0:19
तो इच्छा भी जन्म और मृत्यु की तरह पैदा होती है और पूरी होकर मरती रहती है और
0:26
अनंत देहों में घूमती रहती है। अनंत पशु पक्षियों में, इंसानों में, देवताओं में
0:36
जैसे शरीर का जन्म और मृत्यु होती है, सेम इच्छाओं का भी जन्म और उनकी भी मृत्यु होती है।
0:46
हर इच्छा की कोई भी इच्छा अमर नहीं है।
1:13
जैसे विचारों का जन्म और मृत्यु होता है।
1:17
भावों का जन्म और मृत्यु होती है। सेम इच्छाओं की
1:32
और सारी इच्छाओं का जन्म शांति के सागर में होता है।
1:39
मैं आत्मा भगवान सदा शांत हूं।
1:45
और इस सागर की यह लहरें हैं। सारी इच्छाएं
2:08
इच्छाओं का स्रोत शांति है।
2:17
हम पुराने सोच में चलते हैं कि मन से इच्छा पैदा होती है, माया से, मन से।
2:25
अब मन माया कहां से पैदा होते हैं? स्वयं से। खुद को कुछ मान लेने पर।
2:51
और हर इच्छा पूरी होकर मिटती है। मिट जाती है।
3:18
तो इच्छा अनच्छा चाह अचा ये सब मैं की मर्जी से चलता रहता है।
4:02
ओम
4:34
आपके ना चाहते हुए भी कितनी इच्छाएं आपको उठती है।
4:45
कितना ही आप ध्यानी ज्ञानी हो जाओ। आपके ना चाहते हुए भी कितनी इच्छाएं आपको उठती हैं यह मैं की
4:54
मर्जी है। कि आपको इच्छा उठे।
5:00
जिस दिन मर्जी होगी उस दिन उठेगी ही नहीं। सब मैं की मर्जी से चल रहा है।
5:31
तो इन आंखों को दृश्य की इच्छा होती है। उधर दृश्य को दिखने की इच्छा होती है।
5:42
हां। तभी इन आंखों को देखने की इच्छा होती है।
5:48
जैसे स्त्रियों को दिखने की इच्छा होती है तो पुरुष में देखने की इच्छा होती है।
6:18
हर भोजन को रक्त मांस बनने की इच्छा होती है। आपको भोजन करने की इच्छा होती है।
6:27
हर चीज बहुत शार्प है।
7:09
तो ये अनंत नदियां पहाड़ वृक्ष सागर
7:15
अनंत पृथ्वयां इतना सुंदर अनंत सितारे
7:32
यह सब दिखना चाहते हैं। करके आप देखते हो।
7:44
और आप देखना चाहते हो इसलिए यह दिखते हैं।
7:59
गहरी नींद में अदृश्य दिखता है, अननोन दिखता है, अज्ञात दिखता है। वह भी आपकी इच्छा है।
8:09
और अज्ञात की भी चाह है।
8:17
मैं की मर्जी बता रहा हूं। उससे क्या-क्या चल रहा है और सहज में चल रहा है।
9:06
भक्त के लिए भगवान को दिखने वाला बनना पड़ता है।
9:20
बैटरी डाउन कितनी देर चलेगी
9:28
हम रिस्की कुछ नहीं करना
9:39
कहां था मैं हां हां
9:54
तो राधा की इच्छा कृष्ण और कृष्ण की इच्छा राधा है।
10:02
ऐसी मैं की इच्छा ये पूरी प्रकृति है और पूरी प्रकृति की इच्छा मैं हूं।
10:11
बंद हो गया। यह है मेरी फाइनल इच्छा।
10:58
तो कितना यानी परफेक्शन है। देखो ना हर एक चीज का
11:09
हर मिलने का, हर बिछड़ने का ये सब मैं की मर्जी से है। हां।
11:36
दिखाओ हमारे मुरमुरे दो भाई
11:44
यह बंद हो गया विराज और ले आओ ना चना नहीं डालना इतना बहुत है
11:54
फ्ली भी नहीं हां कर लो चालू कर दो तो थोड़ा फाइनल वो कर
12:22
नेट है।
12:26
ओके
12:54
ये लोग जुड़े हुए थे क्या हम बहुत बढ़िया।
13:11
तो इच्छा का पूरा ना होना भी मैं की इच्छा होती है।
13:16
है ना? और पूरा होना भी मैं की इच्छा होती है।
13:24
तो हर एक चीज इच्छाओं की डोर से बंधी हुई है।
13:33
हर दृश्य दृष्टाने राधा की क्या इच्छा है कि वह कृष्ण हो जाए।
13:46
इतना प्रेम में डूब जाए कि वह कृष्ण हो जाए। कृष्ण की इच्छा वह राधा हो जाए।
13:59
सेम है दृष्टा की इच्छा दृश्य हो जाए
14:05
और वो हो जाता है सहज में देखो और सारे दृश्य की इच्छा दृष्टा हो जाना है
14:50
अशांति के गर्भ में शांति की इच्छा पैदा होती है। हर किसी को मालूम।
14:56
जब आप बहुत अशांत होते हो ना तो अशांति ही गर्भ बनता है शांति के लिए।
15:03
और फिर आप शांत हो पाते हो।
15:08
तो यह बहुत सुंदर है। इच्छाओं की सुंदरता बता रहा हूं।
15:33
तो इच्छा को पूरा करने मत जाओ। उसमें परेशान होगे।
15:42
इच्छा उचित समय पर हर इच्छा पूर्ण हो जाती है।
16:17
जो इच्छा करे मन माही प्रभु प्रसाद कछु दुर्लभ नाही
16:35
और हर इच्छा की पूर्णता ता कई नई इच्छाओं को जन्म देती है।
16:42
उसका क्या कारण है? बताओ।
16:53
कौन सी ऐसी इच्छा है?
