Prabhu Shree
0:00
हम देखो कैसा टेक्नोलॉजी का भूत है।
0:17
अब मैं आया बैठा आप लोग को प्रेम प्रणाम नहीं बोला। वो ये चालू हुआ तो मैं बोला प्रेम प्रणाम।
0:24
ये भूत है साला टेक्नोलॉजी। यहां जिंदा लोग बैठे हैं। वह सेकंड हो गए।
0:33
यह तो गड़बड़ है ना। हां।
0:46
हम्म।
0:50
हां वह तो सब सुन रहे हैं। उसका एक आनंद है।
0:55
टारगेट में तो यह सभी हैं मेरे। हां।
1:05
क्या राहुल? क्या सुनोगे भाई?
1:12
यह क्या बात हुई यार? कुछ तो बोल।
1:23
चालू करो इसमें ऑन विराज जो भी कुछ पूछना चाहे
1:29
या कुछ बताना चाहे
1:46
हम हम
2:14
बिनु सत्संग विवेक ना होई
2:19
राम कृपा बिनु सुलभ ना सोई
2:30
कि और कोई लाइन है यही है
2:44
बगैर विवेक के आप आगे बढ़ ही नहीं सकते।
3:00
आगे बढ़ना इन द सेंस अपने में आना।
3:06
क्योंकि यह लैंग्वेज बड़ी टिपिकल सी हो गई है ना। कुछ भी बोलो तो उसको फिर थोड़ा शार्प करना पड़ता है। [हंसी]
3:16
अपने में आना मतलब आप अपने में हो ही इसको जानना।
3:33
बगैर सत्संग के संभव नहीं है। मैं तो अपने जीवन में देखा कि
3:41
बगैर सत्संग के पॉसिबल ही नहीं है।
3:51
सत्संग कल्याण करता ही है। आत्मवान का हो तो उत्तम है।
3:58
अति उत्तम है।
4:13
और जब सत्संग को आप ऐसे सुनते हो कि
4:28
जा के कर्ण समुद्र समाना
4:35
जिसके कान समुद्र के समान हैं और यह सुनते सुनते
4:45
वह अघाते नहीं थकते नहीं बोर नहीं होते बोल लो कॉमन लैंग्वेज में
4:56
सुन सुन के और सुनने की इच्छा होती है।
5:02
सुन के पूर्णता भी आती है और इच्छा भी होती है और सुनने की।
5:11
भरह निरंतर हो ना पूरे।
5:17
तो तब जब सत्संग से प्रेम होता है तब मैं आत्मा भगवान प्रसन्न होता है।
5:29
कोई भी शख्स शुरू में सत्संग सुनता है दो चार महीने तीन महीने तो वह अपने ब्रेन से ही समझता है। अधिकतर
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लोग ब्रेन से ही करेक्ट कर लेता है। उसको यह भी भ्रम हो जाता है। मैं जान गया समझ गया।
5:46
और यह सत्संग कुछ ऐसे हैं कि सीधा गुरु बनने का धोखा भी दे देते हैं।
5:55
तो इससे सावधान रहना जल्दबाजी मत करना।
6:01
मैं गुरु ही बनाऊंगा तुमको। शिष्य कभी नहीं बनाऊंगा।
6:07
लेकिन उसका एक उचित समय आता है।
6:12
जल्दी बन गए तो बहुत खतरनाक है। वो देह बन जाना, मन बन जाना, बुद्धि बन जाना,
6:20
गुरु मत बनना। वो खतरनाक है।
6:29
बौद्धिक ज्ञानी गुरु बनना सबसे डेंजर है।
6:37
आप तो भटके हुए हो ही। कई लोगों की यात्रा आप खराब कर दोगे।
6:47
बहुत खतरनाक है।
7:05
हां जब आप आत्म नष्टिक हो जाओगे तब वह स्वतः होने लगेगा।
7:19
वह अलग से झलकता है।
7:24
आपकी वाणी आपकी प्रेजेंस वही बता देगी। आपका मौन बता देगा।
7:39
तो यस एनीबडी है कोई लेवन हारा
7:48
या देवनहारा
8:11
हम बताओ कोई विचार या कुछ
8:18
ना अच्छी बात है
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आप बताओ भगवान फिर भी आपका अपना अनुभव रहा है पूरी जिंदगी का।
8:44
हां जी। ठीक है।
8:52
हमारी चाय आ जाए तब तक कोई कुछ बता दो।
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फिर हम तो चुप होते ही नहीं है। पता है आप लोग को। प्रेम प्रणाम भगवान जी।
9:05
प्रेम प्रणाम। मेरा नाम साक्षी है भगवान।
9:12
हां साक्षी जी।
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मैं आपसे एक बार और बात कर चुकी हूं। तो भगवान आपको यही बताना है कि आपको सिर्फ
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सत्संग सुनते सुनते मतलब वो जो मैं है वो
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ऑटोमेटिक प्रेजेंट है। जैसे मैं इसके पहले आपसे बात की थी तो मैं बोली थी कि आनंद है
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और आनंद में आनंद मिल रहा है। तृप्ति में तृप्ति मिल रही है।
9:44
वो अवस्था को मैं जीती थी और अब यह अनुभव हो रहा है प्रभु कि वो जो आनंद है वो किसी चीज से ऊपर और नीचे होता था।
9:56
चार दिन रहता था। कहीं ना कहीं वो होता था ऊपर और नीचे। लेकिन ये जो मैं सत्संग सुन
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रही हूं और सुनते सुनते वो जो मैं बोलते हैं वो मतलब वो इतना विराट है जैसे कि हम चांद पे
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से पृथ्वी को देखते हैं वैसे आनंद मुक्ति और जो मोक्ष होता है वो सारी चीजें वैसी
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दिख रही है। मतलब वो वो वो वहां पे
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उसको एक्सप्लेन नहीं किया जा सकता। वहां पे ना कुछ होना है ना कुछ अच्छा है ना कुछ बुरा है और ऐसा भी नहीं कि वहां पे खाली
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पड़ना है वो भरा हुआ है ये जो ये मुक्ति और आनंद और मोक्ष ये ऊपर
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नीचे हो सकता है लेकिन वो कुछ हो ही नहीं सकता है
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और वो इतना फैला हुआ है इतना फैला हुआ है और वो मारना मत
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अपने आप वो वो अपने आप प्रकट है
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और वो जैसे कि एक खुले आसमान में कोई हाथ फैला के खड़ा हो और वो उसके हाथ में उसके
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गोद में ये सारी चीजें हैं। मुक्ति मोक्ष आनंद तृप्ति जीवन सारी चीजें उसके हाथ में
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उसके गोद में बैठी है। उस मैं के वो इतना विराट है और वो है नहीं मतलब वो
11:31
पहले मुझे एहसास होता था प्रभु अब वो एहसास भी नहीं है वो एहसास से कहीं ज्यादा
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ऊपर विराट रूप में प्रकट है उसको ना कोई हिला सकता है ना हटा सकता है वो अपना जी
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रहा है और प्रभु मतलब ये सिर्फ सुनते सुनते ऐसा अंदर से ये ऐसा साथ भी मैं इसको नहीं बोल सकती हूं। ये है।
11:57
ये है। यस ऐसा है।
12:01
इसको बताया नहीं जा सकता कि मतलब ये ऊपर है नीचे। एक्सप्लेन नहीं किया जा सकता।
12:06
वही मैं सोच रही थी जिस चीज को एक्सप्लेन नहीं किया जा सकता। उसको आप दो तीन साल से हम लोग को बता रहे हैं।
12:13
[हंसी]
12:15
हमारे हमारी हालत समझो। क्या हालत हुई होगी हमारी। जी भगवान।
12:22
बस वो है क्या कहे [हंसी] और जैसे कि एक जो एक बाहरी दृश्य सांसारिक
12:32
जीवन है, परिवार है, घर है तो उसमें भी वो है। अब मैं उसमें क्या बोलूं? गड़बड़ है
12:41
और क्या बोलू सही है। वो गड़बड़ और सही सब उसमें मतलब उसके आगे कुछ भी नहीं है।
12:48
भगवान एक तारा मात्र है। मतलब वो जब अपना विराट रूप स्वरूप ले लिया है तो उस किसी
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चीज का भान होने ही नहीं देता। सिर्फ अपने अलावा सिर्फ मैं के अलावा ये अपने आप बस
13:02
सुनते सुनते हो रहा है कुछ दिन से और मैं ये हटाने वाली भी चीज नहीं है और
13:09
बताने वाली भी नहीं। हम आनंद और मुक्ति मोक्ष और ये सारी चीजें बता सकते हैं। वो है बस।
13:19
हां इसको बताया नहीं जा सकता।
13:24
बहुत सही बस हां बताइए।
13:30
बस प्रभु आपकी कृपा है।
13:34
मतलब ना कुछ किया जा सकता है ना कुछ हुआ जा सकता है। बस जिया जा सकता है।
13:42
हां जी।
13:58
एक तो साक्षी जी आपका यह शब्दों में बोल रहा हूं। अनुभव बोलना भी इसको बड़ा कचरा
14:07
लगता है। बट शब्दों में बोल रहा हूं कि यह आपका अनुभव
14:18
पता नहीं कैसे इतनी क्लिटी इतना सुंदर अनुभव और इतना परफेक्शन आप में है। यह आश्चर्य है।
14:32
हालांकि यह भी अंत में बोलोगे तो यह सहज है। है ना?
14:38
है तो सहज बट फिर भी लास्ट टाइम भी आपसे बात हुई थी। मेरे को
14:48
याद है शायद आपके पापा सुनते थे। ऐसा कुछ है क्या?
14:55
हां हां यस यस और उस चक्कर में आपने सुनना शुरू कर दिया।
15:02
और सुनना क्या शुरू कर दिया? बोलने वाला सुनने वाला हो गया।
15:11
हां अद्भुत है ये।
15:39
आपको क्या बोलूं उसके लिए मेरे पास भी शब्द नहीं है।
15:46
अद्भुत हो आप।
16:07
और इससे पता चलता है कि यह सबके लिए संभव है।
16:13
कोई बहुत बड़ी चीज हो ऐसा नहीं है यह बहुत बड़ी घटना हो या ऐसा कुछ नहीं है।
16:27
बहुत ही अद्भुत है। बहुत अद्भुत लास्ट टाइम से अभी एक पॉइंट और प्लस वन आ गया आपका।
16:40
अब आपने एहसास को भी हटा दिया।
16:46
आनंद भी वह आने जाने वाला आनंद भी गया।
16:51
अब आपका स्वयं आपका होना जो असली आनंद है ही।
17:02
बहुत सुंदर बहुत सही आपको पता नहीं है मैं बहुत जल्दी एग्री
17:10
नहीं होता किसी से भी मैं बहुत काट छांट करता हूं। बहुत ज्यादा शार्प करता हूं मैं। एकदम बारीक से बारीक से बारीक लेयर भी कट करता हूं मैं।
17:25
पता नहीं अभी मैं कुछ कर ही नहीं पा रहा हूं आपके केस में
17:34
बहुत अद्भुत है ये तो निरंतर सत्संग का ऐसे ही रसपान कीजिए
17:42
और बहुत ही सुंदर है ये बहुत ही सुंदर बस ऐसे ही आत्म नष्टिक रहो
17:50
और मस्त रहो ठीक है साक्षी जी कृपा है भगवान आपकी बस
17:58
प्रणाम जी मैं तो एक एक आप लोग तो जान ही रहे हो ना
18:11
छोटे से छोटी चीज बिनी सहता में
18:16
[हंसी]
18:19
बट इनको क्या बताऊं ऐसा कुछ मेरे को समझ ही नहीं आ रहा है अभी
18:24
[हंसी]
19:14
तो ब्रह्मा जब सृष्टि करते हैं और विष्णु जब पालन करते हैं उसका जो आनंद होता है यह आनंद-अंत गुना ज्यादा है।
19:28
जब आत्मा को सुनते-सुनते कोई वहीं से बोलने लग जाता है।
19:36
और जिसको कोई डाउट ही नहीं है।
20:14
मेरे पास तो सारे डायमंड ही आए हैं।
20:37
क्योंकि कोई भी ऐसा है वो टिक्क नहीं पाता मेरे पास दो चार छे महीने टिक गया वो भाग जाएगा
20:47
जो लंबा टिका यार वो डायमंड ही हो गया।
21:16
हां जी एनीबडी बताओ यार सौरभ जी कुछ बता नहीं रहे हो आप
21:27
ऐसे क्या है खामोश मत रहा करो ना मतलब क्या है?
