0:17
तो हम मैं को ही भूल जाते हैं कि
0:25
मैं मैं मैं देह हूं।
0:33
मैं जीव हूं। मैं मैं को भूल जाते हो आप।
0:39
मैं परमात्मा हूं। अस्तित्व हूं।
0:46
आप मैं को ही भूल गए। और प्रथम आप मैं ही कहते हैं।
0:57
फर्स्ट तो आप मैं ही कहते हो ना।
1:00
देह किसको कहते हो? देह कहती है मैं देह हूं कि मैं कहता हूं मैं देह हूं।
1:07
जीव कहता है मैं जीव हूं कि मैं कहता हूं मैं मैं जीव हूं।
1:16
चेतन कहता है मैं चेतन हूं। कि मैं कहता हूं। मैं चेतन हूं।
1:25
निराकार आकार कहता है मैं निराकार हूं।
1:30
आकार हूं कि मैं कहता हूं। मैं अरे मैं सुनो
1:40
मैं कहता हूं मैं निराकार हूं। आकार हूं।
1:48
अरे परमात्मा कहता है कि मैं कहता हूं कि मैं परमात्मा हूं।
1:59
बोलो ना बोलो। हां। मैं कहता हूं। मैं को
2:05
आप भूल जाते हो। और मैं के आगे की जो भी कहानियां है आप उसी में उलझे रहते हो कि
2:13
मैं शून्य हूं पूर्ण हूं ये हूं फलाना हूं ढिमका हूं उसका कोई मायने नहीं है।
2:24
जिस चीज का मायने है वो आप ही हो।
2:31
बस इतनी सी बात है।
2:34
मैं शांत हूं। मैं सच्चिदानंद हूं कि कोई भूत प्रेत सच्चिदानंद है। मैं ना
2:42
मैं मरने वाला हूं या मैं अमर हूं। दोनों में कोई दम नहीं है। असली चीज मैं है।
2:50
मरना या अमरता उसमें उतना दम नहीं है।
2:54
असली चीज मैं तो तेरे नाम से शुरू तेरे नाम से खत्म।
3:08
गाना था ना मेरे प्यार की उम्र
3:15
इतनी सनम तेरे नाम से शुरू तेरे नाम से खत्म बस मैं
3:22
से शुरू मैं से खत्म खत्म
3:36
लकड़ी को डंडा कहते हो ना लकड़ी लकड़ी लकड़ी लकड़ी लकड़ी मैं को परमात्मा कहते
3:44
हो, आत्मा कहते हो, देह कहते हो, मैं मैं मैं खत्म बात
3:55
जो भी कहते हो मैं को कहते हो जो भी लाग लपेट लगाते हो ना मैं पर ही
4:03
लगाते हो तो मैं से शुरू मैं से खत्म
4:11
बस अरे राहुल
4:25
मैं शिष्य हूं बोलते हो ना मैं सद्गुरु हूं गुरु हूं मैं संत हूं अरे
4:33
मैं को बोल रहे हो आप सब और किसको बोल रहे हो मैं मनुष्य हूं मैं
4:40
देवता हूं मैं को ही कहा जा रहा है।
4:48
मैं का ही वर्चस्व है। मैं का ही नाम है। दसों दिशाओं में बाकी तो सब छिलके हैं।
5:05
अब जैसे केला है उसका जो गुदा खाते हो छिलका उतार के। यहां वैसा छिलका नहीं है।
5:13
यह यह छिलका है ही नहीं वाला छिलका है। क्योंकि माना हुआ है।
5:24
हां। तो कहां से शुरू? बोलो कीर्ति जी। हां बस। मैं को कीर्ति जी बोल रहे हो ना आप?
5:34
कीर्ति है कहां? मैं को जोत बोल रहा है ना?
5:37
जोत अमित यह सब क्या-क्या नामो निशान है ही नहीं यहां
5:44
गोविंद आप मैं को कहते हो गोविंद कि गोविंद को गोविंद कहते हो मैं गोविंद हूं
5:57
तो मैं को ही कहा जा रहा है और हकीकत यही है कि मैं को ही सुना जा रहा है और क्या
6:04
सुन सकते हो तुम और है क्या जो सुनोगे तुम
6:10
और होता क्या है जो सुनोगे तुम
6:16
और हुआ क्या है जो सुनोगे तुम
6:23
तेरे नाम से नहीं मेरे नाम से शुरू मेरे नाम से खत्म
6:31
और मेरा नाम मैं है बस हर किसी का एक ही नाम है मैं चाहे वह मनुष्य हो, जीव जंतु
6:38
हो, देवता हो, परमात्मा हो, हर किसी का एक ही नाम है। असली नाम मैं
6:53
एक ऐसा मंत्र हूं जो स्वतः सिद्ध हूं।
7:01
मुझे जपने के लिए मुझे सिद्ध करने के लिए एक करोड़ बार जपना अपने जैसी कोई चीज नहीं है।
7:10
है ना? एक अक्षर एक करोड़, दो अक्षर, दो करोड़ ऐसा चलता है।
7:16
मैं स्वतः सिद्ध स्वतः सिद्ध।
7:26
मैं ऐसा मंत्र हूं जो स्वतः सिद्ध हूं और सबको सिद्ध हो।
7:34
सिद्धि के पहले से सिद्ध हो। सिद्धि तो बाद में आती है।
7:43
तो आपको 100 साल एक मंत्र दिया जाए और 100 साल बाद सिद्ध होगा और उसके बाद आपको वह राहत मिलेगी। है ना?
