Prabhu Shree
0:21
एक रहस्य है कि
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जैसे डेली लाइफ में आप जिससे आपको प्रेम है
0:41
उससे आप अपने आप को एक कर लेते हो और जिससे आपके झगड़े हैं आप उससे अपने को अलग कर लेते हो।
0:51
आप कर लेते हो ना नेचुरली किसी से पंगा है या कोई अच्छा नहीं लगता
0:57
तो आप उसको अलग कर लेते हो एक दूरी अंदर ही से बना देते हो अपनी भले
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साथ बैठो उठो लेकिन अंदर से एक दूरी क्रिएट नहीं कर लेते हो और कोई आपका प्रेमी है मित्र है अच्छा वह
1:15
दूर भी रहे तो आपके लिए एकदम पास रहता है उससे आप एक रहते हो तो यह क्या बतलाता है?
1:26
एक करना और अलग करना आप ही का सॉलिड खेल है। है ना?
1:33
आप खेल रहे हो।
1:36
पहले अलग करके खेले। अब मैथ से भिन्न कुछ भी नहीं। ऐसा खेल रहे हो। है ना?
1:43
यह आपका एक वेल प्ले है।
1:48
हां। तो जैसे आप किसी से प्रेम होता है उसको एक कर लेते हो ना तो जब ऐसे अस्तित्व से प्रेम हो जाएगा तो
1:57
इसको भी आप एक कर लोगे उसमें मेरे को भी नहीं बताना पड़ेगा कि मैं ऐसे भिन्न कुछ भी नहीं ऐसा करते
2:04
रहो ऐसा कुछ नहीं हो आप जिस दिन आपको लगा यार अब आप अस्तित्व को
2:12
ही एक कर देना है तो पूरा अस्तित्व के प्रेम में पड़ जाओगे
2:23
तो यह सहज में हम करते हैं डेली लाइफ में हमारा ध्यान नहीं जाता छोटी-छोटी चीजों में।
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अलग करना, एक करना ये सब आपका आनंद है।
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क्योंकि अलग करके आप संसार का आनंद तो लेते हो ना।
2:46
एक करके परमात्मा का आनंद देते हो तो यह चलता रहता है
3:04
संध्या हालांकि आजकल बहुत एक्सपर्ट हो गई है डायलॉग मारने में।
3:14
हस्ती कम है। डायलॉग ज्यादा मारती है आज। लेकिन सही जा रही हो।
3:31
एकदम शार्प होती जा रही है। एकदम डायमंड होता है ना शार्प एकदम।
3:56
तो हर डायलॉग का प्राण होता है आपका आनंद, आपका साइलेंस, आपकी अवेयरनेस,
4:03
आपका प्रेम, उसका प्राण होता है।
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डायलॉग में अगर वह नहीं है तो डायलॉग बुद्धिगत है।
4:16
वह फिर एआई वाली बात है।
4:22
प्रेम है और ट्रुथ है और वो पावर है तो वो अलग ही है।
4:29
संध्या का सही है। सही सोर्स से आ रहा है।
4:42
वो सोचते नहीं फट से बोल देती है कई लोग ऐसे सोचते रहते हैं वो अच्छा लगता है मेरे को हमारे सौरभ जी बहुत सोचते हैं बोलने के
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लिए अरे बोलने का है ना यार
4:57
समझाओ प्रवीण जी कुछ अच्छा गरियाबंद
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ओपन हो गया है सत्संग के लिए। आप आ सकते हैं। 1 जून मैटर नहीं है।
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20 से आ सकते हैं। 20 तारीख से जिसको भी आना है। 20 मई है ना यह। हां, 20 मई से आ सकते हैं।
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यह यह रेडी है प्लेस।
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बट कॉल करके आए कंफर्म करके आए
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तो सब सहज में आप अलग और एक कर लेते हो
6:00
तो पहले उसको को छोटे-छोटा लोगों में खेलते हो। फिर विराट में खेलते हो।
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बस वही यह खेल है और कुछ नहीं है।
6:16
लेकिन आपको जब तक श्योरिटी नहीं है कि यह आप ही का खेल है। यह दुनिया आप ही का खेल है। तब तक आप कंफ्यूज रहोगे।
6:29
हम वह ठीक है। यह दुनिया मैं ही हूं। वह तो एक चैप्टर फ़ाइनल है। बट अगर खेल की
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दृष्टि से भी बोले तो यह आप ही का खेल है।
7:02
प्रणाम प्रभु जी प्रणाम जी मैम
7:09
आपने अभी जो बोला है कि जब तक आपको लाइक श्योरिटी नहीं होगा कि ये आप ही का खेल है
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तब तक कंफ्यूजन रहेगा क्योंकि ये सारा ऑटोमेटिक होता है सहज में कि अभी बहुत पास है। अभी बहुत दूर है। प्रेम है।
7:34
फिर यू नो अलग है। एक है। सब ठीक है। पर कैसे पता चलेगा कि ये मेरा ही खेल है?
7:42
हम हम पूछना
7:49
कैसे पता चलेगा कि मेरा ही खेल है? क्योंकि सब नेचुरल है। ऑटोमेटिकली चल रहा है ना सब कुछ।
7:59
हां।
8:06
कैसे पता चलता है यह दूसरे का खेल है?
