0:00
ओम
0:20
मुक्ति तो यही है ना कुछ भी माया माही मुक्ति है हम
0:26
माया को हम चूस थोड़ी करते हम हम
0:33
कुछ भी ना दिखे यह भी एक माया है है ना?
0:42
आप क्या सोचते हो? गहरी नींद में कुछ नहीं दिख रहा है यानी आप ठीक हो। नहीं वह भी माया है।
0:51
दिख रहा है वह भी माया है। कुछ नहीं दिख रहा है वह भी माया है।
0:56
है ना? कुछ पता ही ना चले वह भी एक माया है।
1:04
यह प्रथम कि वह भी एक माया है।
1:09
द्वितीय जो दिख रहा है, जो नहीं दिख रहा है, जो देख रहा है, सब परमात्मा है।
1:18
कुछ भी माया नहीं है।
1:24
आप गलत देख रहे हो और जो आपको मजबूरी फील हो रही है, वह गलत दृष्टि के कारण हो रही है।
1:37
जो आपको मजबूर फील होता है कि देखना पड़ता ही है तो क्या बुरा है यह सब देख रहे हो तो
1:47
यह पूरी प्रकृति अगर दिख रही है
1:54
तो इसमें बुराई क्या है? चलो यह परमात्मा अगर नहीं भी है फिलहाल
2:01
सपोज तो ये पूरी प्रकृति ये सारे मनुष्य ये
2:07
सारे वृक्ष ये धरती ये आकाश अपने आप में दिव्य है सुंदर है
2:16
ये परमात्मा अगर नहीं भी है तब भी कितना अद्भुत है
2:26
इवन शरीर मन यह तो सब जादू चल रहा है यार।
2:33
हर चीज एक रहस्य आप अगले जन्म में इसकी क्या गारंटी?
2:46
तकलीफ अगले जन्म में इसकी क्या गारंटी है? ये क्या सोच रहे हो आप?
2:55
आप अभी किसी चीज को क्लियर कर लोगे ना तो वह शाश्वत आपके साथ रहेगी।
3:02
है ना? अगले जन्म में क्या गारंटी है?
3:09
अभी इस जन्म में भी नहीं मिले हो मेरे से। वो ऊपर ऊपर सुने हो।
3:20
और इतना डरो मत। कुछ नहीं होता। ये सब सुंदर है। प्रकृति तो है। प्रकृति मां होती है।
3:30
तो गुरुदेव आप थे गुरु के पास पहुंचने के लिए 35
3:40
कुछ तक के पास भी हम फिर वही चीजें
3:51
नहीं नहीं एक बार भी ना आपकी चेतना का स्तर बढ़ गया ना आपकी चेतना इस स्तर तक आ
4:01
गई तो नेक्स्ट बर्थ में यहां से अपग्रेड ही होगे आप। समझ रहे हो?
4:09
डाउन होगे ही नहीं। हां।
4:14
तो कृष्ण बोलते हैं ना अर्जुन को कि मेरे भक्त का कभी भी नाश नहीं होता। अर्जुन।
4:21
मतलब एक स्तर तक जो भी स्तर है आपका इस जन्म में वहां तक आपकी चेतना डेवलप होगी।
4:29
तो नेक्स्ट में वहां से अपग्रेड ही होगे आप तो उतना चिंता मत करो भविष्य का है ना
4:42
और मेरे को थोड़ा सुनते ही रहे ना तो बात ही खत्म हो जाएगी। नेक्स्ट मोमेंट
4:50
की भी बात खत्म हो जाएगी। बर्थ तो बहुत दूर की बात है। हां।
4:57
थोड़ा सा निश्चिंत रहो। थोड़ा बेफिक्र रहो।
5:02
अ इतना हैवी मत लो जिंदगी को। थोड़ा लाइट लो।
5:09
है ना? सब बहुत सुंदर है, निर्भर है और अद्भुत है।
5:18
अपनी दृष्टि चेंज करो। सम्मान करो प्रकृति का, इस सुंदरता का, जीवन का,
5:28
इस जन्म का भी और जितने जन्म होंगे उसका भी सम्मान करो। है ना?
