Prabhu Shree
0:04
[संगीत]
0:16
भगवान का सबसे सुंदर नाम क्या है? कोई बताएगा? जल्दी-जल्दी बताना है।
0:23
नो मैं भी नहीं है। हम मैं हूं भी नहीं है और प्रेम प्रेम भी नहीं गोविंद भी नहीं।
0:32
ये सुंदर नाम है। सबसे सुंदर नाम भगवान का क्या है? नहीं राम भी नहीं। सुंदर है राम नाम भी। लेकिन सबसे सुंदर विष्णु भी नहीं।
0:44
अपना ही नाम ले रहा है तू। हां। भगवान का सबसे सुंदर नाम।
0:53
नो नो आनंद तो जमेगा ही नहीं गुरुदेव गुरुदेव अमित अमित बिल्कुल नहीं
1:01
बता दूं बोलो ना मेरे को बोलो ना बताने को
1:05
[हंसी]
1:08
भगवान का सबसे सुंदर नाम माया है।
1:17
सबसे दिव्य नाम माया है। ठीक चलूं मैं?
1:25
[हंसी]
1:32
सबसे दिव्य नाम भगवान का माया। माया को भगवान जान।
1:43
उसको माया मत मान।
1:49
जैसे रस्सी में आपको सांप दिख रहा है अज्ञानता के कारण या अंधकार के कारण।
1:58
तो सांप को आप क्या जानोगे? अरे बोलो ना रस्सी जानोगे ना?
2:06
सांप को क्या जानोगे? रस्सी जानोगे ना? ऐसी माया को क्या जानोगे?
2:13
भगवान जान। बात ही खत्म।
2:20
अलग मत मानना भगवान से उसको कुछ और मत मानना। भगवान ही जानना बस। हां।
2:29
देह दिखे तो भगवान। मन दिखे भगवान। प्रपंच संसार दिखे भगवान।
2:39
माया मत बोलना, मन मत बोलना, संसार मत बोलना।
2:46
आप इंसल्ट करते हो भगवान की।
2:50
भगवान की इंसल्ट करते हो तब उसको मन बोलते हो, देह बोलते हो।
2:58
है ना? सब भगवत स्वरूप है।
3:04
तो सांप को क्या बोलोगे आप? रस्सी।
3:13
माया को क्या बोलोगे? भगवान। सबसे सुंदर नाम है भगवान का। माया।
3:31
यह डालो टाइटल और थंबनेल में। लोगों को पता ही नहीं है।
3:36
किसी को पता नहीं है कि भगवान का सबसे सुंदर और अलौकिक नाम माया है।
3:45
एकदम अलौकिक नाम।
3:52
अब राम, कृष्ण, शिव, दुर्गा ये सब भी भगवान के नाम है। लेकिन माया तो माया है। सबसे सुंदर नाम।
4:05
माया को भगवान जान हां मत बोलना मेरे को यह हो रहा है वो हो रहा
4:13
है ऐसा हो जाता है वैसा हो जाता है सबको भगवान जानते भगवत स्वरूप है
4:26
तो सब किससे मरते हैं रामबाण से मेघनाथ है अपना
4:33
रावण है अपना कुंभकरण है। रावण मोह का प्रतीक है।
4:40
कुंभकरण अहंकार का प्रतीक है। मेघनाथ काम का प्रतीक है। है ना?
4:47
तो यह सब किससे मरते हैं? रामबाण से। सीधा राम बोलो मर जाएंगे।
4:56
क्योंकि राम ही है ना? यह कोई है ही नहीं कहीं। आप बोलते ही गलत हो।
5:04
आप काम बोलते हो, क्रोध बोलते हो, है ना?