7:55
आप उसी ट्रैक से उसी सोच से जीते हो।
8:01
लेकिन जो सहज सिद्ध है अनंत समय के पहले से मैं
8:10
आप ही अरे आप ही यू नो आप ही
8:19
तो क्या फिर क्या किसको जपोगे किसको सिद्ध करोगे
8:26
और सिद्ध है ही तो मैं मैं क्या करोगे
8:53
इस मंत्र की हालांकि यह बिय्ड मंत्रा है। बियों्ड तंत्र है, बिय्ड योगा है, बिय्ड मेडिटेशन
9:02
है। बट इस मंत्र की
9:08
यानी कद्र करने वाला चाहिए। बस अपनी कद्र करने वाला चाहिए मुझे। किसी और की नहीं
9:18
किसी सिद्धि की भी नहीं। अपनी कद्र स्वयं मैं आत्मा भगवान की कद्र
9:30
है कोई कदर अरे है क्या
9:37
है ना ये हुई बात पानी पिलाओ
10:01
तो नाम लेत भव सिंधु सुखाई। मैं बोलते ही सब गायब हो जाता है। क्योंकि कहीं है ही नहीं। पूरा भव सागर सूख जाता है।
10:51
हां जी
11:31
तो जो शुरुआत है ना मैं बस वही अंत है।
11:42
शुरुआत ही अंत है।
11:48
वही मैं के आगे जो आप जो भी उस पे लेबल लगाते
11:57
हो बॉडी हूं माइंड हूं देवता हूं भगवान हूं पापी हूं पुण्य आत्मा
12:04
हूं वो जो लेबल लगाते हो आप वो लेबल
12:14
वो वो लेबल कहीं है ही नहीं।
12:26
जैसे किसी को मैं बोलूं तुम एक अदृश्य वस्त्र पहनो।
12:32
तो उस वस्त्र का कोई मूल्य है क्या? उससे ढकोगे थोड़ी ना अपने तन को।
12:42
तो यह अदृश्य वस्त्र है। यह सारे लेवल कोई है ही नहीं।
12:51
तो आप सोचते हो कि आपके मैं को
12:57
दुनिया ने ढक दिया, बॉडी ने ढक ढक दिया, मन ने ढक दिया, माया ने ढक दिया। आहा ना यह आपकी अज्ञानता है।
13:10
आपको कौन ढक सकता है?
13:15
जो आप ही के भीतर है। यह सब जो सोचते हो, जो मानते हो वो भी आपके भीतर है। जो जानते हो वह भी आपके भीतर है।
13:26
तो जो आपके भीतर है वह आपको कैसे ढक सकता है? इंपॉसिबल।
13:35
यह आपकी गलत धारणा है। गलत मान्यता है।
14:06
हां जी
14:29
आज आप सब लोगों को जो भी सुन रहे हो इसमें सबको मेरे सामने होना था यहां।
14:38
हां
15:13
तो मैं का ध्यान नहीं होता। मैं से ध्यान है।
15:18
मैं का ज्ञान होता ही नहीं है। मैं से ज्ञान है। है ना?
15:27
मैं ऐसे प्रेम है। मैं से भक्ति है। मैं से परमात्मा है।
15:48
मैं की याद ऐसा नहीं होता। मैं ऐसे याद है।
15:54
मैं को भूल गया ऐसा नहीं होता। मैं इसे भूलना है। याद करना है।
16:02
भूलने से मैं कहीं खो जाऊंगा। ऐसा होता ही नहीं। याद करने से मैं कुछ ज्यादा हो
16:09
जाऊंगा। ऐसा भी नहीं होता है। मैं मैं हूं। याद करना भूलना बुद्धि का धर्म।
16:18
मैं तो मैं हूं।
16:21
अरे गहरी नींद में जब स्वप्न भी नहीं होते।
16:30
जब मैं मैं हूं मैं हूं भी नहीं करता। तब भी मैं रहता हूं।
16:39
जब ना कोई दुनिया होती है, ना देह होता है, ना मन होता है, ना कुछ होता है। लेकिन मैं तो रहता हूं।
16:52
मैं रहता तो हूं।
16:56
और उस गहरी नींद का अनुभव करता हूं। तभी सुबह कहता हूं कि इतनी गहरी नींद सोया। जब मन बुद्धि वापस आते हैं।
17:11
अगर उस गहरी नींद में मैं ना रहूं तो यह बताएगा कौन?
17:19
कि मैं इतनी गहरी नींद सोया।
17:24
तो सुशुप्ति में मैं गहरी नींद का अनुभव करता हूं। मैं रहता हूं।
17:34
जब मैं सुशुप्ति में भी रहता हूं तो जागृत और स्वप्न की क्या मिसाल है?
17:45
तब क्या उसमें दिन भर याद करना पड़ेगा मुझे? कि मैं हूं, मैं हूं, मैं हूं। जिसे याद करना पड़े वो मैं नहीं।
17:56
वह कचरा है। जिसे याद करना पड़े वह मैं नहीं वह कचरा है। वो मन का खेला है।
18:13
जिसे याद करना पड़े वो मैं नहीं।
18:22
मैं याद का मोहताज नहीं। भूलने से बर्बाद नहीं।
18:29
मैं याद से खुद को पाने चलूं तो ये एक बहुत बड़ी मूर्खता है।
18:54
लकड़ी को खुद को याद नहीं करना पड़ता।
19:01
अगर डंडा देश में हो तब लकड़ी को याद करना पड़ेगा।
19:08
मैं को खुद को याद नहीं करना पड़ता। जीव देश में हो तब याद करना पड़ेगा।
19:17
मैं देश में कैसी याद किसकी याद?
