Prabhu Shree
0:20
मैं तो अपने जीवन को देखता हूं ना पास्ट में।
0:26
हालांकि वह पास्ट मिट गया है फिर भी है।
0:36
और मेरे को ऐसे बैठाल के कोई बताने वाला नहीं था।
0:43
हां इतना कॉन्फिडेंस से या इतनी क्लिटी से
0:51
इसका 10% क्लिटी से भी कोई बताने वाला होता मेरे लिए उतना भी बहुत होता मेरे पास था
1:01
ही नहीं और जब इस अस्तित्व
1:13
के रहस्यों में आप अकेले उतर जाते हो तो बहुत बहुत कठिन होता है। उस समय बड़ा कठिन
1:22
और कुछ समझ में आता ही नहीं है।
1:33
बस आप मार्ग चेंज करते रहते हो।
1:43
शास्त्र चेंज करते रहते हो और जिंदगी के साल कटते जाते कटते बुढ़ापा
1:53
करीब आता है और तकलीफ यह कि आप हर बार अपने आप को वहीं
2:01
पाते हो ना कोई आप में खास बदलाहट दिखेगी
2:08
ना कुछ होगा फिर आपको ऐसा लगने लगेगा यार यह अध्यात्म ही गलत तो नहीं है।
2:24
कहीं ये अध्यात्म एक नाटक तो नहीं है। या सद्गुरुओं ने जो भी कहा है कहीं यह भ्रम तो नहीं है।
2:41
जब अपनी बात नहीं बनती तो हम दूसरों को ही गलत ठहराते ना। ऐसा होता है सबके साथ। मेरे साथ भी होता था।
2:57
तो कोई था ही नहीं।
3:10
पता नहीं फिर भी कैसे क्या कब ये सहज
3:20
हो गया मेरे लिए
3:30
अभी हो गए आप
3:55
बहुत मुश्किल है। ऑलमोस्ट असंभव है।
4:03
अकेले इसको इस यात्रा को तय कर पाना वो तो आप बाद में श्योर होते हो कि जहां
4:12
जाना है वहां बैठा हूं। वो तो आप बाद में श्योर होते हो ना। शुरू में तो आपके लिए यात्रा ही है।
4:22
कंफ्यूजन है 10 किस्म के भगवानों में कंफ्यूजन। फिर अस्तित्व में
4:30
फिर मतलब बहुत बड़ा जंगल है अध्यात्म
5:00
और आप बहुत कुछ करते हो उसके बाद भी आपको वो सुकून नहीं मिलता।
5:09
कई साधनाएं, कई ध्यान, मंत्र और जो भी
5:18
उसके बाद भी आपको वो सुकून नहीं मिलता जो आपको चाहिए तो और एक बेचैनी पैदा हो जाती है जीवन में
5:27
और समय जाता जा रहा है, जाता जा रहा है।
5:48
तो माया मिली ना राम हर किसी के जिंदगी का यह परिणाम रहता है।
5:57
अगर सही गाइड ना मिले तो ऐसा ही रहता है। बता रहा हूं।
6:05
स्ट्रेट है यह ना माया मिलती है ना राम माया मिल मिल के भी नहीं मिलती
6:14
राम नहीं मिल के भी नहीं मिलता
6:24
तुम लोग को अभी पता नहीं है तुम लोग क्या सुन रहे हो हां
7:12
आज तो किसी की शक्ल नहीं दिख रही है। सब गायब हैं। हां।
7:20
ठीक है रहने दो रहने दो। जिसको ऐसा
7:30
आप जो बोले मैं कैसे महसूस कर पाया क्योंकि मेरे पास कॉल्स आते हैं।
7:37
हम कई बार जो है बुजुर्ग लोगों के भी फोन आते हैं। बुजुर्ग लोगों के भी फोन आते हैं। हम
7:45
तो उनकी पीड़ा जो है वो जैसा आप बोल रहे हैं ना भगवान हम तो वो व्यक्त करते हैं कि अब अक्षम भी हो
7:55
गए। अब कहीं जा भी नहीं सकते हम और कहां-कहां भटके करके उनका भी पूरा एक जर्नी रहता है
8:05
तो मेरे को कई बार ऐसा लगता है कि आपने जो भी जर्नी की अकेली की लोन बैटल था आपके लिए
8:13
अकेला युद्ध की तरह जो आपने किया पूरा तो हम लोग के लिए ही किया भगवान आपको प्रिपेयर ही इसीलिए की कि हम लोग जो है ना
