Prabhu Shree
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ओम
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[संगीत]
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[संगीत]
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[संगीत]
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प्रणाम भग प्रेम प्रणाम भगवन मैं अभी कटनी आई हुई हूं अपने घर
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भगवन मैं बेटे के साथ भोपाल में रहती हूं तो अभी छुट्टियां है भगवन तो मैं आई हूं तो इधर मैं छह सात दिन तो मैं ठीक थी भगवन
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अभी जैसे मैं सुबह 4:00 बजे मेरी नींद खुलती है भगवन तो मुझे बहुत डर लगता है बहुत ज्यादा डर डर लगता है और मुझे जैसे
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कोई कह रहा है कि बस छह सात दिन रह लिए अब जाओ अब इधर से तुम जाओ इधर से और मैं इधर अकेली हूं भगवान मेरे पेरेंट्स नहीं है
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मैं अपने मतलब मम्मी पापा के यहां रहती हूं भगवान हम तो अभी मैं यहीं रह रही हूं मैं सिंगल पेरेंट हूं और बच्चे के साथ अभी यहां हूं
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तो वो जब भय इतना हो जाता है भगवान कि मैं नाम जप भी नहीं कर पाती हूं तो आप मुझे बोले थे एक बार डेढ़ महीने पहले कि तुम
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अखंड नाम जप किया करो तो मैं करती हूं भग मैं हूं और जय श्री राम तो इतना ज्यादा डर
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जाती हूं भगवान मैं सुबह 4:00 बजे से 8:00 बजे तक ये जो पीरियड है यहां पे कटनी में भग मैं मेरे मुंह से
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मैं हूं ही निकलता है तो इधर पूरा कुछ भर जाता है ब्रेन से ले दिल में पूरा जैसे कुछ भारी हो गया मेरे डर के मारे भगवान
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नाम नहीं निकलता है तो मैं मेरा मार्गदर्शन कीजिए कि मैं डरू नहीं मुझे पता है नहीं नहीं पता चलना अलग चीज होती है।
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जैसे आग में हाथ डालने से हाथ जलता है। यह पता
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चलना अलग है। और किसी ने हाथ डाला है और जला है। यह पता चलना अलग है।
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तो आपके लिए उत्तम यह है कि डर के साथ थोड़ा सा रहो।
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डर से मत डरो।
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डर से थोड़ा संबंध बनाओ। उसके साथ उठो, बैठो और उसको थोड़ा समझो। उसको थोड़ा गले
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से लगाओ कि मेरे डर जो तू मेरे पास बार-बार आ रहा
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है जरूर कोई राज होगा।
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मैं अभी समझ नहीं पा रही हूं। भले बट जो तू बार-बार आ रहा है ना तो अब तू मत
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जा। अब तू मेरे साथ ही रह। अब दोनों साथ में जिएंगे साथ में मरेंगे।
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तो डर को थोड़ा सा प्रेम दो।
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डर से डरो मत। डर को थोड़ा प्रेम दो।
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तो आप पाओगे भय से ही निर्भयता के फूल खिलने लगे।
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बट वो भय के अंगीकार से खिलते हैं।
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कि इस डर के साथ सुनो सुनो हड़बड़ी मत करो। हम क्या चाहते हैं? कोई भी एनर्जी
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भय है, क्रोध है या कुछ भी है तुरंत हट जाए।
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जब तक उसके रहस्यों को आप नहीं समझोगे, उसके साथ उठोगे, बैठोगे नहीं, अवॉइड करोगे।
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है ना? तो वो नहीं बनेगा ना।
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जैसे अवॉइड होता है ना कबूतर के सामने जैसे बिल्ली आ जाती है तो कबूतर आंख बंद कर देता है।
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कबूतर क्या सोचता है? अब बिल्ली नहीं है और बिल्ली उसको खा जाती है। है ना? ऐसा कुछ है हिस्टोरिकल।
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तो हम वैसे ही करते हैं। कि बिल्ली नहीं है।
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भगवान का नाम ले लो। मैं हूं मैं हूं। बोल लो अरे बिल्ली है और मैं फेस करूंगा या
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करूंगी डर ही तो है और क्या है आता है और चले भी तो जाता है बेचारा
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18 घंटे या आप 4 घंटे बोल रहे हो तो 20 घंटे आपके जीवन में डर नहीं रहता 4 घंटे
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ही तो बेचारा रहता है तो 4 घंटे आप भी उसके साथ थोड़ा रह लो
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उसको थोड़ा थोड़ा जानो थोड़ा समझो उससे थोड़ी मैत्री बनाओ
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तो उसके साथ रहोगे ना डर के साथ रहने से ना डर खुद ब खुद हटने लगता है और निर्भयता
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आने लगती है देखा जाएगा जो भी होगा ऐसे वैसे भी नहीं जा रहा है ना डर तो क्यों ना
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हम उसी के साथ रहना सीख लें अरे यार होता है ना अपने घर में कोई बदमाश
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है। अपने घर का ही मेंबर है। अपना ही बेटा है, बच्चे हैं या कोई भी है। तो हम क्या
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करते हैं? भगा देते हैं उसको या हम भाग जाते हैं क्या? उसके साथ जीना सीख लेते हैं ना।
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तो ठीक है ना? क्या बुरा है? जीना सीख लो।
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और कुछ ही समय में आप रिजल्ट पाओगे कि भय जाने लगा।
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भय का अस्वीकार ही बड़ा भय है।
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और भय का स्वीकार ही भय के साथ जीना ही निर्भयता है।
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आप क्या सोचते हो जो बड़े-बड़े युद्ध होते हैं जो लड़े गए हैं जो अर्जुन लड़ा या अपने भी
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जो भी लड़े तो क्या उनको भय नहीं होता होगा?
