Prabhu Shree
0:19
तो आप जो सुनते रहते हो ना पुराने मास्टर्स का या कुछ भी ओल्ड
0:28
पुस्तकों में पुराने मास्टरों ने जो भी बोला है वह माया के खाते में चले गया है। क्या
0:38
वो माया के खाते में चले गया। सब का सब
0:48
वो लाइव थे तब बात और थी। हमने भी जो आज के पहले जो भी बोला है
0:57
वह भी माया के खाते में चले गया और अभी जो बोल रहे हैं यही परमात्मा के
1:06
खाते में है। अस्तित्व के अकाउंट में
1:14
बाकी सब माया के खाते में गया। अब आप मैं हूं करो कुछ भी करो। वह मायने
1:22
नहीं रखता लाइव परमात्मा लाइव होता है अभी होता है
1:29
वो जो भी रिकॉर्डिंग रिकॉर्डिंग सुनते हो सब वो माया को ही सुन रहे हो आप
1:44
हां जी बताओ अरे बोलो ऐसा क्या खामोश बैठे रहते हो हां
2:12
विराज तू तो बोलता ही नहीं है। आखिर बात क्या है? पहले बता मेरे को।
2:20
हम कुछ नहीं
2:31
कुछ आता नहीं है। ओके आता नहीं है वहां तक तो ठीक है।
2:43
और खुद में कैसा लगता है बस अच्छा लगता है या और कुछ
2:59
लगता नहीं है बस है ओके और बोलना पड़ेगा अभी
3:10
यह वर्ल्ड कैसा लगता है
3:22
अरे तुरंत बोलना है। अरे बोलना यार उसमें क्या है?
3:44
अलग सा नहीं लगता है। ओके। एक सा भी नहीं लगता है। ओके।
4:02
बट अपने आप में या जो भी बोल लो स्वयं का भास।
4:09
स्वयं का एहसास उसकी पोजीशन क्या है?
4:16
हां तब ठीक है। पानी
4:27
यानी एक कितना बड़ा मिसिंग पॉइंट है बताऊं यार।
4:47
जब आप हियर एंड नाउ में रहते हो ना तो उस समय समय नहीं रहता स्थान भी नहीं
4:54
रहता। यह रण में
5:01
यह क्षण इस क्षण में समय नहीं है। वर्तमान भी नहीं है। कोई वर्तमान बोलते ही क्षण तो स्लिप हो
5:08
जाता है ना। और आप
5:18
क्षण में ही तो रहते हो। आपकी रहनी
5:29
एकदम अभी और यही आप अभी और यहीं तो हो
5:37
यह कोई अचीवमेंट नहीं है कि अभी में होना है, वर्तमान में होना है,
5:44
यही होना है। नो आप अभी और यही तो हो।
5:54
और कहां हो बताओ य नाउ कोई गोल नहीं है वहां आप हो ही
6:08
और कहां हो हियर एंड नाउ
6:15
अब हियर एंड नाउ
6:23
में मन चल सकता है। ये परमात्मा का क्षेत्र है ना। इसमें मन कैसे चलेगा?
6:40
मन चलता है फ्यूचर में, पास्ट में आपका ध्यान कहीं और है
6:48
वहां चलता है। अभी अभी मैं ही होता हूं। बस मन वन नहीं होता
6:57
है। हियर एंड नाउ में मैं ही होता हूं। मन वन
7:06
नहीं होता है।
7:33
और यह हियर एंड नाउ यह वर्तमान का क्षण बोल लो या क्षण बोल लो
7:42
ज्यादा बेहतर है। यह यहां समय नहीं होता।
7:55
यहां कुछ हुआ ही नहीं। ना कोई युग हुआ ना कोई समय हुआ।
8:04
यहां अपना आप ही भासता रहता है। बस भास ही भास है। एहसास ही एहसास है स्वयं
8:12
का। तो स्वयं के एहसास को पकड़ो मत। उसका
8:21
साधना मत करो। वह आप खुद हो। आप स्वयं ही हो और स्वयं का एहसास ही हो। आप
8:31
उसकी साधना नहीं करनी है। उसको 24 घंटे मेंटेन नहीं रखना है।
9:04
हां जी और बताओ ऐसे बताओ यार ऐसे चुपचुप मत बैठे रहो।
9:12
टू द पॉइंट बात होनी चाहिए। इधर उधर की बात नहीं होनी चाहिए। बस उसका ख्याल रखना।
9:19
हां प्रणाम जी बताइए। मेरे ना चारों तरफ जैसे
9:30
गिरे हुए हैं। मौन गिरे हुए हैं। मैं चलता हूं। बातें करता हूं या फिर मेरे मन की
9:40
क्रियाओं में भी मौन की झलक दिखाई देती है। हां तो एक एक मिनट रुकिएगा। मेरे चारों ओर मौन घेरा हुआ है। है ना?
9:54
अधिकतर लोगों के अनुभव होते हैं। मेरे चारों ओर अनंत है, मौन है, अस्तित्व है।
10:01
तो जैसे ही आपने कहा कि मेरे चारों ओर मौन
10:07
घेरा हुआ है। तो आपने मौन को घेर लिया।
10:14
मेरे चारों ओर अनंत है। आपने अनंत को घेर लिया।
10:23
अनंत दायरे में आ गया। आप उसके बियों्ड ही हो। मेरे चारों ओर एक्सिस्टेंस है। अनंत अखंड
10:32
आपने सबको घेर लिया। ये आपको घेरे हुए नहीं है। ये आपकी बॉडी
10:41
को घेरे हुए हैं। आपने इनको घेरा है यार। आपने इनको
10:50
घेरा है। इसने आपकी बॉडी माइंड को चारों ओर घेरा है। वह एक अलग बात
10:59
आपने इनको घेरा हुआ है। बाकी अच्छा है वो सुंदर है।
11:16
अच्छा लगता है किसी को? अरे बोलोस झूठ नहीं बोलना। नहीं लगता तो नहीं लगता।
11:25
उसमें क्या है? और लगता है तो लगता है। उसमें भी क्या है?
11:46
हम हम हम
12:10
तो कभी भी मौन के पीछे अनुभव के पीछे मत भागो। है ना?
12:17
इन सबको आप घेरे हुए हो। अनंत को अज्ञात को
12:23
अस्तित्व को
12:38
देह दृष्टि से मत देखा करो। देह दृष्टि से यह अस्तित्व बहुत विराट लगता है। और मैं
12:46
दृष्टि से यह पूरा अस्तित्व कण मात्र लगता है। क्योंकि मैं की दृष्टि में दूसरा कोई है
12:55
ही नहीं। अरे कोई नहीं है यार।
13:05
कहां लगा रखे हो? अस्तित्व अनंत ये वो सब छुट्टे हैं सब चिल्लर। अरे जमता कि नहीं जमता?
