0:18
बहुत आसान बात है मालूम कि जिसको अपन अस्तित्व और यह सब बोलते हैं
0:28
ना व्यापकता अनंतता
0:41
वो बहुत ही आसान बात है। अभी प्रकट हो जाएगी।
0:53
लेकिन उसके लिए चाय और है आज।
1:01
यार चाय तो चाहिए ना यार।
1:09
आज आज सबको प्रकट हो जाएगी।
1:13
आज एक सुबह-सुबह लेटे मेरे को एक युक्ति सूझी, एक सेंस आया। अर्ली मॉर्निंग में।
1:25
फिर अपने बुद्धि को मैं बोला देख बुद्धि इसको तू याद करा देना भूलना नहीं चाहिए
1:34
तो वो आज्ञा मानती है ना जिसको भी याद करना रहता है ना तो मैं बुद्धि को बोल देता हूं बिल्कुल इसको इस इस टाइम पर याद
1:43
करा देना और जब तक मैं ना बोलूं तब तक भूलना मत हां
1:55
नहीं तो मैं भूल जाता हूं चीजें नॉर्मली करके ऐसा मेरे को भूलना पड़ता है जो कीमती चीजें होती है
2:04
दो ना चाहे तब तो बताएं यार
2:09
है कि नहीं है हां तो ढालो इसमें
2:24
आप लोग कुछ बताओ इस बारे में कि मैं अनंत हूं, मैं व्यापक हूं या मैं अस्तित्व हूं।
2:30
इसको अभी कैसे क्लियर करें? अभी के अभी प्रकट प्रत्यक्ष होनी चाहिए बात।
2:45
अरे बोलो ना यार।
2:50
थोड़ा आजमाना चाहिए खुद को। ऐसा थोड़ी ना होता है। बताओ सौरभ जी आप बताओ।
2:57
हां। थैंक यू।
3:05
दो उनको माइक दो। थोड़ा सा बताओ।
3:10
ये सब नहीं है। मैं ही हूं। ऐसा बोल के खत्म मत कर देना।
3:21
मतलब आप अस्तित्व हो, आप व्यापक हो।
3:27
यह प्रत्यक्ष होना चाहिए। है ना?
3:33
क्योंकि हम केवल मैं बॉडी हूं और व्यक्तित्व हूं। इसी भाव में जीते रहते हैं।
3:51
बताओ ना ऐसा कोई युक्ति तो नहीं है
3:59
हां कोई युक्ति नहीं है
4:05
हां जो आपको सेंस आता है वैसा आप बोलो ना क्या बोलना चाहिए ना उससे बात खुलती
4:26
आ रहा है सेंस बताओ
4:39
प्रभु मैं व्यापक पर फोकस करता हूं। तो मैं व्यापक रहता हूं। यस।
4:45
मैं देह पर फोकस करता हूं तो मैं देह रहता हूं। यस।
4:49
और कहीं मैं फोकस करूं या ना करूं मैं तो मैं ही रहता हूं। एब्सोलुटली राइट।
4:58
ये तो सत्य है।
5:04
मतलब देखो मैं एक कैमरा मेरे साइड लाओ यार। हां। ऐसे।
5:14
मैं एक वह बताना चाह रहा हूं कि यह क्लियर हो जाए
5:19
व्यापकता का पॉइंट अनंतता का अस्तित्व का
5:28
तो उसको देखो मैं व्यापक हूं। है ना?