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भय होता है। वो भय के साथ रहते हैं और लड़ते हैं।
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जो बड़े से बड़े क्षत्रिय हुए हमारे देश में सम्मानीय हुए।
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भय होता है। सबको होता है। लेकिन वो भय के साथ रहते हैं। युद्ध करते हैं।
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हमारे जो बॉर्डर में रहते हैं सेना के जिसके कारण हम बड़ा सेफली जी रहे हैं यहां
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पर तो उनको भी भय नहीं रहता क्या रहता है
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लेकिन भय के साथ जीते हैं वो वो महासाहस अदम्य साहस
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और सोचो जो आर्मी में रहते हैं कब कौन सी गोली बम बारूद
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अगले क्षण का ठिकाना नहीं है और देश पर समर्पित होकर जी रहे हैं। हमारे जिंदगी के
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क्या भय है यार? एक घर में बैठे हैं एक मानसिक भूत प्रेत या कुछ छोटे-छोटे भय
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वहां तो जिंदगी का ठिकाना नहीं है अगले पल का।
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तो वो कैसे जीता होगा वो? उसको भी भय हो रहा है। वह जीता है ना वहां पर भय के साथ रह के जीता है। फेस करता है। अपने देश की रक्षा करता है।
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इतने आर्मी वाले हैं और उनके कारण हर कोई सेफ जी रहा है। चलो इसी देश की बात कर लो।
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तो हमारे भय उनके सामने क्या है? तुलना करो तो।
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कुछ नहीं है ना आप तो अपने घर ही में बैठे हो क्या और आपके जो भी छोटे-मोटे शत्रु होते हैं
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जो छोटे-मोटे शत्रु छोटे-मोटे ही है ना आपकी जान तो नहीं ले रहे हैं थोड़ा निंदा स्तुति कर रहे हैं और क्या है
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तो डर से मत डरो है ना डर के साथ जियो देखा जाएगा इतनी निर्भयता रखो कि डर के साथ जी सको।
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अच्छा बाकी सब सारी बातें अपन साइड करते हैं। मैं आपको बताता हूं मैं भी डरता हूं।
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मैं अपनी बता रहा हूं। आप लोग मेरे को बड़ा मास्टर गुरु ये वो जो भी समझते होगे मेरे को भी डर लगता है यार।
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मेरी बॉडी में भय तो रहेगा ना। कैसे नहीं रहेगा?
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यहां सांप आ जाए तो मैं जंप मारूंगा ना यार कि मैं ऐसा बैठे रहूंगा मूर्ख जैसे
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आंख में कोई कीड़ा जाएगा तो मेरी आइज भी बंद होगी ना मैं कोई पत्थर थोड़ी ना हूं
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डर उतनी बुरी चीज नहीं है जितना आप समझते हो
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मैं भी डरता हूं अभी आप सुनो तो आज तो डर
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से दोस्ती करा ही देंगे। [हंसी] तो वही मैं कह रहा हूं। है ना? मेरे को भी भय होता है।
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मेरे को भय होता है। मैं कुछ बोल रहा हूं।
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मेरी बात को कोई और उसी बात को कुछ और समझ रहा है सामने वाला। उस गलत समझ के कारण वो
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कहीं और ना चले जाए। यह भय भी होता है मेरे को। हां।
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लेकिन मैं भय के साथ रहता हूं ना। जीता हूं।
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उससे घबराता नहीं। भय से भयभीत नहीं होता मैं। बस जीता हूं भय के साथ।
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और जब तक शरीर है तब तक भय रहता ही है।
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क्योंकि शरीर को अपनी रक्षा करने का अधिकार है।
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समझ रहे हो? आप कोई एकदम पत्थर नहीं हो जाओगे कि आपको भय ही नहीं होगा।
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हां आत्मा के तल पर मैं हूं के तल पर कोई भय होता ही नहीं है। वह बात परम सत्य है।
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मैं हूं मैं तो शरीर ही नहीं है तो भय कहां से होगा?