5:08
मोह बोलते हो, सीधा राम बोल।
5:18
माया कभी नहीं बोलना। कभी नहीं। हां।
5:27
उस अर्थ में माया नहीं बोलो। और भगवान का सबसे सुंदर नाम माया है। और अब माया बोलो।
5:37
कितनी सुंदर हो गई माया। माया ही भक्ति हो गई ना।
6:02
हां जी बताइए अब आप लोग हम
6:11
हां बिल्कुल बिल्कुल
6:19
भाई आप क्या बोलते हो गिलास बोलते हो कांच को
6:28
तो आपको कांच कांच में आना है ना आपका लक्ष्य कांच है ना तो गिलास को क्या
6:33
बोलोगे कांच बोलोगे इतना सिंपल है ठीक संसार को क्या बोलोगे भगवान बोलोगे
6:43
माया को क्या बोलोगे भगवान प्रपंच को मन को दुख को क्या बोलोगे भगवान
6:54
अब काम क्रोध लोभ मोह सब उठ रहा है सीधा बोलो राम राम प्रभु जो नाम आपको अच्छा लगे
7:03
भगवान उसका उपयोग नहीं करना है
7:10
वो उपयोग करना यानी आपने उसको कुछ और मान लिया तभी उसका उपयोग यानी दुरुपयोगी है वो
7:19
ठीक है तो उसको क्या बोलना है भगवान
7:32
सियाराम मैं सब जग जानी करहु प्रणाम जोर जुग पानी
8:00
और माया को आपने अलग समझा भगवान से वो रगड़ देगी।
8:08
रगड़ देगी बता रहा हूं।
8:13
तो जितने भी माया से मुक्त होना चाह रहे हैं वह रगड़े जा रहे हैं।
8:22
इसके साक्षी आप खुद हो। मैं क्या बोलूं?
8:30
[हंसी]
8:33
जब तक उसको रिस्पेक्ट नहीं दोगे भगवान नहीं बोलोगे।
8:39
ओ माया पार करा देती है मालूम हां माया ही पार कराती है आप लोग बोलते हो
8:48
माया ढकती है रोकती है माया ही पार कराती है
8:56
आप बोलते ही गलत हो उसको डिसरिस्पेक्ट से बोलते हो माया इससे बचना
9:04
है और ये वो माया का आपका जो भाव है वो भगवान नहीं होता।
9:24
तो भगवान कौन है? मैं आत्मा भगवान।
9:34
और अब माया तो है ही नहीं। वह भी भगवान ही है। भगवान का पर्यायवाची माया।
9:45
अब क्या पाना है बताओ आप लोग?
9:53
संसार प्रपंच इससे बचना उससे बचना। अरे सब तो भगवत स्वरूप हो गया। क्या पाना है?
10:03
अरे बोलो।
10:05
[हंसी]
10:10
अब बचा ही क्या जब माया ही भगवान है
10:16
तो क्या पाओगे अरे जल की लहर
10:24
जल ही है ना अग्नि में जो ताप है वो अग्निच है ना आकाश की शून्यता आकाश ही है
10:32
ना भगवान की माया भगवान ही है।
10:40
बोलने में अलग-अलग है।
10:44
जैसे वाणी और उसका अर्थ बोलने में अलग-अलग है। है एक ही।
10:52
जल और उसकी लहर वायु और उसका स्पंदन बोलने में अलग-अलग
10:58
है। है एक ही। ऐसी भगवान और माया बोलने में अलग-अलग है। है एक ही।
11:09
मैं और तू बोलने में अलग-अलग है। है एक ही।
11:15
मैं और सर्व बोलने में अलग-अलग है।
11:20
एक ही एक और अलग बोलने में अलग-अलग है।
11:28
एक ही भगवान और माया बोलने में अलग-अलग है।
11:39
एक ही
11:48
कभी भी यह मत बोलना कि यह क्या हो गया? यह माया क्यों आ गई? मन क्यों आ गया? ऐसा डिसरिस्पेक्ट नहीं करना।
12:01
हां सीधा प्रणाम करना राम शिव भगवान जो भी भाव आपको आता है। है ना?