5:37
अब आप क्या गलती करते हो? देह की साइड से देखते हो। मैं व्यापक हूं।
5:48
आपकी साइड रॉन्ग है। खुद को बॉडी मानते हो और फिर देखते हो या सोचते हो या भाव करते हो कि मैं व्यापक हूं।
5:59
है ना? वह मैच होगा ही नहीं। होगा ही नहीं।
6:08
अब व्यापक के साइड से देखो।
6:12
अपने इस साइड से मत देखो। बॉडी के साइड से मत देखो। अपने साइड से भी मत देखो। चलो आप
6:18
अपने आप को बॉडी समझते हो। इसलिए अपने साइड से मत देखो। व्यापक के साइड से देखो।
6:27
साइड चेंज कर दो। बस मैं व्यापक हूं। व्यापक के साइड से बोलो।
6:35
मैं व्यापक हूं।
6:46
व्यापक के साइड से मैं व्यापक हूं।
6:54
अनंत के साइड से मैं अनंत हूं। अनंत के साइड से बोलो। अपने साइड से मत बोलो।
7:02
साइड चेंज करो।
7:04
अस्तित्व के साइड से मैं अस्तित्व हूं।
7:21
आपसे कोई पूछे तो आप बोलते हो आप मनुष्य हो। मैं मनुष्य हूं।
7:26
अब अस्तित्व से कोई पूछे तो बोलेगा ना मैं अस्तित्व हूं।
7:37
साइड चेंज कर दो। यही युक्ति है।
7:41
आप गलत साइड से टेली करते हो। बॉडी के साइड से मैं व्यापक हूं। व्यापक के साइड से।
7:56
देखो व्यापक के साइड जाकर उससे टेली करो। व्यापक के साइड से।
8:03
अनंत में जाकर उससे टेली करो अनंत के साइड से।
8:11
अस्तित्व के साइड से मैं अस्तित्व हूं।
8:17
साइड चेंज करो। बात खत्म है। बॉडी का साइड छोड़ो।
8:23
क्योंकि आप मैं हूं। बॉडी को ही समझ लेते हो। गलती करते हो।
8:29
अनंत मैं अनंत हूं।
8:56
हरि के साइड से जाओ। अहम हरि अब जीव के साइड से सोचते हो। इसलिए धोखा खाते हो।
9:06
प्रभु की साइड से सोचो। अहम हरि हरि तो खुद को हरि ही कहेंगे ना बोलेंगे
9:16
ना अहम हरि उनके साइड से देखो ना
9:24
अहम हरि अचुतो अहम गोविंदो अहम अहम हरि
9:34
कितना इजी है नारायण के साइड से शिव के साइड से देखो शिवो हम शिवो हम शिव के साइड से बस जाओ तुरंत टेली हो जाएगा।
9:47
आप रॉन्ग साइड से टेली करते हो।
9:56
कितना इजी है। यस। तो मैं जो बताना चाह रहा हूं
10:04
वो आपको ग्रहण हुआ। यह पॉइंट 100%
10:12
बताओ आप लोग हार्ट भेज के बताओ यार हुआ ना
10:31
मैं अस्तित्व हूं। मैं परमात्मा हूं। परमात्मा के साइड से कितना इजी है?
10:39
आप जीव के साइड से टेली करते हो वह गड़बड़ है।
10:44
ठीक है? फाइनल चैप्टर मैं हूं। वह एक लास्ट चैप्टर है। बट यह चैप्टर इंपॉर्टेंट है ताकि आपका जीव भाव कट जाए।
11:04
आप हमेशा रॉन्ग साइड में रहते हो। इसलिए आपकी गाड़ी टकराती रहती है बार-बार।
11:11
हां, रॉन्ग साइड से नहीं चलना चाहिए। नियम का होता है ना?
11:23
परमात्मा को जानने चले हो, पाने चले और जीव के साइड से जी रहे हो तो कैसे बनेगा भाई? अरे मैं परमात्मा हूं।
11:35
उसी के साइड से यही युक्ति है और युक्ति से मुक्ति होती है भैया।
11:42
हां ध्यान साधना से नहीं होती।
12:05
तो पूर्णत साइड चेंज कर दो बस खत्म करो मामला सीधा हम हरि
12:12
हां
12:38
अब देखो आप गौर किए आप अभी भी अहम को ही हरि बोल रहे हो। अहम को ही अस्तित्व बोल रहे हो।
12:48
अहम को ही व्यापक बोले आप है ना।
12:52
लेकिन इससे पहले क्या आपका अहम देह से चिपका हुआ था?