8:14
या तो यह किसी दूसरे परमात्मा का खेल है या दूसरी दुनिया का खेल है।
8:22
कैसे पता चलता है? नहीं पता चलता है।
8:30
तो मुझे ऐसा लगता है कि ये खेल में अगर भूल जाओ कि तुम्हारा खेल
8:39
है तो अच्छा है। नहीं तो अगर हमेशा पता चलता है कि ना मेरा ही खेल है तो फिर वो
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प्रेम नहीं होता है। ऐसे हम
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ओके तो इज दैट करेक्ट कि लाइक नहीं पता चले तो ही अच्छा है।
9:08
हां भूल जाओ तो आपको बेहतर लगता है। पता ना चले है ना
9:16
हम आपको ये कंफर्टेबल लगता है ना?
9:23
क्योंकि समझने की कोशिश करूं तो फिर कोई आंसर नहीं मिलता है।
9:29
हम वो इससे अच्छा नहीं समझूं तो अच्छा है। सिर्फ प्रेम में ही रहूं इन द मोमेंट।
9:36
वैसे जो आ रहा है आ रहा है जो जा रहा है जा रहा है।
9:43
ओके। ये भी ठीक है। ये भी आपका खेल है।
9:57
पता ना चलने वाला भी खेल होता है ना यार पता ना चलने में प्रेम बना रहता है और ऐसा
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वैसा एक सेटअप है ना ये भी आप ही का सुंदर सेटअप है तो ये भी अच्छा है चलने दो
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आता है आता है जाता है जाता है
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खिलाड़ी आप ही हो याद रखना हम हर एंगल में चाहे वो प्रेम का एंगल हो या
10:31
पता चलने का एंगल हो ना चलने का हो क्योंकि वो अगर प्रेम को कंट्रोल करना
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चाहते हो तो फिर वो नहीं रहता है ना तो इससे नहीं कंट्रोल करूं तो अच्छा है फ्री फ्लो
10:49
हम तो इन दैट
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हां बोलो बोलो तो फिर वही इन दैट पर्सपेक्टिव तो मुझे लगता है मैं समटाइ्स एक क्वेश्चन आता है
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कि ना अस्तित्व से प्रेम यू नो करना है पर वो अंदर से नहीं आता है ना तो फिर क्वेश्चन मार्क कि क्यों नहीं आ
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रहा है तो मैं सोचती हूं तो फिर नेचुरल छोड़ देती हूं। जब आना होगा तो आ जाएगा।
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तो कंट्रोल वाली बात आपने क्या बोली अभी?
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मैं बोल रही हूं अगर लाइक मुझे वो तो समझ में आ गया कि हम दो होकर प्रेम करते हैं
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फिर एक होके प्रेम हो जाता है तो फिर अगर वो श्योरिटी आ जाता है कि हमेशा यह मेरा
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ही खेल है तो फिर मजा नहीं रहता है वो गेम में मजा नहीं रहता यस
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तो इससे अच्छा छोड़ ही दो समझ नहीं आए तो अच्छा है पर कभी-कभी एक क्वेश्चन आप नहीं
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समझ रहे हो वो मैं कह रहा हूं जैसे अपन कॉमन इस स्पिरिचुअलिटी को हटा दो कॉमन
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लाइफ में खेलते हैं ना कुछ लाइफ में कोई क्रिकेट खेलता है कोई वॉलीबॉल खेलता है
12:26
कोई फुटबॉल खेलता है तो वहां कैसे खेलता है
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उसमें है क्या बॉल इधर जा रही है वॉलीबॉल में और उधर जा रही है है तो पागलपन
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क्रिकेट की बॉल एक जगह जा रही है तो लोग उछल रहे हैं। फिर एक दूसरी जगह जा रही है
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तो रो रहे हैं। उसमें है क्या? लेकिन इन खेलों को भी मान के खेल रहे हैं ना अपन
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और खेल में पता नहीं चल रहा है कि यह खेल है। जो खेल रहे हैं उनको कहां पता रहता है? वो तो सीरियसली खेलते हैं ना।
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हम पता रहते हुए भी उनको पता नहीं रहता। करेक्ट। यस।
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इतना सीरियसली खेलते हैं। कोई भी प्लेयर है, कोई अपने देश के लिए खेल रहा है, कोई अपने स्टेट के लिए खेल रहा है, जैसे भी या
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कोई ऐसे भी खेल रहा है। हार और जीत का जो रोल है, हम तो ऐसे तो खेल रहे हैं ना अपन।
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डेली लाइफ में हर कोई कोई ना कोई खेल खेल चुका है।
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तो सेम तो यहां पर वैसा ही है। पता ना चलते हुए भी पता है और पता चलते हुए भी पता नहीं है कि ये खेल है।
13:57
दोनों में डिफरेंस कुछ भी नहीं है।
14:02
ये खेल कंटिन्यू है। करके थोड़ा सा लगता है आदमी को कि खेल नहीं है। क्योंकि 80 100 साल का खेल है ना। ये रुकता ही नहीं है जब तक मरो नहीं।
14:13
हां बाकी ये खेल ही तो खेल रहे हो और क्या है?