21:40
बहुत चिल्लाते वििलाते रहते हो आजकल सबको सुनो नहीं ना
21:48
[हंसी]
21:50
चिल्लाया करो दिया करो बत्ती सबको सब छोटे हैं दह उम्र में भी
22:07
मेरे को छोड़ के भाई [हंसी]
22:40
तो इसको बोला नहीं जा सकता और बोल रहा हूं ऐसा सेंस मेरे को नहीं रहता।
22:48
नहीं तो बोलने का आनंद कहां रहा फिर? हां।
22:55
मेरे को ऐसा लगता है मैं इसको बिल्कुल बता सकता हूं। बोल सकता हूं। हर शब्द में अपनी
23:03
पूरी आत्मा को डाल के सामने वाले के अंदर डाल सकता हूं। ऐसा मेरे को लगता है। और ऐसा हो रहा है।
23:13
क्यों नहीं बता सकता?
23:16
मैं भी ना बता सकूं मुझ अव्यक्त को तो कौन बताएगा?
23:26
जिसको बताया ना जा सके उसको भी बताया जा सकता है।
23:32
शब्दों से, नजरों से, इशारों से, प्रेजेंस से बताया जा सकता है।
23:43
कोई बाउंड्री नहीं है। मैं के लिए मेरे लिए कोई बाउंड्री नहीं है।
23:57
तो वहां से मैं बोलना शुरू किया जब भी बोला
24:05
शुरू में था मेरे को पीछे महीने जैसे अभी इनको लग रहा था ना इसको कैसे कोई बता सकता है
24:12
शुरू में मेरे को ऐसा लगता था कि यार असंभव है इसको बता पाना एक मौन
24:18
की छाया रहता था
24:32
अब तो एकदम सहज ईजी लगता है।
24:45
मेरे दिल में आज क्या है? तू कहे तो मैं बता दूं।
24:52
ऐसा लगता है। अरे तू कहे तो मैं बता दूं।
25:00
हां।
25:43
और आपको एक और हकीकत बताऊं। हर कोई हर कोई बात मेरी ही नहीं है।
25:53
हर कोई मैं के अतिरिक्त और क्या बता रहा है।
26:02
मैं के अतिरिक्त आप और क्या देख रहे हो? और मैं के अतिरिक्त और क्या हो रहा है?
26:30
आप जो भी बता रहे हो खुद को ही बता रहे हो।
26:39
आपकी प्रेजेंस बता रही है। आपके शब्द बता रहे हैं। आपका साइलेंस बता रहा है।
26:49
आपके होने को ही तो बता रहा है ना और क्या बता रहा है
27:02
कोई भी जैसे बताता है ना अपना अनुभव मेरे को ऐसा लगता है मेरे साथ ऐसा हुआ मेरे को वह लगा आप बोले
27:10
तो मेरे को यह वो अपने को ही तो बता रहा है मेरे को ऐसा ऐसा नहीं लगता है कोई बोलता
27:18
है सपोज वह भी अपने को बता रहा है तो हर कोई अपने को ही तो बता रहा
28:03
हां जी
28:22
यस एनीबडी
28:38
हम हम
28:54
हम हम
29:03
हम
30:27
प्रभु प्रणाम प्रणाम जी।
30:33
आपके सत्संग में एक बार हम सुने थे कि जब आप शून्यता में विराट में जब खोने
30:42
लगो उस समय भी मैं हूं को पकड़े रहो। मत छोड़ो उसको। इसके बारे में थोड़ा सा
30:52
अच्छा से समझाने की कृपा करें। हम दिखाओ यार।
31:05
यही मेरा साथी है।
31:11
अरे यार चेंज करो फेस नहीं दिखता तो मेरे को मजा नहीं आता बोलने में।
31:19
तो एक चीज बताना आप इंपॉर्टेंट हो कि यह डंडा इंपॉर्टेंट है।
31:29
बोलो ना मैं इंपॉर्टेंट हूं। मैं इंपॉर्टेंट हूं। यस ओके।
31:40
अब आप इंपॉर्टेंट हो कि आपकी देह इंपॉर्टेंट है? मैं इंपॉर्टेंट हूं। ओके।
31:48
आप इंपॉर्टेंट हो कि शून्य इंपॉर्टेंट है? मैं ही इंपॉर्टेंट हूं।
31:55
आप इंपॉर्टेंट हो कि विराट इंपॉर्टेंट है? मैं इंपॉर्टेंट हूं।
32:01
आप इंपॉर्टेंट हो कि परमात्मा इंपॉर्टेंट है? मैं ही इंपॉर्टेंट हूं।
32:10
आप इंपॉर्टेंट हो कि अस्तित्व इंपॉर्टेंट है? मैं इंपॉर्टेंट हूं। बस खत्म बात।
32:18
और आप मैं ही हो।
32:22
[हंसी]
32:26
और आप मैं ही हो जी उसमें कुछ होना होना नहीं है जानना समझना नहीं है जी
32:34
ठीक है मस्त रहो जी ये शून्य आकाश अज्ञात अव्यक्त किसी में मत लटको
32:42
ये कोई इंपॉर्टेंट नहीं है आप इंपॉर्टेंट यस जी यस
32:52
इसको इसको ऐसा कहा जा सकता है कि असली परमात्मा असली अस्तित्व आप हो बट अब वो लगाने की जरूरत नहीं है।
33:05
हां जी। क्या समझाता हूं यार मैं।
33:13
हां। बड़ा तारीफ करने की इच्छा होती है अपनी। हां।
33:21
[हंसी]
33:24
यानी आपको पता है इस छोटी सी बात में क्या क्या बयां नहीं कर दिया गया
33:31
सब कहा अनकहा बोल दिया गया हां
33:37
और आप हमेशा किसी दूसरी चीज को देते हो आप खुद देते हो करके उसमें आता है
33:48
समझ रहे हो जैसे कोई तांत्रिक है तो वह सिद्धि कोेंस देता है।
33:59
तब सिद्धि में आता है। कोई योगा वाला है।
34:04
अपने योग को इंपोर्टेंस देता है। कोई हठ योग वाला है। वह अपने क्रियाओं को इंपोर्टेंस देता है।
34:13
प्राणायाम वाला प्राणायाम को देता है। तब उसमें इंपॉर्टेंस आता है आपके देने के बाद।
34:22
कोई अस्तित्व को देता है, कोई परमात्मा को इंपॉर्टेंस देता है, कोई अपनी बॉडी को देता है, कोई धन को देता है। तब धन में
34:29
इंपोर्टेंस आता है। कोई अपने बुद्धि को देता है। मैं बहुत समझदार हूं। ऐसा वैसा
34:37
तो इन सब चीजों को इंपॉर्टेंस दे तो आप ही रहे हो ना?
34:45
और आप एक चीज भूल गए कि सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट आप हो।
34:53
बाकी सब सेकेंडरी है।
34:58
चाहे वह विराट हो, अस्तित्व हो या कुछ भी हो।
35:05
तुम इंपॉर्टेंट हो।
35:09
तुम यस तुम
35:24
कि कोई भगवान इंपॉर्टेंट है या कोई आत्मा या कोई
35:30
ध्यान कोई ज्ञान कोई बुद्धत्व कि आप इंपॉर्टेंट हो
35:37
मैं इंपॉर्टेंट हूं यार खत्म बात राज
36:08
और मैं तो मैं हूं ही मैं तो मैं हूं ही वो होना होना नहीं है।
36:23
मैं इंपॉर्टेंट हूं तो फिर मैं हूं मैं हूं नहीं करना है भैया अब आप क्या कर रहे हो मैं हूं मैं हूं मैं
36:32
हूं शब्द को इंपॉर्टेंट बना रहे हो हम बोल रहे हैं आप इंपॉर्टेंट हो मैं हूं
36:40
शब्द इंपॉर्टेंट नहीं है रिपीटेशन और यह सब यह कुछ भी इंपॉर्टेंट
36:47
नहीं है आप इंपॉर्टेंट हो मैं हूं की याद को इंपॉर्टेंट मत बनाओ। आप
36:57
हमेशा यही करते हो मैं हूं को याद करना है। अपने में रहना है। अपने में रहना है।
37:01
नो मैं हूं इंपॉर्टेंट है। मैं हूं की याद इंपॉर्टेंट नहीं है।
37:25
कोई बोलता है दुनिया में तो हम भूल जाते हैं खुद को। अरे नहीं भूलते हो। सब नाटक है आपका।
37:35
दुनिया में भूल जाते हैं खुद खुद खुद
37:45
खुद को तो कहां भूले आप
37:54
[हंसी]
37:59
भूल भी गए तब भी आप हो याद करना भूलना कोई वहां मैटर ही नहीं है।
38:14
तो मैं इंपॉर्टेंट हूं। बाकी सब सेकेंडरी है। अंतत है ही नहीं।
38:25
यस एनीबडी है कोई?
38:31
देवनहारा सब ढीले हो गए हो यार।
38:58
हम हम हम हम
39:32
नमस्कारम प्रभु जी नमस्कारम
39:39
मैं दो साल से प्रसंग सुन रही हूं हम
39:45
ऐसा नहीं लग
39:55
ऐसा नहीं लगता क्या बोला आपने आवाज कट गई आपकी ऐसा नहीं लगता दो साल से सुन रहे हो
40:05
ओके हां जी यही तो प्रेम है सत्य से
40:16
ये पूरी जिंदगी बीत जाएगी लगेगा ही नहीं देखना यूं ही अपना बैठे रहेंगे सत्संग चलता
40:23
रहेगा और अचानक आप देखोगे अपने बालों को कि वो सफेद हो गए हैं।
40:31
बुढ़ापा आ गया जाने की तैयारी दैहिक तौर पर पता ही नहीं चलेगा।
40:43
आनंद में रस में सत्संग में बस जिंदगी मस्त।
40:52
यूं ही गुजरती रहेगी।
41:53
ठीक है।
42:22
तो ठीक है आज शॉर्ट में विश्राम देते हैं वाणी को है ना
42:36
प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम
42:44
आपने अभी उनसे कहा कि ऐसे ही आपके बाल सफेद हो जाएंगे। आप बूढ़े हो जाओगे।
42:52
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
42:53
यात्रा यहां से दह जो देह की यात्रा है वो खत्म हो जाएगी।
43:00
तो बस जाते आज एक ही प्रॉमिस लेना चाहते हैं।
43:07
प्लीज जब भी लास्ट टाइम हो तो आप साथ होना बस और कुछ नहीं चाहिए।
43:16
प्लीज ना ना ये देखो ना कि सहारे मत ढूंढो। मेरे को सहारा मत बनाओ।
43:30
मेरे को आप अपनी आत्मा बनाओ जो मैं हूं।
43:34
सुनो पहले अरे सुनो तो मेरी बात पहले सुना करो।
43:42
हां।
43:44
पुराने ट्रेंड में जो चला आया है ना कि हम सहारा खोजते हैं कि गुरु हमेशा साथ खड़े रहता है। है [गहरी सांस लेने की आवाज़] ना?
43:53
या मरते समय खड़े रहता है। वह सब सहारे मत खोजो।
43:59
मेरे से प्रॉमिस लो कि आप मरते समय मत खड़े रहना। है ना?