12:29
माया को आपने खुश कर दिया ना तो भगवान से मिला देगी। इसलिए राधे-राधे राधे-राधे बोलते हैं।
12:39
पूरे वृंदावन में क्यों बोलते हैं राधे राधे? कि उन्हीं को खुश कर दो ना।
12:45
वो भगवान से खुद ही मिला देगी। और आप उसी को नाराज कर देते हो।
13:01
उसको नाराज किए तो वो फिर रगड़े जाओगे
13:07
फिर वो आपसे साधना करवाएगी और ठोकाई करेगी और साधना कराएगी और ठोकाई करेगी
13:17
और फिर बोलेगी कि तू यह बहुत कर लिया अब थोड़ा यह साधना कर वो साधना कर
13:25
अब ज्ञात की साधना बहुत कर लिया। अज्ञात की साधना कर। अज्ञय की साधना कर।
13:33
रगड़ देगी बता रहा हूं।
13:40
अब जो भी दिख रहा है उसकी साधना किया। अब कुछ भी नहीं दिख रहा है। अनदेखे को देखा कर। उसकी साधना कर।
13:48
अरे यार देखा अनदेखा दोनों को भगवान बोल दो ना।
13:54
ज्ञात अज्ञात दोनों को राम बोल दो। मैं तू सबको राम बोल दो। तू राम है ना मैं भी राम हूं।
14:04
क्यों ये मचमच करना है ये सब?
14:13
रगड़ डालेगी। बता रहा हूं। कभी गड़बड़ नहीं करना।
14:18
बस सियाराम में सब जग जानी। कह रहा हूं प्रणाम जोर जुग पानी
14:27
सियाराम को एक करके जोरी जुग पानी एक करके अलग करके नहीं
14:37
बोलने में सीता और राम दो हैं एक ही
14:43
माया और भगवान को एक करके प्रणाम करो ना क्योंकि एक ही है
14:53
यस बताओ अब आप लोग किससे मुक्त होना है? किसी को मुक्त होना है किसी से?
15:02
[हंसी]
15:31
तो भाई रस्सी में जैसे सांप दिख रहा है। है ना? तो सांप को आप क्या बोलते हो? रस्सी।
15:38
ठीक है? अगर सांप में सांप दिखे तो तो भी क्या दिक्कत है ना भगवान ही है ना
15:47
यार नाग देव बोलते हैं नाग लोक होता है हमारे
15:54
हमने तो सबको देव बना दिया वृक्ष को हर जीव को
16:03
इससे सुंदर और क्या होगा
16:18
वाह अद्भुत सूत्र आया जी सबसे सुंदर नाम
16:26
माया महामाए ऐसा बोलते हैं ना मां की हमने कितनी पूजा की
16:38
अद्भुत अलौकिक
16:48
तो वशिष्ठ गुरु वशिष्ठ से जब
16:55
वशिष्ठ रामायण में सत्संग चल रहा था तब वशिष्ठ बोलते हैं राम
17:05
मैंने तीन बार इस युग को देखा है।
17:12
तीन युग में मैंने तीनों बार राम को देखा है।
17:20
है ना? और अयोध्या देखी है मैंने। तीनों बार
17:27
अलग-अलग अयोध्या अलग-अलग कैरेक्टर सब में राम एक ही रहता है।
17:36
इससे भी ज्यादा गुरुवर किसी ने देखा है क्या?
