0:19
यस संध्या गुरुजी हां जी
0:27
कल सत्संग छोड़ने के बाद मैं पागल हो गई दोबारा से क्या पागल हो गए
0:34
मैं दोबारा से पागल हो गई कल सत्संग छोड़ने के बाद हां दोबारा पागल होना मुबारक हो।
0:43
थैंक यू। थैंक यू। जिसको मैं ढूंढ रही थी ना उसको मैं पहले
0:51
से मतलब मैं अपने आप को पहले से जानती हूं। मतलब आपने जैसे कल बताया कि जब मैं
0:59
मैं बोलती हूं तो मतलब मैं अपने आप को जानती हूं तो मैं बोलती हूं। यस।
1:13
क्या है?
1:16
लेकिन इस बात को कोई नहीं जानता। लोग क्या सोचते हैं? हम अपने आप को नहीं जानते। हम वो गलत सेंस में जीते हैं लोग।
1:24
इसलिए वो गलत फीलिंग में जीते हैं।
1:33
हां गुरुजी मैं क्या बोलूं? बस सुनने के बाद मैं तो ऐसी नाची ऐसी नाची
1:45
आज प्रणाम प्रभु प्रणाम जी प्रणाम जी
2:10
हां जी है कोई
2:24
नहीं इतना बड़ा भ्रम है संध्या कि मैं अपने आप को नहीं जानता या मैं
2:30
अस्तित्व परमात्मा को नहीं जानता उसका अनुभव नहीं कर पाता। इतना बड़ा भ्रम है।
2:41
जी गुरुजी बहुत बड़ा बहुत बड़ा खतरनाक है एकदम आ
2:48
सच में मामू बनाया है गुरुजी मामू
2:57
कि मैं कौन हूं? मैं कौन हूं? अगर मैं अपने आप को जानती नहीं तो मैं मैं कैसे बोल सकती हूं? कैसे बोल सकती हूं मैं?
3:04
मतलब संभव ही नहीं है। नहीं संभव।
3:26
तो लोग वो प्रैक्टिस करते हैं। मैं कौन हूं? मैं कौन हूं? मैं कौन हूं? मैं कैसा हूं? मैं क्या कर क्या रहे हो यार?
3:57
पहले मैं को नहीं जानता फिर परमात्मा को नहीं जानता फिर अस्तित्व को नहीं जानता
4:04
मतलब यह भ्रम बहुत खतरनाक होता है। भीष्म नहीं मरता।
4:12
भ्रम यानी भीष्म। जब तक कृष्ण नहीं आएगा वह नहीं मरेगा।
4:20
हां। ये छोटे-मोटे गुरु उसको नहीं मार सकते।
4:30
जब तक कृष्ण नहीं आएगा वो भीष्म मरता नहीं है। हां। अर्जुन का भी बस की बात नहीं है।
4:38
वो
4:47
गुरुजी मैं ना जानने को भी जानता हूं मतलब ये सोचो मतलब मेरा तो जैसे पता नहीं ये
4:55
सुनने की बात की मतलब जन्म के पहले का मैं नहीं जानता ना मतलब जन्म के बाद का उस ना
5:03
जानने को भी तो मैं जान रहा हूं मतलब क्या है मतलब क्या हुआ है
5:16
यानी मैं ना जानने को भी जानता हूं तो अब बचा ही क्या जानना अब है ना
5:24
जी कुछ नहीं जानता को भी जो जानता है ना
5:33
जानने को भी जो सहज में जानता है खाली जानता नहीं है सहज में जान लेता हूं तो फिर बाकी चीजें
5:42
तो जान ही लेता हूं। यह आत्मा परमात्मा यह वह जो भी है ना जानने को ही जान लिया तो बाकी तो मैं
5:51
जान ही लिया ना है ना हम कैसे सुनते हैं? तुम नहीं जानते यह
6:00
जानते हो क्या? उसमें भी नेगेटिविटी डाल देते हैं। बल्कि वह बहुत पॉजिटिव है।
6:10
ना जानने को भी जो सहज में जानता है।
6:17
इसलिए मैं केवल ज्ञान स्वरूप हूं। अखंड ज्ञान हूं। ज्ञान और मैं मैं और ज्ञान इसमें भेद ही
6:27
नहीं। तो वह सत्संग जो आज सुबह डला है ना वह
6:36
बहुत कीमती है। वह हर मनुष्य को वो सुनना चाहिए। समझ ना आए तो फिर दो चार दिन बाद फिर उसी
6:44
को सुनना चाहिए। सुनना चाहिए। तो वो प्रकट कर ही देगा।
6:50
हां आदमी बच ही नहीं सकता।
7:08
यार विराज ये YouTube लाइव में भी तो जा सकता है क्या ये
7:14
तो कैसे करेंगे उसको अभी कर रहा है क्या
7:22
तो अभी तो एक डला होगा ना पूरा चेक करके करना।
7:32
कर दे। चल देखते हैं क्या होता है। इसकी लिंक भी उसके उसमें डाल देना।
7:42
जो भी नया कोई जुड़ना चाहे तो उसको इजी हो जाएगा ना।
7:56
क्या बैठे हुए यार समाधि लगाए हुए कुछ बता क्यों नहीं रहे प्रणाम गुरु जी गुरु जी
8:04
हां प्रणाम भारती जी कैसे हो आनंद में प्रभु प्रभु जी आपका परसों वाला
8:12
ज्ञान सुना कि मैं ज्ञान स्वरूप हूं जो अंधेरे को भी प्रकाशित करती हूं और प्रकाश
8:20
को भी प्रकाशित करती हूं विचारों को भी प्रकाशित करती हूं भावों को प्रकाश करती हूं। सारे चराचर को मैं प्रकाशित करती
8:29
हूं। हां हां सुना प्रभु आपको बहुत अनुभव में आया कि
8:38
आपने जैसे कहा कि भाई अंधेरे को भी जो देख रहा है वो मैं ही हूं।
8:45
यस सर हम भाई अंधेरे को आप किस प्रकाश से देखते हो वही आत्मा
8:54
का प्रकाश यस सर है ना यस सर इस रोशनी को भी जिस प्रकाश से देखते हो अब
9:04
साइंटिस्ट बोलेंगे पहले रोशनी आती है तब देखते हो ना देखना पहले ही होता है तब देखते हो
9:13
इसलिए मैं पहले बोला अंधेरे को किस प्रकाश से देखते हो?
9:18
स्वयं के प्रकाश से। इस रोशनी को किस प्रकाश से देखते हो?
9:23
आत्मा के प्रकाश से। स्वयं के प्रकाश से।
9:30
तो मैं प्रकाशक हूं। निरंतर
9:37
प्रकाशित हो ही रहा हूं। करके पता नहीं चलता।
9:47
निरंतर है ना यह अखंड आत्मा की ज्योति अखंड है और उसका प्रकाश
9:56
अखंड है। वो प्रकाशित करता ही रहता है। वो प्रकाशक है।
10:07
प्रणाम प्रेम प्रणाम यार दो चाय यार हमारी
10:30
सहज प्रकाश रूप दिन राति
10:38
सहज प्रकाश बगर दिए बाती का प्रकाश है
10:45
और दिन रात अखंड है 24 आवर्स
11:17
हां जी अब पानी
11:39
हम हम
12:21
प्रणाम नमस्कारम प्रेम प्रणाम
12:43
कितनी सभ्यता है कि सामने वाला बोल ले। ऐसी सभ्यता होनी चाहिए। है ना?
12:51
यह मर्यादा है सत्संग की। यह तरीका है। मेरे को ये छोटी-छोटी चीजें बहुत प्रिय
13:00
लगती है। हां जी बताइए।
13:09
जी जी
13:25
ऐसा लग रहा था जैसे ज्ञान ही ज्ञान को सुन रहा है। यस
13:34
और पूरे पॉइंट्स अंदर ठीक हो रहे थे। ठीक हो रहे थे। हम
13:44
वो एकदम प्रत्यक्ष है वो। हम क्या सोचते हैं? कान सुनता है,
13:56
आंख देखती है। बगैर ज्ञान के कैसे कान और आंख मुर्दा थोड़ी ना देखता सुनता है ना
14:03
बोलता है। ज्ञान को ये इंस्ट्रूमेंट मिल जाते हैं।
14:12
कान, आंख और वाणी। तो ज्ञान इन इन इंस्ट्रूमेंट के थ्रू बोलता है, सुनता है, देखता है,
14:22
श्वास लेता है। यह भी एक इंस्ट्रूमेंट है। इनका आधार ज्ञानी है।
14:30
इवन कान से जो सुना जाता है,
14:41
वह ज्ञान से ही सुना जाता है। कान से नहीं सुना जाता।
14:48
महसूस भी होता है वो भी होता है। हां महसूस होता है। राइट?
14:52
होता है। होता है। शब्द नहीं मैं ही सुन रही हूं। ऐसे स्वयं ही ऐसे लगता है। लगता है।
15:00
हां। अब तो ऐसे लग रहा है जैसे। मैं खुद को तो
15:08
जान रही हूं तो फिर ये प्रकट होना और ये आत्म साक्षात्कार अलग से क्या है फिर ये?
15:15
नहीं कुछ नहीं है। यही तो है जो सब कुछ समझ में आ ही गया है। मतलब महसूस हो रहा है। सब लग रहा है कि
15:24
मैं तो जान रही हूं खुद को। सब मैं जान रही हूं। हम तो फिर बाकी क्या है? अब
15:32
बाकी में नहीं जानना। बाकी मन का क्षेत्र है। सही। ये आत्मा का क्षेत्र है जो आप बता रहे हो।
15:40
इस पे निष्ठा रखो। अपने आप पे श्रद्धा रखो कि यह इतना ही सरल है और सहज है। जी
15:48
है ना? कोई चीज सरलता से मिलती है ना हम उसकी कदर नहीं करते। जैसे किसी को लॉटरी लग गई जी
15:55
तो वो अपने पैसे डुबो देता है बहुत जल्दी। वो कदर नहीं करता। खरबों रुपए की लॉटरी लग गई तो वो क्या
16:04
करता है? उड़ा देता है। इसको उड़ाना नहीं है भैया। ये सरलता से जो
16:10
महसूस हो रहा है ना अभी आपको। अरे यह करोड़ों जन्म में किसी किसी को होता है
16:18
बता रहा हूं। इसकी कदर करना इस पर निष्ठा रखना
16:24
तो ये ये और अपने आप एक खिलावट एक फ्रेगरेंस
16:31
एक तरोताजापन फ्रेशनेस नित्यानंद रस ऑटोमेटिक रहेगा इसमें।
16:42
आप कृष्ण बन के आ गए हो हमारे जीवन में। अब
16:50
जो भी आप लोग सुन रहे हो ना मेरे को भी पता नहीं ये कैसे यहां से निकल रहा है इस बॉडी के थ्रू। यह भी एक इंस्ट्रूमेंट है।
16:58
और मैं भी आश्चर्य में हूं कि इतना अलौकिक कैसे निकल रहा है। यह तो असंभव ही है।
17:10
और हमें यही सुनने यही सुनने की खुशी होती है कि यही सुनते रहे। स्वयं के बारे में
17:17
ही सुनते रहे। ऐसा लगता रहता है। हां जी। क्योंकि स्वयं के अतिरिक्त सब कुछ एक भ्रम
17:26
है। और कुछ नहीं। सब कुछ एक भ्रम है।
17:35
स्वयं के प्रति दीवानगी मोहब्बत, रस, प्रेम
17:41
जिसको आ गया वो उसकी लॉटरी लग गई।
17:54
विराज इसकी रोशनी थोड़ी सी कम कर दे बस। है ना?
18:01
हां जी। चालू किए क्या आप?
18:10
कर लो कर लो कर लो
18:20
हां तो कर लो आप कर ही दो भाव आ गया है तो डाल ही दो ना पता नहीं
18:28
कौन क्या कब क्या सुन ले है ना ये तो कर्जदार रहेगी धरती तुम लोगों की जो
18:38
इतना सब सेटअप कर रहे हो। इसका कर्जा नहीं उतार सकती धरती। अरे क्या बोल रहा हूं मैं? मजाक नहीं
18:46
लेना। हां ये जो तुम लोग सेटअप करके डाल रहे हो एट द मोमेंट।
18:54
इसका कर्जा नहीं उतारा जा सकता। ऋणी रहेगी धरती। हां।
19:05
इन सत्संगों की वजह से ही पूरा मेरा इतना कॉन्फिडेंस बढ़ा है। जब से पहले सत्संग से
19:13
मतलब हां हां सबसे पहला सुना था तब भी अंतर्यामी पहचान
19:22
गया था कि नहीं ये जो बता रहे हैं वही है मतलब फाइनल
19:29
आज ऐसा है आप ही फाइनल हो। है ना?
19:47
ये इतना खूबसूरत है, सुंदर है। और सबसे आनंद की बात यह है कि आप सबको यह
19:56
सहजता से ग्रहण हो रहा है। आत्मसात हो रहा है। एकदम सहज
20:07
वो रस आ रहा है। वह महसूस हो रहा है। यह और उत्तम है। यह केवल आपके बुद्धि में
20:15
जाके एक बौद्धिक ज्ञान नहीं बन रहा है। जो सबसे घातक है।
20:22
यह सीधा आपके होने में प्रकट हो रहा है।
20:30
यह बहुत आनंददाई बहुत ज्यादा।
20:37
मेरे को तो पता नहीं ऐसा लगता है कि आप लोग कैसे ग्रहण कर लेते हो। मेरी तो हालत खराब
20:46
हो गई थी। हां, सच बता रहा हूं। मेरे को तो मैं हूं 15 साल लग गए जब पहली बार उसका
20:53
स्वाद आया। उसके पहले केवल बुद्धि से ही उसको टेली करता था। करता था। रस नहीं आता था।
21:02
इतना इजीली आप लोग ग्रहण कर रहे हो। प्रत्यक्ष है। यानी क्या बताऊं मैं?
21:18
आप बताते ही हो। ऐसे ही हूं। एकदम डायरेक्ट डायरेक्ट क्योंकि
21:24
आप आप लोग रियल में आप लोगों को प्यास है अस्तित्व की प्रभु की या स्वयं की बोल लो
21:34
तभी तो अस्तित्व ऐसा बोल रहा है और ऐसा वहां ग्रहण हो जा रहा है। वरना यह असंभव
21:41
है। मैं बता रहा हूं। पॉसिबल ही नहीं है यह। इतना ईजीली ग्रहण
21:48
होना। आप लोगों को देखोगे ना 50-50 साल से लोग लगे हुए हैं। केवल अपने बौद्धिक ज्ञान को
21:58
बस उसको खुजली कर रहे हैं। बस और कुछ नहीं है। उनको एहसास ही नहीं है स्वयं का। यह रस ही
22:06
नहीं है। पता नहीं क्या लोग हो आप लोग। भाई आश्चर्य
22:17
लगता है। आपकी कृपा है प्रभु
22:24
मेरा क्या है मैं तो फटफट बोल देता हूं
22:31
हां मेरा कुछ थोड़ी ना है मेरा तो ये बॉडी को अस्तित्व पूरा उपयोग कर रहा है
22:40
हां बुलवा रहा है हम अलग है ही नहीं
22:49
समझ में आ जा रहा है। नहीं बहुत ज्यादा डायरेक्ट तो बोल रहा है। पागल हो गया अस्तित्व भी।
23:00
सही बता रहा हूं। अस्तित्व पागल हो गया है। अभी इतना डायरेक्ट थोड़ी ना बोला जाता है किसी को यार।
23:09
थोड़ा धीरे से थोड़ा आहिस्ते से थोड़ा कुछ यह तो साला इतना खतरनाक डायरेक्ट है।
23:18
इसका कोई पार नहीं है।
23:24
समय ही नहीं लग रहा है। अष्टावक्र भी बोले तो उसमें कई चीजें बताए कि भाई तुम दया
23:33
क्षमा ये वो ग्रहण करो और फिर बाद में तुम वही हो ऐसा वैसा बट यह तो इतना स्ट्रेट
23:41
है। इधर बोलो और उधर वह फूल खिल जाता है। ब्रह्म कमल और क्या चाहिए यार?
23:57
मैं तो इतना प्रसन्न हूं कि आप लोग इसको सुन के जो ग्रहण कर रहे हो ना बहुत
24:04
प्रसन्न हूं मैं। ऐसे सुनने वाले नहीं मिलते यार। वो ज्ञानी
24:15
लोग मिलते हैं। गुरु ही मिलते हैं। आजकल शिष्य कहां मिलते हैं?
