Prabhu Shree
0:04
[संगीत]
0:16
जैसे रस्सी होती है। है ना?
0:21
रस्सी को बांध दो। बंधी हुई रस्सी और खुली हुई
0:32
रस्सी तो रस्सी जब बंध गई तो रस्सी में क्या बंधन
0:41
है? है नहीं है ना? नहीं है। और रस्सी जब खुल गई तो रस्सी में क्या मुक्ति है?
0:50
नहीं। बस ऐसी आप में ना बंधन है ना मुक्ति।
0:57
बस खत्म बात बंद
1:03
[हंसी]
1:10
करो।
1:13
हां। ऐसे ही आप जब बंधे हुए आपको लगता है कि मैं बंधा हुआ हूं तब भी आप बंधे हुए
1:19
नहीं हो। और जब आपको लगता है कि मैं मुक्त हो गया तब भी आप मुक्त नहीं हो। बंधन मुक्ति कहीं है ही नहीं। रस्सी रस्सी है।
1:29
मैं मैं हूं। आत्मा आत्मा है। खत्म
1:42
बात। तो बंधन भी एक मान्यता है। मुक्ति भी एक मान्यता
1:49
है। कौन बंधेगा? कौन मुक्त होगा? कोई सेंस ही नहीं बनता ना।
2:10
तो असल बात क्या है ना आप बहुत लग्जरी में हो आपको पता नहीं है
2:18
जैसे आप कमरे में आते हो अकेले सोते हो
2:25
अंदर से लॉक करते हो ना? बाहर से तो किसी ने लॉक किया नहीं
2:34
है। बाहर से कोई लॉक कर दे तो आपको तकलीफ हो जाएगी।
2:40
आपने अंदर से लॉक किया है। बस
2:45
सेम जो बंधन आप बांधे हुए हो, जो धारणाएं, मान्यताएं वो आपने अंदर से लॉक किया है और
2:54
लग्जरी में आप सो रहे हो। आपको भी मतलब नहीं है बंधन से और मुक्ति से। सब पता है
3:04
आपको। हां। क्या बंधन है यार?
3:09
और क्या मुक्ति है? आप रिलैक्स हो ना? अपने रूम में आप रिलैक्स रहते हो। आपको पता है मैंने ही लॉक किया
3:18
है। इसमें भी आप रिलैक्स हो। मैंने ही बांधा है कई चीजों में अपने आपको। और आपको यह भी पता है मैं कितना ही खुद को बांध दूं मैं बांध नहीं सकता।
3:32
आपको भी पता है। मैं तो बस साइन कर रहा हूं उन चीजों
3:40
पर। सील लगा रहा हूं। तो आप अपनी लग्जरी में
3:48
हो। कोई बंधन मुक्ति कुछ नहीं है। सब बकवास है।
4:04
आपका जो ठसन है ना यू नो ठसन वो बरकरार रहता
4:10
है। अपने ठसन में रहते हो आप। कितना ही रोना गाना कर लो, कुछ भी कर लो।
4:37
सेम ऐसे ही जैसे दरवाजा खोल दिए तो आप क्या मुक्त हो गए
4:45
क्या वो फाल्स है ना बंधन मुक्ति दोनों फॉल्स खुद ही दरवाजा बंद कर रहे हो, खुद ही खोल
4:54
रहे हो। तो बंधन मुक्ति खुद ही का माना हुआ है ना। दोनों फॉल्स
5:06
है। तो आप क्या बता रहे हो यहां रोज-रोज? है कि
5:15
नहीं? हम बता क्या रहे हैं फिर यहां रोज रोज?
5:21
[हंसी]
5:29
हम यही बता रहे हैं कि बताने को कुछ भी नहीं है। आपका बंधन और मुक्ति दोनों फाल्स है।
5:37
टोटल
6:04
बंधी हुई रस्सी को आप बोल देते हो माया खुली हुई रस्सी को आप बोल देते हो
6:10
भगवान रस्सी तो रस्सी छ ना बंधी ना खुली है।
6:34
किसी को भी ऐसा महसूस होता है क्या कि मैं बंधा हुआ
6:46
हूं। अपने में जाकर देखना। शरीर मन में जाके मत देखना।
6:51
अपने होने के एहसास में किसी को भी लगता है क्या मैं बंधा हुआ
6:57
हूं? किसी को लगता ही नहीं है
7:09
यार। और मुक्ति भी नहीं लगती है। यह भी बता रहा हूं। हां। कि मैं मुक्त हो गया।
7:16
ऐसा भी नहीं लगता। वो भ्रम है। हो गया वाला जो बात है ना वो भ्रम
7:25
है। तो बंधन अगर सत्य है तो आप उससे कभी छूट ही नहीं सकते।
7:36
बताओ बंधन अगर सत्य है तो सत्य तो हमेशा रहता है। उसका अभाव नहीं होता।
7:44
तो बंधन अगर सत्य है तो आप उससे छूट ही नहीं
7:52
सकते और असत्य है तो है ही
8:00
नहीं तो बंधन अगर सत्य है बाय द वे तो बेफिक्र रहो ना उसे आप छूट ही नहीं
8:08
सकते
8:10
[हंसी]
8:14
और असत्य है तो है ही नहीं तो भी बेफिक्र रहो क्योंकि है ही
8:29
नहीं। सब नाटक है यार। मस्त रहा करो।
8:42
यह सब आपके आनंद के लिए है। यह सारी प्रकृति, यह सारा चराचर, यह सारा खेल जैसे
8:49
आनंद के लिए खेलते हो ना क्रिकेट, वॉलीबॉल जो भी खेलते हो किसके लिए खेलते हो? आनंद के लिए खेलते हो। है ना? अब वो ठीक है।
9:00
लोग कंपटीशन के लिए खेलते हैं। मैं उनकी बात नहीं कर रहा हूं।
9:04
कोई भी खेल जब आप आनंद के लिए खेलते हो तो क्या वह चीज सच होती है क्या?