12:59
हालांकि वो चिपक सकता नहीं है मान्यता में। हां।
13:09
और अब देखो कोई बाउंड्री है ही नहीं। मैं व्यापक हूं।
13:15
मैं अनंत हूं।
13:22
मैं अस्तित्व हूं। कोई कोई बाउंड्री है ही नहीं। बस साइड अस्तित्व के साइड से बोलो।
13:29
मैं अस्तित्व हूं।
13:33
मैं व्यापक हूं। व्यापक के साइड से अनंत के साइड से मैं अनंत अनंत हूं।
13:43
मैं अनंत ही अनंत हूं। और अनंत हूं।
13:52
नारायण के साइड से कि मैं नारायण हूं। नर नहीं नारायण हूं।
14:00
नारायण खुद को कहेंगे ना मैं नारायण हूं। बस उसी साइड से बोलो। मैं नारायण हूं।
14:08
अब ऐसे सब साइड से बोल के देख लो। मैं से भिन्न रियल में कुछ नहीं है। हां।
14:21
और लास्ट में एकदम फाइनल में मैं की कोई साइड नहीं होती। बट ये मैं समझाने के लिए बता रहा हूं ताकि आपको क्लेरिटी आ जाए।
14:34
अभी तो साइड चेंज करके देखो।
14:58
अरे भयंकर पावरफुल है ये। हां।
15:18
गोविंदो अहम मैं कृष्ण हूं।
15:24
कृष्ण के साइड से तो यही बोलोगे ना आप कि मैं कृष्ण हूं।
15:34
मैं राम हूं। मैं शिव हूं।
15:41
मैं अस्तित्व हूं। अस्तित्व के साइड से
15:52
अब बताओ तुरंत क्लियर है ना? प्रत्यक्ष
16:06
आप बॉडी की साइड से बस मत बोला करो।
16:11
आकाश हूं बोलना है तो मैं आकाश हूं। आकाश के साइड से
16:17
आप क्या कर रहे हो? आप आकाश होके आकाश को कह रहे हो कि मैं आकाश हूं।
16:26
है ना?
16:28
अस्तित्व होकर कह रहे हो कि मैं अस्तित्व हूं।
16:35
अनंत होकर मैं अनंत हूं।
16:39
अब वही होके आप कह रहे हो क्योंकि आपने साइड चेंज की
16:58
और खुद की बॉडी में बोलते हो मैं बॉडी हूं। है ना?
17:07
और लास्ट में बस मैं हूं।
17:12
वो फाइनल चैप्टर है कि मैं अनंत हूं। मैं अस्तित्व हूं। मैं बॉडी हूं। नहीं बस मैं हूं।
17:20
वो फाइनल सामान्य पद है।
17:26
लेकिन यह सेंस का आना बहुत जरूरी है। साइड चेंज करके।
17:35
अस्तित्व की साइड से बोलो। मैं अस्तित्व हूं।
17:46
बोलो अस्तित्व के साइड से। देखो कितनी क्लिटी है इसमें।
17:57
अहम हरि हरि के साइड से बोलो अहम हरि
18:05
अहम हरि
18:16
ओके अब प्रत्यक्ष है यह
18:23
एकदम डाउट शाउट कुछ एकदम
18:30
है ना तो हरि के साइड से अहम हरि अस्तित्व के साइड से कि मैं अस्तित्व हूं।
18:41
मैं अनंत हूं। मैं व्यापक हूं।
18:45
अब मैं आपको यह चीज बताना चाहता हूं कि हर साइड मैं की ही साइड है।
18:54