8:22
उस पीड़ा से ना गुजरे करके ही हम आपके सम्मुख बैठे हैं।
8:29
ऐसा महसूस होता है मेरे को कई बार ऐसा भाव रहता है। हम
8:41
वो व्यक्तिगत रूप से तो मेरे को तो एक दृढ़ विश्वास था। अंतरात्मा बोलती थी कि
8:48
ज्यादा कुछ करो मत। अस्तित्व तुमको खुद ही जो है सही जगह पहुंचा देगा। क्योंकि मेरा
8:54
जर्नी वह इधर-उधर नहीं हुआ तो नहीं कर पा कितना पीड़ादायक है या हम हम और कितना लंबा होता है
9:03
क्योंकि आप डायरेक्ट मेरे पास आया ना फर्स्ट टाइम वो अच्छा हो गया पुरानी धारणाएं नहीं है बस थी ही नहीं
9:10
वो सबसे बेस्ट हुआ नहीं तो कई लोग ये वो गुरु ले आते हैं तो मेहनत और करनी पड़ती
9:18
है
9:27
देख ही नहीं पाते लोग नहीं देख पाते मालूम बीच में पुणे गया तो लोग वाइट रोप जाते थे
9:41
आप बताइए मैं मौजूद हूं वहां
9:47
दो चार लोग तो सत्संग के बीच में उठ के वाइट ट्रूप जाना है बोले और गए ऐसे ऐसे लोग हैं।
10:00
ठीक है।
10:08
गुजरे हुए कलों से इतनी मोहब्बत होती है ना लोगों को।
10:13
फिर गुजरे हुए मास्टरों से तो और ज्यादा होती है।
10:19
जिंदा मास्टर शरीर लगता है। क्या करोगे?
10:25
वो बॉडी दिखता है। व्यक्ति ही दिखता है।
10:35
इनमें उनका भी कसूर नहीं है क्योंकि मेरी माया उसको देखने नहीं देती।
10:44
माया जो अधिकारी है उसी को देखने देती है।
10:49
हर किसी को देखने नहीं देते।
10:55
बहुत लोग रहे जैसे ओशो के साथ भी कई लोग रहे तो कुछ लोग
11:06
मतलब वो देख नहीं पाए।
11:11
वहां भी गया था देवलोक में मैं कहां गया था क्या नाम है जगह
11:18
मैसूर वहां जो स्वामी जी थे क्या नाम है उनका चैतन्य भारती जी
11:28
उन्होंने भी देखा एक हद तक बट नहीं देख पाए वो
11:35
उन्होंने वेलकम ऐसा किया कि ओशो ही आए बट फिर भी नहीं
11:46
बहुत मुश्किल है।
12:14
सबको माया घेरी लेती है।
12:42
मेरे को देख पाने के लिए नग्न आंखें चाहिए।
12:49
कोरी आंखें धारणाओं से रहित
12:56
पास्ट और मान्यताओं से रहित नेगेट आइज
13:05
वो तुरंत देख लेगा मेरे को
14:03
पहचान होने में भी कई लोग अपने 202 साल खराब कर देते हैं।
14:09
होता है उम्र गुजर जाती है।
14:21
ओशो बोलते थे ना का कारवा गुजर गया गुबार ढूंढते रह गए
14:30
होता ही है ऐसा लगा रहता है
15:18
कई जैनिज्म से आते हैं। कई कई जगह से आते हैं मेरे पास बट वो देख ही नहीं पाते।
15:28
हां अब वो लहसुन और प्याज
15:38
के बगैर वाला खाना मिलेगा तो ही खाएंगे बोलते तो ही यहां रहेंगे बोलते
15:48
क्या समझाओगे इतनी धारणाएं और मान्यताएं भी तोड़ नहीं पाए तो क्या करेंगे
16:14
वह कोई महावीर खोजने आते हैं।
16:18
बुद्धिज्म वाले कोई गौतम बुद्ध खोजने आते हैं।
16:24
हां सबकी अपनी चॉइसेस हैं और पास्ट का एक बहुत
16:36
बड़ा बहुत बड़ी यादें हैं। यादों की बारात है
16:44
पूरी कि बुद्धा ऐसा होता है, वैसा होता है, ऐसा चलता है।
16:52
मतलब पूरा हम
17:02
पास्ट के चश्मे से वर्तमान को आप देख ही नहीं सकते। कि वर्तमान में क्या है?
