38
हम हम एक किस्म की है एक अंदर।
44:46
और कई बार लगता है कि मैं क्या बचा रही हूं।
44:55
पता नहीं किसको बचा रहे हो नहीं पता
45:15
ऐसी कुछ स्थिति है मेरी जिसको हम बचा रहे हैं ना जो हमारी
45:21
आइडेंटिटी की है उसको बचाना
45:30
देखो किसकी वॉइस आ रही है उनको बंद करो
45:38
तो जो हम बचाना चाह रहे हैं ना जो आइडेंटिटी है
45:48
हां इनको ऑन रखो ना विराज हां
45:57
हम क्या सोचते हैं मालूम कि
46:03
हमारी आइडेंटिटी परमात्मा हो जाए
46:10
हर किसी की यह दुविधा है ना कि जो हमारा व्यक्तित्व है वह अस्तित्व हो
46:20
जाए। हम ऐसा चाहते हैं। जैसे हमारा क्या माइंडसेट है? बचपन से
46:31
पढ़े हैं। बहुत सारे मास्टर्स को सुने हैं कि रमना इनलाइटेंड हो गए। अरे रमना
46:39
इनलाइटेंड नहीं हुए। रमना जब मिट गया तो जो उनका स्वभाव है जो
46:47
इनलाइटेंड है ही उसका उनको बोध हो गया। हम बोलते हैं ओशो इनलाइटेंड हो गया है।
46:55
अरे ओशो इनलाइटेंड नहीं हुए हैं। तो वो ट्रैप हमारा चलता रहता है।
47:03
ऐसे ही हम अपने बारे में भी सोचते हैं कि हमको कुछ हो जाए।
47:11
हमारी आइडेंटिटी को कुछ हो जाए।
47:16
इसलिए वह सिक्योरिटी बनाए रखते हैं हम।
47:26
लेकिन एक्चुअल जो आप हो स्वभाव है जो आपका
47:32
वहां कुछ होना ही नहीं है। और जिसको कुछ होना ही नहीं है वही तो मैं
47:43
हूं। अब जिसको मैं हूं में स्थापित होना है या
47:49
मैं हूं ही हो जाना है। यह भी मन है। थोड़ा बारीक पॉइंट है
47:57
कि मैं हूं की सिद्धि करनी है। मैं हूं को प्राप्त करना है। यह भी मन है। व्यक्तित्व है।
48:05
एक्चुअल मैं हूं को कुछ होना ही नहीं है।
48:20
यस वह एज इट इज कंप्लीट है, संपूर्ण है,
48:30
परिपूर्ण है। वो इन द सेंस मैं
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जिसको आप कहते हो मैं हूं। वो संपूर्ण है ऑलरेडी। उसको कुछ नहीं होना
48:45
है। उसको अपने आप को जानना भी नहीं है। उसको अपने आप को देखना भी नहीं है।
48:52
अपने आप को जानना देखना या अपने में होना यह भी मन का खेल है।
49:01
और जो मैं हूं। अरे मैं बेफिक्र हूं। क्या जानना क्या होना?
49:13
मैं सदा से निश्चिंत हूं। मुझे कभी चिंता हुई ही नहीं। वही तो मैं
49:22
हूं। अचिंत असोच्य अचिंत्य
49:30
जहां चिंता का लेश मात्र भी नहीं है। मैं हूं यह शब्द की भी चिंता नहीं है।
49:41
यानी वहां तो ऐसा है कि मैं हूं कि नहीं हूं का भी एक सेंस है ही नहीं। इतनी
49:48
बेफिक्री है। असली मैं हूं में मैं हूं या नहीं हूं का
49:55
भी सेंस नहीं है। इतनी निश्चिंतता है।
50:08
तो एक्चुअल में को कुछ होना ही नहीं है यार।
50:16
कुछ जानना ही नहीं है, कुछ समझना ही नहीं है।
50:23
वो एकदम तृप्त बैठा है। सर्वत्र हर शरीर में और हर शरीर के बाहर भी
50:33
निश्चिंत। कोई पूछता है कौन हो? तो कह देता है मैं।
50:40
बस नहीं तो वह भी नहीं कहता वो
50:50
तो मैं को कुछ होना ही नहीं है। क्या इनलाइटेंट क्या परमात्मा क्या
50:59
अस्तित्व कुछ होना ही नहीं है।
51:14
तो व्यक्तित्व कभी इनलाइटेंड होता नहीं है और मैं
51:22
कभी भी बुद्धत्व अुद्धत्व
51:30
अनइनलाइटनमेंट क्या बोलेंगे उसको विपरीत को अनइनलाइटनमेंट
51:35
मैं मैं होता नहीं समझ जाओ इशारा
51:45
क्योंकि वो स्वभाव है। हर किसी का जो मैं है ना वही बुद्धत्व है। वही परमात्मा है।
51:53
और जो अनदर बुद्धत्व जो हमको चाहिए वाला बुद्धत्व है ना वह फॉल्स है। वह मन का बुद्धत्व है।
52:01
मिलेगा वाला बुद्धत्व मिलेगा वाला परमात्मा प्रकट होगा वाला परमात्मा वो मन
52:08
का परमात्मा है फॉल्स असली परमात्मा मैं हूं और असली बुद्धत्व
52:16
मैं हूं उससे अलग होता ही नहीं वो असली अस्तित्व मैं हूं
52:27
इसलिए मैं को कुछ होना ही नहीं है वो बेफिक्र है। यह हो जाए, वह हो जाए, वह सब यह मन का खेल
52:36
है। मैं तो अचिंत है। बिल्कुल निश्चिंत।
52:47
जहां किसी भी तरह का चिंतन है ही नहीं। मैं आत्मा हूं, परमात्मा हूं, मैं बुद्ध
52:55
हूं। तो यह चिंतन भी जहां नहीं है वही तो मैं हूं।
53:05
जहां मैं हूं यह चिंतन भी नहीं है। यस।
53:14
परम निश्चिंतता
53:27
तो मैं को कुछ होना नहीं है, कुछ जानना नहीं है। और जिसको कुछ होना है और कुछ जानना है वह
53:36
मैं नहीं हूं। वो मन बुद्धि का नाटक है बस और कुछ नहीं।
53:44
इसी में आदमी उलझा रहता है।
53:56
क्योंकि कुछ भी होना है तो समय आ जाएगा और कल ही बताया था मैं समय को मत लाना बीच
54:04
में मन को आपने समय दे दिया कि मेरे को कुछ होना है तो आपकी वाट लगा देगा वो
54:13
पहले संसार के नाम पर लगाता था धन प्रतिष्ठा के नाम पे अब ध्यान ज्ञान के नाम पर लगाएगा लेकिन वार्ड जरूर लगाएगा
54:22
क्योंकि उसको आपने समय दे दिया। अब एक घंटे ध्यान करो फिर तीन घंटे करो तो
54:31
ध्यान लगता है। अरे नहीं लगता है भैया हम तीन घंटे भी करके देख लिए।
54:38
वो दो चार मिनट का लगता है। उसको क्या गिनोगे यार? वह तो भीख हो गई। है ना? वह करने वने से कुछ नहीं होता।
54:49
सहज है वह आपका स्वभाव है। आप ही अगर ध्यान हो तो किसका ध्यान करोगे?
55:01
अगर आप ही ध्यान हो तो किसका ध्यान करोगे?