5:35
बहुत दिव्य है ये सब कुछ और कुछ भी ऐसे रॉन्ग नहीं है। अद्भुत है ये सब।
5:49
बात परमात्मा देखने की नहीं है। सब में यह प्रकृति के रूप में भी बहुत सुंदर है।
5:56
है ना?
5:58
अपने आप में ही यह दिव्य है और एक जादू है, एक मैजिक है, एक रहस्य है।
6:10
एक-एक पत्ता रहस्य से भरा हुआ है। एक एक मनुष्य में पूरे ब्रह्मांड का रहस्य समाया हुआ है।
6:22
तो यह जादू नगरी है।
6:29
थोड़ा अहो भाव लाओ जीवन में है ना प्रश्न
6:38
ठीक है आपका बट अहो भाव लाओ जीवन में
6:54
ओके
7:10
हम सब देख क्या हुआ?
7:25
वो आ गई देखो
7:37
तो एक तल है जिसमें आपको यही बताया जा सकता है कि चेतना इस जगह तक ऊपर उठी इस जन्म में अगले
7:46
जन्म में फिर इसके ऊपर ही जाओगे है ना यह मजबूरी के वक्तव है
8:09
आप क्या है सहारे कोसते रहते हो ना हर बार एक सहारा कि यार क्या होगा नेक्स्ट बर्थ में क्या होगा
8:19
अभी क्या है उधर तो आपका ध्यान ही नहीं
8:37
हालांकि ऐसा होता भी है कि चेतना का विकास ही होता है। बट मेरा रेंज वो नहीं है बोलने का।
8:49
इतना पोस्टपोन कर देना आपको एक सहानुभूति दे देना तो ठीक नहीं है।
8:56
मैं तो अभी वाला हूं।
9:10
जो चीज अभी नहीं है वो कभी नहीं है।
9:12
साफ-साफ बात है ना। फिर एक वह ट्रैप है, फिर एक कल्पना है, एक धोखा है।
9:21
जो अभी नहीं वह कभी नहीं।
9:24
हां। लटकते रहो भविष्य में। कुछ नहीं होना है।
10:33
हां जी और बताओ
10:51
प्रणाम स्वामी प्रणाम जी
11:00
स्वामी जी कल आपने बोला कि हमारे अंदर एक एलिमेंट होता है तो
11:08
हमेशा मुक्त होता है। हम हम
11:19
वही हम है जब बोले तो वही हमारी आत्मा है हम
11:27
तो एक आत्मा व्यक्ति का बाहरी जीवन कैसा होगा ये
11:37
ऑफिस में कैसा होगा घर में कैसा होगा उसके लिए कोई भीतर बाहर नहीं होता है। है ना?
11:44
वही आत्मवान जिसका भीतर बाहर समाप्त हो गया। जिसके लिए हर चीज मुक्ति है।
11:53
हर चीज मैं ही हूं। वो एक सेलिब्रेशन होता है। प्रेम होता है।
12:03
जिसको आप पूछना चाह रहे हो ना बाहरी जीवन।
12:08
बाहरी जीवन खुद को बॉडी मान के ही है। है ना?
12:12
तो वहां कोई ऐसा बाहर भीतर ऐसा नहीं है।
12:21
फिर भी जो आप अपनी आंखों से देखते हो किसी की बॉडी और ये वो बाहर कैसे जी रहा है।
12:30
उसका बहिर चरित्र वह भी सुंदर होता है।
12:37
वह भी दिव्य और बहुत रहस्यमय होता है हर किसी का।
12:52
हमको हमेशा क्या लगी रहती है कि हमारा बाहरी जीवन ठीक हो जाए।
12:59
इसलिए ऐसे सवाल आते हैं कि बाहरी जीवन में कैसा होना चाहिए?