14:19
तो फिर ये ऐसे समटाइ ऐसे तो प्रेम है तो सबके साथ प्रेम होना चाहिए ना। अस्तित्व
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के साथ भी प्रेम होना चाहिए ना। तो ऐसे सिलेक्टेड क्यों लगता है कि इधर प्रेम है तो उधर नहीं हो रहा है प्रेम। ऐसा क्यों लगता है फिर?
14:40
प्रेम के साथ यार देखो आप जबरदस्ती नहीं कर सकते।
14:44
आप बोलोगे किसी से हो रहा है और वही पूरे अस्तित्व के साथ हो जाए। नहीं कर सकते आप जबरदस्ती।
14:53
एक्सक्टली वही वही मैं बोल रही हूं। बात है।
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और आप कभी होगा अस्तित्व से ना तो वह भी सहज में हो जाएगा।
15:06
हम उस समय वो पूछेगा भी नहीं आपसे वो बहने लगेगा
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वहां ऐसा आप ट्राई नहीं मार सकते कुछ प्रैक्टिकल कोई ध्यान या कुछ ऐसी विधि
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नहीं है कि आप अस्तित्व के प्रेम में पड़ जाओ हम
15:32
जैसे किसी मनुष्य के प्रेम में पड़े तो उसमें कोई विधि थी क्या
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बस सेम है वहां पे सेम है ये जैसे सहज हुआ वो भी सहज हो जाता
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है और बहुत बड़े पैमाने में बोलूं तो यह भी
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एक खेल है मैं
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बताना चाह रहा हूं कुछ और आज प्रेम सुंदर है यार देखो अपनी जगह बट बहुत बड़े पैमाने
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पे अगर देखें तो यह भी एक खेल है कि जब होगा तो वहां भी होगा ये सब एक खेल
16:20
है अपने ही बनाए हुए खेल है यस
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तो जो बैरियर है वह आपने कहां-कहां डाले हैं अस्तित्व के लिए वह आप खुद हटा दोगे
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खेलते खेलते ना तो अस्तित्व से भी प्रेम हो जाएगा।
16:46
ओके। थैंक यू प्रभु जी।
16:59
तो यह जो बड़े पैमाने का खेल है ना उसको थोड़ा सा समझो।
17:10
अब बड़े पैमाने का क्या खेल है? आप व्यक्तित्व हो के अस्तित्व से प्रेम करना चाहते हो?
17:17
तो वह कैसे पॉसिबल होगा?
17:22
हर किसी को एक पागलपन है ना यार लव अफेयर विद एग्जिस्टेंस
17:29
यार तुम व्यक्तित्व हो के अस्तित्व से प्रेम कर ही नहीं सकते भूल जाओ
17:37
तुम व्यक्तित्व होके किसी दूसरे व्यक्तित्व से ही प्रेम कर सकते हो यह प्रेम की महानता है कि किसी दूसरे
17:45
व्यक्तित्व में आप पूरा अस्तित्व देख सकते हो यह प्रेम की महानता
17:52
है ना? और मैं जिसको खेल बोल रहा हूं, वह खेल तब तक है जब तक आप सामने वाले में
18:01
केवल बॉडी और माइंड देख रहे हो। जब उसमें अस्तित्व दिखने लग गया तो वह खेल नहीं है।
18:07
फिर वह आपकी आत्मा है या परमात्मा है जो बोल लो।
18:15
तो एक व्यक्तित्व दूसरे व्यक्तित्व से प्रेम कर रहा है।
18:20
और प्रेम की यह महानता है कि व्यक्तित्व में भी उसको अस्तित्व की झलके दिख जाती
18:27
है। परमात्मा की झलकें प्रेम के कारण ठीक है। धुंधली रहती है झलके या थोड़े समय के
18:35
लिए रहती हैं या प्रेम दो-ती साल मैक्सिमम चलता है। एवरेज
18:41
मैक्सिमम तीन साल रहता है। है ना? और फिर कड़वी यादें छोड़ जाता है।
18:52
फिर और आप विराट प्रेम खोजते हो या कोई दूसरा व्यक्तित्व खोजते हो कि यार यह बंदा सही नहीं था। अब दूसरा बंदा चाहिए। यह बंदी सही नहीं दूसरी बंदी चाहिए।
19:03
यह मेरे लायक नहीं था। है ना? या जो भी आप देखते हो फिर दूसरे में भी आपको वही अनुभव होता है।
19:16
तो व्यक्तित्व के प्रेम में यह होगा ही होगा। यह उसका रिजल्ट है ना?