24:30
राइट लिसनिंग इतनी इतना परफेक्शन
24:38
अद्भुत है।
24:49
अभी संध्या जो बोली अभी थोड़ी देर पहले कि क्या तो बोली कि
24:56
मैं मैं को जानती हूं तभी तो कहती हूं मैं। फिर बाद में कौन हूं जो उसने कितना
25:03
राइट सुना। यह लाइनें यह यह अद्भुत है।
25:16
और यह सहज में प्राप्त है ही करके हम इसका ना कद्र नहीं करते।
25:24
हमेशा हम इधरउधर की चीजों की कदर करते हैं जो है ही नहीं जो केवल एक भ्रम है।
25:48
मैं बहुत प्रसन्न हूं कि आप लोग मेरे को सुनते हो यार। मैं धन्य भागी हूं मालूम।
25:56
सही बता रहा हूं। एकदम बहुत प्रसन्न हूं अभी मैं कुछ दिनों से।
26:07
मालूम आपको पता है जिस जगह मैं रहता हूं वहां मेरे को सुनने वाले दो तीन लोग हैं
26:13
वो भी आते नहीं है मेरे पास जिस बेल्ट में मैं रहता हूं ना
26:23
यहां सुनने वाले है ही नहीं मेरे को दो तीन है और वो इस भ्रम में है कि अब तो
26:31
हम जान गए बोध हो गया अब और क्या मतलब वो ट्रैप में फंसे हुए
26:40
हो गया ये क्या है हो गया थोड़ी ना होता है इसमें
26:53
ये तो रस है आनंद है अनंत है हरि अनंत हरि कथा अनंता
27:01
हो गया तो सबसे थर्ड क्लास चीज है।
27:10
बाकी भ्रमों से भी खतरनाक भ्रम है। हो गया जान गया।
27:28
हां, यह और बात है कि मैं स्वयं को जानता ही हूं। इसलिए कहता हूं मैं बट इस सत्संग
27:34
का रस है। एक आनंद है।
27:45
तो मैं बहुत प्रसन्न हूं कि आप लोग सुनते हो मेरे को यार। पता नहीं कौन सी दुनिया
27:51
से आए हो आप लोग। देवलोक से आए हो। कौन से लोक से आए हो।
28:01
ऑलमोस्ट इंपॉसिबल है इसको आत्मसात कर पाना
28:08
और सहज में हो रहा है
28:31
हां कर लो। हां हां
28:47
अरे इतना आनंद है। बहुत आनंद है।
29:10
तो कृष्ण बोलते थे ना कि इसमें लाखों चलते हैं।
29:17
फिर हजारों चल पाते हैं। फिर हजारों में कोई कोई वहां तक पहुंचता है। फिर कोई एकांत
29:26
आ पाता है। है ना?
29:31
मैं आत्मा भगवान में बट अब तो क्वांटिटी बढ़ गई यार।
29:44
विद क्वालिटी और एक उनका गिफ्ट एक कोई आ जाए वो तो
29:55
गिफ्ट अस्तित्व देता ही रहता है। उसमें क्या है?
30:02
यहां तो बहार आनी चाहिए।
30:21
हम हम तो यह इतना
30:30
प्यारा आनंद है कि पता नहीं क्या बोल दिया गया है और पता नहीं क्या सुन लिया गया है।
30:45
ना तुम जानो ना हम सॉन्ग था ना तुम जानो ना हम
31:26
चले गए अंदर
31:39
महाशय नाम हटा दे भाई प्रभु श्री रख
31:53
महाशय नाम स्वामी जी दिए थे हमको स्वामी चैतन्य
32:00
भारती जी वो भी सुंदर है।
32:36
तो आप लोग कैसे खामोश बैठे हो बताओ कुछ यार ऐसा मतलब क्या है ऐसे खामोश बैठने का यहां
32:44
कोई समाधि लगाने थोड़ी ना
33:09
तो लगाने वाली समाधि पक्का टूटेगी ना क्योंकि आप लगा रहे हो वह
33:18
लगाना ही बता रहा है की टूटेगी
33:24
तो जो बनता है वह बिखर जाता है।
33:46
और मैं स्वयं अखंड समाधि हूं। अब मुझे क्या अपने आप को लगाना है क्या?
33:57
अरे मैं हूं अखंड।
34:22
नमस्ते क्वालिटी थोड़ी लो में भी चलेगी विराज है ना ताकि वो रुके ना 720 कर ले
34:31
है ना YouTube में भी हां जी कोई कुछ कह रहा था नमस्ते
34:38
नमस्कारम बहुत कुछ है कहने के लिए पर समझ नहीं आ
34:45
रहा कहां से शुरू करूं हां जी
34:51
बस कह दो मैं सिर्फ दो दिन से आपको सुन रही थी।
35:02
हां मैं आपकी वॉइस इधर बढ़ाओ तो विराज थोड़ी कम आ रही है। क्या बोला आपने?
35:09
मैं सिर्फ आपको दो दिन से सुन रही हूं। जी YouTube YouTube पे आपके एक दो मैंने वीडियोस देखे।
35:18
हम हम फिर वहां पे एक नंबर मिला तो मैंने उनसे कांटेक्ट किया तो उन्होंने इस पे मुझे ज्वाइन किया। जी
35:26
आपके दो तीन वीडियोस देखे। उस वीडियो देखने के बाद बहुत सारे सवाल मन में है मेरे। बट मुझे लगता है ये राइट प्लेटफार्म
35:33
नहीं है जहां पे मैं बात कर पाऊंगी आपसे। हम हम बट डेफिनेटली कुछ सवाल है जो मैं आपसे करना चाह रही हूं। तो मुझे बताइए मैं कैसे बात कर सकती हूं आपसे?
35:44
नहीं तो पूछिए सवाल। जो भी आपके सवाल हैं पूछिए।
36:00
सवाल ही तो है और क्या पूछिए मुझे लगता है मैं वो स्टेट में नहीं हूं इस वक्त बात करने के लिए इसलिए सिर्फ
36:09
नमस्ते किया मैंने आपको ओके
36:16
तो या तो फिर अभी कुछ दिन आप सुनिए आपके सारे सवाल सवाल निश्चित गिर जाएंगे। अभी
36:24
आपने दो दिन ही सुना है। है ना? हर सवाल गिर जाएगा। यह वादा है मेरा।
36:32
और समाधान एक बहुत बचानी क्वेश्चन है। बट मैं करना चाहती हूं। सच में जीवन का पपस क्या है गुरुदेव?
36:46
पपस मत खोजो। है ना?
36:53
मतलब यह लाइफ ना एक सरप्राइज है।
37:01
ये लाइफ अद्वितीय सरप्राइज है।
37:07
इसका कोई कारण नहीं है। अचानक अभी आके आपको कोई गिफ्ट दे दे, फ्लावर का बुके दे
37:15
दे, विदाउट रीजन। ऐसा ही कुछ है यह।
37:21
और इस लाइफ में आपका होना इस सरप्राइज में इस लाइफ में आपकी बीइंग
37:31
ही परमात्मा है। अस्तित्व है।
37:39
नहीं समझ पाई। हां, ठीक है।
37:50
क्योंकि हम खुद को बॉडी ही समझते हैं ना।
37:56
हम खुद को केवल देह मान के जीते रहते हैं। और देह
38:04
के थ्रू जो हो रहा है वही हमको सच लगता है।
38:12
हमारी लाइफ में जो हो रहा है अच्छा बुरा वही सही गलत उसी ट्रैप में हम जीते रहते
38:20
हैं। यह लाइफ
38:29
आपको सरप्राइज नहीं लगती। बाकी चीजें तो जिंदगी में बाद में है कि
38:36
आपकी जिंदगी में यह कुछ चीजें हैं। कुछ चीजें नहीं है। वह तो बहुत बाद की बात है।
38:43
आपके पास जिंदगी है। यह क्या कम है?
38:53
देख पा रहे हो, आप सुन पा रहे हो। मतलब
39:04
पूरी पृथ्वी का मैं आपको धन दे दूं और मैं आपको कहूं कि आप अपनी आंखें मेरे को दे दो। आप नहीं दोगे। अगर समझदार हो तो नहीं
39:12
दोगे। वह चीज आपके पास सहज में है।
39:18
गिफ्टेड है।
39:28
आप देख पा रहे हो ना ये ये एक बहुत बड़ा सरप्राइज है रहस्य है
39:37
एक जादू है डेड बॉडी देख पाती है क्या बताओ
39:43
आप देख रहे हो जीवंत हो और मैं आपको लाखों बुद्धत्व दे दूं,
39:54
इनलाइटनमेंट दे दूं, मोक्ष दे दूं, कैवल्य दे दूं, परमात्मा हजार परमात्मा एक साथ दे
40:00
दूं और आपको कहूं मैं आप मेरे को आप अपना इसके बदले में आप अपना होना मेरे को दे
40:06
दो। यह परमात्मा, यह अस्तित्व, यह एनलाइटनमेंट
40:17
यह अनंत ब्रह्मांड मैं आपको देता हूं। उसके बदले में आप मेरे को अपना होना दे दो। बस
40:28
आप नहीं दोगे। यानी सोचो आप क्या हो?
40:40
हमको अपनी ही कदर नहीं है। हमको परमात्मा की कदर है। चलो अच्छी बात।
40:46
एग्जिस्टेंस की कदर है। अच्छी बात है। मोक्षा की, कैवल्या की, निर्वाणा की,
40:54
अध्यात्म की, संसार की, धन की, दौलत की अपनी नहीं है बस। और मैं आपको सब देता हूं। आप उसके बदले
41:02
में अपना होना दे दो ना मेरे को। यानी समझो कि आप आप क्या हो? जिंदगी तो
41:12
केवल एक सरप्राइज है। और आपका होना आपकी बीइंग
41:22
आ यह क्या है?
41:29
कोई नहीं बता सकता यह क्या है? परमात्मा बोलना भी बहुत कम बोलना है। इसको
41:35
एग्जिस्टेंस बोलना भी बहुत कम बोलना है। और वह आप सहज में हो।
41:45
आश्चर्यों के आश्चर्य रहस्यों का रहस्य आपका होना
42:09
तो अपने से दिलगी लगाओ। है ना? अपने प्रति प्रेम से भरो।
42:20
कदर करो अपनी। है ना? अपने को सवालों में मत उलझाओ कि ये जिंदगी क्यों है? कैसे है?
42:28
क्या है यह सब? जिंदगी कोई सवाल नहीं है। जिंदगी सरप्राइज है। खुद को भी सवाल मत बनाओ कि मैं कौन हूं?
42:37
मैं कैसा हूं? मैं कहां हूं? कब से हूं। आप सरप्राइज
42:46
के भी स्वामी हो। आश्चर्यों के भी आश्चर्य हो।
42:52
रहस्यों के भी रहस्य हो।
43:00
खुद को सवाल मत बनाओ। खुद में थोड़ा विश्राम करो। रेस्ट करो।
43:08
हम रेस्ट करते हैं ना। ऐसी खुद में फुल रेस्ट
43:16
अपने ही आप में एक कंप्लीट रेस्ट।
43:24
अरे मैं हूं बस ये बहुत बड़ी बात है। इससे इससे विराट कुछ हो ही नहीं सकता।
43:32
क्योंकि आप अपने होने के बदले में कुछ देना ही नहीं चाहोगे ना। इस पूरे एग्जिस्टेंस की बड़ी से बड़ी चीज
43:41
यह पूरा एग्जिस्टेंस भी आपको कोई लाकर दे दे आप अपना होना कैसे दोगे
43:53
और वो आप नेचुरल हो सहज में हो
44:00
तो सवालों में मत उलझो कंफ्यूजन में मत रहो
44:07
जिंदगी के इस रहस्य को गले से लगाओ। इस सरप्राइज को,
44:17
इस जादू को,
44:24
यह अद्भुत है। बहुत सुंदर है। कितना सुंदर है। सब कुछ। देखो ना पूरी
44:32
प्रकृति को, सितारों को, शाम को। वृक्षों को, पंछियों को,
44:42
मनुष्यों को भी,
44:45
मनुष्यों की आंखों से भी परमात्मा ही झांक रहा है। और कौन झांकेगा?
44:55
आपकी आंख से परमात्मा देख रहा है,
44:57
अस्तित्व देख रहा है। आपको लगता है यह बॉडी देख रही है। अरे
45:04
बॉडी व्हाट ही नहीं दिख रही है। तो यह आपको प्राप्त है ही करके कदर नहीं
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है।
45:24
धन्यवाद
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तो अभी सुनिए आप कुछ दिन है ना आज थोड़ा धैर्य पूर्वक निरंतर सत्संग
45:42
सुनिए आपके सारे डाउट्स गिर जाएंगे जी
45:50
हां जी
45:58
84 लाख योनियों में आपको मनुष्य बनाया गया है यार। इससे बड़ी खुशी की क्या बात होती?
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आपको कीड़े मकोड़े नहीं बनाया गया। जंगली जानवर नहीं बनाया गया। कितने 84 लाख योनियां है। उसमें आपको
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मनुष्य बनाया गया है। यही एकमात्र कारण है कि आपको दुख होना ही
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नहीं चाहिए जीवन में। अगर कारण से भी चले अपन किस बात का दुख?
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कौन सा दुख? 84 लाख योनियों में हमें मनुष्य बनाया गया। इतना सेंस कॉमन सेंस तो सबको है। है ना?
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आनंदित होने के लिए यह बात ही बहुत है पूरे जीवन के लिए।
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ठीक है। आत्मा परमात्मा बाद में देखेंगे। कम से कम इतना सेंस तो है कि आप मनुष्य हो।
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यही बहुत होता है यार।
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आपको चलती हुई चींटी नहीं बनाया गया जो आप ही के पैरों के नीचे दब के मर जाती है। आपको पता भी नहीं चलता।
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कीड़े मकोड़े जानवर जंगली कुछ नहीं बनाया गया वृक्ष नहीं बनाया गया जो चल भी नहीं
47:44
पाते आपको पत्थर नहीं बनाया गया जो स्थिर रहता
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है हजारों करोड़ों साल तक एक ही जगह पूरा जड़वत
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आप में चैतन्यता है जीवंतता है मनुष्यता है और भगवतता भी है। लेकिन मनुष्यता तक भी
48:10
अगर आपको कॉमन सेंस से समझ आता है तो यह बहुत है नाचने के लिए, सेलिब्रेट करने के लिए,
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जीने के लिए,
48:31
हां जी। बेवजह के दुख अपने जीवन में मत ला दो।
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कारण मत खोजो। है ना? सब कुछ बहुत खूबसूरत है। अद्भुत है सब कुछ।
48:53
अलौकिक यानी सब कुछ कितना सुंदर है। देखो ना इस
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प्रकृति में और इस प्रकृति की सुंदरता को अनुभव करने वाला कितना सुंदर होगा।
49:12
वही आप हो। सुंदरतम दिव्यतम
49:21
जो सारी सुंदरता को अनुभव कर रहा है।
49:29
कितना सुंदर आ
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अपने प्रति अहोभाव होना चाहिए कि मैं हूं।
49:48
अपने प्रति दीवानगी होनी चाहिए कि मैं हूं। मेरा होना है।
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तो कोई खुद का दीवाना होता है यहां। खुद का
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दीवाना यहां तो सब दूसरों के दीवाने हैं
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और दूसरा एक भ्रम है।
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ओके जी प्रणाम। यस एनीबडी
50:45
तो YouTube चालू हो गया। उसमें टाइटल में लिंक डाल दो इसकी Google लिंक जो भी
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जुड़ना चाहे हम
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नहीं YouTube के टाइटल अच्छा वह तो खैर स्ट्रेट जुड़ जाएगा ना कोई ओके
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हां जी प्रणाम भगवान जी
51:17
प्रणाम जी भगवन मुझे आपसे एक अपना एक्सपीरियंस शेयर
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करना था जब आप हमें कुछ भी बताते हैं ज्ञान देते हैं तो जो अपने अंदर फील होता
51:32
है वो कभी विचार नहीं बनता है। जैसे हम और कुछ सुनते हैं, कुछ होता है तो वो विचार
51:39
बनता है। फिर एक विचार से दूसरा बनता है। फिर वो क्रिया होता है तो फिर हम उसको एक्शन में लाते हैं। ये डायरेक्ट जीवन बन
51:47
जा रहा है। डायरेक्ट बहाव हो जा रहा है। जैसे कि पहले दूध रहता है, फिर दही बनता
51:55
है, फिर मक्खन निकलता है, फिर घी बनता है। आप डायरेक्ट घी पिला दे रहे हैं।
52:01
हां, ऐसा है। और आपने एक बहुत ही खूबसूरत बात कही कि यह
52:09
विचार नहीं बनता है। आप बहुत ही परफेक्टली सुन रही हैं मेरे
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को। यह सीधा जीवन बन रहा है आपका। डायरेक्ट जीवन एक्यूरेट कहा आपने। आपका क्या नाम है?
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साक्षी सिंह। साक्षी जी। अच्छा बहुत सुंदर।
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तो इतनी प्यारी बात जो आपने कही तो कब से सुन रहे हो आप मेरे को?