55:09
अगर आप ही समाधि हो तो कौन सी समाधि लगाओगे?
55:16
सविकल्प निर्विकल्प अरे आप ही समाधि हो यार
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क्या चाय पिलाए हो देखो कैसे निकल रहा है?
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लागी समाधि अखंड अपारा तो ये अखंड अपार समाधि लगी लुगाई समाधि जो
55:52
है सहज समाधि जो मैं हूं वो नेचुरल है
56:00
वहां लगाना वगाना कुछ नहीं
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तो संकल्प कुछ पाने के लिए किया जाता है और विकल्प में है नहीं
56:27
मन का मतलब क्या होता है? संकल्प और विकल्प। विकल्प में जीता है मन जो फॉल्स है जो नहीं है और संकल्प करता रहता है यह
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पा लूं यह जान लूं यह हो जाए वो हो जाए
56:43
तो मैं में संकल्प विकल्प होता ही नहीं
56:50
मैं में बस मैं ही होता है और कुछ होता ही नहीं
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तो हर कोई यहीं से शुरू करता है। मैं ऐसा हूं, मैं वैसा हूं, मैं सही हूं, मैं गलत हूं। मैं देवता हूं, मैं मनुष्य हूं, पापी
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हूं। मैं पुण्यत्मा हूं। अरे मैं को तो वह छोड़ दिया और फिर यह हूं वो हूं मैं फंस गया।
57:37
अरे मैं मैं हूं बस। ऐसा वैसा का तो सवाल ही नहीं।
57:54
और हम इतने स्टूपिड हैं, इडियट हैं कि
58:03
यार हमको वो समाधि चाहिए, वो बुद्धत्व चाहिए जो हमको मिले। अरे जो चीज मिलेगी तो
58:10
वह फिर बिछड़ जाएगी ना। ऐसे बुद्धत्व का करोगे क्या?
58:16
हमको वह परमात्मा चाहिए जो आकर मिले। जो परमात्मा मिलेगा वह फिर बिछड़ जाएगा
58:24
ना। मिलना बिछड़ना मन का खेल है।
58:32
और असली परमात्मा असली बुद्धत्व वो आपका स्वभाव है। जो आपसे अलग है ही नहीं।
58:42
एक्चुअल एग्जिस्टेंस आप ही हो जिसको कहते हो आप मैं
58:52
वो आपसे अलग है ही नहीं
59:00
और जो अलग है वह मन बुद्धि का खेल है। वह उसको अस्तित्व मत समझ लेना।
59:12
ऐसा अस्तित्व या ऐसा परमात्मा या ऐसा बुद्धत्व जो आपसे अलग है जो आपको कभी
59:19
मिलेगा और कभी फिर छूट ही जाएगा। मिलेगा तो फिर छूटेगा। कॉमन सेंस
59:27
तो इन चीजों का त्याग कर दो। बस मैं हूं।
59:35
निष्ठा श्रद्धा
59:45
तो जैसे ही स्वयं पर निष्ठा श्रद्धा होती है
59:54
तो स्वयं अंतर्यामी
1:00:06
से फिर कुछ भी छिपा नहीं है।
1:00:14
आप वह जान ही जाते हो जिसको जानने के बाद कुछ भी जानना शेष नहीं
1:00:21
रह जाता। वह मैं ही हूं जिसको जानने के बाद कुछ भी
1:00:27
जानना शेष नहीं रह जाता।
1:00:35
और जब तक मैं हूं पे निष्ठा नहीं है
1:00:41
तब तक अनंत भटकाव है। अनंत अनलिमिटेड
1:00:52
उसके लिए फिर मैं ही माया बन जाता है और कोई माया नहीं बनता।
1:00:59
मैं ही माया बन जाता हूं क्योंकि मैं भटकना चाहता हूं। सीधी बात है। मेरा इंटरेस्ट स्वयं में नहीं है। मैं में नहीं
1:01:08
है। कहीं और है तो मैं भटकना चाह रहा हूं। सीधी बात है।
1:01:15
बट कोई और दूसरी चीज नहीं माया बनती। मैं आत्मा भगवान ही माया बन जाते हैं।
1:01:24
और फिर माया से ही डर लगता है। मैं आत्मा भगवान ही मैं भगवान ही माया
1:01:32
बनते हैं और फिर माया से ही डर लगता है।
1:01:39
मतलब भगवान से ही डर लगता है। भगवान ही माया बने। अब भगवान से ही आपको
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डर लग रहा है। यह हो गया वैसा हो जाएगा। पैसा फिर ये
1:01:56
क्या अब वो गड़बड़ हो गई
1:02:06
तो भगवान के मायने माया मत समझना
1:02:14
भगवान के मायने भगवान ही होता है तो कभी माया घेर भी ले तो समझ जाना भगवान
1:02:23
है मैं हूं है ना? तो जैसे ही मैं हूं बोलोगे ना तो
1:02:31
पलटी हो जाएगी। जैसे ही राम बोलोगे वो पलटी हो जाएगी।
1:02:36
क्योंकि वह राम ही है। वह मैं हूं ही है।
1:02:42
कोई और नहीं है। माया या मन जो भी बोल लो।
1:02:58
तो माया अति ठगनी मैं जानी। कबीर साहब बोलते हैं अरे माया ठगती नहीं है। माया ही भगवान है।
1:03:06
भगवान ही माया बने हैं और माया ही भगवान है। हां।
1:03:16
माया तभी ठगेगी जब उसको आप माया मानोगे।
1:03:24
और उसको भगवान जानोगे तो वही कल्याण करती है।
1:03:35
मैं तो देखा कि माया ही कल्याण करती है। जब उसको बार-बार राम बोलोगे ना
1:03:42
वही कल्याण करती है। और वही फंसाती भी है। जब उसको आप नफरत की
1:03:49
दृष्टि से देखते हो। माया है। इससे बचना है। यह खतरनाक है। अब आप उसको भगवान की
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दृष्टि से नहीं देख रहे हो। अब एक नफरत की दृष्टि से देख रहे हो तो वो रगड़ डालेगी। फिर
1:04:05
आप बचोगे ही नहीं। इतना ही मैं हूं मैं हूं कर लो, ज्ञान कर लो, भगवान बचोगे
1:04:12
नहीं। क्योंकि आपने भगवान को गलत दृष्टि से देखा है। माया को नहीं देखा है।
1:04:21
आप राम से नफरत कर रहे हो। बहुत खतरनाक मामला है यह। जब भी भीतर ऐसा कभी लगे माया है, मन है, हावी हो रहा है,
1:04:34
सीधा उसको प्रणाम कर लेना राम। या मैं हूं जमता है तो सीधा मैं हूं कह
1:04:40
देना। वो तुरंत आपका कल्याण कर देगी। तत क्षण
1:04:48
पलटी खा जाती हो
1:05:01
और है कुछ नहीं हमने मैं आत्मा भगवान को ही माया बना दिया मान के कि यह शरीर है
1:05:08
मैं शरीर हूं मैं यानी भगवान को अब आप शरीर बोल रहे फिर मैं मन मन हूं। फिर मैं माया हूं। मैं दुनिया हूं।
1:05:18
अब मैं को ही मान लिए ना ये सब। भगवान को ही माया माने हो।
1:05:27
मैं शरीर हूं। मैं जीव हूं। भगवान को ही जीव माने ना। और किसको मानोगे?