19:28
और मैं देश में यादों के लिए
19:37
कोई जगह ही नहीं है। ना स्मृति ना विस्मृति।
19:43
ना संयोग ना वियोग।
19:48
कृष्ण बोलते हैं ना गोपियों से हे गोपियों मैं तुम्हारी आत्मा हूं।
19:56
मेरा ना किसी से संयोग है ना वियोग है। ना मिलन है ना बिछड़न है।
20:06
मैं तुम्हारी आत्मा हूं। मैं सर्व की आत्मा हूं। मेरा ना किसी से संयोग है ना वियोग है।
20:16
ना मिलता हूं ना बिछड़ता हूं।
20:30
ना मैं जाना जाता हूं ना मैं नहीं जाना जाता हूं।
20:35
ना मैं समझा जाता हूं ना मैं नहीं समझा जाता हूं। ना मैं अनुभव किया जाता हूं ना मैं नहीं अनुभव किया जाता हूं।
20:46
मुझे आप किसी भी चीज से नहीं पकड़ सकते।
20:49
नेति नेति से नहीं, येति से नहीं, किसी से भी नहीं।
20:56
क्योंकि किसी की सत्ता ही नहीं है। मैं के अतिरिक्त
21:25
मैं हर देह में निश्चिंत हूं। आकाश में भी निश्चिंत हूं।
21:32
पूरे चराचर में मैं निश्चिंत हूं।
21:46
इतना निश्चिंत हूं कि मुझे अपने आप को जानना तक नहीं है, समझना तक नहीं है, अनुभव तक नहीं करना है।
21:59
इतना निश्चिंत हूं। बेफिक्र हूं, मस्त हूं।
22:06
अपने में होना तक नहीं है।
22:36
तो मैं हर जगह निश्चिंत रहता हूं। मुझसे अगर मिलना है, मैं से अगर मिलना है,
22:47
जिससे मिलना नहीं होता, तू निश्चिंत हो जा।
23:08
तो बस मैं के आगे मत जाओ। सब लेबलिंग है।
23:14
मैं को कुछ भी बोले तो उसकी दुनिया आप खुद ही मान रहे हो।
23:21
मैं को बॉडी बोले, माइंड बोले, जो भी बोले हां
24:10
हां जी हम किसी का कोई सवाल किसी सब्जेक्ट पे सत्संग करना है तुरंत और टू द पॉइंट
24:19
इधरउधर की बात नहीं यू कैन टॉक फ्रीली
24:25
है ना बट टू द पॉइंट
24:51
हां प्रणाम जी हां जी बताइए
25:03
काफी दिनों से मैं फॉलो कर रहा हूं हम और सुनता भी हूं जब जब समय मिलता है आपको काफी अच्छा लगता है आपसे सुनने में हम
25:11
तो मेरे में एक दिमाग में एक बात थी हम मैं ना एक गाना सुनता था सुन रहा था पिछले दिनों
25:18
तो वो उस गाने में बोलता है कि मेरी मुश्किलों से बढ़कर मेरा खुदा है तो
25:25
खुदा ये मुश्किलें बनाता क्यों है हम्म ये मुश्किलें हासिल क्यों है हमारे जीवन में अगर
25:33
खुदा है तो हां जी खुदा मुश्किलें बनाई है तो ये मुश्किल है हमारे जीवन में।
25:40
ओके हम बताते हैं क्यों है
25:49
यार देखो कभी-कभी ना जिंदगी में
25:59
खाना खाते-खाते इनको स्टॉप करो।
26:06
जो पूछ ले उनको स्टॉप कर दिया करो।
26:10
खाना खाते-खाते कभी-कभी हमारी जिंदगी में अपनी ही जीभ कट जाती है।
26:20
है ना? क्या आप ये चाहते हो? कोई भी चाहता है कि अपनी जीभ कटे।
26:29
अचानक से आ है ना? तो बस उससे ज्यादा कुछ भी नहीं है।
26:36
उतना तो चलता है। है ना? यह मुश्किलें, यह तकलीफें, ये छोटे-छोटे दुख कभी कबभार जीभ
26:45
कटती है। अच्छा है। नॉट बैड।
26:53
अब वो कचरा बातें नहीं बोलूंगा। मैं मुश्किलों का सामना करूं और ऐसा मुश्किल को मुश्किल समझना ही मुश्किल है। वो बकवास
27:00
की बातें हैं। अच्छा है। है ना? एक न्यू टेस्ट है लाइफ का। मुश्किलें दुख तकलीफ है। बहुत सुंदर है।
27:18
दुख दर्द। अच्छा है ना?
27:56
मनुष्य की जिंदगी की मुश्किलें क्या है?
27:59
देखो थोड़ा सा गौर से देखो।
28:05
क्या होगा? थोड़ा सोचो। देखो जैसे आप एक लाइक ए खेत है। है ना?
28:16
उसमें पानी भरा हुआ है। उसमें खरबों जीवाणु है, कीटाणु है। ठीक।
28:25
अब उस खेत में एक एकड़ के खेत में आप देखते हो तो उन जीवाणुओं और कीटाणुओं की भी कुछ
28:33
मुसीबतें होंगी ना। रोज पैदा हो रहे हैं, मर रहे हैं।
28:40
और उनके लिए आप देवता के तुल्य हो। राइट?
28:47
तो उनकी क्या मुसीबतें होंगी? देखो थोड़ा सोचो।
28:54
और एक एकड़ में खरबों रहते हैं वह।
29:01
तो आप ऐसा देखते हो तो क्या लगता है?
29:09
अरे जल्दी बोलो। आपको तो कुछ नहीं लगता ना।
29:18
लेकिन उनकी भी मुसीबतें होंगी ना। एक दिन में जीना है, मरना है, एक घंटे में जीना है, मरना है।
29:25
ठीक?