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छ सात महीने से आज मेरे पापा आपको सुनते थे। उन आपकी बात
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उनसे हुई है। मनोहर सिंह नाम था मुरली मनोहर। एक बार उनकी बेटी हूं मैं। मैं अपने घर गई थी।
53:01
मेरी शादी हो गई है। मैं ससुराल से अपने घर गई थी तो वो आपको मतलब 24 घंटे में 20
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घंटे सुनते ही हैं। उठते बैठते खाते पीते घूमते और मैं ना चाहते हुए भी आपको सुनती थी।
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थी ओके और वो सुनते सुनते
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ना हां ना नहीं सुनते सुनते मैं वही हो ही गई।
53:34
और आज जीवन बिल्कुल अद्भुत हो गया है। आज मतलब
53:42
जीवन में विचार पहले होता था कि हमें
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उसके बाद वो जो आपका सत्संग तो सुनते हैं उसमें विचार कुछ भी नहीं रहता। लेकिन जो
53:57
हम अपना दिनचर्या जो डेली का जीते हैं ना उसमें भी बस इतना है उठना बैठना खाना पीना
54:04
सोना उसमें भी विचार नहीं बन रहा है ब्रश किए तो बस ब्रश किए खाना बना रही हूं तो बस खाना बना रही हूं ससुराल में सबको दे
54:13
रही हूं तो बस दे रही हूं मतलब वो एक लाइन सीधी लाइन जा रही है ऐसे हो ही नहीं रहा है कुछ भी एक डायरेक्ट जीवन का रास्त मतलब
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डायरेक्ट एक आप वो तार पकड़ा दिए सर सर पकड़ पकड़ के ऊपर पहुंच जा रही हूं। उतर जा रही हूं। ऐसा भी नहीं है कि उतर नहीं
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रही हूं। बस ऊपर ही जाना है। नीचे भी आ रही हूं फिर भी वही है। ऊपर जा रही हूं फिर भी वही है। बीच में भी वही है।
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तो किसी समय आपको ऐसा नहीं लगता कि कुछ मिस हो गया, कुछ छूट गया। ऐसा कुछ नहीं लगता।
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नहीं कुछ नहीं। कभी मैं आपको नहीं भी सुनती हूं तो क्या नहीं लगता है कि छूट गया या फिर कुछ हो गया। फिर अगले दिन सुन
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लेते हो मजा आ जाता है। मतलब गिल्ट होती ही नहीं किसी चीज को आपको सुनने की ना सुनने की। हां लेकिन आपको सुनने का
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इंटरेस्ट रहता है। वो मतलब तृप्ति में तृप्ति होती है। तृप्त हूं। सुन के और तृप्त होती हूं और तृप्त होती हूं और
55:14
तृप्त होती हूं। यस। तो बस मेरा प्रणाम आप स्वीकार करें। है ना
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नहीं जी भग नहीं ये ऐसा सुन पाना मेरे को तो अति
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आश्चर्य लगता है भाई कैसे आप लोग ऐसा ग्रहण कर ले रहे हो कैसे सुन रहे हो ये हो क्या रहा है
55:41
मैं बताया ना अभी थोड़ी देर पहले मैं क्या बोल रहा हूं मेरे को भी पता नहीं आप लोग क्या सुन रहे हो आपको भी पता नहीं और जो
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आप बोले ना कि यह विचार बनता ही नहीं है यह जीवन ही बन जा रहा है। यानी इससे बड़ा मैजिक और क्या होगा?
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बहुत अद्भुत है और आपका क्या नाम बताया था अभी आपने?
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साक्षी। जी। साक्षी जी। हां। बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके। साक्षी जी
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बहुत प्रसन्न हूं मैं आपसे बात करके धन्यवाद परमात्मा
56:28
हां ऐसा भी कोई सुन रहा है मेरे को वाह अद्भुत
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आपको पता नहीं है ये बड़े-बड़े ज्ञानी लोग ऐसा नहीं सुन पा रहे हैं मेरे को पुराने प्लेयर्स हैं पुराने यहां लगे पड़े हैं
56:44
50ों साल से वो ऐसा नहीं सुन पा रहे जो आपने सुन लिया है
56:55
जो आपने बना दिया है भगवान मतलब जो नाई होता है ना बाल कट करता है तो वो
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तीन पांच नहीं करता है वो सीधे बैठाता है और छिल देता है डायरेक्ट छीन लिए आप
57:16
वो कहीं भी उसको तो जरूरत नहीं है कि तुम सलूून में ही बैठो। अरे तुम खेत में बैठ जाओ, कहीं भी बैठ जाओ, द्वार पे बैठ जाओ,
57:24
कहीं भी बैठ जाओ, मतलब दारू के ठेके पे बैठ जाओ, कहीं भी बैठ जाओ। उसको उसको आता ही छिलने उसको पता है टेक्निक। तो आप कहीं
57:32
भी बैठा के डायरेक्ट परमात्मा बना रहे। डायरेक्ट जीवन दे रहे हैं आप। कोई जरूरत नहीं है। मंदिर जाना, मेडिटेशन करना,
57:38
ध्यान करना, विधि करना यही मिलेगा। हम जहां है वहां मिल जा रहा है। तक्षण मिल जा रहा है।
57:50
क्यों मिल जा रहा है? क्योंकि आप वही हो। जी भगवान है ना?
57:58
और ये और मेरे को आनंद हुआ कि
58:05
आपके पिताजी सुनते थे और आपको सुनना पड़ता था शुरू में।
58:13
उस चक्कर में यह चीजें हो गई। बताओ
58:25
अद्भुत तो कहां रहते हैं आप?
58:34
मैं आजमगढ़ में रहती हूं। हां जी। मैं आपसे मिलना चाहती हूं। सत्संग आना
58:43
चाहती हूं। लेकिन मेरे पास छोटा बच्चा है डेढ़ साल का तो आपके यहां पे कोई छीकता भी
58:50
है तो वो नहीं हाथी भी नहीं करवाता तो बच्चा ले लो नहीं आप ले आइएगा आपको परमिशन है
58:59
है ना बेबी को लेके आ जाओ वैसा सेटअप कर देंगे आपके लिए पूरी छूट है ओके
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ठीक है भगवान जी ओके हां जी
59:17
प्रणाम जी प्रणाम और बहुत प्रसन्नता हुई आपसे बात कर
59:27
और आपने एक बात और बोली कि मैं तृप्त हूं और और तृप्त हो रही हूं।
59:36
यानी तृप्ति भी तृप्त हो रही है। अब आनंद भी आनंदित हो रहा है।
59:43
यही यही आत्मा के लक्षण है। उस अलक्षण के लक्षण
59:50
अद्भुत है ये। क्या सुनते हो यार?
1:00:11
अच्छा प्रणाम यस एनीबडी
1:00:27
देख रहे हो राहुल देख रहे हो YouTube में सुना है उन्होंने
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केवल वह भी उनके पिताजी चला देते थे उनको सुनना नहीं था शुरू में
1:00:44
ऐसा होता है सुनने वाला और जहां से वह बोल रही हैं ना वो आत्मदेश
1:00:54
है और उनको अपनी लाइफ में जो बोलते हो ना
1:01:03
बाहर में यह हो जाता है। कोई प्रॉब्लम ही नहीं है। हर चीज सेटल है। बाहरी लाइफ में भी आत्मा ही है।
1:01:14
अद्भुत
1:01:30
कोटि-कोटि प्रणाम है आपको।
1:01:42
श्री राम प्रणाम जी आप तो खुद एक पारस है
1:01:51
जिसके साथ भी जुड़ते हैं उसको पता ही नहीं लगता वो क्या हो जाता है।
1:01:58
यह देश ऐसा है। सब झड़ जाते हैं।
1:02:06
सबको एक रस कर देते हो। ये आनंद बहुत आप लोग वो नहीं समझ रहे हो।
1:02:18
मैं कुछ नहीं कर रहा हूं यार। मतलब मैं तो बस जो आप हो उसको बता दे रहा हूं।
1:02:24
वह आप लोगों में वह क्वालिटी है कि आप लोग वही सुन ले रहे हो जो मैं बता रहा हूं।
1:02:32
यह चमत्कार है। और कितने आनंदित हो? कितना रस है आप लोगों
1:02:42
के फेस में। ये ये क्या है? ये क्या हो रहा है? ये सच
1:02:49
में पृथ्वी लोक है ये। कौन बोलेगा यह पृथ्वी लोक?
1:02:55
कलयुग है यह।
1:03:07
तो कलयुग केवल नाम आधारा बोलते हैं ना। अरे नाम का भी आधार होता है। नामी क्या?
1:03:18
नामी नाम का भी आधार है। कलयुग का आधार नाम का आधार नामी। नामी कौन है?
1:03:28
मैं हूं आत्मा। इसलिए
1:03:37
आत्म देश में समय कोई योग कुछ होता ही नहीं।
1:03:53
कल की आपकी एक लाइन है तो बिल्कुल हिला दिया। मैं के बाद कुछ नहीं। हां बताइए।
1:04:01
बिल्कुल कुछ नहीं बचा। सिर्फ मैं ही मैं बचा और सर्वर्थ हो गया। मैं ही मैं हो गया। यह सारी रात आनंद से भरी रही।
1:04:11
सर्वर्थ मैं हो गया। बहुत आनंद धन्यवाद आपका बहुत धन्यवाद मेरा
1:04:21
मुझको प्रणाम प्रणाम है जी
1:04:29
बहुत-बत अरे मेरे को आप लोग मिल गए
1:04:37
मैं मेरा जीवन धन्य हो गया मालूम यहां सुनने वाला मिलता ही नहीं सब ज्ञानी
1:04:45
लोग मिल जाते हैं। बौद्धिक ज्ञानी कचरा एकदम कचरा सिर में भर लिए हैं और
1:04:52
ज्ञान परोस रहे हैं। ज्ञान बाजी बोलता हूं जिसको मैं
1:04:59
और जिंदगी में रस आनंद है ही नहीं। तो मैं एकदम धन्यभागी हूं कि आप लोग मिल
1:05:06
गए यार। आ क्या बताऊं मैं?
1:05:13
अब बोलोगे तो मैं खुद ही आ जाऊंगा आप लोगों से मिलने जहां भी आप लोग रहते हो।
1:05:19
आनंद आनंद
1:05:29
तो बस आत्म नैष्टिक रहे है ना स्वयं पर निष्ठा स्वयं के प्रति प्रेम
1:05:39
ओके जी प्रणाम प्रणाम
1:06:00
ये हो क्या रहा है सौरभ जी हां
1:06:10
अद्भुत भाई
1:06:28
तो जिनका होते जाए उनको चेंज करते जाओ सबसे टॉक हो
1:06:41
हीना जी कैसे खामोश बैठे हो आप हां जी
1:06:48
हो कि नहीं हो प्रभु प्रणाम जी
1:06:58
बहुत बढ़िया बढ़िया बढ़िया चल रहा है प्रभु हम
1:07:06
और संसार में कुछ बिगड़ तो नहीं रहा है सब ठीक है फेरी चल रहा है सब अच्छा अच्छा
1:07:16
हम जैसे सत्संग में सब अच्छा लगता है।
1:07:23
फिर संसार में बिगड़ जाता है। ऐसा तो नहीं है। में मत लगाना। हां हां
1:07:30
हां डेली पानी से धोना। उसी बाल्टी में धो के पानी से धो दो। बाल्टी में अच्छे से हाथ से पानी से धो लो। कहां चल रहा है?
1:07:41
मुझे यहां भी देख के डस की डाट रही।
1:07:55
बिस्किट की आवाज थी क्या ये वो चालू करो तो जी हां जी क्या होश नहीं
1:08:08
क्या चल रहा है रेस्क्यूट ये सब क्षमा करें प्रभु श्री प्रेम प्रणाम
1:08:15
प्रेम प्रणाम जी प्रभु जी आपके सब सबको सुन के बहुत आनंद मिल रहा है और मैं सोचती हूं कितने
1:08:24
भाग्यशाली हैं आपसे जुड़े हम और आपको आनंद ये तो पेटेंट डायलॉग है ये तो पेटेंट
1:08:31
डायलॉग है आपका कितने भाग्यशाली हैं हम जो आपसे जुड़े ऐसा पुराना पुराना डायलॉग
1:08:37
मारते रहोगे तो ऐसा थोड़ी ना चलेगा जी ये तो अभी मैं चिल्लाता आपको करके आप बोल
1:08:45
रहे हो वो हमारा काउंट डाउन चल रहा है अभी
1:08:59
बहुत आनंद हम रात सो नहीं सकते दोनों नहीं अच्छे से सोते हैं हरि ध्यान हम कर लेते
1:09:08
हैं एक बार बहुत मन किया तो ध्यान करने का आप ये सत्संग सुनते रहते हैं बस हां जी हां जी
1:09:15
बहुत बढ़िया आनंद में रहो बस ऐसे मुस्कुराते रहो है ना जिसके जीवन में मुस्कुराहट है
1:09:25
उसी के जीवन में परमात्मा है ना बस मुस्कुराते रहो ओके
1:09:32
प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रणाम
1:09:41
हम हम प्रेम प्रणाम प्रभु जी
1:09:53
हां प्रेम प्रणाम मैं आपसे पहली बार बात कर रही हूं। हां जी क्या नाम है आपका?
1:10:02
मेरा नाम गीता है। हां गीता जी। बस आपको सुनना अच्छा लगता है। जब भी आपका
1:10:11
सत्संग आता है तो मेरा दिल करता है बस सुनो और मतलब आनंद ही आनंद आता है। आपको सुन के समझ आ रहा है या नहीं आ रहा है ऐसा
1:10:19
कुछ समझ समझ में कभी आता भी है कभी नहीं भी आता है पर आनंद बहुत आता है।
1:10:26
हां तो बस आनंद ही तो लक्ष्य है हर किसी का। सच्चिदानंद ही तो लक्ष्य है और वह आ
1:10:34
रहा है तो बेस्ट है। समझना वहां इंपॉर्टेंट है ही नहीं।
1:10:43
आनंद वहां इंपॉर्टेंट है और वो आ रहा है। बहुत सुंदर
1:10:51
बल्कि जो नासमझ हो जाता है उसको ज्यादा आनंद आता है।
1:11:01
समझदार तो यहां से समझ के चले गए। वो गुरु बन गए। हां
1:11:10
डुप्लीकेट वाले असली वाले नहीं भाई असली गुरु तो आपका अंतर्यामी आप खुद हो
1:11:18
बहुत सुंदर गीता जी और कुछ याद रहे ना रहे बस अपना होना तो
1:11:25
याद रहता ही है बस एक ही चीज नहीं भूलती है सिर्फ अपना होना यस
1:11:33
वो सदा रहता है स्वयं का एक क्षण को भी अभाव नहीं होता। जी जी
1:11:40
हां बाकी तो सब भूल भूल जाता है। भूल भूल जाता है। जितना भी याद करने की कोशिश करो भूल
1:11:47
ही जाता है। हां जो भूल जाए और जो याद आए वो बुद्धि का विषय है। है ना?
1:11:56
जी। और अपना होना बुद्धि नहीं है। जी वो है बस। जैसे अस्तित्व है बस ना।
1:12:05
एग्जिस्टेंस है बस ऐसी अपना होना है बस जी
1:12:12
वहां याद करना और भूलना वो दोनों का मतलब ही नहीं है ओके
1:12:20
हां जी धन्यवाद प्रभु हां जी प्रणाम गीता जी आनंद में रहें आत्मनस्थिक रहें
1:12:29
हां जी आपका आशीर्वाद बना रहे बस
1:12:38
बस
1:12:56
प्रणाम प्रभु प्रणाम जी
1:13:05
बहुत खूबसूरत है। बहुत बढ़िया। एकदम मस्त है। आज
1:13:24
तो अब कैसा लगता है अपने जीवन में? आपको इतना सत्संग सुने हो तीन चार महीने से और
1:13:33
फर्स्ट टाइम याद है आप आए थे सिलवासा या कहीं पे कैंप में पावागढ़ में
1:13:40
पावागढ़ में कहीं पे और वो उस समय और अब अब कैसा लगता है
1:13:49
एकदम जमीन आसमान का फर्क पड़ गया है प्रभु शब्दों में ब्या करना ऐसे मुश्किल
1:13:59
एकदम आनंदित आनंदित खुश तृप्त अपने आप में मस्त
1:14:07
मैं मैं ऐसा लबालब हूं प्रभु का बहुत सुंदर
1:14:17
तो ये निरंतर जो सत्संग आपने सुना है ना यह उसका फल है।
1:14:26
जो भी इन सत्संगों को निरंतर सुनेगा बेशर्त कोई बिजनेस नहीं है कि कुछ हो जाएगा उसलिए
1:14:35
बस सुनना है इसलिए प्रेम है इसलिए जी बिल्कुल आपको शायद वो याद होगा सॉरी
1:14:44
हां तो उसको सारी अनुभूतियां हो जाएंगी जी
1:14:52
सारी की सारी
1:15:01
सुनने की भी एक कला होती है। हमारे पास पेशेंस ही नहीं होता है। हम ऐसे सुनते हैं
1:15:08
दो मिनट। अरे यार चलो चेंज करो। चलो चेंज करो। ये क्या है? ऐसा थोड़ी ना होता है यार। धैर्य रखो।
1:15:16
थोड़ा सा सुनो। आखरी तक सुनो। पेशेंस रखो। है ना?
1:15:23
यानी एक बच्चे को जन्म देना है तो मां 9 महीने का धैर्य रखती है।
1:15:31
यहां तो परमात्मा यानी सोच रहे हो। हालांकि उसको जन्म नहीं देना है। बट फिर
1:15:39
भी वहां धैर्य नहीं है तो कैसे बनेगा?
1:15:48
तो धैर्य रखना आपका धर्म और मैं कितना फास्ट हूं वह तो आप लोग जानते ही हो।
1:16:00
बट धैर्य रखना आप सबका धर्म होना चाहिए। पेशेंस से सुनना सत्संग को आखरी तक
1:16:08
क्योंकि मैं आखिरी तक उस पीक में ले जाता हूं जो हिमालय है पूरा। जी है ना?
1:16:15
जी। आपके हर सत्संग में यही हाल होता है। प्रभु एक भी सत्संग मिस नहीं किया है।
1:16:23
अरे बहुत सुंदर है। आत्मनस्तिक रहें। ठीक है। बहुत अद्भुत है। प्रणाम जी।
1:16:31
प्रणाम प्रभु। हम हम हम
1:17:01
मतलब सब आपको पता नहीं है आत्मवान का सत्संग क्या होता है?