17:12
पास्ट का चश्मा लगा के आप देख ही नहीं सकते। सामने नारायण भी क्यों ना बैठा हो आप नहीं देख सकते।
19:00
अब मेरे को पता है
19:10
कि इस बार भी कई लोग चूक जाएंगे हर बार की तरह।
19:21
फिर भी मैं आत्मा भगवान अपना प्रेम अपना कार्य करता रहता है।
19:32
हमारा काम हम करते हैं। तुम्हारा काम तुम करते हो।
21:04
मतलब आपको पता नहीं है अभी कि आप
21:14
आप कुछ भी कर लो, कुछ भी कर लो। यह संभव नहीं है।
21:21
आप सोचते हो ना बहुत रोओगे, नाचोगे, भाव में, मिटोगे बार-बार तो बात बनेगी। नहीं बनता। भावों से भी बात नहीं बनती।
21:35
गहराई आती है जीवन में वह एक अलग बात है।
21:50
बहुत मौन रहोगे, एकांत में रहोगे, भोजन त्याग दोगे, उससे कुछ हो जाएगा। कुछ नहीं होता भाई।
22:07
दिया जलाना है ना?
22:11
तो आग चाहिए
22:24
और कोई चीज काम नहीं आती।
22:49
और कहीं कोई दुनिया नहीं रोक रही है आपको कि आपकी परिस्थितियां,
22:57
आपका परिवार कोई इसमें बाधा नहीं बनता।
23:03
बचपन में मेरे को भी लगता था कि यार इतना विरोध और यह वो
23:13
एक लगता था यार ये तो घर वालों का ही सहयोग नहीं है।
23:29
और जब आप सच की तलाश में निकले हो और घर वाले ही
23:37
आपके विरोधी हो जाए तो कैसे करोगे?
23:45
बट वह लगता है विरोधी हुए हैं।
23:55
वह भी सहयोगी हो जाता है। उनका विरोध भी सहयोग हो जाता है।
24:02
अगर तलाश सत्य की ही है तो विरोध भी सहयोग हो जाता है।
24:58
हम
25:22
तो भाग्य की तरफ से कभी भी नाराज मत होना।
25:30
मीर दाद में पढ़े थे ना अपन। अच्छा भाग्य है।
25:44
कभी भी निराश मत होना भाग्य की तरफ से
26:01
तो सद्गुरु तुमको हताश बस होने नहीं देता।
26:06
बाकी तुम तो वही हो देर जान ही लोगे खुद को बस सत्संग में जीतेजीते बस तुमको निराश
26:16
होने नहीं देता हताश होते नहीं होने नहीं देता थोड़ा डांटता है थोड़ा प्यार करता है इसी
26:24
बहाने कुछ चलता रहता है और वो अग्नि से वह दूसरा दिया भी जल जाता
26:32
है अपने आप
26:55
बहुत ज्ञान की भाषा में बोलोगे तो जले हुए दिए का बोध हो जाता है। वो सब टेक्निकल लैंग्वेज है बट
27:04
एक फ्लो रहता है बोलने का बट संभव नहीं है। किसी भी ढंग से किसी भी
27:14
तरीके से कितने बार भी आप सरेंडर कर दो, किसी के सामने भी कर दो कुछ नहीं होता।
27:23
हां।
27:26
बहुत ही बहुत ही शार्प गाइडेंस चाहिए। बहुत शार्प।
28:29
मैं तुम लोगों की लॉटरी हूं। याद रखना।
29:26
इधर किसी की शक्ल ही नहीं दिख रही है विराज देख तो ये फालतू वीडियो कॉल करते हैं हम लोग बंद
29:36
करेंगे इसको
29:43
हां देखो कुछ सेटिंग कर लो चाहे
29:51
प्रभु
30:08
प्रणाम
31:23
ओके
31:40
ठीक है बस विराज करेंगे स्टॉप बस थोड़ी देर में
31:51
प्रणाम प्रणाम जी हां हम अच्छे हैं।
32:08
आप बताइए
32:47
आवाज प्रणाम है। सबको प्रणाम है।
33:02
हां
33:59
तो यह असंभव फिर कब संभव होता है?