16:59
कोई कौन सी आप ऐसी इच्छा करो जिसके बाद इच्छा का जन्म ना हो। वह पूर्ण होने बताओ।
17:12
अरे बोलो यार।
17:40
बताओ थोड़ा बुद्धि लगाओ हम
17:51
प्रश्न दे देता हूं कल बताना
18:06
क्योंकि उत्तर अभी मेरे को भी नहीं मालूम हम
18:15
किसी को मालूम है क्या भाई सौरभ जी बता दो यार
18:26
हम सौरभ जी क्लियर करेंगे। ऐसा इच्छा बताओ कि उसके बाद इच्छा का जन्म ही ना हो।
19:08
अब आचार की इच्छा बोलोगे तो फिर तो बात घुमा फिरा के वही हो ना
19:19
हम बोलो बताओ ना यार हां बोलो
19:28
कुछ तो ऐसा होगा ना यार हां बताओ
19:34
सब हो जाओ नहीं ये तो मैं पहले बोल चुका हूं ना यार
19:41
रिपीट नहीं करना करना है ना मैं सब कुछ हो जाऊं यह तो पुराना हो गया ना कुछ नया मांगता ना
19:52
वो तो माया के खाते में चले गया
20:04
मतलब अभी सुन के सारी इच्छाएं दगध हो जाए
20:12
ऐसा कोई पॉइंट होना तो चाहिए इस अस्तित्व में हम
20:18
और इच्छा उठे ही ना क्या है भैया ऐसा विराज
20:31
विरा राहुल अरे खाली सुनते रहना थोड़ी ना है बोलना भी है
20:39
अरे वो मैं हूं मैं हूं नहीं है भाई जी
20:51
कुछ ऐसा होना चाहिए अगर अंदर से आया है ऐसा तो कुछ ऐसा भी होना चाहिए कि यार
21:02
इच्छा उठे ही ना इसी क्षण से
21:14
उसमें कोई प्रयास ना करना पड़े सुनो और इच्छा खत्म
21:23
ऐसा नहीं कि प्रैक्टिस करोगे आप क्या ऐसा कुछ होना तो चाहिए अंदर से आया
21:31
है तो होना चाहिए हम तो बताओ यार कुछ अरे बोलो यार सौरभ जी
22:05
सुने और इच्छा खत्म
22:23
यार बोलो ना हेलो
22:32
बहुत पूछ रहे थे आज हम पूछते हैं बताओ कुछ भी नहीं बोलना है
22:39
सॉलिड आंसर होगा तू ही बोलना है यानी
22:49
आप सुनो और इच्छा खत्म कुछ ऐसा तो होगा
23:22
हां जी अगर कोई
23:31
हां ये हां ये तो बहुत अच्छा आंसर तो है और सम्मानीय है
23:40
हमको हमको तो प्रॉब्लम है भी नहीं बट कुछ और एडिशनल चाहते हैं हम।
24:04
इच्छा से प्रॉब्लम नहीं होती किसी को भी। इच्छा करने के बाद होती है।
24:16
जैसे किसी ने इच्छा की कि मैं देह चाहता हूं, बॉडी चाहता हूं।
24:25
अब उस इच्छा से पूरा 80 100 साल का ऐसे चक्र चलेगा।
24:35
उस इच्छा का परिणाम यह शरीर है। सब आप लोग बैठे हो, सुन रहे हो।
24:45