29:27
ऐसी देवता देखते हैं पृथ्वी में तो उनके लिए वो एक एकड़ का खेत है। पृथ्वी
29:35
सेम यहां भी ये हम सब 700 करोड़ ये सब रहते हैं। वैसे ही कितने 100 करोड़ हैं जो भी हैं।
29:46
अब देवता की दृष्टि से देखो। अपनी दृष्टि से मत देखो। मनुष्य की दृष्टि से आप मत देखो। देवता की दृष्टि से देखो। अपनी तकलीफों को।
29:57
मनुष्य की तकलीफों को। मनुष्य दिख रहा है क्या कहीं पे भी? नहीं।
30:04
ठीक। अब आकाश की दृष्टि से देखो देवताओं की तकलीफों को।
30:13
बड़े-बड़े पावरफुल देवता हैं और है तो आकाश में ही ना स्पेस में ही
30:24
देखो तो क्या दिखता है दिखते हैं कहीं देवता नहीं
30:33
अब आकाश की नजर से आपने अभी देखा
30:40
अब एक बात बताना मेरे को सबने देखा अभी आकाश की नजर से
30:49
कैसे देख लिया आकाश की नजर से आकाश तो इतना विराट है
30:59
कैसे देख लिए और अभी आप देखे
31:10
कैसे देख लिया आकाश की नजर से
31:20
आकाश को जानने वाले आप खुद ठीक आकाश के स्वामी आप जो आकाश को भी
31:30
अवकाश देता है जो स्पेस को भी स्पेस देता है जो आकाश की नजर से भी देख सकता है
31:39
जो देवता की नजर से भी देख सकता है। जो मनुष्य की नजर से भी देख सकता है। जो छोटे-छोटे जीवाणु कीटाणु की नजर से भी देख
31:47
सकता है। जो हर नजर से देख सकता है। नहीं हर नजर से देख ही रहा है।
31:56
जो हर तरफ से देख ही रहा है। देखने वाला मैं आत्मा भगवान
32:03
जब आप हर जगह से देखते हो सबकी नजर से देखते हो तो क्या सही और क्या
32:14
गलत बचता है बताओ पर्सनल नजर से मत देखो आप पर्सनल नजर से
32:22
आप अपनी देखते हो ना तो आपके व्यक्तित्व के लिए जिंदगी में कुछ सही है कुछ गलत सबकी नजर से देखो।
32:33
आपके शत्रु की नजर से देखो।
32:36
सिंह की नजर से देखो। सुबह-सुबह किसी सिंह ने किसी मनुष्य को खा लिया।
32:44
आपके लिए वो गलत है ना मनुष्य के लिए। सिंह के लिए तो ब्रेकफास्ट है ना।
32:58
मृत्यु की नजर से देखो हर मनुष्य मृत्यु के मुख में समा जाता है। काल के मुख में
33:06
तो मृत्यु की नजर से तो यमराज का पेट भर रहा है। मृत्यु के देवता का पेट भर रहा है।
33:18
आप अपनी ही नजर से क्यों जीते हो? पर्सनल नजरों से मत जिया करो।
33:27
तो मृत्यु से बड़ी तो मुश्किल कुछ नहीं है ना।
33:34
उससे बड़ी कोई है तकलीफ, मुश्किल तो देखो ना मृत्यु की नजर से।
33:45
तो क्या गलत है मृत्यु? अरे बोलो। नहीं है।
33:53
राइट?
34:01
तो ये जो सही गलत के दायरे हैं और ये मुश्किलें, तकलीफें
34:10
यह सब हमारी धारणाएं हैं और मान्यताएं हैं।
34:17
सर्व की नजर से देखो ना।
34:22
सर्व की नजर से सब कुछ जादू है। अन हुंदड़ा नजर आइंदा है। बुल्ले शाह बोलते हैं ना अन
34:31
हुंदड़ा नजर आइंदा है।
34:37
अन होने से भी एक सुंदर वर्ड है ये।
34:46
देखो ना सर्व की नजर से देखो। तो सबकी नजर से देखो। कितना सुंदर है यार।
34:56
आपके जो पैसे लूट लिया कोई चोर उसकी नजर से देखो। हो सकता है उसके घर में गरीबी
35:04
हो, कुछ तकलीफ हो या कोई धनवान तो चोरी करता नहीं है।
35:11
तो जो भी है
35:19
तो जब आप सब की नजर से देखते हो तभी आप देखते हो।
35:28
उसके पहले तक आप अंधे हो।
35:34
जब सर्व की नजर से देखते हो तब त्रिकालज्ञ हो
35:47
तब तीसरी आंख आपकी खुली जब आपने सर्व की नजर से देखा
35:57
और आपके लिए सब सुंदर हो गया अद्भुत बहुत अलौकिक हो गया। सही गल सही और गलत समाप्त हो गया।
36:17
आप केवल अपनी नजर से पर्सनल नजरों से देख के यह गलत हो रहा है, यह सही हो रहा है, वह अंदाजा मार रहे हो।
36:51
तो सबकी नजर से देखने में सबकी नजर नजर से देखने में दृश्य समाप्त हो जाता है।
37:02
देखने वाला ही रह जाता है।
37:07
देखने वाला ही देखने वाला है।
37:14
क्योंकि अब सामने भी देखने वाला है और इधर से भी देखने वाला है और सामने से भी सर्वत्र देखने वाला है।
37:25
सामने भी साक्षी है और इधर भी साक्षी है।
37:29
तो आप साक्षी के ही साक्षी हो। किसी और के साक्षी नहीं हो।
37:38
साक्षी के ही साक्षी हो। हां। आपको लगता है आप देह के साक्षी हो।
37:44
विचारों के साक्षी हो। दुनिया के साक्षी हो। नो। साक्षी के साक्षी हो।
37:56
अब आप एक विचार की नजर से देखो ना। आप चाहते हो विचार ना आए। अब विचार की नजर से देखो।
38:06
आप अपने एक आ किसी भाव की नजर से देखो। आप चाहते हो आप भावातीत हो जाओ। रॉन्ग हो आप।
38:16
भाव की नजर से देखो ना। भले वह एक घंटे का भाव है। एक दिन का भाव है।
38:34
आप पत्थरों की नजर से देखो जो देख भी नहीं पाते।
38:40
वो भी एक नजर है जो नजर देख भी नहीं पाती।
38:49
कितना अलौकिक सुंदर है सब कुछ यार
38:59
तो बताओ क्या दिखता है सबकी नजरों से जब आप देखते हो तो दिखता क्या है क्या लगता क्या है
39:09
सब सही लगता है आप बताओ क्या लगता है अरे बोलना है बोलो बोलो
39:18
सब एक रस हम एक सब एक रस यस आप बताओ
39:27
एक रूप पूरा पूरा एकाकार
39:35
सुंदर सबसे परफेक्ट देखने वाला ही दिख रहा है ये भी परफेक्ट
39:43
अब देखने वाला ही दिख नहीं रहा है देखने वाला वाला ही देख रहा है।
39:52
और दिख रहा है वाला कुछ नहीं है। है ना?