13:17
एकदम ना? हां। तो यार साधुवादु बोल दिया करो तो हमको भी
13:23
लगता है कि हम ठीक बोल रहे हैं।
13:41
कभी किसी का ध्यान मत करना क्योंकि जिसका भी ध्यान करोगे वह शूद्र ही है आपसे चाहे वह अस्तित्व क्यों ना हो चाहे वह अनंत
13:49
क्यों ना हो ध्यान सीमित का ही हो सकता है मेरे भाई
13:58
क्या ध्यान सीमित का ही हो सकता है अनंत का भी जो आप
14:07
ध्यान करते हो वो भी सीमित परमात्मा किसी का ध्यान करेगा क्या यार
14:18
मैं आत्मा भगवान किसी का ध्यान करेगा क्या अगर वो किसी का ध्यान कर रहा है तो उसको
14:25
अपना बोध नहीं है इसीलिए कर रहा है बस मैं आत्मा भगवान किसी का ध्यान करता ही
14:31
नहीं हां वो सेकंड वाले को बंद करना लेफ्ट से
14:40
वो जमा ही ले रहे हैं हां
14:46
हो सवालों को रखो इसमें चेंज करते रहा करो
14:54
तो ध्यान नहीं करना भैया किसी का। जैसे मैं ध्यान किया उनका वो जमाई ले रही थी
15:02
तो ऐसे ही ये अनंत अज्ञात ये सब जमाई ले रहे हैं। ये अस्तित्व क्या ध्यान दोगे
15:09
इनमें? हटाओ इनको। है ना?
15:20
और मस्त रहा करो। हां मैं लाइव हूं बस अभी हूं। याद रखना
15:30
मेरे को YouTube में मत सुनो। वो माया को सुन रहे हो आप। हां पुराने मास्टरों को तो सुनो ही मत।
15:38
पुस्तकें ये वो सब माया है वो। माया के खाते में चले गया। अभी
15:45
इस क्षण के पहले भी जो मैंने कहा वो माया के खाते में चले गया। अभी बस
15:54
यह परमात्मा का अकाउंट ओपन है। है ना?
16:03
करंट अकाउंट बोलेंगे क्या?
16:15
मनुष्य का साला हालत क्या हो गया है कि उसको समझाना भी है तो अकाउंट की भाषा में समझाना पड़ता है।
16:27
भाषा ही पैसे की हो गई है। है ना?
16:31
लक्ष्मी जी का वर्चस्व चल रहा है दसों दिशाओं में।
16:59
हम ऐसे टर्क करो थोड़ा-थोड़ा बाकी मैं संभाल लूंगा।
17:07
गोविंद यार ऐसे खामोश मत रहा करो।
17:13
कैसा रहा आज का सुंदरकांड का हवन? बढ़िया। बहुत सुंदर।
17:20
हां जी बोलो। प्रेम प्रणाम। प्रेम प्रणाम।
17:29
भगवान जब का होता है तो ऐसा लगता है
17:37
मैं तो जब वो मैं
17:44
सोचा पॉइंट लगता नहीं कि बच्चा रहता तब कुछ लगता है मैं ही
17:53
हम सही है क्योंकि मैं ही मैं हूं ना और कौन है
18:03
और है कौन
18:10
मैं के अलावा और है कौन राहुल है क्या कोई
18:19
है ही नहीं भाई सब माना हुआ है
18:26
मैं के अलावा अगर किसी को लग रहा है कि कुछ है तो वह केवल माना हुआ है। वह
18:33
एक्चुअल में है नहीं। ओके
18:39
वो केवल माना हुआ है। है नहीं।
18:46
डंडा डंडा माना हुआ है लकड़ी पर है नहीं पूरा चराचर
18:56
देह मन बुद्धि सहित पूरा चराचर माना हुआ है मैं पर है नहीं
19:06
हूं तो सिर्फ मैं सिर्फ
19:13
मैं
19:25
किसी से जुड़ने के लिए मैंने ही खुद को प्रेम माना है। किसी से एक होने के लिए एकाकार होने के
19:34
लिए मैंने ही खुद को ज्ञान माना है। ज्ञान प्रेम भी कहीं नहीं है।
19:45
और जीव और परमात्मा छोटे बड़े का खेल है और कुछ नहीं है। यह भी माना हुआ है कि छोटा-छोटा खेलो तो जीव हो, बड़ा-बड़ा अनंत
19:53
अनंत खेलो तो भगवान हो। छोटा-छोटा खेलो तो अज्ञानी हो, बड़ा-बड़ा
20:01
खेलो तो बुद्ध पुरुष हो। यह सब मान्यता है। यह माया के खाते में रहता है सब।
20:12
लेकिन हूं मैं ही
20:26
मैं ही हूं करके ही तो खुद को कुछ भी मान लेता हूं।
20:33
समझ रहे हो? मैं ही हूं करके ही तो खुद को कुछ भी मान लेता हूं। निश्चिंत होकर मानता हूं मैं खुद को जो भी मानता हूं आत्मा
20:42
परमात्मा देह मन बुद्धि संसारी पापी पुण्य आत्मा जो भी मैं खुद को मानता हूं
20:49
निश्चिंत हो मानता हूं क्योंकि मैं ही हूं इसलिए मानता भी हूं।
20:58
आपको पता है मान्यता से आपका कुछ नहीं बिगड़ना है। तो मान्यता
21:05
से किसका कुछ बिगड़ता है? माने हुए जीव का कुछ बिगड़ता है।
21:10
तो मान्यता से मान्यता का ही बिगड़ता है। आपका कुछ नहीं बिगड़ता।
21:20
इसलिए निश्चिंत होकर आप मानते रहते हो जो भी मानना है खुद को।
21:27
आपका कुछ नहीं बिगड़ता। मान्यता से मान्यता का ही बिगड़ता है।
21:34
अरे खुद को देह माने तो देह में जो भी गड़बड़ हुई तो मान्यता का ही बिगड़ा ना। खुद को मन माने, माया माने जो मान्यता का
21:43
ही बिगड़ा ना। तो मान्यता में मान्यता का ही बिगड़ता है। मैं का कुछ नहीं बिगड़ता। इसलिए मैं
21:52
निश्चिंत होकर मानता रहता हूं। मैं अर्थात मैं
22:01
आत्मा भगवान
22:19
तो माया देश में मैं सुंदर हो जाता हूं। मैं ही माया बन जाता हूं। एक सैनिक हो जाता हूं। पूरी प्रकृति हो जाता हूं। देह,
22:29
मन और ये पूरा चराचर हो जाता हूं। और आत्मा में मैं शांत हो जाता हूं।
22:39
भगवान हो जाता हूं और माया में मैं सुंदर हो जाता हूं।
22:48
और माया को जब आप भगवान से भिन्न मानते हो मैं आत्मा भगवान से मैं से भिन्न मानना ही
22:56
माया है। तो मैं से भिन्न भगवान को मैं को मानते हो कुछ और
23:04
तब माया खतरनाक हो जाती है। डेंजरस तब यह जो भी मैं बताया ना वह सारी फीलिंग
23:12
चली जाएगी और आपको माया माया ही फील होगी। आपकी फीलिंग में बेचैनिया और यह सब ही फील
23:20
होगा। आपको लगेगा कहां फंस गए नर्क में आ गए या जो भी फीलिंग होती है आपको।
23:30
अपनी मान्यताओं को अपने से अलग मानने पर यह फीलिंग हो जाती है।
23:39
इसलिए आपने खुद को जो भी माना है वह खुद को ही माना है।
23:46
उसको अलग मत करो।
24:05
हम पानी दो
25:10
हां जी एनीबडी
25:23
प्रेम प्रणाम प्रभु हां प्रेम प्रणाम जी जी गुरु अभी दो ही घंटे पहले मेरे पैर में
25:32
फैक्चर हुआ सो अभी मैं बैठ के वक्त सुनते हुए वही सोच रही हूं कि ऐसी परिस्थिति में
25:39
शरीर भाव में बाहर क्यों भाव में की बार-बार पे निकल रहा है पैर
25:47
इधर उधर जा रही है हम उसमें मैं हूं का भाव मैं कैसे निश्चित रहूं
25:54
नहीं तो दर्द को अपने से अलग मत मानो ना हां
26:02
भाई शरीर का सुख किसने भोगा आपने भोगा ना
26:07
तो शरीर में जब दुख होगा उसको कौन भोगेगा
26:13
आप ही भोगोगे ना उस दुख को स्वीकार करो ना हां उसका इलाज विलाज कराओ जो भी ट्रीटमेंट है वह कराओ
26:22
लेकिन उसका स्वीकार किया प्यार
26:30
किए वो ठीक है वो ठीक है बट
26:36
स्वीकार का मतलब क्या होता है मालूम कि दुख कोई पराया नहीं है।
26:44
दर्द कोई पराया नहीं है। वह अपना है।
26:52
वो होता है स्वीकार का मतलब। स्वीकार करना पड़े
27:00
ऐसा नहीं। वह अपना है। वह भी हमारी जिंदगी का एक सुंदर हिस्सा है।
27:10
तो हमारे भगवान श्री एक कविता कहा करते थे कि कौन सा मौसम लगा है? दर्द भी लगता सगा
27:18
है। प्राणों को किसने ठगा है?
