Prabhu Shree
0:20
तो मैं जब यह पढ़ा कि हनुमान जी ने अपना
0:30
सारा पुण्य दे दिया और फिर वह ज्ञान गुण सागर कहलाए।
0:49
फिर कभी स्टोरी पढ़ता था गौतम बुद्धा की कि वह निर्वाण के द्वार पर खड़े ही हैं।
0:57
अंदर जा ही नहीं रहे हैं कि जब तक पृथ्वी का हर शख्स
1:06
एंट्री ना कर जाए तब तक मैं नहीं जाऊंगा। ऐसा उनका भाव, प्रेम, करुणा थी।
1:22
तो यह करुणा यह भाव
1:30
यह बहुत भाता था मेरे को यह प्रेम
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ऐसे भाव होने ही चाहिए हमेशा होने चाहिए।
2:07
हालांकि दूसरा कोई है नहीं। अदरनेस नहीं है। फिर भी
2:14
भावातीत होके भी यह भाव किए जाते हैं। यह रस है। यह आनंद है। है ना?
2:42
क्योंकि यह करुणा बहुत इंपॉर्टेंट है आपके जीवन में।
2:51
खाली ज्ञान ही ज्ञान सीख गए जान गए वो ठीक है वह
3:01
बट प्रेम करुणा आपके जीवन में रहनी चाहिए
3:15
नहीं तो
3:23
चाहिए ऐसे लोगों का बहुत ज्यादा
3:32
बहुत से बहुत
3:45
ना सुनो ज्योति जी सुनो
3:55
वो सुंदर है। ओशो एक बात कहते थे कि जो तुम दे देते हो
4:06
वह तुम्हारा हो जाता है।
4:15
जो भी तुम दे देते हो वह हमेशा के लिए तुम्हारा हो जाता है।
4:27
इस बात में बहुत रहस्य है।
4:42
अब देखो देने योग्य जो सर्वोत्तम है वो ज्ञान है प्रेम है करुणा है सर्वोत्तम
4:53
हां देने की लैंग्वेज में
5:15
ठीक है थोड़ा लुट जाते हो थोड़ा अच्छा ही है वो
5:54
तो हमेशा प्रेम पूर्ण रहो, करुणा पूर्ण रहो और लक्ष्यमय आत्मा भगवान
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ये रहना ही चाहिए।
6:16
क्योंकि बहुत करुणावान ही आत्मनष्ठिक हो सकता है। बहुत दयावान
6:24
ही आत्मनष्टिक हो सकता है।
6:30
हर किसी के बस की बात नहीं है।
7:02
मेरे मेरे लाइफ में भी ना बहुत मैं कुछ खास किया नहीं कुछ नहीं किया
7:11
कोई खास साधना या कुछ ऐसा पुराना ट्रैक नहीं है मेरा कुछ
7:19
हां मेरे लाइफ में प्रेम बहुत रहा बचपन से
7:25
बहुत प्रेम रहा इस अस्तित्व से
7:30
इवन हर किसी से प्रेम बहता ही है।
8:08
अब प्रेम का पुजारी और क्या करेगा?
8:17
बहुत विशाल हृदय वाला ही आत्मनस्टिक होता है। याद रखना
8:25
हर किसी के बस की बात नहीं है। लोग टेक्निकल समझ लेते हैं चीजों को। उनको
8:35
लगता है हम पहुंच गए, जान गए। बौद्धिक है यह सब।
8:59
जानने वाला तो अब जैसे हनुमान जी है ना बस वैसे प्रभु
9:10
ऐसा बोलते हैं और आंखों में आंसू झरझर झरझर बहने लगते
9:16
वो रस वो आनंद
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बस प्रभु बोलते ही वो पूरा मेल्ट आगे क्या बोलोगे?
9:46
कुछ बताने को नहीं रहता।
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आत्मनिष्ठा बहुत दुर्लभ है। बहुत विशाल हृदय चाहिए उसके लिए। शुद्ध
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हृदय, विशाल हृदय।
11:24
मैं स्कूल में था सिक्स्थ क्लास या सेवंथ क्लास में तो
11:35
तो मैं सबको ऐसा कहता रहता था कि मैं भगवान हूं, मैं भगवान हूं। ऐसा मेरे को
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कुछ धुन समा गई थी। यह बात भी मेरे को दो-तीन दिन पहले याद
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आई। यानी फ्रेंड सर्कल में और
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आसपास के लोगों में तो
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अब मैं छोटा था सब सब मेरे को एकदम वो समझे कि ये
12:13
इसका दिमाग खसक गया है या यह विक्षिप्त हो गया है।
12:19
उस दृष्टि से देखने लगे और कई लोग बोले भी ऐसा मत बोल और क्या बकवास
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कर रहा है तू तो मेरे को भी फिर लगने लगा कि मैं बकवास कर रहा हूं।
12:40
सब बोलने लगे ना तो मेरे को भी लगने लगा कि हां यार मैं बकवास कर रहा हूं। मैं भटक
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गया हूं या कुछ भी कुछ बोल रहा हूं।
12:54
फिर वह छोड़ दिया मैं है ना
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उसी समय की घटनाएं थी सूक्ष्म शरीर का बाहर निकलना फिर ओशो की भूख का मिलना मरो
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है जोगी मरो फिर ओशो के साथ एक जर्नी शुरू हुई
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बहुत सुंदर बहुत अद्भुत बहुत प्यार से उन्होंने पाला
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सारी चिंताएं हटाई नाचना सिखाया हंसना सिखाया गाना सिखाया
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साइलेंस भी अवेयरनेस भी मैं बहुत प्रैक्टिस करता था
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बस एक प्रेम हो गया मास्टर से ना। अब
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अब वो भी वो बोल रहे हैं यू आर बुद्धा यू आर वाचर। ऐसा वो बीच-बीच में बोलते
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हैं। वो लाइनें बड़ी अच्छी लगती। बट इतने किस्से कहानियों के बीच में वह
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लाइनें हट जाती।
14:25
और नए-नए संतों के बारे में सुनना उनसे पूरा वो भी एक अच्छा लगता है। एक जर्नी
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उनकी फिर पूरा एक विराट उनका जंगल है। अष्टावक्र
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महागीता कृष्ण गीता जैन पे लाउसे पे
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मीरा पे बार-बार बार-बार सुन सुन के सुन सुन के
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तब भी मैं कुछ चूक ही रहा था।
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होशों के कारण नहीं मेरी दृष्टि के कारण
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मैं कुछ चूक रहा था। मेरी वासनाएं नहीं गई थी। कामनाएं पूर्णत समाप्त नहीं हुई थी।
15:34
ऐसा अंतर्यामी मेरे को बताता था। मैं सजग हो जाता था। बहुत सारे भ्रम होते थे।
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मैं इनके पास भी जाता था। ज्ञान अवीर भाव जी के पास भी शुरू में बहुत जाता था। वहां पे भी
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बहुत सारे ध्यान फिर ये फिर तू पहुंच गया है। फिर तू भटक गया है। सैकड़ों बार चला
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ऐसे तू पहुंच गया है। तू इनलाइटेंड हो गया है। तू भटक गया है। ऐसे कई बार चला।
16:12
एक कंफ्यूजन ही पैदा कर देते थे। वो
16:22
कई बार मैं मैं हूं मैं आ जाता था। तब भी वह वहां से हटा देते थे।
16:30
नहीं साक्षी में रहो, दृष्टा में रहो। मैं राइट जगह आ जाता था। एकदम मेरे को वो
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फीलिंग आने लगती एक सिग्नल आने लगता था। वो वहां से हटा देते थे कि तू राइट जगह नहीं है।
16:51
तो फिर बड़ा दुविधा हो जाती थी मेरे को। अब करें तो करें क्या?
17:04
फिर महर्षि मुक्त मिले और डायरेक्ट मैं हूं पर चला
17:12
स्ट्रेट अंतर्यामी वहां से हटा दिया फिर मेरे को
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ज्ञान अविर्भाव जी के यहां से प्रणाम है उनको भी बहुत कुछ सीखने को मिला
17:28
बट मास्टर कैटेगरी नहीं है मास्टर कैटेगरी ओशो है
17:37
और महर्षि मुक्त है। वो डायरेक्ट मैं हूं स्ट्रेट
17:47
बट उसमें भी मेरे को 15 साल लगे। 15 इयर्स
17:55
मैं हूं में जब तक रस आए आत्मनिष्ठा तो और आगे
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वह बहुत पढ़ा उनको भी फिर कुछ रिसर्च करता था हर छ महीने में
18:13
पढ़ता था उनको बहुत देर देर तक बट कैलकुलेटिंग समझ आ जाता था कि यह मैं हूं
18:21
सब मेरे अलावा कुछ नहीं है ऐसा वैसा बट वह टेस्ट ही नहीं आता था
18:33
ब्रेन से मैं इतना करेक्ट हो गया था कि मैं बड़े-बड़े लेक्चर दे सकता था। इतना
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करेक्ट बट मेरे को टेस्ट आता ही नहीं था।
18:51
15 साल बाद मैं हूं का मेरे को टेस्ट आया। सोचो
18:58
आत्मनिष्ठा नहीं हुई वह वह जस्ट शुरुआत
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15 साल इस बीच बहुत रोया नाचा गाया साइलेंट
19:20
बस जिंदगी निकल रही है। मैं बिजनेस भी बहुत
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करता था। मेरे को फैमिली को भी देखना पड़ता था। मेरे लिए टफ था वो। मैं घर में सबसे छोटा और सब जगह का प्रेशर
19:38
भी रहता था। मैं करता था। बहुत अच्छे से काम करता था।
19:47
लेकिन मेरा ध्यान इसी में लगा रहता था।
20:03
सौरभ जी को बुलाओ इधर खोलो हम ये पिलाओ ना यार
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बट पूरी जिंदगी देने के बाद
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पता नहीं वह बात बनी ही नहीं जिसको मैं आत्मनिष्ठा कहता हूं
20:30
वो हुआ ही नहीं हां बहुत सारे अनुभव हुए आनंद आया यह हुआ वो हुआ
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बट जो होना चाहिए था वह नहीं हुआ
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और इतना भटका हूं ना मैं आप सोच नहीं सकते।
21:35
महर्षि मुक्त से जो राहत मिली मेरे को 15 इयर्स के बाद जो सुकून और रस बस आया
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मैं हूं वाले पॉइंट पे
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तब फर्स्ट टाइम ऐसा लगा कि यार यह संभव है।
22:07
अंतत मैं ही हूं। जो भी फाइनल ट्रुथ है या जो भी लक्ष्य है मेरा लक्ष्य ही गलत था
22:14
मालूम।
22:23
तो अधिकतर लोगों को यह सब इसलिए बता रहा हूं अधिकतर लोगों को अपना लक्ष्य ही पता
22:30
नहीं होता है। मैं बार-बार जो बोलता हूं ना कि मैं आत्मा
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भगवान ही लक्ष्य है। यह इतना इंपॉर्टेंट पॉइंट है
22:45
कि आप इसका अंदाजा नहीं लगा सकते।
22:55
क्योंकि कुछ और आपने लक्ष्य बनाया
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तो कई साल कई जन्म खराब दृष्टा साक्षी भी कुछ और है। भगवान भी कुछ और है। मैं आत्मा
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भगवान सही हूं।
23:27
