Prabhu Shree
0:00
ओम
0:20
तुम अभी अभी आ रहे थे तो आपने बोला कि बाइक से आ रहे थे ऐसा बोला
0:29
से आ रहे थे स्कूटी से स्कूटी से हम और आपने एक पॉइंट बोला हम
0:38
कि दो कभी जो भी प्रॉब्लम है वो दो की है। हम
0:45
दो मानते हैं तब तक प्रॉब्लम हो। दूसरा वाला पॉइंट चला था।
0:54
एक वाला हां कि दूसरे से आप कभी भी एग्री हो ही नहीं सकते।
1:03
हो ही नहीं सकते। चाहे वो दूसरा परमात्मा ही क्यों ना हो। क्यों ना हो। राइट?
1:07
चाहे दूसरा आपका सद्गुरु ही क्यों ना हो
1:14
उससे आप कभी भी एग्री नहीं हो सकते और अपने से एग्री होना नहीं है।
1:20
हां है ना ये आनंद है। आत्मंद है।
1:31
अपने से एग्री होना नहीं है। और किसी भी दूसरे से आप एग्री हो ही नहीं सकते। चाहे वह कोई भी हो।
1:52
हमको लगता है हमें हो जाएंगे। जब तक वो भगवान दूसरा भगवान दूसरा है कल्पना का है।
2:02
कल्पना का है। आप नहीं हो सकते। नहीं हो सकते एग्री।
2:09
काल्पनिक भगवान नहीं आत्मा। भगवान नहीं आत्मा भगवान मैं आत्मा भगवान।
2:36
ये छोटे-छोटे वर्ड्स सी ये एक ये छोटे-छोटे वर्ड्स सी ये एक-एक लाइन ना
2:42
बताऊं क्या मैं मतलब बताऊं क्या मैं हां
2:50
और हम हमेशा किसी दूसरे दूसरे से और हम हमेशा किसी दूसरे से एग्री होना चाहते हैं। किसी परमात्मा से, किसी किसी
2:58
अनंत से, किसी अस्तित्व से अनंत से भी आप एग्री नहीं हो सकते। चाहे वो अनंत से भी आप एग्री नहीं हो सकते। चाहे
3:06
वो कितना ही बड़ा हो। ये सब अदर ज्ञात से भी नहीं हो सकते। ये सब अदरनेस है। गुरु कितना ही अद्भुत क्यों ना हो।
3:15
गुरु कितना ही अद्भुत क्यों ना हो उससे भी नहीं हो सकते आप एग्री।
3:22
और अपने से एग्री होना नहीं है। और अपने से एग्री होना नहीं है।
3:30
एग्रीड है वहां पे कमिटमेंट एग्रीड है वहां पे कमिटमेंट है।
3:36
इसलिए मैं इसलिए मैं जो बोलता हूं ना मैं जो बोलता हूं ना मैं
3:46
आपकी बात मैं आपकी बात बोल रहा हूं।
3:52
मैं मैं की बात बोल रहा हूं। मैं की बात बोल रहा हूं। यानी आप
4:08
इसलिए आप मेरी हर बात पे यस कहते हो क्योंकि यह आप ही की बात है।
4:15
किसी और की बात नहीं करता मैं।
4:19
मैं की बात आपकी बात है
4:48
और बाकी सब स्वप्नवत है और कुछ नहीं है। है ना?
5:02
आप सोचते हो सपने को तोड़ने के लिए कुछ करेंगे तो आप भ्रम में हो। करना दूसरा स्वप्न है।
5:17
स्वप्न के सिंह को मारने के लिए कहां से बंदूक लाओगे?
5:28
वो सच लग रहा है तभी तो बंदूक लाओगे ना।
5:33
तो आपको जो स्वप्न सच लग रहा है मैं के अतिरिक्त अगर आपको कुछ भी लग रहा है तो वह
5:41
स्वप्न लोक है और आपको स्वप्न ही सच लग रहा है।
5:48
उसके लिए कुछ करना नहीं है। नहीं तो आप दूसरा सपना शुरू कर दोगे।
6:00
अरे दो
6:17
तो वो थे ना जैन मास्टर थे बोकोजू बोकोजू मॉर्निंग में अपने सारे शिष्यों को
6:25
बुलाया बोले दुविधा है समस्या है। सारे शिष्य बोले आपको क्या समस्या है?