1:17:09
अरे मैं देह हूं से पूरे अस्तित्व को लखा सकता है। आत्मा आत्मा की बात छोड़ दो।
1:17:18
उसके पास वो पावर होता है कि मैं देह हूं। उससे लखा सकता है। वो प्रकट कर सकता है
1:17:26
परमात्मा को। आप बोलोगे ये क्या बात हुई आप आप तो बॉडी हो ही नहीं। बियों्ड बॉडी हो, आत्मा हो,
1:17:36
परमात्मा हो ना। हम जहां से बोलेंगे वहां से लखा देंगे।
1:17:45
हमारे पास सीमाएं नहीं है। हमारे पास दायरे नहीं है।
1:17:55
मैं देह हूं से भी मैं लगा सकता हूं। यह आत्मा का पावर होता है।
1:18:08
हां जी है कोई अरे अपनी आवाज सुना दिया करो यार
1:18:17
प्रभु जी प्रणाम प्रणाम जी प्रभु जी लव यू
1:18:25
लव यू जी लव यू ऑल प्रभु जी प्रभु जी मैं
1:18:33
मतलब आपको दो साल से सुन रहा हूं और एक पत्थर को मतलब ऐसा बना दिया मैं
1:18:40
दीवाना दीवाना मैं दीवाना प्रभु जी बहुत मस्त लाइफ चल रही बिल्कुल प्रभु जी मैं
1:18:49
हंसता रहता हूं अपने आप नाचता रहता हूं मतलब ऐसा विश्वास हो गया मैं को मेरे को
1:18:55
चाहे उल्टा भी कर लो मैं मैं ही रहूंगा कुछ भी कर लो चाहे
1:19:02
प्रभु जी इतना विश्वास हो गया कि कुछ भी कर लो मैं मैं ही रहूंगा हिल ही नहीं रहा
1:19:09
बिल्कुल प्रभु जी वाह बल्कि प्रभु जी मेरे को खुश देख के अड़ोस
1:19:16
पड़ोस वाले थोड़ा करते हैं क्या करें छुपना पड़ता है थोड़ा
1:19:24
छुप के हंसना नाचना पड़ता है प्रभु जी नहीं छुप बजाएं पर क्या करें प्रभु जी समाज एक्सेप्ट नहीं
1:19:33
करता ऐसा हो जाता है कि क्या करें उड़ लूं भाग लूं ऐसा दीवाना हो जाऊं बस यही चल रहा
1:19:40
है प्रभु जी बहुत-बहुत आओ प्रभु जी आपका नाम क्या है? आपसे शायद पहली बार बात हो रही क्या मेरी?
1:19:50
प्रभु जी एक बार शुरू में हुई थी तो डेढ़ साल हो गया प्रभु जी बात हुए। अच्छा क्या नाम है आपका?
1:19:58
संजीत कुमार प्रभु जी। संजीत कुमार कहां से?
1:20:04
मैं प्रभु जी हूं तो हरियाणा से लेकिन बस ऐसे ही उस प्रभु जी को सुनने लगा था और
1:20:12
खोज में गुरु जी मिल जाएंगे तो मैं परिवार को लेके हिमालय की तरफ ऋषिकेश तक पहुंचा। फिर मैं
1:20:20
अच्छा हां सफर फिर आप वहां मिले तो मैं वहां पहुंचा। तो तीन बार आया हूं प्रभु जी आपके पास
1:20:29
ओके ओके आ हा प्रभु जी एक अनुभव
1:20:35
एक अनुभव है शेयर कर रहा था प्रभु जी तो हां बताइए मेरे साथ ये होता है तीन चार बार हो चुका
1:20:43
है मतलब कुछ भी जो ये बाहर दिखता नाभि में ऐसा लगता है नाभि में है सूरज भी मतलब ऐसा
1:20:51
एकदम अनुभव होता है यह नहीं कि मैं कोशिश कर रहा हूं अपने अब एक अटैचमेंट ये होती है कि नाभि में चल रहा है ये सब। ऐसा होता
1:20:59
है प्रभु जी। हां ये पूरा अंतरिक्ष या ये सूर्य ये सब मेरी नाभि में है। ऐसा लगता है बोल रहे
1:21:07
हैं आप। हां हां प्रभु जी ऐसा ही होता है। ऐसा ही है। और ये मतलब ये नहीं करने से पहले तीन चार
1:21:17
बार हो चुका है। ये और गैप में होता है। कभी तीन महीने पहले कभी दो महीने बाद। ऐसे होता है अपने आप होता है ये
1:21:25
और शायद कभी आसमान को देखता हूं जैसे छत पे पड़ा हूं आसमान को देख रहा हूं फिर खुद
1:21:32
को देखता हूं कभी कबभार करता हूं ये तो जब करना चाहूं तब नहीं होता है अपने आप होता है ये जब होता है
1:21:41
तो सुनो आप एक्चुअल में जीव तब जाग गया समझो
1:21:49
हां प्रभु जी अपने परमात्मा में अपने स्वयं में जब
1:21:55
यह बाहर उसका भीतर हो जाए हां जी हां जी है ना
1:22:01
और ये आपको होने लग गया है ये बहुत ही सुंदर है अद्भुत है जी प्रभु जी
1:22:08
ये सब भीतर लगता है ये पूरा अंतरिक्ष ये अज्ञात ये अस्तित्व अपने अंदर है ऐसा लगता है
1:22:17
प्रभु जी मैं आपके पास रहता था चरणों के पास बैठा बैठा रहता था और एक बार तो आपने
1:22:24
बोला कि आज हर टाइम आप आगे रहते हो पीछे जाओ तो फिर मैं एक सत्संग थोड़ा फिर आपके
1:22:30
पास आ गया और आपके चरणों में लेटा था जो पानी गिर रहा था ऊपर से वो भी मेरी नाभि में जैसे मेरी नाभि में गिर रहा है वहां
1:22:38
पाइप चलता था छत से और यह महसूस होता था मैं यह तो मेरे यहां गिर रहा है नाभि में गिर रहा है प्रभु जी बिल्कुल ऐसा लग रहा
1:22:46
था जी बहुत सुंदर और प्रभु जी आपके आपकी एनर्जी के पास तो
1:22:55
इतना फास्ट हो जाता है कि बस आग ही लग जाती। इतना फास्ट हो जाता आपके पास तो
1:23:03
हम तो प्रभु जी घर वाले बहुत ही सुंदर हो रहा है। और
1:23:11
आत्मनस्तिक रहो और बहुत ही सुंदर जा रहे हो आप। जी बहुत सुंदर जी प्रभु जी है ना?
1:23:19
जी प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
1:23:35
प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम सौरभ जी
1:23:42
बस जी प्रणाम करना था बस प्रणाम है हम
1:23:56
हम प्रेम प्रणाम गुरुदेव
1:24:07
प्रेम प्रणाम बसोभाव है और करोड़ों कोटि कोटि वंदन है
1:24:16
आज प्रेम प्रणाम है। अहो भाव है।
1:24:23
अब मैं बहुत प्रसन्न हूं। मैं क्या बताऊं यार? मैं अभी ये सबको छुट्टी करूंगा और नाचूंगा आज हॉल में
1:24:33
सत्संग हॉल में। अंदर से तो नाचते ही रहते हैं।
1:24:42
हां वो तो है ही बट बाहर से भी मैं नाचूंगा आज।
1:24:48
वो महादेव नाचते हैं ना क्या बोलते हैं नटराज वाले पोश्चर में
1:24:57
मेरा दिन है आज वो महादेव वाला बहुत-बहुत बहुत-बहुत प्रेम करते हैं प्रभु
1:25:07
धन्यवाद प्रणाम प्रणाम जी
1:25:15
हम हम हम प्रेम प्रणाम प्रभु जी
1:25:27
प्रणाम जी प्रेम प्रणाम प्रभु जी बहुत-बहुत शुक्रिया आपकी संगत सुनते हैं
1:25:35
और जो आपके साथ ये सभी बातें होती है उनके भी जो बातें सुनके कैसे इतना अच्छे से ग्रहण कर रहे हैं इससे लगता है कि वह सब
1:25:44
बड़ा सुकून सा मिलता है और यह मैं हूं का बोध आपने जो दिया है जो इस ध्यान रखते हैं
1:25:50
तो बिल्कुल आनंद लगता है और बाकी आप जी के संगत में सब आपने रहमत करनी है। प्रेम
1:25:58
प्रणाम हम प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम तो एक चीज और ख्याल रखें हर कोई
1:26:08
हर कोई हां इनको साइलेंट करो है ना जो आपने कहा
1:26:15
ना कि मैं हूं का बोध मैं हूं का बोध नहीं रखना है बोध ही मैं
1:26:22
हूं है और बोध हो ही रहा है
1:26:29
सबको अखंड निरंतर बोध हो ही रहा है सहज में
1:26:38
बोध ही मैं हूं ओके
1:26:47
जी प्रणाम जिनका होते जाए साइड करते जाओगे राज है ना
1:26:56
प्रभु जी प्रेम प्रेम प्रणाम। हां प्रेम प्रणाम।
1:27:03
कुछ मुझे नहीं पता कुछ बोल पाऊंगी या नहीं। लेकिन अंदर से यही हो रहा था सत्संग चालू था तब से कि आज तो बस कुछ भी हो जाए।
1:27:10
बोल के रहूंगी आपसे मैं बात करके रहूंगी फिर कुछ। बहुत ऐसे हो रहा था कि गले में पता नहीं क्या
1:27:18
अटक रहा तो नहीं। मर जाऊंगी लेकिन आज तो बात करूंगी आपसे। फिर कुछ
1:27:27
पता नहीं आपने क्या दे दिया जीवन में बिना मांगे दे दिया प्रभु जी इसका लख शुक्राना
1:27:33
लखलख शुक्राना प्रभु जी आई लव यू प्रभु जी लखलख शुक्र
1:27:44
बहुत बहुत प्रेम है प्रभु जी पता नहीं क्या दे दिया आपने पता ही नहीं मेरे को लेकिन बहुत कुछ नहीं सब कुछ दे दिया 100
1:27:52
वाला दे दिया आपने इतना पता है प्रभु जी बिल्कुल क्या नाम है आपका?
1:28:05
मनीषा हां मनीषा जी हां जी प्रभु जी मैं सौरभ जी से भी बात
1:28:12
करती थी आपके नंबर लिए मैंने कि एक बार मेरे बात करवा दो तभी कॉन्फ्रेंस चालू नहीं हुई थी प्रभु जी पता नहीं क्या
1:28:21
करूंगी लेकिन अंतर नहीं होता था मैं आपसे एक बार बात कर लूंगी बस ये तमन्ना रहती थी
1:28:29
आज हां जी आज पूरी हो गई बस कोई जीवन में कोई तमन्ना ही नहीं है मेरी तो सब जल गई मैं
1:28:36
ही मैं हूं बस मैं ही मैं हूं बस कुछ भी नहीं है प्रभु जी
1:28:45
बहुत सुंदर अद्भुत
1:28:59
आई थी प्रभु जी एक बार मैं फिर आऊंगी आपके पास आप लोग
1:29:05
मतलब आप लोग को ऐसा लगता है कि मैंने कुछ दिया है। मैं सच बताऊं ऐसा कुछ नहीं है
1:29:12
भाई। एकदम मेरे को कुछ मेरे को कुछ कहने दो ना प्लीज कि
1:29:21
मेरे को सच में ऐसा नहीं लगता कि कुछ दिया या कुछ ऐसा और
1:29:30
पता नहीं यह कैसे हो रहा है। वह शब्द परफेक्ट निकल रहे हैं इस बॉडी के
1:29:38
थ्रू और उस बॉडी के अंदर स्वयं में परफेक्टली ग्रहण हो रहे हैं।
1:29:46
आत्मसात हो रहे हैं। पता नहीं ये कैसे हो रहा है। मेरे को भी नहीं पता। मैं सच बताऊं।
1:29:54
बस ऐसा हो रहा है। क्या क्यों, कैसे कौन देने वाला है? कौन
1:30:01
क्या है ऐसा ऐसा मेरे को सर्च में नहीं पता है
1:30:12
बस ऐसा हो रहा है ना ये ये बहुत आनंद है ये
1:30:20
बहुत रसपूर्ण है मैजिकल है
1:30:27
आश्चर्यों का आश्चर्य है
1:30:41
क्योंकि मैं सच बताऊं ना इसको दिया जा सकता है ना इसको लिया जा सकता है।
1:30:51
पता नहीं यह कैसे हो रहा है। क्या है और कैसे यह सब संभव हो गया है।
1:30:58
देखो प्रत्यक्ष मिरेकल है बिल्कुल
1:31:11
तो प्रणाम है मनीषा जी आत्मनस्तिक रहे स्वयं पर निष्ठा रखें प्रभु जी बहुत बहुत आज तो पता नहीं क्या
1:31:20
ही मिल गया प्रभु जी आज तो पता ही नहीं आप क्यों
1:31:39
प्रेम प्रेम प्रभु प्रेम प्रणाम
1:31:45
प्रभु आपको सुनते हैं आज भक्त को देख के फिर मस्त हो गया
1:31:53
अच्छा
1:32:08
यह जिनको भी आप सुन रहे हो ना यह सब मेरी आत्मा है। मैं ही हूं
1:32:17
यह कोई और थोड़ी ना है। नाम रूप है नया नया यह तो मेरी सुंदरता है।
1:32:26
हूं मैं ही। यह सब मेरी आत्मा है।
1:32:38
हां, अब मैं कई जगहों से बोलने लग गया हूं। अब मैं वाणी से नहीं कह रहा हूं। अब ना
1:32:48
मैं मन बुद्धि से बोल रहा हूं, ना वाणी से बोल रहा हूं। अब मैं कई शरीरों से आ
1:32:54
बोलने लग गया हूं। अरे मत पूछो यार आज।
1:33:07
पता नहीं ये पागल है अस्तित्व। ये इस बॉडी को कैसे चुना मेरे को समझ ही नहीं आता।
1:33:15
मैं कोई खास कोई पुण्य-वण्य थोड़ी ना किया हूं अपनी जिंदगी में। रफ टफ रहा हूं मैं।
1:33:22
सही बता रहा हूं ना पाप पाप किया ही होगा मैं पुण्य तो किया ही नहीं हूं समझो बहुत बदमाश रहा हूं मैं पता नहीं अस्तित्व इस
1:33:32
बॉडी को कैसे चुन के क्या-क्या बोल रहा है मेरे ही समझ नहीं आता
1:33:38
ये सब जब अस्तित्व तय कर लेता है ना तो वो
1:33:44
तय कर लेता है याद रखना वो पाप पुण्य ये वो वो देखता ही नहीं है यार यार उसकी नजर
1:33:52
में तुम्हारी गलतियां रहती ही नहीं है। वो इतना दयालु और कृपालु होता है।
1:34:05
दया सिंधु भगवाना दया का सागर दया सिंधु भगवाना।
1:34:15
कृपा सिंधु भगवान अद्भुत है यार यह सब क्या बताऊं मैं यार
1:34:34
प्रेम प्रणाम प्रभु हां प्रणाम जी
1:34:42
प्रभु आपके ऑलवेज एक नारायण दृष्टि रहती है हमारी कि
1:34:49
ये नारायण है ऑलवेज एक होता है कि ये कॉमन मैन नहीं है तो वो डायरेक्ट एक जैसे दृष्टि हमारी चेंज होती है तो वो डायरेक्ट
1:34:58
हिट करती है कि सामने नारायण है तो उसको सुनना है हमें और मेरे को ऐसे लगता है कि मास्टर आपको करेक्ट कर ही लेता है डांट के
1:35:07
कुछ वो अपनी जगह से 1 इंच भी हिलने नहीं देता जैसे हम कभी भी कहीं रोंग वे में जा रहे
1:35:14
हैं ना तो मास्टर आपको वो अपने से मतलब दूर नहीं जाना अपनी में ही ला देता है वो
1:35:21
मतलब कहीं और भटकने ही नहीं देता वो हम तो जैसे आप कहते हो ना कि मैंने कुछ नहीं
1:35:30
किया लेकिन एक जैसे गुरु के थ्रू ही वो हमें दर्शाता है ना कोई और तो आके हमें अपनी पहचान नहीं कराता गुरु का होना तो
1:35:39
लाजमी है ना अरे दर्शन कृष्णा जी ये जो आप कह रही हैं
1:35:45
वो आपके साइड से कह रही है ना। इससे पहले मैंने अपने साइड से कुछ कहा था। है ना?
1:35:54
मेरे को बस सच बता रहा हूं। मेरे को पता ही नहीं है कैसे हो रहा है यार। वो कैसे हो पा रहा है?
1:36:06
आपको पता है कि स्वयं में रस आने के लिए मेरे को 15 साल
1:36:14
लग गए कि जो स्वयं है एक्चुअल बीइंग है आपकी उसमें रस आने के लिए मेरे को 15 साल लग
1:36:23
गए। अब पुराने जितने जन्म लगे उसकी तो छोड़ दो। मेरे को मैं हूं का पॉइंट भी मिल गया था।
1:36:31
मेरे को पल ही नहीं पड़ रहा था। केवल बुद्धि से समझ आ रहा था। और आप लोगों को
1:36:39
इतनी इतनी ईजीली रस आने लग गया है। ये ये क्या बोलूं मैं इसको?