39:56
देखने वाला ही देख रहा है। ये फाइनल लाइन है।
40:04
हां।
40:33
अब आप कामदेव की नजर से देखो क्या काम वासना बुरी है?
40:40
बताओ।
40:43
अरे बोलो नहीं ना ठीक
40:55
हम केवल अपने ही पैटर्न से देखते हैं।
41:01
एक ही पैटर्न है हमारा पुराना थर्ड क्लास।
41:08
हर मनुष्य की एक डिमांड है। यह यह होना चाहिए। मैक्सिमम डिमांड इनलाइटनमेंट है। अरे क्या है? आप एक ही नजर से देख रहे हो।
41:18
जिंदगी अनंत रंग है। अनंत डायमेंशन है।
41:24
सब सबकी तरफ से देखो ना आप। प्रकृति की तरफ से देखो।
41:42
सबकी नजर से देखने पर
41:49
आप निश्चिंत हो जाते हो। जो भी हो रहा है
41:56
आपको ऐसा लगेगा कि सब सुंदर है। सब दिव्य है। अच्छा बुरा सही गलत जैसा कुछ है ही नहीं।
42:06
तब आप ट्यून कर पाते हो इस अस्तित्व से।
42:11
क्योंकि अब आप अस्तित्व की आंख से देख रहे हो। सब आंखों को मिला दो। अब हो गई अस्तित्व की आंख।
42:21
एक आंख अब अस्तित्व की आंख से आप देख रहे हो
42:29
अब
42:46
बस एक जादू है, मैजिक है।
42:50
प्रेम है, रस है, सेलिब्रेशन है, नॉनस्टॉप सेलिब्रेशन है। और क्या करोगे अब?
43:37
अब आप कृष्ण की नजर से देखते हो तो आपको लगता है कि हां ना मेरा कभी संयोग है ना
43:46
वियोग है मेरे मेरा ना मिलन है ना कोई बिछड़न है ना
43:55
मैं किसी से मिलता हूं ना किसी से बिछड़ता हूं ठीक है यह आत्म ज्ञानी की दृष्टि है।
44:05
अब गोपियों की नजर से देखो राधा की नजर से देखो
44:12
जहां मिलना भी है बिछड़ना भी है विरह भी है, मिलन भी है।
44:23
वह कोई छोटी बात नहीं हो गई। और कृष्ण की कोई बड़ी बात नहीं हो गई। आप बस एक नजर से देख रहे हो।
44:32
आप किसी अज्ञानी की नजर से भी देखो। जो केवल विषयों में जी रहा है।
44:39
उसका भी तो जीवन है। उसका भी सम्मान है।
44:44
और हर विषय का वो दुख भोगता है। वो बरोबर अपनी कीमत चुकाता है।
44:52
फ्री फंड में वो विषय भोग नहीं कर रहा है।
44:56
हर दुख की, हर विषय भोग की वो कीमत चुका रहा है।
45:03
उसकी नजर से देखो जिंदगी को जो देख ही नहीं पाता इस सत्य को जिसको आप लोग सुन रहे हो। कितने लोग हैं धरती में अभी उनकी
45:13
नजर से देखो तो बहुत प्यार आएगा उन पे जिसको आप समझा भी नहीं सकते कि यह क्या है
45:22
ये स्वयं और जो भी है तो आपको सिर्फ प्यार आएगा प्रेम आएगा। आप
45:30
थक जाओगे मालूम एक शख्स को नहीं समझा पाओगे मैं लिख के देता हूं
45:37
नहीं समझा सकते आप
45:42
सत्य होते हुए भी आप उसको नहीं समझा सकते
45:53
अधिकतर बार तो यह होता है कि वह समझना ही नहीं चाहता बट वो वो उसकी जो नजर है उससे भी तो देखो
46:03
ना यार कितना प्यार आएगा उस पे पूरी मनुष्यता पे
46:15
वृक्षों के पास इंद्रियां ही नहीं है सुनने के लिए समझने के लिए
46:24
पत्थरों के पास नहीं है उन उनको को भी महसूस करके देखो। उनकी जगह
46:30
रह के देखो जिंदगी को। खरबों साल हजारों साल एक पत्थर पड़ा रहता है। फिर धीरे-धीरे
46:39
टूटता है। फिर रेत होता है। फिर रेत पानी में बहते बहते बहते बहते वो खोता है।
46:48
पता नहीं हजारों लाखों साल हो जाते हैं।
47:01
उसकी जिंदगी कहां है, क्या है? उसको पता ही नहीं है।
47:07
और आपको एक-एक पल मिल रहा है जीने के लिए।
47:11
आप एक्सप्लेन कर पा रहे हो, सुन पा रहे हो, जी पा रहे हो।
47:32
सबकी नजर से देखोगे ना तो बस बस प्यार ही प्यार है फिर बहुत
47:40
प्यार आएगा आपको सब पे आप फेंक दोगे अपना सही गलत यह वो
47:51
क्योंकि यह गलत से ऊपर सही है और सही से ऊपर का सही है। यह सत्य है। सत्य से परे का सत्य जहां सत्य भी नहीं है। ऐसा कुछ सत्य है।
48:02
ये
48:39
कभी देखे हो अपने पिता की नजर से खुद को
48:46
अपनी पत्नी पति की नजर से खुद को, बच्चों की नजर से खुद को,
48:53
अपनी मां की नजर से खुद को,
49:08
