0:19
लकड़ी डंडे में है कि लकड़ी लकड़ी में है?
0:27
अरे बोलो ना यार।
0:30
लकड़ी लकड़ी में है। है ना? तो लकड़ी डंडे में है। यह क्या है?
0:39
मान्यता है। बस ऐसा ही है। आप संसार में हो। यह आपकी मान्यता है।
0:51
आप अपने आप में ही हो।
0:54
परमात्मा में ही हो। आप संसार में हो। यह आपकी मान्यता है।
1:02
संसार कहीं है ही नहीं। केवल माना हुआ है।
1:12
तो हमको क्या है? पहले बताया जाता है कि तुम संसार में हो। फिर मुक्ति मिलेगी, फिर यह होगा, फिर वह होगा।
1:23
और जब आपको बोध होता है ना तो आपको पता चलता है आप कभी भी संसार में
1:30
थे ही नहीं। आप सदा से परमात्मा में ही थे और परमात्मा ही थे।
1:41
हां। संसार कभी था ही नहीं। जैसे यह डंडा कभी है ही नहीं ना।
1:48
ऐसे ही है बस। संसार कहीं है ही नहीं।
1:59
सब माना हुआ है। है कहीं नहीं। जब हम एग्री हो जाते हैं। संसार है।
2:09
फिर उससे बचने का प्रयास करते हैं। हां।
2:19
तलवार ले आकाश से कोई लड़े वह वाली बात होती है।
2:54
रॉन्ग साइड से सब रॉन्ग होता जाता है।
3:01
है ना? मैं बॉडी हूं।
3:08
मैं संसारी हूं।
3:14
अब आप रॉन्ग साइड से चल रहे हो। अब सब रॉन्ग ही होगा। खुद को बॉडी मान के आप जो भी साधना करो, तपस्या करो वो रिलीफ होगा बस।
3:26
हां।
3:38
साइड चेंज करो। परमात्मा के साइड आओ। अस्तित्व के साइड आओ कि मैं अस्तित्व हूं।
3:53
यह पूरी अस्तित्व यह पूरा अस्तित्व मेरा बींग है।
4:01
पूरा अस्तित्व मेरी बीइंग है। अस्तित्व के साइड से चलो।
4:13
साइड चेंज करो। जीव की साइड हटाओ। बॉडी की साइड हटाओ।
4:20
अस्तित्व के साइड मैं अस्तित्व हूं।
4:30
अनंत व्यापक विराट सदैव मुक्त।
4:46
इस साइड से देखो जीवन को
5:01
अस्तित्व के साइड से देखने पर व्यक्तित्व कहीं दिखता ही नहीं है।
5:11
पानी कहीं पे भी व्यक्तित्व दिखता है क्या?
5:31
सारे सवाल, सारे संशय, डाउट या स्पिरिचुअल प्रॉब्लम्स व्यक्तित्व के साइड जीने से आती है।
5:42
बॉडी के साइड से जब आप जीते हो खुद को बॉडी मान के व्यक्तित्व मान के
5:49
अस्तित्व के साइड जियो परमात्मा के साइड उस साइड में क्या दिक्कत है?
6:00
अभी के अभी सब अस्तित्व के साइड आ जाओ। सब के सब जो भी सुन रहे हो कि मैं अस्तित्व हूं
6:10
और अस्तित्व के साइड से देखो ये अनंत अस्तित्व है।
6:18
अनंत ब्रह्मांड है। इसमें अनंत अज्ञात है। अनंत रहस्य है।
6:28
अवर्णीय है ये पूरा अस्तित्व।
6:31
वहां से देखो
6:42
अपनी साइड अस्तित्व के साइड कर दो क्योंकि आप अस्तित्व हो और यह अस्तित्व आपकी बीइंग है।
7:11
बॉडी के अंदर है आपकी बीइंग सिर्फ इतनी नहीं है। यह पूरा अस्तित्व आपकी बीइंग है।
7:32
तो अस्तित्व के साइड से देख रहे हो तो कोई संसार दिख रहा है क्या?
7:40
उनको ऑन करो। आप लोग बताओ म्यूट तो नहीं है विराज नहीं
7:48
नहीं नहीं प्रभु हां आपको जो भी डाउट है आप पूछो मेरे से
7:54
है ना जो भी आपको क्लिटी चाहिए जैसा भी डाउट होता है बेहिचक पूछो क्या पता आपकी
8:01
जिंदगी टर्न हो जाए हां उसमें संकोच मत करना पूछने में
8:09
बेफिक्री से क्योंकि ये आपकी जिंदगी का सवाल है हां और पूरी लाइफ आपने जो सत्य को दी है।
8:21
यह उसका सवाल है।
8:27
अब अस्तित्व के साइड से देखने पर व्यक्तित्व तो नजर ही नहीं आता।
8:37
क्योंकि व्यक्तित्व कभी था ही नहीं। कभी भी नहीं था।
8:44
कभी भी नहीं।
8:49
हम हमेशा व्यक्तित्व के साइड से अस्तित्व को देखते हैं।
8:57
जीव के साइड से भगवान को देखते हैं। हमारी साइड ही रॉन्ग है।
9:08
जीव के साइड से देखा गया भगवान केवल एक कल्पना है। एक स्वप्न है। माना हुआ भगवान है। वह एक्चुअल नहीं है।
9:21
व्यक्तित्व कैसे देख पाएगा अस्तित्व को बताओ।
9:29
अब इसको उल्टा कर दो। अस्तित्व के साइड से देखो।
9:36
भगवान के साइड से देखो। कि मैं अस्तित्व हूं।
9:46
अब इस साइड से जियो। मैं आत्मा हूं। मैं परमात्मा हूं।
9:54
इस साइड से देखो कहां है संसार?
10:00
कहां है बॉडी व्यक्तित्व है कहां?
10:14
और अस्तित्व की साइड से देखने पर कोई दूसरी साइड बजती ही नहीं है।
10:30
तो अस्तित्व के साइड से देखने पर
10:36
व्यक्तित्व तो था ही नहीं इसका बोध हो जाता है।
10:42
जीव कहीं था ही नहीं।
10:47
और जब जीव नहीं है तो उसकी जो प्रॉब्लम्स है, उसका जो वर्ल्ड है वह है ही नहीं।
10:54
उसकी साधनाएं, उसकी समस्याएं, उसकी स्पिरिचुअलिटी स्पिरिचुअलिटी किसके लिए है?