19:26
अब आपको एक बात और बता रहा हूं।
19:31
थोड़ा डीप है पॉइंट कि परमात्मा को भी आप व्यक्तित्व की तरह प्रेम करोगे तो उसमें भी होगा
19:40
बॉडी की तरह मूर्ति की तरह या किसी अवतार की तरह
19:48
या किसी सद्गुरु गुरु की तरह आखिर परमात्मा को या गुरु को भी आप
19:56
व्यक्तित्व बनाकर प्रेम कर रहे हो तो उसमें भी वही रिजल्ट आएगा।
20:04
सेम आएगा। अब व्यक्तित्व को अस्तित्व बना देना।
20:13
अगर बहुत शार्प प्रेम है।
20:19
यानी जीव को परमात्मा बना देना। आपके प्रेम ने कि मैं तुझे खुदा बना दूं। मेरा
20:26
प्यार कह रहा है मैं तुझे खुदा बना दूं।
20:36
तो ये एक अलग ही रेंज है।
20:44
फिर आपके लिए वो चादर हट गई व्यक्तित्व की। वह सरफेस हट गया। वह लहर हट गई।
20:53
अब वह पूरा अस्तित्व है सामने। वह व्यक्तित्व नहीं। अब वह कोई भी हो। अब वह अस्तित्व ही है।
21:02
है ना? बहुत सारी लेयर्स की बात किया मैं अभी कि व्यक्तित्व के प्रेम में प्रेम की
21:09
महानता के कारण अस्तित्व झलकता है। लेकिन अगर प्रेम बहुत शार्प है, गहरा है और
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उसमें वह पागलपन है तो लैला में भी वह दिख जाता है। मजनू में भी वह दिख जाता है।
21:23
पूरा अस्तित्व राधा में, कृष्ण में किसी भी मनुष्य में और वहां कोई बाउंड्री
21:30
नहीं है बट वह गहराई चाहिए
21:37
कि वो खोद खोद डाले वो आपका व्यक्तित्व
21:42
देखे ही ना वो आपके मन को देखे ही ना
21:48
वह सीधा आपकी बीइंग को देखे। आपका होना उसके लिए बहुत है।
22:00
मैं बताया ना आशीष शानू करके जानता है ना शिवनी वाले मेरा एक मित्र है वो मेरे को हमेशा फोन करता है
22:08
एक दो महीने में ऐसा उसका फोन आता ही है वो कब से यहां से चले गया है और वो मैं भी
22:16
नहीं करता उसको फोन तब भी वो करता है उसको बस मेरी आवाज सुन लेता है उसको अच्छा
22:23
लगता है उसको बहुत प्रेम है मेरे से
22:31
और थोड़ा सा वो भी बोलता है हम मरेंगे तब आओगे क्या ऐसा डायलॉग भी देता है मेरे को
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बहुत प्यारा है वो इवन उसको हार्ट वगैरह का भी कुछ आ गया था
22:44
तो मैं गया नहीं मेरे को पता भी नहीं था
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तो यह जो एक प्रेम होता है ना कि यार वहां अब वह अंधा हो गया। उसको कुछ दिख ही
23:01
नहीं रहा है कि सामने वाला मेरे को फोन कर रहा है। नहीं कर रहा है। सामने वाला इंसान है, भगवान है, कुछ भी है। मेरे को प्रेम है, बात खत्म।
23:12
तो जब तक आप अंधे नहीं हो जाओगे ना तब तक बात नहीं बनती।
23:22
अब आप बोलोगे आंख बंद करके कैसे श्रद्धा करें? अरे नहीं है ऐसा।
23:31
प्रेम की अपनी ताकत होती है। वहां श्रद्धा अपने आप आ जाती है। समझ रहे हो?
23:41
पत्थर पत्थर के प्रेम से लोगों ने पा लिया यार। जो पत्थर बोलता भी नहीं है।
23:51
मतलब पत्थर मतलब लास्ट बात हो गई ना इस अस्तित्व की।
23:59
तो कभी भी पत्थर में कमी मत देखो। अपने प्रेम में कमी देखो।
24:04
किसी के व्यक्तित्व में कमी मत देखो। उसका बहिर चरित्र मत देखो।
24:11
अपनी प्रेम की कमी देखो।
24:17
हम करते कहां है यार? हम हमेशा हिसाब किताब लगाते रहते हैं।
24:27
जी भर के बेहद हद के पार प्रेम एक अलग ही चीज होती है।
24:34
मीरा ने किया ना मूर्ति से ही किया ना कृष्ण की मूर्ति से।
24:40
बचपन से ले सोती थी मूर्ति को।
24:46
तो बेहद है ना
24:55
हम हर जगह बस एक कैलकुलेशन ऐसा वैसा कहीं धोखा तो नहीं हो जाएगा। अरे क्या धोखा हो जाएगा?
25:06
तुम प्रेम से जी लिए। यह तुम्हारा सौभाग्य है ना?
25:13
सामने वाले ने क्या किया? क्या नहीं किया? उससे क्या मतलब है?
25:20
तुम जी भर के पागलों की तरह किसी को भी प्रेम कर पाए।
25:31
और तुमने लास्ट में यह भी नहीं देखा कि सामने व्यक्तित्व है कि अस्तित्व है।
25:37
बुद्ध पुरुष है कि अज्ञानी है।
25:42
जीव है, भगवान है। तुमने बस जी भर के प्रेम किया तो तो वह प्रेम ही तुमको भर देगा तुम्हारे जीवन को।
25:54
प्रेम अंधा होता है उसको। यह भगवान जीव से मतलब नहीं होता है।
26:04
भगवान देखना भी लास्ट में अस्तित्व देखना भी लास्ट में आप सरफेस देख रहे हो।
26:15
क्या यह भी बहिर चरित्र है?
