0:18
नमस्ते गुरु जी प्रेम प्रणाम आपका सत्संग सुनने के बाद मेरे को ऐसे फील हो रहा था कॉन्शियसनेस एक्सपेंड हो गई है
0:26
ना काफी एक्सपेंड हो गई तो ये मैंने ने एक्सपीरियंस एक गुरु को बताया। वो भी इनलाइटेंड बाय ओशो मतलब सतगुरु है।
0:35
उन्होंने बोला कि अब उसको कांटेक्ट कर मतलब उसको कांटेक्ट कर। मैंने पूछा कैसे तू नाभि के थोड़ा सा ऊपर 2 इंच ऊपर उसको
0:45
कांटेक्ट कर। फिर एक्सप्लोजन होगा। ऐसे कुछ बताया था उन्होंने।
0:48
देश विदेशों में बहुत बम फूट रहे हैं। कम है। अपने को अंदर क्यों करना है यह सब? हां।
0:59
यहां युद्ध चल रहे हैं दुनिया भर के।
1:01
मिसाइलें यह वो अपने अंदर क्यों यह सब करना है? ये सब फॉल्स है। चक्करों में मत रहो ऐसे गुरुओं के। है ना?
1:12
नाभि के ऊपर और आज्ञा चक्र के ये और उसके सेंटर में और फिर मतलब ये सब टाइम
1:20
पास है। है ना? थोड़ा बचो। सावधान रहो।
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बस यही पूछना था आपसे पहले वही मेरे दो थे वो भी
1:43
मतलब आपको फोटो दिखाऊंगा नहीं फोटो वोटोो मत दिखाओ
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सम्मान करो जिससे जो भी सीखे हो है हां बट
1:58
ये फॉल्स है सारी चीजें
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थोड़ा ओशो को अगर को सुनो सुने हो ओशो को हां लेकिन आप भी वर्ड सीधा हिट करते हैं।
2:19
अरे वो तो ठीक है।
2:22
बट थोड़ा उनको भी सुनो अशोक को तो थोड़ा क्लिटी आएगी।
2:27
ओके अष्टावक्र महा हां अष्टावक्र महागीता अशोकी बहुत ही
2:34
अद्भुत है। सारे ऑडियो वीडियोस सब बहुत अद्भुत है उनके इंग्लिश हिंदी
2:42
तो उसको सुनो थोड़ा सा तो आपको एक क्लिटी आएगी।
2:55
और एक अच्छी लाइफ अपनी जियो आनंद से प्रेम से कंप्लीट लाइफ को बहुत अच्छे से जियो।
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ओके। क्या नाम है आपका? सर्वेश अभी सिंग स्टार्ट किया मैंने।
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बहुत ही अच्छा है।
3:22
सिंगिंग, डांसिंग यह सब बहुत ही सुंदर है।
3:33
तो जब भी कोई संगीत हम बजाते हैं, जो भी गिटार है या वीणा है या जो भी है
3:43
उसमें बहुत हैवी बीट देते हैं क्या अपन?
3:49
नहीं ना जिससे कुछ ब्लास्ट हो जाए।
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नहीं देते ना तो वो चीज जब आप अपनी बाहर की लाइफ में नहीं देते तो अपने अंदर क्यों करना चाहोगे?
4:05
ये सब फॉल्स मैसेजेस है ना? थोड़ा अलर्ट रहो। ओके।
4:15
हां जी।
4:18
प्रणाम जी नमस्कार
4:26
नमस्कारम जी राकेश यस राकेश जी कैसे हो
4:37
भगवन ये कहना चाहता था कि ओशो को मैंने भी बहुत सुना था कई साल 810 साल सुना लेकिन
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जो संतुष्टि वाली बात है ना वो नहीं हो रही थी और फिर आपको सुनने के बाद तो मुझे नहीं लगता कि अगर किसी ने आपका एक सत्संग
4:53
भी ढंग से सुन लिया ना इंपॉसिबल है वो बंदा कहीं किसी और को सुनना उसको ठीक लगे
5:01
क्योंकि आपने शुरू वहां से किया है भगवान जहां से अब तक के सारे बुद्ध पुरुषों ने खत्म किया है ना वहां से आपने शुरू किया
5:10
है मुझे ऐसा लगता है और नहीं वो राकेश जी सच है सत्य है बट
5:19
अभी जो आए थे कुछ मित्र वो या वो एक लेडी थी तो उनके लिए वो बेसिक थोड़ा जरूरी है।
5:26
है ना?