11:04
अध्यात्म जीव के लिए कि परमात्मा के लिए? जीव के लिए।
11:11
उस साइड से अपने को चलना ही नहीं है।
11:15
अब परमात्मा के साइड में परमात्मा ही है। बस मैं ही हूं।
11:33
तो अब इसमें कई लोग कई लोग सुन रहे हैं मेरे को।
11:39
उनको कई किस्म के डाउट्स आ रहे होंगे। अगर आ रहे हैं तो आप जीव के साइड से ही जी रहे हो और सोच रहे हो। तभी डाउट आएंगे।
11:53
प्रभु के साइड से कैसा डाउट आएगा?
12:00
कोई प्रश्न भी शंकाएं होती है से अगर सोच रहे हैं तभी हो रहा है।
12:07
हां जो भी हां परमात्मा महसूस करते तो शंकाएं खत्म हो जाती है।
12:17
हां यस
12:25
शंकाएं जीव को होती है ना और परमात्मा के क्षेत्र में आप आ गए अस्तित्व के
12:33
क्षेत्र में वहां कैसी समस्या है
12:39
और वह आपका एक्चुअल स्वभाव है। वही आप हो और यह केवल माना हुआ है। जैसे यह माना हुआ
12:49
है ना डंडा ऐसे ही जीव और व्यक्तित्व माना हुआ है। है कहीं नहीं।
13:02
हो गया।
13:04
इधर वाला एग्जांपल फिट नहीं हुआ क्योंकि आप अभी भी जीव के साइड से देख रहे हो। एक साधक के साइड से देख रहे हो।
13:16
है ना? तुरंत आ जाओ परमात्मा के साइड में। अस्तित्व के साइड में अनंत ब्रह्मांड है।
13:25
यह अनंत अस्तित्व है। इस साइड से देखो भला यहां तो फिट ही है सब।
13:38
देखो थोड़ा अच्छे से देखोगे ना तो विश्वास हो जाएगा। यकीन हो जाएगा।
13:48
अस्तित्व की ओर से देखो ना। आप केवल अपनी बॉडी की ओर से मत देखो।
13:59
अस्तित्व की ओर से पूरा अस्तित्व अनंत अस्तित्व
14:13
अस्तित्व की ओर से देखने पर यह सब कहीं दिखता ही नहीं है। यह जीव और
14:22
यह सब व्यक्तित्व कहीं दिखता ही नहीं है।
14:29
यह किसको प्रॉब्लम हो रही है या किसको डाउट हो रहा है, शंका हो रही है।
14:37
अस्तित्व की ओर से देखने पर यह दिखता ही नहीं है।
14:51
अब बताओ पूरा गया कि थोड़ा थोड़ा बचा है?
14:58
ऑनेस्टी से जीगा दिया पूरा भग
15:09
तो मैंने पूरा भगाया नहीं ये कभी था ही नहीं
15:18
है ना बस आप अपनी सही जगह में आ गए अस्तित्व में और यह तो कभी कभी था ही नहीं।
15:31
यह बॉडी और ये आप हो कैसे सकते हो? ये आप प्योर एकिस्टेंस हो।
15:44
बहुत सुंदर बहुत सर।
15:47
अच्छा बस अपने पे निष्ठा रखना। है ना
16:01
सच्चाई गहरी होती है
16:08
और इतने स्ट्रेट ट्रुथ को ग्रहण करना
16:16
उस पर कभी डाउट डाउट नहीं करना और कभी डाउट आपने आत्म मिथ्या का समझाया
16:27
था ना कि मैं हूं का भाव भी नहीं है तो आत्म मिथ्या है।
16:32
हम हम वो एक अलग चैप्टर है।
16:38
मैं हूं का भाव ही खत्म हो गया। उसको आत्मया हां मतलब जिसको हम मैं हूं समझते हैं वो मैं हूं का भाव खत्म हो जाता है।
16:53
एक हमारी समझ का जैसे परमात्मा होता है।
16:57
हमारी कल्पना का परमात्मा होता है। ऐसी हमारी समझ का एक मैं हूं हो जाता है।
17:04
हमारी कल्पना में एक मैं हूं रहता है। वह मैं हूं तो है ही नहीं कहीं।
17:12
अब अस्तित्व के साइड आ जाओ ना। यह मैं हूं है। पूरा अस्तित्व जब खुद को कहता है मैं हूं।
17:22
मैं अस्तित्व हूं। अस्तित्व खुद को जब कहेगा तो कैसे कहेगा?
17:29
मैं अस्तित्व हूं। वह असली मैं हूं।
17:42
अब आप अस्तित्व के साइड में आकर कह रहे हो कि मैं अस्तित्व हूं।
17:53
और मैं आपको एक चीज बताना चाह रहा था कि बाय द वे कभी डाउट होता भी है तो
18:02
अपने व्यक्तित्व अपने जीव वाले साइट पर डाउट करना।
18:08
अपने अस्तित्व और अपने परमात्मा वाली जो साइड है उस पर कभी डाउट मत करना।
18:17
हां वहां श्रद्धा रखना, भरोसा रखना कि आप वो ब्रह्म हो, परमात्मा हो, अस्तित्व हो।
18:28
नामों में मत फंसना। बहुत सारे नाम है। बहुत सारे धर्मों में बहुत सारे नाम है।
18:37
हमेशा भरोसा रखना कि अब मैं अस्तित्व ही हूं बस।
18:50
प्रभु एक बहुत प्यारा समझाया था सामने से अगर हम नफरत कर रहे हैं तो उसका मतलब हम
18:56
अपने से नफरत कर रहे हैं। अगर सामने से हम किसी से प्रेम कर रहे तो अपने आप से ही कर रहे हैं। बहुत
19:03
हम हम लगा तो लगा कि हम अपने आप से वात्सल्य भी करते
19:10
हैं। अपने आप से प्रेम भी करते हैं। हां किसी को दुख दो तो आप ही के पास आ जाता
19:18
है। आनंद दो तो वह भी आप ही के पास आ जाता है। क्योंकि आप ही हो ना। सामने कोई दूसरा है ही नहीं।
19:26
हां। वो एक अलग चैप्टर है। है ना?