26:22
अरे आपकी जिंदगी का हीरो भगवान है। तो आप देख तो बहिर चरित्र ही रहे हो ना।
26:30
मैक्सिमम कौन है? भगवान ही है ना?
26:32
अस्तित्व ही है। तो आप बहिरचरित्र ही देख रहे हो ना कि जो एकदम वेल सेट होगा। हर चीज में फाइनल होगा, पावरफुल होगा।
26:44
उसी से प्रेम करोगे जो कभी मरेगा ही नहीं।
26:53
ठीक है? व्यक्तित्व से तो बहुत बेटर है लेकिन यह भी लास्ट में सरफेस है
27:03
क्योंकि आपका प्रेम चुन रहा है और जब तक प्रेम कुछ चुन रहा है ना तो प्रेम प्रेम नहीं है।
27:11
वो आप अंधे नहीं हुए ना और जब तक आप अंधे नहीं हुए तो प्रेम आप कर ही नहीं सकते।
27:22
क्योंकि आप चुन रहे हो अपने लिए आप बेटर चुन रहे हो ठीक है नॉट बैड बट जब तक चुन रहे हो
27:33
प्रेम छिटकेगा चुनना क्या है यार
27:41
इतना अद्भुत अस्तित्व है इतने सारे लोग हैं इतनी हरियाली है क्या नहीं है प्रेम
27:48
बांटने को आप लूट जाओ ना आप खत्म हो जाओ प्रेम कर कर
27:57
के किसी पत्थर को ही पकड़ लो
28:10
आपको प्रेम आ रहा है ना बात खत्म है
28:19
हां हां उसमें से वो सारे जहर को निकाल दो। शिकायतों को निकाल दो। है ना?
28:27
डिमांड को अपनी निकाल दो। बस प्रेम के फ्लो में ही एक आनंद है।
28:42
प्रेम ने आज तक किससे प्रेम देखा ही नहीं।
28:50
देखा ही नहीं। हां।
28:55
जब भी आप प्रेम में किस्से को लाते हो तभी वो मरने लगता है।
29:56
नींद आ रही है तेरे को तू सो जाके सो जा सुबह से जग रहा
30:06
यहीं लेट जा थक गया था इसको अरे लेट ना बोलता हूं तो माने कोई बात को
30:14
तू लेट जा बस हम
30:59
और आपका प्रेम सही गलत क्यों देखता है मालूम है? आपके प्रेम को कुछ चाहिए होता है रिटर्न में।
31:06
तभी वह सही गलत देखता है और सही-सही को चुनता है।
31:12
आपका प्रेम परमात्मा से ही क्यों करना चाहते हो? आपको चाहिए ना वह आपकी रक्षा करेगा और पूरा पावरफुल है वह।
31:23
क्या आप ऐसे परमात्मा से प्रेम कर सकते हो जो रक्षा करेगा ही नहीं? उल्टा और धक्का दे देगा।
31:32
अरे निहत्ता कृष्ण किसी को पसंद नहीं होता। अर्जुन पता नहीं कैसे चुन लिया।
31:40
कृष्ण बोले मैं तो शस्त्र भी नहीं उठाऊंगा। है ना?
31:47
तो निहत्ता परमात्मा किसी को पसंद नहीं है। जब तक परमात्मा पावरफुल नहीं है,
31:57
आप उससे प्रेम करोगे ही नहीं। आपके प्रेम में डिमांड है यार। परमात्मा भी तो एक डिमांड है ना।
32:05
अस्तित्व भी तो एक डिमांड है।
32:08
तो प्रेम तो मरेगा ना। डिमांड में मरता है।
32:29
ये प्रेम थोड़ी ना है। ये तो पक्षपात है।
32:40
पानी देना।
32:47
व्यक्तित्व के प्रेम से जो हम अस्तित्व के प्रेम में जाते हैं। व्यक्तित्व के प्रेम से हमको पीड़ा मिलती है।
32:57
है ना? तब हम अस्तित्व के प्रेम में जाते हैं।
33:12
क्यों जाते हैं मालूम वहां पीड़ा ना मिले करके जाते हैं। वहां धोखा होगा ही नहीं करके जाते।
33:22
यह सब डिमांड है। प्रेम पीड़ाएं थोड़ी ना देखता है।
33:34
प्रेम तो लूटता रहता है। उसका लूटना ही आनंद है।
33:44
उसका बहना ही आनंद है। निरंतर बहते रहना प्रेम का यही आनंद है।
33:51
किससे क्या कब कहां उसको मतलब ही नहीं है
33:58
और इतना अगर वह देख रहा है प्रेम किससे प्रेम परमात्मा या व्यक्तित्व
34:05
अस्तित्व या कहां प्रेम कब प्रेम तो वो प्रेम कहलाने लायक ही नहीं
34:15
वो प्रेम अंधा नहीं हुआ
34:51
तो हर कोई नारायणी सेना ही चुन लेता है पावर है ना
34:59
सबको पावर चाहिए निहारता है कृष्ण किसी को नहीं चाहिए
35:27
और अर्जुन ने कृष्ण को चुना युद्ध जीतने के लिए नहीं चुना। हार भी जाता तो चलता।
35:34
प्रेम जीत के लिए नहीं चुनता यार।
35:43
प्रेम है बस बहुत होता है। यह
36:00
प्रेमी के साथ आदमी भटकना भी पसंद करता है यार। है ना?