34:11
जब आप अपने से नीचे रखते हो असंभव को भी
34:38
और बहुत श्रद्धा निष्ठा से तो शुरू से जीना पड़ता है।
34:47
भरोसा ही नहीं है तो आप टिक नहीं पाओगे।
36:48
मां एक बच्चे को जन्म देती है तो 9 महीने का धैर्य रखती
36:58
कॉलेज और स्कूल की विद्याओं के लिए जिससे आप अपना पेट भरते हो
37:07
घर बनाते हो उसके लिए 20 साल देते हो 15 साल देते हो
37:14
बाहरी विद्या के लिए कितना धैर्य चाहिए होता
37:23
और ब्रह्म विद्या के लिए आत्मज्ञान के लिए क्या समय देते हो आप?
37:43
गिरी से गिरी हालत में अपना पूरा जन
37:51
तो बनता है लोएस्ट
38:00
अगर ब्रह्म विद्या आत्म बोध आत्मज्ञान एक्चुअल में आप
38:10
चाहते हो उससे से कम नहीं उतना धैर्य तो रखना पड़ता है।
38:38
और बार-बार आपको बताया जाएगा फिर भी कुछ नहीं होगा। कुछ मिलेगा नहीं
38:46
और ये भी सच है फिर भी धैर्य रखना पड़ता है
40:04
अब फिर लास्ट में आपको कहा जाता है अप दीपो भव
40:11
अपने दिए स्वयं बनो, खुद बनो
40:24
और सब सुनना पड़ता है। डिसाइपल को सब सुनना पड़ता है। सब सहना पड़ता है।
40:34
उल्टा बोले मास्टर तो उल्टा, सीधा बोले तो सीधा।
40:40
कई बार सहना पड़ता है, कई बार प्रेम रहता है तो वह भी अच्छा लगता है। यानी बहुत सारी लेयर्स हैं।
40:54
और फिर भी मास्टर तुमको बोलेगा कि तुम अभी भी रॉन्ग हो और पूरे के पूरे रॉन्ग हो।
41:10
एक बार बस वह बोलता है। यू आर राइट।
41:18
केवल एक बार बोलेगा। वो समय हो सकता है आए, हो सकता है ना आए।
41:25
उतना दांव तो खेलना पड़ेगा।
41:44
उतना पेशेंस उतना धैर्य उतना प्रेम बुद्धि का भी उपयोग होता है। बुद्धि से
41:54
पार भी जाना होता है। सब चलता है इस बीच और यह सुंदर भी है।
42:22
और आपको लगेगा इतना सब के बाद भी आपको कुछ नहीं मिलेगा।
42:28
इससे अच्छा तो दुनिया यहां कम से कम कुछ तो मिल जाता है। है ना?
42:38
एक कॉमन सोच में ऐसा चलता है ना। पानी पिलाओ।
42:45
इस सब के बावजूद आप बोलते हो ना कुछ समझ में आएगा, ना कुछ जानने में आएगा, ना कुछ मिलेगा।
42:52
ऐसा ही है।
43:01
आप वह डायलॉग भी सुन लेते हो। यह मिला ही हुआ है प्राप्ति की प्राप्ति। बट उससे आपको वो टेस्ट नहीं आता।
43:09
है ना? वो तो एक डायलॉग है ताकि आप भी किसी को बोल सको। यार ये मिला ही हुआ है।
43:16
ऐसा करके आपकी भी जिंदगी चलती रहे। उससे कुछ नहीं होता है डायलगों से।
43:24
थक गए वेद, पुराण, उपनिषद, गीता, रामायण, सारे संत सबको आप लोगों ने थका दिया है।
43:35
हार चुके हैं वह आपसे।
43:42
प्रेम है तो आ जाते हैं बार-बार बट हार तो चुके।
43:47
वो सरेंडर कर दिए। भैया आप लोग क्या करोगे?
