0:24
अभी रखो YouTube हो गया चालू
1:03
वो चालू कर दो विराज
1:06
[हंसी]
1:11
हां जी मेरा आईना आ गया।
1:31
हां सौरभ जी कुछ बताओ तो जल्दी से। एक आध दो लाइन बाकी मैं संभाल लूंगा
1:46
प्रेम प्रणाम
2:19
हम
2:32
भगवान जो भी है वो
2:44
परिवर्तनशील है हम अनित्य [नाक से की जाने वाली आवाज़] है यस
2:52
जिसका प्रादुर्भाव मैं आत्मा भगवान जो कि नित्य है उससे हुआ
3:00
यस तो मैं आत्मा भगवान या मैं हूं
3:10
जो सत्य है सत्य से सत्य ही जो है वो उत्पन्न हो
3:22
तो इस माया नगरी में जो भी है उसको अपना असत्य बोल रहे हैं। एक्चुअली वो सत्य है। यस।
3:32
और जिस तरह से मैं हूं शाश्वत है।
3:35
हम्म उस तरह से ये परिवर्तनशील होना हम्म। इस जगत का वो भी शाश्वत ही है।
3:43
हम्म।
3:47
तो जो परिवर्तन हो रहा है उसका होना भी परिवर्तन होना भी शाश्वत ही है
3:54
और सत्य भी है हम तो ये चराचर या माया नगरी में जो भी हम
4:04
देख रहे हैं वो मैं ही हूं हम और ये उतना ही सत्य है जितना मैं हूं हम यस अब्सोल्यूटली राइट।
4:18
और दोनों ही शाश्वत तत्व है। तो माया हम्म और भगवान हम्म दोनों सत्य हैं। और दोनों साथ-साथ है और शाश्वत है।
4:28
हम्म।
4:30
ऐसा एक बिल्कुल सही।
4:44
तो वास्तव में यहां सत्य और असत्य से परी कुछ
4:51
भी नहीं है। जो कुछ है बस वो है। हम अगर मैं सत्य की तुलना में देखूं सब सत्य ही सत्य है। नहीं देखूं तो भी सत्य ही है।
5:03
हम
5:13
तो मैं हूं है [हंसी] हम और ये माया भी है
5:22
हमें
5:35
इस कठिन मैं उनको नहीं मालूम अगर आप और इसको शार्प करेंगे तो बहुत ही
5:45
[हंसी] अच्छा माया नगरी को असक्त इंग्लिश में देखते हैं
5:54
असत्य से शक्ति आया है हां भले ही शब्दों में उसको असक्त बोले या टेंबरेरी बोले या इनपरमानेंट बोले अनित्य
6:03
बोले कुछ भी बोले मैं
6:20
सत्य तो है
6:30
ओके असत्य का सत्य भी सत्य ही है।
6:43
[हंसी]
6:46
हां जी।
6:50
जैसे ये व्यक्त है ना?
6:58
और यह जो देख रहा है जो जान रहा है जानने वाला देखने वाला वह कौन है
7:05
अव्यक्त तो व्यक्त है कि अव्यक्त व्यक्त है
7:17
व्यक्त है कि अव्यक्त व्यक्त अव्यक्त व्यक्त है इसलिए व्यक्त भी अवक्त व्यक्त है।
7:29
लकड़ी डंडा है कि डंडा लकड़ी है?
7:33
अरे जल्दी बोलो। लकड़ी डंडा सोता रहता है।
7:39
लकड़ी डंडा है कि डंडा लकड़ी? लकड़ी डंडा है। इसलिए डंडा भी लकड़ी।
7:49
है ना?
7:53
इसलिए व्यक्त भी अव्यक्त है क्योंकि व्यक्त अव्यक्त से व्यक्त है।
8:02
खुद से व्यक्त नहीं है वह। डंडा व्यक्त किससे है? लकड़ी से।
8:11
खुद से डंडा व्यक्त नहीं है।
8:15
यह पूरा चराचर किस से व्यक्त है? मैं मुझ अव्यक्त से।
8:22
है ना? अब मुझ अव्यक्त से व्यक्त है।
8:28
इसलिए व्यक्त भी अव्यक्त है।
8:34
इसको ज्ञात-अज्ञात में भी देख सकते हो। ज्ञात ज्ञात है कि अज्ञात ज्ञात है।
8:45
अज्ञात से ज्ञात है। है ना?
8:50
इसको आप ध्यान दो। यह जो ज्ञात की दुनिया है जो आप जीते हो आपकी एक फैमिली आपकी
8:58
छोटी सी दुनिया आपका सेंस एक सीमा तक काम करता है। यह बाउंड्री थोड़ा आकाश दिखाई देगा पास का।
9:08
थोड़े दूर तक का यह ज्ञात लेकिन पूरे इसके बैकग्राउंड में अनंत अनंत अनंत अज्ञात है।
9:23
अज्ञात से ज्ञात है। इसलिए ज्ञात भी अज्ञात है।
9:34
अव्यक्त से व्यक्त है। इसलिए व्यक्त भी अव्यक्त है।
9:55
ये बॉडी कहां से आई? अव्यक्त से आई कि व्यक्त से आई?
10:02
अव्यक्त से, कहां जाएगी?
10:06
अव्यक्त में जाएगी। तो बीच में जो यह बॉडी बोल रहे हो
10:13
पैदा होने के पहले और मरने के बाद अव्यक्त है। तो बीच में क्या यह व्यक्त है?
10:23
बीच में भी यह अव्यक्त है। आप जान ही नहीं सकते कि यह बॉडी क्या है?