6:33
तो गोकु बोले मैं रात को मैंने एक स्वप्न देखा।
6:41
मैंने रात को एक स्वप्न देखा। स्वप्न में मैंने तितली को देखा।
6:49
और स्वप्न में मैंने यह देखा कि तितली स्वप्न देख रही है कि मैं बोकुजू बन गई हूं।
6:59
और इधर वोकुजू स्वप्न देख रहा है कि वह तितली बन गया है।
7:08
और तितली स्वप्न देख रही है कि मैं बोकुजू बन गई हूं। अब बोकुजू बोलते हैं
7:16
सारे शिष्यों को कि भाई अब मैं करूं तो करूं क्या? तितली सच है कि मैं सच हूं बताओ।
7:31
तो एक शिष्य उसमें बोलता है गुरुदेव आप एक काम करो
7:41
पानी के छींटे अपनी आंखों में डाल लो और कुछ नहीं।
7:47
दूसरा शिष्य बोलता है बस आपके लिए चाय बना के लाते हैं। आप चाय पी लो और कुछ नहीं।
7:59
उसके लिए कोई ऐसा नहीं बताता कोई ज्ञान नहीं झाड़ता कि कोई साधना कोई ध्यान
8:06
भोगू जो परीक्षा ले रहे थे तो बस चाय पी लो पानी डाल लो आंख में वहां
8:15
कुछ करने जैसा नहीं आप सोचते हो कुछ करेंगे तो कुछ हो जाएगा।
8:32
नो
9:06
तो जब तक आप दूसरे से किसी भी दूसरे से एग्री होना
9:14
चाहते तब तक आप नहीं हो पाओगे। अभी से समझ लो, सुन लो।
9:23
चाहे वह कोई भी क्यों ना हो।
9:29
किसी भी दूसरे से एग्री हुआ ही नहीं जा सकता।
9:36
और अपने से एग्री होना नहीं है।
9:41
हां अगर परमात्मा राम शिव कृष्ण आपसे भिन्न नहीं है तभी आप एग्री हो सकते हो।
9:52
भिन्न में नहीं हो सकते।
9:57
इन लाइनों को हमेशा संजो के रखना, हमेशा संभाल के रखना। यह बहुत कीमती लाइनें हैं जीवन की।
10:11
चाहे वह सद्गुरु ही क्यों ना हो। जब तक वो आपसे भिन्न है। आप एग्री नहीं होगे। और आपसे भिन्न नहीं है कोई भी चीज।
10:20
सद्गुरु परमात्मा तो आपको एग्री होना नहीं है।
10:27
है ना? आप ही हो हर जगह हर किसी में।
10:54
हां जी और बताओ आप लोग यार
11:01
कुछ बोलो ना ऐसे तो अच्छा लगता है। हेलो
11:14
कुछ बोला करो दो चार लाइनें हमारा भी ब्रेन ओपन होता है ना
11:22
तो बंद पड़ा रहता है
11:40
जनक के सामने भी यही समस्या थी ना राजा जनक के सामने वो सबको बुलाया सब ज्ञानियों
11:47
को कि भाई मैं स्वप्न देखा कि मैं भिखारी हो गया। उस समय मेरी फीलिंग ही भिखारी वाली थी।
11:56
तो वो सच था कि अभी जो राजा मैं हूं यह सच है।
12:07
हां हम
12:14
माइक में बोलो ना उस स्वप्न में वो बहुत दयनीय स्थिति में आ
12:22
जाते हैं। हम और दर बदर भटकते रहते हैं। जैसे तैसे करके
12:31
कुछ कपड़े उनके पास बचते हैं। फिर बहुत मुश्किल से याचक जैसे कहीं खाना बट रहा होता है तो वो खाना लेते हैं।
12:41
अब खाना लेने के लिए उनके पास कटोरा भी नहीं। तो वह ऐसे पत्ते में खाना लेते हैं
12:49
और स्वप्न में ही उनको बहुत भूख लगती है और वो खाने ही वाले रहते हैं और एक बैल आके मार देता है उनको हम
12:58
और सारा खाना गिर जाता है और उसमें रोते रहते हैं कि ये क्या जिंदगी है मेरी
13:05
और अचानक उनका स्वप्न टूटता है तो सामने देखते हैं कि पूरा साम्राज्य मेरा नौकर चाकर और खाना
13:14
तो ये सत्य सत्य है कि यह सब जो हो रहा था वो सत्य है। हां।
13:19
फिर वो सबको बुला के पूछते हैं और जो नहीं जवाब दे पाता उनको कैद कर लेते
13:29
हैं। यहीं रहो खुशी-खुशी पर इसका जवाब दो मेरे को। बड़े ज्ञानी हो। इसका जवाब दो।
13:37
जवाब दो।
13:43
तो यही विडंबना है कि जब हम खोजते हैं ना यह सच है कि यह सच है?
13:52
अरे मैं सच हूं।
13:57
मैं भी तो सच हो सकता हूं ना यार। हमारा ध्यान वहां क्यों नहीं जाता?