36:07
किसी से आपको प्रेम हुआ। उसके साथ आप घूमे होगे। कई शहर, कई दुनिया अच्छा लगता है ना?
36:18
और जिससे प्रेम नहीं है लोग शादियां कर लेते हैं और यह वह पतिप वह कॉम्प्रोमाइज ज्यादा है। प्रेम कम है।
36:27
उतना अच्छा तो नहीं लगता। बात तो यही ईमानदारी की है। लगता है क्या?
36:34
नहीं लगता।
36:40
इनलाइटनमेंट बहुत सरल चीज है। पति पत्नी में प्रेम असंभव है।
37:04
क्योंकि प्रेम साइड हो गया ना। अब अब आप कुछ और ही देख रहे हो।
37:12
अब अपना अधिकार समझते हो। अब पता नहीं क्या-क्या समझते हो सामने वाले में। एक बहुत लंबा संबंध हो गया। ये हो गया, वो हो गया। अब तो प्रेम तो गया ना।
38:00
तो भटकना भी आनंद देता अपने प्रेमी के साथ है कि नहीं और शादी करना है ना पहुंच जाना
38:07
है कहां आनंद देता है प्रेम मरने लगता है
38:20
तो मैं कभी भी नहीं पहुंचाऊंगा भैया पहले से बता दे रहा हूं मैं गारंटेड भटकाता रहूंगा क्योंकि मेरे
38:30
को बहुत प्रेम है आप लोगों अच्छा मैं खुद नहीं पहुंचा हूं। आप लोग को कैसे पहुंचाऊंगा?
38:39
हां हकीकत है भाई।
38:48
पहुंच गए यानी शादी हो गई। समझ रहे हो?
39:24
बुराई शादी में नहीं है। पति पत्नी में नहीं है। यह सब प्रेम की कमी है और कुछ नहीं है।
39:44
और प्रेम में कमी तभी आती है जब आप बहुत ज्यादा चॉइस में आ जाते हो। ऐसा ही होना चाहिए।
39:55
है ना?
40:02
हां भाई शर्तों स्वार्थ लागी करें सब प्रीति
40:29
क्योंकि बेशर्त प्रेम मतलब आपको रिस्क उठाना पड़ेगा भाई।
40:37
रिस्क का अपना आनंद है। है ना?
40:45
शर्त वाला प्रेम यानी आप सेफ खेल रहे हो। एकदम ऐसा है तभी रहेगा भैया।
40:53
तो आप सेफ खेल रहे हो ना? तो प्रेम तो गया उसमें मर गया।
41:03
हर एंगल में लाइफ के हां यह गुरु पहुंचाएगा तब इससे प्रेम है।
41:15
यह बहुत अच्छा सत्संग कराता है।
41:19
ये इसने आज तक जो बोला ना किसी ने नहीं बोला।
41:24
तब प्रेम है। अब सपोज मैं इतना अच्छा नहीं बोल पाता। सपोज
41:31
जो भी निकला है तो तब भी प्रेम रहता।
41:39
आधे लोग का तो नहीं रहता। आई थिंक 90% नहीं रहता। 99 100 कर दूं? अच्छा 100 नहीं करते।
41:52
नहीं तो गुनाह हो जाएगा वो भी 99 तो इजी है। मैं किसी को आनंद नहीं दे पाता अपने
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सत्संग से या जो भी एक्सप्लेन नहीं कर पाता या अनुभव नहीं दे पाता जो भी बोल लो।
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क्या तब भी ऐसा प्रेम रहता जो अभी कई लोगों को है मेरे से नहीं रहता।
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अरे एक से एक है। मैं तो देखा ना तीन चार साल में।
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हां मेरा उनसे प्रेम है आज भी।
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मैं उनकी गलतियां नहीं देखता क्योंकि मैं उनमें अच्छाइयां भी नहीं देखता।
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मैं अंधा हूं। क्या करूं? उनका होना बहुत है यार।
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बहुत मुश्किल है मेरे भाई प्रेम हम बोध नहीं करा पाते या कुछ आपको अच्छे
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अनुभव नहीं दे पाते तो 99 तो निपट ही जाते सच्चाई तो स्वीकार करनी चाहिए क्यों विराज
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जी सच है ना ये भी हां बोल रहा विराज हां बोल दिया अरे
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बात खत्म
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अब तुम सोचो कि मैं तुम में भी यही सब देखता रहता।
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जो तुम्हारे पाप पुण्य है और तुम्हारा मानसिक और ब यानी दैहिक जो भी है बहिर चरित्र
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तो क्या मैं तुमसे प्रेम कर पाता या तुमको जो भी बताया हूं बता पाता संभव
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ही नहीं है ना यार मैं देखता ही नहीं ना देखना चाहता हूं
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यार नाक से निकल रहा है कुछ कुछ है क्या रुमाल या कुछ इशू
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नाक पोछता हुआ गुरु किसको पसंद आएगा
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अरे अरे नहीं ये बंदूक वो ला रहा है बस
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वो शुरू में बात चली ना अभी गेटअप की आशीष बोला है कि इधर यह लुक अच्छा नहीं आएगा
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वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं करते कैमरे में
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यह पीछे तकिया मत रखो हां
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राहुल बोला तेरे को नहीं मत आने दे लुक अब थोड़ा डार्क कर दे