1:36:52
ना कोई साधना है, ना कोई ध्यान है। पता नहीं मैं क्या बोल रहा हूं। आप लोग
1:36:58
क्या सुन रहे हो और यह रस आने लग रहा है।
1:37:08
तो ये जो भी हो रहा है मतलब
1:37:16
यह रेयरली होता है इस अस्तित्व में। कभी-कभी
1:37:24
यह पॉसिबल नहीं है। ऑलमोस्ट इंपॉसिबल है। यह हालांकि सबका
1:37:32
स्वभाव है। फिर भी इंपॉसिबल है। अपने पड़ोसियों से मिलना तो आप लोगों को
1:37:42
पता चल जाएगा कि यह कैसे इंपॉसिबल है। हां।
1:37:52
प्रणाम दर्शना जी प्रेम प्रणाम गुरु जी
1:38:01
हां प्रेम प्रणाम जी मैंने दो दिन पहले आपसे बात की थी जब मैंने पहली बार सुनना शुरू किया था तब से
1:38:08
अब तक ये आज मेरा तीसरा सत्संग है जो मैं सुन रही हूं। बस आपको प्रणाम करना था। आपने कहा था कि एक बार अब बोला करो इसलिए
1:38:16
बोलने की वो कर रही हूं। दो बातें हैं एक तो सवाल सारे झड़ गए हैं। पता नहीं कुछ तब
1:38:25
भी इतना नहीं था सवाल नहीं था। एक दो ही थे वो झड़ गए हैं और अनुभव बताने के लिए मुझे लगता है शब्द है ही नहीं।
1:38:34
हम बस अभी आप जब कह रहे थे ये रस कैसे आ रहा है। बस एक एक चीज आई थी अंदर जो बस बोल
1:38:42
रही मुझे लगा यही आया कि यह रसेश्वर की महफिल है शायद इसलिए सब पर रस बरस रहा है आपके थ्रू
1:38:52
प्रेम क्योंकि आत्मा मैं हूं जो आप स्वयं हो आपके होने का
1:38:58
एहसास वो रस ही रस है। रस ही रस है।
1:39:05
वहां मैं हूं शब्द थोड़ी ना है। वह तो एंट्री के लिए है। मैं हूं शब्द। है वहां रस ही रस। प्रेम ही प्रेम और ज्ञान ही
1:39:15
ज्ञान। तो जो है वह प्रकट भी है और हो ही रहा है।
1:39:22
सबको हो रहा है। प्रणाम प्रणाम
1:39:34
प्रणाम गुरुदेव से बोल रहे
1:39:43
हम आपका फेस नहीं आ रहा। जी हां जी
1:39:52
सच में गुरुदेव मैंने आपसे मिलने से पहले इतनी साधना करी थी और वो भी जरूरी होगी। बिल्कुल लगता है। पर जब साहब से मिली और
1:40:02
आपने मुझे पहले दिन बोला था साधना छोड़ दें। आज तक नहीं करी पर वो जो 21 दिन आपके साथ थे उसके बाद तो
1:40:09
नसीब में नहीं थे ये जानना भी कि हर मोमेंट में जैसे मैं
1:40:16
जीती हूं मैं मैं हूं या देह भाव आया है ये पता चल जाना ही लगता है कि कितनी बड़ी
1:40:22
बात है कि जैसे ही कुछ गड़बड़ होती है तो मुझे समझ आ जाता है कि हां ये देह भाव ये
1:40:28
मैं तो नहीं हां तो कुछ ऐसा है ही नहीं बस ये मोमेंट टू मोमेंट लाइफ इतनी
1:40:37
इतनी ग्रेटट्यूड नहीं ऐसी भी होती है अब इतनी ग्रेटट्यूड और कभी-कभी तो पता भी नहीं होता कि मैं किस में हूं मैं हूं भी
1:40:46
या नहीं प्यार तो मुझे होगा ना मैं ही नहीं हूं बस वो बहुत
1:40:54
सुंदर है वो साथ रहता है
1:41:03
नहीं रियल में बहुत सुंदर है दीक्षा है ना
1:41:11
मैं ईजीली सबको बोल देता हूं कि यार ये साधना छोड़ दो उसका कारण है
1:41:19
बहुत बड़ा कारण है
1:41:29
क्या कारण है बताऊं जैसे कोई आप 1 घंटे 3 घंटे घंटे की साधना करते हो
1:41:37
और उसके बाद आप साधना छोड़ते हो ना वो आपका बेस्ट मूवमेंट रहता है।
1:41:47
जिस समय आप छोड़ते हो उस समय आप तुरंत अपनी आत्मा में आ जाते हो। और वह 1 घंटे
1:41:54
और जो वह है उस समय आप अपने मन में रहते हो।
1:42:00
कुछ एक्सरसाइज करते हो साधनाओं की और सारे ट्रैप्स
1:42:07
विचार शांत नहीं होते जो भी है साधनाओं की दुविधाएं इसलिए मैं बोलता हूं साधना छोड़ दो
1:42:15
परमानेंट ही छोड़ दो क्योंकि रोज एक घंटा करके छोड़ते ही
1:42:21
तो हमेशा के लिए छोड़ दो क्योंकि कोई भी साधना नित्य हो ही नहीं
1:42:29
सकती। हर साधना अनित्य है। और अनित्य से नित्य को पाया जा ही नहीं
1:42:38
सकता। और नित्य केवल आपकी बीइंग है।
1:42:46
का होना है। आप खुद हो। तुम नित्य हो और अनित्य की साधनाएं कर रहे
1:42:54
हो। अनित्य रूपी साधना है। नित्य कर रहा है।
1:43:02
क्या है यार यह? इसलिए मेरे को लगता है ये छोड़ो ये बकवास। ये साधना वाधना ध्यान ध्यान
1:43:12
तुम नित्य हो यार। निरंतर और नित्य है।
1:43:28
ओके दीक्षा प्रेम प्रणाम प्रभु जी
1:43:40
प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम सभी आत्माओं को विराजित आत्माओं को भी प्रेम प्रणाम
1:43:49
हां सुरेश जी प्रेम प्रणाम प्रभु बस ऐसा हो रहा है कल से ज्ञान ही ज्ञानी
1:43:57
द्वारा ज्ञानियों में बस महारास करवा रहा है। करवा रहा है। यस
1:44:07
बस यही हो रहा है। ऐसा लग रहा है।
1:44:17
यही तो हो रहा है। यह पूरा महारास है। बस हां।
1:44:25
कितना परफेक्टली आप ग्रहण करते हो। अद्भुत है सुरेश जी।
1:44:35
दो-तीन बार आपसे बात हुई है अभी। दूसरी बारी कर रहा हूं प्रभु जी।
1:44:40
हां। बहुत परफेक्शन है। हमारे दो साथी बिस्किट में एम और
1:44:48
वो भी हम उनके साथ ही पहले किया करते थे ध्यान रात वाला पागलपन में भी किया करता
1:44:55
था। डेढ़ साल में भी जगा हूं ऐसे। हम
1:45:07
ध्यान साधनाएं जो भी बता रहा है यानी तुरंत समझ जाना वह आचार्य श्रेणी में
1:45:14
है। सद्गुरु या गुरु की श्रेणी में नहीं है। चाहे जो भी बताएं
1:45:21
एक आपको मीटर दे रहा हूं। है ना?
1:45:28
अपनी जिंदगी में हर कोई याद रखना जो भी ध्यान साधना बता रहा है। वह आचार्य श्रेणी
1:45:34
का है। आत्मवान
1:45:41
सद्गुरु कभी भी ध्यान नहीं बताएगा। साधना नहीं बताएगा। बताएगा ही नहीं।
1:45:52
मैं मजबूरी में एक वो हरि ध्यान करवाया हूं। वो मजबूरी में कराया हूं मालूम। चलो थोड़ा बैठ सकूं। कई लोग बहुत
1:46:01
फ्रस्ट्रेशन में रहते हैं। चलो कम से कम रिलैक्स हो जाओ। मेरे पास ऐसे ही नहीं बैठ सकते। तो एक
1:46:08
ध्यान कि थोड़ा मौन रह लो कभी हरि ध्यान कर लो
1:46:14
बहुत मजबूरी में बोला हूं मैं तो ये मीटर है
1:46:24
सद्गुरु डायरेक्ट होता है और आपके भीतर के सद्गुरु को जगा देता है बस बिल्कुल बिल्कुल
1:46:35
और कभी कोई प्रेम बताइए कभी जैसे कोई साधना ऐसे करी उसको भी राम
1:46:45
समझ के कर ली हम नहीं भाई राम समझ के पेड़ों में पानी डाल दो
1:46:54
अच्छा किसी को मुस्कुरा के देख लो दो चार वृक्ष लगा लो वो चलेगा साधना मत
1:47:02
करो राम समझ के कुछ भी प्रेम प्रणाम है ना वो भ्रम हो जाएगा हां प्रेम प्रणाम
1:47:08
हां वो धोखा है मीठा धोखा है वो आपका जीव जो है ना बचना चाहता
1:47:19
होती है क्या राम समझ के साधना कर लेता हूं वो फंसा देगा उसमें हां
1:47:27
है ना राम समझ के फसा देगा राम को हां आपको बिल्कुल बिल्कुल
1:47:36
ठीक है प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम श्री प्रणाम प्रभु जी
1:47:43
प्रगना बात कर रही हूं हां प्रगना जी प्रेम प्रणाम बस
1:47:50
प्रेम प्रणाम रोम रोम से आपको समर्पित है आपके शरण में रखना
1:47:58
यही प्रार्थना है आपकी शरण भिखारी है बस
1:48:08
बस आनंद में रह है ना स्वयं में रहे जहां
1:48:14
रहते ही हैं वहीं रहें स्वयं में
1:48:21
खुद पे निष्ठा श्रद्धा अटूट श्रद्धा स्वयं में
1:48:30
यह स्वयं ही नारायण है। साक्षात शिव है। अस्तित्व है।
1:48:36
और है। ऐसा ही है।
1:48:45
ओके प्रणाम।
1:48:52
प्रणाम प्रणाम जी
1:49:04
प्रभु प्रेम प्रणाम हां प्रणाम
1:49:11
बहुत-बहुत हो और बहुत-बहुत प्यार बहुत प्यार बहुत प्यार
1:49:20
प्रणाम जी कैसे हो इस बार आपकी बात अच्छे से बनी है।
1:49:32
इस बार जो आप सत्संग में आए थे आपकी मम्मी का क्या नाम है यार?
1:49:42
अपर्णा जी हम आपसे बात करते हैं। हां हां जी जी प्रभु हम
1:49:53
जी प्रभु बोलिए। हां बस वही मैं कह रहा था कि इस बार जो सत्संग में आप आए हां जी
1:50:02
उसमें बहुत अच्छा रिदमम बैठा आपका जी जी प्रभु
1:50:11
बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु बहुत-बहुत अहो भाव
1:50:18
बहुत प्यार प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
1:50:30
हम हम
1:50:44
प्रणाम अमित जी प्रणाम जी ओके धन्यवाद आपको हमारे जीवन में आए उसके
1:50:52
लिए थैंक यू बस बोलना था मुझे हां जी थैंक यू इतने इजीली मुझे मिल गए मुझे इतना
1:51:01
बाकी सब कुछ तो इतनी तपस्या करी कि मैंने तो इतना कुछ किया नहीं बट इतने इजीली आप मुझे मिल गए इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
1:51:30
हम हम हम
1:52:08
अरे आप कैसे खामोश बैठे हो यार
1:52:15
शैलेश जी जी प्रभु प्रणाम प्रणाम प्रणाम प्रभु जी
1:52:22
एलेस जी मैं आपको एक रहस्य बताऊं जी प्रभु जी
1:52:28
प्रेमी को शांति नहीं चाहिए होती है
1:52:37
उसको रस आनंद सेलिब्रेशन विरह वो उसमें जीता है
1:52:44
सही बात है प्रभु जी सही अब्सोलुटली
1:52:53
उसको मौन में थोड़ा ज्यादा इंटरेस्ट नहीं होता है।
1:53:00
मौन वो ज्ञानियों के लिए छोड़ देता है। मौन
1:53:07
कैवल्या
1:53:16
प्रेमी होता है टकटकी लगी रहती है उसकी
1:53:23
हां आप कुछ कह रहे थे सॉरी नो नो नो कोई बात नहीं अभी जब से आज
1:53:31
सत्संग सुन रहा हूं सबका सब आप जो बोल रहे हैं हम भी सुन रहे आई मीन सब आनंद ले रहे
1:53:40
भाव है सब कुछ है ये आप पूछ रहे थे ये कैसे हो रहा है कैसे हो रहा तो एक एक बात
1:53:47
बोलना चाहता हूं प्रभु जी आप मंजूरी दो तो हां बताइए थोड़ा एक सेकंड साउंड थोड़ा
1:53:55
बढ़ाओ तो विराज थोड़ा सा ये लीजिए
1:54:06
जैसे प्रभु जी मां मां अपने बेटों को जन्म देके कभी भी
1:54:12
नहीं बोलेगी कि ये मेरा बेटा है कभी बाहर दृष्टि के लिए बोलती रहती है कि बेटा बच्ची है लेकिन वो पूरा अपना भाव और मां
1:54:22
देखती रहती है बच्चे कैसे खेल रहे हैं ऐसे आप हम सबका अपना आपको स्वरूप को देख रहे हो आप अपना ही स्वरूप को सबको देख रहे हो
1:54:31
और कितना आनंद ले रहे हो और सब सब अपनी अपनी तरफ से कितना अपने मां के साथ कितना
1:54:38
आनंद ले रहे हैं सब लोग और दूसरा दूसरा के मां
1:54:46
अरे यहां तो मां मां को पैदा कर रही है। बच्चे को नहीं कर रही है। यस और
1:54:53
ये दूसरा के मां तो मां बच्चों को जन्म दे
1:54:59
रही है। आप जो जन्म दे रहे हो वाणी से और सुन के जो मैं को मैं झांकता हूं मैं।
1:55:09
आपकी वाणी और सुनना दोनों मिलके जो मैं का पैदा होना और आनंद होना होना प्रभु जी
1:55:18
प्रभु जी कैसे बताएं बोल नहीं सकते बोल नहीं सकते
1:55:34
बस ये इतनी प्यास जो आप लोगों में जगी ना
1:55:44
करके यह संभव हो पा रहा है। इतनी प्यास जो आप सब में जगी हुई है।
1:55:57
और एक शब्द भी बोलना मैं समझो मेरे से हिल जाना।
1:56:03
मैं से दूर हो जाना हो जाता है। हम
1:56:27
प्रणाम प्रभु जी प्रणाम प्रणाम
1:56:35
प्रेम प्रणाम प्रभु अहो प्रणाम जब मैं मैं हुई और जब मेरे भीतर की मां
1:56:44
जगी तो बहुत पीड़ा और करुणा होती है ये युद्ध
1:56:50
को और आसपास सब संसार को देख के कि कब यह मैं होंगे कब इनकी मां जगेगी
1:56:59
नहीं आपकी स्टॉप करो इनको आप थोड़ा सुनिए मेरे को
1:57:06
यह असल में ना आप जो कह रही हैं कि मेरी मां मैं जगी ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
1:57:14
अभी आपको अभी आपको यह दुनिया भिन्न लग रही है। जिसको भी यह दुनिया अपने से अलग लगती
1:57:21
है ना वो मैं देश में है ही नहीं। अभी आप सुनिए। है ना?
1:57:36
बाहर के युद्ध को जीतना जैसे हम बोलते हैं ना हमने इस
1:57:43
देश को जीत लिया ये क्या सामने ले आया यार तू
1:57:52
जैसे हम बोलते हैं ना हमने इस देश को जीत लिया यह ईगो होता है
1:58:00
मैं आपको बता दूं आप देशों को भी जीत सकते हो।
1:58:08
बहुत पावर है आपके पास। बहुत कुछ है। बट यार अपने अंदर की नफरत को कब जीतोगे?
1:58:21
किसी भी देश के प्रति जो आपकी नफरत है या किसी भी मनुष्य के प्रति जो आपकी नफरत है उसको जीतो ना। यह देशवेश क्या जीत रहे हो?
1:58:34
युद्ध कर रहे हो। असली जगह तो आप हारे हुए हो। आप भिखारी
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हो। भिखारी भी ठीक ही है। खुद को धोखा तो नहीं दे रहा है।
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तो यह देश और यह युद्ध का मामला अलग। अभी प्रेम की धारा बह रही है। उसको बहने दो। ठीक है?