तो लक्ष्य का ही पता नहीं है और सब अंधाधुंध साधना कर रहे हैं, ध्यान कर रहे हैं। यह गुरु, वो गुरु, तमाशा
23:47
तो सारे मास्टरों का यह फर्ज है कि उनको
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चाहे ओशो हो चाहे कोई भी हो उनको बताना चाहिए कि मैं आत्मा भगवान
24:01
तुम्हारा लक्ष्य है। मैं जो भी बता रहा हूं जो मार्ग भी बता रहा हूं वो ठीक है। लेकिन
24:08
यह लक्ष्य है इसको कभी नहीं भूलना। माय फाइनल मैसेज मैं आत्मा भगवान ऐसा उनको
24:16
डायरेक्ट किसी भी शब्दों से मतलब बताना चाहिए।
24:23
ये बहुत बड़ी गलती है मास्टर्स की।
24:34
सोचो जब मैं बच्चा था मेरे को ऐसे सेंसेस आ रहे थे कि मैं भगवान हूं यार। मेरे को ऐसी फीलिंग्स आ रही थी। मैं ऐसे ही बोले
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जा रहा था बार-बार। कोई मेरे को यह बोल देता हां यह हो सकता है। ऐसा भी कोई मेरे को बोल देता
24:53
तो पता नहीं इतने साल मेरे खराब नहीं होते। मेरे को ऐसा लगता है।
25:01
कौन बोलेगा किसी को पता ही नहीं है।
25:43
तो लक्ष्य का ही जब पता नहीं है
25:50
तो आप जो भी करोगे आपका समय ही खराब होगा
25:58
और कुछ नहीं होगा। आपको लगेगा आप बहुत कुछ कर रहे हो। बड़े आध्यात्मिक हो गए हो।
26:06
हम 50 साल से उस को सुन रहे हैं। हम उसको आजकल मेरे को भी बोलने वाले हो गए ना। हम
26:12
दो साल से तो आपको सुन रहे हैं। अच्छा है सुन रहे हो
26:20
ओशों को भी सुन रहे हो अच्छा है लेकिन लक्ष्य मैं आत्मा भगवान इस चीज को कभी मत भूलना तुम्हारी 99%
26:33
यात्रा इसी में खत्म हो गई मैं आत्मा भगवान
26:40
आपने करेक्ट कर लिया यह लक्ष्य है तो
27:01
स्वामी जी के यहां जाता था। वहां मैं इस पॉइंट में पहुंच जाता था।
27:07
स्वयं में अपने होने के एहसास में
27:13
अब वहां मेरे को अंतर्यामी भी बोल रहा है सही है। अब वो
27:20
वहां से हटा देते थे कई बार। अब उनसे भी मेरा बहुत प्रेम
27:28
बट वो हटा देते थे। जहां उनको निष्ठा करानी चाहिए थी वह वहां से हटा देते थे।
27:35
कई साल गया होगा मैं 202 साल गयाऊंगा बचपन से।
27:43
18 178 तक 2017 18 तक गयाऊंगा मैं। उस बीच मुक्ता
27:50
भी पढ़ना मैं शुरू कर दिया था। तो मेरे को रेस होने भी लग जाता था कि यार पॉइंट तो यही है बट फाइनल क्लिकिंग नहीं होती थी।
28:00
फिर मुक्ता जब मैं बढ़ाया
28:06
वो 15 साल बाप रे
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मेरा अंतर्यामी स्वामी जी के पास से हटा दिया मेरे को और बहुत प्रेम मेरा तो आज भी प्रेम है तभी
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तो बुलाया था यहां प्रेम तो प्रेम है ना प्रेम कोई बुद्ध पुरुष थोड़ी ना देखता है
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लेकिन मास्टर मास्टर होता महर्षि मुक्त ओशो यह मास्टर कैटेगरी है।
28:46
यह अलग है। मास्टर वहां निष्ठा कराता है।
28:54
आपकी अपनी बीइंग में
29:10
क्योंकि मैं वहां पर इतने 202 साल वह खतरनाक एंटरटेनमेंट है उनके पास साक्षी
29:17
फिर अनदेखे को देखा कर बहुत डेंजर एंटरटेनमेंट
29:23
ओशो का फिर भी ठीक है आपको लगेगा आप कहीं जा रहे हो कुछ हो रहा
29:30
है आपके साथ और कुछ हो नहीं रहा है आप हां
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खतरनाक ट्रैप है खतरनाक फिर वो मेरे को भेज देते थे इसके आगे का तेरे को जानना है तो तू इसके पास जा
29:57
ऐसे वो मेरे को तीन जगह भेजे वहां अलग मैं समय खराब किया
30:06
समझ है उसमें एक ने मेरे से पैसे ले लिए बहुत
30:14
सारे गायब हो गया ऐसा वो एक अलग कहानी है
30:21
तो बात आत्मनिष्ठा की है
30:34
तो लास्ट जो मैं हूं कि फर्स्ट क्लिकिंग हुई महर्षि मुक्त से तब जो मेरे को फाइनल
30:41
मैसेज मिला कि मैं आत्मा भगवान लक्ष्य सारे मार्ग खत्म मंजिल यही है वो मैं ही
30:49
हूं। तब एक विश्राम आ गया जीवन में।
30:57
वो गेट ओपन हो गया। अब बस यह है ना वो
31:04
वो पता चल गया अब राइट एड्रेस
31:29
फिर उसके दो-तीन साल बाद यह जो कोविड वोविड चला जो भी है
31:35
उसमें आत्मनिष्ठा हो गई। जैसा मैं हूं।
31:46
लक्ष्य करेक्ट हुआ ना तो तभी आत्मनिष्ठा होगी। अभी आपको अपने
31:53
लक्ष्य का ही पता नहीं है। आप कोई बुद्धत्व खोज रहे हो। कोई भगवान खोज रहे हो। मैं आत्मा भगवान नहीं खोज रहे हो। आप
32:00
कोई भगवान खोज रहे हो। आप कोई साक्षी खोज रहे हो। आप कोई चेतना
32:07
वेतना खोज रहे हो। आप कोई ऊर्जा का स्रोत खोज रहे हो। तो अभी
32:15
आपका लक्ष्य सही नहीं है। भूल जाओ आत्मनिष्ठा।
32:24
अभी मेरे पास कितने लोग आते हैं? कोई ये गुरु, कोई रमना वाला, कोई जय कृष्ण मूर्ति वाला वो सबका लक्ष्य ही रॉन्ग है।
32:34
कोई ए्प्टीनेस बोल रहा है, कोई पूर्णता बोल रहा है। मतलब
32:40
लक्ष्य ही रॉन्ग है।
32:51
कोई होश को लक्ष्य बता रहा है। सब पुराना हो गया ये सब।
33:03
किसी का लक्ष्य भक्ति है, किसी का ज्ञान है। पहली चीज लक्ष्य को करेक्ट करो। मैं
33:11
जो इतना समय खराब किया वह आप मत करो। पहली चीज मैं आत्मा भगवान।
33:20
मैं देह मन नहीं मैं आत्मा भगवान।
33:30
यहां कॉम्प्रोमाइज मत करना। प्रथम
33:39
स्वधर्म अब लक्ष्य मैं हूं।
33:50
अरे तो 99% बात ही खत्म हो जाती है। वो तो मैं हूं।
34:28
आनंद भी लक्ष्य मत रखना। हां
34:36
शांति भी मत रखना। बस मैं आत्मा भगवान
34:44
देखो काम कैसे बनता है। यह मेरे को मेरे गुरु से मिला महर्षि
34:53
मुक्त से है ना यह
34:59
मैं आत्मा भगवान का जो मैसेज
35:15
तो वो राम दर्शन की उनकी बुक है तो उसमें वो क्या लिखा रहता मैं आत्मा राम मैं
35:22
आत्मा राम अब भागवत की बुक है उनकी तो क्या लिखा रहता मैं आत्मा कृष्ण पूरी बुक
35:28
में ना मैं आत्मा मैं बोला यार यह क्या है यार
35:35
लेकिन उनकी करुणा इतनी है ना कई चीजें बहुत बाद में समझ आती है।
35:52
कृष्ण को मैं से जोड़ दिए, शिव को मैं से जोड़ दिए, राम को मैं से जोड़ दिए। परमात्मा को, अस्तित्व को
36:01
तो अब आप भटक ही नहीं सकते ना। आप यह सोच रहे हो कि मैं और अस्तित्व अलग हैं।
36:10
आपने जोड़ा नहीं, अलग किया। आपने योग नहीं किया।
36:17
अलग किया। मैं आत्मा राम इसमें जोड़ हो गया ना।
36:26
अब राम अलग है तुम अलग हो। शिव अलग है तुम अलग हो। मैं आत्मा शिव इसमें जोड़ हो गया।
36:34
मैं आत्मा भगवान जोड़ हो गया। अब मैं अलग और भगवान अलग। अब करोड़ों जन्म ले लो। कुछ
36:42
नहीं होने वाला। इसलिए मैं आत्मा भगवान जोड़ हो गया।
36:51
क्योंकि मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
36:57
इस एक लाइन में पूरा खेल ही पलट जाता है।
37:03
पूरा खेल पलट जाता है। और सारे
37:11
जो पास्ट में भी मास्टर हुए हैं सबका सम्मान है। बट इतना सटीक बता पाना महर्षि मुक्त जैसा
37:20
असंभव है।
37:27
और उसमें जीना और असंभव है। और आपको मैं बताऊं आप चाहते ही नहीं कि
37:36
लक्ष्य मैं आत्मा भगवान हूं। आपका आप भी नहीं चाहते हो मालूम।
37:43
देर क्यों लगती है? मैं आत्मा भगवान तो है ही। आप खुद नहीं चाहते हो कि आपका लक्ष्य मैं
37:51
आत्मा भगवान हूं। आपको कोई कल्पना वाला राम चाहिए। कल्पना वाला ही कृष्ण चाहिए।
37:58
आपको कोई साक्षी चाहिए, कोई दृष्टा चाहिए। आपको कोई अज्ञात चाहिए। आपको कोई रहस्य
38:06
कोई ऐसा रहस्य मिल जाए, सिद्धियां मिल जाए, यह हो जाए, वो हो जाए।
38:14
कोई बुद्धत्व इनलाइटनमेंट सतोरी निर्वाणा आपका लक्ष्य है ही नहीं मैं मैं आत्मा
38:21
भगवान इस
38:28
लक्ष्य को करेक्ट करने में भी बहुत समय लगता है।
38:37
मेरा यानी कितना समय वह हुआ यह गलती मत करना।
38:55
यह करोगे तो वो होगा, वो करोगे तो वो होगा, वो करोगे तो वह हो गया। यार लक्ष्य तो
39:05
कोई बता ही नहीं रहा है। महर्षि मुक्त को बस हटा दो। कोई नहीं बता रहा।
39:13
सच बता रहा हूं मैं। और किसी को उसका लक्ष्य ही नहीं बताओगे और तीर चलाओ बोलोगे तो बेचारा कैसे चलाएगा?
39:28
और सबको जो लक्ष्य बताए जा रहे हैं वह टोटली रॉन्ग है। टोटली रॉन्ग।
39:35
इस कारण इतना समय खराब होता है केवल गलत लक्ष्य के कारण।
39:56
अब आप पढ़ते हो विज्ञान भैरव तंत्र 112 विधियां सुंदर हैं सब है ना या 108 या नौ
40:06
जो भी है उसमें तो भाई यह विधियां जिससे निकली वो
40:12
तुम्हारा लक्ष्य होना चाहिए ना भाई श्रेष्ठ तो शिव ही हुए ना
40:22
थोड़ी समझ होनी चाहिए ना आप में और खाली शिव ही तुम्हारा लक्ष्य नहीं होना
40:30
चाहिए। मैं आत्मा शिव तुम्हारा लक्ष्य होना चाहिए। आपसे अलग वाला शिव लक्ष्य नहीं होना
40:37
चाहिए। मैं आत्मा शिव
40:59
इतना योग शास्त्र में इतनी विधियां हैं, इतने ध्यान है, हठ योग, ये और आपने अपने
41:07
आप को परमात्मा से ही नहीं जोड़ा। परमात्मा से ही आपका वियोग है और दुनिया
41:15
भर के आप योग कर रहे हो। असली योग आपका और परमात्मा के बीच ना
41:26
वो योग कब करोगे भाई बाकी ये छोटे-मोटे योग ठीक है सुंदर है ये सब
41:36
बट असल तो असल है ना
41:41
तो मैं आत्मा भगवान परफेक्ट योग है असली योग
41:52
पूरे पतंजलि का सार है इस लाइन में मैं आत्मा भगवान हर मास्टर
42:02
का अंतिम मैसेज है यह मैं आत्मा भगवान
42:22
अब मैं देह मन
42:30
है ना तो देह की जगह क्या लगाया गया आत्मा मन की जगह परमात्मा भगवान
42:39
है ना ताकि देह का भाव कट जाए कि मैं आत्मा ही हूं।
42:47
और मन और माया का भाव कट जाए कि मैं परमात्मा ही हूं।
42:55
मैं देह मन नहीं मैं आत्मा भगवान।
43:02
लक्ष्य करेक्ट हुआ तो यह तो अपने आप कट जाता है ना।
43:18
मैं आत्मा भगवान सब कट गया।
43:30
यानी वो आत्मा मैं ही हूं और वो भगवान मैं ही हूं।
43:35
जिसको मैं खोज रहा हूं वह मैं ही हूं। और जहां भगवान आ गया वहां तो प्रेम,
43:48
ज्ञान, आनंद, शांति ये तो उसके पीछे चलते हैं ना। इनकी कभी चिंता करना ही मत।
44:11
अब देह मैं देह हूं कट गया किससे? मैं आत्मा हूं।
44:19
मैं मन हूं कट गया। किससे? मैं परमात्मा हूं। भगवान हूं। तो
44:28
मैं आत्मा भगवान कौन आत्मा भगवान
44:37
मैं कौन आत्मा भगवान
44:47
मैं अब लक्ष्य भी गया
44:54
अब आत्मा भगवान भगवान भी हट गया। अब आत्मनिष्ठा का समय है। अरे कौन आत्मा भगवान?
45:07
मैं आत्मा भगवान।
45:16
अब बस मैं मैं जो आप खुद को कहते हो मैं बस वही मैं
45:26
कोई विशेष मैं नहीं अब आत्मा भी गया भगवान भी गया वो ना वह
45:32
विशेष है ना सामान्य बस मैं
45:48
अरे कौन आत्मा भगवान?