43:56
हकीकत है ये। हां।
44:01
इतनी मेहनत पास्ट उठा के देखो। हर संत ने, उपनिषद ने कितनी मेहनत नहीं की है यार।
44:10
वो भी आनंद से की है।
45:51
बदले में संतों को मिलता क्या है? कोई जहर देता है।
46:05
क्या नहीं देता यह समाज संतों को?
46:17
संत जो अपना सर्वस्व दे रहा है आपको उसको क्या देता है यह समाज
46:32
ये समाज गिराता है उसको तोड़ता होता है
46:40
कि तू भी हमारी तरह ही है। स्वीकार कर ले।
46:45
हां। देखना चाहते हैं। मेरे को देखना चाहते हैं कई लोग। हां।
46:56
लेकिन यार मैं तो बोल रहा हूं ना मैं तो तुम्हारी तरह ही हूं।
47:03
मेरे में कोई विशेषता नहीं है।
47:07
बट उनका तुम्हारी तरह और मेरा तुम्हारी तरह जमीन आसमान का फर्क
47:24
है। ये सब चलता रहता है।
48:22
लाइट बंद हो गई। ओके तो यह कैसे चल रहा है?
48:30
इन्वर्टर
49:10
तो कुछ साल बिता लो मेरे साथ है ना कुछ दिन
49:17
अरे कुछ पल
49:25
मेरे साथ मेरे पास मेरे को गले लगा के मेरे को पास बैठ के एहसास करो।
49:40
यह ठीक है टेक्नोलॉजी या जो भी है ये सब टेंपरेरी है ये।
49:52
और जब भी आओ तो अपने पुराने मास्टरर्स, पुरानी धारणाएं, पुरानी मान्यताएं सब छोड़ के आना।
50:03
खाली होके आना। बस आ जाना।
50:12
इस बार मत चूक जाना मेरे से।
50:20
मत चुक जाना। बहुत प्रेम है मेरा तुमसे।
50:31
अतिशय प्रेम है।
50:42
मैं कोई लेनदेन नहीं करूंगा।
50:52
कि तुमसे कुछ छीन लूं, तुमको कुछ दे दूं।
50:59
बस तुमको जी भर के प्यार करूंगा।
51:05
और तुमको पता लग जाएगा यार कि मैं ही वह परमात्मा हूं। इतना प्यार केवल परमात्मा से किया जा सकता है।
51:21
और मेरे को कुछ आता भी नहीं है।
52:00
अपनी उम्र व्यर्थ में ना गवाऊं। यह समय बहता जाता है।
52:14
रुकता नहीं है किसी के लिए।
52:32
कोई वादा नहीं है इनलाइटेटनमेंट देने का, आत्मज्ञान देने का या परमात्मा से मिलाने का।
52:44
हां इतना वादा जरूर है जरूर है
52:52
कि मेरे साथ बैठ के जो पल भी आप बिताओगे ना
53:01
वो जिंदगी के सबसे खूबसूरत पल होंगे। सबसे खूबसूरत यह वादा है।
53:12
मेरा वादा है
53:29
और क्या पता हम ना रहे क्या पता तुम ना रहो
53:43
और देर मत करो
53:50
और बहाने मत खोजो ना आने के है ना
53:59
कब तक कब तक बहानों का सहारा लेते रहोगे
54:17
तुम्हारा स्त्री होना, पुरुष होना अगर आप तुमको रोक देता है
54:25
तो क्या करोगे उस पुरुष का और उस स्त्री का?
54:33
तुम्हारा किसी और देश में होना अगर तुमको रोक रहा है तो क्या करोगे उस देश को?
54:50
और कोई तुमको रोकता नहीं है मालूम। तुम रुकना चाहते हो।
55:00
तुम डरते हो कि यह मिटा ही देगा।
55:17
तुम्हारा डर स्वाभाविक है। मैं मिटा ही दूंगा।
55:30
मैं उस धोखे को मिटा ही दूंगा जिसको तुम मैं समझते हो और उस सच को दिखा ही दूंगा
55:39
जिसको मैं मैं कहता हूं
55:48
तो डर ले आ जाओ मेरे पास डर के साथ आ जाओ।
56:23
मैं तुमको पुकार रहा हूं मालूम मेरी पुकार
56:34
मेरा प्रेम है
57:18
अपने पुराने सालों से पूछो कहां हो तुम?