1:05:37
आपका मैं ही भगवान है। उसी को बोल रहे हो कि मैं जीव हूं। यानी आप क्या कह रहे हो?
1:05:47
भगवान जीव है।
1:05:57
तो जो माने हो अब उसको भगवान जानो। खुद को मैं को जीव माने हो, देह माने हो
1:06:03
अब उसको भगवान जानो। बस कि मैं जीव नहीं हूं। मैं मैं हूं। भगवान हूं।
1:06:10
मैं देह नहीं हूं। मैं मैं हूं। मैं भगवान हूं।
1:06:20
तो कितना सरल है। इससे सरल तो कुछ है ही नहीं।
1:06:36
बट यह क्या है ना निरंतर सत्संग से यह एकदम से क्लियर हो जाता है
1:06:46
निरंतर सत्संग में जो प्रेम से जीता है धैर्य रखता है सत्संग भी लोग ऐसा सुनते हैं वो थोड़ा 10 मिनट सुनने अरे मजा नहीं
1:06:55
आ रहा है अरे धैर्य रखो पूरा सत्संग लास्ट तक उसको पीना चाहिए
1:07:02
धैर्य से वो उतर जाता है।
1:07:13
एकदम सब क्लियर हो जाता है। एकदम अमृत है ये। ये पीते ही उतर जाता है।
1:07:22
वो अपने स्वयं परमात्मा प्रकट कर देता है। क्योंकि और कुछ है ही नहीं।
1:07:32
अच्छा पोते तो पानी तो हां जी
1:07:52
तो मैं कोई ना क्लियरिटी भी नहीं दे रहा हूं। मैं बस मैं को बता रहा हूं। वो ऑलरेडी क्लियर है।
1:08:02
हां। मैं ऑलरेडी क्लियर हूं या अचिंत हूं।
1:08:09
वहां किसी तरह का चिंतन है ही नहीं।
1:08:47
हां जी है कोई
1:08:55
बोलो हां जी कौन है दर्शी
1:09:03
दर्शी जी अब आपको सुनना है कम से कम दो महीने फिर आपको बोलना है
1:09:10
नहीं है हम पूछना नहीं है सिर्फ बताना है फिर बताओ
1:09:18
हां बताइए कल आपका सत्संग से
1:09:25
बहुत अच्छा रहा पूरा दिन और आज ऐसा एक क्षण आया था कि ऐसा बोल दूं आपको कि बस
1:09:34
चलो पार्टी करते हैं। खत्म हो गया। हां जी।
1:09:46
तो इसके पास सेलिब्रेशन है बस। जैसे पूरा एग्जिस्टेंस सेलिब्रेट कर रहा है ना बस
1:09:53
पूरा सेलिब्रेशन है। एक्चुअल में बताऊं मैं
1:10:01
मैं सेलिब्रेशन हूं। हां
1:10:08
मैं देश में ऐसा कुछ समझना वमझना कुछ नहीं है। वहां महारास है। सेलिब्रेशन है।
1:10:17
अनंत उत्सव है। अच्छा
1:10:26
बहुत सुंदर। हम
1:10:42
हम हम
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तो बस अब सेलिब्रेट करो और क्या
1:11:17
तो हमारे मास्टर थे ना ओशो तो वो बोलते थे ऐसा सत्संग के बाद नाउ यू सेलिब्रेट
1:11:28
अधिकतर बोलते थे वो नाउ यू सेलिब्रेट।
1:11:36
यानी उनका क्या मैसेज था मालूम? नाओ। नाओ में आ गया, तो सेलिब्रेशन ही
1:11:44
सेलिब्रेशन है। अभी मैं आ गया ना? अब अभी कौन है? अभी तो
1:11:55
मैं ही हूं। अस्तित्व ही है तो सेलिब्रेशन ही सेलिब्रेशन है
1:12:04
और फ्यूचर में डाले इसको कि कुछ होगा कुछ मिलेगा तो फिर दुख ही दुख है
1:12:11
अनंत दुख है तो नाउ यू सेलिब्रेट
1:12:23
यस हां जी
1:13:02
अरे कोई है इनको हटाओ यार दूसरों को डालो यह लोग सब
1:13:08
समाधि वाले कोई सेलिब्रेशन वाला दिख ही नहीं रहा है
1:13:20
प्रेम प्रणाम प्रभु जी हां प्रेम प्रणाम गुरुदेव ऐसा ही लग रहा है निर्भर हूं मैं
1:13:29
और आपने बताया ना मैंने कभी कुछ माना ही नहीं अपने को तो अभी यही रहता है कि मैंने कभी कुछ माना ही
1:13:35
हर बार ऐसा ही है। कभी माना ही नहीं। तो ये सब मन का जब होता ही नहीं फिर समय
1:13:43
मन का है। मैं समयतीत हूं तो फिर समय अपने आप चला जाता है।
1:13:52
कितनी प्यारी और सुंदर क्लेरिटी आ गई आपको। अद्भुत सुनते सुनते ही प्रभु
1:13:59
नहीं बहुत सही जा रहे हो। बहुत सुंदर है। है ना? हां प्रभु बहुत प्रसन्नता हुई यह सुनके
1:14:08
हां प्रभु और आनंद की बात यह है कि यह मेंटेन है आपकी ये क्लियरिटी अप डाउन नहीं लग रहा है
1:14:15
नहीं बहुत अच्छा हां बस सेलिब्रेट कीजिए
1:14:24
ना आप ही के साथ प्रेम करना
1:14:34
यह हुई ना बात। अरे हमारा मुरमुरे तो भैया हम तो खाएं पिए
1:14:45
मस्त हमारा काम हो गया आज का। आप लोग बताओ यार कुछ
1:14:55
बताया करो। हां चालू करो और लोगों को जो कुछ कहना चाहे
1:15:29
नमस्कारम वासुदेव जी हम नमस्कारम
1:15:35
जी मेरा नाम संजय है और मैं काफी टाइम से आपको सुन रहा हूं संजय जी आपका फेस नहीं दिख रहा है। अभी तो
1:15:45
मैं ऊपर बैठा हूं छत पर। यहां पर अंधेरा है तो फायदा नहीं है।
1:15:52
चलेगा हम अभी दिख रहा है?
1:16:01
हां शानदार। अच्छा मेरा एक
1:16:10
वैसे एक सवाल है मेरा कि अरे यार अब सेलिब्रेशन आ गया सवाल को मत
1:16:17
ला मेरे यार सवाल को मत ला है ना फिर कभी पूछ लेना ठीक
1:16:25
है क्योंकि अब सेलिब्रेशन का टाइम है ना तो जब माहौल में जब शराब ढलने लग जाती ना
1:16:34
उसमें पी के नाचना है बस। है ना?