45:53
अरे बोलो मैं यस।
46:49
अब मैं
47:22
अब मैं के आगे इवन आत्मा भगवान तक भी
47:31
देह मन तो बहुत दूर हो गया दुनिया मैं के आगे
47:38
आत्मा भगवान तक भी
47:46
जाने की इच्छा ना हो मैं के आगे जाने की इच्छा ही ना हो
48:01
अरे आप समझे नहीं मैं आत्मा भगवान अगर इसका निश्चय है आपको कि आपका मैं ही भगवान
48:10
है तो भगवान में मन चले जाता है उसके आगे पीछे जाने की इच्छा होती है क्या नहीं होती तो मैं तो
48:19
उसका भी स्वामी है ना मैं
48:25
आत्मा भगवान से भी परे। अब मैं के आगे जाने की इच्छा ही ना हो।
48:38
बस मैं अरे मैं असली असली सच
48:45
मैं हूं। असली परमात्मा आत्मा अस्तित्व या उसके भी
48:52
बियों्ड जो है वह मैं हूं। ब्रह्म परबह्म मैं
49:01
अब इस मैं के आगे जाने की इच्छा ही ना हो।
49:23
क्योंकि जैसे ही मैं को आपने बोला आत्मा फिर भगवान
49:30
तो मैं ही आत्मा बन जाता है। मैं ही भगवान बन जाता है। मैं को जैसे ही आपने कहा देह और मन तो मैं
49:40
ही देह मन बन जाता है
49:51
और कोई नहीं बनता दूसरा कोई नहीं है जो देह मन बने या आत्मा परमात्मा बने
49:58
मैं ही बन जाता है
50:13
मैं आत्मा भगवान। अब
50:22
आत्मा भगवान को भी हटा दो। मैं अब उस मैं को कुछ बनने मत दो।
50:33
बनना ही माया है। होना ही परमात्मा है।
50:41
अब मैं को मैं ही रहने दो। उसको कुछ बनने मत दो। इवन परमात्मा भी मत बनने दो।
50:49
क्योंकि वह माया वाला परमात्मा है। बारीक
50:57
असली वाला प्योर मैं एकदम ओरिजिनल। इसलिए हमने शिव के बाद सदा शिव रखा।
51:06
विष्णु के बाद महाविष्णु रखा। वो यह कैटेगरी है। महाविष्णु सदा शिव यानी
51:13
प्यरेस्ट में।
51:22
तो मैं को कुछ भी बनने मत दो।
51:30
कुछ मानो ही मत तो बनेगा ही नहीं। ना देह मानो ना आत्मा ना मन मानो ना
51:38
परमात्मा। बस मैं अरे
51:47
मैं हूं। इसमें कोई तकलीफ है क्या आपको?
51:57
तो बस इसको कुछ बनने मत दो। एकदम नेकेट रहो। सारी मान्यताओं से, धारणाओं से।
52:08
बस मैं
53:05
अब मैं मैं
53:12
झांको आंको मत देखो मत बस मैं
53:21
सहज में उसको पिन पॉइंट मत करो वो कोई पिन पॉइंट
53:29
नहीं है। सहज है। बस मैं हूं।
53:53
अब और एक स्टेप अब मैं कह कौन रहा है?
54:14
मैं मैं ही कह रहा है मैं। लेकिन
54:21
जो कह रहा है वह मैं शब्द नहीं है।
54:28
जो कह रहा है मैं क्या वो मैं है?
54:41
मैं से मिलता जुलता है। है मैं ही।
54:49
लेकिन जिस मैं को आप समझते हो जो आपकी सोच समझ
54:55
का मैं है वैसा मैं नहीं है वो
55:03
कोई बाउंड्री वाला मैं तो जो कह रहा है मैं
55:20
वही आप सहज में हो। एकदम सहज
55:54
और और ये तो आप हो ही पिन पॉइंट एकदम
56:05
अब जो भी आपने अभी तक कहा कि मैं हूं शब्द वाला भी
56:11
फिर आपने कहा मैं आत्मा भगवान वह भी मैं देह मन वह भी यह भी मैं ही हूं।
56:31
हां। अब जो भी आज तक आज से पहले
56:42
करोड़ों जन्मों में भी जो भी आपने अपने को कहा है वह भी आप ही हो।
56:50
जो भी कहा है व्हाट एवर पापी पुण्य आत्मा यह वह शरीर मनुष्य स्त्री पुरुष सब जो भी
56:58
वन टू ऑल वो भी मैं ही हूं
57:06
और मैं इनसे परे भी हूं क्योंकि परे भी मैं ही हूं।
57:14
अब आपने खुद को दृष्टा कहा है, साक्षी कहा है, वह भी आप हो। खुद को योगी कहा है।
57:24
कोई भी साधना की है, वह भी आप हो। अब हर चीज आप हो।
57:31
क्योंकि मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। बट अब
57:43
क्योंकि अब यह सब चीजें नहीं है। अब साक्षी, दृष्टा, साधना, शरीर, मन, आत्मा,
57:50
भगवान ये सब नहीं है। हूं तो मैं ही।
58:08
और अभी तक जितना भी आपको ग्रहण हुआ उससे भी परे हूं मैं।
58:34
और याद रखना जो परे से परे से परे होता है ना वह सामान्य होता है। सिंपल होता है।
58:44
इसलिए मैं सब में सामान्य हूं। सहज हूं। सिंपल हूं।
59:09
अब कोई भी जगह मैं से खाली नहीं है। कोई भी भाव मैं से खाली नहीं है। कोई भी विचार
59:16
मैं से खाली नहीं है। खाली भी मैं से खाली नहीं है
59:23
और परे भी मैं से मैं से परे नहीं है।
59:30
है ना? परे का स्वामी मैं हूं। परे मेरा स्वामी नहीं है कि परे से परे से परे।
59:38
परे का स्वामी मैं हूं। साक्षी का स्वामी मैं हूं।
59:46
चेतना का स्वामी मैं हूं। अस्तित्व का स्वामी मैं हूं।
59:58
कोई भी मैं से खाली नहीं है। मैं से भिन्न कुछ भी नहीं और मैं के बिना भी कुछ भी
1:00:05
नहीं।
1:00:17
तो मैं आत्मा भगवान लक्ष्य
1:00:27
और केवल मैं मैं बस
1:00:40
वो आत्म आत्मनिष्ठा मैं चाहे बोलो या ना बोलो वो तो है ही ना
1:00:51
जो सहज मैं है ही आपका वो आत्मा निष्ठा
1:01:23
दिखाओ उसको
1:01:38
अब देखो देखो लकड़ी
1:02:01
कुछ पहले से है उसको आप लकड़ी बोले
1:02:12
राइट कुछ पहले से है उसको आप मैं बोले
1:02:38
वही सहज में है। वह आत्मनिष्ठा वाला एरिया है।
1:02:52
वो नेचुरल सहज कुछ है पहले से उसको आप मैं बोले ताकि सब कट जाए। मैं की प्रतिष्ठा हो
1:03:00
जाए। इसलिए मैं बोल रहे हो बार-बार।
1:03:08
लेकिन वह तो पहले से है ना
1:03:17
वो इन द सेंस मैं तो पहले से हूं ना
1:03:22
मैं हूं बोलने के पहले से हूं ना
1:03:29
वही मैं हूं
1:03:36
मैं हूं बोलने के पहले से मैं हूं ना वही
1:03:44
मैं हूं। हां। लेकिन मैं जब मैं हूं कह रहा हूं तब
1:03:51
भी मैं ही हूं। मैं शरीर मन हूं कह रहा हूं तब भी मैं ही हूं। मैं आत्मा भगवान हूं कह रहा हूं तब
1:03:58
भी मैं ही हूं। मैं के अलावा कुछ है ही नहीं ना।
1:04:05
आप जो भी कह रहे हो वो मैं को ही कह रहे हो।
1:04:14
अब सागर कहो, नदी कहो, तालाब कहो आप पानी को ही कह रहे हो ना।
1:04:25
बस ऐसे ही जो कुछ भी कह रहे हो मैं को ही कह रहे हो
1:04:33
और जो कहा ही नहीं जा सकता वह भी मैं ही हूं
1:04:40
जो कहा ही नहीं जा सकता अनिरवचनीय वह भी मैं ही हूं
1:04:49
बोलने के पहले भी मैं ही हूं
1:05:26
तो मैं हूं आत्मनिष्ठा मैं
1:05:35
मैं मैं हूं आत्मनिष्ठा
1:05:50
बाकी निष्ठा किसी और की निष्ठा है। सब फॉल्स है। धोखा याद रखना। साक्षी दृष्टा
1:05:58
कल्पना का भगवान समाधि ध्यान धारणा बुद्धत्व
1:06:05
ज्ञान भक्ति प्रेम यह किसी और पे निष्ठा है। ये सब भ्रम है।
1:06:15
मैं हूं आत्मनिष्ठा। मैं अरे मैं
1:07:13
आप ही हो आत्मनिष्ठा खोजना नहीं है उसको
1:07:23
पैदा नहीं करना है उसको मैं स्वयं
1:07:32
आत्मनिष्ठ मैं से भिन्न जब कुछ भी नहीं तो निष्ठा
1:07:40
मुझसे भिन्न कैसे होगी इसलिए मैं ही हूं आत्मनिष्ठा।
1:08:28
जो कभी खोता नहीं जो कभी खोता नहीं वही मैं
1:08:39
आप जैसे बोलते हो ना दुनिया में जाते हैं तो मैं खुद को भूल जाता हूं। अरे उल्टी है बात।
1:08:47
आप खुद को कभी नहीं भूलते। दुनिया आती है और जाती है। विचार आते हैं जाते हैं। भाव आते हैं जाते
1:08:55
हैं। यह सब खो जाते हैं। मैं कभी खोता ही नहीं।
1:09:06
इवन जिस समय आपको लगता है कि मैं दुनिया में खो गया था उस समय भी आप थे तभी तो पहचाने ना कि मैं
1:09:15
खो गया था। आप उस समय भी नहीं खोते।
1:09:23
मैं खो ही नहीं सकता किसी का।
1:09:31
असली परमात्मा है वह जो खो ही नहीं सकता।
1:09:50
दुनिया में जाते हैं ये हो जाता है। उधर जाते हैं वो हो जाता है। अरे वो सब खो जाते हैं भाई। कितने बार आप
1:09:58
दुनिया में गए हो बचपन से अभी तक आप तो आप ही हो ना आपकी दुनिया बदल गई शरीर बदल गया
1:10:05
मन बदल गया आप थोड़ी ना बदल गए
1:10:11
यह सब खो जाता है मैं कभी खोता ही नहीं
1:10:36
तो मैं हूं आत्मनिष्ठा। हां जी।
1:11:28
तो आत्म नैष्टिक वही है जो अपने लिए मैं के लिए कुछ नहीं
1:11:36
करता। सोचता तक नहीं है। मैं हूं कहता तक नहीं है।
1:11:45
वही और वही केवल एकमात्र आत्म नष्टिक है।
1:12:08
आप जो भी करते हो कुछ और पाने के लिए करते हो और जो भी पाना है वो सब फॉल्स है।
1:12:18
टोटल फॉल्स मैं के लिए क्या करना है? मैं तो हूं ही।
1:12:31
क्या करोगे जी मैं के लिए
1:13:47
तो भैया पहले लक्ष्य मैं आत्मा भगवान उससे गलत लक्ष्य कट जाएगा।
1:13:54
फिर आत्मनिष्ठा बस मैं मैं हूं भी बोल लो चलेगा
1:14:05
मैं ही आत्मनिष्ठा हूं बस
1:15:14
हां जी बताओ यार अब कुछ आप लोग
1:15:32
बताओ आत्मनिष्ठा को मैं को
1:15:41
हम
1:15:54
हम हम
1:16:21
तो आप कुछ देख थोड़ी ना रहे हो। देखो अपने चारों साइड आप यह मैं है। उसको आप देखना कह रहे हो। है ना?
1:16:33
मैं को शरीर कह रहे हो। कुछ नहीं है। मैं के अतिरिक्त कुछ हुआ ही
1:16:40
नहीं आज तक। मैं को दृष्टा दृश्य कहते हो। मैं को ऐसा
1:16:49
लग रहा है मेरे को ऐसा लग रहा है कहते हो। चेतना ये वो कहते हो।
1:16:57
क्योंकि इन सब से मैं को निकाल दो तो कुछ बचता है क्या?
1:17:02
इवन अभी तक जो भी सुने इन सब से भी मैं को निकाल दो कुछ भी बचेगा क्या तो खत्म बात
1:17:10
ना मैं ही सबका स्वामी है ना सर्वाधार और सबका सब कुछ
1:17:21
मैं ही सबके प्राण है। मैं ही सबका सब कुछ है।
1:17:30
जैसे इस डंडे का सब कुछ लकड़ी है तो आप लकड़ी पे निष्ठा करोगे ना। डंडे पे थोड़ी ना करोगे।
1:17:38
भरोसा लकड़ी पे करोगे ना। तो पूरे चराचर का सब कुछ मैं हूं।
1:17:47
तो अपने आप में पर निष्ठा है ना उसमें। असली चीज पर ही तो निष्ठा करोगे ना।
1:18:08
तो मैं हूं आत्मनिष्ठा मैं
1:18:31
भैया यह किसी से नहीं होता आत्म निष्ठा मालूम है बहुत रेयर
1:18:48
मैं से ही मैं की निष्ठा होती है और किसी से नहीं होती।
1:19:27
हां जी बताओ यार
1:19:57
हम तो मैं को बता रहे हैं। तुम कुछ और तो नहीं सुन रहे। हां?
1:20:12
हां थोड़ा देख लो भैया कुछ और तो नहीं सुन रहे हो फिर कहीं मोक्ष मोक्ष में तो मन नहीं लगा
1:20:22
हुआ है गोलोक और वो लोक
1:20:38
भविष्य क्रिएट करना एकदम आसान है।
1:20:44
लालच और भय से भविष्य क्रिएट हो जाता है।
1:20:50
भगवान के नाम पर डराओ या आपको लालच दो।
1:20:56
निर्वाण की यह लोक वह लोक की है ना बहुत इजी है।
1:21:05
ऐसा करोगे तो ऐसा सालों बाद होगा। यह सब ट्रैप है। सब
1:21:12
ये लालचे हैं, भय है।
1:21:19
और तुम नहीं डरते ना भगवान भगवान से तो तुमको तुम्हारे पापों से डराया जाता है।
1:21:26
हां। क्या किए हो पिछले जन्म में? इस जन्म में क्या-क्या किए हो? ऐसे कैसे मुक्त हो जाओगे?