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तो आप अभी थोड़ा सुनिए। उसके बाद समाधान मिल जाएगा आपको।
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हम प्रणाम प्रभु। प्रणाम जी।
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बहुत सारा प्यार प्रभु प्रणाम है प्रेम है आई लव यू प्रभु
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अच्छा और अब कैसा लगता है खुद में दुनिया में गए
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जो भी कामकाज कर रहे हो पहले की स्थिति और अब की स्थिति प्रभु बहुत अंतर है एक महीना हो गया और अब
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जो जैसा फील होता है वह मैंने 28 साल पता नहीं कैसे निकाले हैं। मुझे ऐसे लगता है
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ये एक महीना ना बहुत ही अलग है। जैसे अलग ही हो गई हूं मैं। और अच्छा बुरा लगता है। सब लगता है लेकिन
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कोई चीज भी गहरी नहीं छूटी है। पता नहीं क्या हो गया। एक मस्ती सी खुशी सी रहती है। अलग ही हो गई हूं मैं। बहुत अलग।
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और आपकी आपकी याद हर समय रहती है हर समय
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और प्रभु यह पहली बार हुआ ऐसा कि जितनी भी Google मीट हुई है टेलीग्राम पे सत्संग हुए प्रभु एक भी नहीं छूटा है। सिर्फ एक
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दिन ऐसा हुआ था कुछ वजह हो गई थी कि मैं नहीं अटेंड कर पाई। लेकिन उस टाइम ऐसे था कि सत्संग चल रहा है। ऐसे ना दिल बैठ गया
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था। ऐसे लग रहा था कि बस ऐसी व्यवस्था करनी है अब जीवन की कि ज्यादा से ज्यादा
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समय सत्संग को और आपके पास बैठने को मिल जाए। बस ये लालच है
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और वो सब बदल गया प्रभु। आई लव यू सो मच।
2:01:10
और आना है आपके पास। जल्दी आना है। आपके पास बैठना है। जल्दी बैठना है। और कुछ
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गाने मैंने याद किए आपको सुनाने हैं। बहुत दिनों से डर रही थी कि आपको क्या
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बोलूं ना कैसे बोलूं फिर आपने अभी प्रेम की बात की तो प्रेम में बोला जाता है तो बस बोल रही हूं
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अभी सॉरी डिस्टरबेंस हो रही है मेरे को मेरे रूम पास रूम की चाबी नहीं है ना तो मुझे बाहर बैठना पड़ रहा है तो कोई चारा
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नहीं है अभी तो आई लव यू प्रभु
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बहुत अद्भुत है। अपना ख्याल रखें। जून से यहां सारे सत्संग शुरू हो जाएंगे। इधर फेस
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टू फेस तो सब आ ही सकते हैं। ओके जी प्रभु बस ऐसे ही प्रसन्न रहें। मस्त रहें।
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प्रसन्न आत्मा ओके जी प्रभु जी प्रभु आज लव यू प्रभु प्रेम प्रणाम।
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प्रेम प्रणाम यार कुछ खिलाते पिलाते ही नहीं हो मेरे को
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यार कैसे चलेगा हैं थैंक यू
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हां जी है कोई हेलो
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हां जी प्रेम प्रणाम जी हम प्रेम प्रणाम
2:02:50
बहुत शुक्र है महाराज जो आप सत्संग करते हो वो जी रहे हैं हम
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हां जी मतलब जो गुरुणी है ना वो साक्षात हर टाइम साथ है हमारे हर टाइम
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बहुत सुंदर है जो आज आपका ज्ञान वाला था ज्ञान ही ज्ञान
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ज्ञान ही ज्ञान मैं शॉप पे बैठा था बस वही चल रहा है वही चल रहा है
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उसको बार-बार सुनना एकांत में भी जी तो उसमें और बीचबीच में कई छिपे हुए राज
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हैं वो प्रकट हो जाएंगे। बार-बार सुनने से ही होते हैं। वो इतना अद्भुत सत्संग है। मैंने उसको इसलिए आज
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मॉर्निंग में ही डलवा दिया। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया बहुत दो तीन बारी तो सुन चुका हूं। तब भी मुझे लगता है अभी कमी है।
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कमी है। और चाहिए और चाहिए। ऐसा लगता है।
2:04:12
लेकिन ऐसे लगता है आपके साथ हैं हमेशा ही
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मतलब फील ऐसी है जो आप हो तो हम है ऐसी फील है फील है यस
2:04:27
ऐसा ही है मैं से भिन्न कुछ भी नहीं
2:04:40
मतलब जहां जाते हैं ऐसे लगता है बस मैं ही हूं वहां हम
2:04:46
कोई हमारे यहां किसी की डेथ हो गई थी पीजीआई में गए थे चंडीगढ़ में मुझे कुछ नजर ही नहीं आ रहा था मैं ही नजर
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आ रहा था हर जगह पे हम मतलब हर जगह इतना आनंद
2:05:04
कोई पेशेंट पेशेंट नहीं नजर आ रहा था हम
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मतलब कहने को शोभा नहीं है इस चीज की
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बस गुरु कृपा है कृपा है
2:05:26
नसीब वाला होता है जिसको देखने वाला ही दिखता है
2:05:32
वो नसीब वाला होता है जिसको देखने वाला ही दिखता है।
2:05:45
बहुत अद्भुत है। प्रणाम है आपको बहुत शुक्र बहुत शुक्र मतलब शब्द भी नहीं
2:05:54
रह जाता वहां तक। हां शब्द नहीं बता सकते। हालांकि उसको
2:06:02
बहुत मुश्किल है शब्द। उसको बयां कर ही नहीं सकते।
2:06:12
मैंने 2014 में ओशो जी को सुनना शुरू किया था। हम जब पहली बारी सुना ना ऐसे लगा कुछ मिल गया
2:06:20
है। मुझे वो जानते नहीं थे। कुछ नहीं पता था। एक आवाज ही सुनी थी उनकी। उसके बाद मैंने उनको दिन रात सुनना शुरू
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कर दिया। लेकिन ऐसे लगता था जब सुनता हूं ठीक है लेकिन बाहर जाता हूं तो ठीक नहीं
2:06:34
लगता था फिर उसके बाद सुनता सुनता सात आठ साल सुना उसको फिर आपके दर्शन हो गए हैं
2:06:43
बस मौज ही मौज मौज ही मौज हर पल मौज पल मौज
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प्रणाम मतलब सुबह से शुरू 5:00 बजे से शुरू कर
2:07:04
देता हूं मैं जैसे उठता हूं। सोते टाइम तक भी आपको सुनता हूं। अभी दुकान पे बैठा हूं। लड़का है नहीं है ना दुकान पे।
2:07:12
आपका लाइव भी चल रहा है। वो भी सुन रहा हूं। कस्टमर आए मुझे कोई उससे लेना देना नहीं है। मुझे बस आपके एक वचन चाहिए। अंदर
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जा रहे हैं बस। हम हमारे और तीन चार यहां प्रेमी भी हैं। वह
2:07:26
भी आपको बहुत ज्यादा सुनते हैं। बहुत
2:07:39
हूं मैं। मुझे बस लगता है यही चाहिए मुझे और कुछ नहीं चाहिए। हां वो सही भी है और इधरउधर की बातें होनी
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भी नहीं चाहिए। मतलब सारी चीज इसके आगे फीकी है। सब कुछ फीका है इसके आगे। हम
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मेरी 50 की एज हो चुकी है प्लस लेकिन मुझे लगता है अब कुछ मिला है जो मिला है
2:08:06
हां जो मिला है हां जी जो आप कहते हैं ना अपने आप को ही मिला है
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मैं ही हूं वो मुझे मिला है हम उसकी फील उसका मतलब अभाव आपके चरणों में
2:08:22
है बहुत हम बहुत बहुत शुक्र है। बहुत शुक्र है।
2:08:31
मतलब हर चीज के लिए सत्कार है। हर चीज के लिए जहां देखता हूं बस मैं ही हूं।
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मैं ही हूं। मुझे लगता है सब कुछ सॉल्व हो गया। सब कुछ
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टोटल सब कुछ टोटल। अच्छा आज ऑलमोस्ट जितने भी मित्रों से सबसे बात
2:08:59
हुई और
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सब आत्मा से ही कह रहे हैं और जिसको अगर बाय द वे मैं ऐसा कह रहा हूं ऐसा है
2:09:16
तो नहीं कई जगह तो नहीं है। बाय द वे किसी का कुछ अगर बच गया, छूट गया, कुछ है ना तो
2:09:25
अब आप लोगों में ही लोगों में ही वो सामर्थ्य
2:09:32
आ गई है कि वो छोटा-मोटा जो मिसिंग अगर होगा भी बाय द वे है तो वो आप निपटा लोगे।
2:09:43
आप लोग उस जगह आ चुके हो। बहुत सारे लोग आज तो आज तो मैं बहुत
2:09:50
प्रसन्न हूं और हालांकि मिसिंग बचा नहीं है कुछ
2:09:58
काहे का मिसिंग होगा? मैं हूं में मिसिंग कुछ होता ही नहीं है। मैं हूं ही तो ऐसा है जिसमें किसी भी तरह
2:10:07
की कोई कमी होती ही नहीं है और बाकी सब जगह कमी रहती है।
2:10:14
मैं हूं सदा सर्वदा पूर्ण ही रहता है। वही तो आपका स्वभाव है।
2:10:29
तो हम क्या करते हैं?
2:10:31
पूर्णता को पाना है ना ऐसा नहीं। पूर्ण यानी मैं। मैं मैं यानी पूर्ण।
2:10:38
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। पूर्णता आपका स्वभाव है। आप का होना ही तो
2:10:47
पूर्णता है। आपका होना ही पूर्णता का होना है।
2:10:57
कंप्लीट फुलफिल
2:11:06
और बहुत ही सुंदर आपकी लिसनिंग है। राइट लिसनिंग है और प्रत्यक्ष है आपके लिए अद्भुत
2:11:17
प्रणाम जी हम हम हम
2:11:34
आज तो पागल कर दिया आप लोग मेरे को पागल कर दिए हो आज आप लोग को नहीं पता है आप सब मिलके
2:11:43
हम तो कई बार गुरु भी धन्यभागी महसूस करता है
2:11:55
खुद को जब देखता है ना अपने
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सारे डिसाइपल्स को कि अब वो मास्टर होने लग गए हैं। ओ खुद को ओ आप नहीं सोच सकते अभी मेरी प्रसन्नता का
2:12:11
यार बहुत प्रसन्न हूं मैं
2:12:22
प्रणाम भगवन हां प्रणाम
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भगवान विजय खरी बोल रहा हूं जयपुर से हां विजय जी
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प्रणाम भगवान अनंत प्रणाम प्रणाम प्रणाम भगवान आप आप जादूगर हो और हम पत्थर दिलों
2:12:45
को आपने मोम बना दिया
2:12:52
और कुछ ना बता के भी जो हमें मिल रहा है
2:13:01
भगवान ऐसा लगता है सब छोड़ के आपके पास आ जाए बस आपके शरण में आ जाए
2:13:11
और अभी हम जो आप बोल रहे थे ना अभी वैसा नहीं है। अभी तो हमें आपकी शरण की जरूरत है। बहुत जरूरत है।
2:13:20
बहुत जरूरत है भगवान। नहीं मैं साथ हूं। हमेशा साथ हूं।
2:13:30
जी भगवान। हां मैं कभी भी
2:13:36
चाहे कुछ भी हो जाए आप भी मेरे को भूल जाओ कहीं और भी चले जाओ तब भी मैं साथ रहता
2:13:43
हूं यह मेरा प्रेम है मेरे को कोई दिक्कत नहीं होती कोई कहीं भी चले जाए कुछ भी करे
2:13:50
किसी को भी सुने जो भी है मैं अपना प्रेम बरोबर रखता हूं सबसे
2:13:59
जी भगवान वो मेरा प्यार है ये बस है ना जी भगवान अच्छा
2:14:05
आप कभी दूर नहीं होते भगवान आप कभी दूर नहीं होते हमसे
2:14:11
कभी भी गलत जाओगे तो अंदर से बोलने लगूंगा जी अंतर्यामी होके
2:14:19
वो मेरा धर्म है भटकने नहीं दूंगा चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए मैं तो बोलता
2:14:26
हूं आप भटक के दिखा दो ना जी अब मेरे से संग साथ हो गया है ना अब भटक
2:14:33
के दिखा दो और हो सकता है दो चार साल इधरउधर बाय चांस बहुत ही मूड हो तो भटकने
2:14:40
चले जाओगे बट वो भी चांस अब मेरे को नहीं लगते हां
2:14:48
मैं तो बोलता हूं भटक के दिखा दो आप लोग को पता ही नहीं है ना आपने क्या सुन लिया है वो आप लोगों के अंदर इतने
2:14:58
भीतर चले गया है कि वह अब आप भी नहीं निकाल सकते।
2:15:06
चेतन मन, अचेतन मन और सामूहिक चेतन मन जो होता है उसके भी अंदर चले गया है। उससे भी
2:15:14
अंदर अब आप कैसे निकालोगे?
2:15:19
कुछ दिन कुछ साल थोड़ा-मोड़ा नाटक कर सकते हो जीव होने का। ऐसा वैसा बट वो अंदर से
2:15:26
जगा ही देगा। वह इतना अंदर चले गया है आपके
2:15:38
ओके विजय जी प्रणाम प्रणाम भगवन अनंत प्रणाम
2:15:46
अनंत प्रणाम जी आपको
2:15:53
हम सही बता रहा हूं ज्योत वो इतना इतना अंदर चले गया है कि चलो कोई फिर दुनिया
2:16:00
में लौट गया बाहरी चीजों में इधर-उधर भटक गया तो भी अब उसको कुछ नहीं हो सकता।
2:16:08
वो अंदर से अंतर्यामी उसको खींच के निकाल ही देगा। ए बंद कर ये नाटक बोलेगा।
2:16:24
हां जी।
2:16:39
प्रणाम गुरुदेव प्रणाम जी उपेंद्र जी जी
2:16:47
प्रणाम जी गुरुदेव कल के सत्संग के लिए तो अनंत अनंत
2:16:53
अहो है और उसको उसको सुन के बस मस्त हो जा रहे हैं। और अभी सुनते जा रहे हैं उसको।
2:17:00
अभी बहुत गहरा है वो। हां बहुत है। बहुत ज्यादा डोज़ है वो।
2:17:09
जी गुरुदेव। उसके लिए कोटि-कोटि अनमोह है।
2:17:18
चरण स्पर्श प्रणाम गुरुदेव प्रणाम।
2:17:33
प्रणाम प्रभु प्रणाम जी
2:17:40
आज ये देह का बर्थडे है और मैं एक बात बताऊं कि मेरा जीना मेरा जीवन है ना जो
2:17:48
मुझे मिला वो एकदम सार्थक सार्थक हो गया है और उसके लिए मैं पूरा मेरा जो जो भी
2:17:57
श्रेय है मैं आपको ही देना चाहूंगी क्योंकि अगर यह मैं की निष्ठा बहुत कुछ सुना था पहले भी बहुत सालों तक पर यह जो
2:18:06
मैं की निष्ठा इतनी बनी है ना प्रभु अभी वो अभी कोई भी नहीं निकाल सकता है और मैं
2:18:13
इतनी निश्चिंत और इतनी खुश हूं और जैसे आप बोलते हैं ना कि कोई किसी को कहीं चले भी जाए तो वो होने वाला नहीं है क्योंकि आप
2:18:22
अंदर से बोलते हो अंदर ऐसे बैठ गए हो और कोई टेंशन नहीं है कोई लाइफ में मतलब
2:18:30
कुछ भी अभी ऐसा है नहीं कि ये मुझे कुछ अनुभव में ऐसे नहीं आता है जैसे सब लोगों को आता है नेवल में दिखता है वो दिखता है
2:18:38
बाहर अंदर सब दिखता है पर मुझे निश्चिंता पूरी है कि मैं ही हूं और वो निश्चिंतता
2:18:44
के साथ अभी अभी ये बॉडी जाए ना तो भी कोई परवाह नहीं मैं इतनी बेफिक्री में जी रही
2:18:51
हूं प्रभु प्रभु ओनली बिकॉज ऑफ यू प्रभु ओनली बिकॉज ऑफ यू और जो कल का सत्संग वो तो मतलब क्या
2:19:00
सत्संग निकला मतलब पूरा आपने तो इतना इजी बना दिया उसको
2:19:07
मुझे एक्सप्रेस करना नहीं मिलता है पर वो पूरे अंदर धस गया है प्रभु
2:19:15
नहीं बस ऐसे ही प्रसन्न रहो आनंद में रहो है ना
2:19:23
अभी आपसे दूर गई नहीं। ऐसे लग रहा है मुझे। मैं आपके पास वहां बैठी हूं। आपके चरणों के पास बहुत मतलब ये फीलिंग भी कभी
2:19:33
जाती नहीं है। प्रभु जो भी मिला है ना आपसे वो मतलब
2:19:41
रिस्की ये शब्द नहीं है। फॉर अमेजिंग प्रभु अमेजिंग। वो जो निष्ठा आपने करवाई अद्भुत
2:19:51
बहुत खूबसूरत है और
2:19:58
बस ऐसे ही खुश रहो प्रसन्न रहो है ना
2:20:04
खुश रहना प्रसन्न रहना इससे बड़ी दौलत कोई नहीं है इस दुनिया में
2:20:12
बस प्रसन्न रहो है ना यस प्रभु आज के दिन आपका चरण स्पर्श
2:20:21
बधाई हो बहुत-बहुत जन्मदिन की है ना थैंक यू प्रभु बहुत-बहुत बधाई
2:20:37
हम आज देखो भाई हमारा जाने का जी नहीं कर रहा है इसलिए बैठे हैं। है ना?