13:04
बाहरी जीवन मतलब वहां कभी भी कुछ ठीक हो ही नहीं सकता।
13:10
उसी का नाम संसार है। आप 10 चीजें सेट करो 11वीं चीज बिगड़ जाएगी।
13:18
है ना? बाहर का मतलब ही है जो अनसेट ही रहेगा।
13:36
बट यह अनसेट भी आत्मवान के लिए सुंदर होता है। यह बिखरना, बिगड़ना, बनना यह भी सुंदर होता है।
13:53
और अंततः भीतर और बाहरी जीवन जैसा कुछ नहीं होता। उसका सब अपना आप ही होता है।
14:00
सब मुक्तिदाई मैं ही मैं अपना स्वरूप भासता रहता है।
14:16
प्रणाम हम
14:24
हम
15:30
प्रभु प्रणाम जी प्रभु जी आपकी एक वाणी में सुना था कि जो
15:40
जीव है वो हमेशा मुक्त है वो इसी क्षणी बच्चा चाहते
15:47
प्रभु जी क्या इस कर्म बीच में नहीं आएंगे अगर मैं भी मुक्त होना चाहूं मुझे मालूम
15:54
है वो जो सत्ता है वो कर्म है तो अगर मैं चाहूं भी तो कर्म के बीच में नहीं
16:04
हम हम चाहकर भी नहीं हो पा रहा
16:11
अभी आप जो मेरे साथ सत्संग कर रहे रहे हो बैठे हो
16:19
अभी बीच में कौन सा कर्म आ रहा है बताओ कोई कर्म आ रहा है क्या
16:29
नॉर्मल टॉक कर रहे हो मेरे साथ सत्संग कर रहे हो बीच में कोई कर्म आ रहा है
16:39
अरे बताओ ना यार मतलब कभी फील नहीं कर पा रहा हूं।
16:47
प्रैक्टिकल बोलो ना। अभी आ रहा है नहीं आ रहा है?
16:51
आंसर तो सबको आ ही गया है। सच तो बोला करो। अभी कोई कर्म आ रहा है क्या बीच में?
16:58
हम लोग बात कर रहे हैं। बस नहीं आ रहा है ना? ऐसे ही नहीं आता है।
17:06
जब छोटी सी टॉक में कर्म नहीं आ रहा है तो आपकी मुक्ति में कर्म आ जाएगा।
17:13
आप मुक्त होना ही नहीं चाहते।
17:17
इसलिए नए-नए बहाने खोजते हो। कर्म आ जाएगा क्या करेंगे? वो हो जाएगा क्या करेंगे? वो अरे आप मुक्त हो।
17:26
क्या आ जाएगा?
17:31
आपकी मुक्ति को आपसे छीना ही नहीं जा सकता।
17:38
नेचुरल है, सहज है, आपका अधिकार है।
17:44
और ना कोई कर्म, ना कोई दुनिया, ना कोई शरीर, ना कोई मन।
17:49
कोई भी चीज उसके बीच आ ही नहीं सकती। आएगी नहीं की बात नहीं कर रहा हूं मैं। आ ही नहीं सकती।
18:03
तभी तो मुक्त होना। वरना कोई चीज आकर अटैक कर दे आपको तो आप कैसे मुक्त हो?
18:12
आ ही नहीं सकती। हां जी।
18:19
तो थोड़ा सुनो हमको तो फिर इसका बोध हो जाएगा।
18:34
हम हम हम
18:49
हम हां जी
18:57
है कोई निश्चिंत रहा करो मस्त प्रणाम गुरुदेव
19:09
हां प्रणाम जी आपने जो होने का एहसास
19:16
जीने को कहा मैं इतना अद्भुत उसके उससे आगे कुछ है ही नहीं। उन्होंने कहा ऐसा नशा है गुरुदेव
19:25
मेरे मोबाइल से Facebook हट गया Instagram हट गया सब सब डिलीट हो गया हो कोई गया
19:33
सिर्फ मोबाइल सत्संग सुनने के लिए बस उतनी ही जरूरत और
19:41
जब जब मुझे टाइम जो मिलता है उसमें बस होने का है साथ में आराम से तो होने के