1:21:33
फिर भविष्य क्रिएट कर दिया जाता है। काटना पड़ेगा पाप, यह करना पड़ेगा, वह करना पड़ेगा।
1:21:41
मैं आपको बताऊं मतलब कुछ भी कर लो। यह नहीं होता है।
1:21:48
आत्मनिष्ठा नहीं होती आत्मनिष्ठा। भैया कुछ भी कर लो
1:22:00
आप। अब मैं हनुमान जी बुद्धा के बारे में
1:22:12
बताया ना मैं भाव करता था तरह-तरह के भाव रो-रो के भाव करता था। आप सोच नहीं सकते।
1:22:28
मैं जाता था ओशो कम्यून या कहीं ऐसे सत्संगियों के पास तो मेरा ऐसा भाव करता था कि इनका जो भी पाप पाप है इनके जो भी
1:22:36
जन्म बचे मैं जी लूं मैं जी लूंगा इनको हो जाए ऐसा करता था मैं
1:22:43
वो जो भी फाइनल है इनलाइटनमेंट है उस समय तो मेरा वही सेंस था ये इनको हो जाए ऐसा
1:22:50
भाव करता था मैं मेरे को बहुत लास्ट में हो तो चलेगा।
1:22:58
इनके सारे जन्म मैं जी लूंगा। इनके सारे पाप मैं काट लूंगा। ऐसे कई किस्म के भाव करता था तो भी नहीं
1:23:07
हुई मेरे को आत्मनिष्ठा। ये भाव करना सुंदर है। लेकिन इससे भी आत्मनिष्ठा नहीं होती। यह बता रहा हूं
1:23:15
कितनी सुप्रीम चीज है वो। वो समझो आप। हम तो छोटेछोटे ध्यान ज्ञान में फेंका
1:23:24
जाते हैं। जिंदगी खराब कर देते हैं। पानी देना
1:23:38
वृक्ष देखता था तो ऐसा भाव करता था। मैं अगले जन्म में इसकी जगह आ जाऊंगा। तू इसको मनुष्य बना और इसको आगे बढ़ा दे। परमात्मा
1:23:46
प्रभु ऐसा ऐसा रोरो के भाव करता था। इसकी यात्रा आसान हो जाए इसका मैं जी
1:23:55
लूंगा। वैसा सेंस था, वैसा भाव, वैसा पता नहीं क्या-क्या किया हूं मैं।
1:24:05
उससे भी साला आत्मनिष्ठा नहीं हुई यार।
1:24:19
और दिल से करता था मैं ऐसा टेंपरेरी वाला नहीं करता था मैं हो ही जाए ऐसा वाला
1:24:27
हां
1:24:44
लेकिन आत्मनिष्ठा जो है ना वो चरम है हिमालय है एकदम
1:24:54
वो कुछ करने से कुछ भाव करने से भी नहीं होती मालूम
1:25:02
तुम्हरे कृपा पाए है कोई कोई
1:25:13
मैं की कृपा से ही मैं मिलता है भैया और किसी की औकात नहीं है जो मैं को लखा
1:25:21
सके असंभव
1:25:30
देवता लोग नहीं कर पाते बाकी लोग की बात छोड़ दो आप रेयर देवता हैं जो लगा सकते हैं। शिव कैटेगरी के, नारायण कैटेगरी के,
1:25:43
सूर्य कैटेगरी के लिमिटेड एकदम
1:26:11
तो पहले तो आत्म नष्टिक वही होता है जो आत्मा के अतिरिक्त मैं के अतिरिक्त कुछ चाहता ही
1:26:18
नहीं है। हां ना वो उसके अतिरिक्त मैं के अतिरिक्त कुछ
1:26:25
सुनता है ना कुछ देखता है। हमेशा मैं का अनुष्ठान करता रहता है। जो दिख रहा है मैं ही हूं। जो सुनाई दे रहा है मैं ही हूं।
1:26:34
जो हो रहा है नहीं हो रहा है मैं ही हूं। आत्मा परमात्मा साक्षी देह मन दुनिया मैं
1:26:41
हूं। यह मैं का अनुष्ठान है। जैसे शिवलिंग में जल चढ़ाते रहते हो ना आप। शिव दिख गया तो मैं ही हूं। राम दिख गया
1:26:49
तो मैं ही हूं। सर्व असर्व सब मैं ही हूं। तो ऐसा अनुष्ठान करते रहता है। ऐसा प्रेमी
1:26:56
हो जाता है अपना ही क्योंकि मैं ही हूं। रियल में भी तो मैं ही हूं। तो सही
1:27:02
अनुष्ठान ही किया जा रहा है।
1:27:24
तो लक्ष्य मैं हो गया। उसके बाद सीधा आत्मनिष्ठा में
1:27:32
और मैं ही हूं। मैं सब रियल में कट जाता है। कट जाता है। इन द सेंस बाकी कुछ है ही
1:27:38
नहीं। काटना हम एक शुरू में सोचते हैं कट जाता है।
1:27:47
मैं के अतिरिक्त रियल में कुछ नहीं है। हां।
1:27:59
अरे आप ही देखो ना। आपके बगैर आपका पास्ट हो सकता है क्या?
1:28:07
आपके पूर्व जन्म भी हो सकते हैं क्या?
1:28:12
अब आपके बगैर आप जो भी सोचे हो, जो भी अनुभव किए हो, जो भी गलत भी माने हो, वह भी हो सकता है क्या?
1:28:23
आपके बगैर कुछ हो ही नहीं सकता भैया।
1:28:44
ना भाव हो सकता है इवन ना भावातीत हो सकता है मैं के बगैर ना विचार हो सकता है ना निर्विचार हो सकता है
1:28:53
हां मैं यानी सुप्रीम है सुप्रीम भी नहीं हो सकता मैं के बगैर
1:29:04
कोई भी अवस्था कुछ नहीं हो सकता भैया मैं के बगैर
1:29:29
तो मैं के अलावा कुछ भी अगर आपका लक्ष्य है
1:29:38
तो समझ जाना अभी आप भटक रहे हो और भटकोगे।
1:29:44
यह बात मेरी हो सकता है 10 साल बाद समझ आए या 10 जन्म बाद समझ आए।
1:29:51
लेकिन यही बात समझ में आएगी। मैं आत्मा भगवान ही एकमात्र लक्ष्य है और
1:29:59
उसका सार भी मैं है। आपका स्वयं आप ही अपना सार हो यार।
1:30:11
आप ही अपना सार हो। सारे वेदों का सार आप स्वयं हो। परमात्मा का सार, अस्तित्व का सार,
1:30:23
मोक्ष कैवल्य निर्वाण का सार आप सहज में हो।
1:30:33
यही आत्मनिष्ठा है कि सार मैं हूं। निर्वाण नहीं है। यही आत्मनिष्ठा है कि सार मैं हूं। परमात्मा नहीं है।
1:30:42
यही आत्मनिष्ठा है कि सार मैं हूं। अस्तित्व नहीं है।
1:31:15
ज्ञात अज्ञात अज्ञ अव्यक्त सार नहीं है सार मैं हूं
1:31:24
है ना
1:32:08
आप सोचोगे क्योंकि अपने आप को सबका सार कहना कितना आसान है।
1:32:18
इसको स्वीकार करना सबसे कठिन है।
1:32:25
इसको जो स्वीकार कर लेता है अभी इसी क्षण कि मैं ही सर्व का सार हूं। ततक्षण
1:32:35
आत्मनष्टिक हो जाता है। वह कि मैं हूं सार परमात्मा का भी अस्तित्व
1:32:45
का भी पूरे चराचर का भी सिद्धियों का ध्यान का ज्ञान का भक्ति का
1:32:54
प्रेम का मूल सार मैं हूं।
1:33:01
और हूं। अरे अहम को हरि कहा गया है। हरि को अहम
1:33:10
नहीं कहा गया है। अहम हरि
1:33:19
हरि का सार भी मैं है। शिवोहम शिव का सार भी मैं है।
1:33:28
सार का सार भी मैं है।
1:34:16
हां जी कुछ खिला ही नहीं रहे हो आज ऐसे बस बुलवाते जा रहे हो
1:34:30
हां जी सर
1:34:57
तो तुम्हारी क्या गलती है मालूम एकमात्र गलती है कि तू अपने को छोड़ किसी
1:35:06
और को सार मानता है। यही तेरी खता है।
1:35:17
और कोई खता नहीं और कोई अज्ञानता नहीं
1:35:30
कि तू अपने को छोड़ किसी और को सार मानता है। तू अपने को छोड़ किसी और को परमात्मा
1:35:39
अस्तित्व मानता है।
1:36:09
तो भैया यह लेनदेन वाली चीज नहीं है। बात शुरू हुई थी लेनदेन से
1:36:16
ना हमने कुछ दिया है ना आपने कुछ लिया है
1:36:33
दो यार
1:36:51
हमारी अरे अभी ये सब छोड़ो ये सब छोड़ो साइलेंस
1:37:01
रहो हम कोई भिखारी सारी नहीं है।
1:37:20
हम तो हम हैं ऐसा कहा करो। है ना? ये भिखारी भिखारी नहीं बोलना। हां
1:37:30
हम तो हम हैं। हां हम तो हम हैं।
1:38:00
हां मैंने बस एक चीज किया है। अगर उस लैंग्वेज में बोले तो एक स्टेप नीचे
1:38:07
बस मैंने ना मैंने मैंने आपको गलत गाइड नहीं किया बस
1:38:22
इतना बस और कुछ नहीं
1:38:29
धोखे पे धोखा है यहां भैया धोखे पे धोखा
1:38:40
अरे दुनिया धोखा देती है। आप सह लेते हो। जब गुरु धोखा देता है ना आप सह नहीं सकते।
1:38:47
हम सह के बैठे हैं। आप नहीं सोच सकते कितने धोखे पर धोखे हैं
1:38:55
यहां। और गलती किसी गुरु की नहीं होती। उसको भी
1:39:07
पता नहीं होता है। वह भी खुद को गुरु मान लेता है।
1:39:16
माया इतनी खतरनाक है। पता ही नहीं चलने देती।
1:39:29
तो मेरे को बहुत खुशी है कि मैंने गलत गाइड नहीं किया है। बस जो भी आज तक कहा है
1:39:36
जैसे भी कहा है आई थिंक एक शब्द भी इधर का उधर मैं नहीं कहता
1:39:44
क्योंकि एक शब्द आपका कई जन्म खराब कर सकता है। मैं जानता हूं उस पीड़ा को।
1:39:51
एक गलत शब्द पता नहीं आपकी जिंदगी कहां निकल जाए। फिर कहां आप किनहीं ख्यालों में किसी दुनिया
1:40:01
में
1:40:28
तो गलत से सही होता है सही। है ना? गलत से सही होता है सही। सही से
1:40:38
सही होता है मैं। हां मैं सही से भी सत्य से भी परे है ना
1:40:49
सही से सही होता हूं मैं सही से भी सही
1:40:58
सत्य से भी परे होता है मैं इवन भक्ति और प्रेम से भी परे होता है मैं
1:41:08
शांति से भी परे
1:41:52
देखो भरत भक्ति है, शांति सीता है। हनुमान ज्ञान के सागर हैं। सब कहां समर्पित है?
1:41:59
राम। वह एक्चुअल में है। वह मैसेज है।
1:42:06
हर चीज का जो सुप्रीम है वह मैं है। इवन राम का
1:42:14
भी
1:42:27
तो सर्व का सार राम कृष्ण शिव का सार भी मैं हूं।
1:42:36
इस बात को जो स्वीकार करता है वह होता है आत्मनस्टेक। हां मैं हूं ऐसा बोलता है वो
1:42:47
साहस अदम्य साहस और आपके मैं में वह साहस है ही। वह तो
1:42:56
साहस का भी स्वामी है। जीव आपका भले घबरा जाए।
1:43:10
अनंत मुक्तियों का, अनंत कैवल्य का, अनंत मोक्ष का,
1:43:16
अनंत निर्वाण का सार हूं मैं। अरे और वह भी मैं सहज में हूं।
1:43:25
इसको स्वीकार करो। ऐसा ही है क्योंकि
1:43:55
अरे कल जैसे सब कुछ मिट गया था जो शुरू हुआ है ना जो जो भी सत्संग हुआ था कल कि
1:44:03
सब राख हो गया, भस्म हो गया। तो सब कुछ मिटने का अनुभव आपने किया ना। कई बार सब
1:44:11
कुछ आप हो गया। सर्व का अनुभव सब कुछ होने का अनुभव आपने किया। तो आप सार हो ना
1:44:18
मिटने और होने का भी और कौन है?
1:44:24
असली का भी असली आप हो भैया।
1:44:34
आत्म निष्ठा का भी सार मैं हूं। ऐसा जिया करो
1:44:41
क्योंकि आप हो
1:45:21
तो मैं नहीं तो कौन हटाओ सबको बाकी सब कचरा है ठीक है मस्त
1:45:28
रहो यार थोड़ा सा बुद्धि रखा करो मस्त कौन
1:45:37
होता होता है। मैं होता हूं ना भगवान किसको मिलता है?
1:45:45
मुझे मिलता है मैं को मिलता है। मोक्ष किसको मिलता है? प्रेम किसको होता है?
1:45:52
ज्ञान आत्मज्ञानी कौन होता है? मैं। यह सब आपसे मिलना चाहते हैं यार।
1:46:02
आप कहां पड़े हो इनके चक्कर में? बुद्धत्व किसको होगा?