44:08
बस मैं ही मैं रहूं हर समय। सुनो चुपचाप सुनो।
44:19
मरते समय या जीवन भर मैं ही मैं रहूं।
44:26
कोई मेरा गुरु भी है तो वह मैं की तरह रहे। कोई और की तरह ना रहे।
44:34
है ना।
44:36
नहीं तो हमारे क्या है फिर यह सहारा फिर मेरे से चिपक जाओगे।
44:42
फिर प्रॉमिस नो प्रॉमिसेस।
44:46
कोई प्रॉमिस नहीं है। नो प्रॉमिस। मैं तो नहीं खड़े रहूंगा।
44:53
ना मरते समय, ना जिंदगी में किसी भी समय।
44:58
मैं आपकी आत्मा हूं। मेरे को खड़े-वड़े नहीं रहना है कहीं पे।
45:06
मैं आपका स्वयं हूं। और यह प्रॉमिस से बहुत बड़ी चीज है।
45:17
है ना? ये सहारे फेंको सारे।
45:28
मेरे से भी आजाद रहो। मुक्त रहो।
45:32
मेरे से बन जाओ। मेरी कृपा यह वो कुछ नहीं। कभी कृपा नहीं करूंगा मैं।
45:38
कोई प्रॉमिस नहीं, कोई वादा नहीं।
45:45
मैं तुम्हारी आत्मा हूं। तुम सब की आत्मा हूं। तुम मेरी आत्मा हो।
45:52
अब, अब कौन सा प्रॉमिस करूं मैं? कौन सा वादा निभाऊं?
46:01
वो तो चाइल्डिश चीजें हो गई ना।
46:06
मरते समय ऐसा खड़े होकर मैं कहीं ऐसे जाने को गाइड करूं। वह सब फालतू की बातें हैं।
46:12
थर्ड क्लास फोर्थ क्लास बातें है ना कि आपके सूक्ष्म शरीर के साथ कहीं आपको ले
46:20
जाऊं ऐसा वैसा कुछ नहीं होता। वो सब काल्पनिक है। ट्रैप है और कुछ भी नहीं है।
46:40
तो जीते समय या मरते समय
46:48
कुछ रहे ना रहे मैं तो रहूंगा ही
46:54
मैं यानी आपका मैं जिसको आप कहते हो मैं
47:00
मरने के बाद भी और वह नेचुरल है। उसके लिए मेरे किसी
47:09
आशीर्वाद की जरूरत नहीं है। ना मेरे किसी ज्ञान की जरूरत है। ऐसा होगा ही ऐसा ही है।
47:19
हां जी।
47:25
तो नो प्रॉमिसेस ओके।
47:30
नो प्रॉमिसेस यस
47:58
बहुत सारी विद्याएं होती हैं।
48:02
कि अभी मैं एक ही समय में यहां पर हूं। मैं किसी भी देश किसी भी और जगह भी हो सकता हूं।
48:13
है ना? ऐसी विद्याएं होती है, सिद्धियां होती है।
48:19
इसी समय मैं आपसे बात कर रहा हूं। इसी समय मैं किसी और से मिल रहा हूं। इसी देह में इसी समय कहीं मैं और घूम रहा हूं।
48:31
और यह सारी बातें ना बहुत चाइल्डिश है।
48:37
जो सब जगह नहीं होता वही वही केवल वही इस टाइप की हरकतें करता है।
48:44
कि एक ही समय में मैं दो जगह हो जाऊं, चार जगह हो जाऊं, सूक्ष्म शरीर से, कारण शरीर
48:50
से या इस शरीर से भी जो सब जगह है
48:58
सबका सब कुछ है। उसको क्यों होना है सब जगह?
49:09
तो चाइल्ड चीजों से थोड़ा बचो।
49:14
यह सब चाइल्डिश चीजें हैं कि मैं शक्तिपात कर दूं ऐसे
49:22
मैं तो जिसको शक्तिपात करता हूं उसकी ऊर्जा और कम हो जाती है मालूम हां
49:30
[हंसी]
49:35
और वो ऐसे गिर जाए वो सब पुराने ट्रेंड हो गए है ना
49:41
वो बड़े नशे में झूम रहे हैं। ऐसे ऐसे ऐसे अरे यार क्या ये सब टाइम पास लगा दिए?
50:08
कि वो परमात्मा का गेट खुल गया, झरोखा खुल गया, एक अनुभव हो गया।
50:14
शक्तिपात करके मैं यह सब चाइल्डिश चीजें देना ही नहीं चाहता।
50:23
बिल्कुल नहीं।
50:26
मेरे को एक चीज पता है परमात्मा आप स्वयं हो। आपको किसी भी तरह का अनुभव देना नहीं है।
50:36
और जो परमात्मा आप स्वयं हो बस उसी को लखा रहा हूं।
50:44
मैं आत्मा भगवान को जो खुद को देव मान के जी रहे हो। बस वहां से हटा के वहीं पे शिफ्ट कर दे रहा हूं।
50:53
जहां आप शिफ्ट हो ही अब सर्वशक्तिमान को मैं शक्तिपात करूं।
51:05
मेरा पहला ही मैसेज गलत हो जाएगा ना।
51:11
मेरी दृष्टि सर्वशक्तिमान की है। आपके प्रति परमात्मा की है।
51:20
अब मरते समय मैं परमात्मा के साथ खड़ा रहूं। कि भाई तेरे को रास्ता दिखाऊंगा और ऐसा वैसा या पता नहीं क्या करूंगा।
51:30
नो डिपेंडेंसी नो प्रॉमिसेस है ना
51:39
इतनी अपने में आत्मनिष्ठा आपको होनी चाहिए। मेरा सत्संग सुन रहे हो। किसी अमित अमित की जरूरत नहीं है। और मेरा गुरु भी
51:48
है तो मेरा अंतर्यामी है और कोई अमित भी है तो वह मेरे अंतर्यामी से अलग नहीं है। मैं ही हूं।
51:57
है ना? करोड़ जन्म भी ले लूं। मैं और करोड़ बार भी मरूं तो वो मैं ही हूं।
52:04
क्या वो गुरु, वह परमात्मा, वह सद्गुरु मैं ही हूं।
52:09
और यह सामने जो गुरु दिख रहा है आपसे भिन्न नहीं है आपके होने से।
52:24
मैं तो तब भी तुम्हारे साथ खड़ा रहता हूं जब तुम मेरे को अवॉइड करते हो।
52:33
कितने जन्म कितने साल तुमने मेरे को मैं को अवॉइड किया है।
52:45
बहुत बुरा होता है अवॉइड करना किसी को। अनुभव होगा।
52:50
किसी को बुरा कह देना उतना बुरा नहीं होता जितना किसी को अवॉइड करना बुरा होता है।
53:01
मैं तो तब भी खड़ा रहा हूं जब तुमने मुझे अवॉइड किया है।
53:13
तो मेरे से छोटी-मोटी उम्मीदें मत रखो। तुमको पता ही नहीं मैं कौन हूं।
53:26
नो प्रॉमिसेस, नो धोखेबाजी।
53:36
और जहां धोखा हो ही नहीं सकता वो मैं हूं। जिसको आप भी कहते हो मैं हूं। वह एक ही है।
53:46
वह रहता ही रहता है। उसको उसको ना मारा जा सकता है, ना हटाया जा सकता है, ना एब्सेंट
53:52
किया जा सकता है। मृत्यु भी नहीं हटा सकती।
54:07
हां जी।
54:11
यह अच्छा किया पूछ लिए सबके काम आएगा नहीं तो मरते समय साला मेरे को बुलाते रहेंगे सब
54:19
[हंसी]
54:21
मैं कहां-कहां जाऊंगा यार वो आने जाने वाला मैं तो मेरे को पसंद ही नहीं है
54:29
[हंसी]
54:30
वह मन है माया है आना आनी जानी सो माया मैं कहीं आता ना जाता।
54:46
बहुत उम्मीदें कई लोग रखते हैं कि मरते समय मेरे साथ मरे और यह करें, वह करें।
54:51
जीते जी कुछ हो जाएगा। कुछ नहीं होगा बता रहा हूं। अभी से लिख के दे दे रहा हूं।
54:59
कुछ भी नहीं होगा। गारंटेड इतना जरूर होगा कि कुछ नहीं होगा।
55:10
क्योंकि यह कचरा चीजों में मेरा फोकस है ही नहीं।
55:15
ये हो जाए, वो हो जाए,
55:33
आत्म नष्टिक रहो। खुद पर निष्ठा।
55:40
मैं हूं तब मेरा शरीर है। मैं हूं तब यह ब्रह्मांड है। मैं हूं तब मेरा सद्गुरु
55:49
है। सारे गुरु हैं। मैं हूं तब अस्तित्व है। परमात्मा है। सब का आधार मैं हूं।
56:01
मुझे किसी के साथ नहीं होना है या किसी को मेरे साथ नहीं होना है।
56:10
मैं अपने आप में पर्याप्त हूं, तृप्त हूं, संतुष्ट हूं।
56:23
मैं तुमको बेसहारा नहीं कर रहा हूं।
56:29
आत्मा कभी भी बेसहारा नहीं होती। वह नेगेटिव सेंस है कि सारे सहारे छोड़ दो, बेसहारा हो जाओ।
56:37
आत्मा होना यानी सब कुछ हो जाना है। क्या?
56:44
जो भी देख रहे हो, जो भी जान रहे हो, सब कुछ हो जाना है।
56:51
वह भी सहज में पूरा अस्तित्व हो जाना है।
57:03
हां जी। ऐसा पूछा करो।
57:12
नो प्रॉमिसेस यस चालू करो उनको
57:21
तो अब एग्री हो नो प्रॉमिससेस से यस हां ये हुई ना बात
57:30
यू आर अ पार्ट ऑफ मी मेरे मेरा एक पार्ट हो मेरा मैं हूं तो आप हो
57:39
आप मेरा हिस्सा हो
57:45
क्योंकि सबका आधार मैं हूं है ना
57:52
मैं हूं तब यह सब कुछ है और मैं नहीं हूं तो यह कुछ भी नहीं है और कुछ भी नहीं भी
57:59
नहीं है सब का सब कुछ मैं ही हूं बस
58:10
ये सुनते सुनते ऐसा यकीन आ जाता है खुद में
58:18
और खुद में निष्ठा होने लगती है भरोसा होता है और जितना भरोसा करोगे ना
58:28
उतना मैं अपने आपको प्रत्यक्ष प्रकट करता है।
58:34
हां बात भरोसे की है, निष्ठा की है और जो हो रही है धीरेधीरे आपको हो रही है।
58:44
है ना?