14:04
जो सच को साबित कर रहा है कि यह सच है और झूठ को साबित कर रहा है यह झूठ है। वही असली सच होगा ना।
14:12
सच का मालिक है। सच से भी ऊपर है और वो मैं ही हूं।
14:20
तो यह सपना है या वो सपना है? यह सच है या वो सच है? अरे यार मैं सच हूं।
14:31
और मैं के अतिरिक्त फिर सब सपना है और मैं में आप एक्यूरेट हैं तो अंतत कुछ
14:40
है ही नहीं। फिर मैं के अतिरिक्त
15:03
तो इसको बड़े एक्सप्लेन करके बताया जाता है कि ये 100 साल का स्वप्न चल रहा है। आप स्वप्न में ही जिओगे मरोगे
15:12
और फिर ये पूरा ब्रह्मांड ब्रह्मा जी का स्वप्ना है।
15:20
खरबों युग है ना ऐसा बड़ा हाईफाई एक्सप्लेन करके बताया जाता है।
15:29
लेकिन आप सपना ही कब तक बताते रहोगे? सच क्या है वो इंपॉर्टेंट है ना? और वो तो मैं ही हूं।
15:55
हमारा ध्यान कभी जाता ही नहीं कि वो परम सत्य मैं हो सकता हूं। वो परमात्मा अस्तित्व मैं भी हो सकता हूं। ऐसा भी हम
16:04
नहीं सोच पाते। वो कोई और ही होगा। कोई और ही होगा। वो एक गलत सेंस है।
16:13
कभी भी परमात्मा या सत्य कोई और नहीं होता।
16:18
मैं ही होता है। इस बात को हमेशा याद रखना। कोई और केवल मान्यता है। आपका भ्रम है।
16:26
आपका कोई सपना है।
16:36
पर जब सत्य परमात्मा अस्तित्व मैं ही हूं हो सकता है वाली भी बात नहीं है। मैं ही हूं।
16:47
तो फिर इससे कीमती और क्या है यार? मैं से कीमती और क्या है?
17:07
बाकी चीजों का मूल्य भी मेरे मानने के कारण है। बाकी चीज में कोई मूल्य नहीं है।
17:16
मेरे मानने के कारण मैं के मानने के कारण मूल्य है। और मैं तो अमूल्य है।
17:27
और बाकी चीजों की जो वैल्यू आप करते हो चाहे वह स्वप्न लोक ही क्यों ना हो बट वह मैं की मान्यता के कारण
18:09
हां जी है कोई
18:19
काल्पनिक भगवान नहीं आत्मिक भगवान हमेशा याद रखो
19:35
हां जी प्रणाम भगवान
19:47
प्रणाम जी भगवान बस मैं बस यही बताना चाह रहा था कि
19:55
जैसे सत्संग सुनते सुनते कभी अचानक ऐसा होता है एक सत्संग मैंने सुना था कुछ दिन
20:02
पहले तो उसमें आपने बताया था कि दो अकाउंट खोल लो एक जो समझ में आ रहा है ठीक है जो
20:10
नहीं आ रहा है वो भी ठीक है लेकिन आश्चर्य की बात यह है भगवान कि कभी-कभी अचानक से
20:17
या कुछ करते हुए या कुछ भी चीजें सुनते हुए कभी भी कोई पॉइंट अगर रेस होता है तो वो उस वाले अकाउंट से ज्यादा होता है जो
20:26
नासमझ वाला अकाउंट है हम अचानक से सेंस आ जाता है और अचानक से पूरा
20:33
मतलब फील हो जाता है वो चीज हम हम तो उसमें ये है कि वो थोड़ी देर के लिए
20:41
रहता है लेकिन जब तक रहता है वो मतलब बहुत पावरफुल रहता है वो मतलब ऐसा ना तो हम
20:49
जो मैंने जो सत्संग मैंने जो सत्संग मतलब ज्यादा जो समझ में आई है कि सुनने से ज्यादा उसे
20:58
काम अपने आप करते हां देखो असल में
21:07
जो भी आप अनुभव करते हो अच्छे बुरे या सत्संग में भी बाकी चीजें तो छोटी-छोटी हैं। सत्संग में भी आपने कई अनुभव किए।
21:23
आप कितने ही अनुभव कर लो अच्छे बुरे।
21:32
उसका भी मैं कहूं तो कायदे से मूल्य नहीं है।
21:40
मैं कितने ही अनुभव कर लूं बेहतर से बेहतर से बेहतर अनुभव के परे का भी अनुभव कर लूं।
21:52
लेकिन मैं जैसा का तैसा ही रहता हूं।
22:03
हम सोचते हैं ना आज के सत्संग में ब्लास्ट हो गया वो हो गया ये अरे नहीं नहीं नहीं
22:10
अरे मैं जैसा का तैसा ही रहता हूं इसलिए हर अनुभव दो चार दिन दो चार छ महीने के
22:18
बाद गुजर जाता है लेकिन आप जो मैं है वह जैसा का तैसा रहता
22:24
है वो इंपॉर्टेंट है। आप इंपॉर्टेंट हो
22:37
और बाकी अकाउंट वाली बात वो तो वो अपने आप होता ही है ना। कुछ समझ के अकाउंट में,