1:46:08
आपको होगा ना किसी भूत प्रेत को थोड़ी ना हो जाएगा। तो यह सब तो आपसे मिलना चाहते हैं।
1:46:16
इन सब के सहार आप ही हो। और अंतत यह सब कहीं है ही नहीं। आपकी
1:46:27
मान्यता में है। बस हो तो आप ही।
1:46:40
ठीक है तो मस्त रहो आनंद में रहो सभी को प्रेम प्रणाम
1:46:47
आत्म नष्टिको भव
1:47:14
हम ठीक-ठाक सब
1:47:26
अरे मैं की कथा है भैया मैं की कथा
1:47:55
बिजी की बत्ती जली नहीं जली दो चार लोग को ऑन करो। हां।
1:48:37
हम हम
1:48:53
है कोई मैं वाला कि किसी को और अभी मोक्ष शोक चाहिए कुछ
1:49:01
चाहिए प्रेम प्रणाम प्रभु जी
1:49:13
कौन बोल रहे हैं प्रेम प्रणाम मैं रश्मि बोल रही हूं
1:49:22
हां रश्मि जी बताइए प्रभु आज आपसे बात करके बहुत मैं खुश हुई हूं
1:49:30
आज पहली बार बात की है मैंने हां वह तो अच्छी बात है बट अभी जो सुन रहे
1:49:38
थे उसका सार बताओ उसका सर मैं हूं प्रभु जी
1:49:44
मैं यानी सहज मुस्कान मैं यानी सहज मुस्कान
1:49:54
यस यस ओके राइट तो मुझे बहुत अच्छा लगा आज पहली बार बात
1:50:01
करके मैं कब से ट्राई कर रही थी? डेढ़ साल हो
1:50:08
गए। हां। हां। आई लव यू प्रभु जी।
1:50:14
इतना सब करते हैं। मेरे लिए कितना मुश्किल था प्रभु।
1:50:24
आज बात करके बहुत खुश हूं। हां जी। हां जी।
1:50:31
लव यू प्रभु जी प्रणाम है प्रेम प्रणाम है
1:50:38
प्रणाम प्रभु जी कोटि कोटि प्रणाम आपके चरणों में
1:50:45
प्रणाम
1:51:03
अरे बोलो डर लगता है क्या आत्मा नहीं हुए हो इसलिए डर रहे हो प्रेम प्रणाम प्रभु श्री अहो भाव
1:51:12
अरे क्या इतने सारे लोग आ प्रेम प्रणाम प्रभु ऐसा बोलो ना यार अच्छा लगता है
1:51:22
हां बोलो बोलो बोलो प्रणाम प्रणाम प्रभु श्री
1:51:30
हां प्रणाम है सबको क्या लगता है भाई प्रेम में ये बताओ अब
1:51:38
प्रेम प्रणाम प्रभु वन बाय वन हां प्रणाम
1:51:48
प्रभु जी प्रेम प्रणाम बोलो डेस्किट क्या पोजी पोजीशन
1:51:54
बहुत अच्छे प्रभु श्री बहुत मस्त रहती हूं मैं रहती हूं हंसती रहती हूं
1:52:04
हम जी प्रभु श्री आप कैसे हैं के अलावा कहीं और इंटरेस्ट जी नहीं प्रभु श्री कुछ भी नहीं
1:52:14
किसी में इंटरेस्ट नहीं नहीं किसी में इंटरेस्ट नहीं है प्रभु श्री
1:52:23
ठीक है प्रेम प्रणाम प्रभु जी डेस्किट सुनो डेस्किट को ऑन करो
1:52:33
थोड़ा सा अपना आप दबंग दबंग रहा करो है ना जी एकदम दबंग ठीक है
1:52:42
जी प्रभु लाइक जगदंबा नारायणी है ना जी जी प्रभु श्री
1:52:49
बाकी ठीक है आपका जी यस आपकी कृपा है आप कैसे हैं प्रभु श्री
1:52:58
अब वो कैसे वैसे इधर उधर का बात नहीं कर स्टॉप जी टू द पॉइंट
1:53:07
जी प्रभु श्री प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम अरे कोई बताओ मेरे को
1:53:17
प्रेम प्रणाम प्रभु श्री प्रणाम
1:53:26
अभी भी डर व लग रहा है क्या बात करने से मेरे से नहीं प्रभु जी हां
1:53:33
कैसा लगता है बहुत बहुत सहज में मैं हूं ऐसा प्रतीक होता है मैं
1:53:42
ही हूं मैं ही हूं मैं नहीं कृपा
1:53:50
बहुत सुंदर ठीक है विराज एक एक जिससे बात हो रही है कट करते जाओ और बताओ
1:53:58
एनीबडी प्रेम प्रणाम श्री प्रेम प्रणाम
1:54:05
मैं से अतिरिक्त कुछ नहीं कुछ हो ही नहीं सकता
1:54:12
हुआ ही नहीं आज तक एक डाउट यस अपने
1:54:20
परमात्मा मैं आत्मा तो ये मैं कौन बोल रहा है डाउट है वाला
1:54:27
जल्दी ऑन करो वो ऊपर राइट साइड हां
1:54:33
हां क्या बोल रहा है बताइए ये मैं पूछ रही हूं कि आपने जो अभी मैं का बताया मैं के बारे में मैं आत्मा मैं
1:54:42
भगवान तो ये मैं या
1:54:49
ये मैं एक यूज़ व्यवहारिक में ही होता है और एक मैं जो रियल सेल
1:54:57
अरे नहीं एक मैं दो मैं कुछ नहीं होता बस मैं होता है मैं व्यवहार भी कर लेता है
1:55:04
सुनो सुनो सुनो अभी स्टॉप करो इनको अभी आप सुनो मेरे को सुने नहीं हो और एक मैं दो
1:55:12
मैं कुछ नहीं होता एक मैं अहंकार वाला एक मैं परमात्मा त्मा वाला ये सब बकवास है। मैं ही हो मैं ही होता हूं। बस एक दो तीन चार कुछ नहीं होता। है ना?
1:55:31
प्रेम प्रणाम प्रभु जी। प्रणाम जी। प्रभु जी। मैंने ही परम सुकून है। परम
1:55:38
आनंद है। ऐसी फीलिंग आ रही है आज सत्संग सुन के। एकदम सही है।
1:55:46
क्योंकि मैं में आनंद इनबिल्ट है, सम्मिलित है। है ना?
1:55:54
हां। हमेशा ही आप मुझे बहुत आनंद आता है। बहुत बहुत क्योंकि आप उस सत्संग की ऊंचाई तक भी
1:56:03
पूरा ले जाते हो और डेथ तक भी पूरा ले जाते हो। तो तभी तृप्ति आती है। हां इसलिए इसलिए मेरे को जो भी सुनते हो
1:56:12
लास्ट तक सुना करो। मेरे हर सत्संग को पूरे लास्ट तक तो उसमें पूरी पीक आती है
1:56:18
उसकी हिमालय जैसी बाकी बहुत अच्छा है आपका प्रभु जी बटन दबाते रहते ऑन हो जाए सत्संग
1:56:27
बंद ही नहीं हो हां ठीक है बस अब टू द पॉइंट इधरउधर की बात नहीं
1:56:34
मैं की बात बस हां जी और कोई प्रेम प्रणाम प्रभु श्री बहुत-बहुत अहो
1:56:43
भाव आप जहां से बोलते हो ना वो हमारे मैं को अंदर तक मतलब अब हो ही नहीं सकता कि हम
1:56:51
जो सुनने वाले हैं वो उससे चूक जाए। मतलब बहुत-बहुत धन्यवाद कि वो हम मतलब इस जगह
1:56:59
पर भटकने का बहुत सारा जो चांस था वो आपने बिल्कुल जीरो कर दिया। मतलब एक अलग ही जगह से आप बोलते हो और हम ऑटोमेटिक वहां कैसे
1:57:07
पहुंचते हैं वह बताना मुश्किल है।
1:57:13
नहीं बहुत सुंदर है ना और बहुत अच्छा है वो ऑटोमेटिक ही है ना उसमें
1:57:22
कुछ करने जैसा कुछ हां जी इसको तो आप सुने यानी यही हो गया बस
1:57:32
बस बस आप खुद ही खुद ही करेक्ट कर लेते हो गलत चीजों को हटा देते हो खुद ही सुनते सुनते
1:57:40
वो भी नहीं ऑटोमेटिक हो गई ऑटोमेटिक हां इन द सेंस ऑटोमेटिक है और
1:57:49
बस आपका अपना आप रह जाता है है ना हम बिल्कुल
1:57:56
बहुत अच्छा अच्छा प्रणाम प्रभु श्री प्रणाम बताते जाओ
1:58:04
हां प्रभु मैं ही सबका सार हूं यस मैं ही सबका सार हूं मैं के भी
1:58:14
किसी में इंटेंस नहीं आता। मई के ही बात में इंटरेस्ट आता है बस। यस
1:58:23
बहुत सुंदर धन्यवाद के तौर पे मैं थोड़ा कुछ दो लाइन गा सकती हूं।
1:58:32
अभी गानावाना मत गाओ ना। धन्यवाद है। बस प्रणाम है आपको। बहुत सही जा रहे हो।
1:58:39
आपने ओके ठीक है बहुत-बहुत प्रणाम और प्यार प्रभु श्री जी
1:58:47
प्रणाम अच्छा यस जल्दी बताओ
1:58:55
प्रणाम डर लगता है क्या नहीं प्रभु बिल्कुल नहीं हां डर रहे हो यानी अभी जीव में हूं मैं
1:59:03
तो ऐसे धड़ल्ले से बोलता है अरे मैं हूं हां जी बताओ मैं से भिन्न कुछ भी नहीं प्रभु और मैं के
1:59:12
बिना भी कुछ भी नहीं अभी ऐसा लगता है। हां बहुत अच्छा बट इसमें और जीना है आपको
1:59:20
ओके बहुत बढ़िया यस नेक्स्ट
1:59:28
प्रेम प्रणाम प्रभु जी हां प्रेम प्रणाम जी
1:59:35
मैं मेरे में ही जी रही हूं हम
1:59:43
आपको बहुत-बहुत शुक्रिया। धन्यवाद। बहुत बहुत अच्छा लग रहा है सत्संग सुन के।
1:59:49
हां जी। अच्छा है। बहुत सुंदर है।
1:59:58
आतं नष्टिक रहो बस। जी। प्रणाम। प्रणाम।
2:00:06
प्रणाम संजय जी आवाज बहुत कम आ रही है मेरी
2:00:14
हां पहले ठीक थी एकदम से ही पता नहीं क्या हो गया आवाज ही कम हो गई बहुत नहीं सबको आ रही है मेरी आवाज आ रही है ना
2:00:23
आ रही है लेकिन धीमी आ रही है पहले जैसी पूरी तेज नहीं आ रही अरे माय डियर आपको नहीं आ रही है सबको आ
2:00:30
रही है टू द पॉइंट बात करो हां बहुत बढ़िया है। मैं प्रतिष्ठित हो रहे हैं।
2:00:37
हां बहुत अच्छा आज मैम आज प्रतिष्ठित
2:00:44
सुनो मैं प्रतिष्ठित एक एक बात जो आपने बोली कि
2:00:54
मैं कहने से पहले हूं हम
2:01:02
मजा आ गया उसमें ओके ठीक है और मैं में प्रतिष्ठित अगर नहीं होना है।
2:01:10
नहीं नहीं वो तो उसके लिए कुछ करना नहीं है। वह तो अब है ही है। हां सुनो सुनो आप है ना मैं में
2:01:18
प्रतिष्ठित नहीं होना है। एकमात्र मैं ही तो हूं जिसमें प्रतिष्ठित
2:01:24
नहीं होना है। ओके यस नेक्स्ट
2:01:32
प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम करिया बन के संत तूने
2:01:40
कर दिया कमाल सत्य की खोज थी और सत्य मिल गया प्रभु आज
2:01:47
एकदम मैं आई थी गरियाबंद भी आई थी सिलवासा भी गई थी गिर भी आई थी
2:01:55
और आपका अढाई साल से सुन रही हूं तब मेरे को लगा कि अब मेरे को जो चाहिए ना वो मिल
2:02:02
गया बस तब से मेरे को एकदम तृप्ति हो हो गई है। आज
2:02:08
आप सही में ऐसे संत मिलने बहुत बहुत भाग्यशाली कोई मिलते हैं।
2:02:19
ये बहुत सुंदर है और बहुत ही इस ऐज में जो आप ग्रहण कर पा रहे हो यह अद्वितीय है
2:02:29
क्योंकि इस ऐज में मनोदशा एकदम खराब हो जाती है और आप इस ऐज में ग्रहण कर पा रहे
2:02:37
हो अद्भुत है प्रभु जी मेरे को खोज थी कि कोई प्रत्यक्ष
2:02:44
मिल जाए कोई प्रत्यक्ष मिल जाए और आप मेरे को प्रत्यक्ष मिल गए पहले आधी रात को
2:02:51
सत्संग सुना था मैंने अाई साल पहले जनवरी में और तब से मैंने रेगुलर कंटिन्यू रखा
2:02:58
है कि मेरे को जो चाहिए वो प्रत्यक्ष मिल गया मेरा मनुष्य बहुत सफल हो गया
2:03:05
हां जी नहीं और आप में वो साहस भी है आई थिंक 90
2:03:13
की ऐज है आपकी 90 प्लस की है ना 70 75 अच्छा वो कोई और है शायद 90 प्लस वाले ना
2:03:23
वो अमेरिका वाले थे ओके ओके हां लेकिन
2:03:31
इतना आनंद है ना कि अभी लगता है कि ये देह का कोई वो ही नहीं रहा उसमें अभी अभी का
2:03:38
आपका एक दो महीने का जो सत्संग है ना वो तो कुछ अलग है जो भी थोड़ा बहुत भी फिर
2:03:45
रहता है ना वह भी निकाल दिया आपने ये लास्ट एक दो महीने का सत्संग
2:03:54
नहीं बहुत सुंदर है और बहुत अच्छा है अपना आत्मनिक रहिए
2:04:01
हां प्रभु बस आपकी कृपा आपके शरण और आपका नाम क्या है मां जी
2:04:10
मेरा नाम भारती गांधी भारती जी कहां से आप? मैं मुंबई बोरी वाली
2:04:18
मुंबई से ओके मैं प्रज्ञा बेन और नैना बन पहली बार साथ में आए थे नवंबर में
2:04:27
फिर उसके बाद में मैं सिलवासा गिर आप गरिया बना चुके हो
2:04:35
हां प्रभु हां और जब वो वाला घर था ना पहले तब हम हम
2:04:42
तब छ दिन रहे थे और वहां से आने का मन ही नहीं लग रहा था प्रभु।
2:04:49
नहीं बहुत सुंदर है। आप यहां भी आए और निरंतर सत्संग सुनते हैं। हां प्रभु
2:04:56
यही बताता है कि सत्य से कितना प्रेम है। बस प्रत्यक्ष चाहिए था। प्रत्यक्ष जो
2:05:05
प्रत्यक्ष रहता है ना प्रभु वो वो नहीं रहता है। इसलिए मेरे को मन हुआ
2:05:11
मैं प्रत्यक्ष आपके पास एक बार आ गई। अच्छा तो आत्म नाष्टिक रहे
2:05:21
प्रणाम है आपको प्रणाम प्रभु प्रणाम मेरे को बस आप अपने
2:05:28
साथ में रखिएगा आप मेरे साथ नहीं हो मैं ही हूं बस
2:05:35
निश्चिंत रहो ठीक है एकदम निश्चिंत हां प्रभु प्रेम प्रणाम प्रभु
2:05:43
प्रेम प्रणाम अब ये देखो 70 प्लस की एज है तो यहां आई।
2:05:50
वो एक और लेडी थी 90 प्लस वाली। क्या नाम है उनका? अमृता जी यार मैं भूल रहा हूं।
2:05:57
तो वो अमृता जी 90 प्लस में यहां आई थिंक दो बार आ गई। यह प्रेम होता है।
2:06:06
यह सत्य के प्रति प्रेम होता है। कुछ मिले ना मिले ऐसा जीना चाहिए। है ना?