27:25
दर्द भी लगता सगा है।
27:32
तो जब वह सगा लगने लगे ना अपना लगने लगे
27:38
तो क्या बताऊं आगे आप समझ गए
27:48
हम क्या है धत्कारते हैं अस्वीकार भी ऐसे करते हैं जैसे मजबूरी में करना पड़ रहा है
27:54
वो वो लो कैटेगरी है अस्वीकार की ना
28:04
हालांकि सच्चिदानंद आत्मा का स्वभाव है वो सत्य है।
28:10
लेकिन एक शारीरिक तल पर बाहरी तल पे ना एक जो शरीर का सुख है तो उसका दुख भी है। है ना?
28:20
जब पूर्णतः प्रेम पूर्ण जब वह आपका सगा हो जाता है ना
28:26
तो वह भी आनंद देता है।
28:33
जीवन का चरम आनंद जो है वह मृत्यु है।
28:41
हम सोचते हैं जीवन ही आनंद है। हां जीवन भी आनंद है। लेकिन मृत्यु महा आनंद है
28:52
यार अब मर जाना है खो जाना है मिट जाना है
29:01
तो वो जो पेन भी होता है मृत्यु के समय और सारे डायमेंशन ओपन होते हैं पूरा पास्ट एक
29:09
बार आता है वो एक जो भी प्रक्रिया है ऊपर से प्रकृति आपको मूर्छित करती है मरने के
29:18
पहले बहुत ज्यादा पेन है ना असहनीय पेन जैसा कुछ नहीं होता प्रकृति उस उस समय मूर्छित कर देती है आपको
29:27
जैसे वो लेते हो ना क्या डॉक्टर देता है जो एनस्थसिया तो प्रकृति की एनस्थीसिया आ ही जाती है
29:35
असहनीय दर्द में यानी प्रकृति का इतना प्रेम है कि आपको
29:42
असहनीय दर्द जैसी कोई चीज होनी ही नहीं देती और जो दर्द दे रही है जो भी हो रहा है
29:51
नेचुरल फिजिकली वह तो सुंदर है आपके जीवन का सौभाग्य
29:58
एक महीना हिलना ही नहीं है घर से आनंद है बेड में पड़े हैं खा रहे हैं सत्संग सुन
30:05
रहे हैं वाह बधाई हो यार है ना?
30:16
कितने खुशकिस्मत हो यार। लोग तो एक दिन अपने घर में नहीं बैठ पाते। मालूम
30:23
खुशी बहुत क्योंकि हर चीज का हर चीज का एक दूसरा
30:32
पहलू भी होता है ना। ठीक है। एक जगह दर्द है तो उसका दूसरा पहलू भी है। पूरा एकांत मिलता है आपको
30:40
क्योंकि ऐसे तो कई बार ऐसे सिचुएशन होती है कि हम एकांत में नहीं जा पाते। फैमिली
30:46
है, दुनिया है। बुढ़ापा इतना सुंदर होता है ना बुढ़ापा
30:58
कि पूरे घर वाले आपको अवॉइड कर देते हैं। कोई आपकी ओर देखता ही नहीं। आपको दर्द है,
31:06
कुछ भी है। वो सौभाग्य होता है बुढ़ापा मालूम। और मृत्यु की तो पूछो ही मत यार। मृत्यु तो डार्लिंग है। यानी क्या बोलूं मैं उसको?
31:18
महबूबा बोलते हैं ना। वो गाना था ना यार मौत तो महबूबा है। साथ
31:25
लेके जाएगी। बच्चन साहब का है शायद जो गाए थे।
31:30
जिंदगी तो बेवफा है एक दिन ठुकराएगी
31:37
गानेवाने सुना करो यार हां और मस्त रहो ठीक
31:48
प्रेम प्रणाम जी प्रणाम
31:57
हां जी प्रणाम जी हां मैं आपका सुनती हूं आत्मा में
32:09
अरे बेहिचक बोलो उनका सुन के मत बोलो अपना बोलो आने जा रहा है
32:17
और मैं आपके हूं और लगता है
32:24
हम ओके सुंदर है
32:34
तो उनका बोल रहे हो आप ना नहीं चलेगा ऐसे नो
32:43
जी वो क्या है बोलने वाला है वो मेरी बेटी है तो आपका तो मुझे क्या एक बार आए वहां
32:52
मुझे बोलने देना तो वो अपने सुनती है तो क्या आप आई है तो मेरे मोबाइल में बोलने आई तो मुझे दर्शन
33:00
अरे सुनो तो सुनो सुनो वो अटक रही है चलेगा उनको आप मत बताओ ठीक
33:08
है हां अब आप बोलो बेचक बोलो अभी आप हो और मैं हूं बस और कोई
33:19
नहीं हां ये लगता है कि मैं ऐसे ही जैसे आप बोल रहे हैं कि मैं भी तो मैं ऐसे ही रहती हूं
33:28
वो हम खुश रहती हूं। आनंद में रहती हूं। वाह और
33:37
आपका भी देती हूं। तो दिन भर ऐसे प्रसन्न रहते हो आप।
33:44
हां। बहुत अच्छा। तो अब सुनो है ना?
33:55
यानी जिंदगी में ना आदमी
34:03
हजार चीजें सीखता है। खुश रहना बस नहीं सीखता जो सीखना चाहिए।
34:12
प्रसन्नता, आनंदित रहना, खुश रहना। इसकी हैबिट है बस। जैसे आप रोने गाने की
34:20
हैबिट डाले हो ना ऐसे हंसने की मुस्कुराने की खुश रहने की नाचने की हैबिट डाल लो
34:29
परमात्मा परमात्मा तो आप पहले से वो मैच हो जाएगा दुखी हो के वो ढका रहता है
34:35
क्योंकि स्वभाव सच्चिदानंद है है ना तो इसकी हैबिट बना लेनी चाहिए हमेशा प्रसन्न
34:44
रहना चाहिए कि आज का दिन जीने को मिला। यह पल जीने को मिला। बड़ी-बड़ी बातों की जरूरत नहीं है।
34:53
मैं आत्मा भगवान भगवान की। है ना? अरे अभी पूरे अस्तित्व के साथ आप बैठे हो। ये
35:02
कितनी बड़ी बात है। जिंदगी है। लाइफ से बड़ा क्या सरप्राइज है?