22:44
कुछ ना समझी के अकाउंट में अपने आप जाता रहता है।
22:50
हम क्या करते हैं जो समझ नहीं आ रहा है उसी को समझना है। तो डिस्टर्ब होता है।
22:57
कई चीजें हैं। अभी भी आपको कई चीजें समझ नहीं आ रही है। वह नासमझी के अकाउंट में अपने आप जा रही है। कई चीजें समझ आ रही है
23:06
वो समझ के अकाउंट में अपने आप जा रही है।
23:12
वो नेचुरल है।
23:22
उसको अपने को करना भी नहीं है कुछ। इसको अकाउंट में भेजो, उसको उस अकाउंट में भेजो। वह अपने आप है ना।
23:41
अब उनकी आवाज नहीं आ रही। वो कुछ बोलना चाह रहा है। म्यूट कर देता है
23:52
मैं कभी-कभी कभी ऐसा भी होता है कि मैं थोड़ा एहसास रहता है लेकिन उसका पता भी
23:59
नहीं क्योंकि क्योंकि सुनो ना दिनेश जी नाम है ना आपका
24:07
हां क्योंकि मैं कोई एहसास नहीं हूं यार।
24:14
हां एहसास भी अदरनेस है। कोई दूसरा है। ज्ञान भी अदरनेस है। प्रेम भी अदरनेस है।
24:24
मैं मैं हूं बस।
24:28
अपने होने का एहसास है। वो अगर जो सुने हो ना वो शुरू में ठीक है वो सब। बट अब नहीं अब मैच्योर होते जा रहे हो।
24:39
इसलिए तो कितना एहसास में रहो। फिर कितना किसी भी पॉइंट में रहो। मैं हमेशा जैसा का तैसा ही रहता हूं।
24:48
वो इंपॉर्टेंट है। आप इंपॉर्टेंट हो।
24:52
मतलब समझे आप इंपॉर्टेंट हो। आपका एहसास इंपॉर्टेंट नहीं है।
24:58
ये बहुत खतरनाक लाइन बोल दिया मैं।
25:03
हां। आप इंपॉर्टेंट हो। आपका ज्ञान इंपॉर्टेंट नहीं है। आप इंपॉर्टेंट हो। तो आपसे प्रेम इंपॉर्टेंट नहीं है।
25:15
यस वो बात ही खत्म हो गई है। तो
25:25
हम क्या कहते हैं? हमको अपना एहसास करना है। अपना एहसास, अपना बोध, अपना ज्ञान। अरे यार आप इंपॉर्टेंट।
25:32
आपका ज्ञान, आपका बोध इंपॉर्टेंट नहीं है। वह सब सेकेंडरी है। वह अदरनेस है।
25:38
इसलिए बोला ना किसी भी दूसरे से आप एग्री हो ही नहीं सकते और अपने से एग्री होना नहीं है।
25:48
खत्म बात। सेलिब्रेट करो।
26:10
प्रणाम जी
26:34
तो हमारी जिंदगी क्या है? इस अकाउंट में डालो, उस अकाउंट में डालो। हमारी सोच ही छोटी है।
26:48
वो सब पुराने हो गए वो सत्संग पुराना माया के उसमें चले जाता है
26:54
माया के अकाउंट में
27:05
अब आरबीआई कौन सा अकाउंट खोलेगा बताओ हां
27:13
वो तो बैंक को परमिशन देता है खोलने की कि तुम खोलो।
27:18
तो भैया आप अपने को पहचानो ना यह क्या करना है अकाउंट अकाउंट इस अकाउंट में उस अकाउंट में
27:43
तो मैं से एग्री होना नहीं है और किसी और से आप एग्री कभी होगे नहीं खत्म बात
27:51
हम तो कभी मैं का एहसास मैं की याद
28:03
में मत जाना आप इंपॉर्टेंट हो आपकी याद इंपॉर्टेंट नहीं है यस
28:12
ये ये पॉइंट निकला देखो आप इंपॉर्टेंट हो आपकी याद इंपॉर्टेंट नहीं खत्म बुद्धि
28:22
हां जी ये सत्संग की महिमा है देखो क्या कैसे कब
28:31
निकलता है ना कोई पारावार नहीं है
28:59
खिलाओ मुरमुरे ही खिलाओ भैया हम तो अब मुरमुरे खाएं हमारा काम हो गया बताओ आप लोग कुछ
29:12
हम हम
29:27
तो जैसे मैं स्वप्न की बात किया ना जैसे बोकुजू कि यह स्वप्न है कि मैं तितली बन गया या
29:36
तितली सपना देख रही है वह बोकुजू बन गई वह स्वप्न है
29:43
जैसे राजा जनक का था कि वह भिखारी सच है कि यह सच है जो अभी मैं राजा हूं।
30:02
वैसे ही आप सोचते हो ना आजकल बड़े ज्ञानी बन गए हो
30:09
यह सब पुराना झूठ था। यह सच है। अरे यह बोले यानी वह झूठ हो जाता है।
30:17
याद रखना अब मेरी जिंदगी में यह सच आ गया, आत्मज्ञान आ गया, यह आ गया, वो यह बोलते ही वो स्वप्न हो जाता है, झूठ हो जाता है।
30:29
हां। और मैं को सच होना नहीं है।
30:33
यस। वो तो सच का भी स्वामी है। उसको क्या सच होना है?