2:06:15
बल्कि फिजिकल कंडीशन इस एज में बड़ी अपडाउन होती है। तब भी आए
2:06:22
तो अंतर्यामी देखता है ना यार कि यह मेरे लिए जी रही है या जी रहा है।
2:06:31
यहां तो यंगस्टर लोग के रोने देखता हूं मैं। मेरा पति वह बोल रहा है। मेरी पत्नी वह बोल रही है। ऐसा है वैसा है। मेरे को
2:06:39
जाने नहीं दे रहे हैं। रोते रहो। रोना ही मिलेगा जिंदगी में। हां आगे नेक्स्ट
2:06:47
प्रणाम। प्रणाम जी
2:06:55
मैं आत्मा भगवान का आज रस्पान गया प्रभु जी। बहुत बहुत बहुत
2:07:04
मजा। अंदर ही अंदर उतर गया। मैं
2:07:13
ओो वाह हो बहुत सुंदर आपका क्या नाम है भगवान
2:07:20
प्रवीण गिरी जूनागढ़ प्रवीण प्रवीण गिरी
2:07:28
अच्छा गुजरात से आया था प्रभु जी
2:07:35
पैरा से वहां मैं था अच्छा
2:07:43
धन्यवाद धन्यवाद बहुत सुंदर है प्रवीण गिरी जी बहुत सुंदर बहुत अच्छे से आपने ग्रहण किया और वो अपनी
2:07:53
जगह बना लेता है इसको जो भी सुनेगा ना तो यह अपनी जगह बना लेता है अंदर में और वह
2:07:59
तो आप हो ही वो मैच हो जाता है एकदम अज्ञानता कट जाती है बहुत ही सुंदर
2:08:09
आज प्रणाम यस एनीबडी
2:08:17
बहुत-बहुत प्रणाम स्वामी जी आपको और बहुत-बहुत बहुत-बहुत मेरी ब्लेसिंग्स आपको
2:08:24
और आपका सत्संग सुनने से तो ऐसे लगता है जो मैं हर चीज का अधिष्ठान है। उसको रोज उस जड़ को पानी मिल रहा है।
2:08:33
हां यही मेरा लक्ष्य है और कुछ सही नहीं।
2:08:40
बहुत सुंदर यह रोज अधिष्ठान पे जो यह होता है ना
2:08:47
अभिषेक जी ओ अपने आप वो अपने आप में ही क्लियर हो जाता है। हां
2:08:56
बहुत संतोष से जाता है। पांच छ महीने अचानक से आपका मिला सुनने को
2:09:04
क्योंकि मैं ऑलरेडी इसी पाथ पे हूं डायरेक्ट पाथ पे तो अच्छा लगा कि ये तो डेली मैं जब भी आपका
2:09:12
आता है मैसेज WhatsApp पे इमीडिएटली उसको बोलती हूं और सुनती हूं और आपका प्रत्यक्ष
2:09:19
दर्शन करने की भी बहुत इच्छा है। मैं चंडीगढ़ से बोल रही हूं और मेरी बहुत इच्छा है कि आप यहां पधारे तो और भी लोगों
2:09:27
का बहुत कल्याण होगा। मेरा उधर देखो कभी संभव हुआ तो आऊंगा बट मेरे को ट्रैवलिंग बिल्कुल पसंद नहीं है।
2:09:36
सब आप ही लोग को आना पड़ेगा मेरे पास और आना पड़ेगा। ठीक है।
2:09:44
आज प्रणाम है। आनंद में रह आत्म नष्टिक रहे। आज प्रणाम।
2:09:52
बस आज जो लक्ष्य करेक्ट हुआ है ना एकदम अच्छे से अंदर फंस गया है। मैं आत्मा
2:09:58
भगवान वाला जो लक्ष्य है ये अकेला सबको निपटा देता है। आप धोखा खा ही नहीं सकते।
2:10:06
अब कोई आपको भटका ही नहीं सकता। बेवकूफ भी बनाने की सीमा होती है
2:10:15
और बनने की भी। हां जी
2:10:24
प्रणाम सर हां प्रणाम सर मुझे बस इतना ही बोलना था आज का सुनकर
2:10:33
कि मैं वैसे तो शब्दों में नहीं बता सकती
2:10:41
बट एक मौन आई ना जिसमें प्रेम और आनंद भरा
2:10:50
हम सही है बस एक मोहना
2:10:56
ये उसका फल है बहुत सुंदर सबको मैं देख सकती हूं
2:11:07
पर कोई मुझे देखता नहीं हम हम
2:11:14
नहीं अब सब नहीं है अब मैं ही हूं देखना दिखना भी नहीं मैं हूं बस इवन मौन भी नहीं
2:11:21
है आईना भी नहीं है मैं ही हूं प्रेम और रस भी मैं ही हूं मैं से भिन्न कुछ भी नहीं
2:11:28
ओके ठीक है प्रणाम
2:11:40
हां बोलते जाओ भैया हाजिरी लगाओ देखो तो सुनते हो कि नहीं सुनते मेरे को यार ट्रेन ट्रेन बजे
2:11:48
प्रेम प्रणाम आज के सत्संग के लिए प्रभु जी बहुत-बहुत आभाव बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु जी
2:11:57
आज क्या पोजीशन प्रभु जी बस सब कुछ में है मैं ही हो गया
2:12:05
कुछ था ही नहीं कभी कभी नहीं था यस कुछ था ही नहीं कभी कभी नहीं कभी नहीं था
2:12:13
वाह लव यू ब्रो लव यू लव यू मैन लव यू यस
2:12:25
हां जी प्रेम प्रणाम प्रभु हम प्रेम प्रणाम
2:12:32
आपकी आज्ञा हो तो कुछ मैं भी अनुभव शेयर करूं हां बताइए
2:12:39
प्रभु सब कुछ मैं तो हो ही गया पर आज जब आपने बोला कि मैं बोलने से भी मैं पहले
2:12:46
हूं तो आज हुआ कि मैं मैं
2:12:53
आदि हूं। मेरा कोई आदि नहीं है और ना कल के सत्संग में अनुभव हुआ था कि
2:13:00
मेरा कोई अंत नहीं है। जैसे बोलते हैं ना आदि अंत यस यस
2:13:07
तो ये अनुभव था और सब कुछ और इसी में है। कुछ है ही नहीं।
2:13:16
बिल्कुल भी सही और बिल्कुल ही सही
2:13:23
एंड आदि अंत को जासु न पावा इसका कोई आदि अंत है ही नहीं
2:13:38
प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम प्रणाम प्रभु जी
2:13:45
प्रणाम जी। आज आपने हमारे हाथ में एक डंडा धरा दिया
2:13:52
मैं का डंडा जिससे आप हमें कोई भटका नहीं सकता है। हम
2:13:58
ना हम भटकेंगे हर चीज के लिए पहले मैं का डंडा मारेंगे।
2:14:09
क्योंकि ना हमेशा याद रखो।
2:14:18
पराधीन सुख स्वप्ने नाही जो किसी पर भी आीन है उसको सपने में भी
2:14:26
सुख नहीं मिलता चाहे वो परमात्मा ही क्यों ना हो गुरु ही क्यों ना हो अस्तित्व ही क्यों ना हो आप
2:14:34
किसी पर भी आीन हो आपको सुख नहीं मिलेगा असली सुख
2:14:44
बस इसलिए स्वयं पर निष्ठा स्वयं पर श्रद्धा ओके
2:14:51
प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रभु जी
2:15:01
प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम जी बस ये मैं की कथा बस प्रभु जी ये मैं की कथा मैं द्वारा मैं
2:15:10
में होकर मैं ही सुन रहा हूं बस सर्वत्र हम
2:15:17
ठीक है ये आज प्रेम प्रणाम
2:15:24
प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम गुरुदेव
2:15:32
हां प्रणाम जी कैसे हो मैं आत्मनिष्ठ
2:15:40
मैं मैं गुरुदेव मैं यस पागल हो गए आज पागल हो गए पागल बना दिया
2:15:49
आजकल बहुत धन्यवाद बहुत धन्यवाद
2:15:57
प्रणाम जी बहुत ही सुंदर प्रेम प्रणाम
2:16:05
प्रेम प्रणाम बहुत ही सुंदर सर
2:16:15
ऐसे बताया करो ना तो हमको भी लगता है हां आप लोग रियल में ग्रहण किए हो
2:16:25
यस मन नहीं रहेगा कोई प्रेम प्रणाम प्रभु श्री प्रेम प्रणाम
2:16:33
प्रभु श्री आज का सत्संग सुनकर ना मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि सब कुछ झूठ
2:16:40
और मैं मैं ही सत्य हूं। मेरे अलावा कोई चीज सच नहीं है। सब झूठ है। यस।
2:16:49
प्रभु आपसे बात करने का बहुत दिनों से मन था। आज बात हुई है आपसे।
2:16:57
बहुत ही सही कहा आपने कि मेरे अलावा सब झूठ है।
2:17:06
केवल मैं ही सच हूं। यस बहुत सुंदर
2:17:13
प्रभु श्री एक निवेदन था आपसे जी बताइए जो आप ये सत्संग ऑनलाइन करते हैं Google
2:17:22
मीट पे उसको अगले दिन भी अगर सुनने का मौका मिले तो बहुत खुशी होगी
2:17:29
ये डल जाता है दो चार पांच दिन के गैप में डलता रहता है YouTube में आप सुन सकते हो
2:17:36
क्योंकि सत्संग जब सुनते हैं ना प्रभु अलग से तृप्ति महसूस होती है। अलग अलग टाइप का कुछ महसूस होता है। पता नहीं क्या
2:17:45
है। मुझे नहीं पता इसके बारे में क्या होता है। पर कुछ तो है और मुझे सत्संग याद नहीं रहता। मैं जब सुनती हूं भूल जाती हूं। पर
2:17:54
फिर भी अंदर से कुछ होता रहता है। याद ना रहने के बावजूद।
2:18:01
यह बहुत सुंदर है। यानी समझो कि मैं ना मैं
2:18:08
इतना अद्वितीय हूं कि मुझे सत्संग को भी याद नहीं रखना है।
2:18:18
जरूरत भी नहीं है। मैं इतना अद्वितीय हूं कि कोई पॉइंट, कोई कुछ कोई फाइनल पॉइंट भी
2:18:26
मुझे याद रखने की आवश्यकता है ही नहीं। मैं इतना अद्विती अलौकिक
2:18:38
यानी मैं क्या याद रखूं
2:18:45
अद्भुत है ये ओके प्रणाम प्रभु प्रणाम प्रेम प्रणाम
2:18:52
प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम
2:19:00
हां प्रेम प्रणाम बहुत बहुत शुक्रिया बहुत शुक्रिया
2:19:09
हां जी प्रणाम प्रभु जी प्रणाम
2:19:16
प्रेम प्रणाम प्रभु जी हां प्रणाम प्रणाम गुरुदेव मेरा मैं मैं
2:19:25
हूं जो हर समय निरंतर जो सबको जगह देता है वो
2:19:32
मैं हूं और यस मेरा कोई निश्चित समय नहीं है। मैं मैं
2:19:42
निश्चित समय से भी परे मैं हूं और अनादि अनंत उसकी जो व्याख्या भी नहीं करा
2:19:51
करी जा सकती वह मैं हूं। मैं सबको जगह देता हूं। पर मैं और
2:19:59
मैं अव्याख्या हूं। मेरी कोई व्याख्या कर ही नहीं सकता।
2:20:05
मैं इतना अगम्य हूं कि कोई मुझे कोई जानना चाहे तब भी नहीं जान सकता और मैं ही हूं
2:20:13
जो मैं सबको जनाना चाहूं तो मैं जानने में आता हूं और सबको मैं ही जनता हूं। कोई और मेरे को जान नहीं सकता। फिर भी मैं सबको
2:20:22
जनता हूं। मैं हूं। बिल्कुल सही। आज
2:20:30
प्रणाम प्रभु जी बहुत बहुत सही बस एक चीज और ऐड कर लो इसमें
2:20:37
कि मैं सामान्य भी हूं सिंपल हूं सरल हूं एक
2:20:45
सामान्य हूं। जी प्रभु जी और मैं मैं प्रभु जी प्रभु जी
2:20:52
मैं जो नहीं है उसको भी होकर मैं ही बता रहा हूं। यस
2:20:58
मैं ही बता रहा हूं उसको और जो दिखने में समझने में सुनाई देने में जो भी जो भी कुछ
2:21:06
आ रहा है वो सिर्फ मैं ही हूं उसके मेरे अलावा कोई कुछ भी नहीं हो सकता है। मैं हूं तो सब कुछ
2:21:13
हो ही नहीं सकता। आज बहुत सही है बट सिंपलनेस को
2:21:22
थोड़ा धारण करो। जी प्रभु जी है ना जो कॉमननेस है सामान्य पद बाकी बहुत अच्छा है आपका बहुत ही सुंदर
2:21:31
प्रभु जी धन्यवाद प्रभु जी बहुत अद्भुत प्रणाम क्या नाम है आपका श्वेता प्रभु जी
2:21:38
हां श्वेता जी बहुत ही सुंदर अच्छा प्रणाम जी प्रणाम प्रभु जी
2:21:44
प्रेम प्रणाम गुरुदेव प्रणाम आज के सत्संग से मैंने यह सीखा कि मैं का
2:21:54
लक्ष्य केवल मैं ही हूं। मैं मैं मेरे अतिरिक्त कोई लक्ष्य नहीं है। सब कुछ मैं
2:22:01
ही हूं। यस बस इतना ही कहना है गुरुदेव। हां बिल्कुल सही है।
2:22:09
अच्छा प्रणाम जी। प्रणाम गुरुदेव। प्रणाम गुरुदेव। प्रणाम। प्रणाम जी।
2:22:18
सब कुछ गिर गया। गुरुदेव। सब कुछ गिर गया। बस मैं बचा सादा सिंपल
2:22:26
मौन शांति आनंद आता है इसको भी आराम से देखता हूं सहज रहता हूं मस्त रहता हूं गुरुदेव
2:22:34
बहुत ही सुंदर बहुत ज्यादा सुंदर यही बात मैं उनको समझाना चाह रहा था बहुत ही सुंदर
2:22:42
प्रणाम प्रणाम प्रणाम गुरुदेव यही सहज मुस्कान है जो बता रही है क्या
2:22:50
नाम है आपका धनराज है गुरुदेव धनराज जी कहां से लातूर से हूं
2:22:58
लातूर से बहुत ही सुंदर हां जी आपको ही सुनता हूं गुरुदेव सिर्फ प्रणाम
2:23:06
हां जी सारे सारे संशय गिर गए बस अरे मेरे को ऐसा लग रहा है आपको गले लगा
2:23:16
लूं अभी आपसे मिला मिलाया हूं गुरुदेव आपसे अलग
2:23:25
तुम मुझसे अलग हो नहीं सकते मैं तुमसे अलग कभी नहीं हो सकता हां वो भी सत्य है आज
2:23:36
प्रणाम जी प्रणाम प्रणाम गुरुदेव ऐसे सुनने वाले रहते हैं तो मेरा और बोलने
2:23:45
का जी करता है जी हां जी कोई है और कोई है और प्रेम प्रणाम गुरु जी
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प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम जी आपके हर वचन के लिए अहो भाव साधो साधो साधो
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मतलब कि मैं हूं का भाव आपने समझाया है आज एक बड़ी गहरी बात अभी कि मैं हूं के अंदर