35:09
आपको बोध है। आपको यह भी पता है कि मैं हूं। और क्या करना है?
35:18
बाहर की कुछ चीजें बनेंग बिखरेंग वह तो नियम है। उसका कुछ सोचने का ही नहीं है।
35:26
तो हमेशा प्रसन्न रहो। प्रसन्न आत्मा बस मुस्कुराते रहो, गाते रहो।
35:38
जिंदगी में ना अपन पूरी जिंदगी में जी भर नहीं पाते। मालूम सब कर लेते हैं, रिश्ते निभाते हैं,
35:49
पढ़ते हैं, लिखते हैं, 10 चीजें अचीव करते हैं। जी भर नहीं पाते।
35:58
और जिंदगी जीने के लिए मिली है ना यार। और बेहिसब जियो।
36:06
हां। पूरी दुनिया पूरा ब्रह्मांड
36:12
मेरा है ऐसा जियो क्योंकि आपका है। ये सितारे आपके लिए आते हैं। सूर्य आपके
36:22
लिए आता है। डेली टाइम पर आता है। आपको अधिकार है कि बे टाइम भी अपने घर से निकल सकते हो।
36:30
हां। किसी भी टाइम उठ सकते हो। कितनी स्वतंत्रता है सूर्य को वो स्वतंत्रता है।
36:39
बताओ सारे सितारों को स्वतंत्रता है। एट द टाइम हर सितारा वहीं रहता है।
36:47
फूलों को स्वतंत्रता है। चिड़ियाओं को। आपको क्या स्वतंत्रता दी गई है? क्यों?
36:54
क्योंकि आप परमात्मा हो। प्रसन्नता ही प्रसन्नता जीवन में रहनी
37:03
चाहिए यार। कितनी खुशियां हैं। कितनी फ्रीडम है आपको मालूम कि आप बंध भी सकते हो किसी से भी।
37:12
परमात्मा होके भी अपने ही शरीर से बन सकते हो। किसी और के प्यार में बंध सकते हो। यह
37:18
फ्रीडम है। कोई अज्ञानता नहीं है। क्योंकि आप किसी के भी प्यार में बंधे वह टूट गया ना। आज कहां है वह?
37:29
तो वह फ्रीडम ही तो था ना जिसको आप मोह समझ के दुखी हो रहे थे। मोह वो नहीं था वह सब
37:36
वो फ्रीडम था। दुखी होने का भी फ्रीडम।
37:42
कितनी फ्रीडम है यार आपको। हां।
37:53
और ज्यादा सोचनेचने का नहीं है कि कभी बुद्धत्व होगा और तब खुश होगे साले मरोगे उसमें सब
38:06
अरे प्रसन्न रहो बस मस्त रहो ये सब पीछे आता है तुम्हारे कचरा चीजें सब है ना
38:17
इफेक्ट पहले पैदा करो कॉज अपने आप आ जाएंगे। आप कॉज से चलते हो। कॉज आएगा। बहुत साधना करेंगे, ध्यान
38:25
करेंगे, बहुत गुरुओं से मिलेंगे, बहुत आशीर्वाद लेंगे। तब बुद्धत्व होगा। सीधा
38:32
इफेक्ट पैदा करो। है ना? इफेक्ट कैसे पैदा करोगे?
38:39
बताओ। तुरंत मस्त रहो, आनंद में रहो, प्रसन्न रहो। कुछ
38:46
चाहिए ही नहीं। बुद्धत्व मेरा स्वभाव है। ऐसा सोच के जीने लग जाओ। जान नहीं पा रहे
38:53
हो तो सोच के भी जीने लग जाओ। तो क्योंकि वह सच ही है। वो इफेक्ट
38:59
पहले ही पैदा कर दो। तो उसके जो कारण है ना उसके आजू-बाजू के वो अपने आप पैदा हो
39:06
जाएंगे। हां। इफेक्ट को पहले पैदा कर दो। कि वो
39:14
परमात्मा मैं ही हूं। वह अस्तित्व मैं हूं। वो बुद्ध मैं हूं। मस्त आनंद से जियो।
39:39
वो बड़ी-बड़ी बातें लाइफ में वो सब जो मेरे से भी सीखे हो सब फेंको सब माया के खाते में चले गया छोटा-छोटा
39:49
भी जिया करो फूलों के साथ पंछियों के साथ
39:56
सुबह और शाम के साथ आपको पता है कि आपके घर के ऊपर एक इतना बड़ा वर्ल्ड है जिसको आप कभी देखते भी नहीं हो। सितारों का,
40:08
पूरे आकाश का वो आपकी जिंदगी का इतना बड़ा हिस्सा है
40:15
जिसको आप यानी सुकून से बैठ के देखते भी नहीं हो यार। उसके साथ समय ही नहीं बिताते हो।
40:25
यह सारे सितारे आपके फैमिली मेंबर हैं। यह शाम,
40:32
यह प्रकृति तो आपके घर की चार दीवारी के बाहर ना बहुत
40:41
बड़ा यूनिवर्स है जो आपकी एक बहुत बड़ी फैमिली है।
40:47
नाचा करो इसके साथ। यानी यही सितारे 100 साल में एक दिन
40:57
निकलते तो उस रात भर आप नाचते मालूम लेकिन तुम बेवकूफ हो जो रोज निकल रहे हैं नाचते ही नहीं हो
41:06
यही सूरज 10 साल में एक बार निकलता तो सूरज को देखने के लिए तरस जाते और नाचते
41:13
आ क्या मॉर्निंग है क्या इवनिंग है और रोज यह हो रहा है
41:25
रोज हो रहा है करके कद्र नहीं है ना कंटिन्यूस है
41:38
ये यही मैं हूं कहीं और से मिलता आपको तो नाचते आप
41:49
इसमें यह है कि डिफरेंस ही नहीं है ना
41:58
और आप मैं हूं ही हो बताओ यानी यही मैं हूं आपको हजारों
42:06
करोड़ों जन्म के बाद एक क्षण को मिलता अपने होने का एहसास तो उस एक क्षण में तो
42:14
आप दिवाली मना लेते पूरी पृथ्वी में और यह कंटिन्यू है करके
42:21
आपको कद्र नहीं है। इसलिए प्रसन्न रहो यार। मस्त रहो।
42:29
ओके। हां। वादा करो कि प्रसन्न रहेंगे। मस्त रहेंगे। हां।
42:40
मस्त रहा करो। आत्मा परमात्मा वो सब पहले से हो आप। वह होना होना नहीं है। वह
42:54
मैं बोल गुरु जी हां बोलिए जी हां बस मैं यही कहने वाली थी कि वो तब तक
43:02
थे तो उसने मुझे कहा कि मुझे भी ये जब प्रभु से
43:10
ओके हो गया वो हो गया हो गया बहुत बढ़िया गुरु जी एक बात कहना प्रेम प्रभु का बर
43:18
रहा है ये अमृत प्यार बस वो दो लाइन मुझे कहनी थी
43:25
अच्छा गुनगुनाती हूं गुनगुनाती रहती हूं बस वैसे तो कुछ भी नहीं और मुझे
43:35
बहुत सुंदर यही तो एक गीत है आत्मा का आत्मा का गीत
43:42
है ये कि मैं से भिन्न कुछ भी नहीं बहुत सुंदर सुंदर है बहुत सुंदर ओके