19:41
यह भी जीव के साइड से है। किसी को यह दो तो वह आता है। वह करूं तो वह आता है।
19:47
अस्तित्व के साइड में आओ ना। पूरे एकिस्टेंस के साइड से देखो।
20:11
परम तृप्ति है बस
21:09
पूरा अस्तित्व ही आप हो बस।
21:45
ओके प्रणाम प्रणाम जी
22:24
प्रणाम जी
22:35
ना सुनो सुनो वो फिर आपका
22:40
जीव आ रहा है। सुनो सुनो सुनो
22:52
जब पहली बार आई मेरे को यह अनुभव हुआ या अभी ये अनुभव हुआ। यह जीव की साइड है।
22:59
अरे सीधा फेंको यह सब।
23:02
अस्तित्व की साइड वहां से जीना शुरू करो।
23:13
भूल जाओ आपका पास्ट आई थी। यह हुआ अच्छा लगा। वो भी एक जीव की साइड है। अस्तित्व
23:21
की साइड से जीने लग जाओ। बस नो कॉम्प्रोमाइज।
23:31
परमात्मा की साइड से जियो।
23:45
कि मैं ही परमेश्वरी हूं। उसी साइड से जियो बस।
23:53
अब परमेश्वरी की साइड से जियो अभी वहां से देखो
24:04
तो क्या लगता है आप कभी आए थे क्या हुआ था यह अच्छा अनुभव वो सब चाइल्डिश चीजें हैं
24:11
वो सब जीव की साइड है
24:20
अनंत अस्तित्व की साइड साइड जो आपकी असली साइड है जो आप खुद हो
24:32
एक बार में खत्म है बात
24:58
एकदम व्यापक अनंत अपार अस्तित्व उसी साइड से कि मैं अस्तित्व हूं।
25:09
मैं अनंत अपार हूं। उस साइड से जियो ना फेंको यह सब जो भी आपका नाम रूप है आए थे
25:18
गए थे यह हुआ वो हुआ कोई मतलब नहीं उसका
25:29
यस अब ठीक आ रहा है ओके हां जी
25:52
बिल्कुल इसी साइड से जीना है अभी। हां रोज-रोज नहीं आऊंगा सत्संग कराने।
26:07
कुछ
26:26
तो बचपन में सुनते थे ऋतु आए फल होए है नहीं भगवान श्री का भी एक वो था।
26:44
यहां तो फल पहले है। अस्तित्व पहले है ना?
26:48
अरे आप ही बताओ पहले व्यक्तित्व होगा कि पहले अस्तित्व होगा?
26:54
पहले अस्तित्व होगा ना? तो बस जो पहले उसी की साइड आ जाओ कि मैं अस्तित्व हूं। खत्म
27:01
बात पहले से फल है ना वो क्या ऋतु आएगी वहां पे
27:09
ग्रास ग्रोस बाय इट सेल्फ ये क्या है ये सब
27:16
ये तो डायरेक्ट मैं हूं मैं अस्तित्व हूं
27:22
फलों का फल
27:39
आप ही बताओ ना अगर जीव को मानते हो तो पहले परमात्मा है कि पहले जीव है? पहले
27:46
परमात्मा है ना? तो परमात्मा के साइड से जियो ना जीव के साइड से क्यों जी रहे हो?
27:53
पहले अस्तित्व है ना फिर व्यक्तित्व है। तो अस्तित्व के साइड से जियो।
28:02
वह आपकी एक्चुअल साइड है। कॉमन सेंस।
28:09
बस साइड चेंज कर लो।
28:19
फिर क्या समस्या है? क्या ध्यान, क्या ज्ञान, क्या बुद्धत्व? क्या अस्तित्व हो
28:24
आप यार अभी? वो फल अभी हो आप
28:43
एकदम डायरेक्ट स्ट्रेट
28:58
और मेरी बातों को अस्तित्व ही सुन रहा है। अस्तित्व ही समझ रहा है।
29:07
बॉडीवडी नहीं सुन रही है आपकी।
29:19
क्योंकि अस्तित्व से अस्तित्व होकर ही मिलोगे ना। व्यक्तित्व हो के नहीं मिल सकते।
29:26
परमात्मा से परमात्मा होकर ही मिलोगे। जीव होकर नहीं मिल सकते। नियम ही यही है।
29:33
समान समान से मिलता है।
29:37
और परमात्मा हो के क्या आप हो? सीधा परमात्मा की साइड आ जाओ। अस्तित्व के साइड
29:44
अनंत अपार अखंड
29:55
मैं अस्तित्व हूं। अरे मैं अस्तित्व ही हूं।
30:38
हां जी है कोई?
30:46
प्रणाम गुरुदेव हां प्रणाम जी गुरुदेव
30:54
मैं कह रही थी गुरुदेव कि मुझे ना इतना मतलब वो नहीं होता मतलब मुझे इतना एहसास नहीं हो पाता मतलब
31:02
हम हम गुरुदेव जैसे ना आपने बोला था अपनी महिमा जगाओ
31:10
हम तो मैंने ऐसा कल मतलब मुझे ये एहसास तो हुआ है जैसे आपने बोला आप खुद ही भगवान हो
31:19
हम तो तो मैंने मतलब सुबह से प्रैक्टिस करी थी गुरुदेव जैसे कि मतलब मैं खुद ही अपनी पूजा कर रही थी तो गुरुदेव मुझे ऐसा भान
31:27
तो आया था कि मैं भगवान हूं सुनो ना गुरुदेव
31:34
सुनिए व्यक्तित्व को अस्त अस्तित्व का एहसास नहीं होता।
31:43
है ना?
31:46
तो आप जो बोल रहे हो ना कि अस्तित्व का एहसास नहीं होता या महसूस नहीं होता।
31:57
वो व्यक्तित्व को नहीं होता। अस्तित्व को ही अस्तित्व का एहसास होता है।
32:05
आपको मैं भगवान हूं। तुम ऐसा वैसा करके पूजा नहीं करनी है। है ना? वो रॉन्ग है। नहीं महिमा जगाने के लिए।
32:14
अरे कोई सुनो सुनो सुनो महिमा नहीं जगाना है उसमें।
32:30
मैं अस्तित्व हूं। मैं परमात्मा हूं।
32:38
इस साइड में आ जाओ ना महिमा कुछ नहीं है वहां जगाना है
32:44
वो जीव जगाता है वो महिमा महिमा हां सीधा डायरेक्ट इसी साइड में आ जाओ
32:55
तो डायरेक्ट तुम नहीं आ पा रहे हो बाहर नहीं आ पा रहे हो तो भी कोई दिक्कत नहीं
33:02
है ना क्योंकि डायरेक्ट आप जीव को लाना चाह रही
33:09
हो। आप क्या सोच रही हो कि सुनो यार पहले सुना करो थोड़ा चुप रहा करो। है ना?