9:11
हां। अब वो बॉल उधर चली गई तो बहुत बड़ी बात हो गई। हाथ में आ गया तो कैच हो गया।
9:18
वो कुछ दम है क्या इन बातों में? स्टंप में पड़ा तो आउट हो गया। अरे ये तो आपका खेल है ना। आप आनंद ले रहे हो।
9:31
हां लोग इसमें भी सीरियस हो जाते हैं। अलग बात है। यह जीत गया वो हार गया। कोई सेंस
9:41
थोड़ी ना बनता है इन चीजों
9:50
का। अब वो हिट विकेट हो गया। ये हो गया, वो हो गया। अरे ये क्या बात क्या है?
9:58
लेकिन आप खेल रहे हो आनंद के लिए इंजॉय है ना सेम यहां पर वही है
10:07
सेम आप आनंद के लिए खेल रहे हो यहां पे कभी आध्यात्मिक हो जाते हो कभी सांसारिक हो जाते
10:15
हो बहुत अध्यात्म में जीते हो अचानक से कोई कामना उड़ जाती है तो हिट विकेट हो
10:22
जाता है
10:27
[हंसी]
10:30
हां अरे खैर है हो गया हो गया साले को क्या
10:35
[हंसी]
10:46
करना बहुत ध्यान किए साधना वधना किए और अचानक से किसी सुंदर लड़की में नजर नजर
10:55
पड़ गई वो गई भैंस पानी में है ना क्लीन बोल्ट
11:02
यर्कर है वो हां यॉर्कर से बचना बड़ा मुश्किल होता है।
11:16
हां बिल्कुल
11:26
तो कुछ बोल्ड वोल्ड थोड़ी ना हुए आप फिर से अगले मैच में फिर बैटिंग में आ जाते हो। है
11:34
ना? फिर यारार्कर में सिक्स भी मार देते हो। कुछ नहीं है। सब नाटक है। टोटल नौटंकी
11:42
है। आपको कुछ हुआ ही नहीं है यार। ये समझ जाओ। आप आनंद ले रहे हो बस कि
11:51
मैं शरीर हूं, पुरुष हूं, स्त्री हूं। हां, कामी क्रोधी हूं। फिर मैं इनसे
11:59
मुक्त हूं। टोटल आपका नाटक है। आप मजे ले रहे हो। और क्या कर रहे हो? बताओ आप।
12:12
हां? और फिर लास्ट मजा क्या है? मैं इनलाइटेंड हो गया।
12:17
आखरी मजा दोहरा शतक है
12:27
[हंसी]
12:31
ना और कुछ नहीं
12:36
[हंसी]
12:41
इनलाइटनमेंट ये सब आपका ना आनंद है और कुछ नहीं है।
12:47
ना कोई बंधन है ना मोक्ष है ना मैं है ना तू है नहीं भी नहीं है और सब कुछ है
12:55
भी क्या दिक्कत है सब कुछ नहीं भी है और सब कुछ है भी तो आपका क्या बन रहा है बिगड़ रहा है
13:04
बताओ माया है तो आपका क्या बिगड़ जाता है और भगवान है तो आपका क्या बन जाता है
13:14
आप तो एज इट इज हो जैसे के तैसे मस्त राम मस्ती
13:27
में आपके अंदर क्या धारणाएं बैठ गई है? ये हो गया। मेरे को वो हो गया। मैं क्या करूंगा? कोई कृपा कर
13:36
दे। वह भी एक गहरा नाटक है आपका। दुखी होने का, परेशान होने का।
13:45
कोई मेरे को निकाल दे अपनी मुसीबत से। आज हमारे घर में तकलीफ है। आज मेरे
13:55
यहां यह हो गया। है ना? मेरी कामनाएं नहीं जा रही है। वासनाएं नहीं जा रही है। सब नाटक है
14:05
आपका। पूरी लीला है ना।
14:10
आप जिस चीज की कामना करते हो सपोज आपने कुछ खाने की कामना की रसगुल्ला खाने की कामना
14:19
की सेम कामना रसगुल्ले में भी उठेगी आपके भीतर जाने
14:26
की समझ रहे हो आपने किसी स्त्री की या किसी की कामना की वह स्त्री में भी वह कामना
14:33
उठेगी वह कामनाएं जहां मैच होती है तो मिलन हो जाता है
14:46
तो सब नाटक है और कुछ नहीं है। फिर आप निष्काम की कामना करते हो। तो
14:56
निष्काम वाले गुरु आ जाते हैं। आपको पता है कि कुछ मत चाहो। है ना?