43:51
प्रेम प्रणाम गुरु जी प्रणाम हो गया आज का काम खत्म हम चले
44:04
हे राम हां जी
44:18
प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम
44:24
प्रभु जैसे अभी आपने बता आनंद है
44:34
कि जब तक हमें इसका अनुभव नहीं है हम मतलब जब तक पता नहीं है कि मैं जो है
44:43
हम हम जब तक हमें भय रह जाए तब तक तो हम को आनंद कैसे
44:50
सही बात है हम
45:00
तो ठीक है ना जीवन में आनंद है कि नहीं अभी आप हो वह आनंद है कि नहीं
45:09
है ना तो इसी क्षण आनंद में जियो ना जब मृत्यु आएगी तो उसको देखेंगे
45:16
कि आप अमर हो कि नहीं हो तो वह तो उसी समय पता चलेगा ना
45:24
इसमें देखो सुकरात बहुत सही बोलता था इस लाइन को हमेशा याद रखना सुकरात कहता था
45:33
कि दो ही बातें हो सकती हैं या तो आत्मा अमर है मेरा तेरा होना मैं
45:41
अमर है। है ना? तो देह मरेगा मैं तो मरूंगा ही नहीं। इसलिए निश्चिंत रहो।
45:49
बेफिक्र रहो। ठीक है? दूसरी बात सुकरात बोलता था अगर आत्मा अमर नहीं है, मेरा
45:56
होना अमर नहीं है तो सब कुछ मर जाएगा। चिंता करने वाला भी मर जाएगा।
46:04
इसलिए मस्त रहो। तो हर हालत में मस्त रहो यार। ठीक है?
46:14
और दो ही बात हो सकती है ना और क्या होगा?
46:22
बस मस्त रहा करो। अपने दुख मत खोजा करो सवालों में। ठीक है? हां।
46:41
हम हम
46:52
अपनी अमरता का बोध स्वयं
47:01
की अमर ता का बोध कैसे होगा बताओ
47:13
स्वयं की अमरता का बोध स्वयं को है ही
47:19
आप बॉडी को अमर करना चाहते हो वह तकलीफ है
47:26
बॉडी कैसे अमर हो जाएगी भाई और स्वयं मर कैसे जाएगा भाई
47:34
यह दोनों बातें नहीं हो सकती इसलिए मस्त रहो। ठीक है?
47:41
हां जी। एनीबडी?
47:53
पानी पिलाओ यार। अरे नहीं आप लोग बार-बार आ जाते हो सब। ये
48:01
क्यों लाता है इन लोग को बार-बार पुराने-पुरानों को सबको हटा जब देखो वही वही फसेस बिल्कुल हटाओ इन लोग
48:10
को सबको हां नए लोगों को चाहिए वही वही ये लोग
48:17
गुनगुनाते रहते हैं बड़बड़ाते रहते हैं प्रभु आनंद है सब अच्छा है बहुत बढ़िया है अरे अच्छा है तो सेलिब्रेट करो ना यार
48:25
दूसरे लोग भी हैं यहां लगा है क्या जो अपना आनंद को बार-बार
48:36
दिखा रहे हो हम बहुत मजे में हैं मस्त हैं आपके उस शरण में वो हैं ये है हो गया वो
48:42
पुराना माया खाते में चले गया वो
48:49
कहीं का नहीं छोड़ता ना मैं
48:58
क्या करूं साला रोल ही ऐसा मिला मेरे को
49:14
बस प्रसन्न रहा करो मस्त एक-एक मोमेंट सेलिब्रेट करो शांति से आनंद से
49:23
बहुत ब्यूटीफुल यार सब कुछ यानी पूरे अस्तित्व में देखो कितनी
49:33
सुंदरता है। हर एक चीज अद्वितीय है। मनुष्य को देखो, वृक्षों को देखो, सितारों
49:40
को देखो, पंछियों को, तितलियों को कितनी सुंदरता है। और इन सुंदरता का यानी इस सुंदरता का
49:50
अनुभव करने वाला मैं कितना सुंदर होगा सोचो
50:02
सुंदरता का अनुभव करने वाला कितना सुंदर होगा
50:16
और वो आप सहज में हो बताया ना यही मैं आपको दिया जाता
50:25
सैकड़ों साल में एक घंटे के लिए आपका होना अगर आपको दिया जाता
50:32
हालांकि ऐसा हो नहीं सकता बट एक एग्जांपल है तो एक घंटे अपने होने के लिए आप कई बार
50:40
सैकड़ों साल जी लेते है ना कि ये चाहिए ही चाहिए इससे इससे कीमती कुछ
50:49
नहीं है और वो सहज में है करके कद्र नहीं
50:56
समझ रहे अरे ब्रह्मा विष्णु महेश को भी बोलो ना हम
51:06
आपका आपका होना छोड़ दो बाकी आप ब्रह्मा विष्णु के महेश के पद में रहो बोलेंगे नहीं चाहिए भैया ये पद
51:14
हमारा होना चाहिए हमको उससे कीमती कुछ होता ही नहीं हां पूछ लो कभी मिले तो पूछ लेना अच्छा
51:22
छोड़ छोड़ो प्राइम मिनिस्टर से पूछ लेना जाके किसी से भी पूछ लेना जिससे आप मिल सकते हो
51:31
जो आपको बहुत विराट और बड़े लगते हैं उनसे जाकर पूछो तो वो यही बात बोलेंगे अपना
51:37
होना मैं कैसे दे दूं नॉनसेंस बात है मैं अपना पद दे सकता हूं अपना होना नहीं
51:45
दे सकता किसी भी कीमत और वह चीज आपको सहज में उपलब्ध है करके कदर
51:53
कदर करो मेरे भाई और मस्त रहो मेरे भाई। हां। हां जी।
52:09
हां। राम राम स्वामी जी।
52:20
राम राम जी हां जी मैं ऐसे बचपन से लिखती हूं 13 साल
52:28
की उम्र से हम और पहली कविताएं जो लिखी थी वो मैं लिखती हूं ओके
52:35
तो मैंने जब मम्मी को मदद को सुनाई तो उन्होंने इतने सब गले लिख के लगा लिया और बहुत
52:44
मेरे को कुछ नहीं मालूम कि कैसे लिखा हम हम और उसके उसके बाद काफी लिखा है एक प्रकार
52:51
की डायरी में ही लिखती हूं। अच्छा बस यही थी कि इसके प्रति बात करने वाला
53:00
कोई मिलता नहीं था। सुनने को मिलती नहीं थी। मतलब आपके सत्संग में दो साल पहले तो
53:07
मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं शायद यही तो सुनती थी। हम बहुत
53:17
तो आपको आपको एक हकीकत बताऊं मैं हर कोई यही सुने सुनने के लिए जिंदा है। भले
53:24
लोगों को अभी पता हो ना हो धीरे-धीरे समझ डेवलप होगी लेकिन आप यही सुनने के लिए