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फिर से क्योंकि जो लुक देख के आएगा ना वो लुक देख
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के चले जाएगा जो मेरा मेकअप गेटअप देख के आएगा ना वो गेटअप देख के चले जाएगा
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ऐसे चाहिए ही नहीं मेरे ओशो आते थे ना पूरा मेकअप वेकअप करके गेट
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अप वेट अप करके मेरे को बिल्कुल पसंद नहीं थोड़ा बहुत ठीक है बट वो ओवर है
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उसमें भीड़ बढ़ जाती है वह एक अलग चीज प्रेम ही कम हो जाते हैं
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हां सही बता रहा हूं वो तामझाम ही देख रहे हैं ना वो सब
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वो स्टाइल ऐसे और वो नहीं यार आप आप बेकार चीजें देख रहे हो
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मेरे लिए कब आओगे यार गेटअप के लिए आओगे बुद्धत्व के लिए आओगे
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कुछ जानने के लिए कुछ समझने कुछ होने के लिए प्रेम तो आपके लिए आता है ना मैं यहां
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क्यों आता हूं बताओ ये आश्रम जो बना है
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मैं प्रेम है ना आप लोग के लिए आता हूं ना अभी दो महीने नहीं आता तो क्या हो जाता जो
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अपन ब्रेक लिए थे लेकिन प्रेम है तो आता हूं मेरा आनंद भी है और
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हम
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बीच में जैसे सेशन हुए थे तो आशीष इन लोग का बता रहा हूं। है ना?
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जैसे बहुत गहरा सत्संग होगा ना तगड़ा तो फट से लोग पैर पड़ते हैं लास्ट में।
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है ना?
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और कभी थोड़ी पिच लो हो गई या उतना गहरा सत्संग नहीं हुआ। उनको याद भी नहीं आता कि पैर पड़ना है।
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मैं कई बार देखा हूं। मैं सबकी बात नहीं कर रहा हूं। आप घूर के मत देखो मेरे को।
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मैं एक कॉमन फैक्टर से बात कर रहा हूं और मैं सबकी बात कर भी रहा हूं। है ना?
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तो प्रेम मतलब ना बहुत अंधा होना चाहिए।
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किसी भी तरह का दोष अपने प्रियतम में उसको दिखना ही नहीं चाहिए। तो मीरद में अपन
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पढ़े भी थे। किसी भी तरह का दोष दिखना ही नहीं चाहिए।
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प्रेम की आंखों से परमात्मा ही दिखता है। भाई दोष दिखेगा कैसे?
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कोई भी सद्गुरु हो, मास्टर हो अगर वह दोष देखता फिरे अपने डिसाइपल में कि यह पापी
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है, यह वह है, फिर यह पुण्य आत्मा होगा तो वह उस पर काम ही नहीं कर सकता।
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उसको दिखता ही नहीं है।
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प्रेमी को दोष नहीं दिखता। प्रेमी को परमात्मा ही दिखता है।
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अब प्रेमी भी आप लोग के अंदर की वासना को देखे तो आपसे प्रेम कैसे कर पाएगा? गुरु भी
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आपके अंदर की वासनाओं को देखे यार यह तो बहुत वासनाग्रस्त है। कामनाग्रस्त है या
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पापी है ये है वो है। वो प्रेम कैसे कर पाएगा? असंभव है ना?
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अच्छा और महान प्रेमी कौन होता है?
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कोई सामने ठीक है जैसे मास्टर देखता है ना परमात्मा ही देखता है सामने वाले में दूसरे मास्टर को
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देखता है वो प्रेम है ना उसके सरफेस को देखता ही नहीं क्या कामना
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क्या वासना क्या
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उसकी नजर ही नहीं पड़ती। ठीक है? कामनाएं रहती है अपनी जगह।
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वासनाएं रहती है बट नजर ही नहीं पड़ती उसकी। ये देखने लायक चीजें हैं क्या?