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भी जो बोल रहा है वो एक चीज है एक गहरे में कहीं वो आपने दी और संगत सुनने में
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सुनो सुनो सुनो सुनो सुनो ये सराउंड ये सराउंड हो रहा है इसका इसको बंद कर दो
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अच्छा इनके वजह से है तो इन्होंने बोला मैं हूं का भाव मैं हूं का
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कोई भाव नहीं होता मैं हूं मैं हूं होता है फिर इन्होंने बोला मैं हूं के बीच मैं हूं
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मैं बीच होता ही नहीं है मैं हूं के बीच बीच में बीच होता ही नहीं
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है तो डालोगे क्या? रहेगा क्या? मैं हूं बस मैं हूं होता है। आप अभी सुनो थोड़ा
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सा। ठीक है? फिर मिलते हैं। ओके प्रणाम।
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम ओनली मैं बस और कुछ नहीं ये आज आपने फाइनल
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मोर लगा दिया यस बहुत बहुत शुक्राना
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बहुत सुंदर प्रणाम है आपको
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बहुत-बहुत धन्यवाद प्रेम प्रणाम प्रभु जी
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प्रेम प्रणाम पता नहीं प्रभु जी बोलना तो मेरे कुछ नहीं आता उस दिन मैंने बात की तो रोते-रोते बात
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की आज मतलब एक अंदर से पता नहीं कि कूल सा आके मतलब मेरी हंसी ही नहीं रुक रही पता ही नहीं मतलब एक कुछ दिन के बाद देख उदास
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रहने का भी मतलब एक ड्रामा सा करना पड़ता है। पता नहीं प्रभु जी क्या हो गया।
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जीव लोगों के साथ रहोगे ना तो थोड़ा दुखी रहने का ड्रामा कर लेना है ना तो जितने भी
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आजू-बाजू जीव होते हैं ना उनको पसंद नहीं आता आनंद और सुख तो थोड़ा बहुत ड्रामा कर लेना ज्यादा नहीं
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थोड़ा बाकी बहुत और मैं ये है ना ये YouTube पे आप डालते हो ना तो इससे मुझे थोड़ी सी प्रॉब्लम होती है क्योंकि मैं परिवार में किसी को
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नहीं पता मैं आपके पास भी आ चुकी हूं और 10 दिन के लिए फिर भी आऊंगी मैं भी बसना का नाम लेके आती हूं। झूठ बोल के आती हूं
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घर पे प्रभु जी। तो मैं ये समझती हूं। अरे ऐसा झूठ बोल के मत आया करो भाई। सच बोल के आया करो।
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डलेगा। जिसको नहीं आना है वो मत आओ वीडियो में। है ना? बट डलेगा YouTube में। भैया यह
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यूनिवर्सल प्रॉपर्टी है। इसको हम रख नहीं सकते। ठीक है। थोड़ा डर निकालो अपने अंदर
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से। नहीं डर नहीं है प्रभु जी यह बात बनाते हैं फिर नहीं ये सब डर है ना ये सब भय है सच बोल
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के आना चाहिए जो होगा देखा जाएगा ठीक है ठीक है
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विपसना जैसी चीज को बोलने जाते हो और हमको तो विपसना से भी फीका कर दिया आपने विपसना
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में क्या दम है यार अभी आप सुनो मेरे को ठीक है जी बिल्कुल नेक्स्ट
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प्रेम प्रणाम प्रभु प्रणाम
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प्रभु कुछ बोलने को रहा नहीं प्रभु आज बहुत अच्छा लगा सत्संग में नहीं मैं नहीं
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हां यही तो सुंदर है बोलने का कुछ नहीं है बहुत सुंदर
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अभी जो दीदी कह के गई है ना उनको कहना है खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम तो हम तो
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इस दुनिया से नहीं डरेंगे प्रेम प्रणामो
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प्रेम प्रणाम प्रणाम प्रणाम गुरुवर
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हां प्रणाम जी मैं सिया यस सिया जी अब कैसा है? जम रहा है कि नहीं जम रहा है हमारा?
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हमेशा से ही जमता है। गुरुवर नए में ना अलग तरह की मस्ती लगती
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है। एकदम अलग खोए रहते हैं जैसे। हां।
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क्योंकि देखो यानी
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बचपन में या शुरू में भी आप सब मैं कहते थे कॉमन लैंग्वेज होती है ना मैं तो रहता ही
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है ना हर लैंग्वेज में और बचपन से हमेशा आप मैं कहते थे ना
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लेकिन आपको यह बोध ही नहीं था का वही मैं सबका सार है।
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आपको ये बोध ही नहीं था कि वही जो सिंपल मैं है जो मैं ही हूं बस जो मैं ही हूं वही सबका
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सार है। वो रहता हमेशा है।
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बट हमको पता नहीं रहता कि यही सबका सार है। या इट मींस मैं ही सबका सार हूं।
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अब मैं तो यार बोलता हूं मैं किसी और को सार मानू भी क्यों यार इतना बेवकूफ थोड़ी
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ना हूं कि किसी और को सार मानू। कोई दूसरा भी सार हो तब भी मैं अपने को ही
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मानता। हालांकि सर्व का सार मैं ही हूं। दूसरा है ही नहीं।
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ठीक है। आगे बढ़े। प्रणाम जी
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प्रेम प्रणाम स्वामी जी प्रेम प्रणाम बताइए
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मेरा पूछना यह था कि मैं ही मैं को प्रेम करती हूं। हां ऐसा नहीं है।
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ऐसा कुछ नहीं है। हम प्रेम को हमेशा ऐसा सोचते हैं कि उसके लिए दूसरा होना चाहिए। फिर ऐसा सोचते हैं
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अब दूसरा नहीं है तो मैं ही मैं को प्रेम करता हूं या करती हूं। हम क्या सोचते हैं? प्रेम का मतलब ही
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हमारे अंदर ऐसा चले गया है कि किसी से करना है। अब किसी से करना है। हट गया तो मैं को मैं
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से करना है। ऐसा कुछ नहीं है। बस प्रेम है ना। किससे करना है? मैं को
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मैं से करना है या किसी और से मतलब ही नहीं इन चीजों का। जैसे मैं हूं वैसे ही प्रेम है बस। मैं की
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खिलावट है प्रेम। ओके इसको दो चार बार सुनोगे तो क्लियर होगा।
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बहुत नाजुक पॉइंट है यह। बहुत नाजुक। ठीक है। जब मैं पहले आपको सुनी थी ये मैं का पॉइंट
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जब आया था मेरे को लगा कि मेरा आंसर मिल गया और मेरा जीना हो गया। बट अभी जितना सुन रही हूं लगता है और भी सुनना है और भी
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सुनना है। मतलब मैं के बारे में भी और भी सुनना है। कभी लगता है क्लियर हो गया, कभी लगता नहीं और भी सुनना है।
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हां मतलब हमेशा ऐसा लगेगा सुनो हमेशा आपको ऐसा
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लगेगा ये तो क्लियर हो गया एकदम प्रत्यक्ष और हमेशा यह भी लगेगा कि और भी सुनना है
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क्योंकि इसके भी बियों्ड है मैं क्लियर हो गया के भी बियों्ड है
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ना यह खत्म नहीं हो जाता अंत नहीं हो जाता इसका
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हरि अनंत हरि कथा अनंता बोलते हैं ना और हमेशा कंप्लीट भी लगेगा कि हां ये
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क्लियर हो गया कंप्लीट हो गया और क्लियर कंप्लीट बिय्ड का भी स्वामी मैं
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हूं बस मैं ही हूं ओके फाइनल मैं ठीक
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ओके प्रणाम प्रणाम
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देखो ऐसे बात होती है तो कितनी सारी चीजें निकलती है। है ना? ऐसे बताओगे ही नहीं तो कैसे चलेगा?
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हम वो आज तो आनंद काफी आया। एक बीच में जैसे
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आपने बोला था कि मैं ही मैं को जान सकता हूं। तो इससे थोड़ा मैं से ना नजदीकी सी लगी हम हम
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कि मैं ही मैं को जान सकता हूं। पहले हम थोड़ा ऐसे देखते थे कि जैसे मैं थोड़ा सा बाहर शायद बुद्धि यूज़ होती थी
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लेकिन अब थोड़ी सी ऐसी नजदीकी लगी जैसे मैं ही मैं को जान सकता हूं। मतलब मैं अपने नजदीक थोड़ा अपने आप को फील करने लग
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गया। हां, ठीक है। यह शुरू के लिए ठीक है। बट
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आप जब भी कहते हो मैं तो मैं को जान के ही मैं कहते हो। उसको
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जानना नहीं है। जैसे ही आप नॉक किए कहीं जाके सामने से आवाज आई कौन
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हो? तो आप कहते हो ना मैं हूं। तो आप मैं को जानते ही हो। आप नॉर्मल जो है ना बस आप मैं ही तो हो।
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तभी तो कहते हो मैं। आप कुछ और हो ही नहीं। मैं के अलावा इसलिए हमेशा जब भी आपसे पूछता है कौन हो?