58:47
आ रही है मैं पे निश आ रही है। वैसे वैसे मेरा मैं दूसरों के सामने प्रगाढ़ रूप में उजागर हो रहा है।
58:58
मैं इट मींस सबको संभाल लेता है। वहां कोई दूसरा नहीं रहता।
59:04
अ हां जो संपूर्ण को अपने में समा ले वही असली मैं है।
59:12
है ना? वहां कोई दूसरा नहीं है।
59:18
मैं एक बात पूछना चाहती हूं कि ये जो जर्नी है पहले जैसे मैं कह रही हूं कि आत्मनिष्ठा आ रही है। जैसे जैसे मेरे मैं
59:28
में तो वह प्रगाढ़ रूप में दूसरों के सामने शो हो रही है कि मैं खुद में हूं अब।
59:34
एक सेकंड एक पॉइंट एक पॉइंट आया है मैं आपको बताना चाहूंगा कि जैसे ही हम बोलते हैं ना यह तो कोई
59:43
जैसे कि यह जर्नी है जैसा आपने कहा है ना तो हमेशा एक चीज याद रखना हमेशा आप सब भी
59:51
हर कोई सब कुछ जर्नी है मैं को छोड़ के
1:00:02
मैं कोई जर्नी जर्नी नहीं हूं और मैं के अतिरिक्त सब जर्नी है।
1:00:12
नहीं मैं जर्नी नहीं है लेकिन मैं जो मैं एहसास कर रही हूं ना मेरे एहसास की जर्नी है।
1:00:19
ये मेरे खुद को सुनो।
1:00:22
मैं कुछ समझ थोड़ा सुना करो।
1:00:30
इन द सेंस कि मैं के अतिरिक्त हर चीज एक जर्नी है।
1:00:39
आपका थॉट प्रोसेस है, भाव है, बॉडी है, दुनिया है। यह सब एक जर्नी है।
1:00:47
है ना? जैसे मैं के केंद्र में यह सारी सतहें घूम रही हैं।
1:00:56
वह चाक स्थिर रहता है ना। एक चीज स्थिर रहती है तभी चारों ओर कुछ घूमता है ना
1:01:05
ठीक है थोड़ा सुनो अभी तो वो स्थिरता
1:01:15
जो सेंटर है केंद्र है जो आप हो वह स्थिर है। आपकी उपस्थिति में यह सब कुछ घूम रहा
1:01:26
है। सारा यूनिवर्स आपका बॉडी माइंड ये सारा दृश्य ये सब सतह है
1:01:35
और यू आर द सेंटर और सेंटर जो मैं हूं वह कोई जर्नी नहीं है। बाकी सब जर्नी है।
1:01:51
अब अब और एक गहरा पॉइंट
1:02:02
जो सेंटर है जो मैं हूं वो है स्थिर
1:02:08
है ना बाकी सब घूम रहा है बाकी सब
1:02:17
घूम रहा है आपके विचार आपका मन आपके भाव इवन आपकी की दुनिया भी परिवर्तित हो रही है, घूम रही है।
1:02:30
लेकिन मैं देश में अगर आप एक्चुअल जी रहे हो
1:02:46
तो सब कुछ स्थिर है। हर घूमती हुई चीज भी स्थिर है।
1:03:04
चलायमान भी स्थिर है। हां। अरे भाई देखो।
1:03:14
एग्जांपल ही देना पड़ता है यार।
1:03:17
जैसे ट्रेन चल रही है, कार चल रही है। धरती स्थिर है कि नहीं?
1:03:27
आप चल रहे हो। कितने सारे लोग चलते हैं। धरती स्थिर है। आपका घर स्थिर है। घर में चलते हो।
1:03:35
धरती स्थिर है। अच्छा अब धरती भी घूम रही है।
1:03:45
चक्कर काट रही है। किसका? सूर्य स्थिर है।
1:03:52
अब सूर्य भी बड़े सूर्यों के चक्कर काट रहा है। बड़े सूर्य स्थिर है।
1:03:59
अब यह भी सब चक्कर काट रहे हैं। आकाश स्थिर है। सब तो स्थिर है।
1:04:12
एक साइड से देखोगे तो सब अस्थिर है। सब चल रहा है और एक साइड से देखोगे तो सब स्थिर है।
1:04:21
आत्मा के साइड से देखने पे सब स्थिर है। किसी का आवागमन है ही नहीं।
1:04:28
हां।
1:04:31
ऐसा थोड़ी ना होता है कि आपका आवागमन समाप्त हो गया। सब का आवागमन समाप्त हो जाता है आत्म देश में क्योंकि सब कुछ मेरी आत्मा है। मैं ही हूं।
1:04:44
तो हम अभी तक स्थिरता और वही समझे हैं आज तक। यह सब स्थिर है।
1:04:51
सेटल है। ना कोई यात्रा है ना कोई मंजिल है।
1:05:21
हां जी मैं आपको बोलने नहीं देता क्योंकि मेरे को
1:05:28
क्या क्या-क्या सेंस आने लगते हैं बताने के लिए तो मैं आपको रोक देता हूं क्योंकि यह कई लोगों के काम आ जाता है। है ना?
1:05:42
तो कोई कुछ भी पूछता है तो मेरा धड़ धड़ धड़ धड़ इधर से निकलना शुरू हो जाता है। [हंसी] अब गायब मत हो जाए करके मैं रोक देता हूं।
1:05:52
आपको स्टॉप!
1:05:54
[हंसी]
1:05:55
उनसे बात चालू करो उनको।
1:06:00
प्रभु मैं वैसे ये आम सी बात है। आध्यात्म से रिलेटेड नहीं है। मैंने ऑब्जर्व किया
1:06:09
है कि बहुत सारी चीजें ना आपसे मैच होती हैं। अभी बताऊं दो तीन चीजें बताऊं। मेन मेन जो मैं
1:06:18
एक तो आप चाइल्ड लवर हो और मैं भी चाइल्ड लवर हूं। ठीक है। ओके। [हंसी] है क्या?
1:06:29
सेकंड थिंग आप आपकी भी मेमोरी बहुत शॉर्ट है। मेरी भी मेमोरी बहुत शॉर्ट बहुत शॉर्ट
1:06:37
मेमोरी है मेरी। इवन मेरे हस्बैंड गजनी है ये मेरा खोपड़ी एग्जजेक्टली। मेरे हस्बैंड बोलते हैं कि
1:06:46
बाकी सब तो चल जाएगा। किसी दिन ये मत कह देना कि हां जी तू कौन? [हंसी] मेरे हस्बैंड मेरे हैं कि किसी दिन ये रंग
1:06:56
कह देना कि हां जी त कौन [हंसी] इतनी ज्यादा और तीसरी चीज जो मैंने ऑब्जर्व की थी वो भूल गई।
1:07:09
तीसरी चीज वो भी भूल गई। अच्छा
1:07:14
[हंसी]
1:07:20
[हंसी]
1:07:21
अभी जब याद आएगी नेक्स्ट टाइम बताऊंगी आपको। हां जी। हां जी।
1:07:29
लेकिन आपको सुनना बहुत बहुत अच्छा लगता है और सुन सुन के बहुत अपने आप में मैं
1:07:37
निष्ठा बढ़ती जा रही है जो जो सारी चीजों से उत्तम है। मींस
1:07:45
किसी भी चीज कोई भी चीज जिंदगी की प्रिशियस से प्रिशियस चीज देकर भी उसका
1:07:52
मोल नहीं चुकाया जा सकता। इतनी अनमोल है वो चीज आपसे बात करना आपको सुनना सबसे
1:08:00
उत्तम थैंक यू सो मच थैंक यू
1:08:10
ये बनी हुई थी चाय है ना पानी दो हमारी चाय तो आ गई भैया देखो
1:08:17
अभी मैं देखिए मेरे हस्बैंड ऑफिस से आ गए हैं एक घंटा हो गया लेकिन मैं आपको छोड़ नहीं पा रही उनके लिए चाय तक नहीं बना पा
1:08:26
रही [हंसी] मेरे [नाक से की जाने वाली आवाज़] को यह चाय तक छोड़ दी आपके लिए [हंसी]
1:08:33
आप पहले चाय बाद में ये ये चीजें बताने की नहीं है एक्चुअली ये तो जस्ट मैं हंसी
1:08:40
मजाक के लिए बता रही हूं लेकिन सच में ओके अब अब बातें इधर-उधर थोड़ी सी जा रही
1:08:48
है तो यहां तक बढ़िया है परफेक्ट है मस्त रहो ओके और हस्बैंड को चाय बनाकर पिला दो। ठीक है।
1:09:00
अच्छा वो भी आपकी आत्मा है। आपसे भिन्न नहीं है। ओके।
1:09:27
तो और कोई है कोई?
1:09:37
प्रेम प्रणाम प्रभु जी। प्रेम प्रणाम। कैसे हैं आप?
1:09:45
जी कैसे हो? मैं ठीक हूं। आप कैसे हो? हम भी ठीक हैं।
1:09:54
शुरू शुरू में आपने अ जब आपको देखा तो ऐसे लगा एकदम से कि जो
1:10:03
सारे एम थे हमारे गोल थे कि एनलाइटनमेंट या जो भी गोल था हमारा वो एक क्षण में
1:10:11
खत्म हो गए। तो ऐसे लगने लग गया कि अब कुछ बचा ही नहीं। अब क्या करना है?
1:10:20
तो फिर आपका अभी थोड़े दिन पहले जो सत्संग था उसमें यह जवाब भी मिल गया कि हमारा जो
1:10:29
असली गोल है वो मैं आत्मा भगवान। तो उससे यह उत्तर मिला कि जो भी हम कर रहे हैं
1:10:38
व्यवहार का भी संसार का भी अपने जो डेली रूटीन के जो काम हैं अब वो करते हुए भी यह
1:10:45
भाव रहता है कि मेरा लक्ष्य मैं आत्मा भगवान है। यह कार्य का भी लक्ष्य मैं आत्मा भगवान है।
1:10:52
हम लेकिन कहीं ना कहीं ऐसा जरूर हुआ है। एक वैसे तो हर विचार को अब हम इतनी वैल्यू
1:11:00
नहीं देते हैं। लेकिन एक विचार आता है जैसे पहले नाम जप थोड़ा ज्यादा होता था।
1:11:06
अब कम होता है उसमें भी कोई तकलीफ नहीं है। लेकिन ऐसे लगने लग गए कहीं आलसी तो नहीं हो गए कि ऐसा लगता है कि सब अच्छा
1:11:15
है। सब बढ़िया चल रहा है। सब चीज सुंदर है। तो कहीं ऐसा तो नहीं कि हम कहीं मतलब ओवर कॉन्फिडेंट हो गए हैं।
1:11:26
हम ऐसा तो लग रहा है मेरे को भी।
1:11:30
[हंसी]
1:11:34
मुझे यह विचार थोड़ा दो चार बार आया तो मैंने कहा मैं जरूर आपसे पूछूंगी कि कुछ
1:11:40
नहीं चाहिए तृप्ति है सब कुछ आनंद में कुछ भी होता है तो अच्छा ही लगता है कुछ भी बुरा भी हो तो भी लेकिन फिर भी ऐसे लगने
1:11:50
लग गया है कि कुछ ओवर कॉन्फिडेंस तो नहीं आ गया है कि अब कुछ करने की जरूरत नहीं है
1:11:57
अरे ओवर कॉन्फिडेंट आता तो यह सवाल ही नहीं आता ना।
1:12:05
असल में वह जो जीव है ना जीव की खुराक क्या है? उसको कुछ करने को
1:12:12
चाहिए। उसको कोई नाम दे दो, कोई क्रिया दे दो, कोई कुछ भी दे दो।
1:12:18
जीव जब तक जिएगा, जब तक वो करेगा। जीव भाव। है ना?