30:41
क्या बोलता हूं यार मैं
30:50
यार इसको भर के देना यार वो चने निकाल देना
30:58
तो ऐसे फेस टू फेस नहीं आ सकते तो अस्तित्व से टॉक कर लिया करो ये बेसिक चीजें हैं एकदम उसमें द्वैत अद्वैत मत
31:07
सोचना है ना उसमें फिर यह मत लगाना कि जो शुरू में चला दूसरे वाले पॉइंट वह हाई
31:15
पीछे है एकदम जो स्टार्ट चल रहा था
31:30
उस स्पीच में तो फिर तो पॉजिटिव भी खत्म हो जाता है। नेगेटिव तो खत्म हो ही जाता है। पॉजिटिव भी खत्म हो जाता है।
31:43
और बेहतर उपाय चाहिए तो अपने से भिन्न कुछ मानो ही मत।
31:51
किसी प्रॉब्लम को भी अपने से अलग मानो ही मत।
32:00
तो सब मेल्ट हो जाता है फिर आप में।
32:14
और एक और उपाय भी बता दे रहा हूं। ये छोटी-छोटी जिंदगी की जो चीजें हैं ना सबसे
32:22
बेस्ट है ओशो को सुना करो। हां वो बेस स्ट्रांग कर देंगे। ये छोटी-छोटी चीजों से ना आपको उठा देंगे।
32:32
बस उनको सुना करो ओशो को वो बहुत राहत देंगे आपको मैं थोड़ा सा एक्सपर्ट नहीं हूं इन मामलों
32:41
में मेरा रोल अलग है ना अब बेसिक के लिए भगवान
32:48
श्री है ओशु हैं यानी उनको सुना करो वो इतनी पॉजिटिविटी डालेंगे
32:55
कि आप नाचने लगोगे गाने लगोगे हंसने लगोगे आपको दुनिया दिखना बंद हो जाएगी
33:02
थोड़ा बस ढंग से सुनो और ओशो के प्रति सारी गलत धारणाएं हटा के सुनो।
33:11
ओके अब आगे बढ़े अपन।
34:00
यस एनीबडी
34:36
हम स्वपन कहां थे यार बता तो कुछ याद करा तो हम मैं ही सच
34:45
मैं ही सच है और सच का भी स्वामी सच का भी स्वामी मैं हूं।
35:10
तो याद रखना मैं सत्य से भी नहीं मिलता।
35:16
सत्य से आप मैं के पास आ सकते हो। मिलता नहीं। मैं से ही मैं मिलता है।
35:26
असत्य से तो खैर बहुत दूर हो जाते हो आप। सत्य से थोड़ा पास आ जाते हो।
35:34
बट सत्य से भी मैं नहीं मिलता भैया। मैं ऐसे ही मैं मिलता हूं।
35:50
यही अंतिम सत्य है।
35:58
क्योंकि सत्य भी अदरनेस है। हम सब मैं के अतिरिक्त सब अदरनेस है।
36:25
हां जी तो इसके बाद अपन हवन करेंगे आज। है ना?
36:41
तैयारी करते हैं थोड़ी देर में।
36:49
आज हमारे आशीष जी आए हैं।
36:57
एक भरत है जो राम से जुदा होना नहीं चाहता। यह मेरे को छोड़ छोड़ के भागता रहता है। कैसा भरत है यह?