1:16:38
हां जी। अब पैमानों के सवाल और साकी के सवाल नहीं पूछे जाएंगे।
1:16:46
ठीक है। हां जी। ठीक। अब शराब क्या ढल चुकी है। लोग पी रहे हैं।
1:16:53
अब नाचने का समय।
1:17:04
हां जी हां जी हां जी
1:17:10
अब बातें करने को तो इतना मन अलायत होता है पर कुछ है नहीं पूछने को कुछ है नहीं
1:17:18
बताने को हां जी बस
1:17:25
अंदर ही अंदर सब ऐसे उड़ रहा सेलिब्रेशनंस जैसे इमोजी है ना सेलिबेशंस
1:17:34
के उसमें पटाखे से उड़ते रहते हैं। तो अभी सवाल सुूल जवाब जब तो बनते ही नहीं
1:17:42
है। वाह बहुत सुंदर मुझे तो आपके हां जी से प्यार हो गया है। मैं जभी भी मेरा मन मुस्कुराने को करता
1:17:51
है। मैं जोर से बोलती हूं। हां जी है मतलब मेरे लिए आपको हां जी
1:18:02
बहुत बढ़िया मतलब बहुत सारा प्यार सिर्फ प्यार प्यार प्यार प्यार बहुत सारा
1:18:11
प्यार वो संभल नहीं रहा बह रहा है मतलब आपकी देह रूपी से भी प्यार हो रहा है आपकी वाणी से
1:18:20
भी प्यार हो रहा है आपके शब्दों से भी प्यार हो रहा है। आपके अंदाज से भी प्यार
1:18:27
हो रहा है। बस प्रेम ही प्रेम। बस प्रेम ही प्रेम है। और क्या?
1:18:39
अभी सवाल सवाल क्यों चुपचाप बात करनी है।
1:18:46
बहुत सुंदर। क्या नाम है आपका?
1:18:52
संगीता। संगीतास।
1:19:01
हां। ऐसा सुनने वाला चाहिए। राइट लिसनिंग है।
1:19:11
मेरी हंसी बदल गई। पहले मैं अलग तरीके से हंसती थी। अभी मुझे
1:19:17
खुद की हंसी ऐसे लगती है कि प्रभु हंस रहे हैं।
1:19:24
बहुत बढ़िया शीशे में देख के खुद की हंसी ऐसे लगती है
1:19:30
जैसे कान्हा जी मुस्कुरा रहे हैं।
1:19:38
तो वो तिरछी मुस्कान उनकी तिरछी नजरिया ऐसे मतलब संपूर्ण एक शब्द में कहा जाए तो
1:19:46
संपूर्ण आनंद है। आपसे बात करने में भी आनंद है।
1:20:00
नहीं बहुत अद्भुत है। बस सेलिब्रेट कीजिए। बस सुंदर है। आज
1:20:06
लेट्स पार्टी। हम आए इसीलिए शायद हम गलत ही रास्ता चुन
1:20:17
लिए थे कि ये करना है ये करना है ये करना है आए तो पार्टी करने ही थे भेजा तो पार्टी करने ही
1:20:24
गया था
1:20:37
प्रणाम प्रणाम जी प्रणाम
1:20:44
प्रेम प्रणाम गुरु जी हां प्रेम प्रणाम जी गुरु जी कुछ आज कोई बौद्धिक सवाल नहीं आज
1:20:54
कुछ बताना था बस हां बताइए
1:21:00
गुरु जी मैंने ने कोशिश करी मैं हूं होने की लेकिन ये हुआ नहीं
1:21:09
मस्त रहो मैंने खुद पे ध्यान दिया मुझे लगता है मैं बैठता हूं जब किसी और की तरह बैठता हूं
1:21:17
मैं हंसता हूं तो ध्यान जाता है उसकी हंसी ऐसी है जैसे अभी इन्होंने कहा हां जी तो
1:21:25
ऐसे ही खुद पे ध्यान जाता तो लगता है मैं कहीं हूं ही नहीं इन सबको हटा दे दो हंसना चल चलना
1:21:32
किसी के साथ बहस करना तो लगता है मैं हूं ही नहीं हम
1:21:39
तो मौन और शांति आते हां तो मौन और शांति में जियो वो भी सुंदर
1:21:46
है ना ये आपने भी सब हटा दो सुनो ना सब हटा दो मैं हूं ये
1:21:55
वो सब हटा दो और जिसमें आपको मौन और शांति शांति लग रही है उसमें जियो।
1:22:03
ठीक है? बढ़िया है वो भी। मस्त रहो। ओके। ठीक है गुरु जी।
1:22:13
प्रेम प्रणाम प्रभु जी। प्रणाम जी। कैसे हैं?
1:22:22
हम शानदार हैं। एकदम आपका ख्वाब दिख रहा है। बहुत शानदार।
1:22:35
आपकी आवाज नहीं आ रही प्रॉब्लम प्रभु जी हर वक्त हर नहीं हर वक्त
1:22:43
सही आपकी आवाज नहीं आ रही है प्रॉपर
1:22:53
प्रॉपर नहीं आ रही ऊपर जाना पड़ेगा मुझे ऊपर जाइए ऊपर
1:23:02
अभी आ रही है हां जी हां जी
1:23:10
बस प्रभु हर समय हर वक्त जैसे ऐसा लगता है ही चल रहा है
1:23:19
हम और पता नहीं एक एक अजीब सी खुशी खुशी जिसे
1:23:28
हैप्पीनेस या कुछ भी बोलो उसे सेलिब्रेशन बोलो वो जैसे छाया ही रहता है हर्ष में
1:23:37
बहुत सुंदर है ना लोग लोग घड़ी भर के सुख को तरस रहे हैं और
1:23:44
यहां सहज बना हुआ कितना सुंदर है
1:23:53
तो राम को रामायण में क्या कहा गया मालूम तुम सहज सुख राशि
1:24:01
राशि यानी भंडार भंडार है ना सहज सुख राशि
1:24:12
वो आपका स्वभाव है
1:24:22
बस बहुत बहुत बहुत प्रेम प्रणाम बहुत प्रेम प्रणाम
1:24:29
प्रेम प्रणाम जी
1:24:41
प्रेम प्रणाम मैं अमनप्रीत बोल रही हूं कनाडा से
1:24:50
हां अमनप्रीत जी कैसे हो मैं ठीक हूं आप कैसे हो हम भी ठीक है।
1:24:58
हम आपको बहुत मिस करते हैं। इतनी दूर बैठे हुए हैं हम इधर। आज
1:25:06
आप पता नहीं कैसे मिले हमें। ये हमारे भाग्य में होगा तभी आपने हमें ढूंढ लिया। मुझे तो ऐसा लगता है।
1:25:18
इतनी दूर से मैं कभी किसी के पास गई नहीं हूं। किसी भी ऐसे किसी फिजिकल गुरु के पास
1:25:25
कभी नहीं गई। लेकिन आपके पास आई तो आपने इतना इतना कुछ दिया है कि अभी ऐसा लगता है किसी से बात भी करते हैं ना उसे लगता है
1:25:33
कि अपने आप से बात कर रहे हैं तो जो जो सभी जो नेचर है ना बाहर उधर
1:25:40
देखते हैं तो ऐसा लगता है कि मैं ये बस मैं ही हूं लेकिन इसमें पता नहीं आप कैसे कैसे वर्ड्स में बोलते
1:25:49
हैं लेकिन कितना अच्छा बोलते हैं ये सभी लगता है मुझे अपने आप भासता रहता है धीरेधीरे
1:25:56
तो ये आप जो दे रहे हैं ना इसका बहुत ही अमूल्य है जो आप दे रहे हैं सभी को और
1:26:04
इतने प्यार से दे रहे हैं तो पता नहीं क्या बोलूं और इतना जो आपकी हंसी है ना वो
1:26:11
मुझे उसको उसने हंसना सिखा दिया जब आप हंसते रहते हो ना तो वो ऐसा लगता है कि
1:26:18
जैसे आप कोई अमृत दे रहे हैं ना हमें तो हमारे अंदर जा रहा है तो आई डोंट तो बस
1:26:26
आपके पास आने में ना वीडियो ऑन करने में मुझे लगता है कि क्या बोलूं आपको तो फिर मैंने कर ही लिया आज वीडियो मैं कर ही
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लेती हूं ऑन फिर पता नहीं लगता आपसे क्या बात करी मेरे तो हार्ट बीट पहले तेज हो जाती है तो फिर
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मैं बोलती हूं कि अब वीडियो ऑन करूं कि बोलूं नहीं बोलूं आज ऑन कर ही लेते हैं तो आपका बहुत ही अच्छा लगता है आपसे आपकी जो
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लाइव संगत होती है ना हमें मुझे लगता है कब आपका ऑन होगा तो हम सुनेंगे आपका आपका आपके सभी संगत को देखेंगे जो बोलते हैं ना
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जो बताते हैं तो आप कैसे धीरे-धीरे सभी को कैसे धीरे-धीरे करते हुए ऐसे मैं में ले
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आते हैं। बहुत ही ब्यूटीफुल है। पता नहीं आपको कहां से आप उनको
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उसको कैसे आपका जो है ना उसका पैटर्न है। बहुत ही ब्यूटीफुल है कि इसको बताना इतना इतना आसान ही नहीं है जैसे आप बताते हैं।
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हम हम मुझे ऐसा लगता है तो बहुत ही अच्छा बहुत ही अच्छा है हां जी बहुत ही अच्छा है तो
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मैं तो अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली समझती हूं अमनप्रीत जी मेरे लिए ना बहुत आसान है क्यों मालूम हम
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क्योंकि मैं मैं के अतिरिक्त कुछ और बताता ही नहीं हूं। जी तो मेरे लिए आसान है।
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जी और आप लोग के लिए भी तभी आसान होगा जब आप मैं के अतिरिक्त कुछ सुनोगे ही नहीं। जी
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तो आप लोग के लिए भी आसान हो जाएगा हम क्योंकि हो ही रहा है इतना सहज उतर रहा है
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हो रहा है जी हां मैंने किसी को सुना नहीं है जहां से आप बोलते हैं ना बहुत YouTube पे पहले सुनते
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रहे हैं ना जहां से आप बोलते हैं ना किसी किसी को मैंने सुना ही नहीं है लेकिन जहां से आप बोलते हैं