33:18
चलने दो उनको। डायरेक्ट जो है ना आप जीव को लाना चाह रही हो। आप क्या सोच रही हो कि आपकी बॉडी परमात्मा हो जाए।
33:29
आपकी आइडेंटिटी परमात्मा अस्तित्व हो जाए। आपका जो जीव भाव है वह परमात्मा हो जाए।
33:37
आप रॉन्ग जा रहे हो।
33:40
अच्छा हां आपका जो ये बाहरी रूप है बॉडी माइंड वाला ना वो परमात्मा नहीं होता।
33:50
मैं उसकी बात नहीं कर रहा हूं।
33:58
परमात्मा ही परमात्मा होता है। जीव कभी परमात्मा नहीं होता।
34:09
यह जो बॉडी है आपकी स्त्री की और जो भी आपका नाम है यह कभी परमात्मा नहीं होगा।
34:16
हां परमात्मा ही परमात्मा होता है। अस्तित्व ही अस्तित्व होता है।
34:27
अब जो भी आपको सेंस आ रहा है थोड़ा सा तो आता ही है हर किसी को।
34:33
अस्तित्व हां कि अस्तित्व का सेंस है ना कि कुछ अस्तित्व जैसा है। हां।
34:41
हां। तो जो सेंस है अस्तित्व जैसा थोड़ा सा भी
34:48
उस सेंस में जाओ अस्तित्व के सेंस में
34:55
अरे डूबो ज्यादा बोलो मत अस्तित्व के सेंस में जाओ अनंत है
35:06
व्यापक है अखंड है अपार है।
35:19
अनंत ही अनंत है। अस्तित्व में अनंत अनंत
35:27
कोई सीमा नहीं असीम विराट
35:42
बस यह अस्तित्व के साइड आ गए। अब इसी में रहो बस।
35:50
ये सेंस आया ना पूरे विराट का अस्तित्व का।
35:55
गुरुदेव फिर क्रिया नहीं नजर आ रही। केवल मैं नजर आ रही।
36:00
अरे यार आप क्या सुन रहे हो? क्रिया की बात कहां से आ गई? कौन सी क्रिया करनी है आपको? बॉडी नहीं आ रही मतलब 31 में आ रहा।
36:10
बॉडी नजर नहीं आ रही तो ठीक तो है। वहां बॉडी है ही नहीं।
36:17
अस्तित अस्तित्व में रहो। 10 मिनट बाद आना। आप डूबो चुप रहना।
36:24
एकदम चुप और डूबो अस्तित्व में।
36:30
एकदम अनंत में व्यापक में।
36:37
चुपचाप इसमें डूबे रहो अभी 101 मिनट
36:46
अस्तित्व ही अस्तित्व ख्याल भी उसी का क्रियाविया अपना बॉडी ख्याल छोड़ो
36:53
अस्तित्व का ख्याल अनंत का व्यापकता का
37:03
मेरे को मत देखो आंख आंख बंद करो और डूबो 15 मिनट बाद फिर आना आप बताना
37:12
अस्तित्व ही हो जाओ हां
37:20
सुनते वनते नहीं हो यार ये तो तुरंत क्लियर होता है
37:36
अपार अस्तित्व है मालूम अखंड कोई पारावार नहीं है
37:46
वो मैं हूं मैं अस्तित्व हूं।
37:56
अरे आपको दो चॉइस दी जाती है। मैं व्यक्तित्व हूं और मैं अस्तित्व हूं। तो चॉइस तो अच्छी करोगे ना जीने के लिए।
38:07
अपने लिए बेहतर चुनते हो ना आप तो अस्तित्व ही चुनोगे ना भाई।
38:17
मैं जीव हूं। मैं परमात्मा हूं। मैं परमात्मा ही चुनोगे। वो आप चुनना भी चाहते हो।
38:27
चुन ही लो आज कि मैं अस्तित्व हूं। मैं परमात्मा हूं।
38:43
गलत चुना हुआ फेंको। बॉडी वाला, जीव वाला, व्यक्तित्व वाला
39:07
अनंत अपार अस्तित्व मैं हूं।
39:13
बस अस्तित्व के साइड आना मतलब अस्तित्व ही हो जाना।
39:19
परमात्मा के साइड आना यानी परमात्मा ही हो जाना।
39:25
क्योंकि परमात्मा होकर ही परमात्मा से मिलोगे। अस्तित्व होकर ही अस्तित्व से मिलोगे।
39:33
वहां पर सारी साइड खत्म हो जाती है।
39:56
हां जी कितना क्लियर है देखो कि मैं अस्तित्व हूं।
40:06
स्ट्रेट
40:57
सारी समस्याएं, डाउट्स, शंकाएं व्यक्तित्व के साइड से है। अस्तित्व के
41:04
साइड से कोई बात ही नहीं है। यह सब
41:11
अनंत अस्तित्व है बस अस्तित्व के साइड से अनंत परमात्मा
41:33
आप क्या नर के साइड से जीते हो कि मैं नर हूं। अरे मैं नारायण हूं।
41:39
साइड नारायण की रखो ना। मैं नारायण हूं।
41:49
मैं कैसे नारायण ये नर बात करता है इस टाइप की। जीव बात करता है।
41:57
ये जीव की साइड से पूछा गया सवाल है। मैं कैसे नारायण? मैं क्या? मेरे में कहां शक्ति है? मेरे में वो है। ये सब जीव की साइड है।
42:07
अरे मैं नारायण हूं।
42:12
नारायण हूं। अहम अहम हरि
42:28
एकदम क्लियर है। हां सिंपल एकदम।
42:51
क्योंकि इस साइड में आ गए आप अस्तित्व के परमात्मा के साइड में कि मैं परमात्मा हूं। मैं अस्तित्व हूं
42:59
तो मैं अस्तित्व हूं कि साइड में आ गए तो आपका पूरा चैप्टर क्लोज है।
43:07
वो दिखेगा ही नहीं। आपका पास्ट, आपकी बॉडी, आपका व्यक्तित्व
43:22
सीधा बात खत्म है।
43:52
पूरा छाया हुआ है अस्तित्व और आप अस्तित्व हो प्रत्यक्ष
44:01
अखंड अपार
44:11
अनंत अनंत अनंत को भी मल्टीप्लाई कर दो अनंत से वो मैं हूं।
44:25
देखो कितना क्लियर है।
44:32
अब आ रहा है। सबको आ रहा है जो भी सुन रहे हो।
44:40
क्योंकि आप अस्तित्व हो तो कैसे नहीं आएगा?
45:00
अब ये परमानेंट रहे यह जीव बात करता है। ऐसे व्यक्तित्व बात करता है।
45:09
अरे अस्तित्व परमानेंट है और मैं अस्तित्व हूं।
45:34
बस मैं अस्तित्व हूं।
45:54
मतलब मैं आप इतने वो सोचते हो कि मैं देह हूं बोलने में आपको अच्छा लगता है। मैं
46:03
स्त्री हूं, मैं पुरुष हूं। बोलने में बड़ा आपको अच्छा लगता है। वह जीव को अच्छा लगता है
46:10
और मैं अस्तित्व हूं। बोलने में आपको प्रॉब्लम होती है। ये क्या बात हुई?