1:12:27
उसका जीवन ही इसमें है कि उसकी खुराक उसको मिलनी चाहिए। वह अपने बहाने खोज लेता है कि आज यह करने को मिल जाए। आज वह मिल जाए।
1:12:39
पहले से जो कर रहे थे कम से कम वह तो करें और जीव तब तक जिएगा जब तक कुछ करेगा
1:12:48
और करना छोड़ दिया। वह मरेगा तो मरने को तैयार रहो।
1:12:56
क्योंकि जो मरता है जीव भाव वह आप हो नहीं है ना
1:13:04
तो जो थोड़ा बहुत कर भी रहे हो उसको भी हटा दो वो अपने आप ही छूट रहा है सब कुछ
1:13:12
हां और जो छोटामोटा और भी है ना उसको भी छोड़ दो कंप्लीट फ्री
1:13:19
जैसे रात जैसे ना मुझे ऐसे था कि रात को मुझे थोड़ा शांत ज्यादा लगता है। तो मैं रात को सोने
1:13:28
से पहले थोड़ा ऐसे बैठती थी। मेडिटेशन नहीं बट हां अच्छा लगता है अपने साथ बैठना। तो लेकिन अब वो ऑटोमेटिकली वो अपने
1:13:36
आप सब चीज बैठना क्योंकि वो हर टाइम ही वो फीलिंग है तो अलग से बैठने का मुझे ऐसी कोई नीड लगती नहीं है। तो वो भी धीरे-धीरे
1:13:45
छूट गया है तो तो ऐसा लगा कि ऐसा तो नहीं कि मतलब कुछ गलत ट्रैक तो नहीं पकड़ लिया
1:13:53
है कि ना कोई गलत नहीं है यही सही है और
1:14:00
सहज में ही वह अच्छा लग रहा है जो बैठने से लगता था ना तो यह तो सुंदर हुआ ना
1:14:08
और इसके बाद कभी सहज में बैठना हो भी जाए एकांत में तो वो भी सुंदर है कोई गलत नहीं
1:14:16
है वो सहज सुंदर होता ही है
1:14:23
क्योंकि क्योंकि आप सहज हो, आपकी जिंदगी सहज है और ये पूरा चराचर सहज है।
1:14:31
सहज सुंदर होता ही है और सही होता ही है। हां।
1:14:39
जी।
1:14:40
तो कि ओवर कॉन्फिडेंस और ये वो तो नहीं है।
1:14:48
यह आपकी गलत सोच है। निश्चिंत रहो। ठीक है।
1:14:56
भगवान का नाम लो वह भी सुंदर है। कभी नहीं ले पा रहे हो वह भी सुंदर।
1:15:03
है ना? हां जी।
1:15:06
एक सत्संग में एक लाइन सुनी थी मैंने कि गुरु आज्ञा नहीं देते हैं। गुरु सामर्थ्य
1:15:14
देते हैं। तो आपका हर वचन ऐसा लगता है कि आप सामर्थ्य दे रहे हो। बिना सोचे समझे
1:15:22
बिना बुद्धि लगाए उसे बस हां जी निकलता है। ऐसा लगता है। मतलब उस पर बिना डाउट करे विश्वास है कि आपने बोला है तो वो है।
1:15:33
कोई दूसरा उसमें विकल्प नहीं है।
1:15:37
नहीं वो अगर आपने बोला सुनो साक्षी जी सुनो।
1:15:41
मतलब ये सारे पॉइंट्स इतने कीमती हैं जो मैं बता रहा हूं ना।
1:15:47
उसको अपने जीवन में संजो के रखो। है ना असल में क्या है जब जीव भगवान का नाम ले
1:15:56
रहा है तो तकलीफ और जब भगवान भगवान का नाम ले रहा है तो
1:16:07
आपका मैं हूं आप स्वयं ही तो वह भगवत स्वरूप हो भगवती हो नारायणी हो
1:16:14
अब वह भगवान जब भगवान का नाम ले रहा है या नहीं ले ले रहा है। दोनों हालत में वह भगवान है ना।
1:16:24
और जीव जब भगवान का नाम ले रहा है तब भी जीव है और नहीं ले रहा है तब भी जीव है।
1:16:34
तो अपने आप को भगवान जान के सारे चराचर को भगवान जान के भगवान का नाम जो लेता है वही मात्र भगवान का नाम लेता है।
1:16:46
बाकी जीव जो भगवान का नाम ले रहा है।
1:16:52
उसमें जीव तो रहेगा ही ना।
1:16:59
तो खुद को राम जान के जो राम का नाम लेता है वही राम का नाम लेता है। वही राम का नाम जपता है।
1:17:11
कि आप सहित सारा चराचर राम है। खुद को जीव मान के जो राम का नाम लेता है।
1:17:22
वह माया का ही नाम लेता है।
1:17:27
तो अपने आप को राम जानो और आप राम हो इवन लास्ट में जानना भी नहीं है।
1:17:34
और फिर राम का नाम लो या ना लो राम ही राम है बस।
1:17:42
यह प्रेम से भी गहरी बात है। समझ रहे हैं।
1:17:48
प्रेम में क्या है? सर्व भाव भज सब भाव में राम का भाव वो भी सुंदर है।
1:17:55
उसमें जीव भाव को हम पलटी करते हैं। राम का भाव डालते हैं। है ना? वो भी सुंदर है।
1:18:02
बट यह डायरेक्ट बता रहा हूं। स्ट्रेट और आप राम हो और बोलो राम।
1:18:14
अरे बोलो तो।
1:18:19
क्या पूरी रेंज बदल जाती है ना और जीव कैसा डरा डरा रहता है अरे भूल जाऊं
1:18:26
तो ये हो जाएगा वो हो जाए तो ये हो जाएगा वह मेरा ओवर कॉन्फिडेंस तो नहीं है अरे
1:18:32
हटाओ ये सब सेंस को राम का सेंस आपकी आत्मा राम है और फिर सब की आत्मा राम
1:18:41
है सर्व आत्मा राम या जो भी नाम भगवान का आप जपते
1:18:48
है ना हमारा तो डायरेक्ट चलता है भाई क्या करें
1:18:57
[गहरी सांस लेने की आवाज़]
1:19:00
तो देखो यह ऐसा है ना अब आपने कुछ पूछा या जो भी आपको कंफ्यूजन था तो यह सत्संग की
1:19:08
महिमा है ऐसे किसी के अंदर कुछ समस्या है डाउट है या जो भी है उसको क्लियर करना चाहिए। उससे
1:19:17
आप अपग्रेड होते हो। हो आप परमात्मा ही फिर भी अपग्रेड होते हो।
1:19:25
आज यस आप कुछ कहना चाह रही थी। मैंने आपको रोक दिया था। बताइए।
1:19:33
बस शुक्राने ही शुक्राने हैं आपके।
1:19:36
वैसे तो बहुत कम डाउट्स होते हैं और शब्द भी नहीं होते उतने बोलने के लिए।
1:19:43
लेकिन यह विचार मुझे बहुत तीन चार बार आ गया तो मैंने सोचा कि पूछना चाहिए आपसे।
1:19:50
हां नहीं अच्छा है। ऐसा पूछ लिया करो।
1:20:00
तो इतनी निष्ठा रखो कि आपका होना ही राम है और सबका होना राम है।
1:20:09
ओके।
1:20:11
थैंक यू सो मच शुभकामना प्रणाम जी और आपने एक और बात बहुत
1:20:20
अंदर तक समझा दी है कि ज्ञान तो हम है ही लेकिन प्रेम की जो आवश्यकता थी ना आपने प्रेम करना सही मायने में सिखा दिया है।
1:20:34
अभी सीख रहे हैं पूरी तरह तो पता नहीं आया है कि नहीं लेकिन उससे और ज्यादा सुंदर हो
1:20:42
गया है सब कुछ प्रेम से हम और
1:20:48
दो लाइन आपके लिए भाव है मेरा गाने का हम
1:20:56
रंग तूने प्रेम का जो मुझ पे चढ़ाया है
1:21:04
सच कहूं जीने का मजा ही अब आया है। जिंदगी
1:21:11
में जीने का मजा [गाना गाने की आवाज़] ही अब आया है।
1:21:18
अच्छा असल में
1:21:26
जब आप एक्यूरेट जो आप बोले ना कि
1:21:35
कुछ नहीं करना या करने वाली बात से बात शुरू हुई थी।
1:21:40
जब एक्यूरेट खुद को आप राम जान लेते हो, परमात्मा जान लेते हो तो परमात्मा सिर्फ एक ही चीज कर सकता है।
1:21:50
वो है प्रेम।
1:21:56
और उससे अंतत बहता रहता है। करना भी नहीं पड़ता।
1:22:00
बट एक क्रियाशील है ना प्रेम इसलिए वह करता भी है।
1:22:08
उसकी उपस्थिति उससे बहता है। वह करता है। वह प्रेम में जीता है। परमात्मा और क्या करेगा?
1:22:17
प्रेम के अलावा क्या करेगा?
1:22:22
असली प्रेम खुद को परमात्मा जान लेने पर ही पैदा होता है।
1:22:32
ओके प्रणाम जी प्रेम प्रणाम
1:22:46
प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम जी
1:22:55
थोड़ा कन्फजन बट ऐसा लगता है कि देह होता है तब खुद को
1:23:03
भगवान कैसे मानना है तो देह जाने के बाद जब भगवान मानोगे तो कैसे मानोगे मतलब डिफरेंस क्या है
1:23:12
जैसे अभी बोले ना आप देह है मानना नहीं है पहली चीज तो जानना है सेकंड चीज
1:23:21
अभी आपने देह लाया भी और देह के जाने के बाद भी सोच लिया
1:23:30
यही तो भगवान की निशानी है जो देह के जाने के बाद भी सोच लेता है कि क्या होगा
1:23:38
कि देह जाने के बाद खुद को भगवान कैसे मानेंगे यह तो भगवान ही सोच सकता है ना देह जाने
1:23:46
के बाद एटलीस्ट इंसान तो नहीं सोच सकता ठीक
1:23:53
[हंसी]
1:23:57
अभी आप सुनो हमको तो आपको धीरे-धीरे क्लेरिटी आएगी। हम देह को या अहंकार को
1:24:04
भगवान नहीं कह रहे हैं। मैं देह मन नहीं मैं आत्मा भगवान।
1:24:11
थोड़ा सुनिए तो आपको धीरे धीरे क्लेरिटी आ जाएगी। ओके जी
1:24:18
जी स्वामी जी प्रणाम प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
1:24:31
ठीक है यस
1:24:38
हां जी बताइए
1:24:48
कितने लोग हैं इसमें अभी विराज हम ओके
1:24:58
इतने तो ये लोग रहते ही हैं। ये तो कंटिन्यू वाले हैं।
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खिलाओ यार।
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हां किसी को और कुछ प्रेम प्रणाम जी
1:25:34
प्रेम प्रणाम जी बढ़िया जी
1:25:40
हां जी हां जी
1:25:48
मुझे ये कहना था के जैसे ना
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जो भी घटता है वो मैं आत्मा भगवान ही है
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और जो सुख है दुख है सब मैं आत्मा भगवान ही है
1:26:11
सब कुछ हम उससे भिन्न कुछ है ही नहीं।
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यस और हमारी हमको कुछ इच्छा भी नहीं करना है कि ये सही नहीं है ये गलत है। बस जो है सब में आत्मा भगवान है।
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हां अरे भाई देखो जब सब में आत्मा भगवान है तो भगवान से गलत हो कैसे सकता है।
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जब जीव भी गलत करने से डरता है।
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तो भगवान देश में वह तो सही से भी पार के कर्म होते हैं। उसका कर्म भी भगवत रहता है। भगवान रहता है।
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इतने सुंदर कर्म होते हैं। वो वो बट सब ऑटोमेटिक है। हां वहां यह सही गलत के
1:27:01
दायरे नहीं है। जिसको हम सही गलत समझते हैं।
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ऐसा सोच के कोई गलत करे वह गलत है। है ना?
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भगवान देश से आत्म देश से सब सुंदर ही होता है। सारे कर्म
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सारा जीवन सब का सब कुछ। वह तो हर चीज को पवित्र कर देता है। छोटी से छोटी, बड़ी से
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बड़ी ऑटोमेटिक है वो। हां। आप कुछ कह रहे थे।
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हां जी। तो ऐसा अगर कोई रियल में सोच के चले या ऐसा अगर हो जब हो जाता है मैं आत्मा भगवान ही हो जाता है।
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तो उससे तो कर्म होते ही नहीं है।
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उससे उससे कर्म होता ही नहीं है। उसे अगर देह भाव में आकर ही कर्म करता है मतलब इंसान
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यस तो फिर उसका फल भी फल भी मिलता है कि देह माना कर्म किया तो उसका फल भी मिलेगा। मगर
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अगर मैं आत्मा भगवान में ही है तो फिर तो सब कुछ मैं आत्मा भगवान ही है। फिर तो कर्म भी वही है। सब कुछ वही है।
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मैं आत्मा भगवान ही है। और फिर इतनी एक ना जिंदगी में एक्सेप्टेंस आ
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जाती है कि हां सब बढ़िया है। एक अहभाव होता है कि इसको देखने का ही मौका मिल रहा है। इसको जीने का ही मौका मिल रहा है।
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कितनी बड़ी बात है।
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कि कुछ भी ना होता तो क्या था। मतलब इतना सब कुछ है। कितना बढ़िया है सब कुछ।
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कितना सुंदर सही है यह बहुत ही बढ़िया है आपकी अनुभूति और
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जो भी आप जी रहे हो बहुत परफेक्ट है ये बहुत सुंदर है
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धन्यवाद जी आपको सुना सुन के आपका नाम क्या है
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दान सिंह हां तो तो आपको ऐसा कोई डाउट आउट नहीं होता इसमें?