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बहुत ही कमाल है बहुत ही कमाल है और जो और जो स्टेट छत्तीसगढ़ स्टेट है ना मुझे पहले
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इंडिया के ना स्टेट नाम बहुत अच्छा लगता था मैंने बोला छत्तीसगढ़ स्टेट का नाम ही बड़ा अच्छा है ना तो इतनी स्टेट्स है
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इंडिया में तो पहले की बात है लेकिन 20-25 साल पहले की बात है तो अब जब छत्तीसगढ़ में आई आपके पास तब मुझे पता चला कि मेरी
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जहां पर कोई था जो मुझे पहले से ही मुझे वहां पर आना था तभी मैं छत्तीसगढ़ का नाम अच्छा लगता था स्टेट का नाम ही अच्छा लगता
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था तो सब सब कुछ कनेक्टेड है ना सब पहले से ही तय है मुझे लगता है
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अब देखो लाइफ में ना सुनो सुनो ऐसा
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भाग्य या तय ऐसे एंगल से मत जिया करो जैसे ये लाइफ है ना ये एक सरप्राइज है ना जीवन
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ऐसे ही ये भी एक सरप्राइज है ये सत्संग हम और ये सीधा डायरेक्ट मैं का सत्संग आत्मा
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का ये सब सरप्राइज है।
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ये कोई तय नहीं होता है। मतलब यह सरप्राइज है। यह एक अलग ही रहस्य है।
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यह कब किसको कैसे ग्रहण हो जाए वह लाबया है इसको कहना।
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जी कब किसको क्या क्लिक हो जाए वो जैसे अभी दर्शी जी बोली कि अब तो सेलिब्रेट कपल आ गया
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सही बात है तो ये ये इसका कोई पारावार नहीं है हम
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हां बट ये उसके लिए है जिनमें प्यास है सघन है ना जी
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और जिनमें धैर्य भी है थोड़ा और ज्यादा धैर धैर्य की जरूरत ही नहीं है।
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थोड़े धैर्य में ही काम हो जाता है यार। ढाई जन्म इसके लिए तो कुछ भी नहीं
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है। सुना आपने कल ढाई जन्म तो कुछ भी नहीं है।
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इसके लिए बहुत ही अच्छा है। बहुत ही आप
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बहुत ही प्यार आता है आपके लिए। बहुत ही ज्यादा प्यार आता है। बहुत ब्लेसिंग्स आती हैं कि हमारी उम्र भी आपको लग जाए। आप
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संगत की सेवा कर रहे हैं। सब आप आप संगत को सेवा करते रहे। ऐसे गुरु मिलते नहीं
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है। बहुत भाग्यशाली हैं। तभी ये गुरु मिलता है जो मैं का गुरु है जो हमें उस यूनिवर्स से कनेक्ट करा जो हम हैं ही।
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सो आपका आशीर्वाद चाहिए हमेशा। आपका हाथ हमारे सिर पर रहे। तो आपके चरणों में
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प्रणाम है। बहुत ही शुक्र है। बहुत ही शुक्र है। बहुत ही शुक्र
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भगवान प्रेम प्रणाम।
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मैं बोल रहा हूं कोलकाता हां कौन बोल रहे हैं
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नयन सरकार नारायण सरकार हां जी बताइए हां महाराज आपका मैं वीडियो सुनता हूं
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दो तीन मंथ हो गया वीडियो मैं सुन रहा हूं आपसे टेलीग्राम से बात हुई थी आपके साथ
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जी महाराज आपका वीडियो सुनता हूं तो मेरे अंदर में ध्वनि उठता है।
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मेरा मन सब कुछ साइलेंस हो जाता है। डीप स्लिप जैसा हो जाता है। बट मन रहता है।
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अंदर में धनि उठता है। ध्वनि है बोलते हैं भगवान की जय। गुरु महाराज की
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जय। ऐसा ध्वनि तो हमेशा
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मैं आत्मा भगवान की जय मैं आत्मा सद्गुरु की जय
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ऐसा किया करो उसमें मैं जोड़ा करो ठीक है क्योंकि आपका मैं ही परमात्मा है और वही
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सतगुरु ओके
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मुझ अस्तित्व की जय। ऐसा मैं को हमेशा जोड़ा करो। इसी को योग कहते हैं।
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ये महायोग है। ओके। प्रणाम गुरुदेव।
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बाकी बहुत बढ़िया। प्रणाम। यह दिख रहा है वह सद्गुरु तो वह अलग है।
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मैं आत्मा सद्गुरु की जय वो असली है।
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प्रणाम गुरुदेव प्रणाम उपेंद्र जी
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आज के सत्संग के लिए अच्छा अनंत हो भगवान और
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जैसे अपना थोड़ा अनुभव कहे तो एक जीवन में सरलता और बड़ा निर्ची
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सब सहज सी लगती बहुत अच्छा लगता है। बहुत अच्छा लगता है। और आपका सत्संग इस
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निष्ठा को इतना गहरा करता जा रहा है कि अब कहीं कोई संशय किसी भी तरह का संशय किसी भी प्रकार का संशय रह ही नहीं गया।
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बस एक आनंद सहज है और बहुत अच्छा लगता है। और आपके सत्संग को निरंतर सुनते रहते हैं।
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गुरुदेव इतना आनंद है कि जिसका कोई नहीं है गुरुदेव। बहुत अच्छा
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बस आपका प्रेम दिव्य प्रेम बना रहे बस यही प्रार्थना ऐसे
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प्रेम सदैव है और बस
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सत्संग रस का पान करते रहो वो सारा काम वो सत्संग कर देता है।
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आज प्रणाम चरण स्पर्श प्रणाम प्रणाम
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यह रिजल्ट मेरे को बहुत प्रिय है जो सबके रिजल्ट आ रहा है ना
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यह चाहिए मेरे को आप जान गए समझ गए बौद्धिक ज्ञानी हो गए मेरे को कचरे से
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मतलब ही नहीं है यह टेस्ट यह परमात्मा का स्वाद यह रिजल्ट यह मेरे को बहुत प्रिय
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जो बहुतों को आ रहा है। प्रेम प्रणाम प्रभु जी।
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प्रेम प्रणाम। हां प्रभु जी दो लाइनें बोलना चाहता था आपके बारे में। कल भी कोशिश कर रहा था
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लेकिन आपसे बात करते हुए ना धड़कन सही में बढ़ जाती है मेरी। फिर भी मैं ऐसे कैसे धड़कन बढ़ा लेते हो यार?