5:28
इसलिए मैंने उन दोनों को कहा कि थोड़ा ओशो को सुनो थोड़ा एक मैच्योरिटी आ जाए। है ना?
5:38
अब तो भगवान आपको बोल रहे हैं मतलब वो रेंज चल रही है कि आपके जो पुराने हैं ना मेरे पास आपके 80 90% सारे सत्संग मेरे
5:45
पास सेव है लेकिन मैं सोच रहा था कि पुराने भी जब मैं कभी दिल करे तो वो भी सुन लूं मतलब वो पुराने भी अब जो आपकी
5:54
प्रेजेंट में जो दे रहे हो ना वो पुराने भी सुनने से ऐसा लगता है यार ये नहीं अब तो जो लेटेस्ट है ना वो सुनो
6:04
हां अभी बिल्कुल बहुत स्ट्रेट चल रहा है अभी लाइव में बहुत
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और बस फिर तो वहां ना इनलाइटनमेंट ना अनंत
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ना ब्रह्मांड ना ये ना वो बस फिर मतलब मैं की भी जो विशेषता आप बता रहे हैं ना वो भी
6:25
सारी पुराने सत्संगों में अब तो बस उनको शब्दों में क्या कहूं
6:33
थैंक्स अ लॉट थैंक्स अ लॉट हां राकेश जी प्रणाम
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प्रणाम
7:23
यस है कोई कर लो टॉक ये बंद होने वाला है ये Google
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मीट ज्यादा दिन नहीं चलेगा। अब यहां लाइव ही चलेगा सत्संग कुछ दिन की बात है।
7:53
भाई ओशो के पास वह ट्रिक है कि बच्चा नहीं मानता है तो उसको बिल्कुल एक कहानी
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सुना के फिर उसमें उस सत्य को डालते हैं।
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वो जबरदस्त ट्रिक है।
8:15
बड़ा एक हर एंगल से आपको जो फ्लेवर चाहिए वैसा मिल जाएगा।
8:22
हां। कहानी से नहीं तो हंसी मजाक से नहीं तो
8:30
सीरियसनेस से मतलब वो हर एंगल से सेटल करते हैं। आदमी
8:39
धारणाएं हटा के उनको सुने ना तो बहुत उनको सबको राहत मिलेगी।
8:46
था। यह पूरी धरती से मैं कहना चाहूंगा कि ओशो को पुरानी धारणाएं हटा के सभी सुनो।
8:57
सभी के सभी सुनो। तो ये धरती बहुत प्यारी हो जाएगी।
9:02
यहां प्रेम बढ़ जाएगा, सेलिब्रेशन बढ़ जाएगा, साइलेंस बढ़ जाएगा।
9:13
ओशो को सुनोगे बस तो भी हो जाएगा। कोई ध्यान व्यान करने का उसमें जरूरत नहीं है।
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प्रेम प्रणाम गुरु जी प्रेम प्रणाम मैं कनिका बोल रही हूं बोर से
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हां कनिका जी कैसे हो बहुत अच्छा चल रहा है मुझे और एकदम से इस
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बार तो मैं वापस आई तो एक के बाद चीजें अपने आप खुलनी शुरू हो गई अ ऑलमोस्ट आई दो
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साल हो गए मेरे को सुनते हुए पर मतलब अनुभूतियां होती थी पर वो मैं नहीं कभी भी
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खुला था इस तरीके से और मैं जैसे ही इस बार वहां से वापस आई तो एक-एक करके एकदम
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से ऐसे हुआ कि मैं से भी तो कुछ है ही नहीं। फिर मोक्ष किसको चाहिए? एकदम से ऐसे
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अंदर से आया। फिर वो रहा फिर कुछ और कि सब कुछ तो मैं में ही है तो मैं से ही अलग हो
10:31
जाता है। मैं में ही आ जाता है। तो कुछ अलग ऐसा है ही नहीं। कुछ चाहिए ही नहीं।
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ना बुद्धत्व चाहिए ना मोक्ष चाहिए और एक-एक जो भी आप सूत्र बोलते हो ऐसे एकदम खुल जाता है। एकदम जैसे आत्मा पीना शुरू
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हो गई एकदम से उन चीजों को। जैसे अभी पीछे आपने एक बोला कि मेरी दुनिया मैं ही हूं।
10:52
तो ऐसे उतरा मेरी दुनिया तो मैं ही हूं। हर एक की दुनिया वही है। वैसे ही हमें दिखता है।
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वैसे ही हमें सुनता है। वैसे ही हम उन चीजों को देखते हैं। उसी नजरिए से देखते हैं। और वो वो चीज इतनी गहरी थी कि वो
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आत्मा में भी उतर रही है और वो फिजिकल वर्ल्ड में भी वैसे ही है। एज इट इज है।
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एक्सजेक्टली मतलब वो सूत्र ऐसे नहीं है कि यह बहुत हाई रेंज या लो रेंज है। वो ऐसे