46:18
मैं जीव हूं बोलने में आपको बड़ा अच्छा लगता है। मैं परमात्मा हूं बोलने में प्रॉब्लम होती है।
46:26
सोचो आपने ही ट्रैप डाले हुए हैं ना अपने लिए।
46:33
नहीं गुरुदेव नहीं लगता बोलने में आप शांत रहो बोला हूं आप फिर बोलने लग गए
46:44
मतलब कैसे आप देखो ना आप अपने ही ट्रैप्स देखो
46:57
मैं व्यक्तित्व हूं आपको ये प्रिय है। अरे मैं अस्तित्व हूं। ये प्रिय होना चाहिए ना।
47:06
और आप हो। यह ज्यादा सहज है, ज्यादा प्रिय है।
47:22
क्योंकि आप अस्तित्व ही हो।
47:42
देखो आपका कोई और छोर नहीं है। देखो कि आप अस्तित्व हो। मैं अस्तित्व हूं।
47:48
और अपने आप को देखो। कोई और छोर नहीं है आपका।
47:54
आदि अंत को जासु न पावा
48:15
अब शिव पुराण में शिवलिंग रहता है।
48:18
ब्रह्मा जी और विष्णु जी विष्णु जी ऊपर जाते हैं। ब्रह्मा जी नीचे
48:27
जाते हैं शिवलिंग के कि इसका और छोर कहां तक है?
48:34
तो खरबों साल खरबों वर्ष जाते जाते तो शिवलिंग का और छोर ही नहीं मिलता।
48:50
फिर दोनों वापस आ जाते हैं, मिलते हैं।
48:55
तो यह सारे जो पुराणों में कहानियां हैं और यह सब यह आप ही की कहानी है। वह
49:02
अस्तित्व है। वो आप हो मैं है। वह शिवलिंग
49:08
आपकी आत्मा है। उसका कोई ओढ़ छोड़ नहीं है।
49:20
विष्णु पुराण में जाओगे तो उसमें मेन विष्णु को बनाया गया है कि विष्णु जी से फिर ब्रह्मा निकले फिर
49:28
शिव जी निकले तो ऐसे
49:35
सारे पुराण सारे उपनिषदों में एक हीरो रहता है मेन मेन परमात्मा वो आप हो वो वो
49:44
मेन वो कभी शिव हो जाते हैं। वो मेन मेन हीरो मेन परमात्मा कभी हनुमान जी हो जाते हैं।
49:53
कभी गणेश जी हो जाते हैं। कभी राम जी हो जाते हैं। कभी कृष्ण हो जाते हैं।
49:59
है ना? वो आप हो।
50:04
उसका आदि अंत नहीं है। शिव राम कृष्ण भी आदि अंत नहीं है।
50:10
वह कभी आपकी बॉडी बन गया है।
50:17
आदि अंत को जासु न पावा
50:25
आप खुद ही अपने को लिमिटेड करते हो अनलिमिटेड
50:39
तो अस्तित्व की ओर से जीने पर कि मैं अस्तित्व हूं
50:57
महाजीवन।
50:59
बॉडी में सीमित जीवन है। बाहर महाजीवन है ना। जैसे बॉडी में जो हवा है वह सीमित है।
51:06
बाहर हवा व्यापक है तब आप बॉडी में श्वास लेते हो ना। ऐसी
51:15
बाहर महावन है। तब इस बॉडी में जीवन है।
51:20
और यह महाजीवन अस्तित्व आप हो।
51:29
मैं महाजीवन हूं।
51:32
कभी ना खत्म होने वाला जीवन
52:12
देखो आप कितने जन्मों से और बचपन से अभी तक रॉन्ग साइड में जी रहे हो
52:23
और जैसे ही अभी आधे घंटे के लिए साइट चेंज किए तो वह एहसास आने लग गया केवल आधे घंटे
52:30
की चेंजेस से पूरा अस्तित्व ही अस्तित्व भास
52:57
क्योंकि प्रकाश के आते ही अंधकार चाहे कितना ही पूरा ना हो वो हट जाता है।
53:04
तुरंत हटता है।
53:07
अस्तित्व के आते ही पता नहीं चलता यह व्यक्तित्व कहां गया। वहां कोई मृत्यु ध्यान थोड़ी ना करना पड़ता है।
53:16
आपने अपनी साइड चेंज की। अस्तित्व के साइड आ गए। सब कंप्लीट
53:26
संपूर्ण है यह। बिल्कुल।
53:52
यस अब अस्तित्व ही टॉक करेगा मेरे को जिसको जीव जैसा फील आ रहा है व्यक्तित्व जैसा वह
54:01
चुप रहेगा वह अभी और जिए इसमें
54:09
जिसको लग रहा है मैं अस्तित्व हूं जो कि आप हो
54:22
मेरे से करो सत्संग टॉक करो सहज है एकदम
55:04
कौन सबसे पहले अस्तित्व को प्रणाम क्योंकि अस्तित्व ही अस्तित्व को बता सकता है।
55:11
प्रणाम जी भगवान ये मुझे कई दिन से महसूस हो रहा है मतलब एक बार आपसे हम पूछ रहे थे मेरे को
55:19
लग रहा है मैं नहीं है बस अस्तित्व है जैसे आप बताए थे हां ये बात सही है और अस्तित्व ही मैं बताता है तो उसी दिन से
55:26
जो सब बता रहे हैं आप पहले से उसे ये बात उसी दिन से छाया हुआ है मेरे पे जैसे मैं प्योर
55:33
एक्सिस्टेंस हूं मतलब मुझे पता है कि आप अस्तित्व नहीं है और हम इधर से भी अस्तित्व नहीं बोल रहा है ऐसा है बस
55:41
मैं जैसा कुछ नहीं है हम
55:47
और तो इसमें इसमें एक और बात है शार्प कर दूं मैं
55:55
कि मैं नहीं हूं अस्तित्व ही है यह रॉन्ग है
56:04
मैं अस्तित्व हूं यह फाइनल है अगर अगर छने यह बात नहीं है मतलब ऐसा भी