अगर हम केवल एक छोटे से परिवार की नजर से देखना सीख लें। सबकी नजर से
49:17
तो परिवार के सारे झगड़े समाप्त हो जाए।
49:23
सारे और यह पृथ्वी एक बड़ा परिवार है।
49:32
हमको तो सबकी नजर से देखना है।
49:36
केवल मनुष्य ही नहीं हर जीव जंतु धरती आकाश सबका सम्मान और सबकी नजर से देखना
49:55
अद्भुत है यार।
50:55
तो पहली बार आप को पता चला कि आप सबकी आंखों से देख सकते हो।
51:04
और आप देखते हो आप केवल अपनी ही आंख से नहीं देखते।
51:14
आप सबकी आंखों से देखते हो। सबके कानों से सुनते हो।
51:26
सबके होने में होते हो।
51:38
अब उनका पता नहीं क्या सवाल था। मुश्किल या तकलीफ ऐसा कुछ था। वो तो पता नहीं कहां गया। है ना? तकलीफ और मुश्किलें।
52:09
तो जब आप एक ब्रह्मांड की नजर से देखते हो ना तो आपको पृथ्वी ही नहीं दिखाई देती।
52:22
और पृथ्वी में क्या हो रहा है वह तो बात छोड़ ही दो।
52:29
तो अपनी दृष्टि को विराट करो और आपकी दृष्टि विराट है।
52:37
उसमें कोई साधना नहीं करनी आपको। सहज में ही देख रहे हो ना?
53:11
हा राजीश और अंतर्यामी हमेशा गाइड करता है कब कैसा
53:23
व्यवहार करना है। किससे क्या वह बताता है हर समय
53:32
बेवजह की तकलीफें मत खोजो अपने जीवन में जो है ही नहीं
53:43
कभी दुख की नजर से देखे हो
53:52
जिस दुख को कोई नहीं चाहता उसकी नजर से कभी देखे हो
53:59
प्यार हो जाएगा दुख से कोई नहीं चाहता जिसको यार
54:10
तुम्हारे जीवन में वो फीलिंग कभी आई होगी जब तुमको किसी ने नहीं चाहा ऐसा कभी पल
54:16
आया होगा कितना बुरा लगता है दुख को तो कोई चाहने वाला नहीं है बुद्ध
54:23
पुरुष तक नहीं चाहते। साला सच्चिदानंद सच्चिदानंद करते रहते हैं।
54:34
देखे हो कभी दुख की नजर से यार बार-बार गले से लगाओगे दुख को मालूम
54:45
तरसोगे दुख के लिए। इतना प्यार आएगा अपने दुखों पर जैसे कुंती को आता था।
55:18
तुम हमेशा बसते हो। तो दुख मन में होता है। तुमको नहीं होता है। तुम तक दुख पहुंच नहीं पाता है। सोचे हो अभी दुख को कैसा
55:27
लगा होगा ये सब सुन के कि दुख तुमको छू भी नहीं पाता है।
55:38
देखो ना जिंदगी को। एक दुख की नजर से भी देखो।
55:47
देखो तो जिंदगी को कितने घस हैं लाइफ में।
56:19
सुख की नजर से भी देखो, दुख की नजर से भी देखो। मतलब अद्भुत है यह जीवन। अलौकिक है।
56:35
अब कभी भी जिंदगी में दुख को स्वीकार करना पड़ेगा।
56:46
बस दृष्टि बदलती है ना बात खत्म हो जाती है।
57:00
नजर बदली नजारे बदले बस
57:11
भयंकर प्रेम आएगा यानी दुख दुख पे इतना प्रेम आएगा आप सोच नहीं सकते
57:18
जिससे आप जिंदगी भर बचे हो सोचो हां
57:52
कभी कुछ रोज ले जा के कभी क्या आज ही फ्लावर्स
57:59
ले जाकर किसी भिखारी को देकर आना कुछ पैसे भी देकर आना उसकी मदद होगी
58:06
उसको वो सम्मान देकर देखना मेरे पास फूल लाते हो कोई मतलब का नहीं है
58:13
वह क्या करोगे मेरे को फ्लावर्स देके
58:26
मैं ज्ञान देता हूं। कुछ आपकी जिंदगी को जगा दिया। कुछ कर दिया। बस इसलिए देते हो ना मेरे को फ्लावर।
58:34
अरे यार जिसने आपकी लाइफ में कुछ नहीं किया उसको तो कुछ करके देखो ना।
58:55
भिखारी की नजर से देखो बेचारा उसका यह जन्म ऑलमोस्ट खत्म है।
59:16
और कुछ नहीं देना है उसके साथ बैठ के।
59:20
उसका हाथ में हाथ ले थोड़ा देर बैठ के देखना एक बार परमात्मा वहां भी रहता है।
59:33
महसूस होगा। छोड़ नहीं दिया है प्रभु ने उस भिखारी को।
1:00:30
ओम
1:01:27
बहुत ही एक लाइफ एक अलग ही
1:01:34
अलग ही है कुछ जैसा आप सोचते समझते हो वो
1:01:40
वो बहुत छोटा सा हिस्सा जिंदगी का हां
1:02:20
आप क्या करते हो पृथ्वी में दो चार बुद्ध पुरुष रहते हैं कुछ पुराने रहते हैं उन्हीं की नजर से आप देखना चाहते हो क्या
1:02:29
सही क्या गलत और जो करोड़ों लोग जिनको बोध तो नहीं है।
1:02:40