10:31
साइंटिस्ट थक गए, दुनिया थक गई।
10:35
मोटा माटी आप लैंग्वेज चिपका देते हो। यह बॉडी है। बस यह आपकी काम चलाऊ लैंग्वेज है कि यह बॉडी है। इसमें आईज है दो हैंड है।
10:47
यह सब काम चलाऊ लैंग्वेज है।
10:50
और कुछ भी नहीं। आप जानते नहीं हो यह क्या है। इसलिए यह भी अव्यक्त है।
10:59
तो जन्म के पहले अव्यक्त, मृत्यु के बाद अव्यक्त इसलिए बीच में जो है वह भी अव्यक्त है।
11:11
पृथ्वी का भी जन्म देख लो। पृथ्वी जन्म के पहले अव्यक्त।
11:16
पृथ्वी में जो भी होगा खरबों साल वो भी अव्यक्त। पृथ्वी के मिटने के बाद फिर अव्यक्त।
11:26
अव्यक्त से व्यक्त है इसलिए व्यक्त भी अव्यक्त है।
11:32
मैं से माया है इसलिए माया भी मैं हूं। माया से मैं हूं ऐसा नहीं है।
11:42
मैं को ही कुछ मानते हो तो माया है। इसलिए माया भी मैं हूं।
11:52
माया और भगवान बोलने में दो हैं। है एक ही।
11:57
मैं ही कभी माया के रूप में भासता हूं और मैं ही अपने रूप में रहता हूं।
12:07
रहता मैं ही हूं।
12:32
तो जब तक रस्सी सांप लग रही है आपको तब तक भय लगेगा।
12:46
जब आप एकदम कंफर्म हो गए कि यह सांप नहीं है, रस्सी ही है। आप निर्भय हो जाते हो।
12:53
यह माया नहीं है, मैं ही हूं। आप निर्भय हो जाते हो।
12:59
आप एकदम श्योर हो गए ना कि यह माया नहीं है। मैं ही हूं। मैं यानी मैं आत्मा भगवान।
13:05
भगवान ही है। अब आप निर्भय हो गए।
13:10
और आपको कुछ और लग रहा है, सांप लग रहा है या माया लग रही है तो आपका भय नहीं जाएगा।
13:21
तब आप यह कह सकते हो कि यह भी सच है। यह भी मैं ही हूं क्योंकि
13:27
हां लेकिन जिसको यह सर्प लग रहा है, सांप दिख रहा है। उसके लिए यह भयभीत करेगा उसको।
13:38
इसलिए माया को भगवान जान, माया को मैं जान। यह माया नहीं मैं हूं।
13:48
क्योंकि मैं ही हूं। क्योंकि मैं ही हूं।
14:00
जब तक आपको लग रहा है कि माया है।
14:05
कुछ और हावी हो गया। तो भयभीत करेगा।
14:14
तो रस्सी का बोध होने पर सांप से भय नहीं लगता। मैं का बोध होने पर माया से भय नहीं लगता।
14:25
क्योंकि फिर माया कहीं है ही नहीं। सर्प कहीं है ही नहीं।
14:31
माया फिर भगवान की तरह है या कह लो मैं ही हूं। एक ही बात है। इसलिए माया को भगवान
14:39
जान, सर्प को रस्सी जान, डंडे को लकड़ी जान। ये जानना बहुत इंपॉर्टेंट है।
15:13
आपको कोई गु्थी नहीं सुलझानी है। कुछ ऐसा क्लियर नहीं करना है। ऐसा है।
15:24
अव्यक्त ही व्यक्त है।
15:36
देखने वाला अव्यक्त जो दिखाई दे रहा है व्यक्त तो देखने वाला ही तो दिख रहा है।
15:49
बगैर देखने वाले के क्या दिखता है? बताओ।
15:54
बगैर देखने वाले के क्या दिखता है? जल्दी बोलो।
16:01
जल्दी कुछ नहीं दिखता भी नहीं दिखता कुछ नहीं दिख नहीं दिखता भी आप नहीं कह
16:10
सकते बगैर देखने वाले के दिखता है यह तो कह ही नहीं सकते कुछ नहीं
16:16
दिखता यह भी नहीं कह सकते तो बगैर देखने वाले के क्या दिखता है
16:26
अब बोलो [हंसी] यार अब कुछ नहीं दिखता भी नहीं बोल सकते
16:36
दिखता है तो बोल ही नहीं सकते बगैर देखने वाले के क्या दिखता है
16:51
बोलती बंद बस यही भगवत दर्शन है जब बोलती बोलती बंद हो जाए।
17:01
यही आत्म दर्शन है। बोलती बंद।
17:07
अरे बगैर देखने वाले के क्या दिखता है?
17:15
बगैर जानने वाले के क्या जानते हो?
17:19
कुछ नहीं जानते। बोलोगे वो भी उसके लिए भी जानने वाला चाहिए।
17:25
बगैर जानने वाले के क्या जानते हो? बोलती बंद।
17:32
अब जान गए।
17:36
जब आपकी बोलती बंद हो जाती है तभी आप जान जाते हो।
17:52
तो बगैर देखने वाले के क्या दिखता है भैया? बगैर जानने वाले के आप क्या जानते हो?
18:15
तो इस बोलती बंद में रहो भला थोड़ी देर बंद ही हो जाओ
18:23
खोपड़ी का बंद होना जरूरी है ना आपके
18:40
तो बगैर देखने वाले के क्या दिखता है
18:58
तो देखना ही दृश्य होता है ना।
19:04
देखना ही दृश्य होता है। तो दृश्य भी देखने वाला है ना।
19:15
मतलब देखना ही दृश्य बनाना। इसलिए दृश्य स्वयं देखने वाला है।
19:25
लकड़ी डंडा बनी ना तो डंडा भी लकड़ी है ना।
19:33
देखने वाला ही दिख रहा है। वह दिख रहा है कि कैटेगरी है।
19:40
देखने वाला ही देखने वाला है। अब दृश्य भी देखने वाला है।
19:54
देखने वाला है तब दृश्य है। एक मान्यता है दृश्य। देखने वाला है तब दृश्य है।
20:04
यानी दृश्य भी देखने वाला है ना।
20:09
सारे दृश्य का आधार मन बुद्धि शरीर और ये पूरे चराचर ये जो दृश्य है। इसका आधार
20:16
कौन? देखने वाला देखने वाला है तब दृश्य है।
20:27
देखने वाला है तब देखने वाला है।
20:35
दृश्य वृश्य कहीं नहीं है। देखने वाला ही देखने वाला है।
20:59
आप देखने वाले को ही देख रहे हो।
21:03
अरे आप उधर से जो देख रहे हो उधर देखने वाला है कि नहीं? इधर से भी देखने वाला है कि नहीं?
21:12
सब जगह देखने वाला है कि नहीं?
21:15
तो देखने वाला देखने वाले को ही तो देख रहा है।
21:20
आप बोलते हो दृश्य देख रहे हो। अरे दृश्य है कहां? दृश्य मान्यता है।
21:30
देखने वाला ही देखने वाला है।
21:35
या देखने वाला देखने वाले को ही देख रहा है। बस अगर देख रहा है तो
21:49
तो जैसे डंडे का आधार लकड़ी तो इस पूरे डंडे में लकड़ी ही लकड़ी है ना बगैर लकड़ी के डंडा नहीं हो सकता।
22:02
बगैर देखने वाले के दृश्य नहीं हो सकता।
22:05
तो सारे दृश्य में देखने वाला ही देखने वाला है ना।
22:13
जैसे डंडे में लकड़ी ही लकड़ी है। इसका आधार लकड़ी।
22:21
सारे दृश्य का आधार देखने वाला। तो देखने वाला ही देखने वाला है।
22:29
दृश्य है कहां?
22:55
और देखने वाला जानने वाला यह वाला जो अपन लगाते हैं देखने वाला
23:05
जानने वाला यह कौन है भैया?
23:15
देखने वाला मैं हूं कि कोई और है? जानने वाला मैं हूं कि कोई और है।
23:25
अब उल्टा कह रहा हूं। मैं हूं को देखने वाला बोल रहे हो कि देखने वाले को मैं हूं कह रहे हो?
23:35
मैं हूं को देखने वाला कह रहे हो। मैं हूं को जानने वाला कह रहे हो। क्योंकि आप ही नहीं हो तो देखने वाला और जानने वाला रहेगा कौन?
23:47
वाला तो रहेगा ही नहीं ना। आपका होना जरूरी है ना। हां।
23:54
तो मैं हूं को ही आप देखने वाला जानने वाला
24:01
कहते हो अपने आप को ही
24:14
तो देखने वाला ही देखने वाला है। अब एक स्टेप और रिवर्स किए मैं हूं।
24:23
तब देखने वाला है। लकड़ी है तब डंडा है।
24:30
देखने वाला है तब दृश्य है। मैं हूं तब देखने वाला है। तो मैं ही हूं ना। देखने वाला कहां है?