37:17
राम ही भरत ही नहीं कुछ भेदा।
37:21
हां राम ही भरत ही नहीं कुछ भेदा।
37:29
कोई भेद है ही नहीं। राम और भरत में।
37:31
इसमें और मेरे हम लोग खूब प्ले करते हैं। लेकिन भेद गौर से देखोगे तो नहीं दिखेगा।
37:59
हां जी। प्रणाम जी
38:07
प्रभु जी पंकज यस पंकज जी कैसे हो बढ़िया बढ़िया
38:15
हम प्रभु जी आप कहते हैं ना जैसे मैसेज भिन्न कुछ भी नहीं तो अभी कुछ दिनों पहले मैं एक
38:22
सत्संग सुन रहा था तो उसमें मतलब कुछ टाइम के लिए ऐसी एक झलक मिली मेरे को आई थिंक 10-15 मिनट हल्का सा ऐसा फील हुआ। फिर वो चला गया।
38:35
हम फिर उसके बाद से फिर दोबारा ट्राई किया फिर तो नहीं हुआ। बस एक ही बार मेरे को ऐसा हल्का सा फील हुआ।
38:51
जिस समय आपको फील हुआ उस समय आपने अपने से अलग की मान्यता छोड़ दी थी।
39:00
हम हां और जब फीलिंग बंद हो गई तो उस समय आपने अलग मान ही लिया अपने से। फिर आप केवल एक प्रयास कर रहे थे।
39:12
वो क्या प्रयास ही रहता था। हां
39:31
तो बहुत सुंदर पॉइंट है कि मैं से भिन्न कुछ भी नहीं है। मैं से अलग कुछ भी नहीं है। है ना?
39:44
लेकिन यह भी कुछ भी को मान के है क्यों?
39:53
कि आपने अपने अतिरिक्त कुछ माना।
39:58
तभी तो आप कहोगे ना कि मैं से भिन्न कुछ भी नहीं।
40:12
मैं से अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। यह भी कुछ भी को मान के कहते हो आप।
40:21
कुछ और है करके ही आप ऐसा कहते हो।
40:28
तो मैं के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं।
40:34
भी कुछ है को मान के कहते हो तो इसका बेस्ट तरीका यह है
40:43
कि अपने अतिरिक्त सबके अस्तित्व का इंकार कर दो। खत्म
40:53
देह, मन, बुद्धि, दुनिया, अस्तित्व, परमात्मा सबके अस्तित्व का इंकार कर दो।
41:01
अस्तित्व ही नहीं है किसी चीज का।
41:07
केवल मैं ही अस्तित्व हूं। बस
41:21
अब ये बात बड़ी अजीबोगरीब लगेगी यार। मैं सबका इंकार कर दूं। हां कर दो।
41:29
सबका इनकार नहीं सबके अस्तित्व का इंकार कर दो क्योंकि आपके अतिरिक्त रियल में कुछ नहीं है।
41:43
और आपसे भिन्न कुछ है ही नहीं। किसी और की सत्ता ही नहीं है तो भिन्न अभिन्न करोगे कैसे?
41:56
दिखाओ। तो डंडा लकड़ी से भिन्न है क्या?
42:07
अभिन्न है क्या?
42:10
डंडा लकड़ी से ना अलग है क्योंकि लकड़ी से डंडा अगर अलग है तो डंडा तो हो ही नहीं सकता।
42:19
ना डंडा लकड़ी से एक है। डंडा है ही नहीं।
42:26
कहत भिन्न अभिन्न ना भिन्न है ना भिन्न डंडा
42:33
है ही नहीं ऐसे ही आपके अतिरिक्त कुछ भी है ही नहीं किसी भी
42:40
चीज का अस्तित्व ही नहीं है बस और जैसे डंडा नहीं है ना यह कितना आसान
42:48
बताया ना मैं डंडा नहीं है इतना ही आसान है
42:56
कि आपके अलावा कुछ है ही नहीं। किसी चीज का अस्तित्व ही नहीं।
43:07
कौन सी चीज का अस्तित्व है? देखो थोड़ा अच्छे से परखो।
43:15
आप बच्चे थे, छोटे थे। उस बचपन का अस्तित्व है अभी फिर बड़े हुए उसका है नहीं
43:25
आपके मन में कितने विचार आए 10 साल पहले 20 साल पहले आज वो कहां है
43:31
विचारों का अस्तित्व है जो भाव पहले आए आज वो कहां है भावों का अस्तित्व है
43:40
आपने खुद को जो भी माना है वो है कहां किसी चीज का अस्तित्व नहीं है।
43:59
किसी चीज का अस्तित्व है। यह आपकी मान्यता है। है नहीं।
44:12
आप बोलोगे यार मन तो है। यह बॉडी साफसाफ दिख रही है।
44:18
नो आप है को मन कह रहे हो। है को बॉडी कह रहे हो। है यानी अस्तित्व।
44:27
और वह है आपका मैं ही है।
44:31
केवल आप ही का अस्तित्व है और किसी चीज का अस्तित्व नहीं है।
44:39
तो सबके अस्तित्व का ही इनकार कर दो और आपको आश्चर्य लगेगा कि मैंने बेवजह इन सबको माना हुआ था।
44:51
यह कभी था ही नहीं। अपने अतिरिक्त कुछ कभी भी था ही नहीं।
45:07
तो आप हमेशा एक गलती करते हो दूसरे से अदरनेस
45:18