और फिर इसके अंदर और कई इच्छाएं होंगी। इच्छा के अंदर इच्छा।
24:50
अब देह तो मंग लिया। अब देह की और कई इच्छाएं हैं। फिर वो शुरू हो जाती हैं।
24:58
फिर उसके अंदर और कई इच्छाएं शुरू हो जाती हैं। पद प्रतिष्ठा सम्मान ये वो दुनिया भर का।
25:06
तो ऐसा कुछ हो कि ये स्टॉप हो जाए। आगे इच्छा उठे ही ना।
25:15
ऐसी कोई इच्छा हो या ऐसा कोई फार्मूला हो कि इसी क्षण आगे की बात नहीं कर रहा हूं
25:23
मैं इच्छा उठे ही ना मामला खत्म
25:32
बताओ यार हमको तो पता नहीं है हम पहले से बता दे रहे हैं किसी को पता हो तो बता दो
25:38
अब हमारे अंदर से वह आया है निकला है तो किसी के पास तो उत्तर होगा
25:47
कुछ भी नहीं बोलना ये बहुत हायर चल रहा है बत्ती पड़ जाएगी बता रहा हूं
25:56
जब एकदम सॉलिड आंसर रहे कॉन्फिडेंस रहे तभी बोलना
26:08
हम माइक दो उधर सर आप ही बताओगे मेरे को लग रहा है
26:17
ऐसा कुछ नहीं प्रयास हम भगवान किसी भी चीज की कामना या इच्छा का
26:26
होना ये बताता है कि आपको कुछ अपूर्णता लग रही है जो कि आपके पास है
26:34
नहीं तभी आप कुछ कामना और इच्छा करते हो कुछ कमी के कारण ही कामनाएं पैदा होती है तलाश करते हो
26:42
इच्छा पैदा होती है। हम अगर लक्ष्य में आत्मा भगवान है उसका अनुभव है हम
26:51
तो ये आपको पता पड़ता है कि मेरे से अतिरिक्त तो कुछ है ही नहीं।
26:55
यस जो है वो मैं ही हूं। मुझ में ही है।
27:00
मुझसे बाहर कुछ भी नहीं है। हम तो जब आप सब कुछ समाहित किए हो अपने आप में और सब कुछ आपका ही हिस्सा है। तब क्षण
27:09
आपकी इच्छा खत्म हो जाएगी कि मैं क्या चाहूं। दूसरा है ही नहीं। दूसरा कोई है ही नहीं। मैं ही मैं हूं।
27:15
मैं ही सर्वाधार हूं। जो है मुझसे भिन्न नहीं है। हम तो मेरी को इच्छा करने का कोई मीनिंग ही
27:24
नहीं है। मेरा क्षण जो है इच्छाओं का अंत हो जाएगा। हां, सही है आंसर।
27:33
बट तो एक ही इच्छा है। अगर इच्छा में अगर देख तो जीव भाव रहेगा मेरा तो हमेशा मेरे को कुछ ना कुछ इच्छा बनी रहेगी।
27:43
हम हम मैं ही परमात्मा हूं तो मेरे को क्या कमी है? यस।
27:49
मैं तो पूर्ण हूं। फिर हम और यदि पूर्ण हूं तो पूर्ण ही हूं। फिर मेरे को क्या कमी है? क्या जोड़ना है?