15:04
अचाप अच्छा हो जाते हो।
15:09
अब अच्छा लग रहा है बोलते हो अब शांति है आनंद है रिलैक्स है चाह में थोड़ी तकलीफें
15:16
हैं चाह में कुछ नहीं है ब्रेकर ज्यादा है अच्छा है स्ट्रेट है एकदम स्ट्रेट
15:27
हाईवे और मैं आत्मा भगवान ना चाहे ना चाहे वो दोनों से ऐसे ऐसे ऐसे खेलता है हां
15:40
चाह से घबरा जाएगा क्या भगवान?
15:44
हां। एक-एक कण को चाहता है। एक-एक चींटी का पेट भरता है। चाहता है ना उसका पेट
15:53
भरे। एक-एक पंछी का, एक-एक कण-कण का। चाहता है। बिल्कुल।
16:03
कितने लाखों जीवाणु हैं, कीटाणु हैं। सबका पालन पोषण करता
16:11
है। आनंद लेता है परमात्मा। चाहना भी उसका आनंद है और अचाहा
16:19
भी उसका आनंद है। हर हालत में जो आनंदित है वही मैं हूं। वही परमात्मा है।
16:33
हर हालत
16:45
में अब मेरे अंदर चाह नहीं होती तो यहां आके प्रवचन क्यों देता मैं बैठा रहता चाह में आनंद है ना मेरा हम
16:56
सत्संग दे रहे हैं बढ़िया आनंद है मेरा ये आप लोग आनंद से सुन रहे हो। यह आप लोग का आनंद
17:02
है। सुनने की चाह है ना कि इतना ही अचा अचाहा किए एक साल से लेकिन सुनने की चाह
17:10
गई क्या? कुछ चीजें नहीं जाती मेरे यार।
17:28
तो आनंद है। चाह भी आनंद है। अचा भी आनंद है। अचाह का अपना आनंद है। वो भी कम आनंद
17:38
नहीं है। बहुत चाह लिए। अरे बहुत हो गया। अमित
17:45
जी। अमित जी। ठीक है। अब अपने आप में मस्त है हम। ऐसा भी आता है पीरियड बीच-बीच में
17:52
और सबको आता है तब आप बढ़िया से ऐसे अचान में विश्राम
17:59
करते हो अब कुछ नहीं चाहिए ना संसार ना अमित जी ना कोई सत्संग आ अपन मस्त हैं
18:07
अपने आप में स्वचा का आनंद
18:14
लेते अब अचार का भरपूर आनंद लिए यार अच्छा तो लगता है बैठने
18:22
[हंसी]
18:25
में। फिर चाह भी लेते हो। क्या दिक्कत है?
18:30
चलो सत्संग कर लेते हैं। मैं से भिन्न थोड़ी ना अमित जी। ऐसा करके खुद को समझा लेते
18:38
हो। तो ये कुछ नहीं है। ये खुद आप लीला कर रहे हो। कभी अलग करके खुद को सबसे फिर खुद
18:46
को एक कर देते हो सबसे है ना आनंद ले रहे हो
18:53
आप यानी जब आपको उलझने का आनंद लेना पड़ता है तकलीफों का तकलीफों का भी आनंद है
19:00
फ्रस्ट्रेशन का भी आनंद है किसी फ्रस्टेट आदमी को देखना वो बहुत आनंद ले रहा है अपना दुखी आदमी को देखना
19:10
ना वो जब अपने दुख बताता है जैसे थोड़ा सा हुआ रहता है वो बड़ा ज्यादा करके बताता है मेरे साथ यह हो गया वो कितना आनंद ले रहा
19:19
है वो हां मेरी जिंदगी में ये हो गया वो हो गया
19:26
उसको सुनते रहना बस हां यार तू सही बोल रहा है वो आनंद ले रहा
19:34
है हां तो जब आपको उलझना रहता है
19:43
बर्बाद होना रहता है, तकलीफ का आनंद लेना रहता है, दुख का तब आप एक से अनेक हो जाते
19:49
हो कि मैं अलग और ये सब अलग। वन टू ऑल सब अलग है। हर इंसान अलग
19:58
है। हर जीव अलग है। भगवान अलग है। शरीर भी अलग, मन भी अलग, सब
20:04
अलग। तब आप क्या करते हो? तकलीफों का आनंद लेते हो।
20:12
ठीक। अब ये बहुत हो जाता है। बहुत तकलीफ तकलीफ हो गई। बहुत हो गया यार। अति हो
20:19
गई तब आप एक में आ जाते हो। ज्ञान की बातें सुनते हो, पढ़ते हो।
20:26
है ना? या मैं से भिन्न कुछ भी नहीं। जो कुछ भी है मैं ही हूं।
20:36
ठीक। तब आप ज्ञान का आनंद लेते हो। ज्ञान का आनंद और गहरा है। है
20:44
ना? यार पूरा एकाकार है। जिसको मैं देख रहा हूं मैं ही हूं।
20:51
जिसको मैं सुन रहा हूं मैं ही हूं। आ ये आकाश, ये धरती, यह भगवान, ये जीव मैं ही
20:58
हूं। कितना आनंद है इसमें। अब हो गया ज्ञान का
21:06
आनंद। अब अनेक भी नहीं, दो भी नहीं। एक भी नहीं, दो भी नहीं, एक भी नहीं। अब यह एक