53:31
जिंदा हो हर कोई हां और पहले तो ऐसे लगता था
53:40
हां नहीं और कविताएं तो सुंदर होती ही है कवि हृदय होना ही चाहिए है ना अच्छा पता
53:48
नहीं अंदर से अपने आप ही अंदर से कुछ आता है। कई बार तो बहुत पहले रात को सोई होती थी। ऐसा लगता था कोई हिला के उखा रहा है
53:56
और मैं मोबाइल पे लिखना शुरू करती। मतलब मेरे को लगता है कि मैंने कुछ लिखा ही नहीं। लिखवाना था उसने लिखा।
54:04
हां। इसीलिए मैंने कभी भी नहीं कि मैं अपना नाम कैसे लिखा ही नहीं।
54:12
तो तो इसमें ना वह आप जो कह रही हैं वह सही है। बल्कि
54:20
मेरे को कभी भी मैं में इंटरेस्ट ही नहीं था। कई साल तक मेरे को मैं यानी बेकार चीज लगती थी। कोई
54:29
ईगो है या कुछ गलत चीज है। ऐसा सेंस था मेरा। कई लोग का
54:36
आज धरती में यह सेंस है। मालूम। ऐसा मेरा भी सेंस था। तो वह मैं बॉडी वाला जो मैं है ना ईगो
54:44
वाला उसी को मैं समझता था। तो मेरे को भी नहीं पता था कि मैं यह चीज है
54:53
और मैं बस वो तू ही है और भक्ति और वो डूब रहे हैं। उस टाइप की कैटेगरी का ही था मैं
55:02
ज्यादातर। हां, मेरी रिसर्च चलती रहती थी। मैं हूं थोड़ा बहुत बुद्धि से बाद में समझ
55:09
आया लेकिन मजा नहीं आया मेरे को रस नहीं आया लेकिन जब मेरे को कद्र हुई फर्स्ट टाइम
55:19
कि यार वो कहानी सुना ना मैं कि वो सुकरात
55:29
किसकी थी यार वो कि मैं तुमको एक गिलास जल दूंगा तुम अपना पूरा राज्य दे दो वाली कौन
55:37
आया था इंडिया लूटने एलेक्जेंडर है ना
55:45
तो बोला कि भाई मैं उस एक जल के लिए अपना पूरा साम्राज्य दे दूंगा जो भी आज तक जीता
55:52
हूं एक गिलास जल के लिए क्योंकि प्राण का मामला है मर जाऊंगा नहीं तो तो वो पॉइंट
55:58
भी मेरे को रेस हुआ उस समय कि जब प्राण की इतनी वैल्यू है जल की इतनी वैल्यू है तो मैं की कितनी वैल्यू होगी?
56:12
सारी चीजें तो मैं के लिए है ना। अरे जिंदगी में आप जो आनंद चाहते हो किसको मिले?
56:22
स्वयं को मिले यही चाहते हो ना? प्रेम,
56:25
आनंद, परमात्मा, रस, ज्ञान केंद्र तो आप हो ना?
56:32
तो धीरे-धीरे मेरे को फिर मैं की कद्र हुई। अपनी रिसर्च करते करते महर्षि मुक्त को पढ़ता था मैं तो बुद्धि
56:41
से समझता था। बहुत 15 साल बाद तो उनकी लाइन मेरे अंदर उतरी
56:49
क्योंकि वो बहुत वैदिक स्टाइल से बोलते थे तो मेरे पल्ले नहीं पड़ता था। मेरी गलती है वो।
56:57
बट जब उतरा तो उतर गया। एकदम से और अद्भुत है। यह मैं का सेंस कम एज में आ
57:07
जाना बहुत अद्भुत है। बहुत सुंदर है। कभी भी पिछले साल
57:17
ना ना ना ना वो नहीं और पास्ट में मत जियो। अब हो गया जो कविता
57:24
वविता लिखे हजारों लिखे वो गया माया के खाते में चले गया वो। ठीक है? अब तो अब तो
57:31
आपके सत्संग आता है और विचार बस अपना आप में जियो बस स्वयं में है ना
57:40
और जो भी कविताएं आपने लिखी वो भी सुंदर है बट अब वो नहीं वो गया माया के खाते में ठीक है
57:48
यहां तो हमारे सारे प्रवचन चले गए भाई माया खाते में
57:57
अब और क्या बताएं हम अति विचित्र रघुपति की माया
58:07
अति विचित्र है। अरे नजर हटी दुर्घटना घटी। हां। अरे भैया
58:16
भगवान ही माया बने हैं ना तो सोचो कैसे होंगे।
58:22
भगवान ही जब माया बनते हैं ना तो मत पूछो।
58:28
छोटा मोटा नहीं समझना माया को कभी भी भगवान समझ के ही प्रणाम करना तभी वह
58:35
प्रसन्न होती है वहां कभी भी ताव मत मारना
58:45
है ना बहुत प्रेम से एक रिस्पेक्ट से जैसे परमात्मा ही है मैं
58:54
भले समझ ना पा रहा हूं मेरी जिंदगी में क्या हो रहा है बट है परमात्मा ही ऐसा रिस्पेक्ट
59:02
एक तरीका होता है तब वह प्रसन्न होती है पलट जाती है फिर वो परमात्मा मैं आत्मा
59:09
भगवान ओके प्रेम प्रणाम
59:25
हां जी
1:00:03
तू कैसे खामोश बैठा है बता कुछ बात हुई हम
1:00:13
अरे कुछ भी बता दिया कर ऐसे ही यार कोई विशेष तो कुछ है नहीं अब
1:00:22
तो सामान्य है सब कुछ स्पेशल कुछ है ही नहीं ना
1:00:29
हां टेलीवि भी करना कंटिन्यू ऐसे कोई प्रोसेस
1:00:38
नहीं है। कोई प्रोसेस नहीं है। टेली किससे करोगे?
1:00:41
अब है ही नहीं कुछ तो टेली भी किससे करोगे? ऐसा हो गया ना। हां वो करना भी क्यों है? वो जीव टेलीवली करते रहता है।
1:00:51
जीव ही कहता है मैं को मैं जान। उसको कुछ भी मत मान। मैं थोड़ी ना कहेगा
1:00:58
कि मैं को मैं जान। मैं तो मैं हूं ही ना साला। क्या जानूंगा मैं अपने को?
1:01:05
उसको कुछ मत मान। यह सब जीव बोलता है यार। हां। और मैं को मैं जानकर मैं में संतुष्ट
1:01:13
हो जा। अरे यार ये सब जीव है। मैं क्यों बोलूंगा? मैं को मैं जान मैं तो
1:01:21
मैं ही हूं ना यार। उसको जानना मानना क्या है? और जानता ही हूं।
1:01:29
और जानता ही हूं यह भी वहां शद्र लगता है। मैं का विराटता अलग ही है।
1:01:43
तो मैं को मैं मत जान यार तू मैं ही है। जानना वनना कुछ नहीं है। क्या जानोगे मैं को मैं?
1:01:55
मैं मैं बकरी जैसे करते रहोगे क्या?