24:44
दृश्य से आओ देखने वाले में। देखने वाले से आओ मैं में।
24:51
अब मैं हूं तब देखने वाला है। देखने वाला है तब दृश्य है।
24:58
है ना? तो यह सारा दृश्य का आधार देखने वाला है। देखने वाले का आधार मैं
25:08
ठीक। तो मैं सर्वाधार तो मैं देखने वाले में भी हूं। मैं हर दृश्य में भी हूं। अंततः मैं ही हूं।
25:18
सर्वाधार मैं ही हूं।
25:21
क्योंकि जो जिसका आधार होता है वही उसका सब कुछ होता है।
25:28
जैसे इसका आधार लकड़ी है तो इस डंडे का सब कुछ लकड़ी है।
25:34
इसका सिर से पैर तक लकड़ी ही लकड़ी। ऐसे ही देखने वाले का सब कुछ मैं हूं।
25:44
दृश्य का सब कुछ मैं हूं।
25:50
इसलिए हर चीज मैं ही हूं। हर चीज जो सत्य है आप कहे
25:56
उसी को मैं एक्सप्लेन कर रहा हूं। सत्य से भी एक परे पॉइंट हो गया कि मैं हूं।
26:06
अब हर चीज मैं ही हूं ना। सत्य असत्य का बात ही खत्म हो गया।
26:42
तो सर्वाधार में मैं आत्मा भगवान है ना
27:03
हां जी।
27:08
इसलिए ना कुछ अनित्य है ना नित्य है ना असत्य है ना सत्य है। सिर्फ मैं हूं।
27:25
सत्य के बगैर कौन रह सकता है?
27:30
अरे बोलो मैं।
27:34
तो सत्य का स्वामी कौन हुआ? मैं सत्य मेरे बगैर रह सकता है क्या?
27:42
तो सत्य का स्वामी कौन? मैं अब इसको परम सत्य भी मत कहो वही बात हो
27:50
जाएगी। सत्य का स्वामी मैं
28:34
तो देखने वाला नहीं है तब क्या दिखता है?
28:47
तो कुछ नहीं दिखता भी नहीं कह सकते। दिखता है वह तो कह ही नहीं सकते। है ना?
28:54
कुछ नहीं दिखता है कहना भी तभी पॉसिबल है जब दिखने वाला है।
29:02
तो देखने वाले के बगैर क्या दिखता है?
29:16
आप कुछ नहीं बोल सकते ना। जो बोलोगे वो देख के बोलोगे
29:25
[हंसी]
29:28
जो बोलोगे वह देख के बोलोगे तो देखने वाले के बगैर क्या दिखता है?
29:51
जो भी बोलोगे देख के बोलोगे जानने वाले के बगैर क्या जानते हो?
30:01
कुछ नहीं जानते भी नहीं कह सकते। वो भी जानने वाला होना चाहिए। तभी कह सकते हो।
30:07
सब कुछ जानते हैं वह भी नहीं कह सकते।
30:11
जानने वाला है तभी तो जानोगे ना। कुछ नहीं या सब कुछ
30:21
तो सब कुछ जानना और कुछ भी नहीं जानना इन दोनों का आधार कौन?
30:29
जानने वाला।
30:32
और जानने वाले तो आप हो ही तो आपको क्या जानना है ना कुछ नहीं जानना है ना सब कुछ जानना है
30:42
देखने वाले तो आप हो ही ना आपको सब कुछ देखना है ना कुछ नहीं देखना है
30:51
कितनी क्लियर बात
30:58
[हंसी]
31:05
देखने वाले के बगैर क्या देखते हो? क्या दिखता है?
31:11
अरे बोलो मौन कोई नहीं रहेगा।
31:15
[हंसी]
31:18
देखने वाले के बगैर क्या दिखता है?
31:38
जानने वाले के बगैर क्या जानते हो?
31:47
होने वाले के बगैर क्या होता है आपकी जिंदगी में?
31:52
होने वाले आप हो। आपका होना बोलते हैं ना होने वाले के बगैर आपकी जिंदगी में क्या
32:00
होता है बताओ कुछ नहीं होता भी नहीं कह सकते
32:07
[हंसी]
32:12
होने वाले के बगैर क्या होता है आपकी जिंदगी में बताओ ना यार
32:21
होने वाले के बगैर क्या होता है
32:33
जो भी बोलोगे होके ही बोलोगे होने वाले के बगैर तो आप बोल ही नहीं सकते
32:43
है ना यह होता है वह होता है या कुछ नहीं होता है यह आप होके ही कह सकते हो ना कि
32:50
यह होता है वह होता है या कुछ नहीं होता है ठीक
33:03
तो यह होता है, वह होता है, कुछ नहीं होता है। इन तीनों की आत्मा कौन है?
33:14
बोलो ना। होने वाला। है ना?
33:21
मतलब आप ही हो उसको अभी हम होने वाला जानने वाला और देखने वाला से समझ रहे हैं।
33:28
है ना? ताकि झंझट ही खत्म हो जाए क्योंकि यह जानना देखना होना यह सब आप लोग का किस्सा कहानी है।
33:40
तो जैसे देखने वाला ही दिख रहा है। होने वाला ही हो रहा है।
33:52
जानने वाला ही जाना जा रहा है। आप क्या जान रहे हो? आपको पता है आप जो भी जानते हो जो भी व्हाटएवर जानने वाले को ही जान रहे हो।
34:04
आप जो भी देखते हो देखने वाले को ही देख रहे हो।
34:10
जो भी हो रहा है आपकी जिंदगी में होने वाला ही हो रहा है। नाचो पागलों।
34:17
[हंसी]
34:20
कुछ नहीं हो रहा है वह भी होने वाला है। है ना? आप बोलोगे कुछ नहीं हो रहा है।
34:29
होने वाला है तभी आप कह पाओगे कुछ नहीं हो रहा है। उसका आधार भी होने वाला है।
34:39
तो क्या देख रहे हो? देखने वाले को ही देख रहे हो।
34:46
देखने वाला ही दिख रहा है। जानने वाला ही जाना जा रहा है। आप बहुत 30 मार खा बोलते
34:54
हो ना मैं यह जाना मैं वो जाना मैं वो जानता हूं। अरे कुछ नहीं जाने आप जानने वाले को ही आप जान रहे हो बस।
35:03
जानने वाला ही जाना जा रहा है।
35:08
अब कोई भी ब्रह्म ज्ञान यह विद्या वह विद्या कुछ भी बोलो जानने वाला सबका आधार है।
35:15
और जानने वाला ही जाना जा रहा है। कुछ नहीं जानते वह भी जानने वाला है। सब कुछ
35:24
जानते हो वह भी जानने वाला है। क्योंकि उसके बगैर कुछ नहीं जानते और सब कुछ जानते हो यह हो ही नहीं सकता।
35:33
सेम ऐसे ही होने वाला ही हो रहा है। आप बोलते हो मेरी जिंदगी में यह हो गया।
35:42
वह हो गया। अरे कुछ नहीं हुआ है। होने वाला ही हो रहा है और कुछ नहीं हुआ।
35:51
यह भी जो मैंने कहा वह भी होने वाला है। सोचो क्या चीज हो यार आप।
36:07
तो दिखता है वह दिखता है कि देखना दिखता है
36:17
हम देखना दिखता है भैया
36:23
आप सोचते हो दृश्य दिखता है ना देखना दिखता है
36:33
देखने वाला ही दिख रहा है और कुछ नहीं देख रहे हो आप। देखने वाले को ही देख रहे हो।
36:40
बस जानने वाले को ही जान रहे हो।
36:47
होने वाला ही हो रहा है।
37:00
अब देखने वाला, जानने वाला और होने वाला है कौन भैया? यह है कौन? कौन है यह शख्स?