से खुद के माने हुए परमात्मा या खुद के माने हुए ध्यान ज्ञान
45:26
उससे आप खुद को क्लियर करना चाहते हो जो आपसे क्लियर हो रहा है।
45:35
कैसे कहने का मतलब यह है
45:46
कि आप मन को शांत करना चाहते हो। बुद्धि को शांत करना चाहते हो
45:54
और आप शांत हो ही इसका आपको पता नहीं।
46:02
पूरी जिंदगी हम मन को बुद्धि को शांत करने में लगा देते हैं। सारी ध्यान, साधनाएं, ज्ञान किस लिए? कि हमारा मन शांत हो जाए।
46:16
आपको मन को शांत करना है। लेकिन आप खुद शांति हो। इसका आपको बोध ही नहीं है।
46:27
है कि नहीं? कितना बड़ा ट्रैप है। और हर किसी को मन बुद्धि को शांत करना है।
46:34
अभी भी उसका टारगेट कोई दूसरा है और दूसरे को शांत करना है।
46:52
अब मन का नेचर ही चंचलता है। है ना? चंचलता का नाम ही तो मन है।
47:01
अब उसको आपको शांत करना है।
47:04
आप क्या कर रहे हो? सुबह हुई है और कोई बंदर मिल गया आपको
47:12
और आप बंदर को शांत कराना चाह रहे हो। यह खा ले वो कर ले वो। अब बंदर का नेचर ही चंचलता है।
47:21
है ना? और आपको बंदर को शांत कराना है।
47:30
वह कभी होगा नहीं।
47:33
बंदर थकेगा। उसकी थकान आपको लगती है कि वो शांत हो गया थोड़ी देर के लिए।
47:44
बंदर शांत नहीं होता। भाई उसका नेचर ही चंचलता है।
47:51
लेकिन कभी आपने गौर किया जो बंदर को शांत कराने की कोशिश कर रहा है क्या वो पता वो खुद ही शांति हो।
48:01
बंदर यानी मन तो किसी को भी शांत होना नहीं है।
48:13
यही शांति है।
48:20
शांत होना है। यही अशांति है। हां।
48:30
शांतवांत नहीं होना है। आप अपने में ही हो। अपने में भी नहीं होना है। और अपना आप नेचुरल सहज शांति है।
48:45
शांतताकारम भुजंग शयनम पद्मनाभम सुरेशम शांति के आकार वाले हैं।
48:58
वो आपकी आत्मा है। वो सुरेश वो नारायण आपकी आत्मा है।
49:06
आपका आकार कैसा है? शांति के आकार जैसा।
49:16
तो आपका स्वभाव है ना
49:39
तो बंदर को शांत करने में मत लगो। हां।
49:59
ये बहुत विचित्र सेंटेंस है कि आत्मा को शांति नहीं पाना है।
50:10
हां मैं को शांति नहीं पाना है भैया।
50:15
शांति गलत साइड से खेल रहे हो आप। जीव को पाना रहता है या मन को पाना रहता है।
50:24
मैं स्वयं शांति है। उसको क्या शांति चाहिए? वो स्वयं आनंद है। उसको क्या आनंद चाहिए?
50:31
आत्मा को शांति नहीं चाहिए। मैं को शांति नहीं चाहिए।
50:41
क्यों? कई बार हम आत्मा की शांति के लिए यह कर रहे हैं, वो कर रहे हैं। वो एक गलत लैंग्वेज है। है ना?
50:55
मैं को शांति नहीं चाहिए।
51:02
मैं को आनंद नहीं चाहिए।
51:06
हमेशा सही साइड से खेला करो। मैं की साइड से खेला करो।
51:10
आप गलत साइड से खेलते हो। जीव के साइड से, मन बुद्धि के साइड से हसोगे।
51:19
और मैं के साइड से खेलो तो खेल ही खत्म हो जाता है।
51:26
मैं को ना शांति चाहिए, ना परमात्मा चाहिए, ना अस्तित्व चाहिए। वो मैं हूं।
51:34
सहज में मैं को थोड़ी ना चाहिए कि यह थोड़ी देर के लिए हुआ वह ज्यादा देर के लिए हो जाए। वो जीव को चाहिए रहता है।
51:47
हां वो ये सब सपने हैं ना कि आप बस अब पानी डाल लो आंख में। या एक चाय पी लो।
51:56
हां जो बोकोजू उसके शिष्य बोले पिलाओ यार हमको पानी पिलाओ।
52:14
यानी आपको कुछ चाहिए ही नहीं। नेचुरल है ये।
52:20
आपको लगता है कि आपको डिजायरलेस अचा में जाना है, पहुंचना है ना ना।
52:28
यह बात इतनी सहज और नेचुरल है कि आपको रियल में कुछ चाहिए ही नहीं। इवन शांति परमात्मा भी नहीं चाहिए।
52:39
वो हो आप यार।
52:44
मैं के साइड से खेलो। बाकी सारी साइट खत्म हो जाती है। वहां बॉस आ गया ना तो सब फिर खत्म हो जाता।
53:10
मैं को कोई आत्मज्ञान नहीं चाहिए। कोई बुद्धत्व नहीं चाहिए। वो जीव को चाहिए होता है। जब तक आपको यह चाहिए समझ जाना आप जीव दे।
53:21
मैं को क्यों चाहिए रहेगा ये सब चिल्लर चीजें?