19:48
एहसास में सुनो होने के एहसास में और गहरा जाओगे ना
19:57
तो जैसे इंस्टा मिट गया Facebook मिट गया ऐसे ही देह और मन भी मिट जाएगा
20:06
हां जब और गहरे जाओगे ना बस अपना एहसास ही एहसास रहेगा पूरा प्रगट
20:15
सर्वत्र बहुत बहुत अच्छा ओके आज हां गुरु बहुत बढ़िया
20:24
आज बहुत बढ़िया कोई कोशिश नहीं कोई टिकना नहीं कुछना भी
20:31
नहीं रहता मस्त लगता है आज बहुत सुंदर प्रणाम गुरुदेव
20:39
प्रणाम जी हेलो हेलो
20:47
हेलो भगवान नमस्ते जी नमस्कारम
20:54
हा बोल रहा हूं मुंबई से हम हां भगवान मेरा मैं आपको सुन रहा हूं उसके
21:04
पहले ओशो को भी सुनता था हम हां तो जब भी ओशो तो अभी तो नहीं मतलब बाद
21:12
में मैं पहला प्रवचन आपका देखा तो मैं समझ के भगवान ओशो ही आ गया आपके रूप में।
21:20
हेलो हां जी हां तो मैं सत्संग सुनता हूं पर एक जो है
21:28
टच मतलब जो अंतरात्मा है सब मालूम पड़ रहा है आपसे सब है पर कंफर्म नहीं हो रहा है किधर मेरी गाड़ी अटक रही है कि ये शरीर
21:37
दिख रहा है ये सब दिख रहा है और वो आत्मा नहीं दिख रही इसलिए थोड़ा अटक रहा है कि नहीं आ रहा है क्या करूं क्या मैं हम हां
21:46
ये तो कहीं तो दिख रहा है भगवान का आत्मा तो पूरा ये नहीं होता मेरे को
21:54
हम क्योंकि अभी देखो ये मेरे सामने एक गाय है ये है उसको कोई टेंशन नहीं दिख रहा है खा
22:00
पी रहे सब मालूम है भी
22:08
नहीं समझ नहीं आ रहा बोलो भगवान
22:17
हां जी हां तो आप बात समझ में आ रही है ना भगवान
22:23
हां बिल्कुल आ रही है हां के मतलब आप बहुत बड़ा फैन है तो आप ही
22:32
मेरे भगवान हो तो मेरे को ज्यादा कुछ मेरा
22:39
हां पहली चीज तो भैया हम कोई ओशो अगर नहीं है ना हम
22:45
मेरे मन मतलब मेरी आपको पहचान गई है। हां अरे हमको तो बोलने दो भाई। हां हां सुन रहा हूं सुन रहा हूं।
22:59
पहली बात तो ये है कि हम कोई ओशो अगर नहीं है कि ओशो फिर से आ गए। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। स्वप्न में भी नहीं है। ठीक है?
23:11
किसी को भी यह भ्रम हो तो वो रॉन्ग है। है ना? अच्छा।
23:18
और मैं मौलिक हूं और ओशो का संदेश ही था कि आपको मौलिक होना है।
23:28
और वो मौलिकता मेरे में है। मैं मैं हूं। ओशो ओशो है। है ना? फर्स्ट थिंग।
23:35
और सेकंड थिंग जो आपको समस्या है कि गायवाएं ज्यादा मजे में
23:45
है और हम इतना काम धंधा करके भी परेशान हैं। है ना?
23:52
यह हो क्या रहा है? ऐसा ही कुछ है ना आपका मामला?
24:01
बात गाय की नहीं है। आप पूरी प्रकृति को देखो। सब शांत है। तृप्त है। वृक्षों को
24:08
देखो। सितारों को देखो। धरती आकाश को देखो।
24:14
सब एकदम तृप्त है। शांत है। कोई रिक्वायरमेंट नहीं है।
24:25
तो ये मनुष्य इतना बेचैन क्यों है?