37:08
मैं हूं। अब मैं हूं तब देखने वाला है।
37:17
मैं हूं तब जानने वाला है। मैं हूं तब होने वाला है।
37:23
देखने जानने और होने का आधार कौन? मैं। बीइंग का आधार। साक्षी का आधार।
37:33
जानने वाले का आधार कौन? मैं।
37:40
तो जैसे देखने वाला ही दिख रहा है। जानने वाला ही जाना जा रहा है। होने वाला ही हो
37:49
रहा है। ऐसी मैं ही देखने वाला हूं। मैं ही जानने वाला हूं। मैं ही होने वाला हूं।
37:55
इसलिए यह तीनों नहीं है। केवल मैं ही हूं।
38:01
ना कोई देखने वाला है ना कोई जानने वाला है ना कोई होने वाला है
38:07
केवल मैं हूं क्योंकि बगैर मैं के
38:16
देखने वाला बचेगा क्या जानने वाला बचेगा होने वाला बचेगा
38:24
इन तीनों की जान निकल जाएगी किसके बगैर जान निकल जाएगी मैं के बगैर जान निकल जाएगी तो मैं ही हूं
38:33
ना यह सब है कहां आपके बगैर इन तीनों की जान निकल जाएगी
38:46
इसलिए मैं हूं बस जिसका एक क्षण को भी अभाव नहीं होता
38:55
देखने वाले का भी अभाव हो जाता है जानने वाले का भी होने वाले का भी तो जो आप अपने होने में होने का प्रयास करते रहते हो उसका भी अभाव हो जाता है।
39:07
क्योंकि वह अभाव होगा ही क्योंकि होना ही समय के दायरे में आता है।
39:15
लेकिन मैं का कभी भी अभाव होता है क्या?
39:21
ना जिसका कोई भी अभाव ना कर सके वही सुप्रीम होता है।
39:30
भगवान का भी अभाव हो जाता है। अस्तित्व का भी अभाव हो जाता है। जागृत स्वप्न सुशुप्त सब का अभाव हो जाता है। दृष्टा दृश्य
39:39
दर्शन जानने वाला ज्ञाता ज्ञान गेले जिसका अभाव कोई भी ना कर सके और जो सबका अभाव कर दे वही बॉस है।
39:51
अरे वही आप हो यार।
39:54
आप सबका भाव कर देते हो ना सहज में कर देते हो देखने वाले का जानने वाले का होने वाले का
40:03
जीव का भगवान का व्यक्तित्व का अस्तित्व का जो सबका अभाव कर सकता है और जिसका अभाव
40:11
कोई नहीं कर सकता वह कौन है यस आप ही फाइनल हो खत्म बात
40:22
सेलिब्रेट करो इतनी सी बात के लिए कितने जन्म लिए हो
40:33
यार। इतनी सी बात है। है ना?
41:20
तो कोई भी ऐप ऐसे इंस्टॉल करते हो तो उसमें सबसे पहले आता है कौन सा देश क्लिक करो इंडिया यूएस कनाडा
41:29
पहले देश क्लिक करते हो फिर मेल फीमेल फिर ऐसे जो जो क्लिक करते हो सब फॉल्स है
41:38
[हंसी]
41:42
देश काल वस्तु सब फॉल्स है [हंसी] फिर आप क्लिक करते हो हस्बैंड हूं वाइफ
41:51
हूं है ना या जो भी क्लिक करते हो फिर अपनी एज क्लिक करते हो ऐसा दुनिया भर का
41:59
जो भी क्लिक करते हो फिर अपना नाम लिखते हो कि मेरा नाम यह है। ये टोटल फॉल्स है।
42:06
मेरी एज यह है। फॉल्स है। ऐप इंस्टॉल करो ही मत।
42:15
[हंसी]
42:23
लेकिन एक हकीकत है हर फॉल्स में मैं ही हूं फॉल्स की सत्ता नहीं
42:33
हां जो बात शुरू हुई थी आपसे हूं तो मैं ही
42:41
मेरी ही लीला है देश काल वस्तु भी
42:53
लीला की तरह भी मैं ही हूं।
42:58
लेकिन अब अज्ञानता नहीं। अज्ञानता जब आप एक्यूरेट कर लेते हो ना कि बस
43:05
मेरे अतिरिक्त कुछ नहीं है। वह पॉइंट आपको रेस हो गया।
43:11
फिर आप खेल सकते हो। हर चीज में प्ले कर सकते हो। हर चीज फिर यह सारे ऐप आप ही हो।
43:20
उसके अंदर जो भी करते हो आप ही हो।
43:26
तो यह मैं नहीं हूं और यह मैं हूं। दोनों करके आप खेल सकते हो। क्योंकि आपको अच्छे से पता है कि मैं के अतिरिक्त कुछ कभी हुआ ही नहीं।
43:47
हां जी तो जानने वाला देखने वाला होने वाला भी
43:58
गया है ना तो जो गया वो कभी था ही नहीं केवल माना
44:06
हुआ था और और जो कहीं आता जाता नहीं है वो मैं हूं।
44:14
बनता बिगड़ता नहीं है वह मैं हूं। भाव अभाव से परे मैं हूं।
44:43
हां जी
44:55
तो अब आप देखने वाले से मैं को पाने चले हो तो आप धोखा खाओगे। साक्षी से, दृष्टा
45:02
से, जानने वाले से, होने वाले से यह तो इनसे कैसे मैं को पाओगे? क्योंकि यह खुद
45:12
मैं से हैं। मतलब डंडे से कैसे लकड़ी को पाओगे?
45:18
जो खुद लकड़ी से है डंडा।
45:26
तो मैं किसी से भी किसी से भी पाने योग्य नहीं हूं।
45:35
किसी से भी मैं पाने योग्य नहीं।
45:39
कोई भी दृष्टा, साक्षी, ध्यान, ज्ञान, भक्ति, परमात्मा, अस्तित्व
45:49
मुझे उससे पाया नहीं जा सकता। मैं को हां। क्योंकि इन सब का आधार मैं हूं।
45:57
यह सब निराधार हैं। इन सब का आधार मैं हूं।
46:05
और मुझे अपने आप को पाना है नहीं। है ना?
46:11
किसी और से मैं पाया जा नहीं सकता। और मुझे अपने आप को पाना है नहीं।
46:23
पाया कहे सो बावरा खोया कहे सोर
46:29
जो का त्यों भरपूर है ना यह सब सुने हो ना
46:34
तो मुझे अपने आप को पाना नहीं है
47:11
तो मैं हूं तब जानने वाला है, देखने वाला है,
47:17
होने वाला है। मैं हूं तब जानने वाला है, देखने वाला है, होने वाला
47:25
है। मैं हूं तब तब है।
47:32
मैं हूं तब तब है।
47:39
यह तब भी मैं हूं तब है।
47:46
[हंसी]
47:53
तो आगे का बोलना ही क्या फिर
48:00
अब मैं हूं कोई शब्द नहीं है ना मैं हूं मैं हूं करते हो तभी मैं हूं कि
48:09
मैं हूं जब आप नहीं करते तभी भी मैं हूं तब भी मैं ही हूं है ना
48:22
मैं इस समय नहीं हूं। 24 आवर में मैं इस समय नहीं हूं भी होके ही कहोगे।
48:34
वरना आप कह ही नहीं सकते कि मैं इस समय नहीं हूं कि मैं यह 23वें घंटे में नहीं हूं। वो तो होके ही बोले आप।
48:45
मैं खरबों वर्ष पहले नहीं था।
48:53
मैं खरबों वर्ष पहले नहीं था को था बताएगा कि नहीं था बताएगा?