27:57
क्या घटा वो आप सही बोल रहे हो कि खुद को परमात्मा जान लेने पर या बोध हो जाने पर जी
28:05
एक्चुअल में अगर आपको बोध हो गया कि आप ही परमात्मा हो अस्तित्व हो आपके अतिरिक्त
28:12
कुछ है ही नहीं तो आप क्या चाहोगे चाहते तो डलिटी में होती है
28:19
लेकिन ये बोध सबको है क्या यह बोध सबको नहीं है।
28:32
पर हम यह चाह रहे हैं कि ऐसा कुछ सुन के सब हर कोई इच्छा रहित हो जाए। अभी ऐसा कुछ बताओ भाई।
28:49
हां प्रणाम।
28:51
मैं नए स्टॉप आप कुछ भी नहीं बोलो ऐसे बीच में
28:59
ये बहुत हायर रेंज चल रहा है मतलब अभी सुने
29:07
और सबका चैप्टर क्लोज जितने भी सुन रहे हैं अभी इच्छाओं का चैप्टर
29:20
प्रणाम प्रभु हां प्रणाम बताइए प्रभु आपने जब ये कहा कि ऐसी कोई इच्छा
29:29
जिससे सारी हो जाए हम तो एक ही आ रहा है हम
29:37
कि मेरी कोई इच्छा कभी पूर्ण होगी ना ओके
29:45
नहीं लेकिन लेकिन नहीं नहीं नहीं नहीं
29:53
ठीक है ये आंसर बट ऐसा सुन के हर कोई इच्छा रहित कहां हुआ जितने भी यहां अभी
30:00
सुन रहे हैं सुनते ही उसका असर शुरू हो जाए
30:09
ऐसा कुछ होना चाहिए मेरे को ऐसा लगता है थोड़ा मंथन करो।
30:34
यस उनको माइक दो। फिर से बताओ आप सब सुने।
30:44
यह बहुत अच्छा जवाब है।
30:51
प्रभु मैं से भिन्न जब मैं कुछ चाहता हूं तब इच्छा होती है।
30:56
और जब इच्छा भी मैं से भिन्न नहीं हम तो मैं इच्छा करूं या ना करूं वो दोनों एक ही स्थिति रहती है।
31:05
हां एकदम सही।
31:09
क्योंकि मैं से अलग ही नहीं है कोई भी इच्छा तो इच्छा का करना या ना करना दोनों में मुक्ति है।
31:20
यह भी बहुत अच्छा आंसर है और बहुत सॉलिड है।
31:26
ऐसा सुन के सब इच्छा रहित हुए क्या?
31:38
अरे भाई इच्छा रहित हो जाना भी तो एक इच्छा है।
31:54
ठीक है। बाकी सारी इच्छाएं हैं।
32:00
लेकिन इच्छा रहित हो जाना भी तो एक इच्छा है।
32:10
प्रभु जी प्रभु जी मैं बताऊं? हां बताइए।
32:18
इच्छा जब इच्छा जो है इच्छा को मैं के क्षेत्र बोलते मन के
32:25
क्षेत्र जब मैं के क्षेत्र में मैं ही जब शिक्षा बन जाता हूं
32:32
कुछ शिक्षा बन जाता हूं क्या उसमें फर्क है मेरे में फर्क है सब मैं ही है मेरे अलावा दूसरा कोई नहीं कोई मै
32:42
वो ठीक है वो आंसर तो अभी इधर भी दिया गया बट
32:50
हम वह नहीं पूछा हम कुछ और चाह रहे हैं यार कुछ और गहरा सा वो ठीक है आपका आंसर
32:57
गलत नहीं है तो हम क्या वो कह रहे थे
33:08
इच्छा रहित हो जाना भी तो एक इच्छा है ओके।
33:22
इच्छाएं पूरी हो जाए। यह एक इच्छा है।
33:29
देखो, एक आदमी की दो मैक्सिमम इच्छाएं होती हैं। मेरी सारी इच्छाएं पूरी हो जाए।
33:38
और दूसरी इच्छा होती है मैं इच्छा रहित हो जाऊं।
33:45
है ना मेरी सारी सारी वन टू ऑल इच्छाएं पूरी हो
33:51
जाए। आत्मा परमात्मा दुनिया ये वो
33:58
मेरी सारी इच्छाएं पूरी हो जाए और उसका फल मैं इच्छा रहित हो जाऊं।
34:13
है ना? जिसकी सारी इच्छाएं पूरी हो गई वही इच्छा रहित हो सकता है।
34:27
जिसकी सारी इच्छाएं पूरी हो गई
34:33
वही इच्छा रहित हो सकता है। अब सारी इच्छाएं पूरी करना मतलब समझ रहे हो?