21:15
एक भी नहीं यार बहुत हो गया। ये एकाकार, एकाकार एक ही है तो मतलब क्या करेंगे क्या
21:23
यहां? तब आप प्रेम का आनंद लेते हो। जहां दो तो है ही नहीं और एक भी
21:36
नहीं। फिर प्रेम रस सेलिब्रेशन ऐसा चलता
21:44
है। कुछ समझ ही नहीं आ रहा है और आनंद आ रहा है। ऐसा आप आनंद ले रहे
21:56
हो। अब दो भी नहीं, एक भी नहीं, यह भी गया। अब प्रेम की दुनिया आ गई। अब भक्ति में आप गिनती भूल जाते हो।
22:07
क्या दो? एक अनेक भक्ति में आप फिर पूरे पागल हो जाते
22:14
हैं। पागलपन का आनंद लेते हो। ये बकवास बंद कर बोलते हो। दो एक ये सब बकवास लगता है भक्ति में।
22:27
ओ पागल जैसे जीते हो मस्ती में। एकदम मस्त।
22:35
ना कुछ जानना है ना कुछ समझना है तब आप भक्ति का आनंद लेते
22:45
हो और यह सारी चीजें याद रखना आप सहज में आनंद लेते
22:53
हो सहज में जैसे कोई कार का ड्राइवर होता है सहज में गियर चेंज कर लेता है ना ऐसी
23:01
सहज में आप गियर चेंज कर लेते न्यूट्रल से लेके पांचों गियर आपके लिए
23:08
कोई तकलीफ नहीं है। संसार भी आपके लिए तकलीफ नहीं है।
23:14
तकलीफ भी आपके लिए तकलीफ नहीं है। तकलीफों का भी आनंद है। दुख का भी
23:22
आनंद है। यह मौज है आपकी। यह संसार भी और भक्ति भी, प्रेम भी, ज्ञान भी।
23:42
ये रस है बस
23:53
सबका और ये सब बहुत हो जाता है। भक्ति भी हो गया, यह भी हो गया, ज्ञान भी हो गया। तो आप सब डिलीट मारते हो।
24:02
हो गया बस आ फुल रेस्ट अपने आप
24:10
में बस विश्राम स्वयं
24:21
में इंंजॉय रिजॉयिंग बोलते हैं ना पुनः पुनः
24:31
जॉई यानी अपने ही आप में फुल रेस्ट
24:47
कंप्लीट संसार ज्ञान प्रेम भक्ति को अपनी बाहों में समेट लेते हो और फुल रेस्ट अपने
24:55
ही आप में संपूर्ण
25:16
संपूर्ण तो संसार नहीं है तीन काल में तब आपको क्या दिक्कत
25:24
है और संसार तीन काल में है तब आपको क्या दिक्कत है बताओ
25:32
कोई दिक्कत ही नहीं है ना। अरे जिसको दिक्कत से दिक्कत नहीं है
25:37
वह मैं हूं। दिक्कत भी हो जाती है मुझे तो भी मुझे दिक्कत कहां होती है?
25:49
बताओ जो अपने दुख से दुखी नहीं होता वही आत्मवान
25:56
है। दुख भी हो जाता है मुझे तो मैं अपने दुख से भी कहां दुखी होता
26:08
हूं। कितने बार दुख आते हैं? सुख आते हैं।
26:13
मैं आनंद लेता रहता हूं ना।
26:26
हां। जन्मने का आनंद लेता हूं। मृत्यु का भी आनंद लेता हूं। जन्मते हैं। बढ़िया। 80 100 साल जीते
26:35
हैं। बढ़िया से जीते हैं। बहुत हो जाता है। तो वस्त्र जो बदलते हैं अपन वैसे ही
26:42
बदल देते हैं। क्या दिक्कत है? मजा नहीं आ रहा है बॉडी में। अब ये चल
26:51
फिर नहीं पा रही है। देख नहीं पा रही है। चेंज कर लिए कपड़े जैसे जो कृष्ण बोलते हैं गीता में।
27:04
तो आपको एक बात बताऊं मैं बहुत गहरा पॉइंट है कि कपड़े बदलने
27:12
में ये जो कपड़े हैं बदलने में तो थोड़ी तकलीफ है। थोड़ा सा एक्सरसाइज वो है। शरीर बदलने में इतनी भी तकलीफ नहीं होती है।
27:25
मरने से ठीक पहले प्रकृति आपको बिल्कुल वह इंजेक्शन
27:31
लगा देती है एनस्थसिया का नेचुरल वाला है ना कोई भी पीड़ा असहनीय पीड़ा
27:40
जैसी कोई चीज नहीं होती है वो सीधा इंजेक्शन लगा देती है और सॉफ्टली आप मर जाते हो और इच्छाएं
27:50
रहती है तुरंत नया जन्म हो जाता है अधिकतर तो तुरंत ही हो जाता है। कुछ-कुछ केसेस
27:57
में 11 12 दिन लग जाते हैं। और कुछ केसेस यह भी होते हैं कि लाश
28:04
जलने के बाद तुरंत उसको कंफर्मेशन होती है और वो पैदा हो जाता
28:12
है। कितना परफेक्ट सिस्टम है। मरने का भी आनंद लेते हो आप।
28:23