2:20:59
तो थोड़ी सी चाय पिला दो यार थोड़ी गरम है ना बट थोड़ी सी हां सौफ डाल
2:21:07
देना तो आप लोग कब आ रहे हो ये सब Google मीट वालों हमको चाय पिलाने के लिए हां जल्दी
2:21:16
पहुंचो हमारे पास हम गुरु दक्षिणा में केवल चाय लेते हैं और
2:21:22
कुछ नहीं बना के पिलानी पड़ेगी। ओके
2:21:30
हां जी प्रभु जी हां जी चाय और आपको परमात्मा की तरह जीना है हमेशा क्योंकि आप वही हो यह हमारी गुरु
2:21:38
दक्षिणा उससे कम ना सोचना है ना जीना है ओके
2:21:54
प्रणाम प्रभु श्री प्रेम प्रणाम प्रभु श्री कल का सत्संग तो था ही
2:22:03
आउटस्टैंडिंग बट फॉर मी आपका एक एक सत्संग जो YouTube में है एक एक या जो Google मीट
2:22:13
में है जहां भी होता है प्रभु उसमें जो भी एक एक शब्द आपके मुंह से निकलता है वो
2:22:19
अमृत तुल्य है। मेरे लिए सारे जितने भी सत्संग है सारे ही मैं बता नहीं
2:22:28
सकती कितने प्रेशियस है। और प्रभु श्री आप हमेशा बोलते हैं कि आत्मनिष्ठ रहिए।
2:22:35
आत्मनिष्ठा की भावना रखिए। मुझे नहीं मालूम कि वो किसको आत्मनिष्ठा बोलते हैं
2:22:42
या किसको मैंने एक बारी पूछा भी था आपसे बट मुझे नहीं मालूम कि वो मेरे अंदर कैसे
2:22:49
आएगी या आ गई है मुझे नहीं मालूम पर मैं इतनी प्रसन्न रहती हूं प्रभु मुझे अपने आप
2:22:56
में अपने होने में इतना विश्वास है इतना ट्रस्ट है प्रभु श्री कि मुझे ना अब हर
2:23:03
कोई ना अपने जैसा भासता है हर कोई जैसे मैं अगर अगर शाम को मंदिर में दिया जलाती
2:23:10
हूं या गुरुद्वारे जाती हूं या पेड़ पौधों को पानी देती हूं। मुझे लगता है वो भी खुश वो भी मेरे जैसे ही है। मुझे नहीं मालूम
2:23:19
ये भावना कैसे वो सब हंस के तब मुझे प्रभु अपने सुनो आपका क्या नाम है?
2:23:27
मेरा नाम गुरजीत है। श्री गुरुजीत जी अ यही तो आत्मनिष्ठा है जो खुद पे विश्वास
2:23:37
और ट्रस्ट जो आप कह रही हैं ना जी यही तो आत्मा में निष्ठा हो रही है आपको और
2:23:46
जो सदा आप प्रसन्न रहती हैं यही तो आत्मा में निष्ठा हो रही है ना अलग
2:23:52
थोड़ी ना है और सेकंड थिंग जो ब्यूटीफुली आप गुरुद्वारे में या जहां भी जाकर दिया
2:24:00
जलाते हैं, झुकते हैं, वह बहुत सुंदर है मालूम। मतलब
2:24:08
कभी भी ना ये गुरु नानक जी, राम जी, कृष्ण जी, शिव
2:24:15
जी ये इन्होंने जो दिया है ना उसी की सीरीज
2:24:23
का एक हिस्सा हूं मैं। झूठे तो इनके पास जाके नारायण भाव से भी खुद
2:24:31
में भी इनके प्रति भी जैसे भी हमेशा झुकना चाहिए प्रणाम करना चाहिए वहां पे अपने
2:24:39
ज्ञान को नहीं लाना चाहिए अपने प्रेम को ला के झुक जाना चाहिए है ना ज्ञान को हमको
2:24:48
हमारे जीवन में कहां लाना है वह पता होना चाहिए वहां हम अधिकतर लोग ज्ञानी बनते हैं। सब
2:24:56
वननेस है। क्या झुके मतलब वो नास्तिकता है। ऐसा नहीं होता ज्ञान।
2:25:02
जो ज्ञान प्रेम पूर्ण नहीं है। जो ज्ञान झुक ही नहीं सकता वो ज्ञान है ही नहीं।
2:25:09
सीधी बात मतलब क्या दिया है? आप लोगों को पता नहीं
2:25:17
है गुरु नानक देव ने हमारे पास्ट के जितने संत हुए हैं सारे
2:25:24
ऋषियों ने रामा ने कृष्णा ने शिवा ने
2:25:31
यार और हम वहां जाके दिया भी ना जलाए तो हमसे बड़ा बेवकूफ कौन है वहां भी हम जाके ज्ञान झाड़े कि क्या मंदिर क्या
2:25:40
गुरुद्वारा ऐसा थोड़ी ना होता है वो तो प्रेम है यार उन्होंने अपना पूरा प्रेम लुटाया है।
2:25:49
मैं तो उस सीरीज का एक हिस्सा हूं। छोटा सा हिस्सा
2:26:01
या आपके जो भी पास्ट के गुरु हुए हैं मतलब
2:26:07
बहुत वहां फूल चढ़ाओ। वहां वहां दिए जलाओ। वहां प्रेम के आंसू बहने चाहिए।
2:26:16
वहां आपका सिर बगैर सोचे समझे झुक जाना चाहिए। वही धर्म है।
2:26:24
हां, पुराने शास्त्र का हमेशा सम्मान होना चाहिए। भगवत मूर्ति का भी हमेशा सम्मान
2:26:31
होना चाहिए। सारे संतों का हमेशा सम्मान होना चाहिए। सबके सामने आपको झुकना है, प्रणाम करना है, धन्यवाद,
2:26:44
अहोभाव प्रकट करना है। वहां पे ज्ञान बाजी को नहीं लाना है। यही
2:26:51
धर्म है। हनुमान जी को देखो कैसे कैसे रहते हैं यार। हम हनुमान जी का पोश्चर देखो। तो राम जी के पास वो कैसे बैठते हैं?
2:27:04
वैसे बैठना चाहिए हर किसी को। वही असली ज्ञानी है। ज्ञानी नाम अग्रगण्यम
2:27:13
गणेश जी को देखो। बुद्धि के देवता हैं। ज्ञान के देवता हैं। भवानी और शंकर का
2:27:19
चक्कर लगा लेते हैं। क्या प्रेम होता है यार असली ज्ञानी को। आप लोग क्या बताऊं मैं?
2:27:27
असली ज्ञानी ही असली प्रेमी होता है। वहां गणेश जी ऐसा थोड़ी ना बोले जो शिव
2:27:37
तुम हो वो मैं हूं। क्या चक्कर लगाऊं? वो स्टूपिड जैसी बात लगती है वो।
2:27:51
हां। मैं कई बार पुराने मास्टरों को झाड़ देता हूं। किसी बातों को काट देता हूं। वह आप लोगों को अधिकार नहीं है। है ना? किसी
2:28:00
को अधिकार नहीं है। मेरे को हटाना पड़ता है कि जो डायरेक्ट मैं दे रहा हूं आपको रिसीव हो पाए। इसलिए
2:28:08
है ना? इस चीज को आप लोग हमेशा याद करोगे। जहां पे भी दिव्यता है वहां का सम्मान
2:28:16
होना चाहिए। ठीक है? बाकी बहुत ही सुंदर आप जा रहे हो
2:28:25
और आपको निष्ठा हो रही है। निश्चिंत रहो। बहुत ही अद्भुत है। अद्भुत है गुरमीत जी।
2:28:42
बहुत-बहुत अहो प्रभु श्री थैंक यू सो मच। थैंक यू प्रभु श्री। प्रभु श्री सब कोई मेरे को एक फैमिली जैसा भासता है। लगता है
2:28:51
कि यह मेरा परिवार ही है। मैं कहीं भी जाती हूं तो मुझे चाहे पेड़ पौधे हो, कुछ भी हो मुझे अपने जैसे प्रतीत होते हैं।
2:28:59
लगता है ये मेरा परिवार है। हां। शुरू में यह अपना परिवार लगता है। यह पूरा
2:29:07
चराचर और फिर लास्ट में यह अपनी आत्मा लगती है कि मैं हूं।
2:29:15
यही आत्मनिष्ठा है। बहुत सही जा रहे हो। बहुत सुंदर जा रहे हो।
2:29:23
ओके जी प्रभु श्री कोटि कोटि प्रणाम प्रभु श्री अहो भाव प्रणाम थैंक यू
2:29:30
प्रेम प्रणाम
2:29:45
प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम जी
2:29:52
बस क्या बोलूं मैं ऐसा लगता है कि जो मेरे भाव होते हैं किसी के द्वारा खींच दिए
2:29:58
जाते हैं और बस भाव बहुत-बहुत धन्यवाद
2:30:05
बहुत-बहुत धन्यवाद जी मैं सब कुछ समा गया
2:30:15
प्रणाम जी
2:30:34
प्रेम प्रणाम गुरु जी हां प्रणाम जी
2:30:41
आनंद जी आनंद ये तो मैंने आपसे जबरदस्त सीखा है ये
2:30:49
जास्त अच्छा हम हम हम हो सकते हैं कैसे भी हो सकते हैं लेकिन
2:30:56
ये कैसे होना है ये तो आपसे ही सीखा मैंने सहज अवस्था और इसमें बहुत आनंद आनंद
2:31:09
प्रेम प्रणाम प्रणाम प्रेम प्रणाम
2:31:35
प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रणाम जी प्रभु जी एक अलग सी बेफिक्री शुरू हो गई
2:31:44
है और आपने जब से वो तो एक YouTube के सत्संग में आपने बोला कि हम सब आप में
2:31:51
हैं। तब से तो अलग ही बेफिक्री हो गई है। कुछ ना पाना है ना कुछ खोना है। बस आपके
2:31:58
साथ रहना है। बस बेफिक्र रहो। यस।
2:32:05
और आप आप में हम सब है। ये सुनके इतना सुकून आया है कि अब क्या करना है कुछ और।
2:32:15
करना कुछ नहीं है। बस ऐसे ही बेफिक्र रहो। बेपरवाह रहो। लापरवाह नहीं बेपरवाह है ना बेपरवाह। यस
2:32:24
तो हो करके बेपरवाह फिर परवाह करना जुर्म है। है ना?
2:32:34
यस। परवाह नहीं करना। वो करके बेपरवाह फिर परवाह करना जुर्म है।
2:32:43
एकदम बेफिक्र बेपरवाह मस्त सही में सेलिब्रेट करो ये पूरा अस्तित्व आपका है।
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आप खुद हो यस है ना सही में ब्रो मतलब वो अपने आप आ गया ऐसे
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पता नहीं कैसे आ गया ऐसा लगता है कोई डर नहीं कुछ मतलब कोई चिंता नहीं कुछ भी नहीं है जैसे बिंदास एकदम
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बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत धन्यवाद प्रणाम
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प्रेम प्रणाम प्रभु श्री प्रेम प्रणाम प्रभु मैं अपने से मिलने आ रहा हूं एक जून
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को यस मोस्ट वेलकम आप मुझे सेट कीजिए फिर ही बात करूंगा मैं
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तब तक मैं मुंह नहीं खोलना चाहता हूं ओके
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आप आइए अब सीधा यही मीटिंग करते हैं। ठीक है? जी बहुत धन्यवाद।
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प्रेम प्रणाम। जी। कितनी हंसी मुलाकातें
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हैं। हां जी। हां गुरुप्रीत जी सुन रहे हो?
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जी प्रभु शिकायत विकायत मत किया करो क्या नहीं कर रही हूं प्रभु क्या हम अब
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चिल्लाऊंगा अगर शिकायत करोगे तो हम क्या बोले प्रभु मिस कर दिया सॉरी
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शिकायत करोगे तो चिल्लाऊंगा हां शिकायत नहीं करना जिंदगी में किसी से
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भी नहीं खुद से भी नहीं और अस्तित्व से भी नहीं ठीक एक अहो भाव, एक धन्यवाद का भाव हमेशा
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आपके जीवन में होना चाहिए। ओके जी प्रभु जी थैंक यू
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मस्त सेलिब्रेट किया करो। ओके यस
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प्रणाम प्रभु प्रणाम जी
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आपके लिए बहुत दिनों से पहले तो दो लाइंस बोलना चाहती हूं। बहुत दिनों से वेट कर
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रही थी आपके रूबरू होने का।
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बखशीश की ख्वाहिश हो अगर ख्वाहिश हो अगर
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पर दस्तक देना जरूरी है और बार-बार दस्तक दिए जा रही थी और आज आपने दरवाजा खोला
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अपना आपके रूबरू हुई उसके लिए बहुत बहुतत
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थैंक्स फर्स्ट ऑफ ऑल एंड अह
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यह जो मैं से मैं तक का सफर है पहले अपने मैं को लेती थी और अब आपके को
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जानने के बाद आपके विचारों को सुनने के बाद
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मैं से मैं मिली हूं उस मैं तक जल्दी
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मैं व्यक्ति में रहती थी अभी अभी
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आपकी आवाज थोड़ी थोड़ी कट रही है। है ना?
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हम हम
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आवाज करेक्ट कर लीजिए फिर से आइए आप और एनीबडी
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प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम रसिका बात कर रही हूं हां रसिका जी कैसे हो?
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ठीक है। आप अच्छा गाते हैं। अरे आपका फेस ही नहीं दिख रहा है हमको। कहां हो भाई? दिखाओ।
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तबीयत खराब है तो लेट हुई हूं इसलिए कैमरा ऑफ है। तबीयत खराब है। आवाज बढ़ाओ तो आवाज कम कैसे आ रही है इनकी?
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अब आ रही है प्रभु। हां आ रही है। जी
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तो कैसे हो?
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बहुत बहुत अच्छे हैं और पहले से बहुत खतरनाक है। अभी तो ज्यादा
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अच्छा है सब। अभी रसिका होने का भी बहुत मजा आता है। जो पहले कुछ दिक्कतें थी,
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बेड़ियां थी पैरों में। अभी उसका भी मजा आ रहा है।
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भटकने के बाद बहुत बहुत भटकने के बाद जो मिलाप हुआ उससे ऐसे लगता है कि शायद प्रभु
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अमित श्री बनके खुद को सुनने का यह अलग ही प्रेम है तो यह बना रहेगा ऐसा ही ये मेरे
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को लगता है कभी-कभी यह तृप्ति से भी ज्यादा बहुत ऐसा वाला प्रेम है कि कोई तृप्ति चाहेगा भी नहीं
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हां नहीं बहुत ही सुंदर और पहले की आपकी जो
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समस्याएं थी वो भी अब सुंदर हो गई हैं। एंड और सिंगिंग कैसी चल रही है आपकी?
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बढ़िया। जी अभी बहुत अच्छा चल रहा है। रियाज भी अच्छा चल रहा है। बस अभी
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प्रोग्राम्स और ये सब लगातार चालू थे। तो इस बार जो आना था मेरे को वो संभव नहीं हो
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पाया। लेकिन अभी फिर से खुद को यहां से भगाने की चालबाजी चालू है तो शायद मैं जून
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में वहां पे आ पाऊंगी।
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बहुत अच्छा बस आत्म नष्टिक रहो। मैं आत्मा भगवान पर निष्ठा
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और बहुत सुंदर है। सब कुछ बहुत सही जा रहे हो।
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बहुत सारा प्रेम हां जी प्रेम प्रणाम जी
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प्रणाम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रभु
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प्रणाम जी मैं कंटिन्यू कर सकती हूं
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हां हां जी हां जी बताइए अब आ रही है वॉइस एक्चुअली मेरा मेरी मेरा खत्म हो गई
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चार्जिंग खत्म हो गई थी ओके प्रभु
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मेरे को सबसे पहले आत्मनिष्ठावान और बहुत ज्यादा और बनाइए ताकि मैं आपसे एक
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पल के लिए भी अलग ना हो पाऊं। मैंने आपको जब भी सत्संग सुनती थी तो मेरे मैं यही
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अरदास करती थी आपके आगे कि मेरे में समृद्धा नहीं है। आप तक पहुंच पाऊं मैं
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पंजाब से हूं ज्योति आपसे दो बार पहले बात हुई है हमारी
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ऑडियो ऑडियो पे ऑडियो कॉल पे आज पहली बार वीडियो कॉल पर आई हूं मैं गुरु शिष्य
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परंपरा के नाम से हमारा वार्तालाप हुआ था एंड ओशो प्रेमी थी आपको पहले और आप तक
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पहुंची हूं और मैंने अरदास मन में बहुत ज्यादा प्रेम भाव से और नेक्स्ट डे ही मैंने अपने भाई को बोला कि
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मैं जून में कुछ भी हो जाए मैंने जाना ही जाना है प्रभु के पास तो मम्मी को साथ ले जाऊंगी तो वो कहता कि मम्मी को ले जाना और
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हो सकता है मैं भी तेरे साथ चलूं हम यहां से कार ही ले जाएंगे मैं मैं मतलब मेरे को
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समझ नहीं आ रहा था किस किस किस एंगल से आपका धन्यवाद कहूं कि इतना दिल दिल से दिल
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तक का सफर है जो आप 1 इंच की दूरी नहीं रखते हो जैसे आप बोलते हो कि 1 इंच की
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दूरी भी बर्दाश्त नहीं करता गुरु शिष्य के लिए वो आपने प्रूव की जो आपने मेरे को बात
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बोली थी बस आप जल्दी से जल्दी अपने पास बुलाइए और मेरे को प्लीज प्लीज अपने चरणों
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में दर्शन के लिए जगह दीजिए मेरे से बोला ही नहीं जा रहा कि मैं इतने सारे भाव हैं
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क्या बोलूं इतने थोड़े से टाइम में निशब्द बहुत सारा बोल के भी बहुत सारा बचा है।
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बियों्ड एक्सप्रेशन है ये शब्दों में आ ही नहीं सकती वो वो बात जो दिल में भाव है बस
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अपना प्रेम अपना अपनी कृपा ऐसे ही बरसाते रहिए और अपने से कभी अलग ना करिए पर प्रभु
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कभी अलग ना करिए और एक बात मैं मैं जब भी स्टेज पर जाती हूं एस पब्लिक
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स्पीकर तो मैं दृष्टी लोगों की नजर से देखने लगती हूं अपने आपको वहां पे वहां पे
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अपने आप में बहुत मतलब मैं अपने आप में रहूं ये कृपा कीजिए मैं दूसरों दृष्टा में
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ना आ जाऊं मतलब दूसरों की निगाह से अपने आप को ना देखूं मैं खुद में स्थित रहूं मजबूती से स्थित रहूं ताकि अपने आप की
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प्रेजेंस को दूसरों के सामने ला सकूं ना कि दूसरों की प्रेजेंस को अपने ऊपर हैवी होने दूं। बस यही है।
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आज ऐसा ही होगा और हमारी प्रेजेंस हमको दूसरों को नहीं
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दिखानी है। जब भी स्पीकर या कहीं पे भी आप जाते हो। हां आपकी जो अभिव्यक्ति है या जो भी वर्क है
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जी वो आप आनंद से प्रेजेंट करो। है ना?