हां उसकी कोई बाउंड्री ही नहीं है। मैं की
19:02
अगर मैं की बाउंड्री होती तो आप यह अभी अनुभव ही नहीं कर पाते।
19:09
आपने हर साइड में जाके ये जो भी अनुभव किया हरी का अस्तित्व का अनंत का व्यापक
19:16
का उस साइड में जाकर आपने अनुभव किया क्योंकि एकमात्र मैं की ही साइड है।
19:29
हर साइड मैं की ही है। हां।
19:36
और ऊपर सरफेस में यह मनुष्य है। कोई सरफेस में देवता है। कोई बड़े देवता हैं। कोई
19:44
आकाश है सरफेस में। कोई अनंत है सरफेस में। कोई अज्ञात है, कोई अस्तित्व है, वह सरफेस है।
19:56
लेकिन है मैं की ही साइड।
20:13
तो मैं निराकार हूं। निराकार की साइड से बोलो।
20:18
निराकार फिर मैं निराकार हूं।
20:27
मैं निरंजन हूं। मैं अमोग हूं।
20:38
मैं मतलब कितना क्लियर है यार।
21:00
मुक्ति के साइड से बोलो मैं मुक्ति हूं। मैं कैवल्य हूं।
21:06
मैं निर्वाण हूं।
21:26
अपने बॉडी के साइड से टेली करते हो करके दिक्कत जाती है। अस्तित्व के साइड से करो
21:32
टेली। ततक्षण अरे तक्षण मस्त रहो नाचो गाओ मस्त रहो।
22:06
अब अपनी बाउंड्री नजर आ रही है क्या?
22:15
वो बाउंड्री बाउंड्री बॉडी के कारण आपको लगती थी। साइड चेंज करो देखो पूरा अस्तित्व आप हो।
22:26
अनंत अखंड केवल मैं हूं। मैं अखंड हूं।
22:34
अखंड के साइड से आप देखते ही नहीं हो। आप अपने ही दृष्टि से देखते हो। बॉडी वाली दृष्टि अखंड की दृष्टि से देखो अखंड के
22:43
साइड से कि मैं अखंड हूं। मैं अनंत हूं।
23:04
मैं व्यापक हूं।
23:27
हम क्या करते हैं जैसे हरि ध्यान में भी मैं कराया मैं व्यापक हूं मैं व्यापक हूं और
23:34
फैलता ही जा रहा हूं फैलता ही जा रहा हूं आप वहां हां दृष्टि रॉन्ग रखते हो।
23:42
सीधा व्यापक के साइड से देखो ना। फैलने की जरूरत ही नहीं है। फिर मैं व्यापक हूं। बात खत्म।
23:53
हां।
24:06
मैं अदृश्य हूं। मैं दृश्य हूं। अदृश्य के एंगल से देखो।
24:18
अव्यक्त के एंगल से अदृश्य के मैं अव्यक्त हूं।
24:24
अव्यक्त की साइड से देखो ना मैं अव्यक्त हूं। कितना इजी है।
24:31
व्यक्त की साइड से देखते हो अव्यक्त को तो कैसे दिखेगा अव्यक्त की साइड से देखो मैं अव्यक्त हूं
24:43
एक बार में खत्म मामला कुल्हाड़ी चलती है खत्म कट
25:07
बस साइड चेंज कर दो। मस्त रहो।
25:16
अस्तित्व के साइड से जियो। मैं अस्तित्व हूं। चैप्टर क्लोज। व्यक्तित्व का पता तक नहीं चलेगा कि यह व्यक्तित्व है कहां?