ऐसा थोड़ी ना मरना बुरी चीज है। जितना अच्छा जीवन है ना उतना अच्छा मरना भी है। हां मरना कभी बुरी चीज नहीं समझना।
28:36
टेस्टी है
28:38
[हंसी]
28:41
एकदम। खुशी-खुशी मरना। हां।
28:52
तो आप ना ओवर सब चीज का आनंद ले रहे हो।
28:56
दुख का, सुख का, जीवन का, मृत्यु का, बंधन का, मोक्ष का, संसार का, अध्यात्म
29:05
का। पूरा आनंद ले रहे हो आप। और कुछ थोड़ी ना कर रहे हो आप।
29:16
ऐसा नहीं लगता क्या मेरी बातों से लगता है ना अंतर्यामी एग्री करेगा
29:23
आपका पूरा आनंद
29:32
है कामनाओं का भी आनंद है निष्काम का भी आनंद है
29:39
हां कामनाओं से दुख पैदा होता है तो उस दुख का भी आनंद सुन
30:09
लेते तो यह पूरा चाहतों का जंगल है। है
30:15
ना? पहले आपने चाहा तभी तो यह शरीर मिला
30:25
ना। फिर आपने चाहा स्पिरिचुअल कुछ मिले तब यह सत्संग मिल रहा है। तो यह पूरा जंगल
30:33
है। चाहतों का सागर ऐसे चारों ओर है।
30:52
अच्छा आपको सब पता रहता है कि एक चाह पूरी होती है उससे फिर कई चाहतें निकलती हैं।
30:57
फिर भी आप क्यों चाहते रहते हो बार-बार? आपको यह पता ही है ना? ये इच्छा
31:05
पूरी हो गई। फिर उस इच्छा से फिर और कई इच्छाएं पैदा हो जाती है। फिर वह भी पूरी होगी तो और कई पैदा हो जाती
31:14
है। फिर भी आप क्यों चाहते रहते हो? आप आनंद ले रहे हो। आपको समझ नहीं आ रहा है
31:23
क्या? पता तो है ना आपको। फिर भी आप क्यों चाहते रहते हो? आप आनंद ले रहे हो चाहतों का।
31:36
और फिर अचार का भी आनंद लेते हो कभी बहुत हो गया चाचा अचार अब कुछ चाहिए ही नहीं ना संसार ना
31:45
अध्यात्म उसका भी आनंद लेते हो ये टोटल आपका ना सेलिब्रेशन है
31:53
कंटिन्यू सेलिब्रेशन हां जी
32:21
ऐसे ही अज्ञानी होने का आनंद लेते हो।
32:23
ज्ञानी होने का आनंद लेते हो। सब आनंद है आपका।
32:39
बट ये ऐसा एंजॉय है जो आप कर रहे हो। आपको पता नहीं है कि मैं एंजॉय कर रहा
32:46
हूं। समझ रहे हो? ये थोड़ा डीप एंजॉयमेंट बोलेंगे।
32:52
यह डीप एंजॉयमेंट है। आपको पता नहीं है कि मैं एंजॉय कर रहा
33:01
हूं। सुख से, दुख से, जीवन से, मृत्यु से, शिष्य बनके, गुरु बनके टोटल
33:10
एंजॉय। हां। ऐसा ही है।
33:22
मेरे को तो ऐसे ही लगता है यार आप लोग अपनी जानो।
33:46
हम हम लेठी का जल पिला दिया जाए। मिश्री या शक्कर मत डालना केवल पानी।
34:02
है ना?
34:04
यस यस यस बताओ अरे बोलो
34:19
यार तो कभी भी परेशान आ गई कोई तकलीफ आ गई
34:25
तो कितनी अच्छी होती है परेशानी और तकलीफ उसकी एक खूबसूरती है ब्यूटी
34:34
है और आप अंदर ही अंदर बहुत गहरे में उसका आनंद ले रहे हो उससे यानी ऐसे अवॉइड मत किया करो उसको
34:44
उसका पूर्णता स्वीकार किया करो बहुत सुंदर होती है परेशानी हां
35:22
मैं तो खूब आनंद लेता हूं। हां।
35:34
खूब। अब जैसे कोई तकलीफ आ गई तो मैं उसका साक्षी वाक्षी थोड़ी ना होता हूं। मेरे को दिक्कत ही नहीं है उस चीज
35:42
से। तकलीफ में मैं तकलीफ जैसा हूं ना। बड़ा मजे लेता हूं मैं उसके। डूब डूब के डूबडूब के।
35:56
[हंसी]
35:59
हां कोई परेशानी आ गई तो खूब मजे लेता हूं मैं। किसी को चिल्लाना है चिल्लाता हूं।
36:08
जब जैसी सिचुएशन देता हूं बत्ती
36:17
तबीयत प्रेम के समय प्रेम खूब आनंद है ना यार। उसमें क्या
36:36
है? क्योंकि जो रस फूलों में जा रहा है पौधे का वही रस कांटों में भी तो जा रहा
36:45
है। अब रस तो एक ही है। अपन ऐसा सोचते हैं अभी तक कि थिंकिंग यही है।
36:52
यही एग्जांपल चलता है ना मार्केट में भाई रस तो एक ही है कांटे में फूल में फिर एकाकार में लोग आ जाते हैं। अरे मैं बोलता
37:00
हूं दोनों में अलग-अलग रस भी जा रहा है तो दिक्कत क्या है? कोई तकलीफ
37:11
है? क्या तकलीफ है?