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है कि वो हर जगह फिट बैठता है। चाहे आप अह कोई जीव भाव से चले तो भी उसकी दुनिया वही
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है। चाहे कोई आत्मा भाव से चले तो भी उसकी दुनिया वही है। वो हर जगह उतरता है। हर
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जगह ऐसे लगता है। और मतलब ऐसे लगता फिर आज सुबह से आपका वो मैं सुन रही थी। मुक्त ही
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यहां मुक्त होता है। तो एकदम ऐसे फ्रीडम फ्रीडम हो गई कि मुक्त ही ऐसा मुक्त ही है।
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और ऐसे लगता है जैसे आप बोलते हो ना कि अभी
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आपने कल जैसे बोला कि यू नो अहम हरि में तुम जीव से चलते हो करके वो नहीं प्रकट होता। है ना?
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नारायण मानोगे तो वैसे ही प्रकट हो जाएगा वैसे ही होगा तो साइड से
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हरी के साइड से जब बोलोगे चलोगे तो तो ऐसे ही लग रहा था जैसे वो सिक्के का पहलू होते
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हैं दो तो आपने कॉइन को फ्लिप कर दिया है वो सिक्के का वो चेंज कर दिया कि तुम जल
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ही गलत साइड से रहे थे इधर से चलते तो एकदम कुछ है ही नहीं बहुत सिंपल है। हम इसको ऐसे ही कॉम्प्लिकेट करते हैं कि यह
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चक्र होना चाहिए, यह एनर्जी होनी चाहिए, यह भावनाएं हैं। कुछ ऐसा है ही नहीं। सब
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कुछ सिर्फ जस्ट साइड चेंज करने की जरूरत है। यहां से जब चलोगे, सेंटर से जब तुम
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सेंटर पे आ जाओगे तो फिर बाहर का सब कुछ एकदम खुलता चला जाएगा, क्लियर होता चला जाएगा। कुछ अलग ऐसे लगता ही नहीं। कुछ अलग
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भी नहीं लगता और मतलब बस एक ही जैसा रहता है। एक जैसा कहना भी थोड़ा रहता है करके
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ऐसा है। कुछ भी ना अच्छा ना बुरा ना ही कुछ नया सा ना कुछ पुराना और मतलब एकदम
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ऐसे मुक्त मुक्त वाली फीलिंग जैसे मुक्त है सब मुक्त ही है बस कुछ चाहिए ही नहीं
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कुछ और वो ही नहीं चाहिए और मुझे बार-बार हो रहा था मैं आपसे बताऊंगी। फिर मैं कॉमन प्लेटफार्म पे बताऊं ताकि काफी लोग होते
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हैं जैसे हमारे जैसे कि हम कई बार हेजिटेट करते हैं या कई बार लगता है कि शायद हम गलत चल रहे हैं। तो ऐसा कुछ भी नहीं है
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कि जैसे मेरा कोई बैकग्राउंड ही नहीं है मेडिटेशन का और इसका मैंने कभी कोई नाम जप मेडिटेशन कुछ भी कभी
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नहीं किया। मैं आपसे मिली। अपने आप आपके पास आने का एक लालच था। पता नहीं क्यों था। यह था एक्सप्लोर करना है। बस इतना ही
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था। ऐसे भी नहीं था। हां बुद्धा तू चाहिए ये चाहिए वो चाहिए करके कुछ भी नहीं। और अपने आप ही एक्सपीरियंसेस आपकी प्रेजेंस
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काफी है। आपको कुछ जानना समझने की जरूरत है ही नहीं। जितना हम जानने की कोशिश करते
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हैं दूर होते चले जाते हैं या बस आपके पास आए बैठे जाएं फिर आए फिर जाए और वो करते
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करते अपने आप आत्मनिष्ठा आ जाती है कोई एफर्ट नहीं है कि आपको नहीं चाहना भी
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एफर्ट है वो अपने आप घटित होता है तो ऐसे नहीं कि मैं नहीं चाहूंगी तो ऐसा हो जाऊंगी नहीं वो घटित हो जाएगा अपने आप