24:32
इसका एकमात्र कारण है डिजायर्स।
24:37
जितना ज्यादा चाहोगे उतना ज्यादा बेचैनी आपके जीवन में रहेगी।
24:45
जितना कम चाहोगे उतने शांत रहोगे। आनंदित रहोगे। यह तो ज्यादा कम हो गया।
24:54
और कुछ नहीं चाहोगे तो परमात्मा हो जाओगे।
24:59
जो आप परमात्मा हो ही उसका आपको बोध हो जाएगा।
25:06
तो अपनी इच्छाओं का थोड़ा त्याग करो तो आपके जीवन में भी शांति, निर्मलता, तृप्ति उतरने लगेगी।
25:16
सारी इच्छाओं का त्याग भले ना भी कर पाओ बट जितना हो सके जितनी इच्छाओं का त्याग कर सकते हो करते जाओ निरंतर।
25:29
तो अपने आप एक साइलेंस आनंद आपके जीवन में रहेगा।
25:35
अब इच्छा चाहे संसार की हो, चाहे भगवान की हो, चाहे स्पिरिचुअलिटी की हो। इच्छा मींस इच्छा।
25:45
और इच्छा का त्याग मींस इच्छा का त्याग। वो करते जाओ।
25:52
और एक दिन ऐसा आएगा कि इच्छा का त्याग करने में आपको इतना आनंद आएगा,
25:59
इतना रस आएगा कि आप अपनी सारी इच्छाओं का त्याग कर दोगे। बोलोगे यह है ही कचरा।
26:11
और अपने परमात्म स्वरूप को उसी क्षण आप पहचान लोगे।
26:24
शांति की भी इच्छा नहीं रखना। आनंद की भी इच्छा नहीं रखना। मेरा मन शांत हो जाए यह भी इच्छा मत रखना।
26:32
इच्छा रखना ही मत।
26:39
कुछ हो जाए इच्छा करो ही मत।
26:47
तो अपने आप जीवन धन्य हो जाता है। अद्भुत हो जाता है। बहुत प्यारा हो जाता है।
26:56
एक इच्छा ही मात्र समस्या है। हर किसी के जीवन में
27:04
चाह बहुत खतरनाक है।
27:19
दो पल का सुकून आपको मिलता है। फिर चाह आ जाती है कि कुछ यह हो जाता कुछ वो हो जाता जिंदगी में। वो सुकून भी गया।
27:31
फिर बड़े-बड़े विद्वान वेद क्या कहते हैं? मैं क्या कह रहा हूं? वह समझ में आ जाए।
27:36
यह भी एक चाह है। मत आया समझ में। लेकिन चाहूंगा नहीं।
27:44
चाहना है ही नहीं। मस्त है अपन निश्चिंत।
27:52
अब तो कुछ चाहिए ही नहीं। कुछ चाहिए ही नहीं तो कुछ चाहिए ही नहीं।
28:01
ना भगवान, ना मोक्ष, ना दुनिया, ना संसार, ना सिद्धि चाहिए ही नहीं।
28:14
कुछ नहीं चाहिए में जो आनंद है वो सब कुछ मिल जाने में भी नहीं
28:26
पॉइंट बी नोटेड कुछ नहीं चाहिए में जो आनंद है
28:34
वह सब कुछ मिल जाने में भी नहीं है
28:44
तो बस कुछ मत चाहो निश्चिंत रहो बस
28:54
ओके जी प्रणाम
29:08
अजी जी प्रेम प्रणाम गुरुदेव प्रेम प्रणाम
29:16
प्रणाम गुरुदेव मैंने आपका एक सत्संग सुना YouTube पे था
29:22
जो अभी फ्रीडम हम्म गुरुदेव उसमें आपने धीरेधी धीरे धीरे करके
29:30
जितने भी मान्यताएं हैं जितनी भी हम पूंजियां हैं आपने उनको बुलाया है हम
29:38
तो अभी ऐसा होता मैं कुछ भी जीवन में कुछ भी है तो
29:47
ऐसा लगता था कि मैं हूं मतलब मैं जैसे अच्छा मेरे लिए भी ये है मतलब ये तो कुछ
29:55
भी हो जाएगा जीवन हमने बताया कि कोई भी नीति थोड़ी सी इच्छा कोई
30:03
भाव कोई भी सत्संग कोई भी साधना वही गुरु अंतर
30:11
इनको भी हम्म तो गुरु की पंक्ति से आपको विनम सा महसूस कर रहा हूं और एक अजीब सी
30:20
बेचैनी है कि मतलब जब कुछ है ही नहीं जैसे लग रहा है समुद्र में अकेला हूं मतलब कुछ है ही नहीं
30:28
मेरे पास भी नहीं तो क्या करूं क्या करूं अजीब
30:39
आप गलत सुने हो। नो नो नो आप गलत सुने हो।
30:48
कुछ भी नहीं है। यह कहने वाला तो है।
30:56
कि कुछ भी नहीं है। यह कहने वाला कौन है?