56:14
है। अगर मैं यह बात नहीं बोलूं तो बस मैं ही हूं। तब मैं अस्तित्व नहीं बोल सकता।
56:18
जब मैं अस्तित्व बोलता हूं तब अस्तित्व ही है। अगर अस्तित्व मैं नहीं बोलता हूं तो बस मैं ही हूं। ऐसा है। हां। और इसका भी सुप्रीम बस मैं हूं।
56:28
हां। यह सही है।
56:33
बट वहां ऐसा नहीं है। इतना क्लियर करने जैसी चीज नहीं है यार। सीधी बात मैं हूं या मैं अस्तित्व हूं।
56:44
एकदम श्योर ऐसा ही है भगवान।
56:52
हां यस ऐसा ही है।
56:58
एक बात तो मुझे बहुत दिन से जिस दिन मेरे से यह हटा उस दिन से पता है कि आप अस्तित्व ही बोल रहे हैं। ऐसा मेरे को भास
57:06
नहीं ऐसा ही है और आप नहीं आप अस्तित्व बोल रहे हैं। नहीं इधर की साइड नहीं अपनी साइड से बताओ।
57:14
नहीं अस्तित्व ही है। आप मैं जो मैं बताना चाहता हूं वह मैं नहीं बता पा रहा हूं।
57:21
हां ओके बस ठीक है फिर नमस्ते हां प्रणाम छ
57:36
मतलब वहां पे ऐसा क्लियर कर रहे हैं ना जैसे अभी हम लोग वैसा भी नहीं है
57:42
अस्तित्व में ऑलरेडी फ्रेश सब क्लियर है हां
57:54
कि मैं नहीं हूं। मैं हूं, मैं वो हूं।
57:56
बात ही नहीं है। सब मैं हूं। बस मैं अस्तित्व हूं।
58:17
अभी ऐसा नहीं हुआ कि अस्तित्व का कोई पोर्टल खुल गया। ऐसा कुछ नहीं हुआ। यही है सदा से।
58:26
अभी आपकी नजर हटी जो टॉर्च मार रहे थे ना अपने व्यक्तित्व पे।
58:32
अब आपका फोकस पूरे अस्तित्व पे हो गया।
58:36
प्रकाश पूरा दिए का प्रकाश होता है ना सब ओर सूर्य का प्रकाश सब ओर जाता है
58:44
अब आपकी चेतना का प्रकाश सब ओर जा रहा है पूरे अस्तित्व में अब टॉर्च जैसा फोकस नहीं हो रहा है बॉडी
58:54
में जीव में पूरा व्यापक
59:10
हां जी एनीबडी प्रेम प्रणाम प्रभु
59:17
हां प्रेम प्रणाम
59:31
हां जी बस प्रभु अहो भाव प्रकट करना था प्रभु
59:40
आज ग्रेटट्यूड ग्रेटट्यूड थैंक यू प्रभु
59:49
प्रभु प्रणाम जी
59:57
प्रणाम गुरु जी हां प्रणाम
1:00:07
प्रभु जी पंकज बोल रहा हूं प्रभु जी पंकज वंकज नहीं है यार फिर बकवास
1:00:15
हंसते तो बोल रहा हूं हां जी प्रभु जी बिल्कुल कहां अटके हुए हो पंकज वंकज में नहीं प्रभु जी ऐसा कुछ नहीं है बट वैसा
1:00:24
एहसास हुआ कि मतलब कुछ टाइम के लिए ऐसा लगा कि अदरनेस नहीं है सिर्फ मैं ही मैं हूं
1:00:31
ना रॉन्ग यह फॉल्स मैं हूं मैं। अभी इस पॉइंट को जियो और ठीक है।
1:00:44
ये बाउंड्री छोड़ो अपनी जीव वाली पंकज वाली।
1:00:49
अस्तित्व के साइड आ जाओ एकदम से कि मैं हूं अस्तित्व। अभी अभी नहीं तो कभी नहीं।
1:00:58
अरे हूं ना यार उसमें क्या
1:01:17
प्रभु प्रेम प्रणाम प्रणाम हां प्रणाम
1:01:25
इस समय सब उड़ गया है मतलब ऐसे लग रहा है कि हम अस्तित्व की तरफ से देख रहे हैं तो
1:01:32
सामने कुछ नजर ही नहीं आ रहा यस ना दुनिया ना अपना ना देह भाव ना मन
1:01:42
बुद्धि कुछ भी नहीं नजर आ रहा सब शून्य मतलब
1:01:48
हम हम तो अब यहीं पे एकदम सही जा रहे हो
1:01:57
अस्तित्व में ही रहो अब कुछ देखो ही मत देखना भी क्या है ये बॉडी को ये दुनिया को
1:02:04
देखना भी क्या है तो ऐसा ही है ये वैसे नजर भी आ भी नहीं रहा है और देखना
1:02:10
भी क्या है बस अब आपके होने का आनंद है और आप अस्तित्व स्वरूप हो
1:02:19
बहुत ही सुंदर बहुत ही मतलब प्रसन्नता सी हो रही है कि ऐसा पहले कभी क्यों नहीं देखा
1:02:28
हां एक निर्भरता सी और एक बोझ उतर गया एक थकान
1:02:35
उतर गई जन्मों की सब प्रतीत हो रहा ऐसे हां वो पूरा डिलीट हो जाता है। अस्तित्व
1:02:44
के साइड आते ही परमात्मा के साइड आते ही यह सब
1:02:51
डिलीट हो जाता है। एक ही क्षण में आभार स्वामी जी बहुत ओ भाव ब्रैकेट
1:03:02
अच्छा यही आपकी ओरिजिनल साइड है।
1:03:12
यही आपको बस कंप्लीट एग्ज़िस्टेंस
1:03:19
पूर्ण संपूर्ण बहुत ही सुंदर
1:03:29
आज प्रणाम जी
1:03:36
प्रणाम स्वामी जी
1:03:51
प्रेम प्रणाम प्रभु प्रेम प्रणाम जी
1:03:58
प्रभु जो कुछ है वो केवल मैं ही है यह सुनके तो ऐसा मतलब पेट में ऐसी तितलियां
1:04:05
उठ रही है ऐसे गुदगुदी है कि बस क्या जो कुछ है वो यही है बस