49:02
था बताएगा ना यार। होके ही तो कहोगे ना कि नहीं था? हां।
49:10
मैं खरबों वर्ष पहले था कि नहीं था होकर बोलोगे कि नहीं होकर बोलोगे?
49:18
होके ही आप कह सकते हो ना कि था कि नहीं था। तो आप थे ना होके ही बोले ना।
49:27
इतना कॉमन चीज है यार। आप बोलते हो मर जाएंगे हम। क्या होगा?
49:35
[हंसी]
49:44
जो होगा देखा जाएगा। आगे का कुछ दिखता नहीं। ऐसा जो होगा देखा जाएगा। ऐसा बोल देते ना अपन [हंसी]
49:53
खुद को रिलैक्स करने के लिए। जो होगा देखेंगे यार।
50:13
अरे भाई मरने के बाद मैं रहूंगा कि नहीं रहूंगा।
50:18
रह के ही तो कह सकते हो ना कि रहूंगा कि नहीं रहूंगा।
50:24
हां बगैर रहे आप कह कैसे सकते हो कि रहूंगा कि नहीं रहूंगा।
50:31
बताओ
50:37
[हंसी]
50:39
मरने के बाद मैं रहूंगा कि नहीं रहूंगा बताओ यार
50:46
रह के ही आप कह सकते हो कि रहूंगा कि नहीं रहूंगा
50:53
बगैर रहे आप कैसे कह सकते हो कितना कॉमन सेंस
51:14
तो मैं हूं तब रहूंगा है और नहीं रहूंगा। क्या?
51:24
रहूंगा, नहीं रहूंगा, था कि नहीं था? मैं हूं तभी आप कह सकते हो था कि नहीं था
51:32
रहूंगा कि नहीं रहूंगा अभी हूं कि नहीं हूं भूत भविष्य वर्तमान
51:39
मैं हूं तब यह आगे का चीज इनका आधार मैं ही हूं
52:34
तू कितनी बड़ी बड़ी विडंबना है कि
52:42
आपको अपने ही आपको कंफर्म करना पड़ रहा है।
52:50
है ना?
52:57
मैं को कंफर्म करना पड़ रहा है। हद हद हो गई।
53:04
इससे देखने वाले से जानने वाले से इससे उसे क्या है यार
53:12
मैं को भी कोई कंफर्म करना पड़ता है
53:38
हम हम अरे
54:55
यह सब सुनकर जो नासमझ हो जाता है। समझ जाता है ऐसा नहीं भैया।
55:04
ना समझ हो जाता है बस
55:12
वही समझ गया
55:20
ना समझी से समझ पड़े
56:11
तो अब थोड़ा सा बारीक है मामला।
56:18
कभी भी आपको पता चला देखने वाला कब दृश्य बनता है पता चला कभी
56:31
कभी भी पता चला अच्छा देखने वाला कब दृश्य बनता है पता नहीं चलता ना मैं कब देखने वाला बनता हूं
56:40
पता चलता है नहीं चलता क्योंकि मैं देखने वाला और दृश्य एक ही है।
56:51
खत्म बात कोई उसमें कट नहीं है। कोई स्पेस नहीं है।
56:59
तो मैं तीनों में खेलता रहता है। होता तो अपने में है। खेलता है।
57:08
मैं कब होने वाला बनता हूं? उसके बीच डिफरेंस है।
57:15
होने वाला कब यह हो रहा है वह हो रहा है बन जाता है उसके बीच डिफरेंस है नहीं तो मैं होने वाला और हो रहा है यह तीनों
57:25
एक ही है अंतत मैं ही हूं
57:33
कितना सुंदर है देखो अरे बहुत सत्संग करोगे ना बहु काल करे
57:42
सत्संगा तब होई संस से भंगा क्या समझे एक सुन लिए और उड़ गए ऐसा थोड़ी ना होता है।
57:54
[हंसी]
58:00
जब तक जीना मरना सत्संग ना हो जाए तब तक कुछ नहीं होता।
58:08
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
58:14
तो मैं कब जानने वाला बनता हूं? उसके बीच कोई गैप है क्या?
58:23
और जो भी जानने वाला जान रहा है तो जानने वाला जो भी जान रहा है वह कब जान
58:31
रहा है बन जाता है। कोई गैप है? तीनों एक ही है।
58:40
और एक कौन होता है? मैं ही होता हूं ना।
58:44
किसी को भी लगता है क्या? मैं दो हूं। एक तो मैं ही हूं ना।
58:54
खत्म बात है यार।
58:58
[हंसी]
59:00
[गहरी सांस लेने की आवाज़]
59:07
हर बार बात खत्म हो जाती है। फिर शुरू हो जाती है। मैं ही बनता हूं ना। यह आनंद है मेरा।
59:14
हां।
59:19
तो कोई भी गैप नहीं है। ये दृश्य, दृष्टा और मैं में कोई गैप है ही नहीं। इसलिए क्या बोलते हैं
59:28
हम? मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
59:43
तो ये सृष्टि और स्रष्टा में कोई गैप है क्या? स्रष्टा कौन है?
59:52
सृष्टि को जानने वाला स्रष्टा है। आप बोलते हो ना स्रष्टा सृष्टि में है।
1:00:00
हां है। लेकिन सृष्टि को जानने वाला स्रष्टा है। तो सृष्टि स्रष्टा और मैं
1:00:08
तीनों में कोई भी गैप है क्या? है ही नहीं यार।
1:00:16
है ही नहीं।
1:00:22
कहीं कोई बीच में गैप नहीं है। कब देखने वाला दृश्य बन जाता है? कब मैं देखने वाला बन जाता हूं। इस बीच गैप है ही नहीं।
1:00:32
बॉर्डर कहीं है ही नहीं। राइट?
1:00:38
अब मैं कौन है? जल्दी से बोलो। आत्मा भगवान बोलो ना।
1:00:47
यस। मैं आत्मा मैं आत्मा भगवान में कोई गैप है क्या
1:00:55
नहीं है ना तीनों एक ही है ना राइट अब मैं आत्मा भगवान
1:01:04
कब माया बन जाता है उसमें गैप है क्या यही प्रमाण है कि माया और भगवान एक ही है
1:01:14
अरे नाचो
1:01:18
[हंसी]
1:01:20
कब आप दुनिया बन जाते हो? इसके बीच गैप है क्या? नहीं।
1:01:30
तो जब आप दुनिया बन जाते हो तब आप भगवान देश में नहीं रहते। मैं देश
1:01:39
में मैं देश में रहते हो तब दुनिया देश में नहीं रहते। यही बता रहा है कि दोनों एक ही है।
1:01:48
यह दोनों चीजें आप एक साथ एक ही समय में नहीं बनते हो।
1:01:53
यानी डंडा और लकड़ी दोनों एक साथ एक ही समय में नहीं बनता।
1:01:59
या तो लकड़ी देश में रहोगे या आप डंडे देश में रहोगे।
1:02:03
है ना? बस या तो मैं देश में या माया देश में और बीच में कोई गैप नहीं है।
1:02:13
तो मैं ही माया बन जाता हूं और माया ही मैं बन जाता हूं। मैं बनना नहीं है। मैं हो जाता हूं। है ना? कम बैक रिवर्स।
1:02:26
और और गहरी बात बोलूं तो बन जाता हूं जैसा कुछ नहीं है दोनों के बीच में।
1:02:36
ऑटोमेटिक है। यह गियर ऑटोमेटिक चेंज हो रहा है। और यह गड्डी जिंदगी की ऑटोमेटिक चल रही है।
1:02:46
[हंसी]
1:02:48
इस वजह से कार जैसे गियर चेंज नहीं कर रहे हो आप कि अभी भगवान, अभी माया। अभी द्रष्टा, अभी दृश्य। अरे, एकदम शानदार चल रही है ऑटोमेटिक।
1:03:00
हम? स्मूथ।
1:03:03
एक संगीत में
1:03:28
तो मैं कब शरीर बन जाता हूं? इसके बीच कोई गैप है क्या?