1:02:02
खाया पिया करो। खातेवाते नहीं हो क्या?
1:02:06
बढ़िया खाया पिया करो। मस्त रहा करो। और आखरी में एक मीठा होना चाहिए। जिंदगी
1:02:13
रंगीन है। क्या लगा दियो।
1:02:24
जिसको जानना है वह आपको जानेगा। आपको किसी को नहीं जानना है।
1:02:35
जिसको जानना है वो आपको जानेगा ना यार। आपको जाने वो आपको किसी को नहीं जानना है। ना आपको कुछ देखना देखना है। यह देखें वो
1:02:43
देखो। जिसको देखना है वह आपको देखेगा। मस्त रहा करो।
1:03:29
देखो रोमांटिक लाइट चालू हो गई अब है ना
1:03:40
अरे खाते पीते कहीं सत्संग सुने हो किसी का ऐसा होता है सत्संग चाय कॉफी खाना पीना
1:03:48
मस्त ओ ऐसा सीरियस और हाथ को ऐसे उठा रहे हैं
1:03:55
ऐसे क्या है कोई सत्संग होता है
1:04:03
स्लो मोशन
1:04:13
सत्संग जीवंत होना चाहिए। नेचुरल सहज हां वो आपका आपकी लाइफ है ना वो वो कोई
1:04:22
मेकअप नहीं है कि आप अच्छे ड्रेसव पहन के आओगे। कुछ एकदम पहनोगे ऊपर नीचे ऐसा वैसा
1:04:29
वो धोखा है। उसमें आपको लोग भी मिलेंगे तो वह धोखे वाले ही मिलेंगे। क्योंकि वह वही देख रहे हैं ना।
1:04:37
उनका इंटरेस्ट आपके कपड़े में, आपकी दाढ़ी में और पीछे का सेटअप कैसा है और और भीड़ कितनी है तो वो भीड़ देख के आए भीड़ देख
1:04:46
के चले जाएंगे। सेटअप देख के आया सेटअप देख के चले जाएंगे। सत्य वाला तो
1:04:54
सत्य ही देखता है। वो विरले होते हैं कोई कोई।
1:05:08
हम हम
1:05:22
तो फर्स्ट फर्स्ट वीडियो बनती थी तो मेरे को क्या बोलते थे जो आसपास के लोग रहते थे आप ना कम से कम एक शर्ट वाइट वाली पहन के
1:05:32
आया करो और ऊपर का बटन भी लगा होना चाहिए
1:05:39
और नीचे का चलेगा क्योंकि वो आता नहीं है रिकॉर्डिंग में ऐसा मेरे को बोले
1:05:46
बाल वाल थोड़ा सा सेट रहे बोला ऐसे तो मैं आ जाऊंगा जरूर लेकिन मैं सत्संग नहीं करा पाऊंगा भाई
1:05:59
वो साला ऐसा शर्ट के बटन यहां लगे यह लगा है ऐसा घुटन हो रही है। साला मैं कैसे
1:06:06
सत्संग करूंगा? मैं ही नेचुरल नहीं हूं। और ट्रिम व्रिम दाढ़ी कभी कबभार ठीक है
1:06:13
यार बट ऐसा अच्छा नहीं लगता। नेचुरल होना चाहिए। थोड़ा कटिंग शटिंग कर लो बस मस्त।
1:06:21
इसका आनंद है यार। मैं बोला इसमें जो सुन लिया वह सुन लेगा
1:06:32
मेरे को सुन लिए भाई इतने सारे लोग और क्या चीज ये लोग देखे ही नहीं है बाहरी चीजें
1:06:42
इसलिए सॉलिड लोग ही आते हैं मेरे पास भूले भट्ट के कोई आता है बदमाश टाइप का तो
1:06:50
खुद ही भाग जाता है
1:06:59
वो गुरु बन जाता है।
1:07:17
हां जी।
1:07:30
तो एक बार बचपन में क्या हुआ था मालूम एक वो चंदन का ऑइल आता है ना तो मैं हल्का सा
1:07:39
ऐसे उठाया थोड़ी सूख गई था पूरा सूख गया था मेरे को थोड़ा सो तो मैं ऐसे लगाया तो हल्का हल्का
1:07:47
ना ऐसे आंख में लग गया तो मेरी आंख एकदम चमकने लग गई।
1:07:54
तो मेरे फ्रेंड लोग क्या बोले? अरे तेरे को आज ध्यान लगा था क्या करके?
1:08:01
अरे पागल चंदन लगा है। ध्यान नहीं लगा है।
1:08:10
तो उसका हल्का सा ऑइल चले जाएगा ना। आंखें एकदम ऐसे चमकने लग जाती है मालूम। तो इस
1:08:16
टाइप का होता है मार्केट में।
1:08:25
गजब जिंदगी है यार।
1:08:57
हां जी। अरे बताओ कुछ यार। ऐसा थोड़ा फ्री बात किया करो। खाली आत्मा
1:09:08
परमात्मा साला पागल हो जाओगे। आत्मा परमात्मा ये वो प्रेम भक्ति ज्ञान साला
1:09:15
दिमाग खराब हो गया सबका। बड़ा जिंदगी की भी बात करो ना यार। जिंदगी क्या कम
1:09:21
परमात्मा है। हां। खाली मैं हूं। मैं हूं। साला दिमाग खराब
1:09:30
हो गया सबका। सब गया माया के खाते में भूल जाओ वह सब जो
1:09:36
भी सुने हो आज से पहले हां जी
1:09:48
हम तू कुछ बोल रहा था यार मैं रोक दिया तेरे को उस समय पता नहीं कुछ ऐसा सेंस आ गया बता
1:09:55
ये जिंदगी के ऊपर आप एक बार पता मृत्यु के एग्जैक्ट बाप भी जिंदगी के
1:10:03
हां यानी जिंदगी के सारे रहस्य
1:10:09
मौत के पास में रहते हैं। मतलब मृत्यु जब पास से गुजरती है ना तब जो
1:10:17
जिंदगी का एहसास होता है। आपसे गुजर गई तो एहसास नहीं होगा। आपके पास से गुजरी तो
1:10:27
तब जो जिंदगी का एहसास होता है वह अलग ही है।
1:10:35
इसलिए प्रतिपल मरने को तैयार रहा करो। प्रतिपल जीने लगोगे।
1:10:45
रेडी टू डाई ना यस। और प्रतिपल जीने लगोगे।
1:10:56
ऐसे ही ऐसे ही सेम माया के करीब में
1:11:04
जैसे मृत्यु के करीब में जीवन एकदम प्रगाढ़ होता है ना ऐसे माया के
1:11:13
करीब में बस माया में नहीं एकदम करीब में
1:11:20
वो मैं आत्मा भगवान एकदम प्रगाढ़ होता एकदम प्रगाड़
1:11:32
जब यानी बिल्कुल जिंदगी का दुनिया में सब छितर बितर है। सारी परिस्थितियां इधरउधर है। जिंदगी में
1:11:40
पता नहीं क्या होगा अगला क्षण। माया घेरी हुई है। फैमिली, दुनिया, पड़ोसी
1:11:50
और बस उसी के पास में अगर आप अवेयर हो गए थोड़ा भी सजग हुए तो वहां जो भगवान के
1:11:58
दर्शन होंगे मैं आत्मा भगवान के वो कहीं नहीं होते।
1:12:10
जितनी काली रात उतना ही सूर्य निकट होता है। याद रखना
1:12:25
कह रहे फिर भगवान माया शुरू हो गया यार और कुछ बताओ
1:12:37
ये माया का खाता ना बहुत बढ़ते जा रहा है मालूम भयंकर
1:13:05
तो माया के खाते में कब नहीं जाता बताओ?