17:42
तब वो काग भुसुंडी को बोलते हैं। उसने सैकड़ों बार
17:49
है ना सैकड़ों बार क्योंकि काग भुसुंडी की उम्र अमर ही है वो।
17:57
अयोध्या देखी है और सब में राम को एक ही देखा है।
18:06
तो सबके समय का एक दायरा होता है।
18:10
सबके समय का जैसे ब्रह्मा जी की उम्र है ना उसका एक कैलकुलेशन है। मेरे को एग्जैक्ट पता नहीं
18:18
है कि कितने होते हैं। चारों युग बीतता है तो एक दिन होता है।
18:28
ऐसे 100 साल एक कैलकुलेशन है। उसमें भी महामाया की उम्र सबसे ज्यादा है।
18:36
नारायण से भी ज्यादा शिव से भी ज्यादा।
18:40
सबसे हाई कोटि में महामाया की उम्र है। वो रिस्पेक्ट हमने दी है महामाया को।
18:49
अब ऐसे ब्रह्मा जी के हजारों साल में फिर विष्णु का एक दिन होता है। फिर विष्णु के
18:56
हजारों उसमें शिव का एक दिन होता है। ऐसी महा शिव के हजारों साल में महामाया का एक
19:03
दिन होता है। एग्जैक्ट कैलकुलेशन मेरे को नहीं पता। बट वो आप देखोगे शास्त्रों में तो मिल जाएगा।
19:12
तो हमने वह रिस्पेक्ट दी है।
19:16
अलौकिक रिस्पेक्ट ब्रह्मा विष्णु महेश से भी ऊपर रख दिया हमने महामाया को।
19:27
सोचो क्या रिस्पेक्ट दिया।
19:35
तो उसका जो रहस्य है ना वो यही है कि वही भगवान है।
19:43
माया ही भगवान है। सर्प ही रस्सी है।
19:54
लहर ही जल है। ताप ही अग्नि है। माया ही भगवान है।
20:07
माया ही भगवान है। भगवान के अतिरिक्त कुछ नहीं होता।
20:41
तो अब किसी से मुक्त होना है क्या या मुक्ति पाना है क्या
20:49
बात ही खत्म जब सब भगवान है तो किससे मुक्त होगे
20:57
और जब सब भगवान ही है आप सहित तो क्या पाओगे
21:07
यह है सत्संग की महिमा
21:52
तो अब इसको शरीर बोलोगे क्या?
21:56
मन बोलोगे नहीं उसमें परफेक्ट जाओ ना शरीर बोलोगे कि
22:06
भगवत स्वरूप देखोगे इसको भगवत स्वरूप देखोगे ना राम देखोगे कृष्ण देखोगे
22:14
राधा देखोगे तो वैसा जीना है और यह कोई प्रैक्टिस नहीं है
22:22
यह सत्य है तथ्य हां आपने जैसे ही बोला मन वह हावी हो जाएगा।
22:34
अब मन से आप बचो या उसके लिए कोई साधना करो या कुछ भी करो। मन बोलते ही मन आ जाता है।
22:45
मन को याद करो और मन तो मन कहां है? जब उसको याद करते हो वहां है।
22:57
ऐसे मन नहीं है। मन को याद करें तो मन आ जाता है।
23:02
उसको बिल्कुल राम रंग से रंग दो ना। श्याम रंग से।
23:08
मैं ही हूं इस रंग से। मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
23:16
मैं यानी क्या? आत्मा भगवान। शरीर मन नहीं। पहले हटते शरीर मन से। अब मैं आत्मा
23:24
भगवान अब शरीर मन अब यह भी भगवान
23:33
अब सब भगवत स्वरूप मैं ही हूं बस मैं से भिन्न कुछ भी नहीं
23:41
अब भक्त नाम देता है राम का कृष्ण का शिव का ज्ञानी बोलता है मैं ही हूं सब आ जाते
23:49
हैं उसमें दोनों एक ही बात तो भक्त और ज्ञानी बोलने में अलग-अलग हैं।
24:00
है एक ही ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग ये सब अज्ञानता
24:08
के कारण आप बोलते हो ज्ञान मार्ग, भक्ति मार्ग है एक ही।
24:25
जब भगवान और माया एक है तो ज्ञान भक्ति कैसे अलग हो जाएगा
24:32
ये अज्ञानता है ना एब्सोलुटली रॉन्ग
24:39
टोटली रॉन्ग एक ही मनुष्य को स्त्री पुरुष बोल दिए।
24:52
टोटली रॉन्ग एक ही मनुष्य है ना एक ही मनुष्यता है। उसको आप स्त्री पुरुष बोल रहे हैं।
25:01
व्यवहार के लिए सही है।
25:05
लेकिन एक्चुअल में सही नहीं है। एक ही मनुष्यता है।
25:31
और अब फाइनल में फाइनल चैप्टर में चलते हैं विराज
25:40
तो अग्नि और उसका ताप बोलने में क्या है?