1:29:36
नहीं। यस।
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इसमें कैसे डाउट होगा? बोलो। अपने में कैसे डाउट होगा?
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मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
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बहुत सुंदर बहुत ही अच्छा यह क्लेरिटी आ जाना
1:30:14
इस वननेस की अद्भुत है यह इवन आपके कर्म और सारी चीजें जो भी आपने बताया वह भी सब मेल्ट होते जा रहे हैं।
1:30:25
मैम में बहुत ही परफेक्शन है ये। बहुत अच्छा है।
1:30:37
ये सब मैं आत्मा भगवान की वजह से ही है।
1:30:39
बस यस अबब्सोलुटली राइट।
1:30:50
तो अपना ख्याल रखें। आत्मनस्टिक रहें।
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बहुत ही सुंदर प्रणाम प्रेम प्रणाम जी
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प्रेम प्रणाम जी
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वो बड़ी खुशी होती है सब क्लेरिटी देख के ना जितनी भी आ गई इतनी बहुत होती है मालूम
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बहुत क्लियरिटी है ये यहां जन्म लग जाते हैं इस क्लेरिटी के लिए
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कई जन्म बता रहा हूं आप मैं से भिन्न ही देखोगे सब कुछ चाहे कुछ कर लो कोई ध्यान कर लो साधना कर
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लो कोई ज्ञान सुन लो आप भिन्न ही देखोगे
1:31:50
ये क्लेरिटी आना भी प्रसाद है सरप्राइज है।
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कहां की आवाज आ रही है भाई?
1:32:18
हम प्रेम प्रणाम सर प्रेम प्रणाम।
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सर मेरा एक सवाल था कि जैसे मेरे मेरी जो
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लाइफ है उसमें मैंने बहुत गलती की [गला साफ़ करने की आवाज़] थी आ रही है उसको हटाओ
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एक सेकंड जस्ट सेकंड हां बताइए तो सर मैंने मैं लाइक चार पांच साल से मैं
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भक्त ही रही हूं शिव भगवान को लेके मैं एक दोस्त जैसा मैं लेके घूमती थी क्योंकि वो टाइम तो ऐसे ही मुझे मालूम था। तो
1:33:02
फिर जैसे बाद में साधना के बारे में सब पता चला जो भी हुआ
1:33:10
अल्टीमेटली अ एक बहुत अनलिमिटेड अमाउंट ऑफ प्रेम और
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खुशी अंदर से आई और मुझे लेकिन फिर भी आत्मनिष्ठ होने के बारे में कुछ पता नहीं
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था। स्टिल आप मेरे लाइफ में है और जो मैंने आपका एक वीडियो देखा था जहां पर आप बोल रहे थे कि पहले आपको विषय त्याग
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होता है और फिर आपको आत्मनिष्ठ होते हैं फिर आप सहज में जाते हो तो
1:33:41
मुझे इस आत्मनिष्ठ के बारे में पता नहीं था तो उसकी वजह से मैं हमेशा जीवा और फिर
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जो प्रेम और आनंद है उधर ऐसे मैं जंप लगाती रहती थी तो अब अब मैं आपको जब सुन रही हूं तो
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एक और आपने कहा था कि अगर आपके अंदर निष्ठा है तो वो किसी भी रूप में आके आपको सब बता के बताते हैं तो
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मेरे अंदर से ही दो दिन दो-तीन दिन पहले सडनली
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मुझे एक नहीं समझ में आया दैट शिव है शिव सब कुछ है जो आप मैं बोलते हैं तो एंड
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वो वो ये सब ड्रीम कर रहा है जो शरीर और मन दोनों ही ड्रीम कर रहा है। तो मैं सडनली
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उस उस अवस्था में मतलब उधर आई और फिर मैं जस्ट सिर्फ मैं में आ गई और फिर मैं सबको देख रही हूं और मुझे लगा कुछ तो है ही नहीं। ये सब इमेजिनेशन है और कुछ नहीं है।
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फिर मैं सब चीजों को देख रही हूं और अ ये सब ऐसा नहीं बोल सकती कि ये सब में
1:34:53
है लेकिन इट वास लाइक मैं बस हूं और कुछ नहीं है।
1:35:00
और फिर अब मेरे को जब भी मैं कोई गाड़ी चला रही हूं या कहीं पे भी जा रही हूं किसी को भी देख रही हूं। आइदर मैं उनको
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मेरे सामने भगवान ही खड़े हैं। ऐसा ऐसा मैं सोच के उनसे बात कर रही हूं। नहीं तो मैं एक गेम खेल रही हूं। एक
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वीडियो गेम के अंदर हूं वैसा एक फीलिंग आ रहा है कंटिन्यूसली। सो आई जस्ट मैं बस अपना स्थिति आपको बताना चाहती थी।
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आत्मनिष्ठ के बारे में मुझे नहीं पता था।
1:35:34
और एक दो दिन पहले भी मुझे लगता है मेरे अंदर से एक एक बहुत ही स्ट्रांग प्रेजेंस जो मूव भी नहीं कर मतलब जिसके बिना मैं
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मूव भी नहीं कर सकती वैसा मुझे एक आभास हुआ कि
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मैं जो जिस भक्ति भाव से या जिस चीज से मैं चलती थी या मैं देखती थी या जानती थी ये सब वैसा कुछ नहीं है। दिस इज़ समथिंग
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बहुत ही विराट या जैसे फर्स्ट व्यूअर ने बताया था कि वो बता भी नहीं सकते ऐसा कुछ है करके।
1:36:10
हम्म। सो सर बस इतना ही बोलना था।
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हां। ठीक है ना? जो भक्ति से आप चले हो, जो शिव से प्रेम रहा है आपका
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वो सुंदर है, अद्भुत है। है ना? असल बात क्या है मालूम आप?
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आप आप जी रहे हो। कंटिन्यू हो।
1:36:44
यह इंपॉर्टेंट है। लगे ही हुए हो।
1:36:48
ठीक है। उसको अलग मान के एक मान के वह एक सेकंड चैप्टर है। है ना?
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आपने सत्य को, शिव को, प्रभु को याद किया है।
1:37:03
अब फाइनल चैप्टर में मैं हूं। उसको याद की आवश्यकता नहीं। मैं उसकी बात नहीं कर रहा हूं। इससे पहले मैंने जो भी कहा उसको अभी साइट करो।
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कुछ अपन नया टॉक करते हैं। है ना?
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तो जो भक्ति है ना भक्ति इन द सेंस
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भक्त यानी उसकी एक चॉइस है कि वो अलग भी परमात्मा से नहीं रहना चाहता
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और पूर्णतः एक भी होना नहीं चाहता।
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थोड़ा सा अलग और थोड़ा सा एक
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तो परमात्मा मैं आत्मा भगवान उसके लिए वैसा ही हो जाता है। जैसा उसका भक्त चाहता है।
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उससे वह अलग होता भी है और अलग होकर मिलता भी है।
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कोई शिव स्वरूप में चाहता है, उससे शिव स्वरूप में मिलता है। राम तो राम, कृष्ण तो कृष्ण, जिसका जो भी भाव है,
1:38:22
परमात्मा आपका भाव खंडित नहीं करता। उसी भाव से आपसे मिलता है।
1:38:35
तो उस वे से जो भी आपने जिया है वह अद्भुत है, सुंदर है।
1:38:41
वह याद करना, वह शिव के साथ जीना, वह उसके प्रेम में जीना, कभी उसको गले लगा लेना,
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कभी थोड़ा दूरी को उसके साथ महसूस करना, विरह को तो भक्त की हर इच्छा भगवान पूरी करते हैं।
1:39:03
है ना?
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कोई ऐसा नहीं है कि वो मैं हूं स्ट्रेट एक लैंग्वेज है।
1:39:11
वो फाइनल चैप्टर है। ठीक है वो। बट इंपॉर्टेंट ये है कि आप लगे हुए हो।
1:39:20
जी रहे हो। जो आपको समझ आता है जैसे आपके भाव है वैसे जी रहे हो
1:39:27
यह सुंदर है और जो भगवान आपके लिए दो भी ना हो सके वह भी कोई भगवान होगा
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भगवान हमेशा एक ही रहे उसको आप भगवान कहोगे वो एक भी हो सकता है
1:39:44
और आपके लिए दो भी हो सकता दो होके भी आपसे मिल सकता है और फिर अद्वैत होकर भी आपसे मिल सकता है।
1:39:58
वहां बाउंड्री नहीं है याद रखना। भगवान देश में कोई बाउंड्री नहीं है। आप जैसे
1:40:04
मिलना चाहते हो वैसे ही मिलेगा। और मिलेगा ही याद रखना।
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इससे पहले मैंने जो भी बातें की उसको एकदम साइड कर देना। यह एक अलग रेंज है ना।
1:40:22
अब बात है इस दीवानगी से जीने की। है ना?
1:40:31
इस प्रेम से और भक्त सहारा लेता है। भक्त ऐसा नहीं कहता कि मेरे को कोई सहारे की जरूरत नहीं है।
1:40:45
भक्त सहारा लेता है शिव का, राम का, सद्गुरु का,
1:40:53
वो बोलता है। मेरे को सहारा चाहिए वो बच्चों जैसा होता है। वह बड़ा ज्ञानी जैसा नहीं होता कि यार नहीं कोई सहारा नहीं
1:41:02
चाहिए। अकड़ वह स्ट्रेट
1:41:11
और एकदम स्ट्रेट कहता है यार मेरे को तो सहारा चाहिए। आपका सहारा चाहिए ही चाहिए ही चाहिए ही।
1:41:23
चाहे वह शिव हो, चाहे वह सद्गुरु हो, चाहे राम हो या जो भी हो
1:41:34
क्योंकि उसको यह बात पल्ले नहीं पड़ती। बस मैं हूं कैसे कोई सहारा नहीं, क्या कैसे?
1:41:41
उसको यह पसंद आता है तो मैं आत्मा भगवान उसके लिए सहारा भी बनता है।
1:41:49
शिव का भाव है तो उसके लिए शिव होकर मिलता है। उसमें समा जाता है और आप उसमें समा जाते हो।
1:41:57
जो भी आपका भाव है।
1:42:01
आप जैसा परमात्मा चाहते हो वह वैसा हो जाता है। आपके लिए होता है वो।
1:42:09
और वैसा होकर आपसे मिल लेता है और अंत में भक्त और भगवान दोनों गायब हो जाते हैं। खो जाते हैं एक दूसरे में।
1:42:24
भक्त भगवान में खो जाता है। भगवान भक्त में खो जाता है।
1:42:34
यह प्रेम है।
1:42:36
प्रेम का वर्ल्ड अलग है। बिल्कुल। वो समा जाते हैं एक दूसरे में। वो मैं हूं मैं हूं नहीं करते।
1:42:54
वह अलग होकर मिलना चाहते हैं एक दूसरे से।
1:43:00
थोड़ी दूरी भी रहे और थोड़े पास भी रहे।
1:43:09
इसका अपना आनंद है, अपना रस है।
1:43:14
शिवलिंग में जल चढ़ाना, पत्र पुष्प चढ़ाना, दूध चढ़ाना यह प्रेम है।
1:43:23
यह कोई विधि विधान की बात नहीं है। लाइक चढ़ाना नहीं है। यह प्रेम है।
1:43:36
शिवलिंग में खुद को चढ़ा देना।
1:43:40
अपनी सारी भावनाओं को चढ़ा देना। अपने सारे विचारों को चढ़ा देना। यह मैं हूं, तू है, यह वो सबको चढ़ा देना।
1:43:56
यह अगाध प्रेम है। अगाध बेशर्त
1:44:16
बहुत सारे एंगल हैं। इंपॉर्टेंट ये है कि आप लगे ही रहो जो आपको अच्छा लगता है।
1:44:25
जो आपको प्रिय लगता है। किसी को भगवान का नाम लेना प्रिय लगता है।
1:44:34
अभी एक नाम का चैप्टर चला था अलग। वह एक अलग वर्ल्ड था। यह एक एकदम अलग बात बता रहा हूं मैं।
1:44:52
अरे क्योंकि वह भगवान का नाम है इसलिए लेना चाहिए। क्यों लेना चाहिए भाई भगवान का नाम?