34:51
जीव अपनी सारी इच्छाएं पूरी करने चले। तभी तो 84 लाख योनियों में जन्म लेता है।
35:04
ये 84 लाख योनियों में जो जन्म लिया जा रहा है।
35:12
यह सारी इच्छाएं पूरी करने का ही चक्कर है।
35:17
हर देह में कभी उड़ना है, कभी बैठना है, कभी तैरना है, कभी हर टाइप की इच्छा है।
35:23
84 लाख योनियों में। कभी मनुष्य होना है, कभी पंछी होना है, कभी वृक्ष होना है।
35:32
मतलब मैं यह पहले बताना चाह रहा हूं कि इच्छाओं के पूरे रहस्य को उसको थोड़ा समझो।
35:43
कितनी गहरी है वह।
35:49
अब यह उसकी सारी इच्छाएं पूरी तो होती नहीं।
35:53
बीच में जीव भगवान की इच्छा करता है कि यार अब यह बहुत हो गया।
36:04
अब भगवान ही मिल जाए।
36:08
इच्छाओं का अर्थ ही है पूरा ना होना।
36:20
जीव को प्रभु की प्यास कब जगती है? जब वह इस जगह आता है, थक जाता है।
36:28
यार इच्छाओं का अर्थ ही है कि कभी पूरा ना होना।
36:38
तब उसमें प्यास जगती है। अब खुद को जीव मान के ही है भला बट है तो
36:45
मान्यता में ही है। चलो
36:54
अब भगवान की चाह सुप्रीम की
37:09
अब क्या हुआ बताओ? चाह मॉडिफाई हो गई।
37:18
कुछ नहीं हुआ है। अभी दुनिया चाहते थे धन दौलत इज्जत शहरत
37:25
और दुनिया भर के भोग विलास ये वो अब चाह मॉडिफाई हो गई। अब परमात्मा अस्तित्व
37:33
लेकिन चाह तो अपना रूप बदल ली और क्या की बताओ?
37:42
जिसको आप बहुत गहरे आध्यात्मिक ज्ञानी धानी समझते हो वहां चाहतों ने अपना रूप बस
37:48
बदला है। है सब चाह के बस में ही अब आत्मज्ञान की चाह है, इनलाइटनमेंट की चाह है या जो भी है। चाह ने रूप बदला है।
38:02
बस किसी भी चीज को समझ लेना उससे मुक्त हो जाना है।
38:11
समझ रहे हो? तो कोई भी सब्जेक्ट पे जब सत्संग होता है तो उसको बहुत गहरे से समझा करो।
38:28
अब चाहतों ने रूप बदला। आप दुनिया भर का ध्यान साधना यह वो कर रहे हो फिर सत्संग भी कर रहे हो फिर आपको कुछ समझ आ रहा है
38:38
नहीं आ रहा है फिर समझने की चाह है जानने की चाह है स्वयं को परमात्मा को अस्तित्व
38:44
को जो भी बोल लो चाह तो एज इट इज है। उसने अपना रूप बस बदला है।
38:51
एक साइंटिस्ट अग्नि को जानने चलता है। इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन को जानने चलता है।
38:59
ब्रह्मा विष्णु महेश को जानने चलते हो। बादशाह तो वहीं की वही है।
39:11
चाह का अंत तो हुआ ही नहीं।
39:31
तो चार रूप बदल रही है हर बार
39:40
हर बार हर जन्म में 84 लाख योनियों में फिर देवता में भी फिर मनुष्य में भी
39:53
हर बार चाह रूप बदल रही है और उसी के झांसे में
40:00
आप जन्म पर जन्म जन्म पर जन्म जन्म पर जन्म पता नहीं क्या क्या-क्या नहीं किए हो
40:13
और आपकी जिंदगी की सच्चाई यही है। मैं आत्मा भगवान सच्चाई नहीं है।
40:19
चाह ये चाह सच्चाई है।
40:23
ज्यादा बड़ा सच आपके जिंदगी का यह चाह है कि अभी वह बात बनी नहीं। अभी मैं मैं आत्मा भगवान नहीं
40:32
हुआ या अस्तित्व नहीं हुआ। जो भी आप सोचते हो अपने ढंग से बुद्धत्व नहीं हुआ।
41:15
फिर कुछ ना चाहना है। यह भी एक चाह है। अब आपकी फाइट शुरू की यार अब कुछ नहीं चाहना है। कुछ नहीं चाहना है।
41:26
कोई इच्छा नहीं करनी है।
41:29
अब दूसरे साइड से आप फाइट कर रहे हो। फाइट तो सेम है। कुछ ना चाहने की चाह।
41:43
तो ये कब तक चलेगा?
41:48
क्या ऐसा पॉइंट है कि चाह उठे ही ना
41:55
चाह चाह के भी ना उठ सके हम
42:02
अरे कुछ तो होगा बाबा ऐसा अंदर से निकला है तो कुछ तो होगा
42:13
मतलब कुछ नया पॉइंट बताओ पुराना नहीं पुराना सही है जो आप लोग बता रहे हो वो सब ठीक है।
42:44
अब आपका मन बुद्धि पूरा जोर लगा दिया है। उसको कुछ मिल नहीं रहा है।
42:51
खुद ही चाहत से बना है। उसको क्या मिलेगा?