उनकी क्या गलती है उसमें? नहीं है। नहीं है। जिनको है उन उन्होंने भी क्या तीस मार लिया। हो गया। हो गया।
1:02:52
तो जो इतने करोड़ों लोग हैं उनकी नजरों से देखो तो जीवन को यार।
1:03:42
ये क्या है बादल का
1:03:59
आकाश की नजर से देखोगे तो आकाश हर पृथ्वी को हर इंसान को हर जीव को कितना स्पेस देता है।
1:04:10
तुम उतना स्पेस अपने परिवार वालों को नहीं दे पाते।
1:04:17
अपने प्रेमी को नहीं दे पाते। उसको भी अपनी प्रॉपर्टी समझते हो।
1:04:22
खरीद लिए हो जैसे अपने पति को, अपने पत्नी को स्पेस प्राइवेसी तक नहीं दे सकते।
1:04:33
आकाश का हृदय देखो यार। हर किसी को कितने दिल से स्पेस देता है सम्मान पूर्वक
1:04:44
और यह भी नहीं कहता कि मैं स्पेस दे रहा हूं। इतना भी अहंकार नहीं है।
1:04:52
इतना भी नहीं है भाई।
1:04:57
इवन उसने पृथ्वी को स्पेस दिया, अग्नि देव को दिया, जल को दिया, वायु को दिया।
1:05:14
कितना विशाल हृदय है।
1:06:00
और अब अपनी पर्सनल व्यक्तिगत नजर से देखो। अब देख नहीं पाओगे।
1:06:11
अब अपनी व्यक्तिगत नजर से आप नहीं देख सकते। अब बदल गई बात।
1:06:24
अब सबकी नजरें आपकी है और आपकी नजर सबकी है।
1:07:02
अब कुछ ओपन हो गया दृष्टि में कुछ खुल गया ओपन हो गया।
1:07:14
यह सब सत्संग की महिमा है। बहुत महिमा है सत्संग की।
1:08:05
बारिश शुरू हो गई भाई।
1:08:23
आंखें तेरी इस कदर
1:08:29
ढूंढे मुझे बेखबर
1:08:38
यह तू है या कोई और है
1:08:46
मेरी तरह
1:08:56
कैसे हुआ कैसे हुआ
1:09:03
तू इतना जरूरी कैसे हुआ
1:09:10
हम हम
1:09:18
हम हम
1:09:33
तो देखो भैया हमको भजन और ये वो आता नहीं है। हम बॉलीवुड के गाने गाते हैं। ठीक है। हां।
1:09:42
और हम कोई ब्रह्मचारी गुरु नहीं है। हम हॉट हॉट मास्टर हैं। हॉट गुरु। ओके। हम
1:09:50
क्लियर कर दे रहे हैं पहले से। धोखे में मत रहना कि कोई ब्रह्मचारी हैं हम। हां जी।
1:10:02
वर्ल्ड फैशन हो गया वो।
1:10:13
क्यों शैलेश जी सही बोलते हैं कि नहीं हम?
1:10:47
हां जी
1:11:01
मैं बारिश की बोली समझता नहीं था।
1:11:09
हम हम यस एनीबडी कोई है? अरे कहां हो? इधर आओ यार।
1:11:19
यहां तो पूरी दुनिया पलट गई है। आओ तो बैठो।
1:11:24
ना
1:11:36
हां जी
1:12:04
तो आप कुछ कहना चाहेंगे? ये तो आपका डेली का हो गया है।
1:12:23
हमारा तो जी गाने को करता है।
1:12:30
हमारा रबाब तो हमारे साथ है।
1:12:40
वो वो बड़ा मेरे को बहुत सुंदर लगता है।
1:12:54
क्या कहते हैं ये कुमुदनी के फूल तुमसे नरौदा
1:13:06
क्या कहते हैं यह कुमुदनी के फूल तुमसे ऐसा कुछ नहीं मेरे मुर्शिद
1:13:16
जो मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा है मेरे मुर्शिद कि ये क्या कह रहे हैं।
1:13:31
ये कह रहे हैं कि हम नरौौंदा से प्यार करते हैं।
1:13:46
मतलब आप आप इनकी भाषाएं नहीं समझ सकते ना आकाश की धरती की
1:13:53
ये कह रहे हैं आई लव यू हां
1:14:01
ये सितारे ये आकाश ये धरती ये सारे वृक्ष सारे फ्लावर्स
1:14:10
कह रहे हैं कि हम आपको बहुत चाहते हैं।
1:14:17
आप नहीं सुन सकते यह और बात है। बट ऐसा है।
1:14:27
आपको प्रकृति से प्रेम है। प्रकृति को आपसे बहुत प्रेम है।
1:14:35
प्रेम परस्पर होता है। हमेशा हर दिशा से बहता है।
1:14:43
सर्वत्र
1:14:58
अरे तुम लोगों को आज यहां होना था। पागलों हां
1:15:06
कितने बार पता नहीं आज गले लगाता मैं तुम लोग को सोच नहीं सकते
1:15:12
थक जाते भाग जाते
1:15:51
तो जब आप सबकी नजर से देखते हो तो शांति कभी भी आपको छोड़कर नहीं जाती।
1:16:01
प्रेम कभी भी आपको छोड़ के नहीं जाता। परमात्मा कभी भी आपको छोड़ के नहीं जाता।
1:16:12
क्योंकि तुमने देखना सीख लिया परमात्मा को, देखने वाले को।
1:16:40
तुमने सुनना सीख लिया जब सबके कानों से सुनते हो।
1:16:50