37:18
ठीक है। अलग-अलग रस भी जा रहा है। तो क्या तकलीफ है? दो होने में भी क्या तकलीफ है यार? और एक होने में भी क्या वो बड़ी बात
37:26
है? ये खेल है
37:41
ना तो महाराष्ट्र चल रहा है। हां।
37:46
जैसे अभी बारिश है, खेतों में बहुत पानी भर जाता है। तो वहां आप जाके देखना बहुत छोटे-छोटे कीड़े होते हैं। वो वो महारास कर रहे हैं।
37:57
सेलिब्रेट कर रहे हैं। आपको दिखेंगे भी नहीं। अच्छा मेंढक की आवाज तो सुनते हो ना? हजारों मेंढक खेतों में रहते हैं। वो
38:05
सेलिब्रेट कर रहे हैं। टर टर वो परमात्मा की वॉइस है वो। मैं हूं बोल रहे हैं। वो अपनी लैंग्वेज
38:13
में। हां। पंछी अपनी लैंग्वेज में बोलते हैं। मैं हूं। मनुष्य अपनी लैंग्वेज में बोलता
38:21
है। पत्थर साइलेंट बोलते हैं। सबकी अपनी वॉइस है। पहाड़
38:29
अपने स्थिरता से बोलता है कि मैं हूं। वो अपने ढंग से बोलते हैं। तो ये जैसे वो खेत में सेलिब्रेशन चल
38:39
रहा है ना। अपन देखते हैं हमको वो कीड़े मकोड़े छोटे-छोटे जीवाणु कीटाणु दिखते ही नहीं है। ठीक है? तो ऐसी देवता देखते हैं
38:47
पृथ्वी में तो उनको ये इंसान छोटे-छोटे नहीं दिखते। वो एक एकड़ का खेत है ना पृथ्वी
38:55
उनके लिए। हां ऐसा है रियल में है। ये मजा मार रहे हैं। ये लोग बोलते हैं देवता लोग।
39:05
जैसे हम लोग देखते हैं ये जीवाणु मजे मार रहे हैं। ये मेंढक मजे मार रहे हैं। ऐसी देवता लोग देखते हैं खूब मजे मार रहे हैं ये लोग।
39:24
अब आकाश देखता है देवताओं को अनंत अनंत
39:31
देवता भाई इस 33 करोड़ देवी देवता इस इस यूनिवर्स के ऐसे अनंत यूनिवर्स है अनंत
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गैलेक्सियां हैं तो आकाश सबको देखता है उसके लिए वो एक एकड़ खेत है
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वो सेलिब्रेट कर रहा है। बोलता है क्या मजे मार रहे हैं देवता
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[हंसी]
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लोग।
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हां तो सब जगह महाराज चल रहा है
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ना। अब अव्यक्त अज्ञात अज्ञात देखता है आकाश को। अब आकाश तो बहुत एक एकड़ खेत है।
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अज्ञात के सामने छोटा सा है।
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तो अज्ञात देखता है क्या यार आकाश तू भी यार अपने अंदर क्या-क्या लिए हुए और बड़ा
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तू मजे ले रहा है हां तो आकाश तक ज्ञात है याद रखना ये चार
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तत्व और पांचवा आकाश आकाश में चारों सम्मिलित है वहां तक ज्ञात है और फिर अज्ञात अव्यक्त
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क्त वो देखता है आकाश को एक एक अब अव्यक्त को मैं आत्मा भगवान देखता
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है अव्यक्त एक एकड़
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खेत तो मैं आत्मा भगवान क्या चीज है समझो मैं आत्मा भगवान
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अव्यक्त आकाश सारे देवता सारे मनुष्य सारे
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जीवाणु सबके साथ महारास कर रहा है और फिर भी अकेला
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है। हां फिर भी अकेला है। एक ही समय में सबके साथ हूं मैं। सब
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अलग-अलग है और मैं सबके साथ हूं और फिर भी मैं अकेला हूं। मेरी
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[हंसी]
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मर्जी हां ऐसा हूं मैं मत सोचना मैं ऐसे में नहीं
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आता मैं ऐसे में भी आ जाता हूं मेरी मर्जी और जैसा मैं हूं वो तो मैं हूं
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ही अरे मैं चीज हूं आत्मा को वस्तु बोला गया वेदांत में
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स्पेशल है भाई। तो टोटल सेलिब्रेशन है यार। ये उदासी
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उदासी फेंको अपनी। और उदास होते हो तो उसका भी एंजॉय करो। बढ़िया मस्त
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रहो। ब्रेकफास्ट हो गया सबका। बढ़िया।
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तो मैं कोई सत्यवत बताने नहीं आया हूं।
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मैं आपको जो बताने आया हूं ना वो जो आप जो आप रियल में जो एंजॉय कर रहे हो जिस एंजॉय का आपको पता नहीं है बस वही बता रहा हूं।
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आप एंजॉय कर रहे हो। कितना एंजॉय करते हो।
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आज सहजावस्था बताओ। आज तत्व बोध बताओ। आज विषयक्ति बताओ। विषय से दूर होना
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बताओ। कितना एंजॉय कर रहे हो आप। मैं भी एंजॉय कर रहा हूं। ये भी सुनो।
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ये भी
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[हंसी]
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सुनो। मतलब हल्के फुल्के रहो। है ना? तो विज़न क्लियर दिखता है।
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ज्यादा घोर गंभीर बैठोगे ना तो आनंद ले रहे हो वह भी पता नहीं चलेगा गंभीरता
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का और वो दूसरों की नजर वजर से जीना छोड़ो है ना कौन क्या बोलता है आपको क्या
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है अपना दृष्टा मत बनने देना किसी दूसरे को।
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अपने दृष्टा हम खुद