43:02
क्या है ऐसा पॉइंट? क्या है?
43:10
जिसके बाद चाह उठे ही ना।
43:15
हम यानी चाह का नामोनिशान मिट जाए।
43:36
तो चाह का नामोनिशान मिट जाए कि चाह नहीं करना है।
44:08
लेकिन वह पॉइंट आना चाहिए अभी के अभी।
44:34
हम बताओ अरे बोलो यार कुछ तो बोलना पड़ेगा ना
44:56
क्या ऐसा पॉइंट है जहां उड़ती नीचा।
45:09
अच्छा आप लोग गौर कर रहे हो जैसे ही उस पॉइंट पे अपन रेस कर रहे हैं क्या है वो
45:16
पॉइंट बैकग्राउंड से उभर रहा है
45:26
उस पर ध्यान पड़ रहा है और वो उभर रहा है क्या है ऐसा और सब आप काटते जा रहे हो ये भी ऐसा नहीं है वो भी ऐसा नहीं वो भी ऐसा
45:34
नहीं है। वह वाले पॉइंट पे फोकस हो रहा है और वह उभर रहा है। आप सही जा रहे हो।
45:55
अब उसी पॉइंट पर जो उभर रहा है उसी पर फोकस रखो।
46:20
अचार पे फोकस अचार की चाह नहीं
46:27
अचार देश पे फोकस जैसे जैसे मैं निर्विचार का ध्यान कराया था कि निर्विचार का विचार करो।
46:44
फोकस निर्विचार पे ऐसी अचाह पे फोकस
46:53
चाहना नहीं है। वह है यही उस पर फोकस
47:42
अचा के आते ही पूरी सुशुक्ति आ जाएगी।
47:46
जागृत सुशुप्ति अगर एग्जैक्ट फोकस करोगे सब मिट जाएगा।
47:56
क्योंकि यह सब चाहत के कारण है।
48:09
जैसे ज्ञात से अज्ञात में जाते हो वैसी चाह से अचाह में जाओ नोन से अननोन में
48:18
व्यक्त से अव्यक्त में ऐसी चाह से अचाह में जाओ
48:25
अरे ये क्या दिख रहा है ब्लैक बोर्ड में एक बच्चा खड़ा हो के बोला ऐसा बिंदु कर दिया था।
48:38
सब बच्चे बोले बिंदु दिख रहा है। चौक से बिंदु बनाया टीचर ने। एक बच्चा बोला ब्लैक बोर्ड दिख रहा है।
48:49
तो किसको अचाहा दिख रहा है?
49:27
अरे आकाश में कई सितारे हैं।
49:33
कई चाहते हैं लेकिन आकाश में चाचा हम में कई चाहते हैं।
49:52
अच्छा के आकाश में कई चाहते हैं। कई सितारे हैं।
50:24
तो अह के आकाश में आप खुद को छोटा सा शरीर मान के छोटा छोटा चाह रहे हो।
50:34
कहां चाह रहे हो? अचाह के आकाश में कहीं कोई पृथ्वी है, कहीं कोई देश है, इंडिया
50:43
और वहां कहीं बैठे हो, वहां आपकी देह है और छोटा-छोटा क्या-क्या चाह रहे हो? लेकिन कहां चाह रहे हो? अचा के आकाश में।
50:59
हम
51:20
अब इस अनंत अचा के आकाश में चाह रूपी जीव कहीं दिख रहा है।
51:29
बताओ आकाश की दृष्टि से अचाह के आकाश की दृष्टि
51:39
से चाह रूपी जीव को देह को देखो भला
51:46
क्या है इसकी चाहते पूरी हो जाए ना हो जाए इसका अर्थ क्या है
52:25
तो अचाह के आकाश में में वो इंपॉर्टेंट है।
52:34
अचाह के आकाश में अखंड अनंत अनंत अनंत
52:43
अचाह के आकाश में यह चाहने वाला है कहां यार
52:51
यह कौन सुन रहा है यह सब वीडियो बैठे कहां पृथ्वी में कहां क्या है यह सब
53:32
जैसे निर्विचार के आकाश में ही आपके छोटे छोटे विचार ऐसे तैरते रहते हैं।
53:45
विचार रूपी पंछी उड़ते रहते हैं।
54:01
तो जैसे एक बादल को आकाश
54:08
देखता है क्या या उसको दिखता है क्या एक पंछी
54:17
आकाश को दिखता है तो अचाह के आकाश को
54:28
यह एक चाह वाला पंछी जीव कहीं दिखेगा
54:36
है ही नहीं यार कहीं वो खोजेगा तो नहीं दिखेगा
55:23
तो देखो देखो आपकी इच्छा कहां पे है इधर माइंड में मन मन मन से इच्छाएं होती है। है ना? मन
55:31
में कहीं पर एक इच्छा है। है ना? लोग हैं बहुत सारे। उनके मन में कहीं इच्छा है।
55:38
लेकिन कहां इच्छा नहीं है वो एरिया देखो। अनंत विराट।
56:06
चाहतों के साइड से मत देखो। अचाह के साइड से देखो तो कुछ नहीं दिखेगा।
56:14
कोई चाहत नहीं दिखेगी।
56:26
पंछी के साइड से मत देखो। आकाश के साइड से देखो।
57:18
विशाल महासागर में बुलबुले तैर रहे हैं।
57:35
अब वो बुलबुला चाहत का अचार के सागर में तैर रहा है। अब अचार
57:43