57:28
जितने भी साल तुमको हुए 30 40 50 जो पूछो कहां हो तुम
57:44
आने वाले साल भी कहीं नहीं है।
57:49
छोटीछोटी चीजों के चक्करों में वास्तविकता
57:57
से मत चूक जाना
58:07
पर कोई फर्क नहीं पड़ता तुम जय कृष्ण मूर्ति के साथ रहे ओशो के साथ रहे
58:16
महाराज क्या नाम है उनका निस्गदत्त महाराज के साथ रहे
58:26
रहे वह सुंदर है बट उससे फर्क नहीं पड़ता।
58:35
जब तक तुम अस्तित्व नहीं हो पाए हो तब तक कोई फर्क नहीं पड़ता।
58:48
जब तक तुम तुम नहीं हो पाए हो तब तक कोई फर्क नहीं पड़ता।
59:09
धोखे मत दो खुद को।
59:27
इनके साथ रहना ही इन सपनों को ही तुमने अपना सच बना लिया है
59:41
कि खामोशों के साथ रहे हम निस्ग दत्त के साथ सत्संग किए हैं।
1:00:24
एक स्ट लगा के लोग घूमते रहते हैं।
1:02:25
देखो हर किसी के पास जिंदगी है ना और कोई भी जी पाता है।
1:02:39
आपके पास जो होता है आप उसको कचरा कर देते हो। आपके पास लाइफ है।
1:03:10
तुम सद्गुरुओं को भी कचरा कर देते हो।
1:03:20
जो मास्टर भी मिलता है ना तुमको तुम कचरा कर देते हो उसको।
1:03:29
बहुत इसलिए ना बहुत टफ हो जाता है। जो सहज हो सकता है ना वह
1:03:36
इसीलिए टफ होता है क्योंकि तुमको कदर नहीं है। अपनी भी कदर नहीं है ना लाइफ की।
1:03:55
हर जन्म में तुमने हर बार हर मास्टर को कचरा किया है। मालूम है?
1:04:07
तुम मास्टर नहीं हो पाए मतलब तुमने कचरा ही किया है। है ना?
1:04:53
तो अब बिल्कुल भी देर मत करना बता रहा हूं।
1:04:59
बस सीधे के सीधे मेरे पास आ जाओ।
1:05:12
बस मेरे पास आ जाओ।
1:05:42
और तुमको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। यह भी बता दे रहा हूं। 10 जगह मुंह मत मारना।
1:05:51
हर जगह केवल मेरी माया है।
1:06:01
बस चुपचाप आ जाओ मेरे पास।
1:06:29
इस बार और इस बार
1:06:43
चाहे कुछ भी हो जाए चूकना मत।
1:07:10
मैं सहज उपलब्ध हूं। सहज ही उपलब्ध रहूंगा।
1:07:17
मित्रवत
1:07:26
तुम भी मेरे लिए सहज उपलब्ध हो जाओ
1:07:36
तो इस सहजता का मिलन हो जाए।
1:07:51
वो पास आके ही संभव है। यह टेक्नोलॉजी वगैरह में
1:07:59
रस आता है बट वो एक अलग बात है।
1:08:09
जब प्रेजेंस से प्रेजेंस मिलती है।
1:08:35
जब एहसास का मिलन एहसास से होता है।
1:09:09
ओम मीटिंग पॉइंट जहां गुरु शिष्य खो जाते हैं एक दूसरे के
1:09:20
प्रेम में
1:09:42
वो इस पर संभव नहीं है।
1:09:48
टेक्नोलॉजी पे संभव नहीं।
1:10:58
बस सबको प्रेम प्रणाम है।
1:11:02
अच्छा
1:11:27
मैं जब तक महसूस ना होने लगूं तब तक तुम मुझसे मिले ही नहीं हो।
1:11:40
मैं महसूस होता हूं तुम्हारे अंदर।
1:11:44
तुम में तुम होकर
1:11:59
मैं प्रत्यक्ष महसूस होता हूं।
1:12:04
प्रत्यक्ष
1:12:35
प्रेम प्रणाम