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और दूसरों की नजर हट जाएगी वो निश्चिंत रहो। ठीक है?
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थैंक यू सो मच प्रभु। और जल्दी से अपने पास बुला लीजिए। प्लीज प्लीज प्रभु
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हां आइए मोस्ट वेलकम है। आप चाहो तो आएंगे।
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मेरे में मेरे में ताकत नहीं है। आपको मिल पाऊं। आप में ताकत है कि आप हमसे मिल पाओगे। आप हमको बुला पाओगे।
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और हमको यकीन भी आप बुलाओगे जरूर। नहीं अब तो
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अब तो कहां जाओगे? अब तो आ ही जाओगे। हां जी।
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प्रणाम जी। प्रणाम। प्रणाम। प्रणाम। प्रणाम।
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प्रणाम गुरु जी हां प्रणाम जी
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गुरु जी आज मैं का सेलिब्रेशन चल रहा है तो मैंने सोचा मैं भी कुछ बात कर लूं
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हां हां गुरु जी मैंने अभी अभी कुछ शब्द सोचे मतलब
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कबीर साहब के बोले हुए हैं बट आज आपने वो थोड़ा सा ज्यादा अच्छे से बता दिया कि
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सदगुरु चले शिकार पे और हाथ में महका बाण
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जीव बच गए पड़ते ही आत्म ज्ञान हम
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तो आज आपने तो इतनी खूबसूरती से बरसाया है ना सब
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बोलते हुए भी थोड़ा सा मुझे वो लग रहा है बट ठीक है हम
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नहीं बहुत अद्भुत है और और अद्भुत है
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बहुत अद्भुत कभी आपको सुना नहीं था गुरु जी पहले हम क्या था सर्दियों का वक्त था 2024 की
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सर्दियां चल रही थी और हमारे पिताजी जो है वो 4 बजे से आपका
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वो लगा देते थे स्पीकर पे तो हम लोग सोते थे तो हंसते हंसने की आवाज आती थी बस बाकी सत्संग समझ में नहीं आता
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तो सोते कौन हंस रहा है कौन हंस रहा है ये बस यही सुनते रहते थे फिर क्या हुआ उन्होंने एक
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दिन बोला कि कोई वो बोलते हैं कि अरे सारी पुस्तकें मेरे सामने लाओ मैं जला के राग कर दूंगा क्योंकि मैं के अलावा और कुछ भी
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नहीं। उस दिन हमने आपको पहली बार सुना और अभी तक सुनते ही जा रहे हैं। लगभग दो
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दिसंबर या नवंबर से और मेरी बच्ची फरवरी के समय पेट में थी
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मतलब उसकी मां के तो टोटल आपका सत्संग सुना है। आज वो आपको देख के हंसती भी है। आप जब ऐसे हाथ करके बोलते हैं ना मैं ही
2:47:00
हूं और वो भी ऐसे छोटा सा हाथ अपना उठाती है आपको देख के
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बहुत सुंदर एक और बात बोलूं हम आज आप
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तब सुनो सुनो जब बच्ची पेट में थी और आप लोगों ने सुना
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है वाइफ ने आपने और यह
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इतना गहरा होता है ना कि वह बच्ची के अंदर भी चले गया है। है ना?
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इसके इसको ना किसी शब्द की जरूरत है ना समय की ना स्थान की। जैसे अष्टावक्र गर्भ
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में थे और उन्होंने सुन लिया था ना। हां। तो यह सुन लिया जाता है। यह प्रवेश
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कर जाता है। इसका इंपैक्ट बहुत गहरा होता है। बहुत ही
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ज्यादा गहरा। उसका प्रमाण आपको आपकी बिटिया देगी जब वो
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बड़ी होगी। हां आप कुछ कह रहे थे। मैं कह रहा हूं गुरु जी थोड़ा सा ऐसे ही
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मतलब अपने अपने पन के कारण बोल रहा हूं मैं उसको। आज आप महादेव वाला डांस करेंगे तो भी हम देख सकते हैं।
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अरे नहीं यार हमारे साथ डांस करना है तो यहां आओ। हम तो यहां सबके साथ नाचते हैं। ठीक है।
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ऐसा वीडियो में थोड़ी ना देखोगे उसको। गुरु जी बच्ची बहुत छोटी है 10 महीने की। मैं तो लेके अभी आ जाऊं।
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हां लेके आ जाओ। बट उनका पहले ख्याल रखना बेबी का। उनको तकलीफ नहीं होनी चाहिए। हां तभी तो घुसी है। फिर मैं आता हूं।
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हां या आप आ सको तो आप आ जाओ। हमारे साथ नाचो। हमको देखना क्या है? अरे बिल्कुल गुरुजी गाएंगे भी गिटार भी मतलब आप कहने
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दो बस हां बिल्कुल बिल्कुल ठीक है गिटार वीणा जिसके पास जो है सब लेके आओ
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यहां सेलिब्रेशन चलता ही है सत्संग के बाद यहां सेलिब्रेशन ही चलता है जी गुरु जी बिल्कुल बिल्कुल बिलकुल
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हां जी प्रेम प्रणाम बहुत-बहुत प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम जी मतलब बात करने के बाद खुल गया सब अभी तक
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ऐसा लग रहा था ना थोड़ा सा बस हो अरे मैं एकदम फ्रेंड हूं यार।
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अरे पता है गुरुजी आप फ्रेंड हो बट आप जिस तरीके से बोलते हो ना तो हम तो बचते नहीं है। फ्रेंड कहां से रहेंगे गुरुजी?
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ओके ओके प्रणाम
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हम प्रेम प्रणाम गुरु जी
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प्रेम प्रणाम आप भी अमित मैं भी अमित हां जी
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हां प्रभु जी बस यही कहना था प्रभु जी कि आपकी बड़ी कृपा है। अभी तक को बहुत ढूंढा
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पर कोई भी इतनी तृप्ति नहीं दे पाया जितनी आपने दी और वो फिर गहरी होती गई। अक्सर
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होता है कि हम प्रभावित हो जाते हैं किसी गुरु से तो 10 दिन पांच दिन तो उसके आगोश में रहते हैं। फिर अपने आप में फिर वही
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संसार शुरू हो जाता है। लेकिन आपको सुनने के बाद और आपके साथ रहने के बाद मतलब वो
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और गहरा ही हो गया। उससे दूर तो हटे नहीं बल्कि उसमें डूबते चले गए।
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और प्रभु जी मेरे मेरा भी बच्चा है अभी चार साल का होने वाला है और वो बस यही गाता
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फिरता है कि सब कुछ मैं ही हूं सब कुछ मैं ही हूं सूरज भी मैं हूं चांद भी मैं हूं मां जी भी मैं हूं पिताजी भी
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मैं हूं दादा भी मैं हूं दादी भी मैं हूं और छोटी सी बच्ची है प्रभु जी सच बताऊं
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अगर वो अभी होती कल ही गए हैं वो लोग अपनी नानी के यहां पर छुट्टियां लग गई है इसलिए डेढ़ साल की बच्ची है वो जरा सी बोल भी
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नहीं पाती उससे बस ये बोलो सब कुछ मैं ही हूं बस इतना बोलती है
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बहुत सुंदर है और जो अभी ये बोल रहे थे ना भैया जे
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ये मेरे बड़े भाई है हमारा पूरा घर पिताजी आपको लेके आए घर पे
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अच्छा जी जी जी परे भैया थे हमारे और
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मैं इस इधर हूं वो उधर बैठे हैं और पापा ही आपको ले आए और मतलब ये समझ लो कि शायद हमारी कोई तपस्या होगी हमारी कोई
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प्रार्थना होगी अस्तित्व से कि कोई ऐसा गुरु या हमें भी जानना है बस वो आपको सुन
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रहे थे और कह रहे थे देखो आजकल तुमने गुरु बहुत देखे हैं बड़े-बड़े दाढ़ी वाले ये देखो कितने यंग और इतने सुंदर
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इनको सुनो तो आपको बस क्या टीशर्ट वाले
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अरे बहुत मतलब मैं क्या ही बताऊं देखी जिंदगी तो आपके सिलवासा के सत्संग से बदली जब आपने वो मालपुआ खिलाया था ना
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एक के थ्रू बस वो मालपुआ और आज का दिन मतलब सब कुछ बदल गया सब बदल
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गया बस वो कहानी मतलब तो आप लोग कहां रहते हैं अमित जी?
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जी हम लोग मध्य प्रदेश ग्वालियर से ही हैं। हम हां और सभी लोग आप आपको सुनते हैं। बड़े
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भैया हैं हम है मेरी वाइफ है। बच्चे तक हमारे मैं हूं मैं हूं करते रहते हैं। और बस अब मैं और सिखाने को मेरे पास कुछ भी
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नहीं है कि ऐसे बनो या वैसे बनो। आजकल बहुत चल रहा है। मैंने जो सिखाया वो मैंने सब सिखा दिया। बस मैंने जो मतलब मेरे को
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ऐसा लगा कि मैंने अगर इनको मैं हूं सिखा दिया ना बस सब सिखा दिया। काफी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे आपसे बात
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करने की। आप इतना रस दे देते हो। इतना वो दे देते हो कि बस आपको देखो सुनो और बस तृप्त हो लो। क्या पूछना क्या रखना बहुत
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सवाल थे पहले लेकिन जब से वो मालपुआ खाया है विश्वास वाला। नारायण दृष्टि करी है
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आपके प्रति कि नहीं बस वो वो मालपुरी ने सब कर दिया प्रभु सब मतलब सब क्या ही
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बोलूं खुद आके मतलब अस्तित्व कोई दोहा अगर ऐसा पड़ गया जो नहीं आता खुद अस्तित्व बता देता है इसका अर्थ ये है मैं सच बोल रहा
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हूं ब्रो हां सच है ये
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बस सब मैं कभी बताऊंगा अपनी भी कहानी के बहुत कुछ घटित हुआ है जाते आते आते सोचते
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सोचते समझते समझते अपने आप सहज में सब बताते जाता है अस्तित्व सब अंतर्यामी सब बोल देता है सब
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हां सत्य है ये भी वो अचानक प्रकट कर देता है सब हां और इतना सहज होता है कि ऐसा कुछ भी नहीं लगता कि मतलब के आज से मैं बदल गया
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मतलब इतना अच्छे से बता देगा कि मतलब यही है सत्य और उसप निष्ठा ऑटोमेटिक हो ही जाती है
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हां यार यानी अस्तित्व अंतर्यामी जब भी बताता है ना वो बहुत ब्यूटीफुल तरीका होता
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है। सहज वो हार्ड वे नहीं होता। हां बहुत
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स्लाइड सहजता से वो बस ऐसे बता देता है। प्रकट कर देता है।
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बहुत सुंदर अच्छा लगा आपसे भी बात करके अमित जी। अरे प्रभु आपको क्या अच्छा लगा जैसे मतलब
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हमारे तो भाग्य खुले हैं। हमें तो खुद नारायण हमसे बात कर रहे हैं। अब हमें और क्या चाहिए? शिव खुद बुद्ध खुद मतलब
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क्या ही वर्ड बोले? मतलब अभी तक शायद तख्ती सोचते थे कि बुद्ध होते तो हम होते। ओशो होते तो हम होते। ये अक्सर आता था दिमाग में। उस वक्त क्यों नहीं हुआ मैं?
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दो साल बाद क्यों पैदा हुआ?
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लेकिन सब लोग आकर सुनो सुनो अमित जी हमेशा ख्याल रखना मैं
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हूं तब बुद्ध है मैं हूं तब वो शो है मैं हूं तब महावीरा है मैं हूं तब अस्तित्व है
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उसका हमेशा ख्याल रखना बिल्कुल और आपके मैं से भिन्न कोई भी बुद्ध नहीं है
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बिल्कुल मैं भी नहीं ठीक
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आप तो सब कुछ है जो तरफ आपने अच्छा
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प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रेम हम हम
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हम हम
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
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प्रभु जी साक्षी बात कर रहे हो नासिक से हां जी साक्षी जी कैसे हो?
2:57:16
मैं बिल्कुल ठीक हूं। आनंद में एकदम आप कैसे हो?
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हम भी आनंद में हैं। आज तो आनंद फिर से आनंदित हो गया।
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सच में आपको देख के आपको सुन के ना और कुछ ना बात करने का मन करता है। बस
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होने में ही आ जाते हैं अपने। पहले ऐसा लगता था सांस भी हम ले रहे हैं।
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जो अपने आप हो रहा था वो भी ऐसा लगता था कि हम कर रहे हैं। लेकिन अब जो हम भी करते हैं वो ऐसा लगता है कि हो रहा है।
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यस एब्सोल्यूटली राइट परफेक्ट।
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जो करने से होने में आप ले आए हो ना। बहुत बहुत शुक्राने आपके
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बहुत प्रेम प्रणाम बहुत दिन से सोच रही थी आपकी और साक्षी जी एक चीज और ख्याल रखें
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करने से होने में तो आ गए और जो भी हो रहा है वह मैं ही हूं
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क्योंकि मैं हूं तब हो रहा है ना इसलिए जो भी हो रहा है वह मैं ही हूं
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क्योंकि मैं हूं तभी हो रहा है
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है ही है अस्तित्व ही हो रहा है इसलिए जो भी हो रहा है वह भी अस्तित्व है वो भी मैं
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ही हूं ओके आपका जब माया वाला सत्संग सुना तब ऐसा लग
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रहा था पहले उससे पहले ऐसा लग रहा था कि आपने वो तो सिखा दिया था कि माया जान के प्रणाम करना है जब भी माया सामने आए लेकिन
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लेकिन वो सत्संग सुनने के बाद ऐसा लगने लग गया कि माया की रिस्पेक्ट और प्रेम मतलब
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बहुत बढ़ गया। हमने रिस्पेक्ट नहीं सीखी थी माया की करनी। प्रणाम तो कर रहे थे
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लेकिन वो जो दिल से एक माया को सब बोलते हैं ना मन आ गया, मन आ गया। लेकिन वो जो
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रिस्पेक्ट आई है ना वो सत्संग सुन के कि माया के कारण ही तो हम परमात्मा को जान पाएंगे। वही तो रक्षा कर रही है परमात्मा
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की। और उसी की रिस्पेक्ट नहीं करते हैं हम। तो तब से ऐसे लगने लग गया है कि जो भी दिख
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रहा है जो भी माया है उसकी जो रिस्पेक्ट और प्रेम आया है ना वो मैं आपको शब्दों
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में नहीं बता सकती। नहीं वो बहुत अद्भुत है। क्योंकि माया
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स्वयं भगवान है। है ना? भगवान स्वयं माया है। वह अलग है ही नहीं।
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और वही आपको रिस्पेक्ट तो मस्ट है
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पूरे चराचर की क्योंकि सब कुछ नारायण है।
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सब कुछ माया भी पूरा चराचर भी और आप भी
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मतलब देखो हम खुद के प्रति जीव भाव से जीते हैं। संसार बाहर के प्रति संसार भाव से जीते
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हैं और खुद के प्रति जीव भाव से जीते हैं।
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तो इसमें भी आपके जीवन में छोटे-मोटे आनंद आ जाते हैं। एक अच्छी लाइफ चलती है।
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अब सोचो खुद के प्रति भगवत भाव सर्व के प्रति भगवत भाव
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यार उसके आनंद का कोई पारावार नहीं है
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सियाराम मैं सब जग जानी कर हहुं प्रणाम जोर जुग पानी बस प्रणाम ही प्रणाम
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प्रणाम ही प्रणाम हमेशा हमेशा प्रणाम करते रहना चाहिए पूरे चराचर को
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स्वयं को भी
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बाकी बहुत सुंदर है साक्षी जी अद्भुत है ना जो है
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सब आपका है।
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बस आत्म नष्टिक रहिए। स्वयं पे निष्ठा
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स्वयं ही सर्व है। और सर्व से परे है।
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ओके। प्रणाम। मैं हमेशा परमात्मा से यह मांगती थी पहले कि जैसे आपने प्रह्लाद को
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हर जगह अपने को दिखाया ना बस उस उतनी दृष्टि दे दो और परमात्मा ने स्वयं ऐसा
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गुरु दे दिया जो सर्व में उन्होंने वो दृष्टि दे दी सच में परमात्मा सुनते हैं
3:02:41
अस्तित्व सुनता है और वो पूरा करता है अगर शुद्ध भाव से मांगा हुआ है तो हां बिल्कुल निश्चित है वो वो वो
3:02:51
अंतर्यामी सुनता रहता है। आप जो भी मांगते हो, जो भी चाहते हो वो बराबर सुनता है। वो
3:03:00
कल्याण ही करता है। बहुत-बहुत शुक्राने प्रेम प्रणाम।
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प्रेम प्रणाम। जी।
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तो अब वाणी को विश्राम देते हैं। सभी को प्रेम प्रणाम।
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प्रेम प्रणाम।