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छूटेगा आपको कुछ भी नहीं करना बस हमें आपके पास आना है। दैट इज़ और और कुछ करना
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ही नहीं है। बस यहां बैठे, आपकी प्रेजेंस में बैठे, बस उतना ही काफी है। वो अपने आप
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उतरता है। अपने आप घटित होता है। कुछ करने से कुछ होता ही नहीं है। ऐसा है।
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तो कनिका जी हां जी।
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यानी यह अभी आई थिंक एक दो महीने में ही
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यह आप में जो यह मैच्योरिटी आई है जी मैं बल्कि इस बार आई तो बहुत डिस्ट्रैक्टेड भी थी और मुझे लग रहा था
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मेरा आना वेस्ट ना हो गया हो जाए कहीं तो मैं जैसे ही वापस आई प्रभु जी एकदम चेंज
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एकदम चेंज हो गया अपने आप ही हो गया वो हम
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बहुत ही परफेक्ट रिदमम आ गया है अब आपका एक्यूरेट एकदम हां
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और बहुत फास्ट आ गया है ये। यह एकदम खुशबू भी हां एकदम खुलता जा रहा है प्रभु जी एकदम
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अपने आप ही आप जो भी सूत्र बोलते हो एकदम ऐसे खुल जाता है। एकदम से आत्मा में चला जाता है। कुछ जो भी बोलते हां ऐसा ही तो
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है। जैसे आप बोलते हो ये ऐसे वैसे हां यही तो है। ऐसा ही तो है। कुछ अलग कहा है। हम
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मतलब मुझे लगता है अध्यात्म से सिंपल चीज कुछ है ही नहीं। कोई चीज इतनी सिंपल है और हम इसको पता नहीं क्या मतलब ने इसको एक
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बबल बना दिया। इतना बड़ा ह्यूज जिसे आप बोलते हैं ना कि ओवरली कॉम्प्लिकेट कर दिया है। बट इससे सिंपल कुछ है ही नहीं।
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आपके होने से सिंपल क्या ही हो सकता है।
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और मुझे जो हिट किया एक बहुत खूबसूरत आपका पॉइंट कि बुद्धि नहीं लगाओ। सोचना समझना कुछ नहीं। बस चलते जाओ।
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जैसे ही आप सोचने समझने से हटते हो अपने आप ही वो उतरता जाता है। होता चला जाता
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है। कुछ करने जैसा है ही नहीं। होता है सब अपने आप से घटता है तो मुझे कई बार कुछ
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एक्सपीरियंस होते थे तो मुझे लगता था मैं बताऊं कहीं मेरे में यू नो प्राइड भी आ जाता है कभी-कभी जब हम लोग कुछ शेयर करते
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हैं तो लगता है हम बड़े स्पेशल हो गए हैं तो मुझे था एक स्टेबिलिटी आ जाए तब मैं बताऊं वो चीजें ताकि प्राइड ना आए करके तो
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अब ऐसा था मैं कुछ बताऊं नहीं अभी किसी किसी और को नहीं बोलना है ये सब है ना
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नहीं नहीं सिर्फ आपको सिर्फ आपको ही अभी आप अपना आत्म कल्याण करो और बहुत ही
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बेहतर जा रहे हो आप बेस्ट है आपकी लाइफ का भी सबसे बेस्ट है ये एक दो महीने जो भी आपने सुना है
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जी और ये ये एक आध दो महीनों में सत्संग भी बहुत प्यारेप्यारे हुए हैं। जी प्रभु जी
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अच्छा एक एक ऐसे मतलब उतर रहा है डायरेक्ट जैसे आप बोलते हो ना डग डग डग करके निकलता है
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वैसे डग डग डग करके उतर रहा है ऐसे डाउनलोड भी हो रहा है
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तो उस तरीके से है और मतलब बहुत अच्छा लग रहा है कि इतना सिंपल है हम क्या क्या सोच