1:03:36
नहीं है। कोई बॉर्डर है ही नहीं।
1:03:45
तो कहीं पर भी कोई बॉर्डर है ही नहीं, गैप है ही नहीं। किसी भी चीज सहज में सब हो रहा है। नेचुरल
1:03:55
ओम आ
1:04:32
तो एक ही समय में यह दोनों नहीं रहते कभी भी भगवान और माया।
1:04:38
यही प्रमाण है कि भगवान और माया एक ही है। एक ही समय में कभी नहीं रहते।
1:04:50
आप ही अपना जिंदगी देखो। कभी मैं देश में रहोगे भगवान देश में। कभी माया देश में रहोगे दुनिया देश में।
1:05:00
जैसे सुबह से रात होती है। उसके बीच एक बॉर्डर है इवनिंग का।
1:05:08
इसमें कोई बॉर्डर नहीं।
1:05:20
तो मैं कब माया बन जाता हूं?
1:05:25
चलो मैं अपने आप को ही मान के माया बन जाता हूं। वो ठीक है। लेकिन मैं कब माया बन जाता हूं। बन गया।
1:05:34
है ना? एकदम स्मूथ
1:05:46
और माया से फिर मैं में कब रिवर्स आ जाते हो आप? ऐसा कोई कनेक्शन है क्या?
1:05:55
कोई कनेक्शन नहीं। क्योंकि यह दोनों अलग है ही नहीं।
1:06:08
अब माया को भगवान जानना पड़ेगा क्या?
1:06:14
ये तो सहज में हो रहा है। इसलिए सब सुंदर है।
1:06:25
शब्द कब मौन हो जाते हैं? मौन से कब शब्द उड़ जाते हैं। इसके बीच गैप है कोई?
1:06:33
अरे कहीं कोई गैप है ही नहीं। बाउंड्री लेस। एक स्मूथ है हर चीज सहज में।
1:07:06
अभिषेकाकार को हटा के दिखा दो।
1:07:13
[हंसी]
1:07:17
[गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
1:07:24
अब मैं से भिन्न भी कुछ करने का मामला ही नहीं है। अब तो ये तो सेट है ना एकदम।
1:07:30
ये सत्संग की महिमा है। सुनते सुनते सुनते ये सेटल। मतलब जो सेटल है ही उसका बोध हो जाता है।
1:07:39
ऐसा बोल लो। लैंग्वेज है वो सब।
1:07:44
लो पानी दो यार
1:07:58
हां जी
1:08:19
तो अगर एकदम लो जाए अपन तो मैं ही परेशानी बनता हूं।
1:08:30
इसलिए परेशान होने की जरूरत ही नहीं। कोई और परेशानी नहीं बनता।
1:08:39
मैं ही दुखी होता हूं।
1:08:42
आप ही दुखी होते हो ना? मैं ही दुखी होता हूं इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं है।
1:08:48
दुखी होने की जरूरत नहीं है। कोई और थोड़ी ना दुखी हुआ। मैं ही दुखी हुआ।
1:08:56
ये तो आनंद है। हां जी।
1:09:13
तो यार दुख में सच्चिदानंद को देख लेना और बात स्वयं में तो सच्चिदानंद सच्चिदानंद को तो
1:09:21
देख लेते हो तो इसके बीच कोई ऐसा बॉर्डर नहीं है गैप
1:09:33
नहीं है ना ज्ञाता ज्ञान गे बीच कोई गैप नहीं है। फिर
1:09:44
इन तीनों का स्वामी मैं उसके बीच भी कोई गैप नहीं है। द फोर्थ है ना मैं तो उसके बीच भी कोई गैप नहीं है।
1:09:57
यह लीला चल रही है। आनंद से एकदम सुंदर सब कुछ सुंदर है।
1:10:24
तो ये सब लीलाएं याद रखना ना जैसे तुम्हारा नाम ज्योत है तुम्हारा नाम गोविंद है। विराज है सौरभ जी है। सैफ है।
1:10:37
ऐसे ये लीला है। किसी को हम नाम दे देते हैं पाप। किसी को नाम दे देते पुण्य। किसी को नाम दे देते हैं सत्य, किसी को असत्य,
1:10:45
किसी को नित्य, किसी को अनित्य। यह भी एक कैरेक्टर है। एक अदृश्य कैरेक्टर। यह लीला है।
1:10:54
किसी को नाम दे देते हैं जीवन, किसी को मृत्यु, किसी को बंधन, किसी को मोक्ष।
1:11:00
यह खेलने के लिए दिए गए नाम, रोने के लिए नहीं दिए गए। [हंसी]
1:11:12
विकल्प-विकल्पक जीव भगवान ये सब प्ले के लिए जस्ट अ प्ले।
1:11:28
क्योंकि अनंत नाम रूपों में अभिव्यक्त तो मैं ही हो रहा हूं ना।
1:13:18
हां जी अब जैसे मैं वह आदमी गुड़ाकू कर रहा है
1:13:26
वहां से अब थूक फेंकेगा है ना वो खड़ा है बिल्डिंग के ऊपर वो देखो
1:13:34
अब मेरे लिए वो गलत है बिल्डिंग में थूक फेंकना है ना गलत है ना भाई एक व्यवहारिक दृष्टि
1:13:42
से व्यवहार में आप व्यवहार जैसे ही चलोगे ना
1:13:49
वो देखो फेंकने वाला है। बुढ़ाकू घिस रहा है।
1:13:54
[हंसी]
1:13:57
ऊपर जो खड़ा है है ना?
1:14:01
और इतने बार मना करने के बाद गुटखा गुड़ाकू
1:14:11
तो अब गलत को गलत ही बोलोगे ना। व्यवहार में वैसे ही रहोगे ना?