25:46
बोलने में दो है। है हां जल और उसकी लहर बोलने में है।
25:56
एक ही बोलने में दो है। बोलने भर में जल और लहर दो है।
26:07
ज्ञान और भक्ति बोलने भर में दो है।
26:15
माया और भगवान बोलने भर में दो है।
26:22
ऐसे ही एक बोलने भर में एक है।
26:34
अब समझ नहीं आ रहा है। यह द्वार समझ नहीं आ रहा सही खुलता है।
26:40
क्या समझे
26:42
[हंसी]
26:45
बोलने भर में एक है ना जैसे शुरू में आप क्या बोले बोलने भर में
26:55
दो है माया और भगवान जल और लहर मैं और तू ज्ञान और भक्ति बोलने भर में दो है और
27:03
लास्ट में किस में आए एक में है एक ही तो अब मैं क्या बोल वो बोलने भर में एक है।
27:15
नहीं है एक नहीं बोलने भर में एक है बस
27:25
बोलने भर में एक है। पहले क्या बोले आप?
27:30
माया और भगवान बोलने भर में दो है। है एक ही। अब मैं बोल रहा हूं बोलने भर में एक है।
27:40
अब आप भूल गए क्या भगवान क्या माया क्या बंधन क्या मोक्ष क्या अग्नि और क्या
27:49
उसका ताप बोलने भर में एक है अब मस्ती आ गई
27:59
अब सब भूल जाओ ना माया भी भगवान भी ज्ञान भी भक्ति भी
28:09
क्योंकि याद किए ना तो अब भूल भी जाओ।
28:16
याद किए ना भगवान को माया को। अब भूल भी जाओ।
28:24
बोलने भर में एक है यार।
28:33
जैसे मैं और है
28:38
बोलने में दो है। है एक ही। अब बोलने भर में एक है बस।
28:50
अब है क्या बताऊं ऐसा कुछ नहीं है। आगे का तुम समझ जाओ।
29:00
क्योंकि आगे मैं कुछ बताऊं तो वह सीमित हो जाएगा ना। कुछ भी बोलना उसको।
29:07
तो बोलने भर में एक है
29:21
अब भूल जाओ सब माया भगवान ये वो सब भूल जाओ मस्त रहो चले
29:31
हम
29:32
[हंसी]
29:42
कब तक याद करते रहोगे? भूलने का है ना? भूल जाओ एकदम से।
29:52
दो किए, एक किए, वो किए। अरे भूल जाओ अब। हो गया सब।
29:57
ठीक है
29:58
[हंसी]
30:02
सबको राम राम भैया प्रेम प्रणाम
30:13
क्योंकि कब तक रस्सी सांप रस्सी सांप करते रहोगे आप हैं
30:20
[हंसी]
30:23
जमता है क्या ऐसे नहीं जमता पहले चालू है। हां। तो पहले रस्सी को बोले
30:35
गलती से सांप। अब सांप को फिर बोल रहे हो रस्सी।
30:41
कितने बार करोगे ये सब?
30:52
रस्सी रस्सी हो या सांप हो। अपने करना क्या है यार?
30:55
हैं करना है क्या कुछ नहीं ना
31:02
इसलिए मस्त रहो ठीक है प्रणाम वंस अगेन