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के क्या-क्या हम लगे होते हैं ऐसे हो जाए वैसे कुछ है ही नहीं बहुत सिंपल सिंपल है।
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बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु जी। तो ब्लेस्ड है हम लोग जो आपसे हम कनेक्ट हुए हैं और
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कई बार लोगों को लगता है कि नहीं नहीं आपने वहां से शुरू किया है। पर आप देखो तो आप बिल्कुल बिगिनिंग से भी शुरू कर रहे हो। आप बिगिनिंग और एंड दोनों एक साथ है।
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क्योंकि जन्म बिगिनिंग क्या है ना? सिंपल आपका होना है। जन्म मतलब सिर्फ सिर्फ होना और एंड भी सिर्फ होना है। आप उन दोनों को
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कनेक्ट करके चल रहे हो। हम बीच में इधर-उधर स्टोरीज बना के चलते हैं तो हमें लगता है कुछ और जाने कुछ और करें। बट आप
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दोनों को परफेक्ट कॉम्बिनेशन में लेके आते हो।
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वो है जी। नहीं बहुत अच्छा है। बहुत ही सुंदर है।
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मैं खुश हूं आपसे। बहुत प्रसन्न हूं।
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आप ये तो आपके वजह से हुआ प्रभु जी और हो ही नहीं सकता। इसका तो और कोई रीज़
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नहीं मेरे को मेरे को आप जब भी मिले हो ना मेरे को थोड़ा एक आपका सेंस रहता था। लाइक
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के उसको बोलूं तो एक चिंता रहती थी। एक वर्ड्स में बोल रहा हूं।
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जी जी जी तो आज भी होता था। मुझे लगता था कि आप मेरा ध्यान रखते हो
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और मैं ऐसे ही फ्री रहना चाहती थी मतलब सम टाइम मैं आपके पास भी नहीं आती थी अवॉइड करती थी कि यू नो कई बार बचना चाहते हो ना
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तो पता है गुरु आपको पकड़ के सुधारेंगे तो आप बचना चाहते हो तो कई बार हम लोग थोड़ा सा वो भी करते हैं और मुझे पता है कि आप
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सुधारोगे और आप करोगे और मेरे को था एक स्टेबिलिटी आ जाए तो मैं आपके सामने आके खड़ी होऊंगी मैं बोलूंगी बात करूं अच्छे
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से तो वो कहीं ना कहीं आ रही है स्टेबिलिटी और बहुत मतलब अच्छा लग भी रहा है।
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मेरा ऐसा था कि मेरे को ऐसा लगता था आप जब भी आए हो सत्संग इसको ग्रहण क्यों नहीं हो रहा है? यह बुद्धि से तो समझ रही है। इसको
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ग्रहण क्यों नहीं हो रहा है? हो क्यों नहीं रहा है? ऐसा मेरे अंदर आता था। बीच-बीच में चिंता भी होती थी।
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जी और आज वो चिंता गई मेरी। बहुत ही अच्छा लग रहा है।
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नहीं तो बहुत-बहुत धन्यवाद है प्रभु जी के मैंने भी नहीं सोचा था आपने पिछली बार
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बोला था ना ये तो तुम्हारी लॉटरी लग गई है। तो मैंने हां कहा था कि हमारी लॉटरी ही लग गई है कि हम इमीडिएटली आपके पास आए
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और ऐसे होता जा रहा है। सब कुछ इतना क्विकली होता जा रहा है। सब बात बनती चली जा रही है और बहुत क्लियरली समझ भी आ गया
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है। ये पहले बुद्धि से आ रहा था बट अब उतर रहा है अब सीधा महसूस हो रहा है। अब अनुभव
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में है सब कुछ एकदम से बहुत ही सुंदर
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आत्मनशस्तिक रहो बहुत सुंदर ओके बहुत-बहुत धन्यवाद प्रभु जी
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हां जी प्रणाम जी प्रणाम प्रभु जी प्रणाम प्रभु जी