25:28
बस मैं अस्तित्व हूं। उसी साइड से जियो।
25:34
साइड चेंज करो। मैं अस्तित्व हूं।
25:39
पता ही नहीं क्या व्यक्तित्व होता है। कौन है यह व्यक्तित्व। अगर
26:00
तो परमात्मा जीव के साइड से खेल रहा था।
26:04
देह के साइड से अब खेल अपने साइड से खेलना चाहता है वो।
26:10
बस साइड चेंज कर रहे हो आप और कुछ नहीं। अस्तित्व अपने साइड में आ गया।
26:19
अरे मैं अस्तित्व हूं।
26:26
हां जी पिलाओ पिलाओ यार कुछ हो गया आज का
26:33
चले हम काम ही जल्दी खत्म हो गया ना
26:47
जमता कि नहीं क्लियर मैं अस्तित्व हूं।
26:55
अस्तित्व के साइड से बोलोगे जिंदगी में धोखा नहीं खाओगे।
27:12
अब जब आप अस्तित्व के साइड से बोल रहे हो कि मैं अस्तित्व हूं। तो अब आपको मैं से भिन्न कुछ है या नहीं है। करना पड़ेगा क्या?
27:22
अस्तित्व में तो उसके अंदर सब है ही ना। क्या भिन्न अभिन्न का मैटर ही नहीं है।
27:32
एक लाइन बस मैं अस्तित्व हूं।
27:46
इससे सरल, सहज और सुंदर कुछ भी नहीं। जस्ट पलटी खा जाता है।
27:55
साइड चेंज करो पलटी खा जाता है। खत्म बात। इतनी सी बात यार। इतनी सी बात।
28:06
हमको भी आज सुबह ही ख्याल में आई है।
28:36
उसमें सोचो वचो मत विचार मत मत करो। साइड चेंज कर दो। खत्म।
28:48
आप हमेशा व्यक्तित्व के साइड से बोलते हो। बॉडी के साइड से कि मैं अस्तित्व हूं। इसलिए टैली नहीं होता। अस्तित्व के साइड से बोलो।
28:59
टेली करना नहीं पड़ेगा। मैं अस्तित्व हूं।
29:05
अरे मैं अस्तित्व हूं।
29:09
डंडा चले सबको राम राम प्रेम प्रणाम
29:19
साइड अहम हरि अब बोलो अहम हरि के साइड से अहम हरि
29:29
अहम हरि अहम हरि यार
29:37
सारे देवता उतर जाएंगे आपके अंदर। इसका पावर नहीं जान रहे हो आप। हां।
29:48
सारे देवताओं के ओर से बोलो।
29:53
सर्वतो भद्र मंडल देवी देवता मैं हूं।
30:01
पूरा चराचर मैं हूं। हरि मैं हूं। अहम हरि मैं शिव हूं।
30:13
मैं अस्तित्व हूं।
30:15
उन्हीं के साइड से बोलो बस अस्तित्व के साइड से, शिव के साइड से, हरि के साइड से।
30:29
क्योंकि मैं जो है ना उसकी कोई बॉडी के अंदर कोई पर्सनल साइड नहीं है। सर्वत्र है उसकी साइड।
30:38
हां।
30:56
हां जी
31:08
इतनी सी बात यार इतनी सी बात मैं अस्तित्व हूं साइड चेंज करके बोल रहे
31:15
हो आप बस या सोच रहे हो साइड चेंज करके वह प्रकट है।
31:23
मैं अस्तित्व हूं।
31:31
देखो मैं अनंत हूं।
31:36
मैं व्यापक हूं। मैं अनंत हूं। मैं अस्तित्व हूं।
31:42
अहम हरि
31:49
अहम हरि अहम हरि अहम हरि अहम हरि हरि के
31:57
साइड से बोलने में शर्म थोड़ी ना आएगी तब भी घबराओगे क्या?
32:03
हरि के साइड से तो दहाड़ के बोलोगे ना। अहम हरि अहम हरि अहम हरि शिवोह शिवोह शिवोहम
32:23
कितना सरल है। अहम की कोई बाउंड्री है क्या?
32:37
बस इसी पॉइंट को जियो जिंदगी भर। खत्म बात और ज्यादा सोचने समझने का कुछ नहीं
32:45
है ना सबको प्रेम प्रणाम
32:55
अरे मैं अस्तित्व हूं यस