रूपी सागर को बुलबुले का पता भी चलता है क्या? नहीं चलता।
57:56
बस
58:04
प्रचार के आकाश में सागर में यह कहां है पता ही नहीं है।
58:17
अरे मैं जानता ही नहीं। यह सुखदख किसे और किस प्रकार से होते हैं।
58:26
मैं जानता ही नहीं कि यह जन्म और मृत्यु किसे कब और कहां होती है।
58:34
मैं तो आकाश है ना चेतना का परमात्मा का। उसको थोड़ी ना पता है कि
58:42
आपकी बॉडी पैदा हो रही है। मर रही है। ऐसा है वैसा है।
58:51
पता ही नहीं होता।
58:55
आप देखते हो यह अमित अमित जैसा कोई गुरु है क्या है वह बोल रहा है हमको पता ही नहीं साला यह कौन है
59:04
हमारे देश में मैं देश में यह है ही नहीं कहीं पे
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तो मुझे पता ही नहीं कौन इच्छा करता है और कौन इच्छा से रहित होता है?
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ओम
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तो इच्छाओं की जननी अपूर्णता कुछ कमी के कारण इच्छाएं
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और आपका स्वभाव पूर्णता
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और इतनी पूर्णता कि आपसे भिन्न कुछ भी नहीं
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तो मुझे पता ही नहीं कौन इच्छा करता है और कौन इच्छा से रहित होता है
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हमारी नजर उस बिंदु में रहती है। ब्लैक बोर्ड में नहीं रहती है। ब्लैक बोर्ड तो एक छोटा एग्जांपल
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आकाश में होती ही नहीं है नजर अचा आकाश
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जो आपका स्वभाव है
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तो अचार रूपी सागर में जो बुलबुले हैं अब आप चाह के साइड से नहीं चल रहे हो।
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बहुत खतरनाक है ये।
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हम चाह के साइड से सोचते हैं, देखते हैं, चलते हैं। अचाह के साइड से अचाह के सागर
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में जो चाहत रूपी बुलबुला है, वह भी अचा है।
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उस बुलबुले की आत्मा भी पानी है अचा है
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हर चाह जो बहुत छोटीछोटी या जो भी है एक कण मात्र भी है बट वह भी अचा है उसकी
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आत्मा भी अब अब अचा है
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चाहत की दृष्टि से अचाह भी एक चाह है।
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अचाह की चाह जो बोलते हो आप समझे? उस साइड से जब आप चलते हो चाह के
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साइड से अचाह के साइड से चाह भी अचा है।
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हां जी
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चाह भी अ चाह यानी वो बुलबुला भी पानी है ना पानी से ही
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बनता है ना बुलबुला सागर
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तो अचाहा कोई स्वप्न नहीं वो मैं हूं।
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अचाहा कोई स्वप्न नहीं वो मैं हूं। सच वो सच है वो आप हो।
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चाहतों की नौटंकियां हैं। अचाह हकीकत है वह आप हो।
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चाहतों के नाटक हैं और क्या है?