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हां तो आप ये गाने की कुछ लाइनें थी तो लेकिन कुछ अपनी मिला के मैं लिखता हूं आपके बारे
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में कि कायर थे जो वो शायर बने अब क्या-क्या करें ये इश्क में ना कहते थे जो
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वो लगे बोलने बेशर्म आशिक हुए तेरे इश्क में ठीक है क्या ही कहें आपने सब तो कह दिया
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है फिर भी जो लिखा है वह जीने की कोशिश करी पहली मीटिंग में आपका कहना रंग दे तो तू
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मोहे गेर हुआ और ऐसांगा कि जहां से गुजरते हैं वहां लोग मतलब गली लगाते हैं। उन्हीं
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गलियों में साधनाओं की गलियों में जहां मतलब पहले लड़ाईयां हुआ करती थी। अब वो
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है। ठीक है? आपके पास करने आना तो आपका बत्ती देना बत्ती पे बत्ती देना और ये
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एहसास कराना कि अपग्रेड को भी मैं ही अपग्रेड करता हूं। ठीक है? और स्लिप होने
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का तो पूछो ही मत क्योंकि वो सीधा आपकी गोद में ही गिरना है।
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आज बहुत-बहुत प्रणाम और मतलब आप आपको मतलब जीना मतलब मतलब वर्ड्स नहीं है फिर भी
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कोशिश करी आपने बोला कि मौन मत रहिए। मैं कभी नहीं बोलता था। मैं बहुत ज्यादा शर्माता था लेकिन आपने पूरा बेशर्म बना
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दिया। अरे बेशर्मी बोध का फल है भैया।
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ये लाइन आपकी दिमाग में आती है बार-बार। अरे ये लाइन बहुत बाद में एक्चुअल क्लियर
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होती है। क्या बात करते हो यार? बेशर्मी कैसे बोध का फल है? अरे हम सही बात करते।
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बेशर्मी बोध का फल है। बाकी बढ़िया है। बहुत बढ़िया।
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प्रेम प्रणाम गुरु जी हां प्रेम प्रणाम जैसे ये कह रहे हैं ना कि धड़कन पड़ जाती
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है जब मैंने पहली बार आपको सुना ना मेरा तो फाड़ खुल ही गया एकदम इतना ज्यादा पेन
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मतलब बस की अरे यार एक ही सेकंड की वीडियो को सुनके जी क्यों हो गया मुझे और फिर
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अगले दिन ही आपका सत्संग था तो मैंने अगली बार बोला की मैं क्या करूं इसके भग कैसे जा रही थी मेन हार्ट में और मुझे इसका
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समाधान चाहिए और देखो समाधान क्या था कि आपने अगले दिन YouTube पर आप लाइव आए और आपने बोला कि जो जो यहां है अपना अपना
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क्वेश्चन पूछो तो मैंने अपना क्वेश्चन रखा कि अब मुझे तो यही हो रहा है तो आपने जब
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बताया मुझे कि मान लो कि आप मेरे ही कवर है तो आप मानो की हमारे पास ग्राउंड है
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मैं वहां जाकर बैठ गई और 70% पेन उसी समय चला गया जब मैंने ये किया पूरे आसमान को लेकिन
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तो फिर नेक्स्ट डे किया 30 वो भी चला गया मतलब दो दिन में वो चला गया मतलब मुझे तो लग रहा था कि पतली पत्थर पट
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तो इतना ज्यादा आपकी वो है ना वाइब्रेशन इतनी तगड़ी है ना आपकी बात और जीवन तो
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क्या कहे सच्ची आपका सत्संग सुन के भी बदल रहा है, बदल गया है। क्योंकि बहुत
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नहीं बहुत सुंदर है, अद्भुत है। है ना? और मेरा
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बार-बार कहना इसलिए रहता है कि सब मेरे को देखते रहो। मेरे नजरों के
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सामने आते रहो। उसका रहस्य है। हां। आप लोग सोचते हो मेरे को आपको देखना है। वैसा देखना नहीं है भैया।
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कैसा देखना है वह मैं जानता हूं। मेरी नजरों के पास ही रहा करो। बस
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थोड़ा सा दिख जाया करो और थोड़ा सा बोल दिया करो। उससे मैं अपना काम ईजीली कर लेता हूं। दूर बैठे
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भी आप पर। है ना?
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हां। वो कनेक्टिविटी की स्पीड बढ़ जाती है। यस
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हम आ रहे हैं आपको जल्दी जो मर्जी हो जाए हम तो आ ही रहे हैं बस और आज बहुत आया है आज की बात सुबह फियर आ
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रहा था तो उस पीियर को पहले तो मैंने दो-तीन मिनट देखा उसके बाद कहा कि ये काम
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ही है और तभी वो चला गया पता तो धीरे-धीरे हम
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कोशिश कर रहे हैं अपने ऊपर काम करने की तो हो ही रहा है। बहुत नहीं सब इजीली हो जाएगा। मैं बोल रहा हूं
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ना बहुत इजीली सब सेटल हो जाएगा सहज में ही निश्चिंत रहो। है ना?