31:05
बताओ मैं ही आप तो हो ना
31:15
मैं तो हूं ना हां तो वो नेगेटिव साइड में मत जाओ कि कुछ भी नहीं है। वह नेगेटिव साइड है।
31:26
अरे आप हो ना कुछ रहे ना रहे आपका होना है।
31:35
और अकारण है
31:44
तो अब टू द पॉइंट आप हो आपका होना है
31:54
वह देखो कैसा लगता है अपने होने का एहसास
32:09
शांति है।
32:11
हां रुको रुको रुको रुको। शांति है। बस सही जा रहे हो। अब शांति को बार-बार उसको पियो।
32:24
अपने होने के एहसास में जो शांति है उसमें डूबो।
32:30
उसको जियो अभी के अभी
32:44
एक परम निश्चिंतता है अपने होने में।
32:52
परम शांति बस वही जीना है आपको।
33:00
अब सब प्रश्न उत्तर फेंको जो भी सीखे पढ़े हो अभी तक जाने हो फेंको सब
33:09
शांति मिल रही है उसी में जीना है
33:17
असली परमात्मा क्योंकि शांति ही है
33:28
हां और जीना है बस जी बोल के फिर दिमाग नहीं चलाना
33:35
कंटिन्यू बस साइलेंस अपने होने का एहसास जो साइलेंस है उसी में जीना है।
33:52
तो यह बेचैनी बेचैनी तो वहां टिकती ही नहीं है। है ना?
33:58
वहां निश्चिंतता है एकदम वहां मतलब अपने में
34:08
एक बेखयाली है निश्चिंतता है।
34:16
कुछ पता चल जाए इसका भी वहां पर इच्छा नहीं है।
34:30
एक विश्राम तृप्ति से
35:05
ठीक है। अब इसको कंटिन्यू जियो आप प्रेम से आनंद से साधना से नहीं प्रेम से जीना है शांति को।
35:19
बहुत फर्क है साधना से जीने में और प्रेम से जीने में
35:31
ओके प्रणाम
35:39
हां जी एनीबडी हम
35:56
हम
36:12
हम
36:23
प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रश्न ही नहीं
36:33
सुंदर है बात प्रश्न के लिए भी नहीं आप किसी किसी भी टॉपिक पे सत्संग कर सकते
36:41
हैं। बात प्रश्नों की नहीं है।
36:48
आनंद आनंद मत
36:58
और इतना विजन रोड हो गया है। इतना हो रहा है कि पता ही नहीं चल रहा है। क्या हो रहा
37:05
है। हम बहुत था इतनी सोच नहीं थी अभी सोच
37:12
भी बढ़ गई है और बहुत अच्छा लगता है तो पूरा नहीं
37:20
पहले बोलने में था लेकिन अभी समझ में आ रहा है क्या आप
37:27
समझ में आ रहा है अलग-अलग अलग कुछ
37:40
समझ में आ रहा है क्या बता रहे इस पृथ्वी में ऐसा कोई नहीं बता पाएगा आप
37:50
ही के साथ रहना है हमें अलग नहीं होना है आप पता रहते हैं सब अलग अलग हो
37:57
लेकिन नहीं मन नहीं आप के साथ के साथ हम
38:04
हां तो मैं आपसे कोई भिन्न थोड़ी ना हूं जो मेरे से आप मुक्त होगे।
38:12
वो कल का चैप्टर पुराना हो गया। वो कचरा हो गया। थर्ड क्लास
38:31
अरे देखो मैं से भिन्न कुछ भी नहीं है। तो किससे मुक्त होना है? सब कुछ मैं ही हूं।
38:39
किसी से मुक्त होना ही नहीं है। यही मुक्ति है। ठीक है।
38:46
और मेरे से तो बिल्कुल नहीं होना है।
38:50
हां। मेरा मेरे साथ का बंधन याद रखना मैं सबको बोल रहा हूं
39:00
मेरे साथ बंधे रहना क्योंकि
39:08
यह बंधन करोड़ों मुक्तियों से भी ऊपर है
39:17
ओके प्रणाम प्रेम प्रणाम
39:30
हमारे साथ नहीं बंधोगे तो क्या क्या किए जिंदगी में
39:40
कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो बिंद बांधे बंध जाते हैं।
39:47
कुछ बंधन मुक्ति से भी सुंदर होते हैं, अद्भुत होते हैं।
39:59
दिव्यतम होते हैं। तो बंधे रहो भैया। मेरे से तो बंधे रहो।
40:06
बाकी का मैं नहीं बोलता। है ना?