शोर में खामोशी है। कितने प्यारे गाने हैं यार।
1:16:59
शोर में खामोशी है। थोड़ी सी बेहोशी है।
1:17:07
तुमसे ही तुमसे ही
1:17:16
शोर में खामोशी है। आ
1:17:34
हम
1:18:48
इवन लाश की भी नजरें होती है। याद रखना कभी कोई मर जाता है ना
1:18:56
देखना गौर से डेड बॉडी लाश
1:19:05
की नजरें तो आपको एक ही चीज मिलेगी उस लाश में
1:19:12
शांति ऐसा लगेगा कि शांति देख रही है बस
1:19:18
वो शांत हो गई उसकी देह
1:19:30
कितनी खूबसूरत है मौत भी यार जिंदगी भर आप शांत होना चाहते हो नहीं हो
1:19:39
पाते हो तो मौत कर देती जिंदगी भर आप कई चीजों को भूलना चाहते हो
1:19:48
नहीं भूल पाते हो तो मृत्यु भुला देती है सब मिटा देती है।
1:19:55
पूरा आपका जन्म ही पूरा 80 100 साल मिटा देती है।
1:20:04
कितनी कृपालु है मृत्यु भी।
1:20:11
तो हर चीज तो यार यहां पता नहीं क्या है मेरे को। क्या बताऊं मैं? मैं पागल हो जाता हूं यह बताते
1:20:18
बताते। साला तंग कर दियो तुम लोग
1:20:27
रोज नए ढंग से बताना
1:20:38
प्रेम है तुम लोगों से तो बोलना रहता है मेरे को
1:20:54
यस एनीबडी कुछ बताओ ना यार कुछ बोलो ऐसे खामोश मत रहो अब अब खामोशी
1:21:02
नहीं बाबा थोड़ा सा कुछ बोलो तो फिर वाणी को विश्राम
1:21:08
दें हम भी चले फिर
1:21:34
आप लोग भी कुछ बताओ गोविंद जी
1:21:41
अरे बोलो यार
1:22:04
मैं तो खूब जीता हूं जिंदगी को हर किसी की नजर से हर किसी की जिंदगी से जीता हूं मैं।
1:22:15
हां। तुम्हारे अंदर से भी जीता हूं मैं।
1:22:17
तुम्हारे अंदर से फिर प्रश्न भी पूछता हूं मैं और इधर से चिल्लाता भी हूं मैं। खूब जीता हूं मैं।
1:22:55
हम हम
1:23:25
तो बचपन में मेरे को ओशों से बहुत प्रेम था। तो मैं यह पूरे गांव में अकेला ही पागल कहलाता था।
1:23:35
सबके फादर्स मॉम कहते थे कि तू कुछ भी कर ले जिंदगी में इसके साथ मत घूमना। है ना?
1:23:46
और तो मैंने कुछ मित्र बना लिए। ओशो प्रेमी
1:23:54
बना लिए। एक सर्कल बना लिया 8-10 लोगों का।
1:23:58
चार पांच मेन थे और कुछ और थे 810 हो गए थे फिर कि यार तू भी सुन तू भी सुन तो उनको भी
1:24:05
बात जम गई थी ओशो की तो एक अपना सर्कल होता है तो फिर साथ में
1:24:13
डायनेमिक करने जाते थे जंगल और कुंडलिनी मिस्ट्री क्रॉस करते थे जंगल में
1:24:23
जंगल में ही ज्यादा पड़े रहते थे साइलेंस या जो भी है
1:24:32
तो मैं उनसे भी जीता था ओशो को है ना
1:24:40
ओशो को केवल अपनी बॉडी से ही नहीं मैं उनकी बॉडी से भी जीता था हां
1:24:47
उनको लगता था कि ओशो से उनको भी अब प्रेम होने लग गया है ऐसा वैसा
1:24:58
और उनको बोलता भी था मैं तुम लोग अशोक के प्रेम में नहीं हो मैं ही हूं ओशो के
1:25:07
प्रेम में इसी बॉडी से नहीं जी रहा हूं अब मैं ओशो को तुम लोग की बॉडी से भी जी रहा
1:25:13
हूं आशीष को भी बोलता था वो तो जब ये लोग ज्यादा दूर हो जाते थे मेरे
1:25:21
से एक साल दो साल तो ओशो से प्रेम इनका कम हो जाता था। उनको मैं बोलता था तुम लोग नहीं जी रहे हो। मैं ही जी रहा हूं करके।
1:25:32
हां बहुत अलौकिक है जिंदगी। बहुत
1:25:49
कई लोग एग्री नहीं भी हुए ओशो से। मैं तो कई लोगों को लाने की कोशिश किया। ऐसा होता है ना?
1:25:56
कि यार तू भी सुन ले ओ शो तू भी कर ले कैसेट बांट दिए ऐसा बुक्स बांट दिए कुछ लोग हो गए बहुत है उसमें भी अब कुछ लोग
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गायब हो गए
1:26:35
तो बहुत अद्भुत है जीवन रहस्य पर रहस्य रहस्य पर रहस्य सुंदरता पर
1:26:43
सुंदरता बस हर चीज का एक सम्मान होना चाहिए। एक
1:26:51
रिस्पेक्ट अद्भुत है। सब कुछ अद्भुत
1:27:34
तो सबको बहुत सारा प्यार।
1:27:39
बहुत बहुत बहुत सारा
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प्रेम प्रणाम
1:28:00
आंखों में आंखें तेरी