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छोटे-छोटी चाहतें फिर उसके छोटे-छोटे नाटक हां लेकिन अगर अचा देश में से देख रहे हो तो हर चाहत भी अचा है।
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वो एक अलग ही सहजा अवस्था है। सौंदर्य है।
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भगवान देश से मन भी भगवान है। माया भी भगवान है।
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अचा देश से चाह भी अचा
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हां जी
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अचाह देश की चाह भी अचाह है।
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जैसे भारत देश का हर नागरिक भारतीय है।
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ऐसा बोलते हैं ना अपन ऐसा ही। अचाह देश की चाह भी अचाह है।
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और चाह देश में अचाह भी चाह है। हम वहां से चलते हैं रॉन्ग साइड से।
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साइड बस चेंज करना है यार। और साइड चेंज है ही।
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करना नहीं है। अब
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तो अचाह देश में कृष्ण जिए उनकी हर चाहतें अचाहत थी। तुमको समझ ही
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नहीं आता यह कैसे इतनी पत्नियां इतना वो इतना यह तुमको लगता है यह तो बहुत बड़ी
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गड़बड़ है अरे वो पूर्ण है एकदम
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कंप्लीट वो फाइनल जिसकी मैं बात कर रहा हूं वही है
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वो पॉइंट वहां हर चाह चाह है
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और तुम अपना वह चाहत के साइड से देखते हो तो तुमको ब्रह्मचर्य दिखता है।
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है ना? क्रोध दिखता है। अब कृष्ण इतना क्रोध करके गला उड़ा दिए। युद्ध करा दिए।
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इतने स्त्रियां इतने वो पति पत्नी बच्चे जो भी आने व्हाटएवर
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अरे भैया वो अचा देश है कृष्ण मैं आत्मा कृष्ण।
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अब तुम्हारा मैक्सिमम राम तक तुमको समझ आता है। वहां तक आत्मज्ञान है। यह बिय्ड है कृष्णा का वर्ल्ड। वासुदेव का वर्ल्ड।
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जितनी गहरी चीज होती है ना उतना सेंस गहरा रख के सुनोगे ना तो ग्रहण होगी।
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तो कृष्ण की मैं की मैं की
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हर चाह भी अचा है और जीव की
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अचाह भी एक चाह है।
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बहुत बड़ा डिफरेंस है। भयंकर तो यह बताने आया हूं मैं।
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भले समझ आए ना आए पल्ले पड़े ना पड़े यह बिय्ड रेंज
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ये मैं की रेंज है मेरी रेंज है
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और तुम्हारा साला पाप पुण्य का ही हिसाब किताब बंद नहीं होता वही चाहत के साइड से ही देखते हो चश्म ही चाह हाथ का लगा हुआ है।
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जीव के साइड से मत खेलना इस खेल को। बहुत बहुत पीड़ादाई है।
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अरे राम
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अब देखो उसका आकाश वास्ट हो गया है। अचानक का मैं का
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यह तुम हो यार ये कौन चाह रहा है वह तो पता ही नहीं कौन चाह रहा है मैं देश में कौन चाहता है
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किसकी चाहत पूरी होती है और कौन अच्छा होता है वो मैं देश में पता ही नहीं हां
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देखो उत्तर ये अभी आया उस समय नहीं था मेरे पास लेकिन मेरे को पता था कि यह
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निकला है ना प्रश्न तो है वो कहीं ना कहीं
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उस समय रियल में नहीं हां
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तो अचाह होना नहीं है। तुम अचाह ही हो।
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है ना?
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जैसे निर्विचार होना नहीं है। तुम निर्विचार ही हो।
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निर्विचार को हर विचार प्रिय होता है। वो तुम्हारा जो जीव पगलाता है ना जब साक्षी बनता है विचार का उसको प्रिय नहीं होता।
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है ना? निर्विचार को हर विचार प्रिय होता है। इसलिए उसको अपने किसी विचार से प्रॉब्लम ही नहीं है। आप अपनी डेली सहज
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लाइफ में देखो। आपको अपने किसी विचार से प्रॉब्लम है ही नहीं।
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तो बियों्ड में एकदम फाइनल में
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अच्छा अचाह की हर चाहत वो प्रियता है।
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अब चाहत प्रॉब्लम नहीं है।
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पीड़ा नहीं है कि चाहो तो दुख होगा। ये होगा वो होगा। अब नहीं अब वो सुंदरता है। प्रियता है।
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क्योंकि अब हर चाह भी अचा है ना। उसकी आत्मा ही अचा है।
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तो बस भाई सबको प्रेम प्रणाम है
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खूब खूब प्यार बहुत सारा प्यार और प्यार और प्यार
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अब सब अद्भुत सुंदर अति सुंदर है
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तो कृष्ण के इस रहस्य को कोई नहीं जान पाया मालूम उसके बाद भी कई आए कोई नहीं जान पाया उस तल का कोई था ही नहीं तो
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जानेगा कैसे कृष्ण को जानने के उसका तल होना चाहिए ना।
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ओके सबको प्रेम प्रणाम।
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ओम नमो भगवते वासुदेवाय