1:13:10
चाहे पुराना हो, चाहे अभी का हो। जब आपका लक्ष्य केवल मैं आत्मा भगवान है
1:13:20
तो पुराना भी सुनोगे तो माया के खाते में जाएगा ही नहीं यह मेरा वचन है बसशर्त है
1:13:28
आपका लक्ष्य केवल एक होना चाहिए मैं आत्मा भगवान मैं देह मन नहीं
1:13:37
फिर मेरा सुनो किसी का भी सुनो पंछियों को सुन लो
1:13:43
तो भी आपको वही ले जाएगा। वह मैं आत्मा भगवान
1:13:54
लक्ष्य इंपॉर्टेंट है। एकदम
1:14:17
तो आप क्या करते हो? यह मैं आत्मा भगवान ये जो वर्ड्स है ना ये इतने परफेक्ट है ये
1:14:25
सुनने में बस थोड़ा सा ऐसा लगता है लेकिन इसमें बहुत गहरे गहरे राज है।
1:14:34
मतलब जैसे कृष्ण कहते हैं गीता में कि आत्मा पुनः अग्नि जला सकती है।
1:14:42
ना शस्त्र काट सकता है आत्मा को उसी को मैं आत्मा करूं तो
1:14:50
मैं आत्मा को मुझ आत्मा को तुरंत वो सेंस आ जाएगा फीलिंग आ जाएगी
1:14:58
ना अग्नि जला सकती है ना शस्त्र काट सकता है
1:15:07
तो मैं आत्मा और भगवान भी ये इतना परफेक्ट कॉमबी है ना यह बार-बार जो मैं बोलता हूं
1:15:14
बहुत परफेक्ट है वो
1:15:30
क्योंकि मैं को हमेशा हम देह समझते हैं इसलिए आत्मा मैं को हमेशा हम जीव समझते हैं इसलिए भगवान
1:15:37
मैं आत्मा भगवान धोखा होगा ही नहीं।
1:16:10
हां जी
1:16:34
हम आवाज कम आ रही है आपकी
1:16:45
हम प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम जी बताइए
1:16:53
मेरा प्रश्न था कि जब हम कोशिश करते हैं या कोशिश करते हैं सामना
1:17:02
करते हैं तो मेरे दो एक्सपीरियंस होते हैं उसमें थोड़ा सा
1:17:09
हां श में बताइए तो एक तो होता है कि जो मैं अनंत स्वरूप
1:17:16
मुझे होता है अनंत का अंदर से वो अपने आप हम्म
1:17:24
दूसरा उसका भी मुझे लगता है उसका भी सब
1:17:32
और इसको इंक्लूड करते हुए सब जगह
1:17:38
तो इन दोनों में क्या होता है कि जो सब जगह है वो कभी-कभी वो तो हमेशा रहता है।
1:17:46
देखो देखो आप जहां से बोल रहे हो ना वो बुद्धि का तल है।
1:17:52
है ना आप बौद्धिक बोल रहे हो अभी आप सुनो मेरे को तो यह सारे आपके कांसेप्ट क्लियर हो
1:18:00
जाएंगे सारी अनुभूतियां हो जाएंगी या जो भी आप चाहते हो बेस्ट ऑफ द बेस्ट
1:18:08
वो हो ही जाएगा थोड़ा धैर्य से सुनो मेरे को आपने सुना ही नहीं है मेरे को केवल ऊपर
1:18:16
ऊपर सुने थोड़ा सुन लिए ऐसा नहीं होता वो तो मैं पहचान लेता हूं ना मेरे को
1:18:23
सुनने वाला की वॉइस ही अलग हो जाती है। थोड़ा सुनो अभी तो वो आपके लिए बेहतर होगा
1:18:33
और वो अमृत है। जो भी डला है ना अभी चैनल्स में वो अमृत है। एकदम हां और कई
1:18:41
बार यह होता है कि अमृत का पता नहीं रहता कि ये अमृत है। और देवता लोग पी लेते हैं सब और चले जाते
1:18:51
हैं। होता है यहां पर भी होता है। मंथन हुआ समुद्र मंथन
1:18:59
तो देवता देवता लोग जो एकदम हाई क्वालिटी के हैं सतोगुणी
1:19:05
शुद्ध हृदय वो पी के चले जाते हैं। कई बार पता ही नहीं होता कि अमृत अवेलेबल
1:19:14
है एकदम रेडी। तो थोड़ा सुनो अभी। ठीक है। अच्छा
1:19:28
तो ठीक है। अब इतना विश्राम देते हैं वाणी को
1:19:35
और किसी को कुछ कहना है तो कह लो भाई। हां प्रणाम जी
1:19:56
वॉइस आ रही क्या आवाज नहीं आ रही प्रॉपर आपकी
1:20:03
आपने बोला था पूरा ब्रह्मांड अपना है हम है
1:20:12
हम
1:20:24
हां बस वही बात है कि पूरा ब्रह्मांड अपना है या कुछ भी अपना नहीं है। हम लोग क्या है 50-50 में जीते हैं। ये मेरा है ये
1:20:33
तेरा है। है ना? थोड़ा मेरा है थोड़ा तेरा है। अरे या तो सब कुछ अपना है या कुछ भी मेरा नहीं
1:20:42
है। लेकिन मैं
1:20:52
हां मैं मैं तो फिर मेरा तेरा बात ही खत्म है वो सही है। वो बेस्ट है।
1:21:07
हो मींस मैं बेस्ट हूं। है ना?
1:21:21
सबको बेस्ट होने की चाह होती है। सुप्रीम होने की चाह होती है। क्यों होती है?
1:21:29
क्योंकि वह है। वह अपने देह मन को देखता है ना तो उसको लगता है यार मैं कैसे सुप्रीम अभी समय है
1:21:37
कुछ होगा। बॉडी के तल पर वो सुप्रीम होना चाहता है। फिर करके धोखा हो जाता है।
1:21:51
तो चलो अब वाणी को विश्राम देते हैं। मस्त रहो, आनंद में रहो, प्रसन्न रहो। ठीक है?
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और सदा मुस्कुराते रहो, गाते रहो। प्रेम प्रणाम
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सभी को प्रेम प्रणाम। हां जी।
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आज मैं देख रहा हूं अस्तित्व खिलखिला रहा है। हां जी। हो रही है।
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होनी ही है। प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम जी प्रेम प्रणाम
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बहुत अच्छा कई लोगों को मैंने मैसेज किया था
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जिनके पास मेरे कांटेक्ट नंबर हैं कि यह मेरा नंबर मेरे घर में रहता है और इस पर
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फोन या मैसेज ना करें कॉल ना करें वह नंबर मेरे पास ही रहता है। जिसको भी फोन मैसेज
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कॉल करना है कर सकते हैं। ठीक है? प्रेम प्रणाम ओके
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यस