1:45:00
क्योंकि वो भगवान का नाम है इसलिए लेना चाहिए।
1:45:07
क्योंकि आप शरीर का नाम लेते हो, मन का नाम लेते हो। कोई नाम तो जिंदगी भर लेते ही रहते हो ना।
1:45:16
विचारों का नाम लेते हो, किसी मनुष्य का नाम लेते हो तो जब आप भगवान का नाम लेते हो तो वो एनर्जीस खुलती हैं, ओपन होती हैं।
1:45:28
उससे आप कनेक्ट होते हो।
1:45:34
क्योंकि वह भगवान का नाम है और उसको जीव भाव से भी जपो तो भी कल्याण
1:45:43
करता है क्योंकि भगवान का नाम है।
1:45:48
अब मैं वैसी टॉक नहीं कर रहा हूं कि खुद को राम जान के राम जपो ना।
1:45:54
खुद को कुछ भी जानो मत जानो भगवान का नाम ले रहे हो उससे कल्याण होगा ही होगा।
1:46:12
क्योंकि नाम से नाम ही जुड़ा है।
1:46:18
बाकी काम नाम करता है। असल में मैं बताऊं तो नाम ही भगवान है।
1:46:25
नाम ही भगवान है। इतनी श्रद्धा होनी चाहिए।
1:46:35
तो यह भी एक एंगल है जुड़े रहने का बात जोड़ की है ना अभी हम कैसे जुड़ रहे
1:46:44
थे मैं से भिन्न कुछ भी नहीं है वैसे जोड़ रहे थे इसके पहले अब भक्त और भगवान के रूप में प्रेम से जुड़ रहे हैं।
1:46:53
अब हम टेली नहीं कर रहे हैं कि यह भी मैं हूं। वह भी मैं हूं। अब प्रेम है ना यार सब टेली हो गया खत्म बात
1:47:04
और प्रेम से जो जुड़ता है ना वैसा जोड़ किसी से नहीं होता
1:47:15
जब प्रेम से कोई किसी से भी जुड़ता है या परमात्मा से जुड़ता है
1:47:23
वह असली योग है जोड़ जब आप पूरे अस्तित्व के प्रेम में हो ना
1:47:32
तब आप जान पाते हो कि अस्तित्व से जुड़ना क्या है?
1:47:40
उसके एक-एक सितारे से जुड़ना, एक-एक मनुष्य से जुड़ना क्या है?
1:47:47
एक एक मनुष्य अपने आप में पूरा यूनिवर्स है। पूरा ब्रह्मांड है। उससे जुड़ना
1:48:03
जोड़ दोनों जगह है
1:48:18
तो खुद को आप जीव मान के भी भगवान से जुड़ रहे हो अगर अगर
1:48:26
तो भगवान से जुड़ रहे हो ना यार जीव भाव मिटा देगा वो
1:48:33
आप किसी रॉन्ग चीज से नहीं जुड़ रहे हो तो कुछ चीजें ऐसी होती है जिससे कल्याण ही
1:48:42
होता है वह है भक्ति वह है प्रेम
1:48:53
अरे मेरे को नहीं चाहिए ऐसा भगवान जो मैं हूं बोल के गायब हो जाता है। मेरे को चाहिए एक शिवलिंग। मेरे को उसको गले से
1:49:02
लगाना है। मेरे को उसको खूब प्यार करना है। उसको सजाना है। सवारना है।
1:49:10
उसके साथ जीना है। मरना है। मेरी यह चॉइस है।
1:49:16
मेरे को चाहिए एक राम दरबार।
1:49:23
मेरे को चाहिए रामायण मेरे को चाहिए वासुदेव कृष्ण
1:49:31
यह प्रेम है
1:49:39
अरे हर जगह धरती में कहीं भी खोदो जल निकलेगा ना
1:49:46
भगवान से जुड़े हो कैसे से भी जुड़े रहो वो कनेक्शन हो ही जाता है।
1:49:53
हो ही जाता है। कोई भी भाव है। बस बात यह है भगवान से जुड़े रहने की। किसी क्षुद्र चीज से नहीं जुड़ने का है।
1:50:08
आप भगवान से जुड़े हो। आपका भाव है। आपका प्रेम है। बस वही काम करता है।
1:50:23
तो वो विवेकानंद गया ना एक। भक्त था
1:50:31
तो बड़ा भाव से मूर्ति पूजा करता था और उसको दुनिया भर का ज्ञान सिखा के उसके भाव को भंग कर दिए।
1:50:43
रामकृष्ण बहुत चिल्लाया विवेकानंद को जा तू उससे माफी मांग
1:50:49
कभी किसी का भाव खंडित नहीं करना वह सही जा रहा था
1:50:58
फिर गए विवेकानंद समझ रहे हो भाव
1:51:05
का पावर क्या होता है भाव बस से भगवान
1:51:23
जो ज्ञान के बस में नहीं होता वह भाव के बस में हो जाता है। प्रेम के बस में हो जाता है।
1:51:34
एक कॉमन आप किसी मनुष्य से मिलते हो। कॉमन
1:51:42
अब उससे आप कितनी भी समझदारी से बात कर लो, कितने भी ज्ञान से बात कर लो जब तक
1:51:49
उससे प्रेम नहीं है वह असली जोड़ आएगा ही नहीं।
1:51:57
कितने ही आप ज्ञानी हो जाओ। उससे बहुत टेक्निकल बातें कर लो। ए आई हो जाओ ज्यादा से ज्यादा।
1:52:06
और आप कोई ज्ञान नहीं जानते। समझते-मझते कुछ नहीं और आपको उससे प्रेम हो गया।
1:52:15
वो अपने आप मेल्ट होने लगेगा आप में और आप उसमें
1:52:26
आप अनपढ़ हो तो भी चलेगा।
1:52:31
जब एक मनुष्य के साथ जो बात बनती है वही तो पूरे अस्तित्व के साथ बनती है। परमात्मा के साथ बनती है।
1:52:40
सेम ही तो है हर जगह वही तो है।
1:52:50
उसको तू बोल लो आप मैं बोलने में आपको आनंद नहीं आता। तू बोल लो। क्या वह इतना बेवकूफ है?
1:52:59
कि वह मैं को ही समझेगा तू को नहीं समझ पाएगा तो वह परमात्मा नहीं
1:53:13
वह अंतर्यामी है। आप तू बोलो वह बोलो कुछ भी बोलो आप उसको बोल रहे हो ना तो सुन लेता है।
1:53:44
सुन लेता है बता रहा हूं। वो सुनता ही है। आपके हर भाव को।
1:53:51
आपका प्रेम होना चाहिए यार। बाकी और कुछ जरूरत ही नहीं है। क्या होगा? कैसे होगा?
1:53:59
आत्मनिष्ठा यह निष्ठा। अरे यार प्रेम है तो सब आ जाता है। प्रेम के पीछे सब आ जाता है।
1:54:13
तो खूब जियो शिव के प्रेम में।
1:54:21
इतना जियो कि शिव ही हो जाओ।
1:54:28
क्योंकि शिव आपके रूप में हो चुका है। उसने अपना प्रेम तो दिखा दिया है।
1:54:42
अभी छोड़ दो आप। यह मैं हूं, मैं हूं वाली बातें। है ना?
1:54:48
जी भर के जियो इसको जो सच है सत्य है शिव है सुंदर है वह कहीं
1:54:59
जाएगा ही नहीं निश्चिंत रहो
1:55:09
उसको एक को दो करना है दो को एक करना है वह खुद करेगा आपको कुछ नहीं करना है इतना
1:55:16
तो करेगा ना अगर परमात्मा है तो निश्चिंत रहो वह सब कर लेता है।
1:55:27
मैं वह होकर कर लेता है।
1:55:30
जब वह मैं हो सकता है तो मैं वह क्यों नहीं हो सकता? वह मैं ही हूं। तो मैं वो ही हूं।
1:55:39
एक ही बात है वहां बाउंड्रीज नहीं है। मैं तू यह वह ऐसा कुछ भी नहीं है।
1:55:50
जो प्रेमी होता है ना वह तू बन के भी हेल्प कर देता है। वह बन के भी हेल्प कर देता है। और प्रेम नहीं है तो मैं में भी हेल्प नहीं होती है। मैं बता रहा हूं।
1:56:01
लोग सूखे रह जाते हैं।
1:56:08
और बड़े गुरु बन जाते हैं। ज्ञानी हो जाते हैं। बस ढोंगी
1:56:18
और प्रेम है, निष्ठा है, श्रद्धा है। तो यार क्या मैं तू और यह सब डलिटी और अद्वैत कुछ मायने नहीं रखता।
1:56:31
जिसके दिल में प्यार है ना उसके लिए कुछ मायने नहीं रखता।
1:56:40
वो जैसा भाव करेगा वैसा परमात्मा उससे मिलता है। शरीर लेकर भी आ जाता है। अगर शरीर रूप में आपको देखना है तो।
1:56:50
गले मिलना है गले मिलता है। छू के देखना है। छू के आप देख सकते हो।
1:56:58
सब संभव है बता रहा हूं इसको लाइट मत लेना
1:57:19
तो यहां आनी जानी सो माया नहीं होता वह आया परमात्मा चले गया आया सो भी परमात्मा गया सो भी परमात्मा
1:57:28
अरे भक्त पागल होता है यार वो टेक्निकल नहीं जीतता।
1:57:40
ओके
1:57:43
[हंसी]
1:57:46
पानी दो यार।
1:57:49
मेरी बातें वह अलग-अलग तल पे बहुत सारे पैराडॉक्स हैं। उसको मिक्स मत करो। सब अपने आप में कंप्लीट है।
1:57:59
है ना? सर मैं पूछ सकती हूं।
1:58:07
अब और क्या पूछना है?