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कम से कम प्रेमी को नहीं देखना चाहिए। अगर आप प्रेमी हो किसी के भी प्रेम
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और याद रखना मरते समय तुम केवल इसी कारण पछताओगे कि तुम जी भर के प्रेम भी नहीं कर सके।
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इस दुनिया को, इस अस्तित्व को, यहां के किसी एक मनुष्य को भी। बेशर्त जी भर के प्रेम कर ही नहीं सके।
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तुमको परमात्मा नहीं मिलेगा, चलेगा, बुद्धत्व नहीं मिलेगा, चलेगा। यह इस कारण जरूर पछताओगे अगर नहीं करोगे तो।
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बेशर्त
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तो तुम जीते हो ताकि तुम प्रेम करना सीख लो।
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तुम प्रेम करते हो ताकि तुम जीना सीख लो।
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मनुष्य को और भी और कुछ भी सीखने की आवश्यकता नहीं।
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तो अब एक बात बताओ अगर अगर मैं जीव हूं
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मैं कोई मास्टर नहीं हूं। मैं कोई परमात्मा नहीं हूं। मैं कोई अस्तित्व नहीं हूं। मैं व्यक्तित्व हूं और मैं जीव हूं।
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कॉमन मैन तब भी आपको प्रेम है तभी वो प्रेम
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मेरे में कामनाएं भी हैं, वासनाएं भी और हैं। मैं तो सच बोल रहा हूं।
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इच्छाएं हैं सब कुछ है जो एक आम आदमी में होता है और थोड़ा ज्यादा ही होगा मेरे को।
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हां सच बोलता मैं हां इसके बाद भी आपको प्रेम है तब वो प्रेम है।
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मेरे को तो है।
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ये साला ये चाहिए नहीं। बुद्ध पुरुष वाला प्रेम है ना
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फिर उसमें बहुत सोच समझ के बोलना पड़ता है परमात्मा वाला ही बात करना पड़ता है ना
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यार फिर एक एक चीज मैं हूं ऐसा वाला वो मेरे को मजा नहीं आता आजकल क्यों राहुल
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तो मेरे से उम्मीद मत रखना कि भैया परमात्मा ही बोलेगा हर समय।
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जीव भी बोलेगा ना यार।
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प्रेम में आदमी खो जाता है यार। ये सब हिसाब किताब थोड़ी ना लगाता रहता। सामने कौन है वाला?
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भगवान हम लोग भी दिन भर आपका इंतजार करते रहते हैं इसलिए थोड़ी आप आएंगे तो सत्संग करेंगे ऐसा नहीं है चाहते हैं सब वो
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दरवाजे पर खड़ा हो जाता है तो तू पागल दरवाजे में क्यों खड़ा रहता था?
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उसका प्रेम है। मैं समझ रहा हूं। बात सत्संग की नहीं है। मैं जान रहा हूं।
59:14
ऐसे बैठते हो मेरे साथ। अच्छा मेरे को भी अच्छा लगता है। आनंद आता है।
59:22
मैं अब इससे पूछो ना। मैं घर में भी रहता हूं। इसको दिन में चारप फोन कर देता हूं। विराज को आपको एक दो कर देता हूं।
59:30
मेरा भी तो ध्यान इधर ही रहता है।
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फिर किसी सत्संगी को लगा देता हूं। दो चार बातें हो जाती हैं।
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थोड़ा सा सुन लेते हैं। क्या चल रहा है?
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ऐसा वैसा बढ़िया है बस
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हां प्रभु जी ऐसा मेरे को यह हो रहा है वो हो रहा है ऐसा फिर फोन में बात करो किसी से तो कुछ वो अपना बताता है उसकी कोई डाउट
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रहता है किसी का कुछ रहता है किसी का कुछ तो मैं भी बताता हूं। भीतर ही भीतर प्रेम बहता रहता है। ऊपर ऊपर बताते रहता हूं।
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बताना मेरे लिए गण रहता है। और सामने वाले के लिए ऐसा रहता है कि उसको बताना ही उसके लिए इंपॉर्टेंट है।
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उसको उसको समाधान चाहिए ना भाई। और मेरे लिए बताना गौ रहता है। मेरे से जो भी कुछ
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पूछता है या ऐसे भी कुछ बताता हूं तो वह ऊपर ऊपर है मेरे लिए।
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भीतर भीतर प्रेम बहता रहता है। वह मेरे लिए बहुत आनंद आता है।
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हेलो
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याद रखना प्रेमी हमेशा राजी राजी होता है। हर चीज में राजी होता है।
1:02:25
नाराज कभी नहीं होता। हर चीज में राजी।
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नाराजगी वहां रहती नहीं। नाराजगी।
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तो अब चलेगा क्या? भटका दूंगा तो दौड़ेगा।
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अब तगड़े से भटकाने वाला हूं। अब मैं पहुंच तो सब गई है।
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अब पहुंच के करोगे क्या? वो शादी ठीक नहीं है ना? भटकना ठीक है।
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नॉर्मल क्या होता है? कोई किसी की इच्छा के आड़े आ रहा है। वह उसका शत्रु हो जाता है।
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और कोई किसी की इच्छा में सहयोगी है तो उसका प्रेमी हो जाता है। नॉर्मल प्रेम जिसको अपन कॉमन प्रेम समझ लेते हैं।
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हम हम
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सुबह अब विश्राम दे वाणी को अगर आप लोग की आज्ञा हो तो
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प्रेमी तो फट से नहीं खोलता है ना और हां भी बोल देता तो आप लोग कुछ नहीं बोल रहे हो।
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अब सोना तो नहीं। अरे क्यों नहीं सोना है भाई?
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अब वैसे ही लाइट बंद है। यहां तो इन लोग के यहां लाइट थोड़ी ना बंद है।
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ये Google मीट वालों के यहां
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ठीक है विश्राम दो रानी को नहीं तू तो सोता ही रात को 33 बजे तक है।
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हां?
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चलो सबको प्रेम प्रणाम भाई शुभ रात्रि
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प्रेम प्रणाम कहां से कट होगा कर दूं?
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हां बहुत सारा प्यार प्रेम प्रणाम।