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ठीक है। प्रेम प्रणाम। ठीक है। प्रेम प्रणाम प्रभु श्री
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आपको अहो भाव बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत ग्रेटट्यूड। मैं में आने के बाद ऐसा लगने लगा है कि हम
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में से भी प्रेम बहने लगा है। मतलब जो थोड़ा एक रूखापन था उसका जो अंश था वो निकल गया है और ऐसा लगता है बस अब प्रेम
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ही बहता रहे हमसे और उसके अलावा बिना मैं के बात करने का भी दिल नहीं करता। तो उससे
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एक मौन भी आ रहा है अंदर। बहुत-बहुत आभार।
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बहुत सुंदर बहुत ही सुंदर आज प्रणाम छे
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हां प्रणाम आज का संसार सुनने के बाद मेरी बॉडी
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विटनेस लगी पहली बार ऐसा लगा कि कुछ भार उतर चुका है और बहुत ही खुशी हुई मुझे
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इतने आनंद से भरी हूं कि मतलब आज तक मुझे ऐसा आनंद महसूस नहीं हुआ उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत
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धन्यवाद बस ऐसे ही निरंतर में सत्संग करते रहो आपकी सानिध्य में अपनी कृपा बनाए रखना
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प्रभु प्लीज आज प्रणाम
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प्रणाम प्रेम प्रणाम गुरु जी
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प्रेम प्रणाम मेरे को बोलने के लिए तो कुछ है ही नहीं
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क्या ही बोलूं बस प्रणाम करने के लिए आई हूं। हां बस प्रणाम है। मस्त रहो।
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आप ही ने कर दिया है। मस्त ही है सब। प्रेम प्रणाम
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प्रेम प्रणाम हेलो
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गुरु जी नमस्ते मेरा एक सवाल था कि लाइक प्रेम और का
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अनुभव हो रहा है मतलब आनंद का अनुभव हो रहा है कभी कभी किसी बुद्ध पुरुष की वाणी सुनते समय कभी वचन सुनते समय कभी गाने
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मतलब नॉर्मली काफी बार हो रहा है लेकिन एक सवाल है कि एक बार आपसे पहले एक बोधवान
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मतलब एक और गुरु थे उनसे मैंने पर्सनली बात की थी तो उन्होंने बोला तू श्मशान जा मैंने पूछा क्या होगा उससे मन शांत होगा
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तो उन्होंने बोला नहीं सीधा समाधि ऐसे मजाक में बोला लेकिन शायद मेरे को लग रहा है कहीं ना कहीं मौत का डर है तो ध्यान
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में गहरा नहीं जाया जा रहा उसी वजह से तो आपका क्या कहना है?
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नहीं ठीक है। डर को बने रहने दो। आप अपना काम
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जहां डर है वहां मत करो। निर्भयता आपकी आत्मा में है। आपके होने
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में आपकी बीइंग में है। वहां निर्भयता ही निर्भयता है।
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वहां वर्क करो। अपने होने के एहसास में है ना स्वयं में तो जब उसमें क्लियरिटी
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आएगी उसमें आप जीने लग जाओगे स्वयं में तो यह भय और यह सब जो भी है वो अपने आप हट
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जाता है और कोई श्मशान जाने की जरूरत नहीं है।
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है ना? स्वयं में जाओ। श्मशान मत जाओ। ठीक है?
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थैंक यू। ओके थैंक यू प्रेम प्रणाम प्रभु
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प्रेम प्रणाम संजय जी हां जी हां जी प्रभु आज
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बहुत सुंदर चल रहा है प्रभु बहुत सुंदर तो ये वीडियो का जो चल रहा है
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810 दिनों से पता नहीं तो ये बढ़िया है ना बहुत सुंदर है ये तो टेलीग्राम में तो मैं जुड़ी ही नहीं पाता था। इसमें कम से कम भी
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पाता हूं मैं। उसमें होता ही नहीं था। इसमें इजी हो जाता
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है। बहुत बढ़िया। और लाइव मिल जाता है देखने को। ये और भी
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सोने पे सुहागा हो गया। हम हम बाकी मस्त चल रहा है जीवन एकदम। बहुत बढ़िया। और योगेश जी के क्या हाल है?
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योगेश जी भी बढ़िया है। उनसे हफ्ते में ही बात हो पाती है। दिल ही नहीं करता किसी से बात करने का। अपने में मस्त रहते हैं।
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और बढ़िया है। बस आनंद लो, मस्त रहो। है ना?
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हां जी। हां जी। प्रणाम प्रभु। प्रणाम।
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प्रेम प्रणाम गुरु जी। हां प्रेम प्रणाम। मेरा नाम सुमिता है। मैंने पहली बार आज
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आकर आपका यह वाला सुना है। मैं अगर आप मुझे आज्ञा दें तो मैं एक दो मिनट थोड़ा
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कुछ बताना चाहती हूं और आपने बोला कि बोलना चाहिए इसलिए बोलने की कोशिश कर रही हूं। शॉर्ट में बताइए।
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जी शॉर्ट में ही बोलना चाहती हूं मैं। मैंने बहुत पहले मैंने सत्संग पहले सुना किसी और का और उस
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सत्संग से मेरा जुड़ाव भी था। बट जिंदगी में बहुत सारी चीजें ऐसी मतलब मुझे आनंद भी बहुत आ रहा था और शायद जिंदगी के कुछ
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ऐसी चीजें थी कि मुझे उस समय मैं स्पिरिचुअल बायपासिंग करने लगी थी। जो रियल में जो आप कहते हो मैं आत्मा में
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स्थित होना उससे परे शायद एक जबरदस्ती का जो लेप लगाते हैं, वह हो रहा था। और इस उसमें वो छूट गया कहीं। फिर जिंदगी ने उस
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चीजों से ऊपर ले आया। बट सब कुछ बहुत पीछे छूट गया था। एक दिन अभी कुछ दिन पहले ही मैंने आपकी एक
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रील देखी Instagram पे और आपकी आवाज में जो नशा था ना उसने मुझे आपके बारे में ढूंढने पर वो किया कि कौन है यह। तब मुझे
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पता चला वासुदेव सर्वम नाम का एक चैनल है और तब मैं वहां पर गई और वहां से मुझे आपका जो वह है कम्युनिटी है वो मिली और
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वहां से मुझे यह लिंक मिला। आज मैंने आपका ये पूरा सुना है। आपने कहा कि अगर दूर से भी कनेक्ट रहेंगे
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तो मैं काम कर पाऊंगा। मैं इसलिए आपको मैं बता रही हूं कि आज मैंने सुना है। मुझे बहुत अच्छा लगा है। बट जो आनंद का मैं फील
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सब लोग कह रहे हैं मैं अभी आज तो नहीं कर पाई। कोई बात नहीं। जी
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भाई सबके आनंद का फील तो आप कर पाए ना। हां जी हां जी बिल्कुल तो ये भी एक आनंद है।
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देखिए जी कई बार दूसरे के आनंद में आनंदित हो जाना चाहिए। जी उनके आनंद से तो बिल्कुल आनंदित हूं।
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उनसे कोई द्वेष भी नहीं और यह भी नहीं कि मुझे हो जाए। ऐसा भी नहीं है। मैं सिर्फ आपके सामने स्थिति बयान कर रही हूं। क्योंकि जब आप कहते हो जो है वो है जब मैं
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मैं हूं तो जो इस तरह से इस तरह से भी है तो ठीक है कुछ होना पाना है ही नहीं तो यह भी सही है बाकी आप
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बट अभी अभी जस्ट आप स्टार्ट किए हैं ना तो थोड़ा सुनेंगे तो आपके भीतर से सहज आनंद
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बहने लगेगा अपने आप जी आज जी और बहेगा ही जी हां जी
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जी प्रेम करण प्रेम प्रेम प्रणाम जी
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प्रेम प्रणाम प्रभु श्री प्रेम प्रणाम
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जी मेरा नाम मनप्रीत है मैं अमेरिका से फोन कर बात कर रही हूं
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मेरी पंजाब मेरी हिंदी इतनी अच्छी नहीं है प्रभु श्री पर मैं बस आपका धन्यवाद धन्यवाद देना
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चाहती हूं मेरे पास शब्द नहीं है मगर मैं
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मैं कोशिश मैं बस मुझे पता नहीं मैं क्या कहूं प्रभु शैली
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पर आपका धन धन्यवाद आपने मेरी जिंदगी
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प्रणाम है आपको बस
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कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। अ अपने पे ऐसे ही निष्ठा बनाए रखें।
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जी प्रभु श्री मैं बस मेरे पास यही है कि मैं आप जो कह रहे हो मैं वो 100% करूं।
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आपको निराश नहीं करूं। बस मेरा बस यही इच्छा है प्रभु श्री
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नहीं क्यों निराश करोगे मेरे को होगा ही नहीं ऐसा
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ठीक प्रभु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु श्री आपका
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बहुत-बहुत धन्यवाद अच्छा
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प्रेम प्रणाम प्रणाम
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प्रेम प्रणाम प्रभु श्री हां प्रेम प्रणाम
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प्रभु श्री मैं पावागढ़ और उधर आई थी सिलवासा में जी
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मैं पहले सत्संग सुनती थी तो मुझे बहुत निश्चय हो गया था। आत्मनिष्ठा सहजा अवस्था
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पर उधर आने के बाद थोड़ी फिजिकल और मेंटली प्रॉब्लम्स आई है तो मेरा वो निष्ठा जो 24 घंटे आनंद
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था वो नहीं रह पा रहा है। निष्ठा 24 घंटे वो नहीं रह पा रही है।
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हां। ठीक है।
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हम हमेशा क्या गलती करते हैं?