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हमेशा आप कहते हो मैं हूं। आप कोई और हो ही नहीं। आप मैं ही हो।
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इसलिए हर कोई कहता है मैं हूं। और जान के ही कहता है मैं। मैं मैं आंसर
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क्यों आता है? आप जानते हो मैं को तभी कहते हो मैं।
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हां जी थोड़ा आप सुनेंगे ना तो और गहराई आएगी और क्लिटी आएगी।
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प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
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हम हम
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तो अब कंप्लीट किया जाए कि कोई और है कोई
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सब समाधि वाले क्या बाकी प्रभु जी प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
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प्रभु जी अभी करना क्या है मतलब सत्संग के अलावा अब करना क्या है
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ये तो हमको भी नहीं पता है यार चाय चाय पिया करो बढ़िया चाय कॉफी और
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बढ़िया से और क्या प्रभु जी यही लगता है कि पेड़ पौधों को
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देख लो खाना खा लो सो जाओ बस आपने फ्री कर दिया एकदम हर
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तो वो एक संत थे ना उनसे पूछते थे तुम्हारी साधना क्या है तो वो बोलते थे जब भूख लगती है तो खा लेता हूं नींद आती है
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तो सो जाता हूं बस वैसा ही हो जाता है पूरा जीवन सहज बहुत बढ़िया क्या नाम है आपका?
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लवि नाम है प्रभु जी। लवि लवी बहुत सुंदर बहुत सुंदर प्रणाम है आपको
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प्रणाम। प्रेम प्रणाम प्रभु श्री
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हम प्रेम प्रणाम जी। रेणुका बोल रही हूं गुड़गांव से। प्रभु श्री
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आज का सत्संग क्या जब से आपका सत्संग सुनने लगी हूं तो ऐसा लगता है 24 घंटे सत्संग ही चल रहा है। कभी निराशा आशा कुछ
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भी नहीं घेर रही है। आनंद ही आनंद है। और आपके महक सुनके तो वो एक पुराना गाना है
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ना मैं ही मैं हूं। दूसरा कोई नहीं। बस वही गाना याद आता है। एक मस्ती सी छाई
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रहती है। बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु। बहुत-बत शुक्रिया।
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हां। क्योंकि देखो दूसरा
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जो हम दूसरा कहते हैं ना तो दूसरा दूसरा कहता है कि मैं दूसरा कहता हूं।
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मैं दूसरा कहता हूं तो दूसरा है कहां? मैं ही हूं ना।
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तू तू कहता है कि मैं तू कहता हूं। तो तू है कहां? मैं ही हूं। चैलेंज कर दो परमात्मा को कि तू है कहां?
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मैं ही हूं। क्योंकि तू तू नहीं कहता। मैं तू कहता हूं।
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तो तू है कहां? अरे जोत बोलो मैं ही हूं
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मैं ही हूं हां जी प्रणाम मस्त रहो मस्त रहो मस्त रहो
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जून में आ रही हूं ओके प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम जी
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प्रभु जी आपको बोल रही हूं दिल्ली से हां अकू जी कैसे हैं
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प्रणाम प्रभु जन वंदना बस थैंक यू अहो भाव पर बस अहो भाव
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अकू जी अक्कू जी अकू जी थैंक यू अक्कू जी
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मैं हूं प्रभु और कुछ भी नहीं पूछ रहा है
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मैं मैं ही मैं हूं प्रभु इतना आनंद है ड्यूटीज और सब इतनी सरल सहज चल रही है
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प्रभु जी आो बाबा बाबा आनंद आनंद
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लव यू प्रभु जी चरण वंदन तो अकू जी नहीं है मैं हूं ठीक मैं मैं
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हूं आपकी अकू जी मैं बहुत बढ़िया ओके प्रणाम अकू जी
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प्रेम प्रणाम प्रभु ऐसे बात करते हो सब आनंद आता है सब आओ यार
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बात करने साला अपना गुफा में बैठे रहते हो मैं आया प्रेम प्रणाम प्रभु जी
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एक मिनट का ब्रेक ले रहा हूं आ रहा हूं
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हां जी है कोई हेलो
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प्रेम प्रणाम प्रभु हां प्रेम प्रणाम क्या हाल है
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मस्त एकदम बढ़िया बढ़िया हां यानी सुन हो पूरा बहुत बढ़िया
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और कुछ आप कहना चाहेंगे मलंग जी हमसे जी प्रभु कुछ
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अरे देखो हम कितनी बड़ी गलती करते हैं जिंदगी में
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हमारी गलती क्या है कि अपने अतिरिक्त हम किसी और की सत्ता को
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स्वीकार करते हैं। चाहे वो बुद्धत्व हो चाहे मोक्ष हो। अगर तुमने मोक्ष की सत्ता को स्वीकार किया
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बुद्धत्व की तो तुमको उसका गुलाम होना पड़ेगा। या उससे फाइट तो होगी ही पक्का
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या किसी भी और की सत्ता को स्वीकार ही क्यों करना
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और हम हमेशा दूसरे की सत्ता को स्वीकार करते हैं और दूसरा है मुझसे जो मुझसे है फिर हम उसकी सत्ता को स्वीकार
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कर रहे हैं। चाहे वह आत्मा हो, परमात्मा हो, चाहे कुछ भी क्यों ना हो, कभी भी दूसरे की सत्ता को
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स्वीकार नहीं करना क्योंकि वह आप ही से है। इवन सत्ता भी आप ही से है।
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इसलिए मस्त रहो बस क्योंकि आप ही हो। पूरा चराचर नहीं है। आप ही हो बस।
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ओके। प्रणामम। प्रणाम
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प्रेम प्रणाम गुरु जी प्रेम प्रणाम
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हां भारती जी हां प्रभु आपने मस्त कर दिया है मैंने मैं मेरे सिवा कुछ है ही नहीं प्रभु
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पूरी निष्ठा दिला रहे हो रोज दिन भर दिन दिन ब दिन बढ़ती जा रही है आत्म निष्ठा अपनी
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मैं प्रभु बिल्कुल सत्य है कि मेरे सिवा कुछ नहीं है ना
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कुछ भी नहीं है इवन मेरे सिवा सिवा भी नहीं है
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है ना बस मस्त रहो आत्म प्रेम प्रणाम
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प्रेम प्रणाम आज बहुत देर हो गया है क्या? क्या टाइम हो गया देखो?
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हां बोलो बोलो यार चलेगा सब टाइम। चलो कोई है?
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आधे लोग तो भाग गए लगता है मेरे को। प्रेम प्रणाम प्रभु प्रभु हां प्रेम प्रणाम
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अद्भुत अद्भुत अद्भुत इसके अलावा कोई शब्द नहीं मैं ही परम सत्ता हूं
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परमभाव धन्यवाद प्रणाम
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प्रेम प्रणाम भगवान प्रणाम भगवान प्रेम प्रणाम
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भगवान एक सबसे अच्छी बात क्या लगी जो आपने बताई कि हम वास्तव हम पहले भी अपने आप को ही सबसे
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ज्यादा प्यार करते हैं। अपने मैं को ही हमेशा हमेशा प्यार करते रहे हैं और उसको ही करते हैं हम। भले ही हम कुछ भी नाटक
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करें कि हम ये चाहते हैं, इसको प्रेम करते हैं। इसको चाहते हैं। लेकिन वास्तव में भीतर भीतर हम अपने मैं
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को ही पुष्ट करते हैं। उसको ही चाहते हैं। हम और दूसरा मैं ही
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शरीर बन जाता हूं। फिर मैं ही बुद्धि बन जाता हूं। फिर मैं ही संसार बन जाता हूं। में ही गुरु के रूप में बन जाता हूं तो
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गुरु को देखता हूं। हालांकि वो ज्यादा हो जाता है लेकिन शरीर के तल पर ऐसा कह सकते हैं।
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तो निडर हो रहा हूं भगवान बहुत निडरता और बहुत आनंद रातरात भर सुनने की इच्छा रहती है। पूरा
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पूरा जो YouTube पे आता है ना उसके लिए इतना अहो है भगवान।
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आज हां अपना आप ही रहता है बस।
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और मैं यह हो जाता हूं, मैं वो हो जाता हूं। यह सब भी ना गायब हो जाता है। हालांकि मैं
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सहज में हो जाता हूं। बट ये सेंस नहीं रहता। है ना? सब सहज में चलता रहता है। आनंद
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बहुत बहुत ही सुंदर है। बाकी प्रणाम। प्रणाम भगवान। प्रणाम भगवान
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प्रणाम जी। प्रभु जी प्रणाम
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प्रणाम प्रणाम जी कैसे हो
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बस कृपा आपकी कृपा आपकी अब मगज की जरूरत ही नहीं है बस मस्ती के
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बस बहुत सुंदर बहुत ही सुंदर
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आज स्मार्ट लग रहे हो एकदम
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आपकी कृपा प्रणाम जी
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बस जल्दी बना हां वो तो मोस्ट वेलकम है बिल्कुल आइए
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एक तारीख आ एक तारीख को आ जावे एक तारीख आ बिल्कुल बिलकुल आज जी
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प्रणाम
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प्रणाम स्वामी जी प्रणाम जी प्रणाम वासुदेव हम प्रणाम मैया कैसे हो?
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बहुत बहुत ठीक बहुत बहुत ठीक आप बड़ा प्यारा बोलते हो ये
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बहुत बहुत ठीक
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प्रणाम स्वामी जी प्रणाम जी सबको प्रणाम। प्रणाम।
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आज तो सुन रहे थे मां आप पूरा ये सुन रही थी।
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आज तब मैं मैं भी सुन रही थी स्वामी जी। मेरा मोबाइल से कॉल नहीं हो रहा था। मैं बात करना
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चाहती थी आपसे। मैं एक साल से सुन रही हूं। मां मां सुन रही थी। मैं भी थोड़ा-थोड़ा सुन रही थी। फिर
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मां ने बताई मैं ज्यादा सुनने लगे आपको मिलने का मन है कोशिश कर रही हूं आने के
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लिए आज वो मां को मेरे से प्रेम हो गया है तो
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इसलिए सबको बोलती है मेरे को सुनो मेरे को सुनो आप लोग ओशो प्रेमी हो ना ओशो को ही सुना करो कहां मेरे चक्कर में मत रहो है
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ना बढ़िया आपके साथ तो सुन रही हूं मैं मेरे मोबाइल में भी आपको देख रही थी, सुन रही
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थी तो यहां से कल नहीं हो पा रहा है। इसलिए मां को मैंने बोली कि आपके फोन से
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करो बात। दो तीन दिन से ये सेंटर में रह रही हूं।
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वो नहीं छूट रहा है एकदम से गहरा गहरा गहरा हो रहा है
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और कल परसों आपने एक छोटा सा वीडियो था आपने बोला था ना कि अरे जो रेडियो के
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स्टेशन स्टेशन है उसमें ताल है ना ठीकठाक लग जाएगा तो बन जाएगा
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उतर जाएगा तो घर घर आएगा मेरे को मेरे को
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वो बात को मैं नहीं समझी थी मां ने फिर दो दो बार बताई तो मैं भी समझी एक बार में
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मैं नहीं समझ पाई थी वो बात वो घर घर वाला तो मां ने मां की मुंह तो मैं भी
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हो गई तो बहुत एक बार में जम गया कि शून सेंटर में लग जाएगा ना गीत बच जाएगा
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जब तक इधर उधर है क्या है हम लोग अपना स्टेशन कहीं और ही लगाते हैं इसलिए घरघराहट होती चला
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इसलिए घरघराहट हो रही है मैं हूं मैं ही संगीत बजता है
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बजता है मेरे को
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बहुत अच्छा बहुत अच्छा लगा स्वामी जी जल्दी आऊंगी मिलने थैंक यू हां बिल्कुल आइए मोस्ट वेलकम है ना
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ठीक है रोशोशो नहीं सुनना हो गया बस मेरे पास आओ सब ठीक है ओके
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ये भी मेरा चक्कर ये भी मेरा मेरा चक्कर ज्यादा ठीक है ओके
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ओके प्रणाम प्रणाम
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हां जी है कोई
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वैसे शैलेश जी आप समाधि लगा के बैठे हुए हो मतलब है क्या हैं?
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सुरेंद्र जी भी समाधि लगा के खा रहे हैं पी रहे हैं। मस्त एकदम
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हां सुरेंद्र जी आवाज नहीं आ रही है।
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प्रणाम है सबको आप दोनों को। आप लोग की आवाज नहीं आ रही है। बस मैं हूं
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ही सुनाई दे रहा है। बस प्रणाम है। बस मस्त रहो।
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हां जी प्रणाम
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम हां जी
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प्रभु जी प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम प्रेम
2:55:30
प्रणाम कोटि कोटि प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रभु जी
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बस आत्म नष्टिक रहो मस्त रहो है ना आज प्रणाम
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तो ठीक है आप सबको प्रेम प्रणाम
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वाणी को विश्राम देते ते हैं। बस आत्म नष्टिक रहे।
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अपनी सत्ता के अतिरिक्त किसी की सत्ता का स्वीकार ना करें। वो एक धोखा, एक भ्रम है।
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एकमात्र मैं हूं और मैं हूं और बस मैं हूं।
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प्रेम प्रणाम।
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ओके सबको बहुत सारा प्रेम बहुत सारा प्यार आज