40:10
आज यस एनीबडी
40:19
क्योंकि मेरे से दूर हो जाना बहुत खतरा है। मैक्सिमम आपको मुक्ति मिल जाएगी।
40:27
मेरे से दूर हो गए। मैं मुक्त हूं जो कल चला। मैक्सिमम आपको मुक्ति मिल जाएगी। अरे यार मुक्ति चीज क्या है?
40:42
हम मुक्ति देने थोड़ी ना आए। मुक्ति से भी अद्भुत कुछ होता है।
40:50
वह सहजा अवस्था, वह रस, हम उसके लिए आए।
41:00
मुक्तियां तो यहां चारों ओर घूमती रहती है।
41:06
हां जी। यस। नेक्स्ट।
41:20
प्रणाम गुरुदेव प्रणाम जी गुरुदेव
41:28
आपके साथ सत्संग में रहते हैं तब हमारा कुछ अलग स्तर होता है जैसे ही हम हमारे
41:36
काम काज में संलग्न होते हैं हम्म तो फिर हम पूरे अलग हो जाते हैं। जैसे
41:45
ये सब भूल जाते हैं तो अब क्या करें? पूरे दिन तो आपके साथ रह नहीं सकते।
41:52
सही है।
41:55
तो मेरे साथ जो सत्संग में रहते हो, है ना?
42:01
तो वह मेरा प्रभाव है ना।
42:04
जो भी आपको उस समय होता है, वह मेरा प्रभाव है।
42:12
वह आपकी कमाई नहीं है।
42:16
आपकी कमाई तब होगी जब उस पॉइंट में दिलो जान से जिओगे।
42:25
जो भी हम बता रहे हैं ना जो भी आपको उसमें जमता है उसमें जब दिलो जान से प्रति पल प्रेम से
42:35
उसको जिओगे तो वह आपकी कमाई भी होती जाएगी।
42:41
धीरे धीरे धीरे हर वक्त आपको यह बना रहेगा। वह आनंद वह रस
42:50
और फिर एक समय के बाद एक वक्त के बाद वक्त भी खत्म हो जाएगा।
42:56
बस आपका अपना आप ही भासता रहेगा।
43:01
तो हमने जो भी बताया है उसमें जो भी पॉइंट आपको जमता है उसको दिन रात बहुत प्यार से जियो।
43:16
उसको अपने जिंदगी में प्रथम रखो और अपनी लाइफ में बाकी सारी चीजों को सेकंड
43:24
जब परमात्मा को सत्य को आप प्रथम रखते हो तो वह 24 आवर हो ही जाता है।
43:36
हर किसी का यह सवाल रहता है 24 आवर कैसे करें? तुम सत्य को परमात्मा को प्रथम रखो
43:44
वह 24 आवर हो जाएगा करना नहीं पड़ेगा बाकी अपनी लाइफ की चीजों को सेकंड थर्ड जो
43:53
रखना है रखो प्रथम प्रथम तो ऑटोमेटिक है फिर
44:01
जो आपकी जिंदगी की प्रायोरिटी है वो कैसे जाएगी
44:09
अपने आप है फिर 24 आवर तो सुनो भी और उसको जियो भी
44:20
ऑफिस में हो घर में हो बाहर हो टैली करो कि ये ऑफिस है कि मैं हूं यह घर है कि मैं
44:28
हूं ऐसे टैली करते करते ऑफिस हट जाएगा घर हट जाएगा
44:35
बस मैं ही रहूंगा ऐसे जीना मैं जो भी बताता हूं ना कि मैं
44:42
से भिन्न कुछ भी नहीं उसको जियो दिन रात प्रायोरिटी
44:51
तो बहुत आसान है क्योंकि मैं ही हूं ओके
45:02
प्रणाम जी बस प्रायोरिटी देना
45:14
24 आवर और वो हमेशा हो जाए अपने आप हो जाता है वो इतनी छोटी सी बात है
45:23
हां जी
45:33
है कोई हां ऐसा पूछना चाहिए। बेसिक क्वेश्चन भी
45:42
पूछने चाहिए। उससे क्या है ना आपको क्लेरिटी आएगी। हां।
46:25
हम हम
47:13
ओके इनफ फॉर टुडे
47:29
हम हम
47:59
तो प्रेम प्रणाम हां प्रेम प्रणाम जी
48:06
कई बार से पीड़ा मिलती है उस समय का भाव हम
48:14