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हैं। और अगर इस आनंद का पता है जो मैं बता रहा
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हूं इस जॉय का तो दूसरों की नजर से भी जी लेना। कुछ नहीं होगा। मैं बोलता हूं।
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हां क्या दिक्कत है दूसरे भी कितने दूसरे हैं यार अपने ही तो हैं वह भी जी लेना
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उनकी नजर से भी यहां कोई बाउंड्री नहीं
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है आपका आकाश इतना विराट है ये छोटी-छोटी बातें हैं वहां ये
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सब क्या बात कर रहे हो आप दूसरे की नजर से जी लेना। सही बात कर रहे हैं
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हम। तभी तो परम स्वतंत्र हुए क्या? नहीं तो स्वतंत्रता अधूरी है आपकी।
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एक तरफ जी रहे हो तो।
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अध्यात्म में भी जियो, संसार में भी जियो, अपना कर्म भी करो। क्या बुरा है? कितना मासूम है संसार भी।
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[हंसी]
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हां। प्यारा है सब। सब कुछ प्यारा है।
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तो आप लोग क्या एक लैंग्वेज में अटक जाते हो? क्या मैं के अतिरिक्त कुछ है ही ना। इस लैंग्वेज में हर आदमी फिर अटक जाता है। कि मैं के अतिरिक्त कुछ है ही नहीं।
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अरे जो अतिरिक्त है वह भी तो मैं ही हूं।
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मैं वह बता रहा हूं आज तो क्या दिक्कत है अतिरिक्त से
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भी और वो मैं नहीं हूं तो उससे भी क्या दिक्कत
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है? सब एंजॉय करो। फुल फुल सेलिब्रेशन
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अब आप क्या बोलते हो? इच्छा होनी नहीं चाहिए। इच्छा होनी ही नहीं चाहिए। यह भी तो एक इच्छा है।
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इच्छा होनी ही नहीं चाहिए। यह भी तो एक इच्छा
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है। यानी चाह उठनी ही नहीं चाहिए। ये भी तो एक चाह
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है। अचाह की चाह भी तो एक चाह है। और हर चाह में
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जब वह चाह पूरी होती है, हर चाह में एक अचाह रहता
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है। हो गया ना यार ये बहुत ऐसा करके जब वो चाह पूरी होती है तो अपने आप
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उस चाह से क्या निकलता है? अचा। कितना बड़ा सेलिब्रेशन
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है। हर चाह की आत्मा अचा और अचा की आत्मा
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चाह। कितना बड़ा सेलिब्रेशन है। एक तरफा मत जियो जिंदगी
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को। हां। खाली चाह चाह नहीं। खाली अचाहा चाह नहीं। भाई एक ट्यूनिंग होना चाहिए ना।
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अब सहजा का सत्संग ऐसे ही चलता है भैया रिएक्शन मारता है उसका भी आनंद
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लो तो क्या समझे नहीं कुछ नहीं समझे ना बस तब तो ठीक
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है
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ऐसा लगता है आज मैं अपनी बात पूरी कर दिया।
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तो देखो हर भोग किस में ले जाता है? त्याग में बहुत भोग लिए तो अपने आप त्याग आ जाता है ना। और बहुत त्याग त्याग त्याग किए तो
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अपने आप भोग आ जाता है। दोनों एक दूसरे की आत्मा है ना। हां।
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आप खेलते हो कि यह हो गया, वह हो गया। है कुछ नहीं, हुआ कुछ नहीं।
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हां। बहुत खा लेते हो तो उपवास करना पड़ता है। है ना? उपवास नहीं करते तो फीवरवीवर आ जाता है। गोली खाते हैं। भूख कम लगती है।
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अपने आप होता है उपवास। बहुत उपवास करते हो तो खाना आता है। खाना खाना पड़ता है।
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इन चीजों में आप बड़े ताव मारते हो। हम बहुत उपवास कर लिए या ये कर लिए। हम छप्पन भोग खाते हैं। अरे क्या मतलब क्या इन
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चीजों का? त्याग का ये का वो का कभी तो आओ नहीं मारना। एंजॉय करो सबका।
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हां। बहुत देखते हो तो रात को आंख बंद कर लेते हो।
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उससे ज्यादा कुछ थोड़ी ना है त्यागव्याग
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हां बंद करते हो ना सोते सब है यार हम बड़े त्यागी हैं और सब छोड़ दिए
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हैं ऐसा वैसा वो कोई बड़ी बात नहीं है चिल्लर है सब आत्मा के लिए एंजॉय
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है और क्या करते हो बताओ दिन भर देखते हो घुटुर घुटुर रात को आंख बंद कर लेते हो वही तो त्याग
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[हंसी]
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है। सही बता रहा है
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[हंसी]
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मैं। आप रात को बोलते हो क्या? मैं देखने का त्याग कर रहा हूं। सहज में होता है ना?