1:04:15
जो कुछ है वो मैं आवाज कट रही है थोड़ी आपकी जी जो कुछ है वो केवल मैं है
1:04:24
मैं यस यस हां ये सुनके मतलब कोई ठिकाना नहीं है प्रभु बात का मतलब इसका निष्ठा होने का इस बात
1:04:33
में हां ये सत्य है मैं के अतिरिक्त तो कुछ है ही नहीं।
1:04:40
जी जी परम सत्य तो पहले सुनिए आप पहले यह जीव भाव हट जाता है। व्यक्तित्व का भाव हट जाता है।
1:04:51
अस्तित्व का भाव आ गया और भाव नहीं आप अस्तित्व ही हो गए। और फिर लास्ट में अस्तित्व का भी वो नहीं रहता। बस मैं ही हूं।
1:05:03
हां। बहुत ही सुंदर।
1:05:09
प्रेम प्रणाम प्रणाम जी प्रेम प्रणाम बट इस पॉइंट पे अभी सब जियो मैं अस्तित्व
1:05:17
हूं यस
1:05:31
प्रणाम प्रभु श्री हां प्रणाम प्रभु श्री अभी जैसे आपने बोला कि अपने
1:05:39
अस्तित्व में जिए और जब जब से मैं ये सुन रही हूं सत्संग बैठी हूं तो प्रभु श्री जब
1:05:47
से मैं आपने बोला अपने अस्तित्व में रहिए तो जब से मैं इसके अंदर
1:05:55
जी रही हूं आई मीन मेरे को बताना नहीं आ रहा आपको बट मुझे लगता है कि
1:06:03
मैं इतनी आई मीन आई एम सो हैप्पी इतनी खुश हूं मैं अंदर से और प्रभु श्री
1:06:09
सच बताऊं तो मुझे लगता है कि यही स्थान था मेरा यही जगह थी मैं मैं कहीं भी थी मुझे
1:06:17
नहीं मालूम पर मुझे लग रहा है कि जैसी कोई खोई हुई चीज मिल जाती है ना तो मैं वैसे
1:06:23
ही अपने स्थान में पहुंच गई हूं मतलब दिस दिस दिस थिंग बिलोंग्स टू मी
1:06:31
बट आप सुनिए अ अभी थोड़ा जो आइडेंटिटी की साइड है वो बची
1:06:39
हुई है। ठीक जा रहे हो गलत नहीं है। बट इसको बार-बार सुनना जो मैं आज बोला हूं ना
1:06:46
और कल भी ये सत्संग हुआ था तो वो पूरा क्लियर हो जाएगा।
1:06:53
बाकी सही जा रहे हो। ठीक है वो बट अभी वो बचा हुआ है। थोड़ा सा जो आइडेंटिटी है आपकी
1:07:02
वो हट जाएगी। पूरा अस्तित्व के साइड आओ तुरंत हट जाती है।
1:07:09
तो प्रभु श्री सत्संग सुनते ही जो आपका कल वाला भी सुना था मैंने मतलब आइडेंटिटी को हटाने के लिए सुनते रहो।
1:07:18
हां वो हट जाएगी आइडेंटिटी क्योंकि जब आप पूर्णत अस्तित्व के साइड आ जाओगे।
1:07:26
तो आइडेंटिटी हट जाती है। जब आपका प्रेम अस्तित्व हो जाएगा बॉडी नहीं।
1:07:34
तो जब आपका प्रेम अस्तित्व हो जाता है ना तो आप अस्तित्व के साइड आ जाते हो
1:07:42
और पता ही नहीं चलता ये बॉडी फिर इसमें क्या हुआ वो हुआ ये हुआ सब गायब हो जाता है
1:07:51
है ना बाकी ठीक है ठीक जा रहे हो ओके अच्छा कोटि कोटि प्रणाम प्रभु श्री
1:08:01
प्रणाम जी प्रेम प्रणाम प्रभु जी प्रेम प्रणाम
1:08:08
प्रेम प्रणाम प्रभु जी कोटि-कोटि प्रणाम प्रणाम जी
1:08:16
प्रभु जी मुझे आपके दर्शन की बहुत-बहुत इच्छा है प्रभु जी कृपा कीजिए आपका दर्शन चाहती हूं जी मैं बहुत
1:08:24
अरे वो सब ठीक है हां रुको स्टॉप स्टॉप करो इनको दर्शन वर्शन मेरा मेरा अभी सब छोड़ो।
1:08:34
मैं जो पॉइंट बता रहा हूं अस्तित्व अस्तित्व के साइड आओ।
1:08:43
अपना प्रेम बॉडी माइंड से हटाओ। अपना प्रेम अस्तित्व में लाओ कि अब मैं अस्तित्व हूं।
1:08:50
बस बाकी यह सब हटाओ। यह दर्शन वर्शन यह सब छोड़ो।
1:09:06
आई एम एकिस्टेंस
1:09:32
तो बहुत सारे लोगों को तो यह आ रहा है। प्रत्यक्ष है।
1:09:38
हां जो भी अभी सुन रहे हो आप लोग।
1:09:47
बाकी यह सब छोटी-छोटी चीजें हटाओ। यह दर्शन आंगे मिलेंगे। वह हटाओ। कोई मतलब का नहीं है।
1:09:53
डायरेक्ट मैं अस्तित्व हूं।
1:10:03
ए स्ट्रेट डोंट वेस्ट टाइम
1:10:36
प्रभु जी प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम जी प्रभु
1:10:44
मैं हूं इसकी झलक अभी जैसे आपकी समय सुन रहे हैं तो बिल्कुल मिलती है और समय रहता
1:10:52
रहते हुए जो भी क्रियाएं चलती है उसमें भी झलक भी मिलती है। रह चुप गए आप।
1:11:01
मैं हूं कि झलक वलग नहीं है ये सब।
1:11:04
हुजूर रहता तो मैं ही हूं लेकिन वो कई बार एहसास तो आता है ना उसका एक अलग स्टॉप स्टॉप स्टॉप स्टॉप करो इसको।
1:11:13
सुनते ही नहीं हो यार। मैं यहां कितनी देर से बता रहा हूं। ध्यान कहां है?