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वहां तो सिक्योरिटी जैसी कोई चीज ही नहीं है ना।
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लेकिन दैहिक तल पर जो है तो है। उसके साथ जीना सीख लो।
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सोचो ना जो युद्ध में जाते हैं या बॉर्डर में रहते हैं उन लोग कैसे रहते
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होंगे यार हमारे जीवन में घर है लग्जरी है मित्र हैं सब हैं
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क्या यह धन्यवाद वाली बात नहीं है हमारे भय क्या है और छोटे-छोटे भय हैं
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यह मत हो जाए, वह मत हो जाए। तो भय से भयभीत मत हो।
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भय से मैत्री और भय के साथ रहो। ओनली फोर आवर और 20 आवर आवर तो आपके पास भय नहीं है ना।
12:10
4 घंटे जो भय है उसके साथ रहो ना तो कल की मॉर्निंग
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अपने भय का वेलकम करना जो 4 से आठ है आपका बोलना आ यार साथ में चाय पिएंगे या आप
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कॉफी पीतेगे तो कॉफी पिएंगे है ना साथ में योगा करेंगे साथ में
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प्राणायाम करेंगे और तू जाना मत बोलना अब मेरे को तेरे से दोस्ती करनी ही है।
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उसको एक अच्छे भाव से देखो। है ना? और उसके साथ रहो। उसको समझो, जानो, थोड़ा परखो
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तो वो जानते समझते उसी से निर्भयता आने लगती है। है ना?
13:00
और निश्चिंत रहो। क्योंकि भय ही तो है। और क्या है?
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आता है बेचारा जाता भी है।
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ठीक है। अच्छा अगर पेरेंट्स तो मुझे तो उनको मैं क्या बोलूं?
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पेरेंट्स यानी मम्मी पापा नहीं दुनिया में। हम
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तो आप जागते तो मम्मी कभी मां के बात
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मेरे मेरी अच्छा हूं बट मैं उनको हूं नहीं अब उनको मैं क्या बोलूं
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नहीं माता-पिता को प्रणाम करते हैं आपके प्रेम है आपका उनसे जिनके कारण वह दिख भी
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रहे हैं आपके भाव के कारण या जैसे भी उनको प्रणाम करो। है ना?
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कोई उसमें डरने वाली बात नहीं है।
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माता-पिता ही तो दिख रहे हैं। अच्छी बात है ना वो तो। हां।
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पॉजिटिव रहो। और बहुत सुंदर है ये सब।
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ओके।
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हां प्रेम प्रणाम प्रेम प्रणाम
14:35
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
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हां जी एनीबडी कितना प्यारा है यह डर
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[गला साफ़ करने की आवाज़]
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देखो ये डर नहीं होता ना तो लोग मकान ही नहीं बना पाते कितने सुंदर मकान बने सुंदर-सुंदर जो भी
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बना जीवन में भय के कारण बना है ना
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भय का पॉजिटिव साइड भी तो देखो यार अगर भय होता ही नहीं आप लाइक ए पत्थर होते
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पत्थर पड़े रहते हैं बाहर बड़े-बड़े पहाड़ पड़े हुए हैं उनको कोई भय नहीं है जो भी सिर फोड़ेगा उसी का सिर फूटेगा
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[हंसी]
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तो भय बहुत सुंदर है यार भय के कारण देखो क्या नहीं बन गया
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तो थोड़ा रहो करोगे तो उसके पॉजिटिव चीजों को भी समझोगे। भय के साथ रहने से समझ आता है ना।
16:00
मृत्यु से भय नहीं होता आपको तो आप धर्म की तलाश ही नहीं करते। अमृत की तलाश ही नहीं करते।
16:08
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
16:09
इसलिए आचार्य और मृत्यु कहा गया है।
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हां। उपनिषद में आचार्य मृत्यु कहा गया है। मृत्यु को भी आचार्य कहा गया है। गुरु का पद दिया गया है।
16:23
यमराज को गुरु का पद दिया गया है। नचता पूछता है ना यमराज से और फिर यमराज आत्मज्ञान देते हैं।
16:45
क्योंकि मृत्यु के पास में ही जिंदगी के राज छिपे रहते हैं।
16:52
हां माया के पास में ही परमात्मा के राज छिपे
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रहते जस्ट उसके पास में अचानक यहां मृत्यु आकर
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चली जाए कोई फायर कर दे गोली यहां से चली गई आपकी उस क्षण जो जीवन का आप अनुभव
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करोगे वह जीवन होगा जो आपको सहज में मिला हुआ है जिसकी आपको कद्र नहीं है।
17:27
तो मृत्यु का पास होना आपके जीवन का अनुभव कराता है। वो बुरा नहीं है।
17:37
माया का पास होना आपको भगवान का अनुभव कराता है। वह बुरी नहीं है माया। अंतत माया ही भगवान है। इस रहस्य को भी आप बाद में जानते हो।
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अरे हर कामना जो जो पूर्ण होती है वो निष्काम क्यों हो जाती है पूर्ण कामना
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क्या हो जाती है परमात्मा हो जाती है ना शांत हो जाती है ना यार आपकी जो भी कामना
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पूर्ण हुई वो शांत हो जाती है ना तो वो भी तो वहीं जा रही है।
18:22
माया के करीब में परमात्मा के सूत्र छिपे रहते हैं। लेकिन उसके लिए बहुत शार्प आइस चाहिए।
18:35
तो माया जो आपको लगता है कि उससे दुख हुआ, यह हुआ वो अच्छा हुआ ना तब तो आपकी नजर कहीं और गई।
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नहीं तो आप पढ़े रहते हो ऐसे ही।