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ऐसे ये ऊपर के भी जो त्याग है ना घर छोड़ना और फिर घर में आ जाना यह सब ऊपर
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ऊपर है। कोई बड़ी चीजें नहीं है। तो जैसे कोई समाधि लगा लेता है 10 साल
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समाधि में चले। वो भी ऐसा ही है। कोई बड़ी चीज नहीं है। है ना? जैसे किसी को कोमा हो गया समझ लो। कोमा में चले गया
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वो। 2 साल 10 साल अब आंख खुल ही नहीं रहा है। वैसी समाधि लग जाती
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है। हां, मैं आत्मा भगवान के लिए भी सब ऐसी एंजॉयमेंट है कि अब मैं 20 साल तक
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समाधि में था। ब्रह्म रंद्र में चले गया और सब क्लोज
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बॉडी का अता पता नहीं है। समय का अता पता नहीं है। यह असली चीज नहीं है। यह यह एंजॉयमेंट है बस।
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जिसको अपन बहुत बड़ा-बड़ा मान लेते हैं ना ऐसा कुछ नहीं है। वो क्रियाएं हठ योग में आप सुषुमना
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में चले जाओ अपने आप ही लग जाता है। शरीर में सांप बिच्छू चलते रहेंगे आपको पता नहीं चलेगा।
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10 साल 20 साल हो जाता है। थोड़ा मेहनत करोगे तो आ जाता है। लेकिन वो इन चीजों को
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कभी भी ना वो बहुत बड़ी चीज है। ऐसा नहीं समझना।
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यह सब एंजॉयमेंट है।
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तो आप इन सब से खेल रहे हो और आपको पता नहीं है कि आप खेल रहे हो बस वही बता रहा हूं कि आप खेल रहे हो।
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खत्म बात यह लीला चलती रहती
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है इसलिए मस्त रहो बेफिक्र रहो एकदम
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बेफिक्री जो हो सो परेशान भी हो जाओ तो बेफिक्र रहना ना
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यार। तब तो आप असली वाले बेफिक्र हो। हम क्या सोचते हैं? हमको परेशानी आए ही
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मत। ऐसा नहीं होता। वो भी जीवन का एक हिस्सा है। दुख आए
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ही मत। ऐसा नहीं
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होता। सब आ जाए। बोलो। मस्त रहो। कुछ ना आए तो मस्त रहो। मैं तो हूं ही।
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तो ऐसा यह जो पूरा सिस्टम है ना खेल का बहुत मजेदार है। बहुत मजेदार है। अब जीवन
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भर कोई पुरुष है तो स्त्री में उसका अट्रैक्शन रहता है। मरता है अगले जन्म में वो स्त्री बन जाता है। जहां ज्यादा
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अट्रैक्शन है वही वो बन जाता है। फिर वह पुरुष के प्रति अट्रैक्ट होता है। फिर वो स्त्री फिर पुरुष। ऐसे आप हजारों जन्मों से कर रहे हो।
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पूरा आप आनंद ले रहे हो
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और फिर कभी देवता भी बन जाते हो।
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हां। सब चलता रहता है। बहुत पुण्य करते हो ना तो देवता बन जाते।
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पुण्य का जब वह खत्म होता है तो फिर से मनुष्य योनि में आ जाते हैं। यहां पुण्य पाप मिश्रित कर्म रहते हैं। है
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ना? फिर आत्मा में जाते हो तो पाप पुण्य दोनों से परे। यह भी एक लीला
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है। हां। हां ये पूरी लीला है टोटल ज्यादा पाप ही पाप किए तो फिर वो
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जानवर और ये वो दानव की योनि में जाते हो ऐसा नहीं है कि मनुष्य योनि से आप
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ड्रॉप नहीं करोगे याद रखना 99% तो ड्रॉप नहीं होता इससे अपग्रेड
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ही होगे आप लेकिन आपने बहुत गंदे कर्म किए मारकाट मचा दी या बहुत गलत किया तो नीच
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योनियों जाना पड़ेगा आपको पशुतल में दानों की योनि में सब होता
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है तो ये सब चलता रहता
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है तो ये जो भी मैं शुरू से अभी तक आपको बताया जिसने ये सबको
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जाना जो भी मैंने बताया जिसने उसने यह सब जाना।
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वह यह सब होते हुए भी यह सब नहीं है। जानने वाला सब होते हुए भी मैं आत्मा जानने वाला
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यह सब नहीं है। खेलते हुए भी वो नहीं खेल रहा है।
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नहीं खेलते हुए भी वो खेल रहा है। लेकिन दोनों पॉइंट है। दूसरा पॉइंट आपको पता नहीं है। और अब पता है
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[हंसी]
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तो खूब मजे लो।
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हां। बस इस भ्रम में मत रहना कि मैंने जो भी बता दिया वो आप समझ
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गए। समझ गए तो मजा किरकिरा हो जाएगा ना यार।
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डन जैसा कभी नहीं होता। हरि अनंत हरि कथा अनंत यहां डन कभी नहीं होता।
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हां जी तो सभी को प्रेम प्रणाम