1:11:21
इसकी कोई झलक वलक ये सब नहीं होती। क्रिया में और यह वो जो आप बता रहे हो आप हो ही
1:11:27
नहीं वहां जो मैं बता रहा हूं
1:11:38
अस्तित्व की ओर आओ। यह जो आप देख रहे हो अपने चारों साइड ना छोटा सा जो दिख रहा है इसके बैकग्राउंड में बहुत विराट अस्तित्व है।
1:11:49
अनंत उस साइड आ जाओ।
1:11:59
और मैं अस्तित्व हूं। उस पॉइंट में जियो तो ये सब ये छोटा-मोटा सब गायब हो जाएगा आपका।
1:12:28
प्रेम प्रणाम गुरु जी प्रेम प्रणाम
1:12:34
गुरु जी साक्षी की तरफ जा रहा है रॉन्ग रॉन्ग है जी ये
1:12:43
साक्षी वाक्षी की बात नहीं कर रहा हूं मैं जैसे कोई भी एक्सपीरियंस हुआ है उसको देखने वाला मैं
1:12:52
नहीं कोई नहीं नो आप लोग पुरानी धारणाएं लेके सुन रहे हो मेरे को ये कचरा जो सुने हुए हो साक्षी
1:13:01
दृष्टा थर्ड क्लास बातें फेंको ये सब पुराना फेंको और मेरे को सुनो बस और किसी
1:13:08
को मत सुनो खत्म हो जाएगी बात तो क्या दृष्टा साक्षी यह वह कोई मतलब का नहीं
1:13:27
अस्तित्व के साइड आना यानी अस्तित्व हो जाना है। जवाब हो ही सदा से।
1:13:35
हां।
1:13:44
जो पॉइंट हम बता रहे हैं उसमें जियो और उसी पॉइंट के बारे में बात करो। इधरउधर दृष्टा साक्षी मेरे घर में यह हो रहा है।
1:13:53
मेरी दुनिया में क्रिया हो रही है। वो बकवास छोड़ो।
1:14:00
ओनली एग्जिस्टेंस बस वो लगे या ना लगे वो चलेगा। लेकिन आप उस
1:14:08
पॉइंट पर मेहनत कर रहे हो और अभी मेरे बताने पर जी रहे हो।
1:14:15
वो आपके काम का है।
1:14:19
और जैसा बता रहा हूं वैसा ही आप सुन रहे हो और जी रहे हो तो तुरंत है वो। बिल्कुल
1:14:25
इसी क्षण
1:14:36
प्रेम प्रणाम सर हां प्रणाम
1:14:44
सर देव कुछ नहीं बस हंसते तो
1:14:53
बहुत कनेक्टेड सर बहुत कनेक्टेड फील कर रही हूं
1:15:05
थैंक यू सर ओके।
1:15:11
इवन यह ठीक है जो आपको अनुभव हो रहा है बुरा नहीं है। ठीक है। यहां कनेक्शन नहीं है।
1:15:21
कोई कनेक्टिविटी नहीं है। यहां सीधा मैं अस्तित्व हूं।
1:15:29
डायरेक्ट। एकदम डायरेक्ट। यहां आपको कोई ट्यूनिंग नहीं करनी है।
1:15:36
अस्तित्व से कनेक्शन नहीं बैठाना है। सीधा मैं अस्तित्व हूं। दूसरी और कोई चीज है ही नहीं।
1:15:48
ओके प्रणाम प्रभु प्रभु प्रेम प्रणाम। प्रेम प्रणाम।
1:15:55
प्रभु ऐसा फील हो रहा है मतलब कि ये जो शब्द आ रहे हैं अस्तित्व में और अपने आप
1:16:03
वो विलीन हो रहे हैं उठ रहे हैं जा रहे हैं और सच में लगे तो सुनने का भी मन नहीं कर रहा है और बोलने का भी मन नहीं कर रहा
1:16:13
है हम हम सही है
1:16:22
मतलब आपको तो देखो शब्द तो नहीं है वहां
1:16:27
बट आपका जो अस्तित्व है जो आप अस्तित्व हो उसका सेंस है कि नहीं है
1:16:36
हां जी हां तो ठीक है बस विराट एकदम विराट
1:16:44
शांत भरा हुआ यस
1:16:51
अबब्सोलुटली राइट धन्यवाद प्रभु धन्यवाद
1:17:02
वहां यही पॉइंट आ जाता है कि वहां बोलते बनता ही नहीं है।
1:17:10
हां जैसे कोई नींद में सो गया।
1:17:22
तो मैं पूछूं भाई सो गया क्या?
1:17:26
अगर वह बोल दे तो वह सोया नहीं है और सो गया है तो बोलेगा नहीं
1:17:36
तो यहां नहीं बनता बोलते वो तो मैं थोड़ा जानबूझ के बोलता हूं कि
1:17:47
आप लोग सही में सुन रहे हो नहीं सुन रहे हो। थोड़ा चेक करता रहता।
1:18:06
ओके जी प्रणाम।
1:18:34
एकदम घूप छाया रहेगा अस्तित्व आपका होना अस्तित्व जो है
1:18:40
हां कोई और छोर कुछ नहीं यही आप हो।
1:18:52
एक्चुअल में आप बस मैं अस्तित्व हूं।
1:19:02
इसी पॉइंट से जियो मरो।
1:19:06
जो भी है कि मैं अस्तित्व हूं।
1:19:13
मैं प्रत्यक्ष अस्तित्व हूं। मैं परमात्मा हूं।
1:19:22
कोई दूसरा परमात्मा मेरे को नहीं चाहिए। मैं परमात्मा हूं।
1:19:29
बस इसी पॉइंट में जियो।
1:19:36
अपनी साइड सही हो गई। बात खत्म।
1:20:04
कितना क्लियर है और मैं हूं यार। कितना क्लियर है।
1:20:29
हम जो कह रहे हैं वह आपके लिए प्रत्यक्ष है कि नहीं है कि हमारे बोलने के कारण हाउ
1:20:36
बोल रहे हो सब प्रत्यक्ष होने को मांगता ना और मेरे
1:20:43
ख्याल से तो प्रत्यक्ष है भाई यह आप लोग बताओ
1:20:58
साक्षात प्रत्यक्ष यस साक्षात प्रत्यक्ष
1:21:10
और हमारा व्यक्तित्व कभी प्रत्यक्ष था ही नहीं। वह हमेशा अप्रत्यक्ष है। वो कभी था ही नहीं।
1:21:18
ना जीव ना व्यक्तित्व और यह साक्षात प्रत्यक्ष है। बस
1:21:30
मैं अस्तित्व हूं। मैं ही अस्तित्व हूं।
1:21:53
नमस्कार पूरा अस्तित्व का पावर है यह। आप इसमें जीने लगते हो।
1:22:27
ओके एनीबडी या तो सब डूब जाओ अब इसी पॉइंट में डूब जाओ क्या आप तो आप अस्तित्व ही हो।
1:22:41
अब वाणी को विश्राम देते हैं।
1:22:47
किसी को कुछ कहना है। लास्ट ऐसी कोई जगह नहीं है जहां मैं नहीं हूं।
1:23:01
अस्तित्व नहीं है।
1:23:03
मैं ही मुझे दूसरों को कुछ नजर ही नहीं आ रहा ना आप ना कोई कुछ नहीं
1:23:10
मैं बस
1:23:18
बहुत ही सुंदर
1:23:30
ये तो बस जिओगे तो ये खुद ही प्रकट हो जाता क्योंकि आप अस्तित्व ही हो।
1:23:36
हां चलो सबको प्रेम प्रणाम।
1:23:43
बहुत सारा प्रेम और प्रेम प्रणाम।