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हमको 24 घंटे में निष्ठा करनी है।
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हमको हमेशा में निष्ठा करनी है। हमको अपने में निष्ठा करनी
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यस ना समय में करनी है 24 घंटे में ना हमेशा में करनी है
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अपने में निष्ठा करनी और मैं तो हूं ना क्यों नहीं होगी निष्ठा
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निश्चिंत रहो निरंतर सत्संग सुनो निष्ठा हो जाएगी। हां प्रभु
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सत्संग नहीं छोड़ना। सत्संग कभी नहीं छोड़ना। हां वो तो होता ही है शुरू। आपकी कृपा है
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प्रभु जी शुक्राने नहीं ना आप ढंग से नहीं सुन रहे हो। अगर सुनोगे
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तो डाउन होगे ही नहीं। मेरे को पता है प्रभु
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थोड़ा सुनो अभी निरंतर असंभव है जो मेरा सत्संग सुन रहा है और वो अपने परमात्म देश
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से डाउन हो जाए असंभव ये लॉटरी है ये
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कि ऐसा कहा गया है कि सुनने मात्र से आप उस जगह चले जाते हो परमात्म देश में
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जहां से आपका पतन होता ही नहीं है। आपको कुछ करना ही नहीं है केवल सुनना है बस और इससे ज्यादा बेहतर और क्या हो सकता है?
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हां प्रभु शुक्राना भाई प्रेम प्रणाम प्रणाम जी
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प्रेम प्रणाम
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ठीक है प्रणाम जी डेढ़ साल होते
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तो बहुत आता है अभी दो तीन दिन से जो हैपन और एक एनर्जी
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आवाज आपकी आवाज प्रॉपर नहीं आ आ रही है। आ रही है?
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हां हां बताइए। जैसे रोज सत्संग सुनते दो तीन दिन से मुझे
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जैसे गुदगुदापन और एक अंदर फीलिंग और एक एनर्जी से फील हो रही है ध्यान जो है ना
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मैं पे जैसे आप बोलते पे भार तो मैं बाहर देने पे वो हो जाता है मतलब
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जो है ध्यान चले जाता है हम तो बढ़ जाता है तो एक मतलब अच्छा भी लगता है और ध्यान
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वहां भी तो जैसे उधर भी बड़े बड़े एक माइंड से जैसे जाता है उधर एक्चुअल में क्या हो रहा है ना आपकी वॉइस
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आप क्या बोलना चाह रहे हो वो प्रॉपर नहीं आ रही है हां वो कुछ कट कट के आ रही है
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थोड़ा वो क्लियर कर लो फिर आ जाओ आप है ना आ रही है प्रभु जी आ रही है
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हां हां अब बताओ ऐसे है जैसे जैसे अब जैसे दो तीन दिन से सत्संग जैसे सुनते हैं ना सुबह तो उस वक्त
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ना उस वक्त एक एनर्जी और एक दुगदपन से ना अंदर से फीलिंग सी आती है। हां जी
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और उस फीलिंग में ध्यान जो है वो उस मतलब जैसे वो लगता है कि वो और बड़े और बड़े ध्यान डाइवर्ट होता है तो उधर भी जाता है
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और उधर भी जैसे दोनों साइड क्या ये ठीक होता है कि किधर जाता है ध्यान मतलब दूसरा साइड कौन
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सा है? दूसरा साइड बुद्ध जो अंदर जो एनर्जी चलती है कि और बढ़ रही है और बढ़े और बढ़े जैसे अच्छा लगता है तो और बढ़े
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नहीं नहीं उसको और बढ़े अगर मत कहो वो नेचुरल जो भी बढ़ रहा है उसको बढ़ने दो
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उधर ध्यान मत दो ध्यान केवल जो बोला जा रहा है बस उसको सुनना है आपको
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जी आपको सुनना ही हो जाना है आपको कान ही हो जाना है सुनना ही भी हो जाना है।
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जी तो जो मैं बता रहा हूं अगर वही आप सुन लो जो मैं बता रहा हूं तो फिर कुछ भी सुनने
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को शेष नहीं रहेगा। जी इसलिए आपका पूरा अस्तित्व कान हो जाए और सुनना
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ही हो जाए। तो जो कहा जा रहा है वही सुन लिया जाता है। जो कहा जा रहा हो
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एग्जैक्ट वही राइट लिसनिंग। तो ध्यान केवल सुनने में ऊर्जा ऊर्जा में
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नहीं। ठीक है? वो हो रहा है होने दो। वो सुंदर है वो
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प्रणाम प्रणाम प्रभु
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प्रणाम जी बस प्रभु लव यू ना इसके आगे कुछ ना इसके पीछे कुछ थैंक यू
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हां जी बहुत सारा प्यार प्रेम प्रणाम
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ठीक है। अब वाणी को विश्राम दें। अगर आप लोगों की आज्ञा हो
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हां जी प्रणाम। मजे में है।
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आपकी आवाज नहीं आ रही है। मीरा जी मजे में है।
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बहुत बढ़िया आनंद में रहो सेलिब्रेट करो आज जो भी आनंद मिला सत्संग में उसको बांट
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दो पूरे चराचर में है ना सेलिब्रेट करो ठीक है
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आज प्रेम प्रणाम सभी को प्रेम प्रणाम
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और अरे बस अब वाणी को विश्राम देते हैं। सब
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मस्त रहो। ठीक है। आनंद में रहो। सेलिब्रेट करो। फिर मिलते हैं।
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चलो एक बार फिर से अजनबी
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बन जाए। हम दोनों