उस समय पीड़ा का भाव रहता है ना वही मैं हूं।
48:22
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। पीड़ा कोई गंदी चीज नहीं है। बेकार चीज नहीं है। पीड़ा कुछ ऐसा नहीं है जो नहीं होनी चाहिए।
48:35
शरीर का सुख आपने भोगा है। उसका दुख भी आप ही भोगोगे। उसका स्वीकार मस्ट।
48:45
मैं से भिन्न कुछ भी नहीं, पीड़ा भी नहीं, आनंद भी नहीं। तब मैं कंप्लीट हूं ना।
48:54
मैं से भिन्न कुछ होता ही नहीं। तो पीड़ा का भी आनंद लो।
49:01
उसको ठीक भी करो। वह भी मैं ही हूं। उसका आनंद भी लो।
49:08
उसको घृणित भाव से मत देखो।
49:12
है ना? पीड़ा होनी ही नहीं चाहिए। ऐसा मत सोचो। ठीक है? आत्मा के तल पर पीड़ा होती ही नहीं है।
49:22
लेकिन जहां पे भी होती है दैहिक तल पे उसको स्वीकार करो। ठीक है।
49:31
ओके। क्योंकि वो दुनिया भर के जादू टोने बताऊं। पीड़ा होगी नहीं। वो सब धोखा है। है ना?
49:40
पीड़ा भी मैं ही हूं यार। क्या बुरी होती है पीड़ा? पीड़ा ही तो है।
49:47
है ना? जब बच्चा पैदा होता है, पीड़ा होती है।
49:56
विरह में भी एक पीड़ा होती है। दैहिक पीड़ाएं होती हैं। सब सुंदर है। पीड़ाओं के भी ना फ्लेवर्स हैं बहुत सारे।
50:08
अद्भुत तो सबका टेस्ट लो। ओके।
50:16
अच्छा हम हम
50:32
प्रणाम प्रणाम।
50:38
प्रभु आप सब ने जो मित्र हमारे साथ जुड़े हुए आज इतने सुंदर प्रश्न पूछे कि बहुत
50:45
सारे लोगों के लिए सवाल होते हैं लेकिन अपने सवालों को शब्दों में बयान नहीं कर पाते तो आज मतलब आपका धन्यवाद तो हमेशा है
50:54
ही आज उन सब लोगों का धन्यवाद जिन्होंने बहुत सारे लोगों के सवाल लोगों के राज
51:02
हम हम क्योंकि कई बार चीजें समझ में आती होती है लेकिन छोटी छोटी चीजें अटक के उस समझ को थोड़ा सा ढीला करती थी।
51:11
हम तो आज बहुत सुंदर सुंदर प्रश्न पूछे उन सबका तहे
51:17
दिल से धन्यवाद और उनको इतने सुंदर ढंग से समझाने के लिए आप सब प्रणाम। बहुत सारा
51:26
बातें आज प्रणाम है।
51:50
हर सवाल का जवाब केवल मैं हूं।
52:01
हर सवाल का जवाब मैं हूं।
52:08
मैं हूं में कोई सवाल उठता ही नहीं। बुद्धि में सवाल उठते हैं।
52:15
मैं हूं में निष्ठा होती है। सवाल नहीं होता।
52:20
और फिर भी कोई सवाल है तो हर सवाल का जवाब मैं हूं।
52:30
और कोई भी चीज रास्ते में ऐसे बाधा नहीं बनती
52:35
है ना कुछ नहीं होता
52:44
मैं तो एकदम वो होता है ना हाईवे
52:51
बस वैसा हाईवे है वहां क्या है और ट्रैफिक है ही नहीं आप भी मजे से चला रहे हो गाड़ी।
53:03
एकदम प्लेन है मैम। वहां कोई दिक्कत ही नहीं है। ना ब्रेकर है ना ट्रैफिक है ना कोई मंजिल है।
53:16
बस आनंद है।
53:22
हां। फिर भी किसी के कोई सवाल हो तो वो पूछ सकता है।
53:44
हम
54:29
तो ठीक है वाणी को विश्राम देते हैं ना
54:36
सभी को प्रेम प्रणाम है आनंद में रहो मस्त रहो निश्चिंत रहो
54:45
प्रणाम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम स्टॉप करो।