1:14:17
यह पूरा प्ले करना है व्यवहार में एज इट इज जो गलत गलत जो सही सही
1:14:24
हां वेल प्ले होना चाहिए ना तुम खेल रहे हो या सामने वाले को पता ही
1:14:30
ना चले तब तुम वेल प्ले कर रहे हो तुम खेल रहे हो यह सामने वाले को पता ही
1:14:39
ना चले तब तुम वेल प्ले कर रहे हो
1:14:57
हम जाओ उसको चिल्ला के आओ जो तेरा रोल है जाओ
1:15:04
बंद ऊपर है ना जा वह दिख जाएगा अलग से
1:15:12
[हंसी]
1:15:28
असली गुरु वो है जो पता ही ना चले ये गुरु है।
1:15:35
तब वो असली प्लेयर है।
1:15:40
असली भगवान वो है कि पता ही ना चले वो भगवान है। तो आप भगवान हो पता चलता है
1:15:49
क्या किसी को? आपको भी नहीं चलता। आप असली प्लेयर हो।
1:15:56
हां। यह बहुत गुण रहस्य है।
1:16:02
ऐसा खेले हो कि अब आपको भी पता नहीं चल रहा है। [हंसी] कि आप ही परब्रह्म हो।
1:16:10
हम तो बहुत आनंद है जिंदगी में
1:16:21
रस है व्यवहार में व्यवहार की तरह रहो जो भी
1:16:27
नियम कायदे हैं नीति पूर्वक चलो बढ़िया प्रेम से जियो भीतर से प्रेम का भाव रखो सबके लिए
1:16:36
है ना और अब तो एकाकार तो ऑलरेडी है ही अब तो कुछ बात ही नहीं बची।
1:16:45
यस किसी को कुछ कहना है तो मेरे को भी दो चार लाइनें सुना दो तो मैं भी कुछ सुन लूं यार। चालू करो तो कुछ लोगों को।
1:16:54
पुराने लोग नहीं बोलेंगे। नए आकर बोलेंगे।
1:16:59
नमस्कार हां नमस्कारम मैं कितना सामान्य है।
1:17:13
हम इतना सब कुछ चल रहा है। इतना खेल चल रहा है।
1:17:23
इस सब में भी कितना वो कितना सामान्य है।
1:17:28
हम हम उस पर कोई प्रभाव ही नहीं होता।
1:17:37
वो माया भी हो जाता है और खेल भी खेल रहा होता है लेकिन अंदर से उस पर कोई प्रभाव ही नहीं होता उसका।
1:17:47
हां बिल्कुल सही।
1:17:51
पहले पहले तो ऐसे डर सा लगता था कि कुछ खराब हो गया कुछ गलत सा हो गया
1:18:00
कि ऐसे पूरा उसमें क्यों नहीं हो क्यों नहीं हो पा रहा है
1:18:10
पर ऐसा ही है मैं ना इतना सामान्य ही है पहले मेरे को कुछ उसी में हो करके हो नहीं पा रहे हो
1:18:19
हर कोई पूरा मैं ही है इसलिए हो नहीं पा रहा है और आपके अतिरिक्त कुछ है ही नहीं ना
1:18:29
रहा सवाल प्रभावित होना हम क्या है एक हमारा पुराना पैटर्न है कि कुछ भी हो जाए
1:18:36
हमको प्रभाव ना हो हम प्रभावित ना हो अरे हो जाए प्रभावित
1:18:45
जो भी हो रहा है उससे घुस जाए अंदर घुस जाए एकदम से देखेंगे क्या होगा
1:18:51
तब भी प्रभाव ना पड़े तब सही है ना हमारा यह पैटर्न रहता है ना यार ये कुछ
1:19:01
हो गया कुछ आ गया और प्रभावित ना हो हमारा यह पैटर्न है
1:19:09
अरे हो जाए प्रभाव हो जाए प्रभावित घुस जाए अंदर एकदम धस जाए जो भी हो रहा है
1:19:17
दुनिया देखा जाएगा।
1:19:23
आत्मवान चैलेंज करता है। पड़ जा प्रभाव बोलता है।
1:19:29
हां तो एक नया-नया पैटर्न से खेलना सीखो।
1:19:38
तो पुराना लैंग्वेज है। हटाते जाओ।
1:19:53
हां जी बाकी सही जा रहे हो सब सामान्य है जो आप बोले ना बहुत अच्छा है बहुत ही
1:20:00
बढ़िया है
1:20:09
क्योंकि कोई भी लहर हो लहर से सागर प्रभावित
1:20:16
नहीं हो रहा हूं। बोलेगा तो अच्छा लगेगा क्या? जैसे सागर बोले कि मैं अपनी इस लहर से कोई भी लहर उठी मैं प्रभावित नहीं हो
1:20:26
रहा हूं। ऐसा बोलेगा क्या? नहीं बोलेगा।
1:20:31
सागर आनंद में है। लहरें उठे या ना उठे प्रभावित हो या ना हो।
1:20:40
है ना? यस।
1:20:44
हो जाए प्रभाव देखा जाएगा तब वह सागर वाली बात आती है पावर आता है
1:20:57
और सागर और लहर के एग्जांपल में चलो सागर बहुत बड़ा है लहर बहुत छोटी है
1:21:06
मैं और जिससे भी आप प्रभावित हो रहे हो उसके एग्जांपल में वह कहीं है ही ही नहीं
1:21:13
जिससे आप प्रभावित हो रहे हो वो कहीं है ही नहीं उसकी सत्ता ही नहीं है कहीं
1:21:21
हां ये तो डिफरेंस करना ही गलत है ओके जी
1:21:31
अच्छा क्या राहुल क्या सोचता रहता है हां
1:21:42
कुछ बता दे यार स्मार्ट लग रहा है आजकल तू यार ऐसा मेरे को भी करा दे ना ट्रिम वम ये
1:21:49
एकदम बेकार जैसा दिखता है इधर
1:21:53
[हंसी]
1:21:57
हां जी बताइए है कोई
1:22:08
गुरुदेव प्रणाम हां प्रणाम।
1:22:14
हां मैं जयपुर से बोल रहा हूं। गुरुदेव आपका हां जी।
1:22:22
हां मैं डेढ़ साल से आपका सत्संग सुन रहा हूं।
1:22:26
हम ये बहुत अच्छा लग रहा है। मैं आपके वहां आ के भी गया था क्योंकि हां जी। हां जी। बहुत सुंदर।
1:22:37
मैं आके गया था वहां पे और मैं आपसे दीक्षा दीक्षा भी आपको गुरु मानता हूं
1:22:44
गुरुदेव आपको हम और मेरे एक विनती है मेरे परिचय नहीं है
1:22:52
गुरुदेव जी बताइए
1:23:01
हां मेरे शरीर में कुछ ऐसे बाहर की कुछ
1:23:12
आपकी आवाज बहुत कट के आ रही है।
1:23:18
आपकी आवाज बहुत कट के आ रही है।
1:23:26
मुझे क्या है गेम?
1:23:29
हम हां गुरुदेव मेरे थोड़ी परेशानी रहती है ये
1:23:40
शरीर में परेशानी रहती है शरीर में परेशानी रहती है
1:23:47
ये थोड़ी ये ऊपर की चीजें होती है ना हम हां
1:23:55
अरे मैं आपको मेरे शरीर में भी परेशानी रहती है तुम मैं क्या [हंसी]
1:24:05
हां मेरे शरीर में भी कुछ लगा रहता है हां वो यार एंजॉय किया
1:24:12
सत्संग जी मेरे काफी आपके सत्संग जी मेरे नहीं वो तो कहता हूं गुरुदेव रात को परेशान करते हैं मेरे को
1:24:21
हां फिर आपका सत्संग बोल लेता हूं मैं तो सुनो ना सुनो मैं बोल रहा हूं क्योंकि
1:24:29
मेरे शरीर में भी परेशानी होती है और मैं सारी परेशानियों से प्रभावित भी होता हूं।
1:24:37
प्रभावित ही हो गया ना क्या?
1:24:41
हम केवल क्या एक ही पैटर्न से अप्रभावित अरे प्रभावित ही हो गया ना यार। क्या हो गया उससे?
1:24:51
है कि नहीं? एक एंगल दूंगा।
1:24:57
[हंसी]
1:25:00
बस मस्त रहो।
1:25:02
ओके मैम वो मंत्र कौन सा जपू आप मुझे बता दो मेरे को।
1:25:11
आपको म्यूट कर रहे हैं हम क्योंकि आपकी आवाज नहीं आ रही है। है ना?