53:31
ज्ञान जिससे है उसको ज्ञान नहीं चाहिए। ज्ञान मैं से है। मैं आत्मा भगवान से।
53:42
हां जी।
54:01
तो ज्ञाता ज्ञान और गे बोलते हैं ना ज्ञाता है तब ज्ञान है ना और फिर गेता
54:16
ज्ञान गे भी किससे हैं? मुझसे है। अब यह ज्ञाता ज्ञान यह अभी कहां से आया?
54:25
यह अचानक यह पॉइंट कहां से आया? कोई भूत प्रेत ले आया क्या? आपसे आया ना? मैं से आया।
54:33
तो मुझसे ही तो है ज्ञाता ज्ञान के।
54:44
यह भी अदरनेस है। हां।
54:51
इनसे खुद को क्लियर मत करो। यह सब आपसे क्लियर होते हैं।
55:01
मतलब आप वो शख्सियत हो जिसका कोई पारावार नहीं है।
56:07
ओके है कोई हम
56:21
प्रणाम एनीबडी
56:33
तो फिर चलो एक बार फिर से अजनबी
56:41
बन जाए हम दोनों बस ये दूसरा वाला जो
56:51
खेल है ना दूसरे से आप कभी एग्री नहीं होगे चाहे वह ज्ञान हो चाहे प्रेम हो चाहे
56:57
परमात्मा हो चाहे अस्तित्व हो चाहे कोई भी हो और अपने से एग्री होना नहीं है।
57:27
हां जी प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम सर मैं ओसा से निशित कुमार
57:36
प्रधान हां जी हां जी मैं आपका जब भी देखता हूं मेरा ऐसे
57:44
कुछ होता रहता है होता रहता है ब्रेन में सर पे क्या होता है ब्रेन में
57:50
ऐसे कुछ कुछ ऐसे होता रहता है और एक बार भी हां एक बार तो पूरा सुन हो गया था ऐसे
58:00
सुनते सुनते दो मिनट तक सुन हो गया कि सुनाई
58:07
ऐसे अरे मेरे को मत सुना करो भाई ब्रेन वन उड़
58:16
जाएगा गड़बड़ हो जाएगा अच्छा लगता है अच्छा लगता है
58:28
सही जा रहे हो बहुत बढ़िया ऐसे चलता सब उड़ जाएगा जो कुछ कुछ होता है वह भी
58:35
गायब हो जाएगा हां हमें सब यहां कुछ कुछ नहीं होता है। है ना?
58:50
आपको मिलना चाहता हूं। मैं अभी 101 दिन के अंदर आऊंगा।
58:58
नहीं आप एक तारीख से आइए। वो कांटेक्ट नंबर है YouTube के डिस्क्रिप्शन में। आप कांटेक्ट कर सकते हैं। हां जी। हां।
59:06
एक तारीख से आप जब भी आना चाहे आ सकते हैं। एक क्या है? जून ना जून से। हां जी।
59:14
ओके। हां। प्रणाम। और कोई भी आए कांटेक्ट करके आए। है ना? हां जी।
59:23
हां जी।
59:36
क्या मलंग जी क्या कर रहे हो यार वो एक दिन के लिए आया था मैं यहां पे
59:45
ऋषिकेश ओके
59:55
अरे हमारी बुक तो आप छपवा दिए हो उसको उसको वो सब Amazon वगैरह में डालो ना यार।
1:00:02
जी प्रभु आप यहां बुक शॉप पे रख दिए हैं बातचीत करके।
1:00:06
हां। इसके बाद Amazon वगैरह में जिसमें जिसमें डालना है सब डालो। जी स्टार्ट कर देंगे।
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यार क्या पॉइंट है? दूसरे से कभी आप एग्री होगे नहीं और अपने से एग्री होना नहीं है।
1:00:34
आ क्या बोले इसके बाद यार
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हमको समझ ही नहीं आता ये ये बात हम किसी दूसरे को समझा रहे हैं कि अपने को समझा रहे हैं।
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अपना पता बता रहे हैं।
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क्योंकि दूसरा इसको समझेगा नहीं और अपने को समझाना नहीं है।
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है ना? इसलिए सबको राम राम भैया। प्रेम प्रणाम। जी प्रभु
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सभी को प्रेम प्रणाम।