1:58:09
सर पूछना नहीं है। बस बोलना है कि आपने जब भी आप जो आत्मनिष्ठ आत्मनिष्ठ के बारे में
1:58:16
बात करी थी ना तो अब मैं गिरती भी हूं तो उधर ही गा के गिरती हूं। सो वो मुझे अच्छा
1:58:22
लगता है ये भाव में जाके गिर के फिर वहां जाके फिर सारे डिफरेंट डिफरेंट भावों को
1:58:30
लेकर आके फिर वापिस भगवान के चरण में जा के गिर पड़ो उससे अच्छा अभी जैसे आपने बोला ना की जब अगर भगवान जीव बन सकते हैं तो
1:58:40
जीव क्यों नहीं भगवान बन सकते तो फिर जीव क्यों नहीं और भगवान क्यों नहीं मैं भी बन सकता अब आप साइलेंट हो जाओ
1:58:48
वो ठीक है जो भी है ठीक है।
1:58:54
ओ जीव भगवान ये वो कुछ नहीं होता। प्रेम होना चाहिए यार। जीव हो तो चलेगा। भगवान हो तो चलेगा।
1:59:02
प्रेम है, श्रद्धा है तो सब कुछ है।
1:59:24
प्रेम है तो भगवान को भी यशोदा की गोद में आना पड़ता
1:59:29
है। कौशल्या की गोद में वो प्रेम का पावर है।
1:59:47
ये सब है बहुत सारा वर्ल्ड है इसमें है ना कैलकुलेट मत करो चीजों को बस जो आपको
1:59:55
अच्छा लग रहा है उसमें जियो ठीक है हां जी प्रेम प्रणाम
2:00:15
शुरू में एक अलग चैप्टर चैप्टर चल रहा था। एक अलग ही चालू हो गया।
2:00:20
[गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]
2:00:29
क्योंकि मेरे को अपने भक्त के साइट के लिए भी बोलना पड़ता है।
2:00:36
मैं अगर मैं के साइट के लिए ही बोलूं मैं हूं कि साइट तो वो तो मैं ही हूं।
2:00:43
मेरे को अपने भक्त की साइट के लिए भी बोलना पड़ता है। इतना प्रेम रहता है मेरा अपने भक्त से।
2:00:55
वो एक अलग वर्ल्ड है प्रेम का।
2:01:04
वहां तो यह गलिटी, अद्वैत वो कचरा है सब। हां।
2:01:10
वहां कोई गिनती थोड़ी ना है।
2:01:22
जब मैं अपने भक्त के साइड से बोलता हूं ना तो मैं अपने आप को भी हटा देता हूं। यार ये क्या साला मैं हूं मैं हूं कचरा।
2:01:34
मैं खतरनाक हूं फिर।
2:01:47
बहुत सारा वर्ल्ड है यह मतलब रस है इस सत्संग का ना
2:02:02
मिल ही न रघुपति बिनु अनुरागा क्यों महाराज जी सीधी बात है अनुरागी नहीं
2:02:11
है तो करोगे क्या हां
2:02:46
हां जी
2:03:03
यार एक बात बताओ। किसी को जीव भाव है। अब वो समझ ही नहीं पा रहा है कि यार यह जीव
2:03:11
भाव मैं कैसे हटाऊं? या उसकी प्रॉब्लम है जो अधिकतर लोगों की प्रॉब्लम होती है
2:03:19
तो परमात्मा क्या इतना भी उसमें करुणा नहीं है कि जीव होकर भी उससे मिल सके
2:03:28
जीव भाव होते हुए भी उससे मिल सके तो काहे का परमात्मा ऐसे परमात्मा को तो मैं
2:03:34
चाहूंगा ही नहीं देह भाव होते हुए भी मन मन का भाव होते
2:03:43
हुए भी उससे मिल सके तब तो वो परमात्मा है ना और परमात्मा उसी से मिल रहा है जो मैं में
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आ गया मैं के अतिरिक्त कुछ नहीं है फिर तो वो स्वार्थी हो गया परमात्मा
2:04:00
असली परमात्मा तो तुम में देह भाव है जीव भाव है कामना है पाप है तब भी मिलता है
2:04:08
वही असली परमात्मा है
2:04:15
हर हालत में जो मिले जो आतुर रहे मिलने को
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वो प्रेम का वर्ल्ड है
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वहां यह सारे ज्ञानियों के नियम कायदे नहीं चलते
2:04:56
मिल ही न रघुपति बिनु अनुरागा बगैर प्यार के नहीं मिलता यार
2:05:21
बगैर प्रेम का मैं भी नहीं होता और तू भी नहीं होता।
2:05:27
यह हकीकत है।
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जो छोटा सा बच्चा है जिसको पता ही नहीं जीव भाव क्या होता है परमात्मा का भाव
2:05:46
क्या होता है जिसको पता ही नहीं है सब उसी में सबसे ज्यादा झलकता है ना परमात्मा
2:05:56
क्यों वो दिमाग लगाता ही नहीं है
2:06:03
[हंसी]
2:06:04
इतना फ्रेश
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जैसे ही उसकी बुद्धि बढ़ती है, उससे परमात्मा झलकना कम होने लगता है।
2:06:28
जैसे जैसे वह बड़ा होता है।
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तो वो भोलापन वो सादगी बच्चे की
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ऐसे भोले भाले रहो ना यार क्या सोचना है क्या समझना है
2:07:03
हर बार इतना क्यों टेक्निकल होना है मैं हूं बस हर हालत में मैं ही हूं थर्ड क्लास बात
2:07:12
है ना दिल से कब जिओगे
2:07:29
तुम जी भर के किसी मनुष्य को जो आपका प्रेमी है उसको आप गले से लगाना चाहते हो
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नहीं चाहते हो चाहते हो जो भी है आपके माता-पिता है आपका
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प्रेमी हैं आपका पुत्र है आप आप जी भर के प्यार करना चाहते हो ना तो क्या आप
2:07:53
परमात्मा को नहीं चाहोगे प्यार करना थोड़ा सा अलग करके अपने से अपने गुरु को नहीं चाहोगे।
2:08:08
गुरु तुम्हारा सहारा नहीं होता। तुम्हारा प्रेम होता है। तुम्हारा विश्वास होता है।
2:08:24
ऐसा जीना चाहते हो आप और ऐसा जियो। तब तुम कंप्लीट होते हो।
2:08:34
हर एंगल से जियो ना यार।
2:08:56
मैं जब तू हो जाता है तो क्या परमात्मा बदल जाता है क्या? कुछ नहीं होता है।
2:09:06
आप में श्रद्धा है ना तो तू बोलो कुछ भी बोलो पत्थर बोलो देवता बोलो सब चलेगा।
2:09:17
विश्वास होना चाहिए, श्रद्धा होनी चाहिए।
2:09:37
एक पत्थर पर श्रद्धा भी आत्मनिष्ठा है। बता रहा हूं।
2:09:53
यहां आपके टेक्निकल रेंज से कुछ नहीं चलता।
2:10:00
यहां फिक्स डिपॉजिट जैसा कुछ नहीं है। यही सही है ना।
2:10:08
विराट है परमात्मा। उसके अनंत आयाम है।
2:10:13
तुम्हारी सोच छोटी है ना। तुम अपने एक ही एंगल मैं हूं। मैं हूं से जीते हो।
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सहस्त्र पादक् शिरो क्या है?
2:10:34
सहस्त्र पुरुषाय नामने सहस्त्र कोटि युग धारण नमः
2:10:43
सोचो
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केवल एक एक एंगल से नहीं है ना संपूर्ण एंगल से जीरो
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तब कंप्लीटनेस आती है जीवन में।
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भूल जाओ अपने मैं हूं मैं हूं को। तू करके जियो। तू में भी आपको वही स्वाद आएगा।
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और अब आएगा क्योंकि अब अज्ञानता नहीं है।
2:11:22
अब आपका अज्ञान टू में आपके अज्ञानता नहीं है। वह में आपके अज्ञानता नहीं है।
2:11:36
और अज्ञानता है तो भी जी के देखो तब भी वही स्वाद आएगा। प्रेम तो है।
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प्रेम गहरा होता है। काट देता है अज्ञानता को।
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बहुत प्यार से जियो मालूम बहुत प्यार से
2:12:09
जितना प्रेम से जिओगे ना उतना ही परमात्मा अनंत नाम रूपों में
2:12:20
भाषित होता रहेगा दिखता रहेगा
2:12:49
और कोई वो गलत बातें नहीं है। है ना? टेक्निकल मत सोचना।
2:13:16
यार आप बोलते हो ना किसी मनुष्य को हेल्प मी वो हेल्प करता है आपकी परमात्मा भी वैसी करता है यार।
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बस आप दिल से बोलो यार मेरी मदद करो मैं नहीं जान सकता तेरे को तू तो जान रहा है ना मेरे को
2:13:35
अब तू ही जान तू जान यह मैं तू यह ज्ञान भक्ति मेरे समझ नहीं
2:13:44
आता भैया तू जान वो सुन लेता है वह हर जगह है वो कैसे सुन
2:13:55
सुनता है उसको आप नहीं समझ सकते और हेल्प भी कर देता है। आपके हृदय से आना
2:14:03
चाहिए वो। आपके प्यार से आना चाहिए वो।
2:14:10
आपके आंसुओं से
2:14:26
असली ज्ञानी बहुत रोता है। मालूम आप लोग को नहीं पता है।
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असली ज्ञानी खूब रोता है।
2:14:40
और असली प्रेमी बहुत शांत रहता है।
2:14:46
यहां कोई परमानेंट नियम कायदे ऐसे नहीं होते।
2:14:55
बहुत प्यारा है सब कुछ।
2:15:42
तो परमात्मा के लिए आपका बहुत सारा ज्ञान काम का नहीं है। और थोड़ा सा प्यार आपका बहुत है उसके लिए।
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थोड़े को ना वह थोड़े को ज्यादा मान के रख लेता है। आपके थोड़े से प्यार को बहुत ज्यादा मान के रख लेता है।
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वह दो-तीन मुट्ठी का चावल किनका था वह सुदामा का।
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तीन मुट्ठी चावल चावल नहीं वह प्रेम है यार
2:16:26
तीनों लोगों का राज्य देने को तैयार हो गए उस प्रेम के लिए वह होता है भगवान
2:16:34
साला तुम्हारा ज्ञान ध्यान मैं हूं दिखाओगे तभी तुमको परमात्मा मिले वह परमात्मा नहीं होता
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तीन मुट्ठी चावल के लिए अपना सब भगवान देने को तैयार है।
2:16:54
वहां कैलकुलेशन नहीं है। वहां आपका प्रेम इंपॉर्टेंट है।
2:17:04
वह आपका थोड़ा सा प्रेम वह बहुत ज्यादा मान के रख लेता है। शिकायत नहीं करना बस।
2:17:17
आपके बहुत ज्यादा ज्ञान को भी ना उसको ऐसा लगता यह सीख रहा है। सीख रहा है। अभी प्रेम तक नहीं आया।
2:18:04
मैं अपने भक्त के साइड से बोल रहा हूं। मैं उसके लिए हर चीज सहूंगा।
2:18:11
उसकी अज्ञानता हो या कुछ भी हो उसने कुछ भी गलत किया हो वो सहूंगा।
2:18:19
मैं मैं की साइड से नहीं बोल रहा हूं।
2:18:24
मेरे को प्रिय है मेरा भक्त और मेरे भक्त का कभी भी नाश नहीं होता। अर्जुन
2:18:43
मेरे को एक एक दिया मेरे भक्त का जलाया हुआ याद रहता है। एक एक चढ़ाया हुआ फूल
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एक-एक चावल का दाना मैं
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मैं कुछ नहीं भूलता बता रहा हूं। कुछ भी नहीं भूलता मैं।
2:19:21
वह मेरे को पत्थर मान के भी पूछता है ना मेरे को याद रहता है।
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मेरे को मेरे को ही तो माना ना पत्थर और क्या
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मैं हटा देता हूं यह सब यह पत्थर जड़ चेतन
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मेरे लिए कोई कायदे नहीं है और मैं अपने भक्त के लिए भी कोई कायदा नहीं रखता
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वह मेरा प्रेम है मैं उसका प्रेम हूं बस ना मैं उससे दूर होता हूं कभी कभी
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ना वह मेरे से दूर होता है कभी
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और यह अनंत प्रेम अगाद प्रेम अनंत तक चलता रहता है। अनंत तक।
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करोड़ों ज्ञानी आते हैं। आत्मज्ञानी जाते हैं, आते हैं, जाते हैं और भक्त और भगवान
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का प्रेम अनंत से अनंत तक चलता रहता है। नो लिमिट, नो लिमिट।
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वो मेरे सहारे जीता है। मैं उसके सहारे जीता हूं मालूम।
2:21:01
मैं भी बेसहारा हूं। मैं आत्मा भगवान भी बेसहारा हूं।
2:21:10
मैं अपने भक्त के सहारे जीता हूं।
2:21:46
बस बहुत सारा प्यार है आप सबके लिए।
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बहुत सारा प्रेम
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हमारा प्रेम
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हम्म।