1:25:18
आनंद में रहिए। उनको म्यूट करो।
1:25:26
क्या हाल है प्रवीण जी? मस्त। स्मार्ट हो गए हो आप?
1:25:34
101 साल उम्र कम हो गई लग रही है अब।
1:25:39
[हंसी]
1:25:45
शानदार।
1:25:47
अभी रुको। मैं भी दाढ़ी उड़ाता हूं। रुको एक आध दिन। [हंसी]
1:25:55
हां जी
1:26:09
तो जब मैं हूं तो प्रभावित हो जाऊं या ना हो दोनों मेरा आनंद है ना। हम्म।
1:26:18
मैं हूं तो द्रष्टा हो जाऊं या दृश्य हो जाऊं? दोनों मेरा आनंद है ना?
1:26:24
मैं हूं तो होने में रहूं या जो हो रहा है वह हो जाऊं। दोनों आनंद है ना?
1:26:32
इसलिए आनंद ही आनंद है और और आनंद ही आनंद है।
1:26:42
[हंसी]
1:26:48
समस्या तब होती है जब कोई और रहता है। जब मैं ही हूं तो समस्या क्या है? बल्कि समस्या भी मैं हूं।
1:26:59
तो समस्या से भी समस्या नहीं है मुझे।
1:27:06
मैं दुख से भी दुखी नहीं हूं। अंगीकार है सबका क्योंकि मैं ही हूं ना।
1:27:13
अंगीकार भी करना एक थोड़ा अदर कोई करते हो आप।
1:27:21
स्वीकार और इंकार किसी दूसरे का किया जाता है। मेरे यार अपना नहीं।
1:27:28
तो ना आपको कुछ इंकार करना है ना कुछ स्वीकार करना है ना ग्रहण करना है ना कुछ त्याग करना है
1:27:38
यही असली तथा अगर तथा कहे वर्ड में तो नहीं यार ये पुराना चैप्टर है मैं हूं हां
1:28:02
हां जी
1:28:26
प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम प्रभु जी
1:28:34
कुछ कहना चाहती हूं जैसे एक शिल्प शिल्पकार होता है वो पत्थर में से
1:28:41
परमात्मा को परमात्मा बना देता है। आपने वैसे ही रोज पत्थर में से आपने परमात्मा
1:28:48
बना ही दिया आपने प्रभु बहुत-बहुत आओ बहुत आओ प्रभु प्रेम प्रणाम।
1:29:03
प्रेम प्रणाम है और शिल्पकार तो कुछ
1:29:09
चीजें अलग करता है उस पत्थर में से मेरे को कुछ अलग करना ही नहीं
1:29:19
आप जो हो जैसे हो कंप्लीट हो सुंदर हो और साक्षात ईश्वर हो
1:29:28
साक्षात दैहिक तल पे भी मानसिक तल पे भी आत्मिक तल पे भी
1:29:37
हर तल पे क्योंकि आप ही हो मैं के अतिरिक्त कुछ होता ही नहीं
1:29:47
प्रेम प्रणाम जी प्रेम प्रणाम कर दो मैं जून में आ रही हूं
1:29:53
जी आइए मोस्ट वेलकम क्या नाम है आपका उषा है मेरा नाम मैं गुजरात अहमदाबाद से
1:30:01
हूं जी हां जी धन्यवाद प्रभु धन्यवाद
1:30:08
प्रणाम जी प्रणाम तो वाणी को विश्राम दिया जाए अगर आप लोग
1:30:19
की आज्ञा हो तो नहीं है ओके चलने दो भाई [हंसी]
1:30:33
पानी
1:30:45
प्रेम प्रणाम प्रभु श्री प्रेम प्रणाम
1:30:51
सच पूछिए तो मुझे आपकी बातें सर घूम जाता है बट अच्छा लगता है सुनने के लिए।
1:30:59
ओके।
1:31:00
एंड मैं कुछ समझना भी नहीं चाहती हूं। सर घूमता है। ओके फाइन एक्सेप्टेड। बस सुनना है। बस उतना ही।
1:31:11
तो सर घूमता है फिर भी क्यों सुनते हो मेरे को?
1:31:16
अच्छा लगता है। एक एफिनिटी है कि मुझे लगता है कि मेरा ट्रू नेचर को टच कर रहा है वो।
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हां, अच्छा लगता है तब ठीक है। तब सही जा रहे हो। बहुत बढ़िया।
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कुछ दिनों में सर घूमना बंद हो जाएगा। है ना? ओके। यस।
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क्योंकि सर ही नहीं बचेगा तो घूमेगा कैसे?
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[हंसी]
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लेकिन लेकिन लेकिन सुकून होता है। मन को शांत लगता है। सुकून होता है।
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हां जी। हां जी।
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क्योंकि हम की बात है ना आपकी बीइंग की बात
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बहुत सुंदर जुलाई में मैं फैमिली के साथ आने की कोशिश करूंगी गुरुदेव
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हां बस इसमें कोशिश को हटा दीजिए बाकी सब ठीक है हां जी सही है प्रेम
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प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम कैसे हो आप
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हां हम तो आनंद में है आप बताओ कैसे हो बेटा हम भी अच्छे हैं
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हम आप वृंदा बोल रहे हो हां हां कल आपसे बात हुई थी। मेरे को बहुत आनंद आया।
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अच्छा बहुत अच्छा लगा कल आपसे बात करके। मुझे भी आपको बात करते हुए अच्छा लगता है।
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हम्म।
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प्रभु जी, व्यक्त का मतलब क्या होता है?
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व्यक्त का मतलब होता है बेटा जिसको बताया जा सके है ना
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उसको कहते हैं व्यक्त जिसको बताया जा सके शब्दों से
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जिसको बताया जा सके उसको कहते हैं व्यक्त और जिसको बताया ही नहीं जा सकता उसको कहते
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हैं अव्यक्त तो जिसको बताया बताया ही नहीं जा सकता। हम
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चार साल से उसी को बताने का प्रयास कर रहे हैं। [हंसी] और फिर भी
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लोगों को ग्रहण हो रहा है। यह आश्चर्य आत्मसात हो रहा है।
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ये आश्चर्य है।
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क्योंकि जो सुन रहे हैं अगर जिसको बताया नहीं जा सकता उसी को सुनना है उसको तो वो सुन लेगा।
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सुनने वाले को अव्यक्त को ही सुनना है तो अव्यक्त को सुन लेगा।
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और जिसको व्यक्त को सुनना होता है वह बौद्धिक ज्ञानी हो जाते हैं। वो गड़बड़ है।
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हम प्रभु जी मैं आपका सत्संग सुबह सुन के जाती हूं। स्कूल से 15 मिनट और स्कूल से आपकी भी सुनती हूं।
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हां बहुत अच्छा है बेटा।
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हमेशा अपना संग साथ अच्छे बच्चों से के साथ रखना। जो लोग धार्मिक हैं जो लोग भगवान की बातें करते हैं।
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वैसे लोगों के संग साथ रहना है ना वैसा ग्रुप होना चाहिए आपका फ्रेंड सर्कल
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का ओके बाकी मस्त रहो
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हां बेटा आई लव यू प्रभु लव यू बेटा बहुत सारा प्यार
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बाय बाय प्रणाम प्रभु जी
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प्रणाम बेटा
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तो अब सबको प्रेम प्रणाम है। वाणी को विश्राम देते हैं।
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मस्त रहिए।
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प्रेम प्रणाम सबको।